बिहार के नवादा जिले में एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ जुनाब हुसैन नामक व्यक्ति ने नाबालिग हिंदू लड़कियों को झूठे प्रेमजाल में फँसाकर जबरन धर्मांतरण कराया। इनमें से एक लड़की से मस्जिद में निकाह किया और फिर देह व्यापार में धकेल दिया।
जुनाब पश्चिम बंगाल की दो बहनों को ऑर्केस्ट्रा में काम दिलाने के बहाने बिहार लाया था, लेकिन असल में वह उन्हें तस्करी कर नवादा ले आया और एक लड़की से निकाह के बाद जबरदस्ती इस्लाम कबूल कराया।
बाद में पीड़िता गर्भवती हो गई तो उसका जबरन गर्भपात करा दिया गया। पुलिस जाँच में यह भी सामने आया कि जुनाब 2,500 रुपए प्रति रात के हिसाब से इन लड़कियों को ग्राहकों को उपलब्ध कराता था।
यह कोई एकलौता मामला नहीं है। पुलिस ने खुलासा किया है कि जुनाब और उसके गिरोह ने देश के कई राज्यों से 9 से ज्यादा लड़कियों को फँसाकर तस्करी की थी। इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश बिहार पुलिस के बड़े ऑपरेशन ‘नया सवेरा’ के तहत हुआ, जो राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो के निर्देश पर शुरू किया गया था।
यह अभियान बुधवार (13 अगस्त 2025) को सुबह 10 बजे चलाया गया, जिसमें सारण जिले के मसरख और इसुआपुर इलाकों के चार ऑर्केस्ट्रा ग्रुप्स राहुल, संगीता, मुस्कान और विपिन ऑर्केस्ट्रा पर एक साथ छापेमारी की गई।
सांप्रदायिक लैंगिक अपराध ❤️? ? जुनाब हुसैन नाम का यह आरोपी नाबालिग हिंदू बच्ची और उसकी बहन को प्रेम ? जाल में फँसा कर ट्रैफ़िकिंग कर के पश्चिम बंगाल से बिहार ले कर आया मस्जिद ? में धर्म परिवर्तन करवा कर लड़की के साथ निकाह किया उसको गर्भवती ? किया फिर असुरक्षित गर्भपात करवाया… pic.twitter.com/Dbnl0UtKv7
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) August 14, 2025
ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 10 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया, जिनमें 6 पश्चिम बंगाल, 1 ओडिशा, 1 झारखंड और 2 बिहार की थीं। काउंसलिंग के बाद उनके परिवारों को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है।
इस कार्रवाई में मुख्य आरोपित जुनाब हुसैन समेत कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अन्य गिरफ्तार आरोपितों में सारण जिले का नीरज यादव, तालिब खान, शुभम कुमार, अंकित कुमार, मोहम्मद बिट्टू हाशमी और चंदन कुमार तिवारी शामिल हैं।
इन सभी के खिलाफ महिला थाना में शिकायत दर्ज कराई गई है। इस छापेमारी का नेतृत्व SSP कुमार आशीष ने किया। उन्होंने बताया कि लड़कियों से जबरन डांस करवाया जाता था और उन्हें मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी जाती थी।
यह छापेमारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के आदेश पर चार थानों की टीम बनाकर एक साथ की गई। फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में है और तस्करी, जबरन धर्मांतरण और शोषण के इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।
साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि अगर किसी को ऐसी किसी भी गतिविधि की जानकारी हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
भारतीय सेना की वीरता किसी भी पहचान की मोहताज नहीं है। समय आने पर भारतीय जवान न केवल अपनी जान देते हैं बल्कि दुश्मन का सीना छलनी भी करने का दम रखते हैं। सीमा पर तैनात इन जवानों के साथ देश के अंदर नागरिकों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को दुरुस्त रखने वाले होमगार्ड्स और पुलिस वालों का हौसला बढ़ाने के लिए हर साल गैलेंट्री अवॉर्ड दिए जाते हैं।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्वारा दिए जाने वाले गैलेंट्री या वीरता पदक पुरस्कार की घोषणा की गई है। ये उन सैनिकों, पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षा बलों को दिए जाते हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में जान की परवाह किए बिना देश की रक्षा की। हालाँकि इस बार एक खास बदलाव देखने को मिला है। सरकार ने वीरता पुरस्कारों के साथ-साथ विशिष्ट सेवा पुरस्कारों की भी घोषणा की है। ये पुरस्कार आमतौर पर गणतंत्र दिवस पर दिए जाते हैं।
1090 सुरक्षाकर्मियों हुए सम्मानित
गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस साल कुल 1,090 सुरक्षाकर्मियों को सम्मानित किया गया। 233 गैलेंट्री अवॉर्ड्स दिए गए हैं। इनमें से 226 पुलिसकर्मियों को, 6 अग्निशमन सेवा के कर्मियों को और 1 नागरिक सुरक्षा कर्मी को यह सम्मान मिला है। ये पुरस्कार मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर, नक्सल प्रभावित इलाकों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बहादुरी दिखाने वाले जवानों को दिए गए हैं।
1090 Personnel of Police, Fire, Home Guard & Civil Defence and Correctional Services awarded Gallantry/Service Medals on the occasion of the Independence Day- 2025https://t.co/6FpCxzglZR@HMOIndia@PIB_India
— PIB – Ministry of Home Affairs (@PIBHomeAffairs) August 14, 2025
इसके अलावा सरकार ने 99 राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक (President’s Distinguished Service Medals) और 758 मेरिटोरियस सर्विस मेडल (Meritorious Service Medals) भी घोषित किए हैं। ये पुरस्कार खासतौर पर उन अधिकारियों को दिए जाते हैं जिन्होंने लंबे समय तक ईमानदारी, दक्षता और समर्पण के साथ सेवा की है।
गैलेंट्री अवॉर्ड्स में इस बार एक और अहम बात शामिल हुई है। वह ये कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत सुरक्षाबलों की जांबाजी के लिए वॉरटाइम गैलेंट्री और वॉरटाइम विशिष्ट सेवा पुरस्कारों की भी घोषणा भी की गई है।
ऑपरेशन सिंदूर को मिला खास सम्मान
इस साल सेना के जवानों को मिलने वाले गैलेंट्री अवॉर्ड्स में ऑपरेशन सिंदूर के वीरों को विशेष स्थान मिला। रक्षा मंत्रालय की सूची अनुसार, गैलेंट्री अवॉर्ड्स 2025 की सूची में सेना के 86 जवानों को गैलेंट्री अवॉर्ड दिए गए हैं।
वायुसेना के 52 जवानों को वीरता पुरस्कार और 9 अधिकारियों को वीर चक्र दिया गया है। इसके साथ ही 13 अधिकारियों को युद्ध सेवा मेडल और 26 एयरफोर्स ऑफिसर्स को वायु सेना मेडल दिया गया है। वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी समेत एयरफोर्स के 4 अधिकारियों को सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया है।
थल सेना के 18 जवानों को वीरता मेडल से सम्मानित किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 2 सीनियर इंडियन आर्मी ऑफिसर को सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक के साथ ही सेना को 4 कीर्ति चक्र, 4 वीर चक्र और 8 शौर्य चक्र दिए गए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर तीनों सेनाओं का एक संयुक्त सैन्य अभियान था, जिसे भारतीय सेना ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया। इस ऑपरेशन में थल, वायु और नौसेना ने असाधारण समन्वय और साहस दिखाया।
