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कनाडा ने पन्नू के करीबी इंद्रजीत गोसल को दी सुरक्षा, हिंदू मंदिर पर हमले का आरोपी है खालिस्तानी आतंकी: बिना सबूत भारत पर लगाए हत्या की साजिश के आरोप

कनाडा लगातार खालिस्तानी तत्वों को पनाह और सहयोग देता रहा है। इसी कड़ी में ताजा मामला खालिस्तानी आतंकी इंद्रजीत गोसल का है। कनाडाई प्रशासन ने हाल ही में गोसल को उसकी जान पर मंडरा रहे कथित खतरे से बचाने के लिए सुरक्षा उपलब्ध कराई है।

शुक्रवार (11 सितंबर 2025) को ग्लोबल न्यूज को दिए इंटरव्यू में गोसल ने दावा किया कि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने औपचारिक तौर पर उसे चेतावनी दी है कि उसकी जान को गंभीर खतरा है। गोसल के अनुसार, पुलिस ने उसे बीते महीने भी चेताया था कि आने वाले हफ्तों में उसकी हत्या हो सकती है। 8 सितंबर को उसे फिर से ड्यूटी-टू-वार्न नोटिस जारी किया गया।

गोसल का कहना है कि वह खालिस्तान जनमत-संग्रह का आयोजक है और इसी कारण उसकी जान को भारत सरकार के एजेंटों और प्रॉक्सी से खतरा है। पुलिस ने उसे गवाह संरक्षण कार्यक्रम में शामिल होने की पेशकश की, लेकिन गोसल ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि इससे उसकी सक्रियता प्रभावित होगी।

भारत पर आरोप, कनाडाई पुलिस का संरक्षण

गोसल ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी जान को जो भी खतरा है, वह भारत सरकार से ही जुड़ा है। उसने कहा, “ये सब भारत सरकार से आता है। आदेश वहीं से दिए जाते हैं।” गोसल ने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से माँग की कि भारत के राजनयिकों और खुफिया एजेंसियों की गतिविधियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 2022 से ही कनाडाई पुलिस खालिस्तानी तत्वों को इस तरह के ड्यूटी-टू-वार्न नोटिस जारी कर रही है। अक्टूबर 2024 में RCMP ने भारत पर आरोप लगाया था कि कनाडा में खालिस्तानी आतंकियों पर हुए हमलों के पीछे भारतीय एजेंसियों का हाथ है। RCMP ने कहा था कि भारतीय राजनयिक जानकारी जुटाकर RAW को सौंपते हैं, जिसके जरिए संगठित अपराधियों से हमले करवाए जाते हैं।

कौन है इंद्रजीत गोसल?

इंद्रजीत गोसल कनाडा के ब्रैम्पटन में रहता है और खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) का प्रमुख आयोजक है। भारत में यह संगठन प्रतिबंधित है। गोसल पर नवंबर 2024 में ग्रेटर टोरंटो एरिया के ब्रैम्पटन में एक हिंदू मंदिर पर हमले का आरोप लगा था। हालांकि, स्थानीय पुलिस ने उसे कुछ शर्तों के साथ रिहा कर दिया।

गोसल, 2023 में मारे गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर का उत्तराधिकारी माना जाता है। निज्जर की हत्या को कनाडाई सरकार ने बिना सबूत भारत पर थोप दिया था, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ गई। गोसल, SFJ के जनरल काउंसल और भारत में घोषित आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का करीबी माना जाता है। उसने पहले भी कहा था कि वह खालिस्तान की स्थापना के लिए जान देने से नहीं डरता।

भारत-कनाडा रिश्तों की पृष्ठभूमि

पिछली ट्रूडो सरकार के दौरान भारत-कनाडा रिश्ते बेहद खराब हुए थे। ट्रूडो ने भारत पर निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था, जिसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निकाल दिया।

हालांकि, इस साल प्रधानमंत्री बने मार्क कार्नी ने आर्थिक और व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश शुरू की है, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि खालिस्तानी तत्वों को रोकने के लिए अब तक कनाडा ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

मोदी सरकार के प्रयासों से ‘राजभाषा’ को मिल रहा विस्तार, PM ने हिंदी को वैश्विक मंचों पर बनाया भारत की आवाज; जानें क्यों 14 सितंबर को मनाया जाता है ‘हिंदी दिवस’

“राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश की एकता और
उन्नति के लिए आवश्यक है।”
महात्मा गाँधी

हिंदी भारत की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी और भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है। देश में भाषा को लेकर बेशक विवाद होते हों लेकिन हिंदी को हमेशा एक ऐसी भाषा के तौर पर विकसित किए जाने का प्रयास होता रहा है जो भारत को एकता के सूत्र में जोड़ सके।

14 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी दिवस?

आजादी के बाद भारत का अपना संविधान बनाया जाना था और उसी दौर में भाषा को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई थी। राजभाषा विभाग की त्रैमासिक पत्रिका ‘राजभाषा भारती’ के अप्रैल-जून 1995 के अंक के मुताबिक, 14 सितंबर 1946 को संविधान सभा की नियम समिति मे यह फैसला हुआ कि संविधान सभा का कामकाज हिंदुस्तानी या अंग्रेजी में किया जाना चाहिए।

इसके बाद जब 14 जुलाई 1947 को जब संविधान सभा का सत्र शुरू हुआ, तब दूसरे ही दिन यह संशोधन आया कि हिंदुस्तानी के स्थान पर हिंदी शब्द रखा जाए। 16 जुलाई को इस पर विचार शुरू हुआ और मतदान के दौरान हिंदी के पक्ष में 63 वोट और हिंदुस्तानी के पक्ष में 32 वोट पड़े।

बहुभाषी होने के चलते कई समस्याएँ भी आ रही थीं। इस बीच 2 सितंबर 1949 को संविधान सभा के सदस्य एनजी आयंगर और केएम मुंशी की सहमति से एक फॉर्मूला पेश किया गया। इसमें कहा गया कि हिंदी को संघ की आधिकारिक भाषा और देवनागरी को उसकी लिपि मना जाए। साथ ही, अदालतों, विधेयकों और अधिनियमों आदि की भाषा अंग्रेजी में ही रखने की बात कही गई थी।

