HomeराजनीतिPM मोदी को राखी बाँधने पहुँचीं 'पाकिस्तानी बहन', कहा- 'मेरे भाई को नोबेल मिलेगा'

PM मोदी को राखी बाँधने पहुँचीं ‘पाकिस्तानी बहन’, कहा- ‘मेरे भाई को नोबेल मिलेगा’

मोहसिन के अनुसार, मोदी गरीबी, भ्रष्टाचार और आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल से की गई दुआ ज़रूर पूरी होती है और मोदी को देश-दुनिया के कल्याण का प्रयास करने के लिए नोबल मिलना ही चाहिए।

कमर मोहसिन शेख मूल रूप से पाकिस्तानी महिला हैं और सबसे ख़ास बात यह है कि वह लगातार पिछले 24 वर्षों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राखी बाँधती आई हैं। इस रक्षाबंधन के अवसर पर भी मोहसिन शेख ने पीएम को राखी बाँधी। मोहसिन ने प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह विश्व की शांति और देश-दुनिया के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण क़दम उठा रहे हैं। मोहसिन एक वाकया याद करती हैं जो काफ़ी रोचक है।

दरअसल, मोहसिन पीएम को तभी से राखी बाँधती आ रही हैं, जब वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के बाद भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हुआ करते थे। एक बार मोहसिन ने उन्हें राखी बाँधते हुए दुआ माँगी कि वह गुजरात के मुख्यमंत्री बन जाएँ। इस पर मोदी ने हँसते हुए कहा कि वह भाजपा के एक साधारण कार्यकर्ता हैं और हमेशा यही रहना चाहते हैं क्योंकि राजकाज उन्हें रास नहीं आता है।

समय का पहिया घूमा और गुजरात को नरेन्द्र मोदी के रूप में नया मुख्यमंत्री मिला। मोदी ने देश की कमान सम्भालने तक गुजरात की बागडोर थामे रखी। मोहसिन बताती हैं कि एक बार राखी बाँधते समय उन्होंने दुआ करते हुए कहा कि मोदी देश के प्रधानमंत्री बनें। इसके बाद नरेन्द्र मोदी मुस्कुराने लगे थे। कमर मोहसिन मूल रूप से कराची की रहने वाली हैं। हमेशा की तरह इस बार भी मोहसिन ने पीएम मोदी के लिए बड़ी दुआ माँगी है।

कमर मोहसिन ने इस बार पीएम मोदी को नोबल पुरस्कार मिलने की दुआ की है। कमर मोहसिन के अनुसार, मोदी गरीबी, भ्रष्टाचार और आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल से की गई दुआ ज़रूर पूरी होती है और मोदी को देश-दुनिया के कल्याण का प्रयास करने के लिए नोबल मिलना ही चाहिए।

यहाँ इस बात का जिर्क करना ज़रूरी है कि 1971 के युद्ध के बाद सिंध के कई लोग आकर भारत में बस गए थे जो अपने सम्बन्धियों से मिलने पाकिस्तान नहीं जा सके। पाकिस्तान इन्हें वीजा नहीं देता है। इनमें से कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें भारत की नागरिकता दे दी गई हैं। ये सभी अब गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।

59 करोड़ अकाउंट्स, लाखों करोड़ की कैपिटल और आखिरी व्यक्ति तक पहुँचता बैंकिंग सिस्टम… फिर क्यों जनधन योजना से सुभाष गर्ग को लगी मिर्ची?

सुभाष गर्ग ने जनधन योजना के 59 करोड़ खातों पर सवाल उठाए, जानिए जीरो बैलेंस, इनएक्टिव अकाउंट्स और DBT से जुड़ी पूरी कहानी।
- विज्ञापन -