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तालिबान को सौंपा अफगानिस्तान, ISIS के जिहादी को सौंपी सीरिया की कमान और अब इस्लामिक जिहाद को पालने वाली पाक फौज से मिलाया हाथ: क्या दुनिया बर्बाद करके ही मानेंगे ट्रंप और अमेरिका?

राजनीति हो या भू-राजनीति दोनों का एक नियम होता है। यहाँ कोई ना स्थाई दोस्त होता है, ना कोई स्थाई दुश्मन। अपने देश का हित ही भू-राजनीति का सबसे बड़ा सिद्धांत है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देखिए वो खुलेआम इस बात का प्रदर्शन कर रहे हैं कि कैसे उनके लिए अपने देश का स्वार्थ ही सबसे बड़ा है। अब चाहे इसके लिए इस्लामी जिहादी आतंकवादियों या उनके समर्थकों को खुश ही करना पड़े।

मई 2025 में ट्रंप ने सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद हुसैन अल-शरा से मुलाकात की। इसी अल-शरा के सिर पर कुछ दिनों पहले तक अमेरिका ने $10 मिलियन (87.5 करोड़ रुपए) का इनाम रखा हुआ था। कहा जाता है कि अल-शरा ने 9/11 आतंकी हमलों का जश्न मनाया था। अमेरिका में हुए इस हमले में हज़ारों लोग मारे गए थे लेकिन अब ट्रंप इसका जश्न मनाने वाले की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं। ट्रंप ने शरा की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक आकर्षक और सख्त आदमी हैं जिनका अतीत काला रहा है। ट्रंप ने उन्हें फाइटर तक बता दिया।

2021 में जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी कराई तो उनकी खूब आलोचना की गई। अमेरिका से लेकर अन्य देशों के लोग भी उनके पीछे पड़ गए। हालाँकि, यह ट्रंप का 2020 का दोहा समझौता था जिसके चलते अमेरिका की वापसी हुई। वहीं, अफगानिस्तान को तालिबानी आतंकियों के हाथों में छोड़ दिया गया।

अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान से लड़ने में 20 साल, 2 ट्रिलियन डॉलर और सैकड़ों सैनिकों की जान गंवाई। 2021 में उन्होंने तालिबान से समझौता करके वहाँ से सेना हटा ली और अरबों डॉलर के सैन्य हथियार और संसाधन उसी तालिबान को सौंप दिए जिससे वे 20 साल से लड़ रहे थे।

सीरिया में एक पूर्व ISIS आतंकी से हाथ मिलाने और अफगानिस्तान को तालिबान के हवाले करने के बाद, ट्रंप ने पाकिस्तान फौज से दोस्ती गाँठी है। वही पाकिस्तानी फौज, जो इस क्षेत्र में इस्लामी आतंक का सबसे बड़ा गिरोह है।

पाकिस्तान प्रायोजित पहलगाम इस्लामी आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी फौज को करारी शिकस्त दी। इसके सिर्फ एक महीने बाद पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ लंच करने पहुँच गए थे। हालाँकि, यह मुलाकात भारत-पाक संघर्ष के कुछ ही दिनों बाद हुई लेकिन इसका मुख्य एजेंडा भारत नहीं बल्कि ईरान-इजरायल संघर्ष था।

इतिहास गवाह है कि अमेरिका ने हमेशा पाकिस्तान का इस्तेमाल अपने क्षेत्रीय हित साधने के लिए किया है। खुद पाकिस्तान के बड़े-बड़े नेता लाइव टीवी पर आकर यह कबूल चुके हैं। अमेरिका ने वर्षों तक अफगानिस्तान समेत इस क्षेत्र के कई हिस्सों में अपने रणनीतिक अभियानों के लिए पाकिस्तान को मोहरा बनाया है।

हाल ही में पाकिस्तानी फौजी के मुखिया मुनीर एक बार फिर अमेरिका गए। उन्होंने वहाँ अमेरिकी सेंट्रल कमांड (Centcom) के रिटायर हो रहे कमांडर के विदाई समारोह में हिस्सा लिया। ट्रंप को या तो खुलकर मुनीर का समर्थन है या अमेरिका उसे उकसा रहा है कि वो भारत के खिलाफ बयानबाजी करे। इसी से ‘चने के झाड़’ पर चढ़े मुनीर ने अमेरिकी धरती से भारत को परमाणु हमले की गीदड़भभकी तक दे डाली।

पाकिस्तान की विदेश और सुरक्षा नीति को नियंत्रित करने वाले और मदरसे में पढ़े जिहादी वर्दीधारी ने 10 अगस्त को फ्लोरिडा के टैम्पा शहर में एक निजी डिनर के दौरान एक उदाहरण दिया। उसने पाकिस्तान को ‘स्पॉइलर’ ताकत बताते हुए मर्सिडीज और डंप ट्रक की तुलना की। उसने कहा, “भारत एक चमकती हुई मर्सिडीज है जो हाईवे पर फरारी की तरह दौड़ रही है और हम बजरी से भरा डंप ट्रक हैं। अगर ट्रक कार से टकरा जाए, तो नुकसान किसको होगा?”

मुनीर ने उद्योगपति मुकेश अंबानी को धमकाने के लिए कुरान की आयतों का भी जिक्र किया। उसने कहा, “एक ट्वीट करवाया था, जिसमें सूरह अल-फील और मुकेश अंबानी की तस्वीर थी ताकि उन्हें दिखा सकें कि अगली बार हम क्या करेंगे।”

आसिम मुनीर की यह परमाणु धमकी बेहद अहम समय पर आई। पहली बात, यह धमकी अमेरिकी जमीन से दी गई। इसके अलावा, मुनीर ने ना सिर्फ पाकिस्तान के इस्लामी आतंकियों को खुश करने के लिए कुरान की आयतों का हवाला दिया बल्कि परमाणु हथियार की धमकी देकर भारत को ब्लैकमेल भी किया।

मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान आधी दुनिया को अपने साथ तबाह कर देगा। भारत को यह धमकी ठीक उसी दिन दी गई जिस दिन 80 साल पहले अमेरिका ने जापान के नागासाकी पर परमाणु बम गिराया था।

भारत ने इस धमकी पर कड़ा बयान जारी किया और दोहराया कि भारत को ऐसे ब्लैकमेल से कभी डराया नहीं जा सकता। अमेरिकी सरकार और मीडिया ने मुनीर की इस गीदड़भभकी पर चुप्पी साध रखी है। इससे अटकलें लग रही हैं कि यह धमकी सिर्फ मुनीर की भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी सोच नहीं है। यह भी संभव है कि यह अमेरिका के इशारे पर की गई एक सोची-समझी चाल हो।

परमाणु धमकी और मुकेश अंबानी को निशाना बनाने के अलावा मुनीर ने फिर से अपना पुराना बयान दोहराया कि ‘कश्मीर हमारे गले की नस है’। पहलगाम हमले से कुछ दिनों पहले भी मुनीर ने यही बयान दिया था। उसने कहा था, “कश्मीर भारत का आंतरिक मामला नहीं, बल्कि अधूरा अंतरराष्ट्रीय एजेंडा है। जैसे कायदे-आजम (मोहम्मद अली जिन्ना) ने कहा था कि कश्मीर पाकिस्तान की ‘गले की नस’ है।”