इस बार वाद विवाद चलता रहा, उधर संविधान सभा में भाषा संबंधी उपबंधों को लेकर चर्चा होनी थी। यह चर्चा 12 सितंबर से 14 सितंबर तक चली। 12 सितंबर को मुंशी-आयंगर फॉर्मूले से जुड़े संशोधन पेश किए गए।

13 तारीख की बहस में श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित जवाहर लाल नेहरू जैसे सदस्यों ने भाग लिया और 14 सितंबर 1949 को शाम 6 बजे तक हिंदी को भारत की राजभाषा बनाने की स्वीकृति दे दी गई। संविधान निर्माताओं ने तय किया कि अनुच्छेद 343 के तहत देवनागरी में लिखी गई हिंदी भाषा, भारत की राजभाषा होगी।

1953 में पहली बार 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने का फैसला लिया गया था और तब से यह सिलसिला अनवरत जारी है।

हिंदी वर्णमाला का विकास

संविधान में हिंदी की स्थिति?

संविधान के भाग 17 में राजभाषा का जिक्र किया गया है। इसके अध्याय 1 (संघ की भाषा) के तहत अनुच्छेद 343 (1) में कहा गया है, “संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा।”

वहीं, संविधान के अनुच्छेद 351 में हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश की बात कही गई है। इसमें लिखा है, “संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे जिससे वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके…उसके शब्द-भंडार के लिए मुख्यतः संस्कृत से और गौणतः अन्य भाषाओं से शब्द ग्रहण करते हुए उसकी समृद्धि सुनिश्चित करे।”

इसके अलावा अनुच्छेद 120 में ‘संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा’ को लेकर कहा गया है कि भाग 17 में किसी बात के होते हुए भी अनुच्छेद 348 के उपबंधों के अधीन रहते हुए संसद में कार्य हिंदी में या अंग्रेजी में किया जाएगा। वहीं, अनुच्छेद 210 में कहा गया है, “भाग 17 में किसी बात के होते हुए भी, किंतु अनुच्छेद 348 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, राज्य के विधान-मंडल में कार्य राज्य की राजभाषा या राजभाषाओं में या हिंदी में या अंग्रेजी में किया जाएगा।”

हिंदी को कैसे आगे बढ़ा रही है मोदी सरकार?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूँ तो खुद गुजराती भाषी हैं लेकिन उन्होंने हिंदी को ना केवल देश में आगे बढ़ाने के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर उसका सम्मान बढ़ाने के लिए कई काम किए हैं। किसी के हस्ताक्षर उसकी पहचान होते हैं और पीएम मोदी अपने साइन हिंदी में ही करते हैं।

आज दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्ष सोशल साइट्स पर भारत से जुड़े संवाद के लिए हिंदी का इस्तेमाल करते हैं। संयुक्त राष्ट्र भी पिछले कई वर्षों से हिंदी में लोगों को जानकारी दे रहा है।

भारतीय भाषाओं की समृद्धि को लेकर पीएम मोदी का लगातार आग्रह रहा है। पिछले दिनों भी स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन के दौरान उन्होंने लाल किले से कहा था, “हमारी भाषाएँ जितनी विकसित होंगी, हमारी सभी भाषाएँ जितनी समृद्ध होगी, हमारे नॉलेज के सिस्टम को भी उतना ही बल मिलने वाला है।”

वैश्विक मंचों पर हिंदी को बढ़ावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के बाद से देश के भीतर तो हिंदी को सरकारी कामकाज की भाषा बनाने पर जोर दिया ही है। इसके साथ ही वह संयुक्त राष्ट्र, जी-20 सम्मेलन या विदेशों में प्रवासी सम्मेलन हों, उन्होंने वैश्विक मंचों पर हिंदी में अपनी बात रही है।

सितंबर 2014 में जब वह पहली बार बतौर प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित कर रहे थे तो उन्होंने हिंदी में ही अपना भाषण दिया। दुनिया के तमाम राष्ट्राध्यक्षों के सामने वह मजबूती से हिंदी में अपनी बात रखते नजर आते हैं।

दुनियाभर में हिंदी को लेकर लोगों का जुनून बढ़ रहा है। दुनिया की कई बड़ी और नामी यूनिवर्सिटीज़ में हिंदी पढ़ाई जा रही है। हाल ही में रूस के मंत्री कॉन्स्टेंटिन मोगिलेव्स्की ने माना था कि उनके देश में हिंदी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।

नई शिक्षा नीति से हिंदी को बढ़ावा

मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति (2020) के तहत हिंदी को विस्तार देने की कोशिश की है। इस नीति में तीन भाषाओं का फॉर्मूला दिया गया है। नीति में इस फॉर्मूले को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें तीन में से दो भारतीय भाषाओं के सीखने पर जोर रहे। इस फॉर्मूले के तहत हिंदी का दायरा और बढ़ गया है। इसमें क्षेत्रीय भाषा और अंग्रेजी के अलावा हिंदी को जगह मिलने की अधिक संभावनाएँ हैं।

हिंदी में मेडिकल-इंजीनियरिंग की पढ़ाई

मोदी सरकार ने प्रोफेशनल कोर्सेज को भी हिंदी भाषा में पढ़ाने पर जोर दिया है। जिसके तहत सरकार द्वारा मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी भाषा में कराई जा रही है। मध्य प्रदेश के जबलपुर में देश का पहला हिंदी-माध्यम MBBS कॉलेज स्थापित किया जा रहा है और यह संस्थान 2027–28 शैक्षणिक सत्र से शुरू होने की उम्मीद है।

‘केंद्रीय हिंदी समिति’ का पुनर्गठन और ‘हिंदी शब्द सिंधु’ शब्दकोश का निर्माण

सरकारी स्तर पर ‘केंद्रीय हिंदी समिति’ का पुनर्गठन किया गया, जिसकी अध्यक्षता पीएम मोदी स्वयं कर रहे हैं। इस समिति ने हिंदी साहित्य को बढ़ावा देते हुए ‘हिंदी शब्द सिंधु’ शब्दकोश का निर्माण शुरू किया, जो दुनिया की सबसे बड़ी डिक्शनरी बनने जा रही है।

