Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयतालिबान ने 'अल्लाह-हू-अकबर' कह हारमोनियम को कूचा, टीवी को सुनाई मौत की 'सजा': वीडियो...

तालिबान ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ कह हारमोनियम को कूचा, टीवी को सुनाई मौत की ‘सजा’: वीडियो वायरल

यह पहली बार नहीं है जब तालिबान को मनोरंजन के साधनों तोड़ते हुए देखा गया है। जब से उसने अफगानिस्तान पर कब्जा किया है, वह इस तरह की कई घटनाओं को अंजाम दे चुका है। इसी साल सितंबर में तालिबानियों ने तबला, पियानो और कई अन्य वाद्ययंत्रों को नष्ट कर दिया था। 25 साल पहले जब तालिबान सत्ता में आया तो उसने संगीत और खेल पर प्रतिबंध लगा दिया था।

तालिबान (Taliban) गीत, संगीत, वाद्ययंत्र के साथ-साथ म्यूजिक सुनने वालों से भी नफरत करता है। सोशल मीडिया पर अफगानिस्तान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें तालिबानी अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए एक बड़े से पत्थर से हारमोनियम और अन्य वाद्ययंत्रों को नष्ट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को पाकिस्तान के पत्रकार हमजा अजहर सलाम ने शेयर किया है। ट्वीट में उन्होंने लिखा, “तालिबान लड़ाके म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट को नष्ट कर रहा है। लेकिन भविष्य में यह बदल सकता है।”

हमजा ने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा, “पाकिस्तान (Pakistan) में भी मौलवी टीवी, रेडियो और मनोरंजन के अन्य साधनों के तब तक खिलाफ थे, जब तक वे इससे होने वाले फायदे नहीं जान गए। आने वाले वक्त में तालिबान भी इस बात को समझेंगे।”

अफगानिस्तान के नातिक मलिकजादा द्वारा साझा किए गए एक अन्य वीडियो में तालिबानियों को एक आदमी को फिर कभी टीवी न देखने की कसम दिलाते हुए देखा जा सकता है। बाद में तालिबान लड़ाकों ने टीवी को मौत की सजा सुनाई और उसके बाद टीवी को सजा देते हुए तोड़ दिया गया। टीवी के टूटते ही लोग तालियाँ बजाने लगे।

हालाँकि, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि तालिबान मोबाइल फोन, वीडियो कैमरा, ट्विटर और इंटरनेट जैसी चीजों को ‘हराम’ या ‘इस्लाम के खिलाफ’ मानता है। दरअसल, वह अपना प्रचार-प्रसार करने के लिए इनका भरपूर उपयोग करता है। ऐसा लगता है कि उसे केवल आम जनता द्वारा मनोरंजन के साधनों का इस्तेमाल करने से परेशानी होती है। इसी साल अक्टूबर में अफगानिस्तान में म्यूजिक सुन रहे 13 लोगों की तालिबानियों ने हत्या कर दी थी।

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब तालिबान को मनोरंजन के साधनों तोड़ते हुए देखा गया है। जब से उसने अफगानिस्तान पर कब्जा किया है, वह इस तरह की कई घटनाओं को अंजाम दे चुका है। इसी साल सितंबर में तालिबानियों ने तबला, पियानो और कई अन्य वाद्ययंत्रों को नष्ट कर दिया था। 25 साल पहले जब तालिबान सत्ता में आया तो उसने संगीत और खेल पर प्रतिबंध लगा दिया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

चेहरे चमक गए, पर मुद्दे धुंधले पड़े: CJP की अंदरूनी लड़ाई ने आंदोलन की साख पर उठाए सवाल, छात्रों के टूटते भरोसे की कहानी

CJP के भीतर विवाद, नेताओं की सक्रियता और छात्रों की नाराजगी ने आंदोलन की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है। समझें कैसे असली मुद्दे पीछे छूट गए?

CJP प्रोपेगेंडा आपकी टाइमलाइन तक कैसे पहुँच रहा? समझिए Meta का एल्गोरिदम और मॉडरेशन कैसे साध रहे ग्लोबल लेफ्ट का नैरेटिव

CJP के प्रदर्शन से जुड़े Videos और पोस्ट Meta का एल्गोरिदम कैसे लोगों के फीड तक पहुँचा रहा है, जिन्होंने फॉलो नहीं किया, वो भी इनको देख रहे।
- विज्ञापन -