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कोरोना वैक्सीन को लेकर राहुल गाँधी गढ़ रहे झूठ, फैला रहे भ्रम: मोदी-विरोध में कॉन्ग्रेसी राजनीति का Fact Check

पीएम मोदी का बयान, बिहार चुनाव में जनता से किया गया वादा और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी का बयान... इन तीनों को मिला कर और छेड़छाड़ कर राहुल गाँधी कोरोना वायरस के वैक्सीन पर राजनीति कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने गुरुवार (दिसंबर 3, 2020) को कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत सरकार के ख़िलाफ़ जनता को बरगलाने का ओछा प्रयास किया। उन्होंने जनता को कुछ हेडलाइनों के जरिए भ्रमित किया और मोदी सरकार पर सवाल उठाए।

अपने ट्वीट में उन्होंने तीन बिंदु बताए, जो एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न थे। उनके ट्वीट का उद्देश्य पूर्ण रूप से लोगों को कन्फ्यूज करने का था। सबसे पहले राहुल ने अपने ट्वीट में पीएम मोदी के 29 अक्टूबर को दिए बयान का उल्लेख किया, जिसमें पीएम ने कोरोना वैक्सीन सबको उपलब्ध कराने की बात कही थी। 

पीएम मोदी ने उस दौरान बताया था कि एक राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह को तैयार किया गया है ताकि वह वैक्सीन प्रबंधन को संभाले और इसका सही चार्ट तैयार करे। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि हर किसी को वैक्सीन मिलेगी, कोई भी भारतीय पीछे नहीं छोड़ा जाएगा। पीएम मोदी के इस बयान का मतलब था कि किसी भी नागरिक को वैक्सीन के लिए मना नहीं किया जाएगा।

उन्होंने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट करके कहा था कि सबसे पहले सरकार सबसे कमजोर और अग्रिम पंक्तियों के कार्यकर्ताओं की रक्षा पर ध्यान केंद्रित करेगी। बाकी देशों में भी इसी क्रम में काम हो रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया था कि कोरोना वैक्सीन का कार्य अभी भी चल रहा है और ट्रायल किए जा रहे हैं।

अपने इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा था कि आने वाले समय में पूरे देश को वैक्सीन दी जाएगी। हालाँकि वैक्सीन परीक्षण, उसके उत्पादन और टीका लगाने में आवश्यक टाइम लगेगा, यह पहले समाज के कमजोर वर्गों को दिया जाएगा और फिर अन्य नागरिकों को बाँटा जाएगा। उन्होंने इस बात को भी स्पष्ट कहा था कि जो वैक्सीन लेना चाहेगा, उसे उसके लिए मना नहीं किया जाएगा।

बयानों में इतनी स्पष्टता होने के बावजूद राहुल गाँधी अपनी राजनीति करने के लिए एक हेडलाइन या एक लाइन बताकर लोगों को बरगला रहे हैं। दिलचस्प यह है कि वह केवल इतने पर नहीं रुक रहे। वह इसे बिहार चुनाव से भी जोड़ रहे हैं और भारत सरकार के हालिया बयान से भी।

उनके ट्वीट में ये समझाने की कोशिश हुई है कि पहले कहा गया कि पूरे देश को वैक्सीन मिलेगी, फिर बिहार में कहा गया कि बिहार की जनता को मिलेगी और अब भारत सरकार कह रही है कि हर किसी को वैक्सीन नहीं मिलेगी। राहुल गाधी का पूछना है कि आखिर पीएम बताते क्यों नहीं कि वह किस बात पर स्टैंड ले रहे हैं।

राहुल गाँधी ने जोड़ा बिहार मेनिफेस्टो का मुद्दा और अधिकारी के बयान से की छेड़छाड़