2024 में गृह मंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस पर ‘भारतीय भाषा अनुभाग’ की स्थापना की घोषणा की, जो हिंदी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय स्थापित करेगा। इसके अलावा विभिन्न शहरों में राजभाषा सम्मेलनों के आयोजन के जरिए हिंदी को संपर्क भाषा बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

डिजिटल तरीके से हिंदी सीखने की सुविधा

मोदी सरकार ने डिजिटल युग में भी हिंदी सीखने को आसान बनाने के लिए लर्निंग इंडियन लैंग्‍वेज विद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (लीला) प्लैटफॉर्म लॉन्च किया है। इस पर लोग खेल-खेल में हिंदी भाषा सीख रहे हैं और यह नए लोगों को हिंदी के पास लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा ‘भाषिनी’ AI प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया है, यह लाइव अनुवाद की सुविधा के जरिए हिंदी को अन्य भाषाओं से जोड़ रहा है।

2024 में सरकार ने जारी किया था स्मारक डाक टिकट

पिछले वर्ष हिंदी भाषा को देश की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाए जाने की 75वीं वर्षगाँठ के मौके पर ‘हीरक जयंती’ मनाई गई थी। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक स्मारक डाक टिकट जारी किया था। इसे देश को एकजुट करने और विविध भाषाई समुदायों की सेवा करने में हिंदी की स्थाई भूमिका को श्रद्धांजलि बताया गया था।

ग्लोबल होती हिंदी

आज दुनिया भर में हिंदी भाषा की धूम मच रही है। एथ्नोलॉग की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है, जिसमें 609 मिलियन से अधिक वक्ता शामिल हैं। यह आँकड़ा भारत की बढ़ती सॉफ्ट पावर को भी दिखाता है।

दक्षिण एशिया के अलावा, हिंदी अब अमेरिका, मॉरीशस, फिजी, नेपाल और खाड़ी देशों में भी गूँज रही है। अमेरिका में करीब 6 लाख लोग हिंदी बोलते हैं, जहाँ यह 11वीं सबसे लोकप्रिय भाषा है। फिजी में हिंदी आधिकारिक भाषा का दर्जा रखती है। वहीं, मॉरीशस, नेपाल, कनाडा, ब्रिटेन में भी हिंदी भाषियों की संख्या बढ़ रही है।

डुओलिंगो लैंग्वेज रिपोर्ट 2024 के मुताबिक, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हिंदी सीखने वालों की संख्या में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विश्वभर के युवा भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के लिए हिंदी को अपना रहे हैं।

2011 की जनगणना बताती है कि भारत में हिंदी समझने और बोलने वाले लोगों की संख्या करीब 60 करोड़ हैं। भारत के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग हिंदी बोलते समझते हैं। हालाँकि, गैर हिंदी भाषी राज्यों द्वारा मुख्यत: राजनीतिक हमलों के तहत हिंदी सीखने को थोपने की साजिश बताने की कोशिश की जाती है।

वो लोग ये भूल जाते हैं कि जिन पर वह हिंदी थोपने का आरोप लगा रहे हैं, वे खुद गैर हिंदी भाषी हैं। उनके लिए भाषा संवाद का एक माध्यम है और देश में सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा होने के नाते हिंदी ही संवाद की भाषा बनने के लिए मौजूदा समय में सबसे उपयुक्त दिखाई देती है। हिंदी को विरोध के नजरिए से देखने के बाद संवाद स्थापित करने के लिए एकता के सूत्र के तौर पर देखे जाने की जरूरत है।

गौर करने वाली बात ये भी है कि आजादी के पहले से लेकर अब तक हिंदी को राष्ट्र की भाषा बनाने के लिए आग्रह करने वाले बहुत लोग गैर हिंदी भाषी रहे हैं। केशव वामा से लेकर महात्मा गाँधी तक और सुभाष चंद्र बोस से लेकर माधव सदाशिव गोलवलकर तक, गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों से आने वाले लोगों ने हिंदी को आगे बढ़ाया है।

कलकत्ता में जन्मे महर्षि अरविंद ने तो यहाँ तक कहा था,

“भारत के विभिन्न प्रदेशों के बीच हिंदी प्रचार के द्वारा एकता स्थापित करने वाले लोग सच्चे भारतबंधु हैं।”

नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों के बाद सामान्य होता जनजीवन, आगजनी-तोड़फोड़ के बाद रंगाई-पुताई में जुटे GenZ: कर्फ्यू हटा, Discord ऐप से चुनी गईं सुशीला कार्की से बदलाव की उम्मीद

नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए भीषण विरोध प्रदर्शनों के बाद अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। शनिवार (13 सितंबर 2025) को कर्फ्यू भी हटा दिया गया और अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में सुशीला कार्की के शपथ लेने के बाद काठमांडू में जिंदगी सामान्य पटरी पर लौटती दिखाई दी। दुकानों, बाजारों और सड़कों पर फिर से हलचल शुरू हो गई है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में हुई हिंसा के कारण सेना को सड़कों पर तैनात किया गया था लेकिन अब सेना की मौजूदगी कम की जा रही है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री कार्यालय को आग लगाई गई और सरकार गिरा दी गई। लेकिन अब युवाओं ने सड़कों और डिवाइडरों की रंगाई-पुताई तक खुद से करना आरंभ कर दिया है।

यह विरोध 2008 में गृहयुद्ध और राजशाही के अंत के बाद से सबसे बड़ा बताया जा रहा है। इसमें अब तक कम से कम 51 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें एक भारतीय नागरिक और तीन पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

शुक्रवार (12 सितंबर 2025) की शाम, 73 वर्षीय पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की ने नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें एक अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया है, जिनका मुख्य काम है शांति बहाल करना और जनता की माँगों, जैसे भ्रष्टाचार खत्म करना और जवाबदेह शासन स्थापित करना, को पूरा करना।

