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बिहार SIR पर विपक्ष ने नहीं दर्ज कराई एक भी आपत्ति, न तो कॉन्ग्रेस के पास शिकायत न RJD के पास: ‘हंगामा खड़ा करना’ वाले मकसद पर चला विपक्ष, बैरिकेट्स तक कूदे

बिहार में वोटर वेरिफिकेशन पर लगातार विपक्ष संसद से सड़क तक हंगामा कर रहा है। वोटर लिस्ट में नाम काटने का आरोप लगा रहा है लेकिन चुनाव आयोग ने 1 अगस्त से एक महीने तक किसी भी तरह की शिकायत होने पर राजनीतिक दलों को दर्ज कराने को कहा है। 10 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी आपत्ति या शिकायत कोई भी पार्टी दर्ज नहीं करा पाई है।

ऊपर से तेजस्वी यादव के दो जगह नाम होने पर चुनाव आयोग को जवाब नहीं दे पा रहे। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पटना से दिल्ली तक एसआईआर के खिलाफ बवाल कर रहे हैं, गले फाड़-फाड़ कर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन आयोग को बताने नहीं जा रहे कि उन्हें आखिर आपत्ति किस बात पर है?

दिल्ली पुलिस से बगैर अनुमति माँगे SIR के खिलाफ इंडी गठबंधन ने राहुल गाँधी के नेतृत्व में संसद से चुनाव आयोग के ऑफिस तक जाने की कोशिश की। इस दौरान बैरिकेड्स लगा कर नेताओं को रोकने की कोशिश की गई। इस दौरान एसपी नेता अखिलेश यादव उस पर चढ़ गए। कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा नारा लगाते दिखाई दी। नेताओं के बवाल के बाद पुलिस ने इन लोगों को हिरासत में ले लिया।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी का कहना है कि “ये लोग बात नहीं करना चाहते हैं। देश के सामने सबकुछ सामने आ गया है। ये लड़ाई राजनीति नहीं है।”

चुनाव आयोग ने दिया सुप्रीम कोर्ट को भरोसा

चुनाव आयोग ने SIR पर शनिवार (9 अगस्त 2025) को सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल कर दिया। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना नोटिस दिए किसी भी मतदाता को अंतिम वोटर लिस्ट से बाहर नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग ने भरोसा दिया है कि बगैर सूचना दिए या बिना आदेश के वोटर लिस्ट में किसी का नाम नहीं हटाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में आयोग ने कहा कि वह हर वोटर को शामिल करने की पूरी कोशिश कर रहा है।

अब तक एक भी नाम नहीं बता पाई है पार्टियाँ

इससे पहले चुनाव आयोग ने 1 सितंबर तक किसी तरह की आपत्ति होने पर राजनीतिक दलों और आम लोगों से शिकायत, सुझाव और बदलाव हर तरह की जानकारी देने के लिए कहा है। 1 अगस्त से 9 अगस्त तक विपक्षी पार्टियों में किसी भी दल ने न तो कोई आपत्ति दर्ज की और न ही बदलाव की बात कही। सभी पार्टियाँ पूरी तरह निष्क्रिय दिख रहीं है। अगर किसी तरह की गड़बड़ी पार्टियों को दिख रही है, तो आधिकारिक तौर पर आयोग को सबूत के साथ बताएँ, न की बैरिकेड तोड़ कर मीडिया के सामने ड्रामा करने की कोशिश करें।

तेजस्वी यादव का वोटर लिस्ट में दो जगहों पर नाम

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं है। इसके बाद चुनाव आयोग ने उनके आरोप को बेबुनियाद करार देते हुए नाम लिस्ट भेजा। इस दौरान तेजस्वी यादव के दो जगह वोटर लिस्ट में नाम सामने आये। आयोग ने उनसे जवाब माँगा है लेकिन जवाब देने के बजाए तेजस्वी यादव नकारात्मक राजनीति करते नजर आ रहे हैं।

वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर वोटिंग प्रक्रिया का एक जरूरी हिस्सा है। विपक्षी पार्टियाँ शुरू से इसका विरोध कर रही हैं। कभी कहती हैं कि दस्तावेजों की कमी से योग्य मतदाता वोटिंग से वंचित रह जाएगा। जबकि इसी देश में राशन कार्ड पर मुफ्त राशन देने, बैंकों का खाता खोलने के लिए जरूरी दस्तावेज देने जैसी प्रक्रियाएँ सफलतापूर्वक की गई हैं और इसका फायदा आम लोगों को मिल रहा है। ऐसे में वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण भी उतना ही जरूरी है जिसका अधिकार चुनाव आयोग को संविधान ने दिया है।

कॉलेज में साथ पढ़ता था मोहम्मद रमीस, ईसाई युवती पर धर्मांतरण और निकाह का डाला दबाव: पिटाई से परेशान युवती ने दे दी जान, केरल के एर्नाकुलम का मामला