मुनीर ने ट्रंप को भारत-पाक संघर्ष खत्म कराने में उनके ‘काल्पनिक योगदान’ के लिए धन्यवाद दिया। हालाँकि, आसीम मुनीर की ट्रंप की चापलूसी बेकार नहीं गई। ट्रंप प्रशासन ने बूलचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी मजीद ब्रिगेड को ‘विदेशी आतंकी संगठन’ घोषित कर दिया। इससे पाकिस्तान आर्मी की झूठी कहानी को नया सहारा मिला कि अपनी आजादी के लिए लड़ रहे बलूच ‘आतंकवादी’ हैं।

इसके जरिए बलूचों की आजादी की लड़ाई को उन इस्लामी आतंकियों के बराबर बताने की कोशिश की गई जिन्हें पाकिस्तान आर्मी समर्थन देती है। इनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और पहलगाम हमले के आरोपी लश्कर का नया गुट द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) जैसे आतंकी संगठन शामिल हैं। अमेरिका ने कुछ दिनों पहले ही TRF को ‘विदेशी आतंकी संगठन’ घोषित किया था।

पाक सरकार के शोषण और चीनी परियोजनाओं के खिलाफ लड़ रहे हैं बलूच विद्रोही

पाकिस्तानी सरकार के शोषण और अपनी जमीन पर चीन की परियोजनाओं के खिलाफ बलूच विद्रोही वर्षों से लड़ते रहे हैं। वर्षों से BLA ने पाकिस्तानी फौज, चीनी कर्मचारियों और चीन की परियोजनाओं पर हमले किए हैं। बलूच लोग लगातार पाकिस्तान और चीन को लेकर कहते हैं कि वे यहाँ के संसाधन लूट रहे हैं और स्थानीय लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ नया व्यापार समझौता घोषित किया। इसमें पाकिस्तान के कथित ‘विशाल तेल भंडार’ को मिलकर विकसित करने की योजना है। इस घोषणा के कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने भारतीय आयात पर 25% शुल्क और अतिरिक्त जुर्माना लगाया था। ट्रंप ने यहाँ तक दावा किया कि शायद एक दिन पाकिस्तान, भारत को तेल बेच सकता है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ने लिखा, “हमने पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत हम दोनों मिलकर उनके विशाल तेल भंडार को विकसित करेंगे… कौन जाने, एक दिन वे भारत को तेल बेचें!”

पाकिस्तान के ज्यादातर तेल और गैस के बलूचिस्तान में हैं। इस वजह से यह कदम राजनीतिक चर्चा का कारण बना कि अमेरिका की यहाँ क्या भूमिका हो सकती है। बलूचिस्तान संसाधनों से भरपूर है लेकिन राजनीतिक रूप से अशांत इलाका है। पाकिस्तान और चीन पहले से ही यहाँ संसाधनों का दोहन कर रहे हैं।

अमेरिका की एक कंपनी ने पाकिस्तान के साथ एक क्रिप्टो डील साइन की है। इस कंपनी में ट्रंप के परिवार की 60% हिस्सेदारी है। इसके बाद ट्रंप की नजर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों पर है। चीन ने भी यहाँ निवेश करने की कोशिश की थी लेकिन यह सफल नहीं हो पाई। बलूच आजादी के लिए लड़ने वाले लोग, चीनी इंजीनियरों और CPEC पर काम कर रहे अधिकारियों और पाकिस्तानी फौज पर लगातार हमले करते रहे हैं।

अमेरिका, पाकिस्तान में तेल खोजना चाहता है। वर्षों पहले पाकिस्तान ने यही तेल भंडार अमेरिका को ‘लाहौरी चूरन’ के नाम पर चिपका दिया था। लगातार खोज के बाद भी वहाँ तेल और गैस कुछ नहीं मिला।

दशकों से इस्लामी आतंकियों को बढ़ावा दे रही पाक आर्मी

1947 में पाकिस्तान के बनने के बाद से ही पाकिस्तानी फौज आतंकियों को पालती रही है। पाक ने इनका इस्तेमाल भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ किया है। अमेरिका का भी इतिहास इन इस्लामिक जिहादी आतंकियों के समर्थन का ही रहा है। हालाँकि, ओसामा बिन लादेन के मामले में अमेरिका के साथी पाकिस्तान की पोल खुल गई थी।

लादेन खुद को आतंक की लड़ाई में अमेरिका का दोस्त बताने वाले पाकिस्तान की नाक के नीचे मिला था। 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड को अमेरिका कई वर्षों तक ढूंढ रहा था और वो 2011 में एबटाबाद में पाकिस्तानी फौज की एक छावनी के पास मिला।

पाकिस्तानी फौज दशकों से अलग-अलग नामों से इस्लामी आतंकियों को फंड और ट्रेनिंग देती रही है। चाहे 1980 के दशक में कश्मीर के जिहादी समूहों को धन या लॉजिस्टिक की मदद देना हो, कश्मीरी पंडितों की हत्याएँ और पलायन कराना हो या डोडा नरसंहार जैसे अन्य हमले हों।

सेना के अफसर इन आतंकियों को पैसा और प्रशिक्षण देते हैं। साथ ही, अपने देश में उन्हें सुरक्षा भी देते हैं। पाकिस्तान की सिविल सरकार इन आतंकियों के हवाला से आए पैसों को छिपाने में मदद करती है। ये काम चैरिटी और धार्मिक संगठनों के नाम पर किया जाता रहा है। भारत और हिंदुओं से नफरत करने वाली पाकिस्तान फौज ने भारत से 4 बार युद्ध लड़ा लेकिन वे हर बार हारे। पाकिस्तान भी जानता है कि भारतीय सेना के सामने पाकिस्तान की कोई औकात नहीं है।

पाकिस्तानी फौज, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे इस्लामी आतंकी संगठनों का समर्थन करती है। वे संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकियों जैसे सैयद सलाउद्दीन, मसूद अजहर, हाफिज सईद जैसे अनगिनत आतंकियों को पाकिस्तान में सुरक्षित पनाहगाह भी मुहैया कराते हैं। मई में जब भारत ने कुछ आतंकियों को मार गिराया, तो पाकिस्तानी फौजी उनके जनाजों में भी शामिल हुए। खुद पाकिस्तानी सेना के पीआर विंग का मौजूदा प्रमुख अहमद शरीफ चौधरी संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित एक आतंकी का बेटा है।

अमेरिका, खासकर डोनाल्ड ट्रंप आतंकियों और जिहादी आतंकवाद का इस्तेमाल करने वाले देशों के बारे में अपना रुख बदलते रहते हैं। उन्हें पाकिस्तान के ओसामा बिन लादेन वाले धोखे और अफगानिस्तान में डॉलर ऐंठने वाली चालें भी याद नहीं है। भारत कभी नहीं भूलेगा कि पाकिस्तान ने कितने निर्दोष भारतीयों का खून बहाया है।

2018 की बात है, ट्रंप ने X पर एक पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान को अरबों की आर्थिक मदद देकर अमेरिका मूर्खता कर रहा था। उन्होंने लिखा, “अमेरिका ने मूर्खता की हद तक जाकर पाकिस्तान को पिछले 15 साल में 33 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद दी। बदले में हमें सिर्फ झूठ और धोखा मिला। वे हमारे नेताओं को मूर्ख समझते हैं। अफगानिस्तान में जिन आतंकियों को हम मारते हैं, वे उन्हें सुरक्षित पनाह देते हैं। अब और नहीं!”