उनकी नियुक्ति को जनता और खासकर युवाओं का बड़ा समर्थन मिला है। हजारों युवा कार्यकर्ताओं ने Discord ऐप पर चर्चा की और कार्की को अगला नेता चुना। सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने मिलकर इस नियुक्ति को अंतिम रूप दिया।

कई लोगों को कार्की से बदलाव की उम्मीद है। सामाजिक कार्यकर्ता सुरज भट्टाराई ने कहा, “नेपाल को उसकी पहली महिला प्रधानमंत्री मिल गई है। हमें भरोसा है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाएँगी।”

इसी तरह काठमांडू की एक दुकानदार दुर्गा मगर ने कहा, “चाहे Gen Z हो या कोई और, अब यह सब रुकना चाहिए। जो भी बदलाव लाए, बस देश में शांति चाहिए।” हालाँकि, भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करना आसान नहीं होगा। सुरक्षा की दृष्टि से भी चुनौती बड़ी है, क्योंकि हिंसा के दौरान करीब 12,500 कैदी जेल से फरार हो गए हैं।

सरकार ने शनिवार (13 सितंबर) को कर्फ्यू हटाने और राहत के कदम उठाने की घोषणा की। सरकारी इमारतों की सफाई और मरम्मत का काम शुरू हो गया है, जिन्हें हाल ही में प्रदर्शनकारियों ने जला दिया था।

सबसे ज्यादा नुकसान काठमांडू के हिल्टन होटल को हुआ है, जिसे 8 अरब से ज्यादा की क्षति पहुँची है। इसके अलावा नेपाल सरकार ने विदेशी नागरिकों की मदद के लिए अस्थायी उपाय किए हैं, जो कर्फ्यू के चलते नेपाल में फँसे हुए थे।

15000 नौकरी, ₹25000 करोड़ का निवेश: भागलपुर में 2400 MW का ‘अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट’ लगाएगी अडानी पावर, बिहार सरकार से हुआ 25 साल का समझौता

बिहार की बिजली व्यवस्था को बड़ा सहारा मिलने वाला है। अडानी पावर ने बिहार स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) के साथ 25 साल का पावर सप्लाई एग्रीमेंट (PSA) किया है। इस समझौते के तहत कंपनी भागलपुर जिले के पीरपैंती में 2400 मेगावाट की क्षमता वाला अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट स्थापित करेगी।

इस परियोजना की लागत करीब 3 अरब डॉलर (लगभग 25 हजार करोड़ रुपए) आंकी जा रही है। यहाँ से उत्तर बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) और दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) को 2274 मेगावाट बिजली मिलेगी।

अडानी पावर ने यह अनुबंध प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए जीता है और सबसे कम टैरिफ ₹6.075 प्रति यूनिट (किलोवाट-घंटा) ऑफर किया। इस प्रोजेक्ट को डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन और ऑपरेट (DBFOO) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इस प्लांट में आधुनिक, कम उत्सर्जन वाली तकनीक का इस्तेमाल होगा। कोयले की आपूर्ति सरकार की SHAKTI नीति के तहत की जाएगी, ताकि उत्पादन सुचारु रूप से हो सके।

समय सीमा और रोजगार

योजना के मुताबिक, परियोजना का पहला 800 मेगावाट यूनिट 48 महीनों के भीतर शुरू हो जाएगा, जबकि 60 महीनों के भीतर पूरी क्षमता के साथ तीनों यूनिट चालू कर दिए जाएँगे।

निर्माण के दौरान इस प्रोजेक्ट से लगभग 12,000 लोगों को रोजगार मिलेगा और संचालन के समय करीब 3,000 स्थायी रोजगार पैदा होंगे। यह सौदा बिहार की ऊर्जा जरूरतों को लंबे समय तक पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा।

गौरतलब है कि अडानी पावर, अरबपति गौतम अडानी के नेतृत्व वाले समूह का एक हिस्सा है और यह भारत में सबसे बड़ा प्राइवेट थर्मल पावर प्रोड्यूसर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी थर्मल पावर क्षमता 18,110 मेगावाट है।

‘रूस से तेल खरीदने वालों पर ठोकें हाई टैरिफ’: G7 देशों पर अमेरिका डाल रहा दबाव, EU-भारत के FTA वार्ता पर भी ट्रंप की पैनी नजर

भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका लगातार कोई न कोई नया बखेड़ा खड़ा कर रहा है। पहले अमेरिका ने भारतीय सामानों के आयात पर 50% तक का शुल्क (25% रूसी तेल पर और 25% भारत के ऊँचे आयात शुल्क पर) लगा रखा है। इसके बाद अब वॉशिंगटन अपने G7 साझेदारों पर दबाव बना रहा है कि वे भी भारत और चीन जैसे उन देशों पर हाई टैरिफ लगाएँ, जो अभी भी मास्को से ऊर्जा खरीद रहे हैं।

शुक्रवार (12 सितम्बर 2025) को अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर ने G7 देशों के वित्त मंत्रियों से बात की। उनका कहना था कि अगर दुनिया को सच में रूस की आय कम करनी है और यूक्रेन युद्ध खत्म करना है तो एकजुट होकर कदम उठाने होंगे। अमेरिकी ट्रेज़री प्रवक्ता ने तो और आगे बढ़ते हुए कहा ‘भारत और चीन से आने वाले सामान पर सार्थक टैरिफ लगाया जाए।’

गौरतलब है कि 2022 से भारत रूस का सबसे बड़ा कच्चा तेल खरीदार बन चुका है। इससे वैश्विक तेल बाजार स्थिर तो रहा है, लेकिन वॉशिंगटन को नई दिल्ली का यह रुख रास नहीं आया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही भारतीय उत्पादों पर दोगुना शुल्क लगा चुके हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता ठप हो गई है।