केरल के एर्नाकुलम जिले में 23 वर्षीय सोना एल्धोसे ने धर्म परिवर्तन के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली। युवती को मोहम्मद रमीस इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर कर रहा था। आए दिन उसके साथ मारपीट की जाती थी, जिससे तंग आकर उसने खुदकुशी कर ली।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना शनिवार (11 अगस्त 2025) को कोठामंगलम शहर की है। सोना ने आत्महत्या से पहले नोट भी लिखा है। नोट में आत्महत्या की वजह धर्म परिवर्तन का दबाव और प्रताड़ना बताई गई है। वहीं सोना के भाई ने भी रमीस और उसके परिवार पर आरोप लगाए हैं।

सोना के भाई ने बताया कि उसकी बहन सोना को रमीस ने कॉलेज के दौरान प्रेमजाल में फँसाया था। रमीस उनके घर पर निकाह करने का प्रस्ताव लेकर पहुँचा था, लेकिन इस शर्त पर कि सोना इस्लाम कबूल करेगी। सोना भी इस शर्त को मानने के लिए तैयार हो गई थी। लेकिन कुछ समय बाद सोना के पिता का निधन हो गया, जिसके कारण एक साल तक निकाह को टाल दिया गया।

इस एक साल में रमीस को पुलिस ने एक लॉज से अवैध व्यापार करते हुए पकड़ा। इसके बावजूद सोना ने निकाह के लिए इनकार नहीं किया और कोर्ट मैरिज करने की बात कही। लेकिन रमीस जल्द से जल्द सोना का धर्म परिवर्तन करवाना चाहता था। एक दिन सोना अपनी दोस्त के घर गई थी, तभी रमीस उसे वहाँ से अपने घर ले गया। यहाँ रमीस और उसके परिवार ने सोना को एक कमरे में बंद कर पीटा।

रमीस और उसके परिवार ने सोना को पोन्नानी में जाकर धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव डाला, लेकिन सोना लगातार मना करती रही। इसके चलते रमीस रोजाना सोना को प्रताड़ित करता रहा। इससे परेशान आकर सोना ने खुदकुशी कर ली। फिलहाल पुलिस मृतका के परिवार की शिकायत पर मामले की जाँच में जुटी हुई है।

कटिहार में 250 जनजातीय लोगों के धर्मांतरण की साजिश नाकाम, बजरंग दल ने रुकवाया: बिहार पुलिस ने 6 को दबोचा, 1 ईसाई परिवार ने की घर वापसी

बिहार के कटिहार जिले में 200-250 जनजातीय समाज के लोगों को ईसाई बनाने की साजिश की जा रही थी। इससे पहले की मिशनरी अपने मंसूबों में कामयाब हो पाते बजरंग दल से जुड़े लोगों ने मौके पर पहुँचकर इसे रुकवा दिया।

विदेशी ताकतों और कट्टरपंथियों का मंसूबा है कि भारत में डेमोग्राफी बदलकर किसी तरह सामाजिक ताने-बाने को तोड़ दिया जाए। देश में जगह-जगह इस्लामिक कट्टरपंथी और ईसाई मिशनरियों के गिरोह दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कटिहार के सहायक थाना क्षेत्र में आदिवासी टोला में रविवार (10 अगस्त 2025) को सैकड़ों हिंदुओं का धर्मांतरण कर उन्हें ईसाई बनाने की साज़िश चल रही थी। इस गिरोह के निशाने पर मुख्यत: संथाली जनजातीय समाज के लोग थे।

इलाके के इन गरीब और मासूम लोगों का ब्रेन-वॉश किया गया था। हालाँकि, इसकी जानकारी बजरंग दल के लोगों को मिल गई और वे पुलिस लेकर घटनास्थल पर पहुँच गए। पुलिस ने इस साजिश में शामिल 6 लोगों को हिरासत में ले लिया है। दावा किया जा रहा है कि जब बजरंग दल के लोग ईसाइयों की प्रार्थना सभा रुकवाने पहुँचे थे तो वहाँ झड़प भी हुई थी।

बजरंग दल के लोगों ने क्या कहा?

बजरंग दल के जिला संयोजक राणा कुमार का कहना है कि कई दिनों से उन्हें इस इलाके में हिंदुओं का धर्मांतरण कराए जाने की खबर मिल रही थी। इसके बाद वे मौके पर पहुँचे तो पता चला कि 200 से 250 लोगों को धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। राणा को मौके से कुछ ऐसी धार्मिक किताबें और आपत्तिजनक चीजें मिली हैं जो धर्मांतरण की बात को पुख्ता करती हैं।

बजरंग दल के उत्तर बिहार प्रांत सुरक्षा प्रमुख अनिश सिंह ने बताया कि धर्मांतरण की सूचना मिलने के बाद पुलिस को बुलाया गया था। पुलिस ने छापेमारी की और संदिग्धों को थाने ले आई है। बजरंग दल की माँग है कि इस मामले में FIR दर्ज की जाए और सख्ती से जाँच की जाए।

पुलिस ने क्या कहा?