कारगिल युद्ध (1999) के बाद यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर वॉरटाइम गैलेंट्री अवॉर्ड्स दिए गए हैं। उस समय 4 सैनिकों को परमवीर चक्र, 9 को महावीर चक्र और 55 को वीर चक्र से सम्मानित किया गया था
सेना के गैलेंट्री अवॉर्ड्स की श्रेणियाँ
सेना के जवानों को मिलने वाले गैलेंट्री अवॉर्ड को चार मुख्य श्रेणियों में बाँटा जाता है- वॉरटाइम गैलेंट्री, पीस टाइम गैलेंट्री, वॉरटाइम विशिष्ट सेवा और पीस टाइम विशिष्ट सेवा। इनमें परमवीर चक्र, अशोक चक्र, युद्ध सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल जैसे प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं।
वॉरटाइम गैलेंट्री अवॉर्ड्स युद्ध या सैन्य ऑपरेशन के दौरान असाधारण वीरता दिखाने पर दिए जाते हैं। इनमें युद्धकाल का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र (PVC), युद्ध में अत्यंत साहस के लिए महावीर चक्र (MVC), युद्ध में वीरता का प्रदर्शन के लिए (वीर चक्र) और युद्ध या किसी खास ऑपरेशन में वीरता के लिए सेना मेडल (SM) दिया जाना तय होता है।
पीस टाइम गैलेंट्री अवॉर्ड्स आतंकवाद, नक्सल या ऐसे अन्य संकटों में वीरता के लिए दिए जाते हैं। इनमें शांति काल का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र, अत्यंत साहस के लिए कीर्ति चक्र और अपने साहस भरे निर्णय और कार्य के लिए शौर्य चक्र से नवाजा जाता है।
इसी तरह युद्धकाल में उत्कृष्ट नेतृत्व और सेवा के लिए वॉरटाइम विशिष्ट सेवा पुरस्कार दिया जाता है। इसमें युद्ध में सर्वोत्तम सेवा के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM), उत्कृष्ट सेवा के लिए उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और विशिष्ट सेवा के लिए युद्ध सेवा मेडल (YSM) दिया जाता है।
इसके अलावा, पीस टाइम विशिष्ट सेवा पुरस्कार शांति काल में दीर्घकालिक उत्कृष्ट सेवा के लिए दिया जाता है। इसमें सर्वोच्च सेवा सम्मान परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उच्च स्तर की सेवा के लिए अतिविशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और विशिष्ट योगदान के लिए विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) दिया जाता है।
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले की चायल विधानसभा सीट से पूजा पाल विधायक थीं। वह समाजवादी पार्टी (सपा) से चुनी गई थीं। यूपी विधानसभा में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ की। पूजा पाल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनके पति के हत्यारों को सजा दिलाई। इससे उन्हें वर्षों बाद न्याय मिला। पूजा पाल का इशारा माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की ओर था। दोनों पर पूजा के पति राजू पाल की हत्या का आरोप था। पूजा पाल के पति राजू पाल बसपा के विधायक थे।
पूजा के इस बयान से सपा में बवाल मच गया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नाराजगी जताई और तंज कसते हुए कहा कि पूजा को पहले ही बीजेपी से टिकट पक्का करा लेना चाहिए था। इसके कुछ ही घंटों बाद सपा ने कड़ा फैसला लिया। पार्टी ने पूजा पाल को ‘अनुशासनहीनता’ का दोषी ठहराया और उन्हें ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के कारण समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
इसके बाद पूजा पाल ने मीडिया से बातचीत कर कहा, “शायद आप उन महिलाओं की बात नहीं सुन पाए जो मुझसे भी ज्यादा परेशान थीं। मैं उनकी आवाज हूँ। मुझे लोगों ने चुनकर विधानसभा में भेजा है। उन माताओं और बहनों ने मुझे यहाँ भेजा है, जिन्होंने अपनों को खोया है।”
#WATCH | Expelled SP MLA Pooja Pal says, "…Perhaps you could not hear the women in Prayagraj who were even more worried than me. But I am their voice, I have been elected as an MLA and sent to the Assembly. I am the voice of mothers and sisters who have lost their loved ones.… https://t.co/cnE7hzb0Pepic.twitter.com/8MaF0iWtZR
पूजा पाल ने आगे कहा कि प्रयागराज में जितने भी लोग अतीक अहमद से परेशान थे, मुख्यमंत्री ने सिर्फ मुझे नहीं, बल्कि उन सभी को न्याय दिया है। 1 यह बात मैं पहले दिन से कह रही हूँ, जब मैं पार्टी में थी, तब भी। मुझे तो आज निकाला गया है। मैं आज भी अपने बयान पर कायम हूँ। मैं विधायक बाद में बनी, लेकिन पहले एक पीड़ित महिला हूँ, एक पत्नी हूँ।
पूजा पाल के पति राजू पाल का कत्ल
साल 2004 में, फूलपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद बने अतीक अहमद ने अपनी इलाहाबाद पश्चिम की विधानसभा सीट खाली कर दी। इस सीट पर उपचुनाव हुआ। समाजवादी पार्टी ने अतीक के छोटे भाई अशरफ को टिकट दिया। उनके सामने थे बहुजन समाज पार्टी के युवा नेता राजू पाल।
उपचुनाव में राजू पाल ने अशरफ को हरा दिया और पहली बार विधायक बने। यह बात अतीक और अशरफ को बहुत बुरी लगी। विधायक बनने और पूजा पाल से शादी करने के 9 दिन बाद 16 जनवरी 2005 राजू पाल की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। राजू पाल की गाड़ी को GT रोड पर ओवरटेक करके रोका गया।
इसके बाद स्कॉर्पियो सवार 25 हमलावरों ने राजू पाल पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाईं। अंधाधुंध फायरिंग के दौरान राजू पाल को 19 गोलियाँ लगीं। हमलावरों ने राजू पाल का पीछा करते हुए 5 किलोमीटर तक दौड़ाकर उन्हें मारा था। इस हमले में उनके दो साथी संदीप यादव और देवीलाल की भी मौत हुई थी।
राजू पाल की हत्या के बाद उनकी पत्नी पूजा पाल ने अपने पति को न्याय दिलाने की लड़ाई शुरू की। इस मामले में एक अहम गवाह उमेश पाल थे, जो राजू पाल के फुफेरे भाई भी थे। उमेश पाल पर अतीक अहमद के गुर्गों ने कई बार हमला किया और अपहरण भी किया ताकि वो गवाही न दे सकें।
लेकिन उमेश पाल डटे रहे और अतीक के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे। उमेश पाल ने अतीक अहमद और उसके गिरोह के खिलाफ कई FIR दर्ज कराईं। पूजा पाल ने भी कई बार उमेश पाल की हत्या की आशंका जताई थी।
गवाह की हत्या और माफिया परिवार का अंत
24 फरवरी 2023 को प्रयागराज में उमेश पाल की भी गोली मारकर और बम फेंककर हत्या कर दी गई। यह सब कैमरे में कैद हो गया। इस हमले में उनके दो सरकारी गनर भी मारे गए। उमेश पाल की हत्या का आरोप भी अतीक अहमद और उसके बेटे असद पर लगा। उमेश पाल की हत्या के बाद यूपी सरकार और पुलिस हरकत में आ गई और तेजी से कार्रवाई शुरू हुई।
इस हत्याकांड के बाद एक-एक करके सभी आरोपित मारे गए। सबसे पहले 13 अप्रैल 2023 को उमेश पाल की हत्या में शामिल अतीक अहमद का बेटा असद और उसका साथी झांसी में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए।