चौंकाने वाली बात यह है कि चीन पर अभी तक ऐसे कदम नहीं उठाए गए। ट्रंप का तर्क है कि बीजिंग के साथ उनकी वार्ता चल रही है, इसलिए वहाँ अतिरिक्त दबाव नहीं बनाया जा सकता। इससे अमेरिकी रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।

उधर यूरोप की स्थिति भी विरोधाभासी है। वहाँ अब भी रूसी गैस की भारी खपत हो रही है। हाल ही में यूक्रेन द्वारा गैस पाइपलाइन पर हमले से आपूर्ति बाधित हुई तो ट्रंप ने कीव पर नाराजगी जताई। यूरोपीय देश भले ही रूस पर निर्भरता घटाने की बातें कर रहे हों, लेकिन वे अब भी रूसी LNG (Liquefied Natural Gas) का बड़ा आयात कर रहे हैं।

इस बीच, ट्रंप लगातार EU पर दबाव बना रहे हैं कि भारत पर भी भारी शुल्क लगाया जाए। लेकिन यूरोपीय संघ ऐसा करने से हिचक रहा है, क्योंकि भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है और इसे इस साल के अंत तक फाइनल करने की योजना है।

कनाडाई वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैंपेन की मेजबानी में हुई G7 बैठक में रूस के जमे हुए संसाधनों को यूक्रेन की मदद के लिए इस्तेमाल करने और नए प्रतिबंध लगाने पर भी चर्चा हुई। वहीं बेसेंट अब मैड्रिड में चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लीफेंग से मिलने वाले हैं, जहाँ TikTok और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मुद्दे भी उठेंगे।

ट्रंप ने फ़ॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि उनकी ‘रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ धैर्य की सीमा अब खत्म हो रही है।’ उन्होंने संकेत दिया कि रूसी बैंकों और तेल पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि ऐसे हर कदम में यूरोपीय सहयोग आवश्यक है।

ट्रंप ने साफ कहा, “हमें अब बेहद सख्ती से कदम उठाने होंगे।” अमेरिकी ट्रेजरी प्रवक्ता ने भी यही दोहराया कि G7 साझेदारों को रूस पर और दबाव डालना होगा। ‘राष्ट्रपति ट्रंप की Peace and Prosperity Administration तैयार है और अब समय है कि हमारे G7 साझेदार भी आगे बढ़ें।’

2.5 लाख बेघरों को UP में मिलेगी छत, योगी सरकार ने दी PM आवास योजना 2.0 के लिए ₹735 करोड़ की मंजूरी: 195 दिनों में घर बनाकर रच रहे इतिहास

उत्तर प्रदेश सरकार ने 2.5 लाख आवासों की निर्माण राशि को हरी झंडी दे दी है। योगी सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 735.94 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार दोनों का अंश शामिल है।

इसके साथ ही हर आवास की जियो टैगिंग, फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई है। वहीं, निर्माण कार्य में राष्ट्रीय भवन संहिता व आपदा-रोधी मानकों का पालन करना भी जरूरी होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर राशि का गलत इस्तेमाल हुआ तो पूरा पैसा ब्याज सहित भारत सरकार को लौटाना होगा। इस योजना के लिए किसी अन्य स्रोत से फंड न मिलने की पुष्टि राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) और जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) को करनी होगी। नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात के अनुसार, इस राशि से योजना के लक्ष्य पूरे करने में मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश को शहरी योजना के तहत 2,52,605 आवास आवंटित हुए हैं। खास बात ये है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में उत्तर प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय औसत 299 दिन के मुकाबले सिर्फ 195 दिन में आवास बनाकर मिसाल पेश की है।

2016-17 से 2024-25 तक 36.57 लाख आवासों के लक्ष्य में से 36.34 लाख आवास पूरे किए जा चुके हैं और बाकी निर्माण कार्य तेजी से जारी है। मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में 3.73 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 3.51 लाख घर पूरे हो चुके हैं, जबकि 22 हजार पर काम चल रहा है।

इसके साथ ही, यूपी 99.37% उपलब्धि के साथ देश में दूसरे नंबर पर है जबकि सिक्किम पहले स्थान पर है, हालाँकि उसका लक्ष्य सिर्फ 1,399 घरों का था। भारत सरकार के परफॉर्मेंस इंडेक्स में यूपी कई मापदंडों पर पहले स्थान पर है, जैसे राजमिस्त्री प्रशिक्षण, सोशल ऑडिट, एरिया ऑफिसर ऐप पर निरीक्षण, पात्र लाभार्थियों को भूमि पट्टा देना और आवास पूर्णता।

तैयार घरों को कन्वर्जेन्स के जरिए 99.39% शौचालय, 93.31% बिजली, 94.42% गैस और 80.02% पेयजल कनेक्शन से जोड़ दिया गया है, जिससे अब प्रधानमंत्री आवास सिर्फ छत नहीं बल्कि पूरी सुविधाओं से युक्त घर बन गए हैं। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने कुछ समय पहले हुई एक बैठक में निर्देश दिए थे कि शेष घरों का निर्माण जल्दी और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए और लाभार्थियों को पेंशन व अन्य योजनाओं से भी जोड़ा जाए।

इसी क्रम में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत बिजनौर की बोक्सा जनजाति के 145 आवासों में से 123 पूरे हो चुके हैं और प्रधानमंत्री मॉडल आवास योजना के तहत 587 मॉडल हाउस बन चुके हैं, जबकि 190 निर्माणाधीन हैं। साथ ही 2025-26 में 25 हजार महिला राजमिस्त्रियों को आरसेटी के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया है, जिससे उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर मिला है।

इस तरह, उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत न सिर्फ घर बनाए हैं, बल्कि उन्हें सुविधाओं से युक्त कर लाभार्थियों को बेहतर जीवन देने की दिशा में मजबूत कदम उठाए हैं।

अब किया 20 साल की सिख लड़की का बलात्कार, पहले बुजुर्गों की पगड़ी गिरा-गिराकर लगाई थी मार: UK में नस्लीय हमले जारी, संसद में हुई कड़ी निंदा

