सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ का कहना है कि आवारा कुत्तों वाले मामले ने उन्हें दुनिया भर में मशहूर कर दिया है। उन्होंने कहा, “अब तक मैं सिर्फ अपनी थोड़ी-बहुत कानूनी सेवाओं के लिए ही जाना जाता था लेकिन अब आवारा कुत्तों वाले मामले की वजह से ना सिर्फ देश में बल्कि दुनिया भर में लोग मुझे जानने लगे हैं।”
यह बातें जस्टिस विक्रम नाथ ने केरल में आयोजित नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी (NALSA) और केरल स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी (KeLSA) ने तिरुवनंतपुरम की ओर से आयोजित ‘ह्यूमन वाइल्डलाइफ कॉन्फ्रेंस’ में कहीं। इस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज भी शामिल हुए थे।
जस्टिस नाथ ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई को भी धन्यवाद दिया कि उन्होंने यह मामला उन्हें सौंपा। उन्होंने बताया कि हाल ही में जब वह ‘Law Asia POLA Summit’ में शामिल हुए तो वहाँ विदेशों से आए वकील संघों के अध्यक्षों ने उनसे आवारा कुत्तों के केस के बारे में सवाल पूछे। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “मुझे बहुत खुशी हुई कि अब विदेशों में भी लोग मुझे जानने लगे हैं।”
जस्टिस नाथ ने यह भी कहा कि उन्हें लोगों के साथ-साथ कुत्तों से भी आशीर्वाद मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “लोगों के संदेश आए हैं कि सिर्फ कुत्ता प्रेमी ही नहीं बल्कि खुद कुत्ते भी मुझे शुभकामनाएँ भेज रहे हैं।”
गौरतलब है कि दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने 11 अगस्त 2025 को एक आदेश दिया था। इसमें कहा गया था कि दिल्ली में आवारा कुत्तों को पकड़कर उन्हें शेल्टर होम बनाकर शिफ्ट किया जाए।
इस आदेश के बाद एनिमल राइट ऐक्टिविस्ट्स और तमाम डॉग लवर्स ने इसका खूब विरोध किया। CJI ने यह केस जस्टिस नाथ की अध्यक्षता में बनाई गई तीन जजों वाली बेंच को सौंपा था।
इसके बाद 22 अगस्त 2025 को जस्टिस नाथ की बेंच ने 11 अगस्त वाले आदेश पर रोक लगा दी और निर्देश दिया कि कुत्तों को टीकाकरण और नसबंदी के बाद उसी जगह वापस छोड़ा जाए जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था।
लद्दाख प्रशासन द्वारा जमीन का आवंटन रद्द करने के कुछ ही दिनों बाद ही पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स ने ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक का समर्थन करना शुरू कर दिया है।
वांगचुक फरवरी 2025 में एक ‘क्लाइमेट कॉन्फ्रेंस’ में हिस्सा लेने पाकिस्तान गए थे। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के हालिया फैसले को ‘लद्दाख पर हमला‘ करार दिया था।
इस बीच, पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा अकाउंट्स झूठी कहानियाँ फैलाकर ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि सोनम वांगचुक को भारत सरकार द्वारा परेशान किया जा रहा है।
वांगचुक के समर्थक में पाकिस्तानी ट्वीट्स
ये अकाउंट्स जानबूझकर भारत के आंतरिक मामले में दखल देकर यह प्रचार कर रहे हैं कि लद्दाख प्रशासन का फैसला एक ‘राजनीतिक चाल’ है, जिससे राज्य का दर्जा मांगने वाली आवाजों को दबाया जा सके।
क्या है पूरा विवाद?
साल 2018 में स्थानीय प्रशासन ने लेह के फियांग गाँव में करीब 135 एकड़ जमीन ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक और उनके हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (HIAL) को आवंटित की थी।
यह जमीन 40 साल की लीज पर दी गई थी लेकिन इस साल 21 अगस्त को लेह के डिप्टी कमिश्नर ने पूरा आवंटन रद्द कर दिया।
प्रशासन को यह सख्त कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि आवंटित की गई जमीन का इस्तेमाल उस काम के लिए नहीं हो रहा था, जिस पर दोनों पक्षों ने सहमति बनाई थी।
‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक आज तक उस 135 एकड़ जमीन पर मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी नहीं बना पाए हैं। साथ ही, उन्होंने न तो लीज एग्रीमेंट पर अमल किया और न ही जमीन को औपचारिक तौर पर तहसीलदार को सौंपा।
अपने आदेश में लेह के डिप्टी कमिश्नर रोमिल सिंह डोंक ने लिखा, “आवंटन आदेश 5-5-2019 को खत्म हो चुका है और आवंटन आदेश की शर्त संख्या IV के तहत इसे रद्द माना जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह जमीन अब ‘राज्य को सौंप’ दी गई है और तहसीलदार को निर्देश दिया गया कि वह जमीन को खाली कराए और राजस्व रिकॉर्ड में अपडेट करे।
‘विचहंट’ के झूठे दावे
लद्दाख प्रशासन के आदेश के बाद से ही ‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक खुद को सरकारी दबाव का शिकार दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
उन्होंने दावा किया है, “HIAL का जमीन आवंटन रद्द करने का फैसला उस वक्त लिया गया है जब लद्दाख के लोग अपने अधिकार, सुरक्षा और लोकतंत्र की माँग कर रहे हैं। यह एक तरह से विचहंटिंग लगती है।”
इसी तरह के ‘विचहंट’ वाले दावे लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) जैसे राजनीतिक समूहों ने भी किए हैं। हालाँकि, हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
सच, जो सोनम वांगचुक नहीं बताना चाहते
‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक ने कई सालों से 135 एकड़ जमीन का किराया तक नहीं चुकाया है, जिसकी मौजूदा कीमत 27 से 30 करोड़ रुपए के बीच है। जबकि डिप्टी कमिश्नर ने क्लॉज 4(b) के तहत नोटिस भी जारी किए थे।
साथ ही, लीज एग्रीमेंट के एक साल के भीतर यूनिवर्सिटी भी नहीं शुरू की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि HIAL ने ‘यूनिवर्सिटी का दर्जा’ पाने के लिए आवेदन भी 2022 में किया, यानी आवंटन के 4 साल बाद।
इससे साफ झलकता है कि सोनम वांगचुक ने लीज एग्रीमेंट का पालन नहीं किया लेकिन फिर भी वे झूठे बहाने बनाकर प्रशासनिक अड़चनों का रोना रो रहे हैं।
इतना ही नहीं, HIAL ने 3 साल तक लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (LAHDC) से संपर्क नहीं किया। बल्कि सीधे लेह के डिप्टी कमिश्नर से बात करने की कोशिश की।
इसके अलावा, सोनम वांगचुक ने दावा किया कि HIAL को 14 करोड़ रुपए के प्रीमियम से छूट मिली थी। लेकिन LAHDC ने ऐसा कोई अनुरोध कभी मंजूर ही नहीं किया। इसलिए आधिकारिक रिकॉर्ड में किसी तरह की छूट मौजूद नहीं है।
असल में, HIAL के खिलाफ जमीन के गलत इस्तेमाल की शिकायतें दर्ज हुईं। फरवरी 2020 में फियांग गाँव के सरपंच और नम्बदार ने LAHDC को इस बारे में पत्र भी भेजा था।
इन हालात और लीज एग्रीमेंट के कई उल्लंघनों को देखते हुए लद्दाख प्रशासन को मजबूरन HIAL का आवंटन रद्द करना पड़ा।
‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक ने न तो लीज की शर्तों का पालन किया और न ही LAHDC की शिकायतों को सुलझाया। कई सालों तक भुगतान न करने के बावजूद अब वे राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनने का नाटक कर रहे हैं।
HIAL और सोनम वांगचुक की ये सारी गड़बड़ियाँ अब प्रशासनिक रिकॉर्ड, नोटिस और लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल के एग्जीक्यूटिव काउंसलर द्वारा दर्ज हो चुकी हैं।
पाकिस्तान से मिल रहा वांगचुक को समर्थन
यह साफ है कि ‘एक्टिविस्ट’ भले ही बौखलाए हुए हैं लेकिन असल चिंता की बात यह है कि सोनम वांगचुक को सीमा पार से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।
यह एक गंभीर मसला है क्योंकि पाकिस्तान आधे-अधूरे सच और साजिश की थ्योरी फैलाकर भारत में मतभेद पैदा करना चाहता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी हाल के दिनों में कई झूठ फैलाए गए हैं जिनका PIB ने खुलासा किया है।
‘एक्टिविस्ट’ सोनम वांगचुक सच्चाई न बताकर सार्वजनिक संसाधनों के गलत इस्तेमाल को छिपाकर पाकिस्तान को भारत-विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने में मदद कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 125वां एपिसोड में भारत के लोगों को चीन से संबोधित किया। पीएम ने संबोधन में स्वदेशी का मंत्र दिया। उन्होंने रूस के व्लाडिवोस्टक में रामायण की थीम पर लगी पेंटिंग्स प्रदर्शनी का भी उल्लेख किया। पीएम ने प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे देशभर के कई शहरों पर भी चिंता जताई।
प्राकृतिक आपदा से लोगों का जीवन संकट में फँसा: PM मोदी
पीएम मोदी ने कहा, “मॉनसून के इस मौसम में प्राकृतिक आपदाएँ देश की कसौटी कर रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों में हमने बाढ़ और भूस्खलन का कहर देखा है। कहीं घर उजड़ गए, कहीं खेत डूब गए। परिवार के परिवार उजड़ गए, पानी के तेज बहाव में कहीं पुल बह गए, सड़के बह गईं और लोगों का जीवन संकट में फँस गया।”
उन्होंने आपदा की घड़ी में रेस्कयू ऑपरेशन की प्रशंसा की। पीएम मोदी ने कहा, “आपदा की घड़ी में सेना मददगार बनकर सामने आई। स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, डॉक्टर, प्रशासन, संकट की इस घड़ी में सभी ने हर संभव प्रयास किया। मैं ऐसे हर नागरिक को हृदय से धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने इस कठिन समय में मानवीयता को सबसे ऊपर रखा हुआ है।”
पुलवामा और श्रीनगर को खेलों में उपलब्धियाँ
पीएम मोदी ने कहा, “जम्मू कश्मीर ने दो बड़ी उपलब्धियाँ भी हासिल की हैं। पुलवामा के स्टेडियम में रिकॉर्ड संख्या में लोग इकट्ठा हुए और यहाँ डे-नाइट क्रिकेट मैच खेला गया। पहले यह होना असंभव था लेकिन अब मेरा देश बदल रहा है। यह मैच रॉयल प्रीमियर लीग का हिस्सा था।”
जम्मू कश्मीर की दूसरी उपलब्धि का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “देश में पहला खेलो इंडिया वॉटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल श्रीनगर की डल झील में हुआ। इसमें पूरे भारत से 800 से ज्यादा एथलीट्स ने हिस्सा लिया।” पीएम मोदी ने इसमें हिस्सा लेने वाले दो खिलाड़ियों, ओडिशा की रस्मिता साहू और श्रीनगर के मोहसिन अली का भी नाम लिया।
पीएम मोदी ने कहा, “एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना और देश की एकता, देश के विकास के लिए बहुत जरूरी है। खेल इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए मैं कहता हूं कि जो खेलता है वो खिलता है।”
रूस और कनाडा में प्रभु राम की भक्ति
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि रामायण और भारतीय संस्कृति के प्रति प्रेम अब दुनिया के हर कोने में पहुँच रहा है। अगस्त 2025 में रूस के व्लाडिवोस्टक (Vladivostok) शहर में अनूठी प्रदर्शनी लगाई गई थी। पीएम ने बताया कि इसमें रूसी बच्चों ने रामायण पर बनी अलग-अलग थीम की पेंटिग्स को प्रदर्शित किया।
ऐसा ही कुछ कनाडा के मिसीसागा में भी हुआ। पीएम मोदी ने बताया कि मिसीगागा में प्रभु श्रीराम की 51 फीट ऊँची प्रतिमा का अनावरण किया गया। सोशल मीडिया पर भी इस भव्य प्रतिमा के वीडियो खूब शेयर किए गए।
बलिदान सैनिकों की जानकारी जुटा रहे जितेंद्र सिंह राठौर
पीएम मोदी ने गुजरात के सूरत में सिक्योरिटी गार्ड का काम करने वाले जितेंद्र सिंह के बारे में बताते हुए कहा, “जितेंद्र सिंह राठौर ने एक ऐसी पहल की है जो देशभक्त के लिए बेहद अच्छी प्रेरणा है। पिछले कुछ सालों से वह उन सभी जवानों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं, जिन्होंने भारत माता की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर किए।”
उन्होंने आगे कहा, “आज उनके पास प्रथम विश्व युद्ध से लेकर अबतक शहीद हुए हजारों वीर जवानों के बारे में जानकारियँ मौजूद हैं। उनके पास शहीदों की हजारों तस्वीरें भी हैं।”
बिहार की देवकी अब ‘सोलर दीदी’
बिहार के मुजफ्फरपुर के रतनपुरा गाँव की देवकी पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “उन्होंने सोलर पंप से गाँव की किस्मत बदल दी है। अब लोग उन्हें प्यार से सोलर दीदी कहते हैं। उनका जीवन आसान नहीं था लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। वो सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी, जहाँ उन्हें सोलर पंप की जानकारी मिली।”
मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों की जर्मनी में फुटबॉल ट्रेनिंग
मध्य प्रदेश के शहडोल के फुटबॉल खिलाड़ियों की जर्मनी में ट्रेनिंग का भी पीएम मोदी ने जिक्र किया। पीएम ने कहा, “शहडोल स्थित एक गाँव में फुटबॉल क्रांति का जिक्र किया था, जिसे जर्मनी के एक बड़े कोच ने देखा और अब वो शहडोल के खिलाड़ियों को जर्मनी में फुटबॉल की ट्रेनिंग देना चाहते हैं।”
सिविल सेवा परीक्षा में असफल होने वाले छात्रों को भी मिलेगी नौकरी
पीएम मोदी ने कहा, “कोई सिविल सेवा की तैयारी कर रहा था, कोई इंजीनियरिंग में जाना चाहता था, कोई मेडिकल परीक्षा के हर पड़ाव पार कर चुका था लेकिन अंत में उसका चयन नहीं हुआ। ऐसे सभी उम्मीदवारों की जानकारी अब ‘प्रतिभा सेतु’ पोर्टल पर उपलब्ध कराई जा रही है।”
उन्होंने बताया कि इस पोर्टल से प्राइवेट कंपनियाँ इन होनहार छात्रों की जानकारी लेकर उन्हें अपनी कंपनी में नियुक्ति दे सकती हैं। पीएम ने कहा, “इस प्रयास के नतीजे आने लगे हैं। सैकड़ों उम्मीदवारों को इस पोर्टी की मदद से तुरंत नौकरी भी मिली है।”
तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने हिंदुओं को लेकर अपमानजनक बातें की हैं। उन्होंने जातियों को निशाना बनाया और हिंदू प्रतीकों तक का मजाक उड़ाने से भी वह नहीं चूकीं। वो भी जानती हैं कि हिंदू धर्म और इसको मानने वाले सहिष्णु हैं तो वो कुछ भी कहकर बचकर निकल जाएँगी।
महुआ का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल है। गुरुवार (28 अगस्त 2025) के बताए जा रहे इस वीडियो को बीजेपी की IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी X पर शेयर किया है।
महुआ इस वीडियो में वह हिंदुओं का मजाक उड़ाते हुए बंगाली में कह रही है, “पूरे साल आप तृणमूली रहते हैं और चुनाव के दौरान सनातनी?” जाहिर है कि वह बताना चाहती हैं कि कोई एक साथ हिंदू (सनातनी) और TMC का समर्थक नहीं हो सकता है।
अपने बयान में आगे उन्होंने SC (अनुसूचित जाति), नामशूद्र, मतुआ समुदायों को भी अपमानजनक तरीके से निशाना बनाया और वैष्णव समुदाय की पवित्र कंठी माला का मजाक उड़ाया है। उन्होंने उसे ‘लकड़ी की माला पहनने और खैरात लेने वालों की निशानी’ के रूप में पेश किया।
तृणमूल सांसद ने कहा कि SC, नामशूद्र और मतुआ समुदाय के लोग ममता बनर्जी सरकार की सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ उठाते हैं लेकिन चुनावों के दौरान वे बीजेपी के पक्ष में वोट देते हैं।
On 28th August, at a Trinamool workers’ meet in Karimpur Block-2, TMC MP Mahua Moitra made shocking and shameful remarks against Sanatanis, specifically targeting the Namasudra community.
