Homeराजनीति38 साल बाद 63 बांग्लादेशी हिंदू परिवारों का पुनर्वास: CM योगी ने दी घर...

38 साल बाद 63 बांग्लादेशी हिंदू परिवारों का पुनर्वास: CM योगी ने दी घर और जमीन की सौगात

सीएम योगी ने इस परियोजना को लागू करते हुए कहा कि इतने सालों में किसी ने विस्थापित हिंदुओं के दर्द को नहीं समझा। मगर अब इस फैसले के बाद सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाएगा।

साल 1970 में पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से भारत आए हिंदू शर्णार्थियों को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जमीन और घर की सौगात दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज (अप्रैल 19, 2022) लखनऊ में 63 हिंदू बांग्लादेशी परिवारों के लिए पुनर्वास परियोजना को लागू किया। इसके तहत इन लोगों को 2 एकड़ जमीन और आवास योजना के तहत 1 लाख 20 हजार रुपए दिए जाएँगे।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 63 हिंदू बांग्लादेशी शरणार्थी परिवारों को आवासीय और कृषि भूमि के कागजों वितरित करते हुए कहा, “63 हिंदू बांग्लादेशी शरणार्थी परिवारों के पुनर्वास परियोजना को लागू कर दिया गया है। 2 एकड़ भूमि और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 1 लाख 20 हजार रूपए मिलेगा। एक शौचालय का भी निर्माण करवाया जाएगा।” 

सीएम योगी ने इस परियोजना को लागू करते हुए कहा कि इतने सालों में किसी ने विस्थापित हिंदुओं के दर्द को नहीं समझा। मगर अब इस फैसले के बाद सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाएगा। आगे यूपी मुख्यमंत्री ने बताया कि साल 1970 में बांग्लादेश से करीब 407 परिवार भारत के उत्‍तर प्रदेश में आए थे। उस समय उन सबको मेरठ के हस्तिनापुर में एक सूत मिल में नौकरी दी गई थी। लेकिन 1984 में जब वो सूत मिल बंद हुई तो वो बेसहारा हो गए। कुछ परिवारों का पुनर्वास अलग-अलग जगहों पर हुआ लेकिन इनमें से 65 परिवार के लोग 1984 से अब तक अपने पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे थे। इंतजार करते-करते दो परिवार तो पूरी तरह समाप्‍त हो गए। बचे बस 63।

सीएम ने कहा कि इन 38 वर्षों में न जाने कितने लोग चले गए। जब पीएम ने इन शर्णार्थियों को नागरिकता देने का एक्ट पास किया तो प्रदेश ने पुराने कागज ढूँढने शुरू किए। इसी दौरान मालूम चला कि 63 परिवारों की हालात बहुत खराब है। ये लोग खानाबदोशों की तरह जीवन जी रहे थे। मगर अब खुशी इस बात की है कि प्रदेश सरकार ने 63 परिवारों के व्यवस्थित पुनर्वास की कार्ययोजना लागू कर दी है।

उन्होंने कहा कि ये लोग जहाँ के मूल निवासी थे वहाँ इन्हें शरण नहीं मिली। आजादी के बाद भी इन्हें दर्द झेलना पड़ा। मगर भारत ने इन्हें स्वीकार कर न केवल शरण दी बल्कि इनके पुनर्वास की योजना को भी आगे बढ़ा रहा है। ये भारत की मानवता के प्रति सेवा का एक अभूतपूर्व उदाहरण है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -