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मुंबई की तरह मेरठ में भी मुस्लिमों ने बनाया ‘हलाल इलाका’, अब्दुल्ला कॉलोनी में हिंदुओं की एंट्री पर रोक: UP के मंत्री बोले- गड़बड़ी मिलेगी तो गरजेगा बुलडोजर

उत्तर प्रदेश के मेरठ में अब्दुल्ला रेजीडेंसी में हिंदू धर्म के लोगों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस कॉलोनी में हिंदुओं को प्लॉट बेचने पर भी पाबंदी लगाई गई है। यह भी सामने आया कि कॉलोनी को जेल में बंद गैंगस्टर शारिक की जमीन पर बनाया गया है, जहाँ मस्जिद का निर्माण भी करवा दिया गया है।

मामला सामने आने के बाद ऊर्जा राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर ने अब्दुल्ला कॉलोनी की उच्च स्तरीय जाँच की माँग करते हुए मेरठ जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। पत्र में कॉलोनी के नक्शा और मस्जिद निर्माण की जाँच की माँग की गई है। मंत्री तोमर ने कहा कि कॉलोनी में गड़बड़ी मिली तो बुलडोजर गरजेगा।

अब्दुल्ला कॉलोनी का नक्शा की वैधता पर उठे सवाल

मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री तोमर ने कहा कि उनके संज्ञान में आया है कि अब्दुल्ला रेजीडेंसी पिछले 10 सालों से विकसित की जा रही है, जिसमें केवल मुस्लिम लोगों को बसाने की योजना बनाई गई है। तोमर ने कहा कि यह सोच पूरी तरह गलत है, किसी एक धर्म तक सीमित नहीं हो सकता।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कॉलोनी में बनी मस्जिद का नक्शा वैध तरीके से स्वीकृत हुआ है या नहीं। साथ ही गैंगस्टर शारिक की जमीन शामिल होने की बात पर कहा कि इसकी गहराई से जाँच की जाएगी। तोमर ने कहा कि धार्मिक आधार पर बाँटने का प्रयास किसी भी सूरत में सफल नहीं हो पाएगा।

अब्दुल्ला कॉलोनी में 75 प्लॉट में सिर्फ 4 हिंदू परिवार को बेचे

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब्दुल्ला रेजीडेंसी में 90 प्रतिशत प्लॉट मुस्लिम लोगों को बेचे गए हैं। कॉलोनी में कुल 75 प्लॉट हैं, जिनमें सिर्फ 4 प्लॉट हिंदुओं के हैं। कॉलोनी के प्रोजेक्टर के दो पार्टनर हैं, मेजर जनरल जावेद इकबाल और महेंद्र गुप्ता।

जावेद इकबाल के भाई आबिद इकबाल ने सफाई देते हुए कहा कि यह एक बिजनेस प्रोजेक्ट है, जो सभी के लिए खुला है। यहाँ अधिकतर मुस्लिम लोगों ने निवेश किया है। हिंदू खरीदार सिर्फ 10 प्रतिशत हैं। साथ ही आबिद ने मस्जिद निर्माण की बात को भी नकार दिया।

वहीं बिल्डर महेंद्र गुप्ता ने कहा कि सभी आरोप निराधार हैं, अब्दुल्ला रेजीडेंसी में किसी को भी प्लॉट खरीदने पर रोक नहीं लगाई गई है। गुप्ता ने कहा कि यह कॉलोनी आवास विकास की स्वीकृति से बनाई गई है। साथ ही गुप्ता ने कहा कि वे कॉलोनी की जाँच के लिए तैयार हैं।

हालाँकि, आबिद इकबाद और महेंद्र गुप्ता की बातों में कितनी सच्चाई है, यह तो जाँच के बाद ही साफ हो सकेगा। अब्दुल्ला कॉलोनी की जाँच के लिए मंत्री सोमेंद्र तोमर ने डीएम को पत्र लिखा है। फिलहाल प्रशासन की ओर से कॉलोनी पर किसी भी तरीके की कार्रवाई नहीं की गई है।

मुंबई में हलाल अपार्टमेंट को लेकर भी छिड़ा था विवाद

मेरठ की तरह ही इससे पहले मुंबई के हलाल अपार्टमेंट को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। जहाँ मीरा रोड स्थित गैलेक्सी फेस-2 प्रोजेक्ट पर एक विज्ञापन सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

विज्ञापन में कहा गया कि इस प्रोजेक्ट को केवल मुस्लिम लोगों को ही बेचा जाएगा। यहाँ तक 22 मंजिला इस इमारत के पहले फ्लोर पर मस्जिद और नमाज के लिए अलग जगह और दूसरे फ्लोर पर हलाल के लिए व्यवस्था तय की गई।।

संघर्ष, सेवा, समर्पण और संस्कार की भट्ठी में तपकर 100 वर्ष का हुआ है RSS का संगठन: अब राष्ट्रहित के ‘पंच परिवर्तन’ से परम वैभव की प्राप्ति का संकल्प

वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। संघ की स्थापना का मुख्य ध्येय हिंदू समाज को जागृत और संगठित करते हुए राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव का विकास करना था। दैनंदिन शाखाओं के माध्यम से अनुशासन और चरित्र-निर्माण पर बल देते हुए व्यक्तित्व विकास और सामाजिक संगठन को समर्पित संघ आज विश्व का सबसे बड़ा और प्रभावशाली सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन बन गया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा संघर्ष, सेवा, समर्पण, संगठन और संस्कारों से परिपूर्ण रही है, जिसका व्यापक प्रभाव भारतीय समाज में देखा जा सकता है। संघ ने समाज सेवा, स्वदेशी, शिक्षा, ग्राम-विकास, आपदा-राहत, वनवासी कल्याण  और सामाजिक समरसता आदि अनेक क्षेत्रों में निरंतर काम करते हुए सकारात्मक बदलाव लाने का सराहनीय प्रयास किया है।

संघ की विचारधारा सभी को साथ लेकर चलने एवं समरसता पर केंद्रित रही है। संघ का उद्देश्य व्यक्तियों में नैतिकता, कर्तव्यबोध और नेतृत्वक्षमता विकसित करना है। संघ अपने स्वयंसेवकों को एक राष्ट्रीय दृष्टि देता है। संघ का मानना है कि व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि वह अपने राष्ट्र को किस दिशा में ले जाना चाहता है और उसमें उस व्यक्ति का क्या योगदान हो सकता है। संघ अपने स्वयंसेवकों को भारत-बोध से अनुप्राणित करते हुए निष्काम कर्म और निस्वार्थ सेवा करने की प्रेरणा देता है। यह जीवन में अध्यात्म के समावेश से ही संभव है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूल विचार एवं दर्शन ‘राष्ट्र को परम वैभव’ की ओर ले जाना है। इसके लिए समाज में एकता, समरसता और सनातन सांस्कृतिक मूल्यों की पुनर्प्रतिष्ठा आवश्यक  है। संघ का मुख्य उद्देश्य एक सशक्त, संगठित और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में एक ऐसे बलशाली और वैभवशाली भारत का पुनर्निर्माण करना है, जो अपनी गौरवशाली सनातन संस्कृति, समृद्ध प्राचीन इतिहास और उन्नत मानव मूल्यों पर गर्व करता हो। अनुशासन, निस्वार्थ सेवा, और ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना संघ के दर्शन की आधारसरणि है। ‘संघ शक्ति कलियुगे’ का मूल मंत्र संघ की विचारधारा का केंद्रीय भाव है। उपरोक्त साध्य के लिए संगठन और सेवा को सर्वोत्तम साधन माना गया है।