She mocked Hindus by saying: “All year you’re Trinamooli, and during elections Sanatani?” —… pic.twitter.com/J4s0V9YKlL
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनका वीडियो शेयर करते हुए अमित मालवीय ने कहा कि भाजपा इस भाषण की कड़ी निंदा करती है। उन्होंने मोइत्रा पर हिंदू-विरोधी नफरत फैलाने का आरोप लगाया और माँग की कि उन्हें इस अपमानजनक टिप्पणी के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट रूप से हिंदू-विरोधी, जातिवादी नफरत भरा भाषण है। इस तरह के सांप्रदायिक जहर के लिए कोई माफी नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा, “भाजपा हमेशा नामशूद्र, SC और मतुआ समुदायों के साथ मजबूती से खड़ी रही है। अब समय आ गया है कि ये समुदाय महुआ मोइत्रा के तत्काल इस्तीफे की माँग करें और एक बड़ा आंदोलन शुरू करें। SC-ST और हिंदू समुदायों का अपमान करने के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”
बता दें कि इससे पहले गुरुवार (28 अगस्त 2025) को सांसद महुआ मोइत्रा ने एक और विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि गृहमंत्री अमित शाह का सिर काट दिया जाना चाहिए और कटे हुए सिर को मेज पर रख कर लोगों को दिखाना चाहिए। महुआ ने ये बयान अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर बोलते हुए दिया था।
महुआ ने कहा था, “मैं पूछती हूँ कि क्या हमारी सीमाओं की रक्षा करने वाला कोई नहीं है? और अन्य देशों के लाखों और करोड़ों की संख्या में लोग भारत में घुस रहे हैं, अगर वे हमारी माताओं और बहनों पर नजर रख रहे हैं, अगर वे हमारी जमीन पर कब्जा कर रहे हैं, तो सबसे पहले अमित शाह का सिर काटकर मेज पर रख देना चाहिए।”
url – TMC Mahua Moitra said You remain Trinamool throughout the year and Sanatani during elections? Amit Malviya demanded resignation
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्वाड शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत नहीं आ रहे हैं। भारत-अमेरिका के रिश्तों में आई दरार को देखते हुए ये फैसला लिया गया है। इस साल के अंत में क्वाड शिखर सम्मेलन दिल्ली में होने वाला है। अखबार के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप की भारत आने की कोई योजना नहीं है।
राष्ट्रपति ट्रंप के भारत दौरे के रद्द होने को लेकर फिलहाल अमेरिका और भारत ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले क्वाड शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आने को लेकर सहमति दी थी। लेकिन, अब प्लान कैंसिल कर दिया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सीजफायर को लेकर लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से प्रधानमंत्री मोदी का धैर्य खत्म हो रहा था। ट्रंप सार्वजनिक रूप से लगातार कह रहे थे कि भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष को खत्म करवाया।
फोन पर पीएम मोदी और ट्रंप के बीच बातचीत का दावा
अखबार के मुताबिक, 17 जून को ट्रंप से पीएम मोदी की बातचीत हुई थी। ये बातचीत जी7 शिखर सम्मेलन से वापस लौटने के बाद हुई थी। दरअसल शिखर सम्मेलन में कनानास्किस में ट्रंप और पीएम मोदी के बीच बैठक का कार्यक्रम था, लेकिन जी7 नेताओं के शिखर सम्मेलन तुरंत बाद ट्रंप वापस लौट गए थे। इसलिए आमने-सामने की बातचीत नहीं हो पाई थी। इसके बाद दोनों नेताओं की फोन पर बातचीत हुई।
Modi's refusal to back Trump's Nobel Prize pursuit soured India-US ties: Report
बातचीत के दौरान ट्रंप ने बताया कि पाकिस्तान उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने वाला है। इससे साफ था कि ट्रंप चाहते थे कि भारत भी ऐसा करे। लेकिन पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर में अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं है। ये भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे बातचीत में तय हुआ।
हालाँकि ट्रंप ने पीएम मोदी की बातों का जवाब नहीं दिया, लेकिन असहमति साफ तौर पर सामने आ गई। भारत ने नोबेल पुरस्कार को लेकर कोई बातचीत नहीं की। ये रिश्तों में कड़वाहट की वजह बनी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि व्हाइट हाउस ने इस कॉल की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं की। लेकिन ट्रंप का भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाने का दावा लगातार जारी रहा। वे अब तक 40 से ज्यादा बार कह चुके हैं कि उन्होंने ही सीजफायर करवाया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ये अमेरिकी राष्ट्रपति की कहानी है जो नोबेल पुरस्कार पाने की इतनी चाहत रखता है, लेकिन उसकी इच्छा भारत की राजनीति की संवेदनशील और हकीकत से टकरा गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने SCO शिखर सम्मेलन से पहले द्विपक्षीय बैठक हुई। बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि भारत आपसी रिश्तों को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों का सहयोग 280 करोड़ की आबादी और मानवता के लिए जरूरी है।
पीएम मोदी ने कहा, “पिछले साल कज़ान में हमारी बहुत ही अच्छी बातचीत हुई थी जिससे हमारे रिश्तों में सुधार आया। सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद शांति और स्थिरता का माहौल बना है। सीमा प्रबंधन को लेकर हमारे विशेष प्रतिनिधियों के बीच समझौता हुआ है।”
पीएम नरेंद्र मोदी ने बैठक में यह भी कहा, “कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी फिर से शुरू हो रही हैं। दोनों देशों के 280 करोड़ लोगों के हित हमारे सहयोग से जुड़े हैं। इससे पूरी मानवता के कल्याण का रास्ता भी खुलेगा।”
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी पीएम मोदी की बात पर सहमति जताते हुए कहा कि दोनों देशों का साथ आना जरूरी है।
पीएम मोदी ने शी जिनपिंग को दी बधाई
पीएम मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की चीन की सफल अध्यक्षता के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बधाई भी दी। साथ ही पीएम मोदी ने चीन आने के निमंत्रण और मुलाकात के लिए जिनपिंग को धन्यवाद भी दिया।
पीएम मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों और भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले से वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में हलचल मची हुई है।
मिजोरम को पहली बार एयरपोर्ट से सीधी रेलवे कनेक्टिविटी मिलने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर 2025 को मिजोरम में बैराबी-सैरांग रेल लाइन का उद्घाटन करेंगे। यह 51.38 किलोमीटर लंबी लाइन बांग्लादेश-म्यांमार सीमा से जुड़ी है।
?Railways reach Mizoram after 78 years of Independence.
रिपोर्ट्स के अनुसार, आइजोल के लेंगपुई एयरपोर्ट से मात्र 25 किलोमीटर दूर बना रेलवे स्टेशन लोगों को बड़ी सहूलियत देगा। अभी तक पर्यटकों और यात्रियों के पास मिजोरम से असम जाने के लिए दो ही विकल्प थे, या तो सड़क से सीधे सिलचर जाना, या फिर बैराबी रेलवे स्टेशन तक सड़क से पहुँचकर वहाँ से ट्रेन लेना। अब यह परेशानी खत्म हो रही है, क्योंकि एयरपोर्ट और नया रेलवे स्टेशन एक ही रूट पर हैं और यह दूरी कुछ ही समय में तय की जा सकेगी।
51.38 किलोमीटर लंबी इस नई रेलवे लाइन पर सैरांग, मुआलखांग, कानपुई और हार्तकी चार नए स्टेशन बनाए गए हैं। राजधानी आइजोल से सबसे नजदीक सैरांग स्टेशन है, जो एयरपोर्ट से भी सबसे पास है। यहीं से ट्रेनें चलेंगी। मुआलखांग स्टेशन पर 13 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस परियोजना का उद्घाटन करेंगे। यह स्टेशन पूरी तरह तैयार है और यहाँ दो हेलीपैड भी बनाए जा रहे हैं।
कानपुई स्टेशन पर काम अभी चल रहा है लेकिन यात्री सुविधाएँ पूरी रहेंगी, वहीं हार्तकी स्टेशन छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत है क्योंकि यह चारों तरफ पहाड़ों से घिरा है। इन चारों स्टेशनों के अलावा पहले से ही बैराबी स्टेशन मौजूद है, जो मिजोरम और असम की सीमा पर है। पहले यात्रियों को यहीं तक ट्रेन मिलती थी, अब वे सीधे सैरांग तक ट्रेन में सफर कर सकेंगे।
यह रेलवे ट्रैक तकनीकी और प्राकृतिक दोनों रूप से बेहद खास है। इसमें कुल 48 सुरंगें और 150 से ज्यादा पुल हैं। इस लाइन पर बना सबसे ऊँचा पुल 196 नंबर है, जिसकी ऊँचाई 104 मीटर है यानी यह कुतुबमीनार से भी 42 मीटर ऊँचा है।
बादलों से लिपटी घाटियाँ और हरे-भरे जंगलों के अद्भुत दृश्य देख पाएँगे यात्री
पूरी रेल लाइन में से 12.8 किलोमीटर की दूरी सुरंगों से होकर गुजरेगी। इन सुरंगों की दीवारों पर मिजोरम की संस्कृति, इतिहास, महिला सशक्तिकरण और पर्यटन स्थलों को खूबसूरत पेंटिंग्स के जरिए दर्शाया गया है।
विस्टाडोम कोच से सफर के दौरान यात्री बाँस, केले और सुपारी के पेड़ों से भरे पहाड़, बादलों से लिपटी घाटियाँ और हरे-भरे जंगलों के अद्भुत दृश्य देख पाएँगे। लंबी सुरंगों में शानदार लाइटिंग की गई है, जिससे यात्रा और भी रोमांचक हो जाती है।
इस रेल प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा समय और खर्च की बचत है। अभी तक बैराबी से आइजोल तक सड़क मार्ग से पहुँचने में 5 से 6 घंटे का समय और 1000 रुपए से ज्यादा खर्च होता था, लेकिन अब ट्रेन से यह सफर सिर्फ 1 से 1.5 घंटे में और लगभग 100 रुपये में पूरा होगा। यानी करीब 4 घंटे और 900 रुपये की सीधी बचत होगी।
इससे न सिर्फ यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि छोटे-बड़े व्यापार, टूरिज्म और लोकल इकोनॉमी को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। बैराबी से सैरांग तक इस 51.38 किलोमीटर की रेललाइन पर ट्रेन की स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। इसमें 55 बड़े और 87 छोटे पुल, 5 रोड ओवरब्रिज और 6 अंडरब्रिज शामिल हैं। इसकी कुल लागत 8071 करोड़ रुपए है।
इस प्रोजेक्ट के साथ अब पूर्वोत्तर भारत के चार राज्यों, असम (दिसपुर), त्रिपुरा (अगरतला), अरुणाचल प्रदेश (ईटानगर) और मिजोरम (आइजोल) की राजधानियाँ सीधे इंडियन रेलवे नेटवर्क से जुड़ गई हैं। इससे इन राज्यों के बीच समन्वय बढ़ेगा, व्यापार तेज होगा और आर्थिक ढाँचा मजबूत होगा। इससे लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। यह मिजोरम के लिए ऐतिहासिक कदम है जो राज्य को देश के बाकी हिस्सों से और ज्यादा मजबूती से जोड़ेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुँचे हैं। जहाँ वे कई देशों के नेताओं के अलावा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात से पहले ही यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पीएम मोदी से रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर फोन पर बात की।
दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर बात की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत हर कदम पर यूक्रेन के साथ है। साथ ही पीएम ने जल्द शांति बहाली का आश्वासन भी दिया। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत इस दिशा में सभी जरूरी सहायता उपलब्ध कराएगा।
यूक्रेन के राष्ट्रपति से बातचीत के बाद पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट किया। पीएम मोदी ने लिखा, “राष्ट्रपति जेलेंस्की के आज आए फोन कॉल के लिए धन्यवाद। हमने मौजूदा रूस-यूक्रेन संघर्ष, उसके मानवीय पहलुओं और शांति और स्थिरता लाने के प्रयासों पर चर्चा की। भारत इस दिशा में सभी प्रयासों का पूरा समर्थन करता है।”
Thank President Zelenskyy for his phone call today. We exchanged views on the ongoing conflict, its humanitarian aspect, and efforts to restore peace and stability. India extends full support to all efforts in this direction. @ZelenskyyUa
वहीं, जेलेंस्की ने अपने बयान में बातचीत की अधिक जानकारी साझा की। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बातचीत और रूस के साथ शांति वार्ता में शामिल होने के यूक्रेन के हाल ही की प्रयासों का जिक्र किया। साथ ही रूस के ताबड़तोड़ हमले के बावजूद रूसी राष्ट्रपति से मिलने के लिए यूक्रेन की रजामंदी के बारे में बताया।
जेलेंस्की ने आगे कहा, “अलास्का वार्ता को लगभग दो हफ्ते बीत चुके हैं और इस दौरान जब रूस को कूटनीति की तैयारी करनी चाहिए थी, मॉस्को ने कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिया है- केवल नागरिक ठिकानों पर निंदनीय हमले किए हैं और हमारे दर्जनों लोगों को मार डाला है। मैं प्रधानमंत्री को पीड़ितों के परिवारों और प्रियजनों के प्रति व्यक्त की गई उनकी संवेदनाओं के लिए धन्यवाद देता हूँ।”
I informed about the talks with President Trump in Washington with the participation of European leaders. It was a productive and important conversation, a shared vision among partners on how to achieve real peace. Ukraine… pic.twitter.com/fINVbncnlR
— Volodymyr Zelenskyy / Володимир Зеленський (@ZelenskyyUa) August 30, 2025
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा, “शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन से पहले हमने अपनी स्थिति पर सहमति बना ली थी। इस युद्ध का अंत तुरंत युद्धविराम और शांति से होना चाहिए। सभी लोग इस बात को समझते हैं और समर्थन करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “जब हमारे शहर और समुदाय लगातार गोलाबारी में हों, तो शांति की बात करना मुश्किल है। भारत इस दिशा में जरूरी कदम उठाने और शिखर सम्मेलन के अलावा होने वाली बैठकों में रूस और अन्य नेताओं को सही संकेत देने के लिए तैयार है। धन्यवाद”
इसके अलावा जेलेंस्की और पीएम मोदी के बीच दोनों देशों के रिश्तों, यात्रा की तैयारियों और संयुक्त आयोग की बैठक के आयोजन पर बात हुई। जेलेंस्की ने जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की इच्छा भी जताई है।
बता दें कि यह अगस्त 2025 में दूसरी बार है जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और पीएम नरेंद्र मोदी ने फोन पर बातचीत की है।