भाजपा के वादों पर भ्रम पैदा करने के लिए राहुल गाँधी ने दो मुद्दों को साथ में जोड़ा। पहले पीएम का बयान और फिर बिहार चुनाव में जनता से किया गया वादा। दरअसल भाजपा ने बिहार चुनाव में जारी किए मेनिफेस्टो में जनता से कोरोना वैक्सीन का वादा किया था, जिस पर कॉन्ग्रेस ने ये कहना चाहा कि भाजपा तो सिर्फ चुनाव देखते हुए बिहार वालों को वैक्सीन देने के लिए कह रही थी, जबकि वास्तविकता में भाजपा का पक्ष बिलकुल साफ था कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आई तो वह लोगों को वैक्सीन मुफ्त में उपलब्ध करवाएगी।

इस बिंदु को भी अच्छे से समझने और जानने के बाद कि चुनाव में किए वादे कोई भी पार्टी सत्ता में आने के बाद पूरा करती है, राहुल गाँधी ने जनता के बीच भ्रम पैदा किया।

अलग-अलग बयानों को जोड़ने के बाद राहुल गाँधी ने भारत सरकार के हालिया बयान के साथ भी छेड़छाड़ की, जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने कहा था कि लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध टीका लगाने का कोई प्रयास नहीं किया जाएगा।

सरकार ने यह भी कहा था कि वह कोरोनो वायरस के खिलाफ पूरे देश में टीकाकरण नहीं कर सकती है। जिसका मतलब है कि सरकार के समर्थन से टीका पहले मुख्य समूह को दिया जाएगा जबकि देश के अन्य नागरिकों को स्वास्थ्य स्थितियाँ देखते हुए किसी भी अन्य मेडिकल प्रोडक्ट की तरह वैक्सीन खरीदने की जरूरत पड़ सकती है।

अब ऑपइंडिया से बात करते हुए सरकारी सूत्रों ने सचिव के बयान पर कहा है कि उसे गलत तरह से पेश किया गया। अधिकारी केवल अपना बयान अनिवार्य टीकाकरण के संदर्भ में दे रहे थे। यहाँ बता दें कि वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा था, “यह एक लोकतंत्र है। यहाँ तक ​​कि अगर आप प्राथमिकता समूह में हैं और संवेदनशील हैं, तो भी आपको टीका लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।”

मोदी सरकार की वैक्सीन पर नीति और राहुल गाँधी के प्रयास

गौरतलब है कि मोदी सरकार लगातार एक पॉलिसी पर काम कर रही है, जिससे देश के हर कोने में वैक्सीन को पहुँचाया जा सके। वैक्सीन कैंपेन चलाने में पहले केंद्र सरकार का फोकस दो चीजों पर है। एक, वैक्सीन बनते ही हर किसी को टीका मिले और कोई इससे अछूता न रहे। दूसरा- वैक्सीन सिर्फ उस तबके के लिए फ्री हो, जो कमजोर हैं और बाकी सबको इसके लिए कुछ पैसे देने पड़ सकते हैं।

इस बात पर ध्यान दीजिए कि वैक्सीन को जनता के बीच फ्री में मुहैया कराना या उनसे राशि लेना सिर्फ राज्य सरकार की इच्छा पर है। राज्य सरकारों पर इसका जिम्मा होगा कि वह केंद्र सरकार से वैक्सीन लेकर उसका फायदा जनता को फ्री में पहुँचाए या कुछ पैसे लेकर। अगर राज्य सरकार जनता को फ्री में वैक्सीन देना चाहेगी तो उन्हें उसके लिए राज्य के खजाने से उसका फंड देना होगा।

ऐसे में दुर्भाग्य यह है कि राहुल गाँधी को कौन और कैसे समझाए? वह हर स्पष्टीकरण के बाद भी लगातार लोगों को भ्रमित कर रहे हैं और हैरानी तो इस बात की है कि जब पूरा देश कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहा है, तब राहुल गाँधी जनता को बरगलाना चाहते हैं और अपने झूठे दावों से जनता में भय पैदा करना चाहते हैं। उनके लिए ऐसे अवसर पर भी अपनी राजनीति पहली प्राथमिकता है।

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