इसके दो दिन बाद, 15 अप्रैल 2023 को अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ को पुलिस हिरासत में मेडिकल जाँच के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था। तभी तीन लोगों ने उन पर हमला कर दिया और गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना लाइव टीवी पर हुई। इस तरह, जिस अतीक अहमद पर राजू पाल की हत्या का आरोप था, उसका भी अंत हो गया और यह चक्र पूरा हुआ।
पूजा पाल का सीएम योगी की तारीफ और पार्टी से निष्कासन
अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद, पूजा पाल ने विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस‘ (अपराध के प्रति बिलकुल बर्दाश्त न करना) की नीति की जमकर तारीफ की।
पूजा पाल ने कहा कि सीएम योगी ने ही उनके पति के हत्यारों को ‘मिट्टी में मिलाया’ और उन्हें न्याय दिलाया। पूजा ने कहा कि उन्होंने वो दर्द देखा है जो किसी ने नहीं देखा था और सीएम ने उनकी बात सुनी। उन्होंने सीएम को धन्यवाद देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की वजह से ही अतीक जैसे अपराधियों का सफाया हुआ है।
पूजा पाल की सीएम योगी की तारीफ समाजवादी पार्टी को पसंद नहीं आई। पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उन पर सख्त कार्रवाई करते हुए पार्टी से बाहर निकाल दिया। पार्टी की तरफ से जारी एक पत्र में ‘पार्टी विरोधी गतिविधियाँ’ बताई और चेतावनी के बावजूद उन्होंने पार्टी को नुकसान पहुँचाया है।
इसके साथ ही पूजा पाल को पार्टी के सभी पदों से भी हटा दिया गया। पत्र में यह भी कहा जाता है कि पूजा पाल ने राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी, जिससे वह पहले से ही पार्टी में अलग-थलग चल रही थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली NCR में आवारा कुत्तोंसे संबंधित मामले में गुरुवार (14 अगस्त 2025) को सुनवाई की। मामले में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की तीन सदस्यीय बेंच ने सुनवाई की। कपिल सिब्बल और एसजी तुषार मेहता की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को सुरक्षित रख लिया है।
जानकारी के अनुसार, मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि दिल्ली NCR में आवारा कुत्तों के कारण बच्चों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस समस्या को सुलझाने की आवश्यकता है, न कि इस पर विवाद खड़े करने की।
किसने क्या दलीलें दी?
मामले में सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “दो तरह के लोग हैं। एक जो इस बारे में बोलते हैं और दूसरे वो जो इससे परेशान हैं। उन्होंने एक वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि कुत्तों की नसबंदी से रैबीज नहीं रुकेगा।”
उन्होंने कहा, “आवारा कुत्ते छोटे बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं। बच्चे मर रहे हैं, वीडियो देखिए बहुत सारे हैं। दूसरा विकल्प है बधियाकरण। मैं एनिमल लवर हूँ, वो ठीक है, मगर आँकड़ा देखिए।” यह कहते हुए एसजी ने रेबीज और कुत्तों के काटने का डेटा भी माँगा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि चिकन-मटन खाने वाले आज एनिमल लवर बन गए हैं। उन्होंने कहा, “एक ‘तेज आवाज वाली अल्पसंख्यक’ आबादी आवारा कुत्तों के पक्ष में बोल रही है, जबकि पीड़ित बहुसंख्यक आबादी’ चुपचाप गंभीर नुकसान झेल रही है। इनमें बच्चे भी शामिल हैं।”
उन्होंने स्पष्ट रुप से कहा कि नसबंदी और टीकाकरण से न तो रेबीज रुकता है और न ही बच्चों पर हमले और दूसरी तरफ बच्चों की मौतें और विकृति अब भी जारी हैं।
मेहता ने दलीलें रखते हुए कहा कि भारत में हर साल लगभग 37 लाख कुत्ते के काटने के मामले दर्ज होते हैं। हालाँकि, WHO के अनुमान के अनुसार वास्तविक आँकड़ा अधिक हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पहले के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को स्थगित करने की माँग की। कपिल सिब्बल ने कहा, “मसला दिल्ली NCR के विभिन्न इलाकों से कुत्तों को हटाने का है। शेल्टर बनाने और दो माह में रिपोर्ट देने का है। मसला ये है कि उन्हें छोड़ा नहीं जाए, मेरा कहना है वो कहाँ जाएँगे।”
कपिल सिब्बल ने कहा, “कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। शेल्टर है नहीं और हैं तो बहुत कम। जहाँ जगह कम होने की वजह से वो और खतरनाक हो जाएँगे। रोक लगाई जानी चाहिए।” इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या सभी बिंदुओं पर? जिस पर सिब्बल ने कहा, “जी हाँ, मैं प्रोजेक्ट काउंडनेस की तरफ से हूँ। बधियाकरण एक उपाय है पर उसे ठीक से लागू किया जाए।”
कोर्ट का फैसला
सभी की दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस नाथ ने कहा, “संसद नियम और कानून बनाती है, लेकिन उनका पालन नहीं होता। एक तरफ इंसान पीड़ित हैं और दूसरी तरफ पशु प्रेमी यहाँ खड़े हैं। थोड़ी जिम्मेदारी लीजिए। जिन-जिन ने हस्तक्षेप याचिकाएँ दायर की हैं, उन्हें हलफनामा दाखिल कर सबूत पेश करने होंगे।” इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान मामले में अंतरिम राहत के तहत स्टे लगाने की माँग पर आदेश सुरक्षित रखा।
राजनीति हो या भू-राजनीति दोनों का एक नियम होता है। यहाँ कोई ना स्थाई दोस्त होता है, ना कोई स्थाई दुश्मन। अपने देश का हित ही भू-राजनीति का सबसे बड़ा सिद्धांत है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देखिए वो खुलेआम इस बात का प्रदर्शन कर रहे हैं कि कैसे उनके लिए अपने देश का स्वार्थ ही सबसे बड़ा है। अब चाहे इसके लिए इस्लामी जिहादी आतंकवादियों या उनके समर्थकों को खुश ही करना पड़े।
मई 2025 में ट्रंप ने सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद हुसैन अल-शरा से मुलाकात की। इसी अल-शरा के सिर पर कुछ दिनों पहले तक अमेरिका ने $10 मिलियन (87.5 करोड़ रुपए) का इनाम रखा हुआ था। कहा जाता है कि अल-शरा ने 9/11 आतंकी हमलों का जश्न मनाया था। अमेरिका में हुए इस हमले में हज़ारों लोग मारे गए थे लेकिन अब ट्रंप इसका जश्न मनाने वाले की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं। ट्रंप ने शरा की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक आकर्षक और सख्त आदमी हैं जिनका अतीत काला रहा है। ट्रंप ने उन्हें फाइटर तक बता दिया।
2021 में जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी कराई तो उनकी खूब आलोचना की गई। अमेरिका से लेकर अन्य देशों के लोग भी उनके पीछे पड़ गए। हालाँकि, यह ट्रंप का 2020 का दोहा समझौता था जिसके चलते अमेरिका की वापसी हुई। वहीं, अफगानिस्तान को तालिबानी आतंकियों के हाथों में छोड़ दिया गया।
अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान से लड़ने में 20 साल, 2 ट्रिलियन डॉलर और सैकड़ों सैनिकों की जान गंवाई। 2021 में उन्होंने तालिबान से समझौता करके वहाँ से सेना हटा ली और अरबों डॉलर के सैन्य हथियार और संसाधन उसी तालिबान को सौंप दिए जिससे वे 20 साल से लड़ रहे थे।
2️⃣AFGHANISTAN
Invading in late 2001 together with a NATO+ coalition, the US thought a ‘liberal interventionism at gunpoint’ approach would turn Afghanistan into a compliant client.