पुलिस ने धर्मांतरण की शिकायत मिलने के बाद 2 पुरुषों और 4 महिलाओं को हिरासत में लिया है। कटिहार के SP शिखर चौधरी का कहना है कि धर्मांतरण कराने का मामला सामने आया है और पुलिस इसकी जाँच कर रही है। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों को पूछताछ के लिए थाने लाया गया है। आरोप लगाने वालों ने मारपीट की है जिसमें 2 लोग घायल हुए हैं।”

SP के मुताबिक, आरोपितों की पहचानकर FIR कर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने जाँच की बात कही है। वहीं, हिंदू संगठन से जुड़े लोगों का साफ कहना है कि अगर ऐसी गतिविधियाँ अगर चलती रहीं तो वे बड़ा प्रदर्शन करेंगे।

भारत तोड़ने की साजिश: पूर्व डिप्टी CM

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कटिहार के बीजेपी विधायक तारकिशोर प्रसाद ने इसे भारत को तोड़ने की साजिश बताया है। तारकिशोर प्रसाद का कहना है कि सीमांचल में धर्मांतरण का खेल चल रहा है जिससे सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण की साजिश के जरिए कोई पुण्य का काम नहीं हो रहा है और लोग इसे अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

कटिहार में ईसाई परिवार ने की घर वापसी

धर्मांतरण की गहरी साजिश के बीच ईसाई धर्म अपनाने वाले एक परिवार ने घर वापसी की है। महाकाल सेना से जुड़े लोगों ने विधिवत पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार के साथ इस परिवार की घर वापसी कराई है।

महाकाल सेना के शिवानंद का कहना है कि उन लोगों तक पहुँचा जा रहा है, जिन्होंने किसी लोभ, साजिश या मजबूरी में अपना धर्म बदला है। संख्या बढ़ाकर सीमावर्ती क्षेत्रों में कब्जा कर रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए और मिशनरी संगठनों की संगठित कोशिशों को उन्होंने दो बड़ी चुनौती बताया है।

‘लैंड पूलिंग पॉलिसी जल्द वापस ले पंजाब सरकार, वरना करेंगे बड़ा आंदोलन’: भगवंत मान सरकार के खिलाफ सड़कों पर किसान, हाईकोर्ट पहले ही लगा चुका है फटकार

पंजाब में किसानों ने भगवंत मान सरकार को चेताया है कि अगर लैंड पूलिंग पॉलिसी वापस नहीं लिया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। किसानों ने इसको लेकर पंजाब के कई जिलों में बाइक रैली निकाली। ये रैली सोमवार (11 अगस्त 2025) को किसान मजदूर संघर्ष समिति (केएमएम) के नेता सरवन सिंह पंधेर की अगुआई में अमृतसर के जलियांवाला बाग से अटारी बॉर्डर तक गई। इस दौरान भगवंत मान सरकार के फैसले का जमकर विरोध किया गया।

किसानों से जमीन छीनने की साजिश- पंधेर

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा, “हम चाहते हैं कि भगवंत मान सरकार जल्द से जल्द लैंड पूलिंग नीति वापस ले, वरना हमें उन्हें ऐसा करने पर मजबूर करना पड़ेगा। यह सिर्फ किसानों का मुद्दा नहीं है।”

किसान मोर्चा का कहना है कि राज्य के उपजाऊ कृषि भूमि को कॉर्पोरेट के हाथों में जाने से बचाना उनका मकसद है। उन्होंने प्रस्तावित लैंड पूलिंग नीति को ‘काला कानून’ करार दिया। किसान नेताओं का कहना है कि इसका मकसद 65000 एकड़ से ज्यादा जमीन निजी हाथों में सौंपना चाहती है राज्य सरकार।

हाईकोर्ट ने भगवंत सरकार को लगाई थी फटकार

इससे पहले भगवंत मान सरकार को ‘लैंड अर्बन डेवलपमेंट’ के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जमकर फटकार लगाई थी और इस पर 4 हफ्ते के लिए रोक लगा दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसा लगता है कि लैंड पूलिंग पॉलिसी जल्दीबाजी में बनाया गया है । सरकार ने सामाजिक असर, पर्यावरण और दूसरी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया। इन पर ध्यान देना चाहिए था।

क्या है लैंड पूलिंग पॉलिसी?

