Tuesday, April 14, 2026
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अब किया 20 साल की सिख लड़की का बलात्कार, पहले बुजुर्गों की पगड़ी गिरा-गिराकर लगाई थी मार: UK में नस्लीय हमले जारी, संसद में हुई कड़ी निंदा

ब्रिटेन के ओल्डबरी में सिख युवती के साथ बलात्कार और नस्लीय टिप्पणियाँ हुईं। हमलावरों ने 'अपने देश लौटो' कहा। पुलिस ने इसे नस्लीय रूप से प्रेरित हमला माना। इससे पहले भी सिख समुदाय पर ऐसे हमले हुए हैं।

ब्रिटेन के ओल्डबरी में बीस साल की एक सिख युवती के साथ न सिर्फ बलात्कार किया गया, बल्कि उस पर नस्लवादी टिप्पणियाँ भी की गईं। हमलावरों ने युवती से ‘अपने देश वापस जाओ’ कहा और उसे इस आधार पर निशाना बनाया कि वह भारतीय मूल की है।

यह हमला पिछले मंगलवार (9 सितम्बर 2025) की सुबह करीब 8:30 बजे टेम रोड के पास हुआ। पुलिस ने इसे ‘नस्लीय रूप से प्रेरित’ अपराध माना है और आरोपितों की तलाश में जुटी है।

पुलिस के मुताबिक, पीड़िता ने बताया कि दोनों हमलावर श्वेत पुरुष थे। इनमें से एक ने अपना सिर मुड़वाया हुआ था और उसने काले रंग की स्वेटशर्ट पहनी हुई थी, जबकि दूसरा ग्रे टी-शर्ट में था। इस समय सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक जाँच जारी है। पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि संदिग्धों की पहचान में मदद करें।

इस घटना ने स्थानीय सिख समुदाय को गहरे आक्रोश में ला दिया है। समुदाय के नेताओं ने इसे जानबूझ कर किया गया हमला बताया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लोगों का गुस्सा पूरी तरह से जायज है और इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि लोगों में सुरक्षा की भावना बनी रहे।

ब्रिटिश संसद में भी इस मामले की गूँज सुनाई दी। बर्मिंघम एजबेस्टन की सांसद प्रीत कौर गिल ने घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में खुले तौर पर नस्लवाद बढ़ा है और यह बेहद चिंताजनक है।

गिल ने साफ कहा, “यह युवती यहीं की है और हमारे समाज के हर सदस्य को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करने का अधिकार है।” वहीं, इलफोर्ड साउथ के सांसद जस अठवाल ने इसे ‘घृणित, नस्लवादी और स्त्री-विरोधी हमला’ बताया और कहा कि इस पर बेहद गंभीरता से कार्रवाई होनी चाहिए।

गौर करने वाली बात यह है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। महज एक महीने पहले ही वॉल्वरहैम्प्टन में रेलवे स्टेशन के बाहर तीन किशोरों ने दो बुजुर्ग सिख पुरुषों पर हमला कर दिया था। हमलावरों ने उन्हें जमीन पर गिराकर बेरहमी से लात-घूँसे मारे थे। इस दौरान उनकी पगड़ियाँ भी उतर गई थीं। लगातार हो रही ऐसी घटनाएँ न सिर्फ पीड़ित परिवारों को, बल्कि पूरे प्रवासी और अल्पसंख्यक समुदाय को असुरक्षित महसूस करवा रही हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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