Instead, they spent 20 years and $2T to replace the Taliban… with the Taliban. pic.twitter.com/SljWokFhd8
सीरिया में एक पूर्व ISIS आतंकी से हाथ मिलाने और अफगानिस्तान को तालिबान के हवाले करने के बाद, ट्रंप ने पाकिस्तान फौज से दोस्ती गाँठी है। वही पाकिस्तानी फौज, जो इस क्षेत्र में इस्लामी आतंक का सबसे बड़ा गिरोह है।
पाकिस्तान प्रायोजित पहलगाम इस्लामी आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी फौज को करारी शिकस्त दी। इसके सिर्फ एक महीने बाद पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ लंच करने पहुँच गए थे। हालाँकि, यह मुलाकात भारत-पाक संघर्ष के कुछ ही दिनों बाद हुई लेकिन इसका मुख्य एजेंडा भारत नहीं बल्कि ईरान-इजरायल संघर्ष था।
इतिहास गवाह है कि अमेरिका ने हमेशा पाकिस्तान का इस्तेमाल अपने क्षेत्रीय हित साधने के लिए किया है। खुद पाकिस्तान के बड़े-बड़े नेता लाइव टीवी पर आकर यह कबूल चुके हैं। अमेरिका ने वर्षों तक अफगानिस्तान समेत इस क्षेत्र के कई हिस्सों में अपने रणनीतिक अभियानों के लिए पाकिस्तान को मोहरा बनाया है।
हाल ही में पाकिस्तानी फौजी के मुखिया मुनीर एक बार फिर अमेरिका गए। उन्होंने वहाँ अमेरिकी सेंट्रल कमांड (Centcom) के रिटायर हो रहे कमांडर के विदाई समारोह में हिस्सा लिया। ट्रंप को या तो खुलकर मुनीर का समर्थन है या अमेरिका उसे उकसा रहा है कि वो भारत के खिलाफ बयानबाजी करे। इसी से ‘चने के झाड़’ पर चढ़े मुनीर ने अमेरिकी धरती से भारत को परमाणु हमले की गीदड़भभकी तक दे डाली।
Pakistani Field Marshal Munir in US, meets Centcom military leadership, and attends Kurilla farewell.
पाकिस्तान की विदेश और सुरक्षा नीति को नियंत्रित करने वाले और मदरसे में पढ़े जिहादी वर्दीधारी ने 10 अगस्त को फ्लोरिडा के टैम्पा शहर में एक निजी डिनर के दौरान एक उदाहरण दिया। उसने पाकिस्तान को ‘स्पॉइलर’ ताकत बताते हुए मर्सिडीज और डंप ट्रक की तुलना की। उसने कहा, “भारत एक चमकती हुई मर्सिडीज है जो हाईवे पर फरारी की तरह दौड़ रही है और हम बजरी से भरा डंप ट्रक हैं। अगर ट्रक कार से टकरा जाए, तो नुकसान किसको होगा?”
मुनीर ने उद्योगपति मुकेश अंबानी को धमकाने के लिए कुरान की आयतों का भी जिक्र किया। उसने कहा, “एक ट्वीट करवाया था, जिसमें सूरह अल-फील और मुकेश अंबानी की तस्वीर थी ताकि उन्हें दिखा सकें कि अगली बार हम क्या करेंगे।”
आसिम मुनीर की यह परमाणु धमकी बेहद अहम समय पर आई। पहली बात, यह धमकी अमेरिकी जमीन से दी गई। इसके अलावा, मुनीर ने ना सिर्फ पाकिस्तान के इस्लामी आतंकियों को खुश करने के लिए कुरान की आयतों का हवाला दिया बल्कि परमाणु हथियार की धमकी देकर भारत को ब्लैकमेल भी किया।
मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान आधी दुनिया को अपने साथ तबाह कर देगा। भारत को यह धमकी ठीक उसी दिन दी गई जिस दिन 80 साल पहले अमेरिका ने जापान के नागासाकी पर परमाणु बम गिराया था।
भारत ने इस धमकी पर कड़ा बयान जारी किया और दोहराया कि भारत को ऐसे ब्लैकमेल से कभी डराया नहीं जा सकता। अमेरिकी सरकार और मीडिया ने मुनीर की इस गीदड़भभकी पर चुप्पी साध रखी है। इससे अटकलें लग रही हैं कि यह धमकी सिर्फ मुनीर की भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी सोच नहीं है। यह भी संभव है कि यह अमेरिका के इशारे पर की गई एक सोची-समझी चाल हो।
परमाणु धमकी और मुकेश अंबानी को निशाना बनाने के अलावा मुनीर ने फिर से अपना पुराना बयान दोहराया कि ‘कश्मीर हमारे गले की नस है’। पहलगाम हमले से कुछ दिनों पहले भी मुनीर ने यही बयान दिया था। उसने कहा था, “कश्मीर भारत का आंतरिक मामला नहीं, बल्कि अधूरा अंतरराष्ट्रीय एजेंडा है। जैसे कायदे-आजम (मोहम्मद अली जिन्ना) ने कहा था कि कश्मीर पाकिस्तान की ‘गले की नस’ है।”
मुनीर ने ट्रंप को भारत-पाक संघर्ष खत्म कराने में उनके ‘काल्पनिक योगदान’ के लिए धन्यवाद दिया। हालाँकि, आसीम मुनीर की ट्रंप की चापलूसी बेकार नहीं गई। ट्रंप प्रशासन ने बूलचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी मजीद ब्रिगेड को ‘विदेशी आतंकी संगठन’ घोषित कर दिया। इससे पाकिस्तान आर्मी की झूठी कहानी को नया सहारा मिला कि अपनी आजादी के लिए लड़ रहे बलूच ‘आतंकवादी’ हैं।
इसके जरिए बलूचों की आजादी की लड़ाई को उन इस्लामी आतंकियों के बराबर बताने की कोशिश की गई जिन्हें पाकिस्तान आर्मी समर्थन देती है। इनमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और पहलगाम हमले के आरोपी लश्कर का नया गुट द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) जैसे आतंकी संगठन शामिल हैं। अमेरिका ने कुछ दिनों पहले ही TRF को ‘विदेशी आतंकी संगठन’ घोषित किया था।
पाक सरकार के शोषण और चीनी परियोजनाओं के खिलाफ लड़ रहे हैं बलूच विद्रोही
पाकिस्तानी सरकार के शोषण और अपनी जमीन पर चीन की परियोजनाओं के खिलाफ बलूच विद्रोही वर्षों से लड़ते रहे हैं। वर्षों से BLA ने पाकिस्तानी फौज, चीनी कर्मचारियों और चीन की परियोजनाओं पर हमले किए हैं। बलूच लोग लगातार पाकिस्तान और चीन को लेकर कहते हैं कि वे यहाँ के संसाधन लूट रहे हैं और स्थानीय लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ नया व्यापार समझौता घोषित किया। इसमें पाकिस्तान के कथित ‘विशाल तेल भंडार’ को मिलकर विकसित करने की योजना है। इस घोषणा के कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने भारतीय आयात पर 25% शुल्क और अतिरिक्त जुर्माना लगाया था। ट्रंप ने यहाँ तक दावा किया कि शायद एक दिन पाकिस्तान, भारत को तेल बेच सकता है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ने लिखा, “हमने पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत हम दोनों मिलकर उनके विशाल तेल भंडार को विकसित करेंगे… कौन जाने, एक दिन वे भारत को तेल बेचें!”