ब्रिटेन के ओल्डबरी में बीस साल की एक सिख युवती के साथ न सिर्फ बलात्कार किया गया, बल्कि उस पर नस्लवादी टिप्पणियाँ भी की गईं। हमलावरों ने युवती से ‘अपने देश वापस जाओ’ कहा और उसे इस आधार पर निशाना बनाया कि वह भारतीय मूल की है।

यह हमला पिछले मंगलवार (9 सितम्बर 2025) की सुबह करीब 8:30 बजे टेम रोड के पास हुआ। पुलिस ने इसे ‘नस्लीय रूप से प्रेरित’ अपराध माना है और आरोपितों की तलाश में जुटी है।

पुलिस के मुताबिक, पीड़िता ने बताया कि दोनों हमलावर श्वेत पुरुष थे। इनमें से एक ने अपना सिर मुड़वाया हुआ था और उसने काले रंग की स्वेटशर्ट पहनी हुई थी, जबकि दूसरा ग्रे टी-शर्ट में था। इस समय सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक जाँच जारी है। पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि संदिग्धों की पहचान में मदद करें।

इस घटना ने स्थानीय सिख समुदाय को गहरे आक्रोश में ला दिया है। समुदाय के नेताओं ने इसे जानबूझ कर किया गया हमला बताया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लोगों का गुस्सा पूरी तरह से जायज है और इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि लोगों में सुरक्षा की भावना बनी रहे।

ब्रिटिश संसद में भी इस मामले की गूँज सुनाई दी। बर्मिंघम एजबेस्टन की सांसद प्रीत कौर गिल ने घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में खुले तौर पर नस्लवाद बढ़ा है और यह बेहद चिंताजनक है।

गिल ने साफ कहा, “यह युवती यहीं की है और हमारे समाज के हर सदस्य को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करने का अधिकार है।” वहीं, इलफोर्ड साउथ के सांसद जस अठवाल ने इसे ‘घृणित, नस्लवादी और स्त्री-विरोधी हमला’ बताया और कहा कि इस पर बेहद गंभीरता से कार्रवाई होनी चाहिए।

गौर करने वाली बात यह है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। महज एक महीने पहले ही वॉल्वरहैम्प्टन में रेलवे स्टेशन के बाहर तीन किशोरों ने दो बुजुर्ग सिख पुरुषों पर हमला कर दिया था। हमलावरों ने उन्हें जमीन पर गिराकर बेरहमी से लात-घूँसे मारे थे। इस दौरान उनकी पगड़ियाँ भी उतर गई थीं। लगातार हो रही ऐसी घटनाएँ न सिर्फ पीड़ित परिवारों को, बल्कि पूरे प्रवासी और अल्पसंख्यक समुदाय को असुरक्षित महसूस करवा रही हैं।

‘शांति के रास्ते पर आगे बढ़ें, मैं आपके साथ हूँ’: PM मोदी ने मणिपुर में की हिंसा पीड़ितों से मुलाकात, राज्य को ₹7300 करोड़ का दिया उपहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीन दिवसीय दौरे में मणिपुर का दौरा किया। मिजोरम के बाद, पीएम मोदी हिंसा प्रभावित चुराचांदपुर पहुँचे, जहाँ उन्होंने 7300 करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इसके बाद वे राजधानी इंफाल गए, जहाँ 1200 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन किया।

इस दौरान उन्होंने हिंसा से प्रभावित विस्थापितों से मुलाकात की और लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मणिपुर की धरती हौसलों और हिम्मत की धरती है।

मणिपुर के लोगों की तारीफ

पीएम मोदी ने कहा, “मणिपुर की ये धरती हौसलों और हिम्मत की धरती है। ये हिल्स… प्रकृति का अनमोल उपहार हैं और साथ ही ये हिल्स आप सभी लोगों की निरंतर मेहनत का भी प्रतीक हैं। मैं मणिपुर के लोगों के जज्बे को सैल्यूट करता हूँ। इतनी भारी बारिश में भी आप इतनी बड़ी संख्या में यहाँ आए, मैं आपके इस प्यार के लिए आपका आभार व्यक्त करता हूँ।”

उन्होंने कहा, “जब खराब मौसम की वजह से मेरा हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, तो मैंने सड़क मार्ग से यात्रा करने का फैसला किया। सड़क किनारे लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर मेरा स्वागत किया। मुझे जो गर्मजोशी और प्यार मिला, उसे मैं कभी नहीं भूल पाऊँगा। मैं मणिपुर के लोगों के प्रति सम्मान में अपनाइ सिर झुकाता हूँ।”

विकास परियोजनाओं पर जोर

आगे प्रधानमंत्री ने कहा, “मणिपुर के नाम में ही मणि है, ये वो मणि है जो आने वाले समय में पूरे नॉर्थ-ईस्ट की चमक को बढ़ाने वाली है। भारत सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि मणिपुर को विकास के रास्ते पर तेजी से आगे ले जाएँ। इसी कड़ी में मैं आज यहाँ आप सभी के बीच आया हूँ। थोड़ी देर पहले इसी मंच से करीब 7 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास हुआ है।

ये प्रोजेक्ट्स मणिपुर के लोगों की, यहाँ हिल्स पर रहने वाले ट्राइबल समाज की जिंदगी को और बेहतर बनाएँगे। भारत सरकार मणिपुर की विकास यात्रा को गति देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी भावना से, मैं आज आपके बीच आया हूँ।

कुछ समय पहले, इसी मंच से, लगभग ₹7,000 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया। ये परियोजनाएँ मणिपुर के लोगों और हमारे जनजातीय समुदायों के जीवन में महत्वपूर्ण सुधार लाएँगी।

पहले यहाँ गाँवों में पहुँचना कितना मुश्किल था, आप सभी जानते हैं। अब सैकड़ों गाँवों में यहाँ रोड कनेक्टिविटी पहुँचाई गई है। इसका बहुत अधिक लाभ पहाड़ी लोगों को, ट्राइबल गाँवों को हुआ है। हमारी सरकार के दौरान ही मणिपुर में रेल कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। जीरीबाम-इंफाल रेलवे लाइन बहुत जल्द राजधानी इंफाल को नेशनल रेल नेटवर्क से जोड़ देगी।

बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं का वादा

मणिपुर की सीमा अन्य देशों से लगती है और यहाँ कनेक्टिविटी हमेशा से एक चुनौती रही है। मैं समझता हूँ कि खराब कनेक्टिविटी के कारण आपको किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए, 2014 से, मैंने मणिपुर में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर बहुत ज़ोर दिया है।

इसके लिए, भारत सरकार ने दो स्तरों पर काम किया है। पहला, हमने रेल और सड़क परियोजनाओं के लिए बजट में कई गुना वृद्धि की है। दूसरा, हमने शहरों से गाँवों तक सड़कें बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है। हाल के वर्षों में, यहाँ राष्ट्रीय राजमार्गों पर ₹3700 करोड़ खर्च किए गए हैं और ₹8700 करोड़ के इंवेस्ट से नए राजमार्गों पर काम चल रहा है।

आज भारत बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। हम बहुत जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाले हैं। हमने देशभर में गरीबों के लिए पक्के घर बनाने की योजना शुरू की। इसका फायदा मणिपुर के भी हजारों परिवारों को मिला।

बीते सालों में 15 करोड़ से अधिक देशवासियों को नल से जल की सुविधा मिल चुकी है। मणिपुर में 7-8 साल पहले तक सिर्फ 25-30 हजार घरों में ही पाइप से पानी आता था। आज यहाँ साढ़े 3 लाख से अधिक घरों में नल से जल की सुविधा मिल रही है।

शांति और विकास की अपील

एक समय था जब दिल्ली में लिए गए फैसलों को यहाँ तक पहुँचने में दशकों लग जाते थे। आज, हमारा चुराचांदपुर, हमारा मणिपुर, देश के बाकी हिस्सों के साथ मिलकर प्रगति कर रहा है। जैसे हमने देश भर के गरीबों के लिए पक्के मकान बनाने की घोषणा की, मणिपुर को भी इसका लाभ मिला है।

यहाँ लगभग 60,000 घर पहले ही बन चुके हैं, जिससे हज़ारों परिवारों को सम्मान और सुरक्षा का जीवन मिल रहा है। हमें संतोष है कि हाल ही में Hills और Valley में अलग-अलग ग्रुप्स के साथ समझौतों के लिए बातचीत हुई है।

ये भारत सरकार के उन प्रयासों का हिस्सा है… जिसमें संवाद, सम्मान और आपसी समझ को महत्व देते हुए शांति की स्थापना के लिए काम किया जा रहा है। मैं सभी संगठनों से अपील करूँगा कि शांति के रास्ते पर आगे बढ़कर अपने सपनों को पूरा करें। मैं आपके साथ हूँ… भारत सरकार मणिपुर के लोगों के साथ है।

स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान

पहले पहाड़ी और जनजातीय इलाकों में अच्छे स्कूल और अस्पताल बस एक सपना ही थे। आज भारत सरकार के प्रयासों से यह स्थिति बदल रही है। चुराचांदपुर में अब एक मेडिकल कॉलेज स्थापित हो गया है। आज़ादी के दशकों बाद भी, मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में एक भी मेडिकल कॉलेज नहीं था।

हमारी सरकार ने इस जरूरत को पूरा किया है। पीएम-देवाइन योजना के तहत, हमारी सरकार पाँच पहाड़ी ज़िलों में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विकास कर रही है। आयुष्मान भारत योजना के जरिए भारत सरकार गरीबों को ₹5 लाख तक का मुफ़्त इलाज मुहैया करा रही है। अकेले मणिपुर में ही इस योजना के जरिए 2.5 लाख से ज़्यादा मरीज़ों को मुफ़्त इलाज मिल चुका है।

मणिपुर की धरती आशा और आकांक्षाओं की धरती है। दुर्भाग्य से, हिंसा ने इस खूबसूरत क्षेत्र पर अपनी छाया डाल दी है। कुछ समय पहले, मैं राहत शिविरों में रह रहे प्रभावित लोगों से मिला। उनसे मिलने के बाद, मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि मणिपुर में आशा और विश्वास का एक नया सवेरा उग रहा है।

किसी भी जगह विकास की जड़ें जमाने के लिए शांति आवश्यक है। पिछले ग्यारह वर्षों में, पूर्वोत्तर में कई संघर्ष और विवाद सुलझ गए हैं। लोगों ने शांति का मार्ग चुना है और विकास को प्राथमिकता दी है।

सरकार वर्किंग वूमेन हॉस्टल का निर्माण कर रही है। मैं विश्वास दिलाता हूँ, मणिपुर के विकास के लिए सरकार ऐसे ही सहयोग करती रहेगी। आप सभी को विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई। आपके प्यार-सम्मान का दिल से धन्यवाद। भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा विशेष रूप से उन क्षेत्रों में विकास को प्राथमिकता देने के लिए है, जो पिछले कुछ सालों में संघर्ष और विकास की चुनौतियों से गुजर रहे थे। उनकी योजनाओं में प्रमुख परियोजनाओं के अलावा, राज्यों के सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढाँचे को भी मजबूत करने का उद्देश्य है।

पीएम मोदी के इस दौरे से इन क्षेत्रों में न केवल बुनियादी ढाँचे का विकास होगा, बल्कि रोजगार के अवसर और क्षेत्रीय विकास में भी एक नया अध्याय जुड़ने की संभावना है।

गणेश विसर्जन के जुलूस में घुसा ट्रक, श्रद्धालुओं को रौंदा: 8 की मौत-22 घायल, कर्नाटक के हासन की घटना

कर्नाटक के हासन जिले के मोसलेहोसहल्ली गाँव में शुक्रवार (13 सितंबर 2025) को गणेश विसर्जन के लिए निकली एक शोभायात्रा में दर्दनाक हादसा हो गया। एक तेज रफ्तार ट्रक ने जुलूस को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और करीब 22 लोग घायल हो गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हासन की डिप्टी कमिश्नर केएस लता कुमारी ने बताया कि घायलों को इलाज के लिए केआईएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया है, वहीं 7 लोगों का इलाज एक निजी अस्पताल में हो रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

