Homeराजनीतिमहागठबंधन ने वाराणसी से बदला उम्मीदवार, BSF से बर्ख़ास्त तेज बहादुर यादव को टिकट

महागठबंधन ने वाराणसी से बदला उम्मीदवार, BSF से बर्ख़ास्त तेज बहादुर यादव को टिकट

तेज बहादुर यादव को बड़े स्तर पर विपक्ष का समर्थन मिलने की बात तभी से चल रही थी जब हाल ही में उन्होंने आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह से मुलाक़ात की थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ कथित रूप से कमज़ोर प्रत्याशी देने का दबाव झेल रहे महागठबंधन ने वाराणसी से अपना उम्मीदवार बदल दिया है। अब तक निर्दलीय ताल ठोक रहे ताज बहादुर यादव को इस क्षेत्र से सपा-बसपा महागठबंधन का उम्मीदवार बनाया गया है। तेज बहादुर यादव पहले बीएसएफ के जवान थे, जहाँ से उन्हें निकाला जा चुका है। उन्होंने वहाँ दिए जाने वाले भोजन को लेकर वीडियो बनाया था और उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया था। उनके ख़िलाफ़ 2 मोबाइल फोन लेकर ऑपरेशनल ड्यूटी पर जाने और भोजन की गुणवत्ता को लेकर ग़लत अफवाह फैलाने का मामला साबित हुआ था, जिसके बाद उन्हें निलंबित किया गया था।

वाराणसी से अजय राय को कॉन्ग्रेस ने टिकट दिया है। अजय राय पिछले लोकसभा चुनाव में भी नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ उतरे थे लेकिन उन्हें तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था। तेज बहादुर यादव को बड़े स्तर पर विपक्ष का समर्थन मिलने की बात तभी से चल रही थी जब हाल ही में उन्होंने आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह से मुलाक़ात की थी। महागठबंधन ने बीएचयू से स्नातक और वाराणसी की मेयर शालिनी यादव का टिकट काटते हुए तेज बहादुर को मौक़ा दिया है। शालिनी यादव अपना नामांकन वापस लेंगी।

वाराणसी में 2009 में भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने जीत दर्ज की थी। 2014 में जोशी कानपूर से लड़े और जीते थे। उस चुनाव में वाराणसी से नरेंद्र मोदी ने अरविन्द केजरीवाल को रिकॉर्ड मतों से परास्त किया था। मोदी एक बार फिर से मैदान में हैं और उनके ख़िलाफ़ कॉन्ग्रेस द्वारा प्रियंका गाँधी के उतारे जाने की चर्चा थी लेकिन अंतिम समय में अजय राय को उम्मीदवार बनाया गया। अभी हाल ही में नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में विशाल रोड शो भी किया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

चंदन गुप्ता याद हैं? जिन्हें ‘भारत माता की जय’ बोलने पर मुस्लिमों की भीड़ ने उतारा मौत के घाट: समझें वंदे मातरम बिल की...

चंदन गुप्ता हत्याकांड को समझने के लिए जरूरी माना जाता है कि वंदे मातरम् बिल में संशोधन की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है।

जौहर यूनिवर्सिटी विवाद के बीच अल्पसंख्यक संस्थानों में आरक्षण पर बहस, AMU-JMI में भी कोटा सिस्टम लागू नहीं: समझें इस ‘दोहरी व्यवस्था’ पर क्यों...

बहस इस बात की है कि मुस्लिम जातियाँ अन्य संस्थानों में OBC आरक्षण का लाभ लेती हैं, लेकिन अपने संस्थानों में हिंदुओं को मौका क्यों नहीं देती?
- विज्ञापन -