पाकिस्तान के ज्यादातर तेल और गैस के बलूचिस्तान में हैं। इस वजह से यह कदम राजनीतिक चर्चा का कारण बना कि अमेरिका की यहाँ क्या भूमिका हो सकती है। बलूचिस्तान संसाधनों से भरपूर है लेकिन राजनीतिक रूप से अशांत इलाका है। पाकिस्तान और चीन पहले से ही यहाँ संसाधनों का दोहन कर रहे हैं।
अमेरिका की एक कंपनी ने पाकिस्तान के साथ एक क्रिप्टो डील साइन की है। इस कंपनी में ट्रंप के परिवार की 60% हिस्सेदारी है। इसके बाद ट्रंप की नजर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों पर है। चीन ने भी यहाँ निवेश करने की कोशिश की थी लेकिन यह सफल नहीं हो पाई। बलूच आजादी के लिए लड़ने वाले लोग, चीनी इंजीनियरों और CPEC पर काम कर रहे अधिकारियों और पाकिस्तानी फौज पर लगातार हमले करते रहे हैं।
अमेरिका, पाकिस्तान में तेल खोजना चाहता है। वर्षों पहले पाकिस्तान ने यही तेल भंडार अमेरिका को ‘लाहौरी चूरन’ के नाम पर चिपका दिया था। लगातार खोज के बाद भी वहाँ तेल और गैस कुछ नहीं मिला।
दशकों से इस्लामी आतंकियों को बढ़ावा दे रही पाक आर्मी
1947 में पाकिस्तान के बनने के बाद से ही पाकिस्तानी फौज आतंकियों को पालती रही है। पाक ने इनका इस्तेमाल भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ किया है। अमेरिका का भी इतिहास इन इस्लामिक जिहादी आतंकियों के समर्थन का ही रहा है। हालाँकि, ओसामा बिन लादेन के मामले में अमेरिका के साथी पाकिस्तान की पोल खुल गई थी।
लादेन खुद को आतंक की लड़ाई में अमेरिका का दोस्त बताने वाले पाकिस्तान की नाक के नीचे मिला था। 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड को अमेरिका कई वर्षों तक ढूंढ रहा था और वो 2011 में एबटाबाद में पाकिस्तानी फौज की एक छावनी के पास मिला।
पाकिस्तानी फौज दशकों से अलग-अलग नामों से इस्लामी आतंकियों को फंड और ट्रेनिंग देती रही है। चाहे 1980 के दशक में कश्मीर के जिहादी समूहों को धन या लॉजिस्टिक की मदद देना हो, कश्मीरी पंडितों की हत्याएँ और पलायन कराना हो या डोडा नरसंहार जैसे अन्य हमले हों।
सेना के अफसर इन आतंकियों को पैसा और प्रशिक्षण देते हैं। साथ ही, अपने देश में उन्हें सुरक्षा भी देते हैं। पाकिस्तान की सिविल सरकार इन आतंकियों के हवाला से आए पैसों को छिपाने में मदद करती है। ये काम चैरिटी और धार्मिक संगठनों के नाम पर किया जाता रहा है। भारत और हिंदुओं से नफरत करने वाली पाकिस्तान फौज ने भारत से 4 बार युद्ध लड़ा लेकिन वे हर बार हारे। पाकिस्तान भी जानता है कि भारतीय सेना के सामने पाकिस्तान की कोई औकात नहीं है।
पाकिस्तानी फौज, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे इस्लामी आतंकी संगठनों का समर्थन करती है। वे संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकियों जैसे सैयद सलाउद्दीन, मसूद अजहर, हाफिज सईद जैसे अनगिनत आतंकियों को पाकिस्तान में सुरक्षित पनाहगाह भी मुहैया कराते हैं। मई में जब भारत ने कुछ आतंकियों को मार गिराया, तो पाकिस्तानी फौजी उनके जनाजों में भी शामिल हुए। खुद पाकिस्तानी सेना के पीआर विंग का मौजूदा प्रमुख अहमद शरीफ चौधरी संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित एक आतंकी का बेटा है।
अमेरिका, खासकर डोनाल्ड ट्रंप आतंकियों और जिहादी आतंकवाद का इस्तेमाल करने वाले देशों के बारे में अपना रुख बदलते रहते हैं। उन्हें पाकिस्तान के ओसामा बिन लादेन वाले धोखे और अफगानिस्तान में डॉलर ऐंठने वाली चालें भी याद नहीं है। भारत कभी नहीं भूलेगा कि पाकिस्तान ने कितने निर्दोष भारतीयों का खून बहाया है।
2018 की बात है, ट्रंप ने X पर एक पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान को अरबों की आर्थिक मदद देकर अमेरिका मूर्खता कर रहा था। उन्होंने लिखा, “अमेरिका ने मूर्खता की हद तक जाकर पाकिस्तान को पिछले 15 साल में 33 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद दी। बदले में हमें सिर्फ झूठ और धोखा मिला। वे हमारे नेताओं को मूर्ख समझते हैं। अफगानिस्तान में जिन आतंकियों को हम मारते हैं, वे उन्हें सुरक्षित पनाह देते हैं। अब और नहीं!”
The United States has foolishly given Pakistan more than 33 billion dollars in aid over the last 15 years, and they have given us nothing but lies & deceit, thinking of our leaders as fools. They give safe haven to the terrorists we hunt in Afghanistan, with little help. No more!
इससे एक साल पहले ही ट्रंप ने पाकिस्तान का धन्यवाद दिया था और रिश्ते बेहतर करने को लेकर वो बहुत उत्साहित थे। पाकिस्तान उसके आतंकवाद और उसके धोखों पर ट्रंप का रुख उतना ही बदलता रहता है जितना कि उनका एप्सटीन फाइल्स जारी करने का वादा।
ट्रंप सरकार ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड को आतंकवादी संगठन तो घोषित किया लेकिन पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूच जनता पर किए जा रहे जुल्म पर कोई सवाल नहीं उठाया। ट्रंप ने ये नहीं पूछा कि ग्वादर इलाके में 1 लाख से ज्यादा लोगों के पास पीने का साफ पानी क्यों नहीं है। ना ही उन्होंने यह पूछा कि बलूच बच्चों को बलूची भाषा क्यों नहीं पढ़ने दी जाती और उन पर उर्दू थोपी दी जाती है। ट्रंप ने इस पर भी सवाल नहीं उठाया कि क्यों बलूचिस्तान का सुई गैस फील्ड पूरे पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरतें पूरी करता है लेकिन खुद बलूचिस्तान में गैस की पहुंच सीमित है।
शायद, डोनाल्ड ट्रंप और आसिम मुनीर की बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों को लूटने का लालच बलूच जनता पर हो रहे अन्याय से ज्यादा अहम है। BLA आजादी के लिए लड़ रही है लेकिन पाकिस्तान का दमनकारी शासन और अमेरिकी लालच इसके रास्ते में खड़े हैं।
वर्षों से पाकिस्तान ने PoK और अपने दूसरे इलाकों में जिहादी आतंकियों को पाला-पोसा है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकी संगठनों को ताकत दी है। बलूच लोगों पर जुल्म किया है, जबरन गायब किया है और महरंग बलूच जैसे कई नेताओं को गिरफ्तार किया है। अब पाकिस्तानी सेना को बलूच जनता का शोषण और दमन करने का एक नया मौका मिल गया है। अमेरिका को शायद एक नई जगह मिल गई है जहाँ वह अपने कभी ना खत्म होने वाले युद्ध चला सके जिनसे उसकी हथियार बनाने वाली इंडस्ट्री को फायदा होता है।
आसिम मुनीर असल में एक फौजी वर्दी में मसूद अजहर या हाफिज सईद जैसा ही है। कोई हैरानी नहीं कि ट्रंप भारत से नाराज हैं क्योंकि उन्हें भारत जैसे बराबरी के साझेदार के बजाय पाकिस्तान जैसे झगड़ों में उलझे हुए गुलाम मुल्क पसंद हैं, जिन्हें हड्डी फेंककर खुश करना आसान है। एक आजाद, मजबूत और गर्व से भरे भारत के साथ इज्जत से रिश्ता निभाना ट्रंप को यकीनन मुश्किल ही लगेगा।
(मूल रूप से यह खबर अंग्रेजी में श्रद्धा पांडेय द्वारा लिखी गई है, जिसे आप यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं।)
चुनाव आयोग ने ‘वोट चोरी’ के राहुल गाँधी समेत तमाम विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब दिया है। आयोग ने हाल में किए गए दावों को भ्रामक और गलत करार दिया है। बिहार में SIR का शुरुआत से विरोध कर रहे विपक्ष और कर्नाटक में वोट चोरी का आरोप लगा रहे राहुल गाँधी की पोल फैक्ट चेक के जरिए चुनाव आयोग ने खोली है। आयोग ने चुनौती दी है कि अगर कोई सबूत है तो उन्हें दिखाएँ, लोगों को गुमराह न करें।
आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में कोई भी नाम कानूनी प्रमाण के बिना न ही हटाया या जोड़ा जा सकता। मतदाता सूची कानून का सख्ती से पालन करते हुए तैयार की जाती है। इसमें नाम जोड़ना या हटाना ‘मतदाता पंजीकरण 1960’ के तहत किया जाता है। बिहार में SIR को लेकर चुनाव आयोग का कहना है कि 14 अगस्त तक एक भी शिकायत किसी राजनीतिक पार्टी ने दर्ज नहीं कराई है।
विपक्ष संसद से सड़क तक वोटर लिस्ट में नाम काटने के नाम पर बवाल कर रहा है। चुनाव आयोग ने 1 अगस्त से एक महीने तक किसी भी तरह की शिकायत होने पर राजनीतिक दलों को दर्ज कराने को कहा है। 14 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी आपत्ति या शिकायत कोई भी पार्टी दर्ज नहीं करा पाई है।
बिहार में जमीन पर विपक्ष के कार्यकर्ता जो बीएलए हैं, उन्होंने भी प्रक्रिया पर संतुष्टि जताई है। लेकिन राहुल गाँधी को बस चुनाव प्रक्रिया पर हमला कर जनता के लोकतंत्र पर विश्वास को तोड़ने की ही कोशिश में लगे हुए हैं। ये लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। चुनाव प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण भी दिया है।
चुनाव आयोग का कहना है कि ‘एक व्यक्ति एक वोट’ का कानून 1951-1952 में भारत के पहले चुनाव से ही अस्तित्व में है। अगर किसी के पास किसी भी चुनाव में किसी व्यक्ति द्वारा दो बार वोट देने का कोई सबूत है, तो उसे बिना किसी सबूत के भारत के सभी मतदाताओं को ‘चोर’ बताने के बजाय, एक लिखित हलफनामे के साथ चुनाव आयोग के साथ साझा किया जाना चाहिए।
आयोग ने वोट चोर शब्द पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा, “हमारे मतदाताओं के लिए ‘वोट चोर’ जैसे गंदे शब्दों का इस्तेमाल करके एक झूठी कहानी गढ़ने की कोशिश करना लाखों चुनाव कर्मचारियों की ईमानदारी पर भी हमला है। साथ ही ये करोड़ों भारतीय मतदाताओं पर सवाल खड़े करना है।” चुनाव आयोग का जवाब कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने ‘वोट चोरी’ का आरोप चुनाव आयोग पर लगाया था।
समाजवादी पार्टी की विधायक पूजा पाल ने विधानसभा में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की है। पाल ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीएम ने उनके पति के हत्यारे को मिट्टी में मिलाने का काम किया और उन्हें न्याय दिलाया।
जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा में ‘विजन डॉक्यूमेंट 2047’ को लेकर चर्चा की जा रही है। इसी चर्चा के बीच समाजवादी पार्टी की विधायक पूजा पाल ने सीएम योगी की तारीफ करती नजर आई।
विधायक ने कहा, “मेरे पति की हत्या किसने की? मैं मुख्यमंत्री का शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ कि उन्होंने मुझे न्याय दिलाया और मेरी बात तब सुनी जब किसी ने नहीं सुनी।”
रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति की सराहना करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री ने प्रयागराज में जीरो टॉलरेंस जैसी नीतियाँ लागू करके मुझ जैसी कई महिलाओं को न्याय दिलाया, जिसके कारण अतीक अहमद जैसे अपराधी मारे गए।”
पूजा पाल ने आगे कहा, “आज पूरा प्रदेश मुख्यमंत्री की ओर भरोसे से देखता है। मैंने तब आवाज उठाई जब मैंने देखा कि कोई भी अतीक अहमद जैसे अपराधियों के खिलाफ लड़ना नहीं चाहता। जब मैं इस लड़ाई से थकने लगी, तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझे न्याय दिलाया।”
#WATCH | Lucknow, UP | Addressing during the 24-hour marathon discussion on 'Vision Document 2047' in the UP Assembly, Samajwadi Party MLA Pooja Pal says, "… Chief Minister Yogi Adityanath gave justice to many women like me by bringing in policies such as zero tolerance that… pic.twitter.com/fN0Agp2nka
बता दें कि पूजा पाल के पति राजू पाल की अतीक अहमद और उसके गुर्गों ने दिनदहाड़े हत्या कर दी थी। मामले में पूजा पाल ने कहा, “बहुत ही कम उम्र में शादी के 9वें दिन मेरे पति की हत्या की गई थी। प्रयागराज में जो कोई भी नहीं सोचता था, वो हुआ।”
उन्होंने कहा, “मैं बहुत गरीब परिवार से आती हूँ, लेकिन वहाँ की जनता ने अपना पैसा लगाकर मुझे चुनाव लड़ाया और जिताया। मैं अकेली माफिया अतीक अहमद से लड़ी थी, मैंने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी। हनुमान जी को मानने वाले हमारे प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने मेरे साथ इंसाफ किया और न्याय दिलाया।”
दुबई में 2025 के पहले छह महीनों (जनवरी से जून) में 3,600 से ज्यादा लोगों ने इस्लाम कबूला है। यह काम मोहम्मद बिन राशिद सेंटर फॉर इस्लामिक कल्चर के जरिए हुआ, जो कि दुबई की सरकारी संस्था इस्लामिक अफेयर्स एंड चैरिटेबल एक्टिविटीज डिपार्टमेंट (IACAD) के अधीन है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चौंकाने वाली जानकारी दुबई सरकार की एक अहम संस्था IACAD ने जारी की है। इस संख्या के साथ ही सैकड़ों लोग इस्लाम से जुड़े एजुकेशनल और जागरूकता कार्यक्रमों में भी शामिल हुए हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य मकसद इस्लाम मजहब के बारे में और विचारों को बेहतर ढंग से समझाना है।
IACAD: कौन सी संस्था है और इसका उद्देश्य क्या है?
IACAD यानी इस्लामिक अफेयर्स एंड चैरिटेबल एक्टिविटीज डिपार्टमेंट दुबई सरकार का एक विभाग है, जो वहाँ पर इस्लाम से जुड़े सभी कामों की देखरेख करता है। इसकी स्थापना 1969 में हुई थी, जिसका मकसद पूरे दुबई में मजहबी जागरुकता और इस्लामिक मूल्यों को बढ़ावा देना है।
IACAD यानी इस्लामिक अफेयर्स एंड चैरिटेबल एक्टिविटीज़ डिपार्टमेंट एक सरकारी संस्था है, जो इस्लाम मज़हब से जुड़ी तमाम गतिविधियों को संभालती है। इसका काम सिर्फ कुरान बाँटना, मस्जिदों की देखरेख करना या इस्लामी शिक्षकों को लाइसेंस देना ही नहीं है, बल्कि यह संस्था इस्लाम की सीखों को दुनिया के सामने पेश करने का भी काम करती है।
IACAD का मानना है कि इस्लाम एक ऐसा मज़हब है जो इल्म (ज्ञान), सहनशीलता (सबर), और आपसी बातचीत (मशवरा) को बढ़ावा देता है। संस्था चाहती है कि दुनिया को इस्लाम की नरम और समझदारी वाली तस्वीर दिखे।
इसलिए वो न सिर्फ मजहबी तालीम देती है, बल्कि लोगों को इस्लामी तहज़ीब यानी इस्लामिक तौर-तरीकों से भी जोड़ने की कोशिश करती है। IACAD उन लोगों से भी बात करती है जो इस्लाम को जानना या समझना चाहते हैं। चाहे वो मुस्लिम हों या गैर-मुस्लिम। IACAD संस्था कोर्सों और इंटरएक्टिव सेशन्स के जरिए इस्लाम की बातों को लोगों तक पहुँचाने का काम करती है।
IACAD का दावा है कि वह इस्लामी तालीम और अदब (संस्कार) के जरिए अलग-अलग समाजों और सोच वाले लोगों के बीच पुल बनाता है। इस तरह का काम वह मोहम्मद बिन राशिद सेंटर फॉर इस्लामिक कल्चर के जरिए करता है। यहाँ ऐसे लोग आते हैं जो इस्लाम अपनाना चाहते हैं या उसके बारे में सीखना चाहते हैं।
IACAD कैसे काम करती है और इसकी क्या जिम्मेदारियाँ हैं?
IACAD की जिम्मेदारियाँ बहुत विस्तृत हैं और यह कई तरीकों से अपने उद्देश्यों को पूरा करती है। यहाँ विस्तार से बताया गया है कि यह संस्था क्या-क्या काम करती है।
फतवा जारी करना: IACAD संस्था लोगों को मजहबी मामलों में मार्गदर्शन देती है और उनके सवालों का जवाब फतवा के रूप में देती है। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है, ताकि लोग आसानी से अपने सवालों का हल पा सकें।
कुरान और इस्लामिक साहित्य का वितरण: यह संस्था कुरान और अन्य इस्लामिक किताबों को छापती है और लोगों के बीच बाँटती है। इसका उद्देश्य इस्लामिक ज्ञान को लोगों तक पहुँचाना है।
हज और उमराह का प्रबंधन: IACAD संस्था हज और उमराह करने वालों की मदद करता है। यह संस्था सफर की पूरी योजना बनाती है और लोगों को रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) करवाने में भी सहायता करती है। ताकि जो लोग मक्का-मदीना जाना चाहते हैं, उनका सफर आराम से और सही तरीके से हो सके।
मस्जिदों की देखरेख: दुबई की सभी मस्जिदों की जिम्मेदारी IACAD की होती है। यह संस्था देखती है कि मस्जिदों में नमाज और दूसरी इबादतें ठीक से हों। साथ ही यह भी ध्यान रखती है कि मस्जिद का माहौल शांत और लोगों के लिए अच्छा बना रहे।
ऑनलाइन सेवाएँ: IACAD संस्था तकनीक का इस्तेमाल करके अपनी वेबसाइट पर लोगों के लिए कई सुविधाएँ देती है। जैसे- (1) लोग अपने मजहबी सवाल ऑनलाइन पूछ सकते हैं। (2) नए मुस्लिम लोगों को इस्लाम समझाने के लिए गाइड मिलती है। (3) दुबई में कहाँ-कहाँ मस्जिदें हैं, उसकी पूरी लिस्ट मिलती है। (4) हर दिन की नमाज का सही समय पता चलता है। (5) साल भर की इस्लामिक छुट्टियों की जानकारी भी मिलती है।
निशाने पर कौन लोग हैं और कितने लोग अपना धर्म बदल चुके हैं?
IACAD संस्था का मुख्य उद्देश्य वो लोग है, जो दुबई में रहते हैं और इस्लाम मजहब को जानना या समझना चाहते हैं। इसमें न सिर्फ दुबई के नागरिक, बल्कि विदेशों से आए लोग भी शामिल हैं। यह संस्था उन लोगों को खासतौर पर निशाना बनाती है, जिन्होंने नया-नया इस्लाम कबूला है।
दिए गए आँकड़ों के अनुसार, 2025 के पहले छह महीनों में 3,600 से ज़्यादा लोगों ने इस्लाम कबूल किया।रिपोर्ट में ये तो नहीं बताया गया कि ये लोग पहले किस धर्म के थे, लेकिन ये ज़रूर कहा गया है कि वे अलग-अलग देशों और सभ्यताओं से आए थे।
धर्म परिवर्तन के अलावा, IACAD संस्था ने ऐसे शैक्षिक कोर्स शुरू किए हैं जिनमें इस्लाम के बारे में गहराई से सिखाया जाता है। इनमें 1,300 से ज्यादा लोगों ने दाखिला लिया। इन कोर्सों में इस्लाम के रोजमर्रा के तौर-तरीके, नियम और उसूल समझाए जाते हैं।
IACAD ने कुल 47 जागरुकता वाले ऐसे कोर्स कराए, जिनमें 1,400 से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। इनका मकसद था कि लोग इस्लामिक सोच और मान्यताओं को सही तरीके से समझ सकें। ये कोर्स इस्लाम की तालीम और समझ बढ़ाने के लिए चलाए जाते हैं।
शिक्षा में ‘सस्टेनेबल नॉलेज रूम’ तकनीक का इस्तेमाल
IACAD संस्था ने इस्लाम मजहब की शिक्षा को आधुनिक और ज़्यादा आकर्षक बनाने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया है। ‘सस्टेनेबल नॉलेज रूम’ एक ऐसा ही प्रोजेक्ट है, जो मोहम्मद बिन राशिद सेंटर फॉर इस्लामिक कल्चर में मौजूद है।
यह एक 360-डिग्री का वर्चुअल क्लासरूम है, जहाँ लोग इंटरैक्टिव तरीके से इस्लाम के बारे में सीखते हैं। यह तकनीक शिक्षा को एक वास्तविकता में बदल देती है। इससे लोग इस्लाम से जुड़ी जानकारी को ज़्यादा आसानी से समझ पाते हैं। इस तकनीक से 190 से ज़्यादा लोगों ने अपना मजहब बदला है। इस रूम का इस्तेमाल बच्चों और बड़ों दोनों पर किया जाता है।
यूपी के इटावा में अवैध असलहा की सौदेबाजी करते पुलिस ने मस्जिद के इमाम अकबर अली समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से तीन तमंचे, एक बाइक और एक मोबाइल बरामद किए गए हैं।
मुरादाबाद का रहने वाला है इमाम अकबर अली
पकड़े गए आरोपितों में इमाम अकबर अली के अलावा डेविड सोनी, सूरज उर्फ रुद्रा, अरविंद और एकलव्य शर्मा का नाम शामिल है। अकबर अली मुरादाबाद का रहने वाला है और सैफई के कुम्हावर की मस्जिद में इमाम है। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया है कि उसे जान का खतरा है। गाँव के कुछ लोग और ससुराल पक्ष से उसे जान से मारने की धमकी दी है। इसलिए उसने 2 अगस्त को 61 हजार रुपए में पिस्टल का सौदा किया था, लेकिन उसे तमंचा दिया जा रहा था। इसको लेकर उसने सिविल लाइन थाने में ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी।
इस बीच पुलिस को सूचना मिली कि रेलवे स्टेशन के पास मौजूद मजार में कुछ लोग अवैध तरीके से असलहों की खरीद फरोख्त कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस वहाँ पहुँची और 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
अवैध असलहे की खरीद-फरोख्त
पुलिस ने जाँच में पाया कि इमाम अकबर अली अवैध तरीके से पिस्टल खरीद रहा था। उसने आरोपी डेविड सोनी के साथ सौदा किया था। डेविड सोनी पर हत्या की कोशिश, डकैती, गैंगस्टर और आर्म्स एक्ट के तहत कई मामले दर्ज हैं। पुलिस ने डेविड के तीन दोस्तों को भी गिरफ्तार किया। इनकी तलाशी के दौरान दो तमंचे, तीन हजार रुपए और एक मोबाइल बरामद किया गया। जबकि इमाम केपास से एक तमंचा और दो कारतूस बरामद किया गया है।
स्थानीय सीओ सिटी अभय नारायण राय के मुताबिक पूछताछ में चारों ने माना है कि अकबर अली ने पिस्टल खरीदने के लिए उन लोगों को 61 हजार रुपए दिए थे। पुलिस ने अब ठगी की जगह आर्म्स एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कर लिया है। अकबर अली समेत सभी को जेल भेज दिया गया है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि सोशल मीडिया पर महिलाओं को धमकाने या अश्लील मैसेज भेजने वालों के खिलाफ सख्त कानून की कमी है। कोर्ट ने एक मामले में आरोपित को अग्रिम जमानत दे दी, जिसमें उसने पीड़िता को धमकी भरे संदेश भेजे थे।
कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया पर महिलाओं को अश्लील या धमकी भरे संदेश भेजने जैसे गंभीर मामलों में भी आरोपित पर केवल जमानती धाराएँ लगाई जाती हैं। कोर्ट का कहना है कि ऐसे मामलों के लिए अलग से कोई सख्त कानून नहीं बनाया गया है।
जानकारी के अनुसार, मामले में जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी घिनौनी और मानसिक रूप से परेशान करने वाली हरकतों के बावजूद आरोपित पर केवल जमानती धाराएँ लगाई जाती हैं। ऐसे मामलों की शिकार महिलाएँ, विशेष रूप से युवा लड़कियाँ असुरक्षित महसूस करती हैं और उन्हें राज्य या कोर्ट से भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती।”
क्या है मामला?
आरोपित और पीड़िता की छह साल पहले सगाई हुई थी, लेकिन बाद में वह टूट गई। सगाई टूटने के बाद आरोपित ने पीड़िता को सोशल मीडिया पर लगातार परेशान करना शुरू कर दिया। उसने धमकी भरे और डराने वाले संदेश पोस्ट किए, जैसे “तू चाहे शादी कर ले, मैं तेरी शादी बर्बाद कर दूँगा, ये मेरा वादा है। मुझे केस करवाना है अपने ऊपर… तू सोचती है कि मुझे छोड़ कर चैन से जी लेगी, ऐसा नहीं होगा। मुझे जेल जाना ही है तो 10 दिन चला जाऊँगा, फिर क्या… मैं तेरी शादी नहीं होने दूँगा, चाहे कुछ भी हो जाए।”
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 183 के तहत पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि इस तरह की धमकियों की वजह से उसकी एक और सगाई टूट गई। उसे कॉलेज जाना भी छोड़ना पड़ा, क्योंकि आरोपित के संदेश उसे मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे।
कोर्ट की टिप्पणी
रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने माना कि आरोपित के खिलाफ जो धाराएँ लगाई गई हैं (जैसे पीछा करना और डराना), वे जमानती हैं, जबकि ऐसे मामलों के लिए अलग और सख्त कानून होने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराधियों को रोकने के लिए और महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए विधायिका को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।