भारत के सामाजिक– राष्ट्रीय जीवन में संघ के स्वयंसेवकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और महनीय रहा है। स्वयंसेवकों ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेकर ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ संघर्ष किया।  स्वयंसेवकों ने 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1947, 1965, 1971 और 1999  के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उल्लेखनीय योगदान किया, दादरा और नगर हवेली एवं गोवा के मुक्ति आन्दोलन में निर्णायक भूमिका निभाई।

भारतीय लोकतंत्र के काले अध्याय आपातकाल के विरोध में भी लाखों स्वयंसेवक जेल गए। लम्बे समय तक भूमिगत आंदोलन चलाकर लोकतंत्र की रक्षा और पुनर्प्रतिष्ठा की। विभाजनकारी अनुच्छेद 370 की समाप्ति द्वारा जम्मू–कश्मीर के अधिमिलन के अलावा संघ ने प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटनाओं और संकटों के समय सदैव बचाव एवं राहत कार्य किया, भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में स्तुत्य योगदान किया, और समाज में शिक्षा, संस्कार एवं स्वदेशी को बढ़ावा दिया।

इसके अलावा, स्वयंसेवकों ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक सुधार, सकारात्मक परिवर्तन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए काम किया। संघ के स्वयंसेवक कठिनतम परिस्थितियों में देश और समाज के लिए अपनी अडिग प्रतिबद्धता दिखाते आए हैं। विडंबना ही है कि समाज सेवा, सामाजिक संगठन और राष्ट्र निर्माण का अभूतपूर्व कार्य करने के बावजूद संघ को अनेकशः प्रतिबंधों और अनवरत विरोध का सामना करना पड़ा।

संघ की हिन्दू और हिन्दुत्व की अवधारणा सांस्कृतिक, राजनीतिक और धार्मिक तत्वों का समावेशी संगम है। संघ के अनुसार, हिन्दुत्व एक मत/पंथ नहीं, बल्कि एक सभ्यता, संस्कृति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना है। संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने हिन्दू को उस व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया जो भारत को अपनी मातृभूमि और संस्कृति के रूप में स्वीकार करता है।

मतलब यह है कि हिन्दू वही है जिसकी पितृभूमि (जैसे सिंधु से हिंद महासागर तक की भूमि) और पुण्यभूमि एक हो। इस दृष्टिकोण में अन्य मत-पंथों के लोग भी शामिल हो सकते हैं, यदि वे सनातन संस्कृति और भारतीय जीवन-मूल्यों में आस्था रखते हैं। यह आपसी अविश्वास और असुरक्षा बोध की समाप्ति समाप्ति का सूत्र है। संघ विविधताओं का सम्मान करते हुए उनमें एकता के सूत्र ढूंढ़ने के लिए समर्पित और संकल्पित है।

हिन्दुत्व को संघ ने एक समावेशी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के रूप में देखा है, जिसमें सारे भेदभाव से ऊपर उठकर भारत की सांस्कृतिक एकता और अखंडता को महत्व दिया गया है। संघ का यह भी मानना है कि हिन्दू राष्ट्रवाद भारत की बहुसंख्यक हिन्दू संस्कृति और मूल्यों पर आधारित है, लेकिन इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय की उपेक्षा या अवहेलना करना नहीं, बल्कि सभी को भारतवासियों के रूप में संगठित करना है।

पिछले दिनों दिल्ली के विज्ञानं भवन में संपन्न तीन दिवसीय व्याख्यानमाला में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत हिंदुत्व के समावेशी स्वरूप पर जोर देते हुए कहा है कि संघ के हिंदुत्व का मतलब स्वीकार और समावेशिता है न कि बहिष्कार और विरोध। समरसता, सद्भाव और सहअस्तित्व हिन्दू जीवन पद्धति की मूल पहचान है। इसमें मुस्लिम तथा अन्य मताबलम्बियों के प्रति भी सहज स्वीकार्यता का भाव है।

उन्होंने नेशन-स्टेट और राष्ट्र, पंथ-निरपेक्षता और सर्वधर्म समभाव,परम्परा और आधुनिकता, मनुष्य और तकनीक, भारतीय भाषाओँ और राष्ट्र भाषा हिंदी तथा औपनिवेशिक भाषा अंग्रेजी जैसी विचार सरणियों के सम्बन्ध में भी संघ का दृष्टिकोण स्पष्ट कियाI यह व्याख्यान–माला कार्यक्रम वस्तुतः नागरिक समाज के साथ प्रत्यक्ष संपर्क और संवाद करते हुए निहित स्वार्थवश फैलाई गई भ्रांतियों के निराकरण का गंभीर प्रयास था।

शताब्दी वर्ष में संघ का समाज में ‘पंच-परिवर्तन’ लाने पर विशेष ध्यान है। इन पंच-परिवर्तनों के माध्यम से भारतीय समाज में सकारात्मक, सर्वांगीण और समीचीन परिवर्तन लाना है। इसमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुम्ब प्रबोधन, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। पंच परिवर्तन के माध्यम से भारत राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि को बढ़ाया जा सकेगा।

सामाजिक समरसता का आधार संघ की समावेशी राष्ट्र और समाज की अवधारणा है। यह अवधारणा जातीय भेदभाव से मुक्त समानता पर आधारित समरस समाज के निर्माण की है।

स्वदेशी के अंतर्गत अपनी चेतना को भारतीय मनीषा के अनुरूप ढालने पर बल है। उपभोक्तावाद की चपेट में न आना और आर्थिक रूप से अपने राष्ट्र को सुदृढ़ करने हेतु स्वदेशी सामानों का ही उपभोग करना चाहिए। ऐसे सामान दूसरे देशों से आयात न करना जिनका उत्पाद हम स्वयं कर रहे हैं। संयमित उपभोग ही उपभोक्तावाद की चुनौती का सही उत्तर होगा।

स्व का बोध और स्व के प्रति गौरव का भाव ही हमें औपनिवेशिक दासता से सच्ची और पूरी मुक्ति दिला सकता है। भाषा, भूषा, भोजन, भवन, भ्रमण और भजन आदि में हमें स्वदेशी को प्राथमिकता देनी चाहिए। औपनिवेशिक दासता से मुक्ति के प्रयास में भाषाई परतंत्रता से मुक्त होना आवश्यक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत भारतीय भाषाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।

भारतीय भाषाओं में अध्ययन-अध्यापन और पाठ्य-सामग्री उपलब्ध होन से सुदूरवर्ती  क्षेत्रों के वंचित वर्गों के विद्यार्थी भी अपनी प्रतिभा का विकास करते हुए राष्ट्र-निर्माण में अपना पूर्ण योगदान दे सकेंगे। औनिवेशिक भाषा अंग्रेजी की जकड़न प्रतिभा विकास की बड़ी बाधा रही है। अपने भाषाई स्वबोध को जागृत करके ही एक आत्मनिर्भर और स्वतंत्रचेता राष्ट्र बना जा सकता है। ऐसा करके ही हम सुनहरे भविष्य के निर्माणकर्ता बन सकेंगे।

आजकल पर्यावरण संबंधी समस्याओं और आपदाओं दुनिया के देश पीड़ित हैं। भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है। पिछले कुछ दशकों में भू-स्खलन होने, बादल फटने, बाढ़ आने, सूखा पड़ने जैसी आपदाओं से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गर्मियों में गर्मी के, बारिश में बारिश के और सर्दियों में सर्दी के रिकॉर्ड टूटते रहते हैं।

भारत का सिरमौर और सर्वाधिक विश्वसनीय सुरक्षा प्रहरी हिमालय भी खतरे में है।  ऋतु-चक्र पूरी तरह तहस-नहस हो गया है। पर्यावरण-संकट प्राकृतिक असंतुलन का परिणाम है। आज हमें विकास के ऐसे मॉडल को विकसित करना है जो प्रकृति का सहगामी और सहकारी हो। प्रकृति के दोहन-शोषण पर आधारित संघर्षपूर्ण सम्बन्ध के स्थान पर साहचर्यपूर्ण सम्बन्ध बनाना ही मनुष्यता के लिए कल्याणकर है।

कुटुम्ब प्रबोधन का उद्देश्य संकटग्रस्त पारिवारिक-सामाजिक जीवन को बचाना है। परिवार भारत की सबसे बड़ी विशेषता और उपलब्धि रही है। परिवार सामाजिक परम्पराओं और संस्कारों के भी संवाहक होते हैं। वे सामाजिक सुरक्षा और संतोष के आदिस्रोत हैंI व्यक्तिवाद और उपभोक्तावाद की पश्चिमी आंधी ने इसकी नींव की हिला दिया है।

आज परिवार टूट रहे हैं, सम्बन्धों में सरसता और आत्मीयता के स्थान पर अलगाव और संघर्ष दिखाई पड़ता है। दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही यह प्रवृत्ति अत्यंत चिंताजनक है। इस विकराल होती चुनौती को समय रहते हुए पहचानकर संघ प्राथमिकता के आधार पर इससे निपटने के लिए कृतसंकल्प है।

यह विचारणीय प्रश्न है कि एक नागरिक के रूप में हमारे क्या कर्तव्य हैं? हम कर्तव्य-सचेत समाज की जगह अधिकार सचेत और आत्मकेंद्रित समाज बनते जा रहे हैं। हमारे समाज में हम सारे काम सरकार के ऊपर छोड़ देते हैं। जबकि सच यह है कि बिना नागरिक सहभागिता के सरकार भी कोई बड़ा परिवर्तन नहीं कर सकती।

टैक्स और बिल आदि समय पर जमा, लाइसेंस आदि को नियत समय पर नवीनीकृत करवाना, मतदान करना, यातायात नियमों का पालन करना, बिजली-पानी आदि संसाधनों की बचत करना, राष्ट्रीय संपत्ति को क्षति न पहुँचाना, राष्ट्रीय पर्वों, प्रतीकों और संस्थाओं का सम्मान करना आदि कार्य दैनिक जीवन की देशभक्ति है। अतः यह अत्यावश्यक है कि नागरिकों को अपने कर्तव्य का बोध हो और वे राष्ट्र निर्माण में अपना समुचित योगदान दें।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रतिपादित पंच-परिवर्तन से सामाजिक जीवन में अनुशासन, देशभक्ति और नागरिक सहभागिता बढ़ेगी। इससे राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और राष्ट्रोन्नयन की आधारभूमि तैयार होगी।

संघ भविष्य की भावी कार्य योजना में शाखाओं के माध्यम से संघ-कार्य का विस्तार शामिल है। आद्य सरसंघचालक डॉ. हेडगेवार की कल्पना थी कि ‘संघ अंततः समाज में विलय हो जाएगा और समाज संघमय हो जाएगा’। इस एकात्मता और एकमेकता के सन्दर्भ में कबीर वाणी प्रासंगिक लगती है – “जल में कुंभ, कुंभ में जल है बाहिर भीतर पानी …….।”

इसके अलावा संघ के शताब्दी-संकल्प में शिक्षा में भारतीय दृष्टि का समावेश, स्वावलंबन आधारित अर्थव्यवस्था, संसाधनों और सत्ता का विकेंद्रीकरण, ग्रामोदय से राष्ट्रोदय और युवाओं को संस्कार एवं रोजगार देते हुए प्रतिभा पलायन को रोकना शामिल है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के आदर्श का अनुसरण करने वाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसे कल्याण-मन्त्र पर कार्यशील रहते हुए विश्व शांति और मानव-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा।

कनाडा ने अपनी रिपोर्ट में पहली बार मानी खालिस्तानी संगठनों को फंडिंग मिलने की बात, अपनी नाकामी कबूल भारत के दावों पर लगाई मुहर

भारत लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि खालिस्तानी कट्टरपंथी संगठनों को विदेशों से, खासकर कनाडा से, आर्थिक मदद मिलती है। अब पहली बार खुद कनाडा की आधिकारिक रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है।

कनाडा की खुफिया एजेंसी Assessment of Money Laundering and Terrorist Financing Risks in Canada की ताजा रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि खालिस्तानी संगठन न केवल कनाडा में सक्रिय हैं, बल्कि उन्हें विदेशों से लगातार आर्थिक सहयोग भी मिल रहा है। उनकी तरफ से यह स्वीकार करना भारत के उस दावे को मजबूत करता है, जिसमें कहा गया था कि कनाडा खालिस्तान समर्थक गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करने में नाकाम रहा है।

नई रिपोर्ट में क्या है खास

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले कनाडा में खालिस्तानी संगठनों का एक बड़ा फंडरेजिंग नेटवर्क था। समय के साथ यह नेटवर्क छोटे-छोटे समूहों और व्यक्तियों तक सिमट गया है। ये लोग भले ही किसी विशेष संगठन से जुड़े न हों, लेकिन खालिस्तान आंदोलन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और आर्थिक सहयोग इस पूरे नेटवर्क को जिंदा रखने का काम कर रहा है।

रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि कनाडा समेत कई देशों से इन संगठनों को लगातार फंडिंग हो रही है। यही वजह है कि भारत में खालिस्तान समर्थक हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की लगतार कोशिश कर रहे हैं।

पुख्ता सबूतों की बात

कनाडा के आपराधिक कानून (Criminal Code) के तहत कई संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। इसमें हमास, हिजबुल्लाह, बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन जैसे संगठन शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इन संगठनों को कनाडा से वित्तीय मदद मिलने के सबूत खुफिया एजेंसियों और कानून प्रवर्तन इकाइयों ने जुटाए हैं। यानी अब यह बात केवल आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि आधिकारिक रूप से दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं कि कनाडा की धरती का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।

खलिस्तानियों पर भारत का दावा सही साबित

भारत वर्षों से कहता रहा है कि कनाडा खालिस्तानी तत्वों को खुली छूट देता है। भारतीय अधिकारियों का कहना था कि वहाँ से न केवल फंडिंग होती है बल्कि प्रचार-प्रसार और राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिशें भी होती हैं।

इस मुद्दे को लेकर भारत और कनाडा के बीच कई बार तल्ख बयानबाज़ी हुई। अब जब कनाडा की अपनी एजेंसी ने स्वीकार किया है कि यह नेटवर्क मौजूद है और सक्रिय भी है, तो भारत का दावा पूरी तरह सही साबित होता है।

कनाडा ने अपनी जमीन पर खालिस्तानी गतिविधियों की मौजूदगी मानी

दिलचस्प बात यह है कि कनाडा की खुफिया एजेंसी की इस रिपोर्ट ने यह भी स्वीकार किया है कि उसकी धरती से खालिस्तानी कट्टरपंथी सक्रिय हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि 1980 के दशक से ही कनाडा स्थित खालिस्तानी समूह पंजाब में अलग सिख राज्य की माँग के लिए हिंसक तरीकों का इस्तेमाल करते आ रहे हैं।

भारत लंबे समय से इस खतरे की तरफ ध्यान दिला रहा था, लेकिन कनाडा की सरकारें अक्सर इसे नजरअंदाज करती रहीं। खासकर पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो पर यह आरोप लगता रहा कि उन्होंने खालिस्तानी समर्थकों को राजनीतिक वजहों से नजरअंदाज किया।

कनाडा का दोहरा रवैया और कूटनीतिक संकट

रिपोर्ट में एक और अहम बात सामने आई। रिपोर्ट में जहाँ खालिस्तानी तत्वों की मौजूदगी और फंडिंग का सच स्वीकार किया, वहीं उसने भारत पर भी आरोप लगाया कि वह कनाडा में हस्तक्षेप और जासूसी करता है। रिपोर्ट में भारत का नाम चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ ‘विदेशी हस्तक्षेप के प्रमुख आरोपितों’ में शामिल किया गया है।

यानी एक तरफ तो कनाडा यह मान रहा है कि खालिस्तानी आतंकवाद उसकी जमीन से पनप रहा है, दूसरी तरफ भारत पर हस्तक्षेप का आरोप लगाकर कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश भी कर रहा है। यह दोहरी स्थिति कनाडा को उलझन में डाल रही है।

निज्जर मामले से भारत-कनाडा के रिश्तों पर पड़ा असर

यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब भारत और कनाडा के रिश्ते हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद ठंडे पड़े थे। कनाडा ने इस मामले में भारत पर आरोप लगाया था, लेकिन भारत ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। अब जब सीएसआईएस ने आधिकारिक तौर पर खालिस्तानी गतिविधियों की मौजूदगी स्वीकार कर ली है, तो यह कनाडा के लिए असहज स्थिति है।

हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच मुलाकात हुई। दोनों देशों ने रिश्तों को पटरी पर लाने के लिए नए उच्चायुक्त नियुक्त करने और व्यापार वार्ता फिर से शुरू करने पर सहमति जताई। ऐसे में यह रिपोर्ट दोनों देशों के बीच बातचीत का अहम मुद्दा बन सकती है।

खलिस्तानी गतिविधियों से खतरा अब भी बरकरार

रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि आतंकवादी संगठनों के लिए विदेशों से मिलने वाला आर्थिक सहयोग उनकी गतिविधियों को जिंदा रखने का सबसे बड़ा साधन है। खालिस्तानी समूह भी इसी तरह प्रवासी समुदायों और गैर-लाभकारी संस्थाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। कनाडा के सामने अब यह चुनौती है कि वह अपने लोकतांत्रिक ढांचे और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए कैसे इन कट्टरपंथी गतिविधियों पर लगाम लगाए।

‘मुस्लिम मेरी हत्या करना चाहते हैं’: कुरान जलाने वाली अमेरिका की महिला नेता को मिल रही धमकी, बताया- यहूदी और हिंदू भी निशाने पर

अमेरिका में टेक्सास से रिपब्लिकन उम्मीदवार वेलेंटीना गोमेज (Valentina Gomez) एक बार फिर इस्लाम के विरोध में उतर आई हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम मजहब के लोग उन्हें जान से मारना चाहते हैं। गोमेज ने यह जानकारी FBI के हवाले से दी है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए वेलेंटीना गोमेज ने कहा, “FBI ने मुझे कॉल किया और बताया कि मुस्लिम मुझे मारना चाहते हैं। सच यह है कि वे हम सभी और जो भी शास्त्रों को मानते हैं, उन सभी को मारना चाहते हैं। सिर्फ कुरान को मानने वाले लोगों को नहीं मारा जाएगा।”

वेलेंटीना गोमेज ने आगे कहा, “इसमें यहूदियों, ईसाइयों, हिंदुओं और सभी धर्मों के लोगों को निशाना बनाया जाएगा। मिशिगन में इस्लामी आतंकवादी को अधिकारिक पुलिस बैज दिए गए हैं ताकि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकें जो इस्लामी कानून का पालन नहीं करता है।”

बेटियों का बलात्कार करेंगे मुस्लिम: गोमेज

वीडियो के कैप्शन में वेलेंटीना गोमेज लिखती हैं, “अगर मुस्लिम बहुसंख्यक हो गए तो वे आपकी बेटियों का उनकी मासूमियत के बावजूद बलात्कार करेंगे और आपके समुदायों को ब्रिटेन की तरह ही गुलामी में ले जाएँगे।”

वेलेंटीना गोमेज द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो का कैप्शन

वे आगे लिखती हैं, “FBI जानती है कि इस्लाम का युद्ध मेरे खिलाफ नहीं है- यह अमेरिका के खिलाफ है और मैं यहूदियों और हिंदुओं के साथ बस बीच में खड़ी हूँ। कॉन्ग्रेस इन आतंकवादियों से अमेरिका की रक्षा नहीं करेगी इसीलिए मुझे भेज दो, क्योंकि मैं ये करूँगी।”

वेलेंटीना गोमेज ने जलाई कुरान, लगाए इस्लाम-विरोधी नारे

यह पहली बार नहीं है जब वेलेंटीना गोमेज ने इस्लाम का विरोध किया है। हाल ही में अगस्त 2025 में उन्होंने कुरान को गन के फायर शॉट से जला डाला था। यह वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिसके बाद उनके एक्स अकाउंट से वीडियो को हटवा दिया गया था।

इससे पहले वेलेंटीना गोमेज विवादों में घिरी थीं। जब मई 2025 में टेक्सास स्टेट कैपिटल में आयोजित मुस्लिम नागरिक सहभागिता कार्यक्रम में अचानक मंच पर खड़ी हो गईं और माइक छीनकर इस्लाम विरोधी नारे लगाने लगीं।

इस घटना का वीडियो भी वेलेंटीना गोमेज ने शेयर किया था, जिसमें उन्होंने लिखा, “टेक्सास में इस्लाम के लिए कोई जगह नहीं है। मेरी मदद करें ताकि हम अमेरिका के इस्लामीकरण को खत्म कर सकें।”

कौन है वेलेंटीना गोमेज ?

रिपब्लिकन उम्मीदवार गोमेज राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) कैम्पेन की समर्थक हैं। वे टेक्सास में ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन कॉन्ग्रेस से टेक्सास से उम्मीदवार हैं। फिलहाल वे अमेरिका में LGTBQ और इस्लाम के विरोध में अभियान चला रही हैं।

वेलेंटीना गोमेज का जन्म 8 मई 1999 को कोलंबिया के मेडेलिन शहर में हुआ था। 2009 में वह परिवार के साथ अमेरिका आ कर बस गईं। पढ़ाई-लिखाई के बाद रियल एस्टेट और फाइनेंस सेक्टर में हाथ आजमाया। वह नेस्ले से भी जुड़ी रही हैं।

राजनीति में आते ही गोमेज का करियर विवादों से घिर गया। सार्वजनिक तौर पर मुसलमानों, LGBT+ कम्युनिटी, अश्वेतों और इमिग्रेंट्स के खिलाफ उन्होंने विवादित बयान दिए।

पेरियार के लिए ऑक्सफोर्ड पहुँच गए स्टालिन, पर नहीं याद रहे राधाकृष्णन: जिसने हिन्दुओं को ‘कीड़े-मकोड़े’ कहा, उसके लिए कितना गिरेगी DMK

5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर जब देशभर में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि दी जा रही थी, उन्हें याद कर शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक जगहों पर आयोजन किए जा रहे थे, तब तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK ने अपने सोशल मीडिया मंचों पर पेरियार ई वी रामासामी के लिए कई ट्वीट कर रही थी।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इसी दिन ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पेरियार की पोट्रेट का अनावरण किया, लेकिन दिनभर में DMK के किसी नेता या पार्टी के आधिकारिक हैंडल पर राधाकृष्णन का नाम तक नहीं लिया गया। दक्षिण भारत की राजनीति में ये वैचारिक मतभेद लगातार गहराता जा रहा है।

तमिलनाडु के तिरुत्तनी में जन्मे और मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई करने वाले राधाकृष्ण ने भी ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र पढ़ाया। वे भारतीय दर्शन को पश्चिमी दुनिया में सम्मान दिलाने वाले प्रमुख विचारकों में से एक थे। इसके बावजूद राधाकृष्णन को दरकिनार करना DMK की अपनी ही रणनीति को ही दिखाता है।

ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पेरियार की पोट्रेट का अनावरण करते हुए स्टालिन ने उन्हें ‘रैशनलिज्म की वैश्विक रोशनी’ बताया। उन्होंने पेरियार को ‘स्वाभिमान आंदोलन का सूरज’ कहा और खुद को उनके विचारों से ओतप्रोत बताया।

असल में ऑक्सफोर्ड में हुआ ये यह आयोजन न केवल पेरियार की विचारधारा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने का प्रयास था, बल्कि DMK की वैचारिक विरासत को भी वैश्विक मान्यता दिलाने की रणनीति थी।

ऑक्सफोर्ड में स्टालिन को पेरियार की तस्वीर के अनावरण के लिए खास तौर पर बुलाया गया। इसके पीछे भी गहरी रणनीति शामिल है। एमके स्टालिन के पिता करुणानिधि की पूरी राजनीति पेरियार के विचारों पर आधारित थी। स्टालिन भी अपनी राजनीति में जब तब पेरियार का नाम और विचार के बारे में बात करते और अमल में लाने का प्रयत्न करते रहे हैं।

पेरियार वही शख्स है जिसने यहूदियों और ब्राह्मणों को कीड़े-मकोड़े जैसा माना था। स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने भी सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया के मच्छर से करते हुए इसे जड़ से मिटा देने की बात तक कही है। ऐसे में स्टालिन का इस कार्यक्रम में शामिल होना कोई नई बात नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक विरासत का ही विस्तार कहा जा सकता है।

नेहरू ने पेरियार को दिया था विकृत मानसिकता का तमगा

5 नवंबर 1957 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मद्रास के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी कामराज को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने पेरियार ईवी रामासामी नायकर की ओर से लगातार चलाए जा रहे ब्राह्मण-विरोधी अभियान की आलोचना की थी।

नेहरू ने लिखा था, “मैं पेरियार द्वारा लगातार चलाए जा रहे ब्राह्मण-विरोधी अभियान से अत्यंत व्यथित हूँ। मैं पहले भी इस विषय पर लिख चुका हूँ और मुझे बताया गया था कि यह मामला विचाराधीन है।”

यह पत्र उस समय लिखा गया था जब पेरियार ने 3 नवंबर 1957 को तंजावुर में एक सम्मेलन आयोजित किया था। इसमें उसने संविधान से धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को हटाने की माँग की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, पेरियार की पार्टी द्रविड़ कड़गम ने उस सम्मेलन में ब्राह्मणों की हत्या और उनके घरों को जलाने तक की बात कह डाली थी।

नेहरू ने अपने पत्र में साफ तौर पर लिखा था कि पेरियार लोगों को ‘छुरा घोंपने और हत्या करने’ के लिए उकसा रहे हैं और यह भाषा केवल ‘किसी अपराधी या पागल’ द्वारा ही इस्तेमाल की जा सकती है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह की बयानबाजी देश में असामाजिक और आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है। इसके चलते राष्ट्र का नैतिक पतन होता है। नेहरू ने सुझाव दिया था कि पेरियार को ‘पागलखाने में भेजा जाना चाहिए और उनकी विकृत मानसिकता का इलाज किया जाना चाहिए।’

पेरियार की ब्राह्मणों के प्रति नफरत इतनी गहरी थी कि उन्होंने अपने समर्थकों से ये तक कह दिया था, “अगर रास्ते में ब्राह्मण और साँप मिलें, तो पहले ब्राह्मण को मारो।”

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पेरियार पर आयोजित संगोष्ठी का आयोजन फैसल देवजी एक व्यक्ति की ओर से किया गया था। खुद को इतिहासकार बताने वाले फैसल ने अपनी किताब ‘द इंपॉसिबल इंडियन’ में महात्मा गाँधी पर कई अपमानजनक बातें लिख चुका है।

किताब में फैसल देवजी ने गाँधी की तुलना जोसेफ स्टालिन, एडॉल्फ हिटलर और माओ जेडोंग जैसे तानाशाहों से की है। इसमें उसने लिखा है, “कई मायनों में गाँधी लेनिन, हिटलर और माओ के की श्रेणी में आते हैं। उन्हें बीसवीं सदी की मुख्यधारा की राजनीति से अलग किसी तरह की नैतिकता वाला इंसान नहीं माना जाना चाहिए।”

असल में तो फैसल की विचारधारा पेरियार जितनी ही उग्र मानी जाती है। उसने नरेंद्र मोदी सरकार के तहत भारत में लोकतंत्र की स्थिति को लेकर भी कई लेख लिखे हैं, जिनमें उसने सरकार को ‘निराशाजनक और भयावह’ बताया है।

एमके स्टालिन के अलावा इस तथाकथित ‘इतिहासकार’ ने एक अन्य वक्ता को भी इस संगोष्ठी में शामिल किया था। ‘Dravidian Geography and the History of Respect’ नाम की इस संगोष्ठी के वक्ता थे- एक एंथ्रोपॉलोजिस्ट अर्जुन अप्पादुराई।

अर्जुन अप्पादुराई ने भी 2021 में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के तहत भारत में ‘राष्ट्रवाद’ की तुलना ‘नरसंहारवाद’ से की थी। एक रिसर्च पेपर में उन्होंने अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण को ‘मुस्लिम-विरोधी नीति निर्माण’ के रूप में पेश करने का प्रयास किया।

राधाकृष्णन को भूली DMK

विदेश में जाकर हिंदू विरोधी पेरियार की तस्वीर का अनावरण करने वाले स्टालिन अपने ही देश के महान शिक्षाविद और तमिलनाडु की धरती पर ही जन्मे सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भूल गए।

राधाकृष्णन भारत के पहले उपराष्ट्रपति (1952–1962) और दूसरे राष्ट्रपति (1962–1967) बने। साथ ही उन्होंने UNESCO और सोवियत संघ में भारत के राजदूत के रूप में भी कार्य किया। उनके सम्मान में ही भारत में शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

इसके बावजूद DMK शिक्षक दिवस के दिन ही पेरियार के लिए कई ट्वीट करती है लेकिन राधाकृष्णन को भूल गई। एक ओर पेरियार ने ब्राह्मणवाद और धार्मिक रूढ़ियों के खिलाफ बोला, वहीं राधाकृष्णन ने भारतीय दर्शन को दुनिया में सम्मान दिलाया। दोनों ही दक्षिण भारत से थे, लेकिन राधाकृष्णन पर DMK की चुप्पी एक वैचारिक असहजता को दर्शाती है।

DMK की यह रणनीति अपने समर्थकों को स्पष्ट संदेश देती है कि हम केवल उस विरासत को स्वीकारते हैं जो हमारे वैचारिक ढाँचे में फिट बैठती है। सवाल ये है कि क्या यह चुप्पी केवल राजनीतिक प्राथमिकताओं का परिणाम है, या फिर यह उस वैचारिक संघर्ष का हिस्सा है जिसमें पेरियार की नास्तिकता और सामाजिक न्याय की राजनीति को राधाकृष्णन के अध्यात्मिक और अकादमिक प्ररूपों से टकराव में देखा जाता है?

अब योगी सरकार देगी टीचर्स का मेडिकल खर्च, UP में शिक्षक-अनुदेशक-रसोइया को मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा: CM ने कहा- 9 लाख परिवारों को पहुँचेगा लाभ

उत्तर प्रदेश में सभी शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। यह सुविधा प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और वित्त पोषित विद्यालयों में कार्यरत सभी कर्मचारियों को दी उपलब्ध होगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षकों की सेवा को देखते हुए सरकार ने उनके स्वास्थ्य को लेकर यह फैसला लिया है।

सीएम योगी ने शिक्षक दिवस पर शुक्रवार (05 सितंबर 2025) को लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में यह तोहफा शिक्षकों को दिया। इस दौरान 81 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इस योजना का लाभ सभी शिक्षक, शिक्षक मित्र, अनुदेशक और रसोइया को मिलेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीएम योगी ने बताया कि इस सुविधा से प्रदेश के 9 लाख परिवार को सीधे तौर पर लाभ पहुँचेगा। इस घोषणा को ऐतिहासिक बताते हुए उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग सभी औपचारिकताएँ तुरंत पूरी करेंगे और तय समय के भीतर इस सुविधा का विस्तार करेंगे।

शिक्षा मित्र और अनुदेशकों का बढ़ेगा मानदेय

सीएम योगी ने यह भी बताया कि आने वाले समय में शिक्षा मित्र और अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने को लेकर भी काम होगा, इसके लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। सीएम ने कहा कि समिति की रिपोर्ट जल्द आने वाली है, जिसके बाद उनका मानदेय बढ़ा दिया जाएगा।

उज्जैन में मोती मस्जिद के पास भगवान गणेश की शोभायात्रा पर पथराव, ‘लव जिहाद’ थीम देख इस्लामी कट्टरपंथी भड़के: MP में चौंकने वाले हैं हिंदू लड़कियों को फँसाने के आँकड़ें

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के महिदपुर कस्बे में अनंत चतुर्दशी की पूर्व संध्या पर शुक्रवार (5 सितंबर 2025) को भगवान गणेश की परंपरागत सवारी निकाली गई। इस सवारी में ‘लव जिहाद’ पर एक झाँकी शामिल की गई थी, जिसमें टोपी, दाढ़ी और बुर्का पहने पुतलों का उपयोग किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह झाँकी जब मोती मस्जिद के सामने पहुँची, तो मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने इसका विरोध कर लोगों पर पथराव कर दिया। जिसके चलते सवारी में अफरातफरी मच गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए पथराव करने वालों को खदेड़ा। इसके बाद मुस्लिम समुदाय ने प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर झाँकी में धार्मिक प्रतीकों के उपयोग पर आपत्ति जताई।

सवारी के आयोजकों का कहना था कि ‘लव जिहाद’ के प्रति युवाओं को जागरूक करने के लिए यह झाँकी बनाई गई थी, लेकिन विवाद बढ़ने पर प्रशासन ने आयोजकों से बात की और झाँकी को हटवाया गया। इसके बाद सवारी आगे बढ़ाई गई।

एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है लेकिन एहतियात के तौर पर RAF और पुलिस बल तैनात किया गया है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले उज्जैन के घोंसला कस्बे में भी ‘लव जिहाद’ की झाँकी को लेकर विवाद हुआ था।

कट्टरपंथियों की ये हरकत चोर की ढाढ़ी में तिनका वाली कहावत को चरितार्थ करती है। इन हरकतों से साफ समझा जा सकता है कि मुस्लिम समुदाय खुद अपनी करनी जानता है और जब आईना दिखाया जा रहा है तो आग-बबूला हो कर ऐसी हरकतें कर रहा है। जबकि इनसे उन्हें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये सिर्फ जागरुकता के उद्देश्य से किया गया था।

इंदौर में आए दिन होते हैं लव जिहाद के खुलासे

इंदौर भी इसी इलाके में आता है, जहाँ से हाल ही में ‘मुस्लिम गैंग’ द्वारा हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने के कई मामले सामने आए हैं।

कुछ दिनों पहले ही उज्जैन में नफीस नाम के युवक ने हिंदू युवती को प्रेम जाल में फँसाकर उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और उसके साथ अश्लील हरकतें की थी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया था।

पीड़िता का कहना था कि उसने इंस्टाग्राम पर कानू पटेल नाम से रिक्वेस्ट भेजी थी। वह उससे चैट करने लगा और थोड़े दिनों बाद कहीं से उसे युवती का नंबर भी मिल गया। फोन पर बात करते हुए उसने युवती से प्यार का इजहार किया और शादी का प्रस्ताव रखा।

कुछ समय बाद युवती को उसके घर आने-जाने वाले लोगों से पता चला कि युवक का असली नाम नफीस है। पुलिस शिकायत में युवती ने बताया कि नफीस लगातार उसे धमकी दे रहा था कि अगर वह उससे नहीं मिली, तो वह उसे और उसके परिवार को जान से मार देगा।

डर कर जब वह उससे मिलने गई तो नफीस ने उससे निकाह करने और हमेशा खुश रखने का वादा किया। हालाँकि युवती ने उसे कहा कि उसके घरवाले इसके लिए राजी नहीं होंगे, लेकिन नफीस ने उसे बहला दिया।

निकाह के लिए मनाने के बाद नफीस ने युवती पर हिन्दू धर्म छोड़कर मुस्लिम धर्म अपनाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। युवती की शिकायत के बाद पुलिस ने नफीस को गिरफ्तार कर लिया।

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के कनाड़िया थाना क्षेत्र से ही लव जिहाद का एक और मामला भी सामने आया था, जहाँ यूसुफ खान नाम के एक आरोपित ने अपनी पहचान छिपाकर एक हिंदू युवती को प्रेम जाल में फँसाया, उससे दुष्कर्म किया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला। यूसुफ खान ने खुद को मुकेश बताकर युवती से नजदीकियाँ बढ़ाईं, शादी का झाँसा दिया और फिर उसका शारीरिक शोषण किया।

जब युवती को उसकी असली पहचान का पता चला, तो यूसुफ खान ने उसे धमकियाँ दीं और उसकी निजी तस्वीरें व वीडियो वायरल करने की धमकी दी। इस मामले में कनाड़िया पुलिस ने यूसुफ खान को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया। इस मामले में FIR की कॉपी भी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

लव जिहाद से जुड़े आँकड़े मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार ने विधानसभा में किए थे पेश

मध्य प्रदेश में लव जिहाद के मामलों की बात करें तो राज्य की बीजेपी सरकार ने कुछ दिनों पहले ही विधानसभा में लव जिहाद से जुड़े आँकड़े पेश किए थे। इसके अनुसार जनवरी 2020 से 15 जुलाई 2024 तक प्रदेश में लव जिहाद के 283 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें 73 पीड़िता नाबालिग है।

सरकार द्वारा विधानसभा में रखे गए आँकड़ों से यह भी पता चलता है कि काफी मामलों में पीड़िता दबाव नहीं झेल पाती हैं। वे या तो गवाही के दौरान पलटने को मजबूर हो जाती हैं या फिर दबाव बनाकर ‘सुलह’ कर लिया जाता है। आँकड़े बताते हैं कि अब तक ऐसे 86 मामलों में से 50 मामलों में आरोपित बरी हो चुके हैं। सजा केवल 7 मामलों में हुई है, वहीं एक मामला ‘सुलह’ के कारण खत्म हो गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहर, जहाँ पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू है, वहाँ भी लव जिहादी लड़कियों को अपना निशाना बना रहे हैं। इंदौर के सिर्फ नगरीय क्षेत्र के पुलिस थानों में लव जिहाद के 55 मामले दर्ज किए गए है। वहीं, पूरे इंदौर जिले में लव जिहाद के 74 मामले सामने आए हैं। यह पूरे राज्य में सर्वाधिक है।

इसके अलावा राजधानी भोपाल में लव जिहाद के 33 मामले, खंडवा और उज्जैन में 12-12 मामले और छतरपुर में 11 मामले दर्ज किए गए हैं। राज्य के अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज 283 मामलों में से 197 कोर्ट में लंबित हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बीजेपी विधायक आशीष गोविंद शर्मा के सवाल के जवाब में विधानसभा में लव जिहाद के मामलों को लेकर जानकारी दी।

उन्होंने कहा, “2020 से लेकर अब तक हुए लव जिहाद के प्रकरणों में प्रदेश के सभी जिलों में असुरक्षित बालिकाओं/महिलाओं को लक्ष्य बनाकर उनका शोषण करने एवं भय या दबाव पूर्वक  मतांतरण कराने की घटनाओं  की जाँच के लिए पुलिस मुख्यालय ने 4 मई 2025 को राज्य स्तरीय विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है।”

कॉन्ग्रेस नेता की अगुवाई में सागर में निकला जुलूस, लगे ‘सर तन से जुदा’ के नारे: खंडवा में भगवा ध्वज पर लिखा ‘इस्लाम जिंदाबाद’, ईद मिलाद पर MP में पाकिस्तानी फौज के गाने

मध्य प्रदेश में ईद मिलाद-उन-नबी पर हिंदू-विरोधी माहौल और इस्लामी कट्टरपंथ का माहौल बनाया गया। खंडवा जिले में ईद मिलाद-उन-नबी के जुलूस में तालिबानी झंडे फहराए गए। इस दौरान तालिबानी झंडे फहराए गए। और भगवा झंडों पर ‘इस्लाम जिंदाबाद’ के स्लोगन लिखे गए। हिंदू संगठन ने घटना पर विरोध जताया।

हिंदू संगठन ने यह भी बताया कि गणेश पंडालों के पास आतिशबाजी की गई। साथ ही कल्लनगंज का नाम बदलकर कल्लन अली गंज बताया गया। हिंदू संगठन ने शुक्रवार (05 सितंबर 2025) देर रात कोतवाली पुलिस थाने पहुँचकर कार्रवाई की माँग की।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, कोतवाली पुलिस ने कहा कि 2 से 3 अज्ञात लोगों ने ईद मिलाद-उन-नबी के दौरान भगवा झंडा हाथ में लेकर उस पर काले रंग से ‘इस्लाम जिंदाबाद’ लिखकर फहराया। अभिषेक तिवारी की शिकायत पर मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।

कॉन्ग्रेस नेता की बाइक रैली में ‘सर तन से जुदा’ के लगे नारे

वहीं सागर जिले में ईद मिलाद-उन-नबी पर कॉन्ग्रेस नेता फिरदौस कुरैशी और पम्मा कुरैशी के नेतृत्व में बाइक रैली निकाली गई। रैली में ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाए गए। रैली का वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद हिंदू संगठन ने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने मामले की जाँच के बाद ब्लॉक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष फिरदौष कुरैशी, पम्मा कसाई, शहबाज कुरैशी और अन्य नामजद के खिलाफ धारा 353, 351(2), 299, 196 में मुकदमा दर्ज कर लिया है। बाइक रैली जिस भी जगह से निकाली गई थी, उन सभी इलाकों की फुटेज भी पुलिस खंगाल रही है।

जिसके लिए इस्लाम है ‘सबसे जरूरी’, वो पाकिस्तान प्रेमी शबाना महमूद बनी कट्टरपंथ से जूझ रहे ब्रिटेन की गृह मंत्री: भारत से नफरत का रहा है इतिहास

पाकिस्तानी मूल की सांसद शबाना महमूद भारत विरोधी बयानबाजी में ज्यादातर देखी जाती है, जिसमें जम्मू-कश्मीर से आर्टिक्ल 370 हटाने, AFSPA को हटाने, आतंकवाद के आरोप में बंद लोगों को रिहा करने और सामूहिक कब्रों की जाँच करने जैसे मामले शामिल है। अब उन्हीं शबाना महमूद को ब्रिटेन की नई गृह मंत्री बनाया गया है। इस नियुक्ति ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है।

कई लोग शबाना महमूद की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि शबाना ने खुद कहा है कि उनके लिए इस्लाम सबसे महत्वपूर्ण है। आलोचकों का मानना है कि इस तरह के विचारों वाली महिला आव्रजन और सीमा नियंत्रण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर निष्पक्ष होकर काम नहीं कर पाएगी, खासकर जब उनका इतिहास भी विवादित रहा है।

इस्लाम को बताया सबसे महत्वपूर्ण

शबाना महमूद की नियुक्ति पर सबसे बड़ा सवाल उनके मजहबी रुख को लेकर उठा है। एक पुराने वीडियो में शबाना महमूद ने साफ तौर पर कहा था कि उनके लिए इस्लाम उनके जीवन में किसी भी चीज से ज़्यादा महत्वपूर्ण है। शबाना महमूद ने यह भी कहा था कि यह उनके हर काम का मूल आधार है।

इसी बयान को आधार बनाकर अमेरिकी पत्रकार टॉमी रॉबिन्सन और कई अन्य लोगों ने ट्वीट किया है कि एक व्यक्ति, जो अपने मजहब को सबसे ऊपर रखती हो, क्या वह आव्रजन और सीमा नियंत्रण जैसे जटिल मामलों में निष्पक्षता से काम कर पाएँगी? यह पद बहुत ही संवेदनशील होता है, जहाँ देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होते हैं।

एक अन्य यूजर क्रिस रोज ने ट्वीट कर कहा कि एक ऐसी गृह सचिव जो भीड़तंत्र को बढ़ावा दे, वह ‘अयोग्य और खतरनाक’ है। ये सभी घटनाएँ उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

भारत विरोधी और कश्मीर पर प्रोपेगेंडा

शबाना महमूद पर केवल इस्लाम का पक्ष लेने का ही आरोप नहीं है, बल्कि उसका इतिहास भारत विरोधी गतिविधियों और बयानों से भी भरा हुआ है। शबाना महमूद के अम्मी-अब्बू पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से हैं और इस वजह से वह लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ बोलती रही हैं।

नवंबर 2015 में शबाना महमूद और साथियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था, जिसमें जम्मू-कश्मीर से सेना हटाने और अनुच्छेद 370 को लेकर भारत की आलोचना की गई थी। इसके बाद 2019 में जब भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाया तो शबाना ने इसे ‘अन्याय से भरी’ और ‘एकतरफा कार्रवाई’ बताई।

फिर शबाना महमूद ने तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से भारत पर दबाव बनाने की अपील भी की थी। एक समय पर शबाना महमूद ने ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप की माँग भी की थी।

इन सभी बातों को देखते हुए, आलोचकों का कहना है कि क्या एक ऐसी व्यक्ति, जो भारत के खिलाफ इतना पक्षपातपूर्ण रवैया रखती हो, वह भारत के साथ संबंधों में निष्पक्षता बरत पाएगी?

इजरायल विरोधी गतिविधियाँ

शबाना महमूद की आलोचना सिर्फ भारत विरोधी रुख तक सीमित नहीं है। वह पहले भी इजरायल विरोधी प्रदर्शनों में शामिल रही हैं। एक तस्वीर में शबाना महमूद एक पोस्टर पकड़े हुए दिखाई दी थीं। इस पर लिखा था, ”फिलिस्तीन को आजाद करो, इजरायली कब्जे को खत्म करो।”

2014 की डेली मेल की एक रिपोर्ट के अनुसार, शबाना महमूद बर्मिंघम में एक सुपरमार्केट को जबरन बंद करने में शामिल थीं, क्योंकि वहाँ कथित तौर पर ‘अवैध बस्तियों’ से सामान स्टॉक किया गया था। यहूदी लोगों ने उन पर ‘तनाव बढ़ाने’ का बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। एक लेख में, द जेरूसलम पोस्ट ने बताया था कि वह किस तरह इजरायल विरोधी बयानबाजी लगातार कर रही थीं।

आगे की चुनौतियाँ

गृह सचिव के रूप में शबाना महमूद के सामने कई चुनौतियाँ हैं, खासकर अवैध प्रवासियों से निपटने की। छोटे नावों से ब्रिटेन में आ रहे अवैध प्रवासियों को रोकना इस समय लेबर सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

रिफॉर्म यूके पार्टी इस मुद्दे पर लगातार लेबर पार्टी को घेर रही है। अब यह देखना होगा कि शबाना महमूद इन चुनौतियों से कैसे निपटती हैं और क्या वह अपने विवादित बयानों और ‘इस्लाम ही सब चीजों से ऊपर’ को पीछे छोड़कर निष्पक्षता से काम कर पाती हैं। शबाना महमूद की हर कार्रवाई पर अब ब्रिटेन और दुनिया भर की नजर रहेगी।

ईसाई हॉस्टल, ब्रेनवॉश, 60 बच्चे…अलवर में 15 साल से जारी था धर्मांतरण का खेल, चेन्नई में होती थी ट्रेनिंग: जोसेफ-जॉय जैसे नाम रखकर मनवाई जाती थी बात, न सुनने पर मारपीट

राजस्थान के अलवर जिले में बीते दिनों एक ईसाई मिशनरी हॉस्टल में छोटे बच्चों के धर्म परिवर्तन का चौंकाने वाला मामला सामने आया था। अब आरोपितों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यहाँ छोटी उम्र से ही बच्चों का ब्रेनवॉश शुरू कर दिया जाता था, ताकि वे बचपन से ही ईसाई धर्म अपना लें।

इन बच्चों से कहा जाता था कि हिंदू भगवान नरक में भेजते हैं, जबकि ईसाई गॉड स्वर्ग में ले जाते हैं। रविवार की प्रेयर ना करने पर बच्चों को मारा भी जाता था। एमआईए थाना क्षेत्र की सैय्यद कॉलोनी में यह हॉस्टल पिछले 15 साल से चल रहा था, जिसमें करीब 60 बच्चे रखे गए थे। ये सभी बच्चे गरीब हिंदू या सिख परिवारों से थे। हॉस्टल में उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया जाता था।

कैसे किया जा रहा था बच्चों का ब्रेनवॉश?

बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजा जाता था ताकि उनके परिवारों को शक न हो। स्कूल से लौटने के बाद हॉस्टल में उन्हें ईसाई धर्म की किताबें पढ़ाई जाती थीं। नाम बदलकर ईसाई नाम दिए जाते थे। यहाँ 8 साल के बच्चे का नाम जोसेफ, दूसरे का योहना और किसी को जॉय बुलाया जा रहा था जबकि उनका असली नाम कुछ और है।

रोज सुबह बच्चों से ईसाई प्रार्थना करवाई जाती थी और रविवार को उनके माता-पिता को बुलाकर धर्म प्रचार किया जाता था। जो बच्चा प्रेयर नहीं करता था, उसके साथ मारपीट भी की जाती थी। हॉस्टल में हिंदू धर्म की देवी-देवताओं की मूर्तियों को पानी में डूबाकर बच्चों से कहा जाता था, “हिंदू देवी-देवता तो पानी में डूब जाते हैं लेकिन क्रॉस नहीं डूबता। हिंदू भगवान नरक में भेजते हैं, जबकि ईसाई गॉड स्वर्ग में ले जाते हैं।”

किसने किया खुलासा?

इस पूरे मामले का खुलासा विश्व हिंदू परिषद (VHP) के शहर महामंत्री वीरेंद्र ने किया। उन्होंने पुलिस को जानकारी दी, जिसके बाद एमआईए थाना पुलिस ने छापेमारी कर दो आरोपितों बोध अमृत सिंह और सोहन सिंह को गिरफ्तार किया।

विहिप के वीरेंद्र ने बताया कि संस्था के हॉस्टल में सालों से ये खेल चल रहा है। पहले भी बच्चों के नाम पर उनके परिवार के सदस्यों को संस्था से जोड़ा था। इसके अलावा संस्था के कई सदस्यों ने लोगों का धर्म परिवर्तन करवाया था। 7 साल पहले भी इसी हॉस्टल से जुड़े लोगों के संपर्क में आने के बाद धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों की घर वापसी करवाई गई थी।

आरोपित बोध अमृत मूल रूप से गुजरात का रहने वाला है। अमृत ने साल 2006 में ईसाई धर्म अपनाया था। उसकी ट्रेनिंग चेन्नई में हुई थी। उसके साथ 15 ट्रेनी और थे लेकिन संस्था ने अमृत को ट्रेनर के तौर पर चुना था। ट्रेनिंग में उसे सिखाया गया कि कैसे लोगों को ईसाई धर्म में कन्वर्ट करना है। कैसे बच्चों का ब्रेनवॉश करना है। इसके बाद वह अलवर के हॉस्टल में वार्डन बनकर आया था।

जाँच अधिकारी मनोहर लाल ने बताया कि एक महीने पहले ही सीकर में धर्मांतरण गैंग को पुलिस ने पकड़ा था। वहाँ से बोध अमृत भी गिरफ्तार किया गया था। हाल में ही वह जमानत पर छूटा था। अलवर से पहले वह श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर में था और वहां धर्मांतरण की गतिविधियाँ कर रहा था।

पुलिस अमृत के बारे में और ज्यादा जानकारी जुटाने में लगी है। सीकर में वह सेल्वा के साथ इस काम में लगा था। सेल्वा सीकर में धर्मांतरण गैंग का मास्टरमाइंड है। वहीं दूसरा आरोपित सोहन सिंह पहले हॉस्टल निर्माण में बेलदारी करता था, बाद में उसका भी ब्रेनवॉश कर धर्म परिवर्तन करवाया गया। जिसके बाद वह भी इस काम में शामिल हो गया था।

जानिए कौन दे रहा था फंड ?

सेल्वा नाम का व्यक्ति, जो पहले सीकर में पकड़ा गया था, उसने ही अलवर में हॉस्टल शुरू करवाया था। इनका टारगेट छोटे बच्चों का ब्रेनवॉश कर उन्हें बचपन से ही ईसाई बनाना था। एमआईए थाने के जाँच अधिकारी मनोहर ने बताया कि इस हॉस्टल का संचालन चेन्नई की संस्था Friends Missionary Prayer Band (FMPB) करती है।

ये संस्था अलग-अलग राज्यों में इस तरह की प्रेयर, मीटिंग करवाती है। इसकी कई राज्यों में शाखाएँ हैं, जो हॉस्टल भी ऑपरेट करती हैं। इसके लिए चेन्नई की संस्था ही पैसे जुटाती थी। बड़ी मात्रा में इन्हें फंडिंग मिलती है। इन पैसों का इस्तेमाल गरीब लोगों को लालच देने में किया जाता है।

हॉस्टल में स्थानीय बच्चों को नहीं लिया जाता था, सिर्फ बाहर के बच्चों को लाया जाता था। हॉस्टल की दीवार 10 फीट ऊँची थी और ऊपर 2 फीट तारबंदी भी की गई थी ताकि कोई भाग न सके या बाहर से कोई अंदर न झाँके।

फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। बच्चों के बयान लिए जा रहे हैं। इसके अलावा संस्था के बैंक अकाउंट्स की भी जाँच की जा रही है। आरोपितों के पास से ट्रांजैक्शन डिटेल्स भी मिली हैं।

यह मामला सिर्फ एक हॉस्टल का नहीं, बल्कि देशभर में फैले धर्मांतरण नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है। बच्चों के मासूम दिमाग को निशाना बनाकर लालच और झाँसे में लेकर उन्हें धर्म बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा था। पुलिस अब इस पूरे मामले की गहराई से जाँच कर रही है।