पंजाब की मान सरकार ने जमीन पर आवासीय कॉलोनी और फ्लैट बनाने के लिए जमीन किसानों से लेना चाहती है। इसमें कहा गया है कि किसानों की इच्छा के बिना ये नहीं हो सकता। किसानों का कहना है कि ये पॉलिसी किसानों की जमीन लेकर कॉरपोरेट को देने की साजिश है। किसान खुलकर इसका विरोध कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि उनपर चारों ओर से हमले किए जा रहे हैं। एक तरफ जमीन छीनने की साजिश की जा रही है वहीं दूसरी तरफ भारत पर लगातार अमेरिका दबाव बना रहा है कि कृषि, डेयरी, पोल्ट्री, मछलीपालन जैसे क्षेत्र में उसे भारत में घुसने दिया जाए।

निमिषा प्रिया मामले में केरल के मौलाना का नहीं लेना-देना, यमन में पीड़ित के भाई ने किया साफ़: मौत की सजा के नाम पर क्रेडिट लेने की कोशिश कर चुका है कंथापुरम, हर बार साबित हुआ झूठा

यमन में मौत की सजा पा चुकी भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को बचाने के मलयाली मौलाना के दावे झूठे सिद्ध हुए हैं। मौलाना कंथापुरम के निमिषा प्रिया के बचाने के दावों को अब्दुल फतह मेहदी ने नकार दिया है। अब्दुल फतह मेहदी, उस तलाल मेहदी का भाई है जिसकी हत्या के आरोप में निमिषा प्रिया को मौत की सजा दी जा रही है। अब्दुल फतह मेहदी ने कहा है कि वह तलाल के परिजनों से कंथापुरम के सम्पर्क करने की कोई कोशिश कामयाब नहीं होने देगा। उसने कंथापुरम को झूठा भी करार दिया है।

निमिषा प्रिया पर क्या बोला अब्दुल?

ऑनमनोरमा की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब्दुल ने इससे सम्बन्धित दो फेसबुक पोस्ट की हैं। अब्दुल ने कहा, “यह भारतीय मौलाना का कर्तव्य था कि वह पीड़ित के खून का सम्मान करें और इस दौरान सच्चाई को ईमानदारी से रखें। हमने दाम तलाल के माता-पिता के साथ किसी के भी मिलने या बैठक पर रोक लगी हुई है… चाहे यह सीधे हो, कंथापुरम हो या फिर हबीब उमर बिन हाफिज के कार्यालय द्वारा किसी भी माध्यम से हो।”

अब्दुल ने इसके बाद कंथापुरम पर झूठ बोलने का आरोप भी लगाया। अब्दुल ने कहा कि इस्लाम सच्चाई का धर्म है और यहाँ झूठ की कोई गुंजाइश नहीं है। अब्दुल ने स्पष्ट किया कि निमिषा प्रिया की मौत की सजा रोकने या उसके परिवार से कोई डील करने की बात सच नहीं है। अब्दुल ने बताया कि ऐसी खबर अगर सच होती तो पहले ही इसकी घोषणा कर देते। अब्दुल मेहदी ने कहा कि हम खून का बदला खून से लेंगे और इसे कोई बदल नहीं सकता।

निमिषा प्रिया की मौत को भुनाने का आरोप भी अब्दुल ने कुछ लोगों पर लगाया। अब्दुल ने कहा कि जिस त्रासदी से उसका भाई और उसका परिवार गुजरा है, निमिषा प्रिया को मौत की सजा के जरिए उसका बदला पूरा होगा। अब्दुल और उसके परिवार ने यमन के अधिकारियों से बातचीत करके निमिषा की मौत की सजा की डेट जल्द फाइनल करने को कहा है। अब्दुल का यह बयान तब आया है जब कंथापुरम लगातार निमिषा प्रिया को बचाने से जुड़े दावे कर रहे हैं।

कंथापुरम कर रहे बचाने का दावा

मौलाना कंथापुरम ने हाल ही में एक समारोह में दावा किया था कि वह निमिषा प्रिया को मानवीय आधार पर बचा रहे हैं। कंथापुरम ने बोला था कि वह इसके लिए कोई क्रेडिट नहीं चाहते। हालाँकि, यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब उन्होंने या उनके दफ्तर ने यह दावा किया हो कि निमिषा प्रिया को बचा लिया गया है। इससे पहले कंथापुरम के दफ्तर ने दावा किया था कि निमिषा प्रिया की मौत की सजा खत्म कर दी गई है।

इससे पहले 16 जुलाई, 2025 को होने वाली निमिषा प्रिया की मौत की सजा जब टली थी, तब भी कंथापुरम को हीरो की तरह पेश किया गया था। मुस्लिमों के साथ ही वामपंथी मीडिया पोर्टल्स ने यह दिखाने का प्रयास किया था कि निमिषा की मौत की सजा उन्होंने टलवाई। इसको लेकर खूब प्रचार हुआ था। मौलाना के दफ्तर ने भी कई पोस्ट की थीं। इसके पीछे मौलाना का इस्लामी प्रभाव बताया गया था। इसको लेकर लम्बे लम्बे लेख लिखे गए थे। हालाँकि, यह बातें बाद में झूठी साबित हुईं।