इससे एक साल पहले ही ट्रंप ने पाकिस्तान का धन्यवाद दिया था और रिश्ते बेहतर करने को लेकर वो बहुत उत्साहित थे। पाकिस्तान उसके आतंकवाद और उसके धोखों पर ट्रंप का रुख उतना ही बदलता रहता है जितना कि उनका एप्सटीन फाइल्स जारी करने का वादा।

ट्रंप सरकार ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड को आतंकवादी संगठन तो घोषित किया लेकिन पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूच जनता पर किए जा रहे जुल्म पर कोई सवाल नहीं उठाया। ट्रंप ने ये नहीं पूछा कि ग्वादर इलाके में 1 लाख से ज्यादा लोगों के पास पीने का साफ पानी क्यों नहीं है। ना ही उन्होंने यह पूछा कि बलूच बच्चों को बलूची भाषा क्यों नहीं पढ़ने दी जाती और उन पर उर्दू थोपी दी जाती है। ट्रंप ने इस पर भी सवाल नहीं उठाया कि क्यों बलूचिस्तान का सुई गैस फील्ड पूरे पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरतें पूरी करता है लेकिन खुद बलूचिस्तान में गैस की पहुंच सीमित है।

शायद, डोनाल्ड ट्रंप और आसिम मुनीर की बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों को लूटने का लालच बलूच जनता पर हो रहे अन्याय से ज्यादा अहम है। BLA आजादी के लिए लड़ रही है लेकिन पाकिस्तान का दमनकारी शासन और अमेरिकी लालच इसके रास्ते में खड़े हैं।

वर्षों से पाकिस्तान ने PoK और अपने दूसरे इलाकों में जिहादी आतंकियों को पाला-पोसा है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकी संगठनों को ताकत दी है। बलूच लोगों पर जुल्म किया है, जबरन गायब किया है और महरंग बलूच जैसे कई नेताओं को गिरफ्तार किया है। अब पाकिस्तानी सेना को बलूच जनता का शोषण और दमन करने का एक नया मौका मिल गया है। अमेरिका को शायद एक नई जगह मिल गई है जहाँ वह अपने कभी ना खत्म होने वाले युद्ध चला सके जिनसे उसकी हथियार बनाने वाली इंडस्ट्री को फायदा होता है।

आसिम मुनीर असल में एक फौजी वर्दी में मसूद अजहर या हाफिज सईद जैसा ही है। कोई हैरानी नहीं कि ट्रंप भारत से नाराज हैं क्योंकि उन्हें भारत जैसे बराबरी के साझेदार के बजाय पाकिस्तान जैसे झगड़ों में उलझे हुए गुलाम मुल्क पसंद हैं, जिन्हें हड्डी फेंककर खुश करना आसान है। एक आजाद, मजबूत और गर्व से भरे भारत के साथ इज्जत से रिश्ता निभाना ट्रंप को यकीनन मुश्किल ही लगेगा।

(मूल रूप से यह खबर अंग्रेजी में श्रद्धा पांडेय द्वारा लिखी गई है, जिसे आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं।)

हमारे मतदाताओं के लिए ‘वोट चोर’ जैसे गंदे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करें राहुल गाँधी: चुनाव आयोग, कॉन्ग्रेस नेता को याद दिलाया 73 साल पुराना कानून

चुनाव आयोग ने ‘वोट चोरी’ के राहुल गाँधी समेत तमाम विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब दिया है। आयोग ने हाल में किए गए दावों को भ्रामक और गलत करार दिया है। बिहार में SIR का शुरुआत से विरोध कर रहे विपक्ष और कर्नाटक में वोट चोरी का आरोप लगा रहे राहुल गाँधी की पोल फैक्ट चेक के जरिए चुनाव आयोग ने खोली है। आयोग ने चुनौती दी है कि अगर कोई सबूत है तो उन्हें दिखाएँ, लोगों को गुमराह न करें।

आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में कोई भी नाम कानूनी प्रमाण के बिना न ही हटाया या जोड़ा जा सकता। मतदाता सूची कानून का सख्ती से पालन करते हुए तैयार की जाती है। इसमें नाम जोड़ना या हटाना ‘मतदाता पंजीकरण 1960’ के तहत किया जाता है। बिहार में SIR को लेकर चुनाव आयोग का कहना है कि 14 अगस्त तक एक भी शिकायत किसी राजनीतिक पार्टी ने दर्ज नहीं कराई है।

विपक्ष संसद से सड़क तक वोटर लिस्ट में नाम काटने के नाम पर बवाल कर रहा है। चुनाव आयोग ने 1 अगस्त से एक महीने तक किसी भी तरह की शिकायत होने पर राजनीतिक दलों को दर्ज कराने को कहा है। 14 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी आपत्ति या शिकायत कोई भी पार्टी दर्ज नहीं करा पाई है।

बिहार में जमीन पर विपक्ष के कार्यकर्ता जो बीएलए हैं, उन्होंने भी प्रक्रिया पर संतुष्टि जताई है। लेकिन राहुल गाँधी को बस चुनाव प्रक्रिया पर हमला कर जनता के लोकतंत्र पर विश्वास को तोड़ने की ही कोशिश में लगे हुए हैं। ये लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। चुनाव प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण भी दिया है।

चुनाव आयोग का कहना है कि ‘एक व्यक्ति एक वोट’ का कानून 1951-1952 में भारत के पहले चुनाव से ही अस्तित्व में है। अगर किसी के पास किसी भी चुनाव में किसी व्यक्ति द्वारा दो बार वोट देने का कोई सबूत है, तो उसे बिना किसी सबूत के भारत के सभी मतदाताओं को ‘चोर’ बताने के बजाय, एक लिखित हलफनामे के साथ चुनाव आयोग के साथ साझा किया जाना चाहिए।

आयोग ने वोट चोर शब्द पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा, “हमारे मतदाताओं के लिए ‘वोट चोर’ जैसे गंदे शब्दों का इस्तेमाल करके एक झूठी कहानी गढ़ने की कोशिश करना लाखों चुनाव कर्मचारियों की ईमानदारी पर भी हमला है। साथ ही ये करोड़ों भारतीय मतदाताओं पर सवाल खड़े करना है।” चुनाव आयोग का जवाब कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने ‘वोट चोरी’ का आरोप चुनाव आयोग पर लगाया था।

थैंक्यू CM योगी…मेरे पति के हत्यारे को मिट्टी में मिलाया: अतीक मामले में SP MLA पूजा पाल ने विधानसभा में खुल कर की तारीफ, कहा – माफिया के खिलाफ दिलाया न्याय

समाजवादी पार्टी की विधायक पूजा पाल ने विधानसभा में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की है। पाल ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीएम ने उनके पति के हत्यारे को मिट्टी में मिलाने का काम किया और उन्हें न्याय दिलाया।

जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा में ‘विजन डॉक्यूमेंट 2047’ को लेकर चर्चा की जा रही है। इसी चर्चा के बीच समाजवादी पार्टी की विधायक पूजा पाल ने सीएम योगी की तारीफ करती नजर आई।

विधायक ने कहा, “मेरे पति की हत्या किसने की? मैं मुख्यमंत्री का शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ कि उन्होंने मुझे न्याय दिलाया और मेरी बात तब सुनी जब किसी ने नहीं सुनी।” 

रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति की सराहना करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री ने प्रयागराज में जीरो टॉलरेंस जैसी नीतियाँ लागू करके मुझ जैसी कई महिलाओं को न्याय दिलाया, जिसके कारण अतीक अहमद जैसे अपराधी मारे गए।”

पूजा पाल ने आगे कहा, “आज पूरा प्रदेश मुख्यमंत्री की ओर भरोसे से देखता है। मैंने तब आवाज उठाई जब मैंने देखा कि कोई भी अतीक अहमद जैसे अपराधियों के खिलाफ लड़ना नहीं चाहता। जब मैं इस लड़ाई से थकने लगी, तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझे न्याय दिलाया।”

बता दें कि पूजा पाल के पति राजू पाल की अतीक अहमद और उसके गुर्गों ने दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। मामले में पूजा पाल ने कहा, “बहुत ही कम उम्र में शादी के 9वें दिन मेरे पति की हत्या की गई थी। प्रयागराज में जो कोई भी नहीं सोचता था, वो हुआ।”

उन्होंने कहा, “मैं बहुत गरीब परिवार से आती हूँ, लेकिन वहाँ की जनता ने अपना पैसा लगाकर मुझे चुनाव लड़ाया और जिताया। मैं अकेली माफिया अतीक अहमद से लड़ी थी, मैंने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी। हनुमान जी को मानने वाले हमारे प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने मेरे साथ इंसाफ किया और न्याय दिलाया।”

दुबई में भी इस्लामी धर्मांतरण का काम, 6 महीने में 3600+ बने मुसलमान: जानिए – साम-दाम-दंड-भेद के दम पर इस्लाम को कैसे आगे बढ़ा रहा सरकारी विभाग, जो सीधे ‘किंग’ को करता है रिपोर्ट

दुबई में 2025 के पहले छह महीनों (जनवरी से जून) में 3,600 से ज्यादा लोगों ने इस्लाम कबूला है। यह काम मोहम्मद बिन राशिद सेंटर फॉर इस्लामिक कल्चर के जरिए हुआ, जो कि दुबई की सरकारी संस्था इस्लामिक अफेयर्स एंड चैरिटेबल एक्टिविटीज डिपार्टमेंट (IACAD) के अधीन है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चौंकाने वाली जानकारी दुबई सरकार की एक अहम संस्था IACAD ने जारी की है। इस संख्या के साथ ही सैकड़ों लोग इस्लाम से जुड़े एजुकेशनल और जागरूकता कार्यक्रमों में भी शामिल हुए हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य मकसद इस्लाम मजहब के बारे में और विचारों को बेहतर ढंग से समझाना है।

IACAD: कौन सी संस्था है और इसका उद्देश्य क्या है?

IACAD यानी इस्लामिक अफेयर्स एंड चैरिटेबल एक्टिविटीज डिपार्टमेंट दुबई सरकार का एक विभाग है, जो वहाँ पर इस्लाम से जुड़े सभी कामों की देखरेख करता है। इसकी स्थापना 1969 में हुई थी, जिसका मकसद पूरे दुबई में मजहबी जागरुकता और इस्लामिक मूल्यों को बढ़ावा देना है।

IACAD यानी इस्लामिक अफेयर्स एंड चैरिटेबल एक्टिविटीज़ डिपार्टमेंट एक सरकारी संस्था है, जो इस्लाम मज़हब से जुड़ी तमाम गतिविधियों को संभालती है। इसका काम सिर्फ कुरान बाँटना, मस्जिदों की देखरेख करना या इस्लामी शिक्षकों को लाइसेंस देना ही नहीं है, बल्कि यह संस्था इस्लाम की सीखों को दुनिया के सामने पेश करने का भी काम करती है।

IACAD का मानना है कि इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जो इल्म (ज्ञान), सहनशीलता (सबर), और आपसी बातचीत (मशवरा) को बढ़ावा देता है। संस्था चाहती है कि दुनिया को इस्लाम की नरम और समझदारी वाली तस्वीर दिखे।

इसलिए वो न सिर्फ मजहबी तालीम देती है, बल्कि लोगों को इस्लामी तहज़ीब यानी इस्लामिक तौर-तरीकों से भी जोड़ने की कोशिश करती है। IACAD उन लोगों से भी बात करती है जो इस्लाम को जानना या समझना चाहते हैं। चाहे वो मुस्लिम हों या गैर-मुस्लिम। IACAD संस्था कोर्सों और इंटरएक्टिव सेशन्स के जरिए इस्लाम की बातों को लोगों तक पहुँचाने का काम करती है।

IACAD का दावा है कि वह इस्लामी तालीम और अदब (संस्कार) के जरिए अलग-अलग समाजों और सोच वाले लोगों के बीच पुल बनाता है। इस तरह का काम वह मोहम्मद बिन राशिद सेंटर फॉर इस्लामिक कल्चर के जरिए करता है। यहाँ ऐसे लोग आते हैं जो इस्लाम अपनाना चाहते हैं या उसके बारे में सीखना चाहते हैं।

IACAD कैसे काम करती है और इसकी क्या जिम्मेदारियाँ हैं?

IACAD की जिम्मेदारियाँ बहुत विस्तृत हैं और यह कई तरीकों से अपने उद्देश्यों को पूरा करती है। यहाँ विस्तार से बताया गया है कि यह संस्था क्या-क्या काम करती है।

फतवा जारी करना: IACAD संस्था लोगों को मजहबी मामलों में मार्गदर्शन देती है और उनके सवालों का जवाब फतवा के रूप में देती है। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है, ताकि लोग आसानी से अपने सवालों का हल पा सकें।

कुरान और इस्लामिक साहित्य का वितरण: यह संस्था कुरान और अन्य इस्लामिक किताबों को छापती है और लोगों के बीच बाँटती है। इसका उद्देश्य इस्लामिक ज्ञान को लोगों तक पहुँचाना है।

हज और उमराह का प्रबंधन: IACAD संस्था हज और उमराह करने वालों की मदद करता है। यह संस्था सफर की पूरी योजना बनाती है और लोगों को रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) करवाने में भी सहायता करती है। ताकि जो लोग मक्का-मदीना जाना चाहते हैं, उनका सफर आराम से और सही तरीके से हो सके।

मस्जिदों की देखरेख: दुबई की सभी मस्जिदों की जिम्मेदारी IACAD की होती है। यह संस्था देखती है कि मस्जिदों में नमाज और दूसरी इबादतें ठीक से हों। साथ ही यह भी ध्यान रखती है कि मस्जिद का माहौल शांत और लोगों के लिए अच्छा बना रहे।

ऑनलाइन सेवाएँ: IACAD संस्था तकनीक का इस्तेमाल करके अपनी वेबसाइट पर लोगों के लिए कई सुविधाएँ देती है। जैसे- (1) लोग अपने मजहबी सवाल ऑनलाइन पूछ सकते हैं। (2) नए मुस्लिम लोगों को इस्लाम समझाने के लिए गाइड मिलती है। (3) दुबई में कहाँ-कहाँ मस्जिदें हैं, उसकी पूरी लिस्ट मिलती है। (4) हर दिन की नमाज का सही समय पता चलता है। (5) साल भर की इस्लामिक छुट्टियों की जानकारी भी मिलती है।

निशाने पर कौन लोग हैं और कितने लोग अपना धर्म बदल चुके हैं?

IACAD संस्था का मुख्य उद्देश्य वो लोग है, जो दुबई में रहते हैं और इस्लाम मजहब को जानना या समझना चाहते हैं। इसमें न सिर्फ दुबई के नागरिक, बल्कि विदेशों से आए लोग भी शामिल हैं। यह संस्था उन लोगों को खासतौर पर निशाना बनाती है, जिन्होंने नया-नया इस्लाम कबूला है।

दिए गए आँकड़ों के अनुसार, 2025 के पहले छह महीनों में 3,600 से ज़्यादा लोगों ने इस्लाम कबूल किया। रिपोर्ट में ये तो नहीं बताया गया कि ये लोग पहले किस धर्म के थे, लेकिन ये ज़रूर कहा गया है कि वे अलग-अलग देशों और सभ्यताओं से आए थे।

धर्म परिवर्तन के अलावा, IACAD संस्था ने ऐसे शैक्षिक कोर्स शुरू किए हैं जिनमें इस्लाम के बारे में गहराई से सिखाया जाता है। इनमें 1,300 से ज्यादा लोगों ने दाखिला लिया। इन कोर्सों में इस्लाम के रोजमर्रा के तौर-तरीके, नियम और उसूल समझाए जाते हैं।

IACAD ने कुल 47 जागरुकता वाले ऐसे कोर्स कराए, जिनमें 1,400 से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। इनका मकसद था कि लोग इस्लामिक सोच और मान्यताओं को सही तरीके से समझ सकें। ये कोर्स इस्लाम की तालीम और समझ बढ़ाने के लिए चलाए जाते हैं।

शिक्षा में ‘सस्टेनेबल नॉलेज रूम’ तकनीक का इस्तेमाल

IACAD संस्था ने इस्लाम मजहब की शिक्षा को आधुनिक और ज़्यादा आकर्षक बनाने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया है। ‘सस्टेनेबल नॉलेज रूम’ एक ऐसा ही प्रोजेक्ट है, जो मोहम्मद बिन राशिद सेंटर फॉर इस्लामिक कल्चर में मौजूद है।

यह एक 360-डिग्री का वर्चुअल क्लासरूम है, जहाँ लोग इंटरैक्टिव तरीके से इस्लाम के बारे में सीखते हैं। यह तकनीक शिक्षा को एक वास्तविकता में बदल देती है। इससे लोग इस्लाम से जुड़ी जानकारी को ज़्यादा आसानी से समझ पाते हैं। इस तकनीक से 190 से ज़्यादा लोगों ने अपना मजहब बदला है। इस रूम का इस्तेमाल बच्चों और बड़ों दोनों पर किया जाता है।

₹61000 में इमाम अकबर अली ने खरीदा अवैध पिस्टल, पैसे लेकर डेविड सोनी ने थमा दिया तमंचा: ठगे जाने से दुखी होकर पहुँचा पुलिस के पास तो खुली गैंग की पोल, 5 गिरफ्तार

यूपी के इटावा में अवैध असलहा की सौदेबाजी करते पुलिस ने मस्जिद के इमाम अकबर अली समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से तीन तमंचे, एक बाइक और एक मोबाइल बरामद किए गए हैं।

मुरादाबाद का रहने वाला है इमाम अकबर अली

पकड़े गए आरोपितों में इमाम अकबर अली के अलावा डेविड सोनी, सूरज उर्फ रुद्रा, अरविंद और एकलव्य शर्मा का नाम शामिल है। अकबर अली मुरादाबाद का रहने वाला है और सैफई के कुम्हावर की मस्जिद में इमाम है। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया है कि उसे जान का खतरा है। गाँव के कुछ लोग और ससुराल पक्ष से उसे जान से मारने की धमकी दी है। इसलिए उसने 2 अगस्त को 61 हजार रुपए में पिस्टल का सौदा किया था, लेकिन उसे तमंचा दिया जा रहा था। इसको लेकर उसने सिविल लाइन थाने में ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी।

इस बीच पुलिस को सूचना मिली कि रेलवे स्टेशन के पास मौजूद मजार में कुछ लोग अवैध तरीके से असलहों की खरीद फरोख्त कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस वहाँ पहुँची और 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

अवैध असलहे की खरीद-फरोख्त

पुलिस ने जाँच में पाया कि इमाम अकबर अली अवैध तरीके से पिस्टल खरीद रहा था। उसने आरोपी डेविड सोनी के साथ सौदा किया था। डेविड सोनी पर हत्या की कोशिश, डकैती, गैंगस्टर और आर्म्स एक्ट के तहत कई मामले दर्ज हैं। पुलिस ने डेविड के तीन दोस्तों को भी गिरफ्तार किया। इनकी तलाशी के दौरान दो तमंचे, तीन हजार रुपए और एक मोबाइल बरामद किया गया। जबकि इमाम केपास से एक तमंचा और दो कारतूस बरामद किया गया है।

स्थानीय सीओ सिटी अभय नारायण राय के मुताबिक पूछताछ में चारों ने माना है कि अकबर अली ने पिस्टल खरीदने के लिए उन लोगों को 61 हजार रुपए दिए थे। पुलिस ने अब ठगी की जगह आर्म्स एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कर लिया है। अकबर अली समेत सभी को जेल भेज दिया गया है।

सोशल मीडिया पर महिलाओं को धमकाने वालों के खिलाफ सख्त कानून की जरूरत, अभी सिर्फ जमानती धाराएँ: MP हाई कोर्ट ने जताई निराशा, आरोपित को दी अग्रिम जमानत

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि सोशल मीडिया पर महिलाओं को धमकाने या अश्लील मैसेज भेजने वालों के खिलाफ सख्त कानून की कमी है। कोर्ट ने एक मामले में आरोपित को अग्रिम जमानत दे दी, जिसमें उसने पीड़िता को धमकी भरे संदेश भेजे थे।

कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर महिलाओं को अश्लील या धमकी भरे संदेश भेजने जैसे गंभीर मामलों में भी आरोपित पर केवल जमानती धाराएँ लगाई जाती हैं। कोर्ट का कहना है कि ऐसे मामलों के लिए अलग से कोई सख्त कानून नहीं बनाया गया है।

जानकारी के अनुसार, मामले में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी घिनौनी और मानसिक रूप से परेशान करने वाली हरकतों के बावजूद आरोपित पर केवल जमानती धाराएँ लगाई जाती हैं। ऐसे मामलों की शिकार महिलाएँ, विशेष रूप से युवा लड़कियाँ असुरक्षित महसूस करती हैं और उन्हें राज्य या कोर्ट से भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती।”

क्या है मामला?

आरोपित और पीड़िता की छह साल पहले सगाई हुई थी, लेकिन बाद में वह टूट गई। सगाई टूटने के बाद आरोपित ने पीड़िता को सोशल मीडिया  पर लगातार परेशान करना शुरू कर दिया। उसने धमकी भरे और डराने वाले संदेश पोस्ट किए, जैसे “तू चाहे शादी कर ले, मैं तेरी शादी बर्बाद कर दूँगा, ये मेरा वादा है। मुझे केस करवाना है अपने ऊपर… तू सोचती है कि मुझे छोड़ कर चैन से जी लेगी, ऐसा नहीं होगा। मुझे जेल जाना ही है तो 10 दिन चला जाऊँगा, फिर क्या… मैं तेरी शादी नहीं होने दूँगा, चाहे कुछ भी हो जाए।”

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 183 के तहत पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि इस तरह की धमकियों की वजह से उसकी एक और सगाई टूट गई। उसे कॉलेज जाना भी छोड़ना पड़ा, क्योंकि आरोपित के संदेश उसे मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे।

कोर्ट की टिप्पणी

रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने माना कि आरोपित के खिलाफ जो धाराएँ लगाई गई हैं (जैसे पीछा करना और डराना), वे जमानती हैं, जबकि ऐसे मामलों के लिए अलग और सख्त कानून होने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराधियों को रोकने के लिए और महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए विधायिका को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

₹5 लाख के लिए अब्बू ने नाबालिग बेटी को बेचा, 50 साल के अधेड़ से करा दिया निकाह: जबरन संबंध बनाने के दौरान भागी पीड़ित, राजस्थान के बीकानेर में 11 के खिलाफ केस

राजस्थान के बीकानेर में एक व्यक्ति ने 5 लाख रुपए में 15 साल की नाबालिग बेटी को बेच दिया। इतना ही नहीं उसने जबरन 50 साल के आदमी से उसका निकाह भी करवा दिया। लड़की की अम्मी ने 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मामला खाजूवाला थाना क्षेत्र का है। नाबालिग की अम्मी ने बताया कि उनकी 15 साल की बेटी का निकाह 50 साल की उम्र के शख्स से करने का प्रस्ताव आया था, लेकिन उसने इंकार कर दिया था। इसके बावजूद शौहर और बेटा इस निकाह के लिए लगातार दबाव बना रहे थे।

उसने बताया कि 6 अगस्त 2025 को शौहर के साथ कुछ लोग आए, जिन्होंने उसकी बेटी को धमकाया। इसके बाद वे जबरन बेटी को अपने साथ ले गए, शौहर और बेटा भी उन लोगों के साथ ही गए।

उन लोगों ने 8 अगस्त तक नाबालिग को एक घर में बंधक बनाकर रखा। 9 अगस्त को उसे नशीला पेय पिलाकर उसके घर वापस ले आए। उसी रात वे सभी एक मौलवी के साथ आए और निकाह कराने लगे।

लड़की की अम्मी ने विरोध किया तो शौहर और बेटे ने बताया कि 5 लाख में सौदा हुआ है, इसलिए निकाह तो जरूर होगा। निकाह के बाद उसकी अम्मी को कमरे में बंद कर वे नाबालिग को साथ ले गए। 50 साल के आरोपित ने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की, जिसके बाद पीड़ित किशोरी किसी तरह उसके चंगुल से भागकर अपने घर आ गई।

नाबालिग की अम्मी ने शौहर, बेटे और निकाह करने वाले 50 साल के व्यक्ति सहित 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। थानाधिकारी सुरेंद्र कुमार प्रजापत ने बताया कि पॉक्सो एक्ट और बाल विवाह प्रतिषेध (2006) की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। पीड़िता के बयान के बाद आगे की जाँच की जाएगी।

गणेश झाँकी पर नहीं लगाई फोटो तो गुर्गों संग कर लिया अगवा, प्रताड़ित कर वसूले ₹50000: भोपाल गैंग के लीडर शारिक मछली के खिलाफ दर्ज हुई एक और FIR

ड्रग तस्करी रैकेट चलाने वाला भोपाल का यासीन मछली और उसके चाचा सारिक मछली ने हिंदू पर अत्याचार किया। हिंदू की जमीन को अतिक्रमण बताकर ढहा दिया। जहाँ रेव पार्टियाँ होती थी, उसी फार्महाउस में ले जाकर बँधकर बनाया। यहाँ तक की झूठे मामले में FIR भी करवा दी। अब पीड़ित राजेश तिवारी ने सामने आकर आपबीती सुनाई है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, राजेश तिवारी ने बताया कि साल 2021 में सारिक ने गणेश झाँकी में अपने और उसके करीबी मंत्री का बैनर लगाने का दबाव बनाया था। राजेश ने वह धार्मिक कार्य में राजनीतिक व्यक्ति के बैनर नहीं लगाते हैं। तभी से सारिक ने उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

दुकान को तुड़वाया, मंदिर बनाकर कब्जे से बचाई

राजेश तिवारी बताते हैं कि सारिक मछली उनकी अशोका गार्डन इलाके में बनी दुकान पर कब्जा करना चाहता था। सारिक ने दुकान को अतिक्रमण बताकर तुड़वा दिया। राजेश ने अपनी जमीन बचाने के लिए वहाँ मंदिर बनवा दिया, जिसके बाद सारिक ने हिंदू स्थल होने के चलते जमीन को छोड़ दिया।

इस बात का बदला लेने के लिए 29 सितंबर 2021 को सारिक और उसके तीन गुर्गे लाल रंग की थार में आए और बंदूक की नोक पर राजेश तिवारी को अगवा कर ले गए। राजेश को उसी हथाईखेड़ के फार्महाउस ले जाया गया, जहाँ रेव पार्टियाँ आयोजित की जाती थीं। यहाँ अलग-अलग कमरों में लड़कियों को बंधक बनाके रखा गया था।

पुलिस की जाँच में भी सामने आया था फार्महाउस में लड़कियों को नशा देकर दुष्कर्म किया जाता था। राजेश तिवारी के साथ भी इसी फार्महाउस में लूट मचाई गई।

‘पंडित’ राजेश तिवारी पर बकरी खरीदने का आरोप लगाकर फँसाया

राजेश तिवारी को फार्महाउस में 16 घंटे तक बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा गया। इस दौरान सारिक ने राजेश से ₹50 हजार रुपए भी वसूल लिए। बाद में इन पैसों के जरिए बेबुनियाद आरोप में फँसाया गया।

राजेश बताते हैं कि सारिक ने जिस व्यक्ति के मोबाइल में ₹50 हजार ट्रांसफर करवाए थे, उसने पुलिस के सामने झूठा बयान दिया। उस व्यक्ति ने कहा कि बकरा खरीदने के बदले राजेश तिवारी से यह पैसे लिए गए हैं। राजेश कहते हैं कि वह पंडित आदमी हैं और इस झूठे आरोप से उनके परिवार की काफी बदनामी हुई।

इतना ही नहीं सारिक ने किसी मंत्री का संरक्षण लेकर राजेश तिवारी के खिलाफ रेप और हत्या के झूठे आरोप भी लगाए। इसके चलते राजेश तिवारी को अपनी नौकरी से निकाल दिया गया। राजेश ने बताया कि हत्या मामले में फरियादी सारिक का कोई करीबी है।

वहीं, जब सारिक के खिलाफ शिकायत करने राजेश तिवारी थाने पहुँचे, तो पुलिस ने 15 दिन तक FIR दर्ज नहीं की थी।

यासीन मछली पर हिंदू युवती के रेप में FIR दर्ज

भोपाल में ड्रग तस्करी के आरोप में पकड़े गए यासीन मछली और चाचा सारिक मछली ने सालों से लोगों पर अत्याचार किए। युवाओं को नशे में धखेलने का काम करते थे। इससे पहले एक हिंदू युवती ने भी यासीन मछली पर रेप का मुकदमा दर्ज करवाया था।

युवती ने शिकायत में बताया था कि करीब एक साल पहले एक पब में यासीन से मुलाकात हुई थी। यासीन ने युवती से दोस्ती की। दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लग गईं। यासीन ने युवती को शादी का झाँसा देकर फाइव स्टार में बुलाया और रेप किया।

युवाओं को रेव पार्टी में बुलाकर नशे की लत डालते

यासीन मछली भोपाल में युवाओं को टारगेट कर रेव पार्टी में बुलाता था। इस काम के लिए कई पब और लॉन्ज अड्डा बने हुए थे। पार्टी में आने वाली हिन्दू लड़कियों को ड्रग्स की डिलीवरी के लिए इस्तेमाल करता था। इन लड़कियों को प्रेम जाल में फँसा कर उनका रेप करता और फिर ब्लैकमेल करता था। रेव पार्टियों से जुड़े कई वीडियो भी पुलिस के हाथ लगे थे।

वह शहर के बाहरी इलाकों में रेव पार्टी आयोजित करता था। इन पार्टियों में एंट्री के लिए 10 से 25 हजार रुपए वसूले जाते थे। पार्टी में ड्रग्स के लिए अलग से रकम ऐंठी जाती थी। इस पूरे काले कारोबार में यासीन मछली और उसका परिवार शामिल था।

यासीन के परिवार ने 55 साल में अवैध काम कर खड़ा किया ‘साम्राज्य’

ड्रग तस्कर यासीन मछली के परिवार ने 55 साल में अवैध कारोबार के जरिए बड़ा साम्राज्य खड़ा किया। यासीन का परिवार 1970 से पहले बुधवारा में रहता था और मछलियों की दलाली करता था। इसके बाद हथाईखेड़ा आया और यहाँ मछली पालने का ठेका लिया।

1980 में राजनीतिक पार्टियों की मदद कर इलाके में दबदबा बनाया। राजनीतिक मदद से ही मुस्लिमों की बस्ती बसा ली और पत्थर खदानों ने अवैध खनन शुरू किया।

जानें पूरा मामला

18 जुलाई 2025 को भोपाल के गोविंदपुरा से सैफुद्दीन और आशू उर्फ शाहरुख को गिरफ्तार किया गया था। इनके पास से ₹3 लाख और बड़ी मात्रा में ड्रग्स बरामद की गई। इन्हीं की निशानदेही पर ड्रग तस्करी का सरगना शाहवर मछली और उसका भतीजा यासीन मछली को क्राइम ब्रांच ने दबोचा। दोनों के पास से 3 ग्राम एमडी ड्रग और एक देशी पिस्टल बरामद की गई थी।

जाँच में सामने आया कि यासीन और उसके चाचा शाहवर ड्रग्स तस्करी का धंधा करते थे। मुंबई, राजस्थान और पंजाब से चरस और अन्य ड्रग्स लाते थे। फिर इन्हें शहर के पब, लाउंज और क्लब में पार्टियों में बेचा करते थे। ड्रग्स की डिलीवरी के लिए हिंदू लड़कियों को इस्तेमाल किया जाता था।

युवाओं के लिए रेव पार्टी आयोजित कर उन्हें नशे की लत लगाते थे। ये दोनों हिंदू लड़कियों का शारीरिक शोषण करते थे और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव भी बनाते थे।

‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सबसे पहले RSS स्वयंसेवक ने दिया था सर्वोच्च बलिदान, उमाकांत कड़िया को अंग्रेजों ने अहमदाबाद में मारी थी गोली: ‘अर्धसत्य’ कब तक बताता रहेगा कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम?

15 अगस्त को भारत अपना 79वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस स्वतंत्रता की खातिर लाखों लोगों ने अपनी बलिदानी दी । कुछ क्रांतिकारियों के नाम इतिहास में दर्ज हैं, लेकिन कई ऐसे भी रहे जिन्हें भुला दिया गया। इनमें से एक नाम है उमाकांत कड़िया का।

महात्मा गाँधी के नेतृत्व में हुए ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ (Quit India Movement) की शुरुआत 8 अगस्त 1942 को हुई थी। इस आंदोलन का देशव्यापी असर हुआ और आजादी की लड़ाई को एक नई दिशा मिली। इस आंदोलन के पहले नायक अहमदाबाद के उमाकांत कड़िया थे। वे स्वयं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक थे।

भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत

जब यह आंदोलन शुरू हुआ, उस वक्त एक तरफ दुनिया में दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था और दूसरी तरफ भारत में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष तेज हो गया था। कॉन्ग्रेस ने अंग्रेजों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। ब्रिटिश सरकार ने जवाब में कॉन्ग्रेस के सभी बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया और आंदोलन को दबाने के लिए बल प्रयोग किया।

8 अगस्त को गाँधीजी द्वारा ‘भारत छोड़ो’ का नारा दिए जाने के अगले ही दिन, यानी 9 अगस्त 1942 को, अहमदाबाद में भी विरोध शुरू हो गया। अंग्रेजों ने यहाँ भी कॉन्ग्रेस के नेताओं की गिरफ्तारियाँ शुरू कर दीं, लेकिन प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे थे। जगह-जगह जुलूस और रैलियाँ निकलने लगीं। अंग्रेजों ने आंदोलन को दबाने के लिए क्रान्तिकारियों पर गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं।

पहले बलिदानी: उमाकांत कड़िया

उमाकांत मोतीराम कड़िया, अहमदाबाद के दरियापुर इलाके के रहने वाले थे। आंदोलन के समय उनकी उम्र सिर्फ 21 साल थी। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक थे और शाखा के मुख्य शिक्षक भी थे। संघ के स्वयंसेवकों के अनुसार, उमाकांत संघ की विचारधारा को लेकर पूरी तरह समर्पित थे और शाखा के कार्यों में सक्रिय रहते थे।

9 अगस्त को जब प्रदर्शन शुरू हुआ तो उमाकांत सबसे आगे खड़े थे। भीड़ में किसी ने उन्हें पीछे हटने को कहा, लेकिन वे डटे रहे। एक युवा में इतनी निडरता देख, एक अंग्रेज ने उन पर गोली चलाई, जो सीधे उनके माथे पर लगी और वहीं उनकी मौत हो गई। इस तरह उमाकांत भारत छोड़ो आंदोलन में वीरगति पाने वाले पहले युवक बने।

अहमदाबाद के खाडिया इलाके में जहाँ यह घटना हुई, वहाँ बाद में एक स्मारक बनाया गया। उस पर लिखा है कि उमाकांत मोतीराम कड़िया ने यहीं शहादत प्राप्त की थी। वे इस आंदोलन के प्रथम बलिदानी थे।

उमाकांत के बलिदान के अगले ही दिन, 10 अगस्त को लॉ कॉलेज के छात्रों ने एक रैली निकाली। जब यह रैली गुजरात कॉलेज पहुँची, तो और छात्र भी जुड़ गए। अंग्रेजों ने रैली को रोकने के लिए लाठीचार्ज और फिर गोलीबारी की।

इस दौरान विनोद किनारीवाला नाम के एक युवा ने भारतीय तिरंगा फहराने की कोशिश की और एक ब्रिटिश अफसर ने उन्हें गोली मार दी। विनोद ने भी इस आंदोलन में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

उमाकांत कड़िया जैसे स्वयंसेवकों का बलिदान यह सिद्ध करता है कि RSS ने भारत की आजादी में अहम भूमिका निभाई थी। हालाँकि अक्सर कॉन्ग्रेस और वामपंथी विचारधारा द्वारा इसे नजरअंदाज ही किया जाता रहा है।

ऐसे ही कई स्वयंसेवकों ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और उमाकांत जैसे कई स्वयंसेवकों ने देश प्रेम को प्राणों से भी ऊपर रखा। उमाकांत कड़िया 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में देश के पहले बलिदानी थे, जिन्हें कॉन्ग्रेस ने नजरअंदाज किया। यहाँ तक कि इतिहास में भी उनका नाम देश के पहले बलिदानी नहीं बल्कि गुजरात के पहले बलिदानी के रूप में लिखा गया।

राहुल गाँधी की ‘जान को खतरा’ मामले में नया ड्रामा, अब वकील के जरिए ही अर्जी ली जाएगी वापस: वीर सावरकर पर कई दफे मुँह की खा चुकी कॉन्ग्रेस का नया पैंतरा भी फेल

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सावरकर मानहानि केस में पुणे की अदालत में उनके वकील ने उनकी जान को खतरा बताते हुए एक अर्जी दायर की थी। इस अर्जी ने राजनीतिक गलियारों में तूफान मचा दिया। लेकिन अब खबर है कि राहुल ने इस अर्जी से खुद को अलग कर लिया है।

कॉन्ग्रेस की आईटी सेल प्रमुख सुप्रिया सुनेत ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि ये अर्जी बिना राहुल की सहमति के दायर की गई थी और वो इस बात से बेहद नाराज हैं। गुरुवार को उनके वकील इस बयान को कोर्ट से वापस लेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने कॉन्ग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

ये पूरा विवाद विनायक दामोदर सावरकर से जुड़ा है। मार्च 2023 में लंदन में एक भाषण के दौरान राहुल गाँधी ने सावरकर की रचनाओं का हवाला देते हुए दावा किया था कि सावरकर ने अपनी किताब में लिखा था कि उन्होंने और उनके पाँच-छह दोस्तों ने एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई की थी और उन्हें इस बात पर खुशी हुई थी।

इस बयान को सावरकर के वंशज सत्यकी सावरकर ने अपमानजनक माना और राहुल के खिलाफ पुणे की स्पेशल MP-MLA अदालत में मानहानि का केस दर्ज कराया था।

इस बीच, बुधवार (13 अगस्त 2025) को राहुल के वकील मिलिंद दत्तात्रय पवार ने कोर्ट में एक अर्जी दायर की, जिसमें दावा किया गया कि सत्यकी सावरकर की वंशावली को देखते हुए राहुल की जान को खतरा है। अर्जी में कहा गया कि सत्यकी, नाथूराम गोडसे और गोपाल गोडसे यानी महात्मा गाँधी की हत्या के मुख्य आरोपितों के मातृ पक्ष से जुड़े हैं।

इसके अलावा, सत्यकी का सावरकर से भी संबंध होने का दावा किया गया। अर्जी में ये भी जिक्र था कि सावरकर की विचारधारा और उनके अनुयायियों की हिंसक प्रवृत्तियों के इतिहास को देखते हुए राहुल को नुकसान पहुँचाए जाने या गलत फँसाए जाने का डर है।

अर्जी में और क्या था?

वकील ने अर्जी में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने हाल ही में संसद में “वोट चोर सरकार” का नारा दिया और चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ सबूत पेश किए। इसके बाद उनकी राजनीतिक दुश्मनी बढ़ गई।

अर्जी में दो बीजेपी नेताओं की धमकियों का जिक्र था। केंद्रीय मंत्री रवीनीत सिंह बिट्टू ने राहुल को ‘देश का नंबर वन आतंकवादी’ कहा था, जबकि बीजेपी नेता तरविंदर सिंह मारवाह ने खुलेआम धमकी दी कि अगर राहुल ‘सही व्यवहार’ नहीं करेंगे, तो उनका अंजाम उनकी दादी इंदिरा गाँधी जैसा हो सकता है।

अर्जी में ये भी कहा गया कि महात्मा गाँधी की हत्या कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी, जो एक खास विचारधारा से जुड़ी थी। वकील ने कोर्ट से माँग की कि राहुल की सुरक्षा के लिए ‘निवारक उपाय’ किए जाएँ।

अर्जी के जरिए कहा गया कि ये कदम न केवल राहुल की जान बचाने के लिए जरूरी है, बल्कि ये राज्य का संवैधानिक कर्तव्य भी है। अर्जी में ये भी जिक्र था कि सत्यकी सावरकर अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर सकते हैं, जिससे राहुल को निशाना बनाया जा सकता है।

राहुल का यू-टर्न

लेकिन इस अर्जी के कुछ ही घंटों बाद कॉन्ग्रेस की ओर से सुप्रिया सुनेत का बयान आया, जिसने सबको हैरान कर दिया।

सुप्रिया श्रीनेता ने एक्स पर लिखा कि वकील ने राहुल से बिना पूछे ये अर्जी दायर की थी। राहुल ने इस पर सख्त आपत्ति जताई और इसे वापस लेने का फैसला किया। सुप्रिया ने वकील के प्रेस नोट को भी शेयर किया, जिसमें वकील ने माना कि उन्होंने राहुल की सहमति के बिना ये बयान कोर्ट में दिया। सुप्रिया ने लिखा, “राहुल गाँधी ने इस अर्जी के कंटेंट से असहमति जताई है। उनके वकील गुरुवार को इसे कोर्ट से वापस लेंगे।”

पहले भी कर चुके हैं सावरकर पर विवादित बयानबाजी

ये पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी ने सावरकर को लेकर विवादित बयान दिए हों। 17 नवंबर 2022 को महाराष्ट्र के अकोला में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल ने एक रैली में सावरकर पर निशाना साधा था। उन्होंने एक चिट्ठी दिखाते हुए कहा कि सावरकर ने अंग्रेजों को लिखा था कि वो उनका नौकर बने रहना चाहते हैं और डर के मारे माफी माँगी थी।

राहुल ने कहा, “गाँधी, नेहरू और पटेल ने सालों तक जेल में समय बिताया, लेकिन उन्होंने कभी ऐसी चिट्ठी पर साइन नहीं किए। सावरकर ने ऐसा करके गाँधी और पटेल को धोखा दिया।”

इस बयान के बाद लखनऊ के वकील नृपेंद्र पांडे ने 14 जून 2023 को राहुल के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया। पांडे ने आरोप लगाया कि राहुल ने सावरकर को ‘अंग्रेजों का नौकर’ और ‘पेंशनभोगी’ कहकर समाज में नफरत फैलाने की कोशिश की।

सुप्रीम कोर्ट से लग चुकी है फटकार

सावरकर पर राहुल के बयानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी 26 अप्रैल को उन्हें फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा, “हम स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ अनाप-शनाप बयानबाजी की इजाजत नहीं दे सकते। उन्होंने हमें आजादी दिलाई, और हम उनके साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं।” कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर राहुल ने भविष्य में ऐसा कोई बयान दिया, तो स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी। हालाँकि, कोर्ट ने सावरकर मामले में राहुल के खिलाफ ट्रायल कोर्ट के समन पर रोक लगा दी थी।

कॉन्ग्रेस पर सवाल, नहीं चलेगा पुराना पैंतरा

इस पूरे घटनाक्रम ने कॉन्ग्रेस की रणनीति पर सवाल उठा दिए हैं। कुछ लोग इसे राहुल की छवि को चमकाने का हथकंडा बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर चर्चा गरम है कि पहले जान को खतरा बताकर सुर्खियाँ बटोरी गईं और अब अर्जी वापस लेकर नया ड्रामा रचा जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, “कॉन्ग्रेस पहले डर का माहौल बनाती है, फिर सहानुभूति बटोरने के लिए अर्जी वापस लेती है। ये पुराना पैतरा अब नहीं चलेगा।”

अब सबकी नजर गुरुवार को पुणे कोर्ट की सुनवाई पर है। क्या वकील की अर्जी वाकई वापस ली जाएगी? और अगर हाँ, तो इसका सावरकर मानहानि केस पर क्या असर पड़ेगा? कॉन्ग्रेस की इस रणनीति का राजनीतिक फायदा होगा या नुकसान, ये भी देखने वाली बात होगी। फिलहाल, ये मामला कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कॉन्ग्रेसी राजनीति में ड्रामे और ट्विस्ट की कोई कमी नहीं है।