उधर पीएम नरेंद्र मोदी रविवार (31 अगस्त 2025) को चीन में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं। इस दौरान पीएम चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। शिखर सम्मेलन के दौरान उनकी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात होने की उम्मीद है।
पश्चिम बंगाल में अगले साल चुनाव होने हैं और इसी बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जैसे ही यह काम शुरू हुआ, बांग्लादेश सीमा से सटे मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों में अफरातफरी मच गई।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ मुस्लिम बहुल इलाकों में हजारों लोग जन्म प्रमाण पत्र सुधारने, डिजिटलीकरण करवाने और नए सिरे से बनवाने के लिए नगर पालिकाओं, पंचायतों और अदालतों के चक्कर काट रहे हैं।
लोग खुलेआम दोगुनी कीमत पर स्टाम्प पेपर खरीद रहे हैं और वकीलों को भारी-भरकम फीस चुका रहे हैं। लोगों में इस बात का डर साफ है कि कहीं NRC या विशेष गहन संशोधन (SIR) लागू हुआ तो भारतीय होने का सबूत सिर्फ यही कागज देगा।
बरहामपुर और मुर्शिदाबाद में कतारों का सैलाब
बरहामपुर नगर पालिका का हाल ऐसा है की यहाँ रोजाना 10-12 आवेदन आते थे, अब अचानक यह संख्या 500-600 तक पहुँच गई है। लोग सुबह 7 बजे से लंबी-लंबी लाइनों में खड़े रहते हैं। नगर पालिका अध्यक्ष नारुगोपाल मुखर्जी मानते हैं कि हालात काबू से बाहर हैं।
फॉर्म संग्रह, सुधार, विलंबित नए जन्म प्रमाण पत्र और डिजिटलीकरण के लिए अलग-अलग कियोस्क बनाए गए हैं। लेकिन भीड़ इतनी है कि अधिकारी भी परेशान हैं। 65 साल के अबुल कासिम शेख अपने गाँव से 45 किलोमीटर दूर सिर्फ इसलिए आए हैं कि उनकी बेटी का 20 साल पुराना जन्म रजिस्ट्रेशन ‘लाल कागज’ से बदलकर डिजिटल सफेद प्रिंटआउट हो जाए। शेख कहते हैं, “गाँव में हर कोई यही कह रहा है कि लाल वाले की कोई कीमत नहीं, सफेद चाहिए।”
नौदा से आई समीरुन बीबी अपने दोनों बेटों के जन्म प्रमाण पत्र अपडेट करवाने पहुँची हैं। वे साफ कहती हैं, “हमें डर है कि कल NRC आ जाएगा और पहले हमारा वोटिंग राइट छीना जाएगा, फिर हमें बाहर निकाल देंगे। इसीलिए यह काम अभी निपटाना जरूरी है।”
अदालतों और वकीलों का धंधा चमका
जन्म प्रमाण पत्र सुधारने की भीड़ का सीधा फायदा वकीलों और बिचौलियों को हो रहा है। मुर्शिदाबाद कोर्ट के बाहर वकीलों के टेंट लगे हैं जहाँ रोजाना सैकड़ों हलफनामे तैयार हो रहे हैं। वकील सैयद रामी बताते हैं, “आमतौर पर मुझे हफ्ते में 10-12 स्टाम्प पेपर की जरूरत होती थी। पिछले हफ्ते 500 लिए और इस हफ्ते 600 से ज्यादा। लोग मेरे घर तक आधी रात को पहुँच जाते हैं।”
स्टाम्प पेपर की कीमत 10 रुपए से बढ़कर 20 रुपए हो चुकी है। वकीलों की फीस भी 150 रुपए से लेकर 2000 रुपए तक पहुँच गई है। जिनके नाम, जन्मतिथि या माता-पिता के नाम आधार, वोटर कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र में मेल नहीं खाते, उन्हें कोर्ट का हलफनामा बनवाना पड़ रहा है।
पंचायतों और साइबर कैफे तक फैला असर
गाँव-गाँव की पंचायतों में भीड़ संभालना मुश्किल हो रहा है। कंडी के महालंडी पंचायत की अधिकारी सुवर्णा मरजीत बताती हैं कि रोज 70-80 लोग डिजिटलीकरण के लिए आते हैं और 20-30 लोग नए प्रमाण पत्र के लिए। लेकिन यह काम SDO या BMO ही कर सकते हैं। प्रधान साहेबा खातून का कहना है, “लोगों को डर है कि जन्म प्रमाण पत्र सही नहीं हुआ तो उन्हें सीधे बांग्लादेश भेज देंगे।”
इसी बीच, बिचौलिए भी सक्रिय हो गए हैं। जन्म प्रमाण पत्र में छोटे-मोटे सुधार के लिए 1000-2000 रुपए, बड़े बदलाव और गजट नोटिफिकेशन के लिए 4000-5000 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। साइबर कैफ़े वाले भी पीछे नहीं 20 रुपए लेकर फॉर्म भरने तक का काम कर रहे हैं।
गरमाईराजनीति, गहराय लोगों का डार
ममता बनर्जी सरकार आरोप लगा रही है कि भाजपा मुस्लिमों को टारगेट करने के लिए SIR और NRC का डर फैला रही है। इसलिए सरकारी तंत्र को जन्म प्रमाण पत्र सुधारने और डिजिटलीकरण में झोंक दिया गया है। बरहामपुर और मुर्शिदाबाद में दर्जनों अधिकारी फील्ड पर तैनात हैं।
#WATCH | Patna, Bihar: TMC MP Kalyan Banerjee says, "The special intensive revision that is being done is nonsense. The Election Commission wants to help the BJP, that's why the names of all voters are being removed. We will fight together. Vote theft is happening across the… pic.twitter.com/FCOwAc5zmH
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, “यह जो विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किया जा रहा है, वह पूरी तरह बकवास है। चुनाव आयोग भाजपा की मदद करने के लिए मतदाताओं के नाम हटा रहा है। हम सब मिलकर इसका मुकाबला करेंगे। वोटों की चोरी पूरे देश में हो रही है और इसे रोकना जरूरी है। महाराष्ट्र और हरियाणा में उन्होंने यही किया, अब बिहार और बंगाल में भी वही चाल चल रहे हैं। लेकिन हम इसे हर हाल में रोकेंगे।”
वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य का दावा है, “बंगाल में बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज हैं। हम समय-समय पर चुनाव आयोग को सचेत करते रहे हैं। तृणमूल जानबूझकर दहशत फैला रही है।” लेकिन जमीनी हकीकत साफ है।
हजारों लोग जन्म प्रमाण पत्र के लिए लाइन में खड़े हैं, स्टाम्प पेपर और वकील की जेबें भर रही हैं और बिचौलिए पैकेज बेच रहे हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह प्रक्रिया सच में नागरिकता साबित करने का आधार बनेगी या फिर आम जनता के खून-पसीने की कमाई लूटने का एक और जरिया?
अमेरिका और भारत के रिश्तों में पिछले कुछ हफ्तों में खटास देखने को मिली है। इसकी बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए बेतुके टैरिफ हैं। ट्रंप दावा कर रहे हैं कि भारत पर 50% फीसदी टैरिफ लगाने की वजह भारत द्वारा रूसी तेल खरीदा जाना है।
हालाँकि, रूसी तेल खरीदने और व्यापार को लेकर चीन पर टैरिफ ना लगाए जाने के बाद उन पर बार-बार सवाल उठ रहे थे। इसके अलावा वो लगातार यह दावा भी कर रहे हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच उन्होंने सीजफायर कराया है। अब न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में ट्रंप के भड़के होने का राज खुला है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के रिश्तों में आई खटास की बड़ी वजह रूसी तेल नहीं बल्कि भारत का ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित ना करना है।
गौरतलब है कि ट्रंप ने जब भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम की बात कही थी तो उसके बाद पाकिस्तान ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित कर दिया था। पाकिस्तान की फौज के मुखिया आसिम मुनीर की व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात हुई थी और इसके कुछ दिनों बाद ही पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से ट्रंप को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था।
रिपोर्ट में क्या है दावा?
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी से भी ट्रंप यही चाहते थे। रिपोर्ट में कहा गया है, “17 जून को हुई एक फोन कॉल में ट्रंप ने फिर वही बात (भारत-पाकिस्तान सीजफायर) छेड़ दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने सैन्य तनाव को खत्म कर दिया है।”
रिपोर्ट कहती है, “उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि पाकिस्तान उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने जा रहा है। कॉल से वाकिफ लोगों के अनुसार, इस बातचीत का सीधा-सा संकेत यह था कि मोदी को भी वही करना चाहिए।”
रिपोर्ट में लिखा है, “मोदी यह सुनकर तिलमिला गए। उन्होंने ट्रंप से साफ कह दिया कि हालिया युद्धविराम में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी। यह फैसला सीधे भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था। ट्रंप ने मोदी की इस बात को ज्यादा तवज्जो नहीं दी लेकिन यह असहमति और नोबेल के मुद्दे पर मोदी का इनकार दोनों नेताओं के रिश्ते में आई खटास का बड़ा कारण बना था।”
न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा है कि उसकी रिपोर्ट वॉशिंगटन और दिल्ली के दर्जन भर से ज्यादा लोगों से हुई बातचीत पर आधारित है। इनमें से ज्यादातर ने गोपनीयता की शर्त पर बात की क्योंकि दोनों देशों के रिश्तों का असर बहुत दूरगामी है।
भारत ने अमेरिकी मध्यस्थता की बात को किया है खारिज
जून की उस फोन कॉल के कुछ हफ्तों बाद बातचीत के बीच ही ट्रंप ने अचानक भारत पर 25% टैरिफ लगाने का एलान कर दिया था। इसके कुछ दिनों यह बढ़ाकर 50% कर दिया गया था।
ट्रंप दरअसल दावा करते हैं कि उन्होंने व्यापार की धमकी देकर इस युद्ध को रुकवाया था। जाहिर है कि अगर ट्रंप की बात में दम होता और भारत ने उनकी बात ही सुनी होती तो आज भारत पर इतना टैरिफ ना लग रहा होता।
भारत ने हमेशा से यह स्पष्ट किया है कि भारत-पाकिस्तान के बीच किसी तीसरे देश की मध्यस्थता उसे स्वीकार नहीं है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और सैन्य अधिकारी भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि संघर्ष विराम के लिए पाकिस्तान के DGMO द्वारा भारत के DGMO से अनुरोध किया गया था।