निमिषा प्रिया पर बार-बार पकड़ा गया मौलाना का झूठ

निमिषा प्रिया की मौत को लेकर मौलाना कंथापुरम का झूठ कोई पहली बार नहीं पकड़ा गया है। जब मौत की सजा रोकी गई थी, तो भी मौलाना के रोल को भारतीय विदेश मंत्रालय ने नकार दिया था। इसके अलावा जब मौलाना के दफ्तर ने निमिषा प्रिया के मौत की सजा रुकने की बात कही थी तब भी यह झूठ निकला था और मौलाना के दफ्तर के पोस्ट हटानी तक पड़ी थी। अब जब उसने फिर से इससे जुड़ा दावा किया है तो मृतक मेहदी के भाई ने ही इसे नकार दिया है और मौलाना को झूठा तक करार दे दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR से आवारा कुत्तों को हटाने को कहा, जो रुकावट डालें – उन पर हो कार्रवाई: रेबीज से मरे लोगों को वापस लाएँगे क्या NGO वाले?

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों को तुरंत हटाने का बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि जो भी इस काम में रुकावट डालेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, “जो लोग रेबीज से मर गए, क्या कोई उन्हें वापस ला सकता है?” यह आदेश दिल्ली में कुत्तों के काटने और रेबीज से होने वाली मौतों के बढ़ते मामलों को देखते हुए आया है।

जस्टिस जे.बी. परदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में आवारा कुत्तों को पकड़कर दूर के इलाकों में ले जाने का आदेश दिया। जस्टिस परदीवाला ने कहा कि यह जनता के हित में है और भावनाओं में बहकर फैसला नहीं लिया जा सकता। उन्होंने साफ कहा, “सभी इलाकों से कुत्तों को पकड़ो और उन्हें दूर ले जाओ।”

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली के कई हिस्सों में हालात गंभीर हैं। खासकर बच्चे और बुजुर्ग रेबीज का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता कोर्ट के इस कदम से खुश हैं, क्योंकि बच्चों की जान बचाना सबसे जरूरी है।

मेहता ने यह भी बताया कि पहले कुत्तों को हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन एक डॉग राइट्स एक्टिविस्ट ने कोर्ट से स्टे ऑर्डर ले लिया था, जिससे काम रुक गया। इस पर जस्टिस परदीवाला ने तल्ख टिप्पणी की, “क्या ये एक्टिविस्ट रेबीज से मरे लोगों को वापस ला सकते हैं?”

कुत्तों के लिए शेल्टर और सख्त निगरानी की व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार, MCD और NDMC को आदेश दिया कि वो कुत्तों के लिए शेल्टर बनाएँ, जहाँ उनकी नसबंदी और वैक्सीनेशन हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि शेल्टर में CCTV कैमरे लगाए जाएँ, ताकि कोई कुत्ता वापस सड़कों पर न छोड़ा जाए। कोर्ट ने कहा कि सबसे पहले सभी इलाकों को आवारा कुत्तों से मुक्त करना है। इसके लिए जरूरत पड़े तो अलग से फोर्स बनाई जाए।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर कोई इस काम में अड़ँगा डालेगा, तो उसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा और सख्त कार्रवाई होगी। यह फैसला दिल्ली-NCR में रेबीज के खतरे को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

दैनिक भास्कर ने बिहार SIR पर की सनसनी फैलाने की कोशिश, राजदीप सरदेसाई ने डाला ‘आग में घी’: मुजफ्फरपुर प्रशासन ने खोल दी सबकी पोल

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच दैनिक भास्कर ने एक खबर से सनसनी फैलाने की कोशिश की। भास्कर ने एक पते पर 269 वोटर होने की खबर दी। ‘पत्रकार’ कहे जाने वाले राजदीप सरदेसाई ने भी इस मुद्दे पर ‘आग में घी’ डाल दिया। हालाँकि, इस आग से कुछ नुकसान हो पाता, इससे पहले ही प्रशासन ने इसकी पोल खोल दी।

दैनिक भास्कर के दावे को राजदीप ने दी हवा

दैनिक भास्कर ने 10 अगस्त को बिहार के मतदाता सूची प्रारूप को लेकर खबर छापी। इसमें कहा गया, “मुजफ्फरपुर में एक ही पते पर 269 तो जमुई में 247 वोटर रहते हैं”। खबर में मुजफ्फरनगर में बूथ नंबर 370 के मकान नंबर 27 पर 269 मतदाता और जमुई के बूथ नंबर 86 पर मकान नंबर 3 पर 247 वोटर होने की बात कही गई।

विपक्ष लगातार SIR को लेकर हल्ला-हंगामा कर रहा है। TMC की राज्यसभा साँसद सागरिका घोष के पति राजदीप सरदेसाई ने भी विपक्ष के सुर में सुर मिलाए हैं। राजदीप ने इस खबर को लेकर भास्कर की तारीफ की। उन्होंने X पर खबर शेयर करते हुए मतदाता सूची के रिवीजन को जल्दबाजी का काम बताया है।

प्रशासन ने दिया जवाब

मुजफ्फरपुर के जिला प्रशासन ने राजदीप को जवाब देते हुए इस खबर की असली कहानी खोल दी। प्रशासन ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि निर्वाचक सूची में वोटरों को दिया जाने वाला मकान नंबर अस्थाई और प्रतीकात्मक (Notional) होता है। प्रशासन ने कहा, “इसका निर्वाचक के असली मकान नंबर या परिवार से कोई संबंध नहीं होता है।”

प्रशासन के मुताबिक, SIR में योग्य निर्वाचकों का केवल सत्यापन किया गया है। निर्वाचक सूची में यह मकान नंबर SIR के पहले से दर्ज है। 7 जनवरी 2025 को प्रकाशित मतदाता सूची में ही मकान नंबर इसी तरह दर्ज थे। SIR के दौरान भी किसी ने इस पर आपत्ति नहीं की।

जिस बड़े खुलासे के सहारे भास्कर और राजदीप बिहार में सनसनी फैलाने की कोशिश कर रहे थे, प्रशासन और चुनाव आयोग को घेरने की कोशिश कर रहे थे। वो बस एक भ्रामक दावा ही साबित हुआ है। चुनाव आयोग लगातार विपक्ष के निशाने पर है और ऐसे में कुछ खास राजनीतिक झुकाव वाले पत्रकार तथ्यों को परवाह किए बगैर बस हमलावर हैं।

इजरायल ने जिस आतंकी अनस-अल को ठोका, उसे इस्लामी-लिबरल बता रहे ‘शरीफ’: मौत के बाद सामने आई अल-जजीरा के जिहादी की सच्चाई

इजरायली हमले में मारे गए अनस अल शरीफ समेत अल जजीरा के 5 कथित पत्रकारों को लेकर सोशल मीडिया इजरायल पर अटैक कर रहा है। कोई उसकी दूर दराज में किए गए रिपोर्टिंग को शेयर कर उसे ‘सच्चा पत्रकार’ साबित करने की कोशिश कर रहा है तो कोई ‘प्रेस टैंट पर अटैक’ कह कर मीडिया को खामोश करने की कवायद करार दे रहा है। हालाँकि इजरायल पहले ही बता चुका था कि अनस उसके ‘हिट लिस्ट’ में शामिल था।

इजरायल के मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था अनस

गाजा में इजरायली हमले में अनस अल शरीफ और उसके 4 साथियों की मौत हो गई है। ये सभी अल जजीरा से जुड़े कथित पत्रकार थे। इजरायल पहले ही उसका नाम मोस्ट वॉन्टेड की सूची में शामिल कर चुका था। IDF ने अल जजीरा के 6 पत्रकारों की लिस्ट जारी की थी, जो हमास के लिए काम करता था। इसमें अनस अल शरीफ का नाम भी शामिल था। IDF के मुताबिक अनस अल-शरीफ रॉकेट लॉन्चिंग स्क्वॉड का प्रमुख था और हमास की नुसीरत बटालियन में नुखबा फोर्स कंपनी का आतंकी था।

हालाँकि अल जजीरा ने दावा किया था कि उसके पत्रकार का आंतकी संगठनों से कोई संबंध नहीं है। लेकिन IDF ने इसे खारिज कर कहा था कि उसके पास दस्तावेज मौजूद हैं जिससे साबित होता है कि वह आतंकी था।

इजरायल के खिलाफ अल जजीरा का दुष्प्रचार

अल जजीरा लगातार इजरायल को लेकर दुष्प्रचार करता रहा है। इस साल मई में बेंजामिन नेतन्याहू सरकार ने हमास का प्रोपेगेंडा चलाने के कारण इजरायल के भीतर अल जजीरा को बंद कर दिया था। सितम्बर, 2024 में इजरायल सरकार ने वेस्ट बैंक के रामल्लाह में अल जजीरा ब्यूरो को भी बंद कर दिया था।

अलजजीरा एक ऐसा नेटवर्क है जिसे कतर सरकार फंडिंग करती है। ये इजरायल के खिलाफ खबरें दिखाता है और फिलिस्तीन की मदद करता है। इजरायल कहता रहा है कि अल जजीरा हमास के आतंकियों को रिपोर्टर के रूप में फिलिस्तीन के दूर दराज के इलाके में भेजता है जो मुख्य रूप से आतंकी गतिविधि में शामिल रहते हैं। अनस अल शरीफ इसका अच्छा उदाहरण है जिसे पहले ही इजरायल ने हमास का आतंकी घोषित कर दिया था। आखिर एक वॉन्टेड आतंकी को रिपोर्ट बनाकर अल जजीरा हमास की मदद ही कर रहा है। वह गाजा के लोगों के बीच में छिप कर जिहादी मंसूबों को अंजाम दे रहा था।