उन्होंने कहा कि हादसे के कारण की जाँच चल रही है, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रक डिवाइडर से टकराया और फिर जुलूस में घुस गया। ये भी कहा जा रहा है कि इस जुलूस में बड़ी संख्या में युवा, खासकर इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र शामिल थे, लेकिन इसकी पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस घटना पर गहरा शोक जताया है और मृतकों के परिवारों को 5 लाख की सहायता राशि देने की घोषणा की है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “यह घटना बेहद दुखद है। मैं प्रार्थना करता हूँ कि मृतकों की आत्मा को शांति मिले और घायल लोग जल्द ठीक हों। सरकार घायलों के इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी।”

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने भी हादसे पर दुख जताते हुए कहा, “गणपति विसर्जन के दौरान हुए इस दर्दनाक हादसे में कई लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ईश्वर से प्रार्थना है कि मृतकों की आत्मा को शांति मिले और उनके परिवारों को इस दुख को सहने की शक्ति मिले।”

हासन के सांसद श्रेयस पटेल ने भी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए सरकार से घायलों को बेहतर इलाज मुफ्त में उपलब्ध कराने की अपील की है।

48 सुरंगे, 142 पुल और 51km लंबी रेल लाइन: PM मोदी ने मिजोरम को दी ₹9000 करोड़ की सौगात, 3 एक्सप्रेस ट्रेनों की भी शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन दिवसीय दौरे पर हैं, जिसकी शुरुआत उन्होंने मिजोरम से की। यहाँ उन्होंने ₹9000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया, जिनमें तीन नई एक्सप्रेस ट्रेनों की शुरुआत भी शामिल है।

पीएम मोदी ने मिजोरम की जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “मिज़ोरम के अद्भुत लोगों को नमस्कार। मैं सर्वोच्च देवता पथियन को नमन करता हूँ, जो नीले पहाड़ों की इस खूबसूरत धरती पर नजर रखते हैं। मैं मिज़ोरम हवाई अड्डे पर पहुँच गया हूँ। दुर्भाग्य से, खराब मौसम के कारण, मैं आइज़ोल में आपसे मिलने नहीं आ पा रहा हूँ। फिर भी, मैं यहाँ से आपके स्नेह को सचमुच महसूस कर सकता हूँ।”

मिजोरम अब रेलवे मैप पर

पीएम मोदी ने कहा, “आज मिज़ोरम भारत की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह राष्ट्र के लिए, विशेषकर मिज़ोरम के लोगों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। आज से (13 सितंबर 2025) आइज़ोल भारत के रेलवे मानचित्र पर होगा।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “कुछ वर्ष पहले, मुझे आइज़ोल रेलवे लाइन की आधारशिला रखने का अवसर मिला था और आज (13 सितंबर 2025) हम इसे देशवासियों को समर्पित करते हुए गर्व महसूस करते हैं। दुर्गम भूभाग सहित कई चुनौतियों को पार करते हुए, बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन एक वास्तविकता बन गई है। हमारे इंजीनियरों के कौशल और हमारे कार्यकर्ताओं के उत्साह ने इसे संभव बनाया है।”

सैरांग से दिल्ली तक सीधी ट्रेन, आएगा बड़ा बदलाव

पीएम मोदी ने बताया कि पहली बार मिज़ोरम का सैरांग राजधानी एक्सप्रेस द्वारा दिल्ली से सीधे जुड़ेगा। यह सिर्फ़ एक रेलवे नहीं है, बल्कि परिवर्तन की जीवनरेखा है। यह मिज़ोरम के लोगों के जीवन और आजीविका में क्रांति लाएगी। मिज़ोरम के किसान और व्यवसाय देश भर के ज़्यादा बाज़ारों तक पहुँच पाएँगे। लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के बेहतर अवसर भी मिलेंगे। इस विकास से कई क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर पैदा होंगे।

पूर्वोत्तर अब बना भारत का विकास इंजन

पीएम मोदी ने कहा, “पिछले ग्यारह सालों से हम पूर्वोत्तर के विकास के लिए काम कर रहे हैं। यह क्षेत्र भारत का विकास इंजन बन रहा है। पिछले कुछ सालों में पूर्वोत्तर के कई राज्यों ने भारत के रेल मैप पर अपनी जगह बनाई है। पहली बार, ग्रामीण सड़कों और राजमार्गों, मोबाइल कनेक्टिविटी, इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली, नल का पानी और LPG कनेक्शन का विस्तार किया गया है।”

पीएम मोदी ने आगे बताया, “भारत सरकार ने सभी प्रकार की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत की है। मिज़ोरम को हवाई यात्रा के लिए उड़ान योजना का भी लाभ मिलेगा। बहुत जल्द, यहाँ हेलीकॉप्टर सेवाएँ शुरू होंगी। इससे मिज़ोरम के दूरदराज के इलाकों तक पहुँच बेहतर होगी।”

पूर्वोत्तर की संस्कृति का गर्व से प्रचार

पीएम मोदी ने कहा कि चाहे देश में हो या विदेश में, मुझे अपनी खूबसूरत संस्कृति के दूत की भूमिका निभाने और पूर्वोत्तर की अपार संभावनाओं को प्रदर्शित करने में बहुत खुशी हो रही है। कुछ महीने पहले, मुझे दिल्ली में अष्टलक्ष्मी महोत्सव में भाग लेने का अवसर मिला।

पीएम मोदी ने नॉर्थ ईस्ट के वस्त्र, पर्यटन और कई अन्य खूबियों पर प्रकाश डालते हुए कहा, “मैंने इंवेस्टर को इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं का पता लगाने और उनका उपयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।”

पीएम मोदी मणिपुर और असम में हजारों करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे। गुवाहाटी में भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती समारोह और कोलकाता में संयुक्त कमांडर सम्मेलन-2025 का उद्घाटन भी करेंगे।