लेकिन अनस अल शरीफ की मौत के बाद सोशल मीडिया पर उसके प्रति सहानुभूति जताने वाले इस्लामी और कथित लिबरल गैंग की बाढ़ आ गई है। कोई उसे ‘शहीद’ कह रहा है तो कोई पत्रकारों पर हमले को ‘इजरायली बर्बरता’ करार दे रहा है। इसमें कहा जा रहा है कि दुनिया, मीडिया सब खामोश हैं।

कोई उसे अल जजीरा का बड़ा चेहरा बता रहा है तो साहसपूर्ण रिपोर्टिंग की बात कह रहा है। कोई हमास के हमलावरों की तारीफों के पुल बाँधे जा रहे हैं। यहाँ तक कि परिवार के साथ फोटो और वीडियो शेयर किया जा रहे हैं।

इजरायली हमले को भयावह करार देते हुए सीएनएन ने कहा है कि ये स्थानीय पत्रकारों की स्थिति को बयां करता है। सीएनएन के मुताबिक अल शरीफ हमास के राजनीतिक प्रमुख इस्माइल हनीयेह के पारिवारिक घर के पास एक स्थान से लाइव रिपोर्टिंग कर रहे थे, इसलिए वहाँ मौजूद थे। हनीयेह की मंगलवार को तेहरान में हत्या कर दी गई थी। वहीं बीबीसी ने इसे ‘प्रेस की आजादी’ पर हमला करार दिया है।

लेकिन इससे अनस अल शरीफ की असलियत नहीं बदल सकती। उसके खिलाफ कई तरह के सबूत होने की बात इजरायल पहले से करता रहा है। जिहादी सोच का संबंध किसी पेश से नहीं होता। ये इंजीनियर ओसामा बिन लादेन से लेकर डॉक्टर अल जवाहिरी तक के केस में देखा जा सकता है। पत्रकार बनकर लोगों से बातें करना और उनके बीच रहना तो और आसान है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी राफेल की डिमांड, भारतीय वायुसेना ने माँगे 114 फाइटर जेट: कहा – चीन और पाकिस्तान से लड़ाई में आएँगे काम

भारतीय वायुसेना (IAF) ने एक बार फिर फ्रांस से और राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए जोरदार माँग उठाई है। यह माँग उसकी लंबे समय से लटकी हुई 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) परियोजना के तहत है, जिसमें ज्यादातर विमान भारत में ही विदेशी सहयोग से बनाए जाने हैं।

वायुसेना जल्द ही इस परियोजना को शुरू करने के लिए रक्षा खरीद परिषद (DAC) से प्रारंभिक मंजूरी (AoN) माँगेगी, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह मंजूरी अगले एक-दो महीनों में मिल सकती है।

हालाँकि सवाल ये है कि ये माँग आखिर उठ क्यों रही है? भारतीय वायुसेना को किस चीज की कमी है? इस माँग को पूरा करने में कितना खर्च आएगा? और वायुसेना के सामने किस तरह की चुनौतियाँ हैं, आईए… आसान तरीके से समझते हैं।

राफेल से जुड़ा क्या है ये पूरा मामला

बीते कुछ सालों से भारतीय वायुसेना की ताकत कम हो रही है। अभी वायुसेना के पास 31 फाइटर स्क्वाड्रन (16-18 विमानों की टुकड़ी) हैं, जो अगले महीने पुराने मिग-21 विमानों के रिटायर होने के बाद 29 तक सिमट जाएँगे। यह अब तक का सबसे निचला स्तर होगा।

वायुसेना को 42.5 स्क्वाड्रन की जरूरत है, ताकि वह पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों से एक साथ होने वाली चुनौतियों का सामना कर सके। इस कमी को पूरा करने के लिए वायुसेना चाहती है कि फ्रांस से और राफेल विमान खरीदे जाएँ, जो 4.5वीं पीढ़ी के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं।

यह माँग हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर (7-10 मई 2025) के बाद और तेज हो गई है। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इन हमलों में राफेल विमानों ने लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिससे उनकी ताकत और उपयोगिता साबित हुई। लेकिन इस ऑपरेशन ने यह भी दिखाया कि अगर भारत को भविष्य में ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, तो उसके पास पर्याप्त आधुनिक विमान नहीं हैं।

वायुसेना को क्यों है इतने सारे राफेल की जरूरत

भारत के सामने दो बड़े खतरे हैं: पाकिस्तान और चीन। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने चीनी मूल के J-10 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया, जो PL-15 मिसाइलों से लैस थे। ये मिसाइलें 200 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तक मार कर सकती हैं। इसके अलावा खबर है कि चीन जल्द ही पाकिस्तान को 40 J-35A स्टील्थ फाइटर जेट्स देने वाला है, जो पाँचवीं पीढ़ी के अत्याधुनिक विमान हैं। दूसरी ओर भारत के पास अभी पाँचवीं पीढ़ी का कोई विमान नहीं है। राफेल जो 4.5वीं पीढ़ी का है, भारत का सबसे आधुनिक विमान है।

वायुसेना का कहना है कि अगर हमें पाकिस्तान और चीन की संयुक्त चुनौती का सामना करना है, तो हमें और राफेल विमानों की जरूरत है। ये विमान न केवल हवा में दुश्मन के विमानों से लड़ सकते हैं, बल्कि जमीन पर सटीक हमले भी कर सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर में राफेल ने SCALP क्रूज मिसाइलों और HAMMER प्रेसिजन-गाइडेड हथियारों का इस्तेमाल करके आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया था। यह दिखाता है कि राफेल भारत की रक्षा के लिए कितना जरूरी है।

भारतीय वायुसेना को किस बात की कमी?

भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी कमी है उसके फाइटर स्क्वाड्रनों की घटती संख्या। अभी 31 स्क्वाड्रन हैं, जो अगले महीने 29 हो जाएँगे। यह कमी तब और गंभीर हो जाती है, जब हम देखते हैं कि हमें 42.5 स्क्वाड्रनों की जरूरत है। पुराने मिग-21 विमान अब रिटायर हो रहे हैं, और नए विमानों की खरीद में देरी हो रही है। MRFA प्रोजेक्ट, जिसके तहत 114 नए विमान खरीदे जाने हैं, वो पिछले 7-8 सालों से अटका हुआ है। इसका शुरुआती खर्च 1.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा अनुमानित था, और अब यह और बढ़ सकता है।

इसके अलावा भारत के पास अभी पाँचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट्स नहीं हैं, जबकि पाकिस्तान को चीन से ऐसे विमान मिलने वाले हैं। भारत का अपना AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) 2035 तक तैयार होगा, लेकिन तब तक हमें रूसी सुखोई-57 या अमेरिकी F-35 जैसे विमानों पर विचार करना पड़ सकता है। हालाँकि, इनके लिए अभी कोई आधिकारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है।

सरकार को ये डिमांड कब तक पूरी करनी होगी?

वायुसेना चाहती है कि MRFA प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द शुरू किया जाए। इसके लिए पहला कदम, यानी AoN, अगले एक-दो महीनों में DAC से माँगा जाएगा। अगर मंजूरी मिल जाती है, तो फ्रांस के साथ सरकारी स्तर पर डील जल्द हो सकती है। वायुसेना का कहना है कि सरकारी डील से प्रक्रिया तेज होगी, क्योंकि वैश्विक टेंडर में समय लगता है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो अगले कुछ सालों में नए राफेल भारत में आ सकते हैं। नौसेना को भी 2028-2030 तक 26 राफेल-मरीन विमान मिलने वाले हैं, जो INS विक्रांत विमानवाहक पोत से ऑपरेट करेंगे।

भारत सरकार के सामने क्या है चुनौती

सबसे बड़ी चुनौती है पैसा और समय। MRFA प्रोजेक्ट का अनुमानित खर्च 1.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, और इतनी बड़ी रकम जुटाना आसान नहीं है। इसके अलावा भारत चाहता है कि ज्यादातर विमान देश में ही बनें, ताकि ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिले। लेकिन इसके लिए विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी साझेदारी और स्थानीय उत्पादन की व्यवस्था करनी होगी, जो समय लेने वाली प्रक्रिया है।

दूसरी चुनौती है पड़ोसियों की बढ़ती ताकत। पाकिस्तान के पास पहले से ही चीनी J-10 विमान हैं, और जल्द ही J-35A जैसे स्टील्थ जेट्स भी आ जाएँगे। चीन की वायुसेना भी तेजी से आधुनिक हो रही है। ऐसे में भारत को अपनी रक्षा तैयारियों को तेज करना होगा। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दावा किया कि उसने पाकिस्तान के 5 फाइटर जेट्स और एक बड़े विमान को मार गिराया।

इस प्रोजेक्ट पर कितना खर्च आएगा?

MRFA प्रोजेक्ट का शुरुआती अनुमान 1.2 लाख करोड़ रुपए था, लेकिन अब यह रकम और बढ़ सकती है। पहले से ही भारत ने 36 राफेल विमानों के लिए 2016 में 59,000 करोड़ रुपए की डील की थी। इसके अलावा नौसेना के लिए 26 राफेल-मरीन विमानों की डील 63,887 करोड़ रुपए (लगभग 7 बिलियन यूरो) में हुई है। नए विमानों की खरीद में भी इतना ही या इससे ज्यादा खर्च हो सकता है। हालाँकि अगर विमान भारत में बनते हैं, तो लागत कुछ कम हो सकती है और स्थानीय उद्योग को फायदा होगा।

राफेल ही क्यों?

वायुसेना का कहना है कि और राफेल खरीदना ज्यादा फायदेमंद है। पहला – भारत के पास पहले से 36 राफेल हैं, जो अंबाला और हासिमारा एयरबेस पर तैनात हैं। इन बेस पर और स्क्वाड्रन रखने की जगह और बुनियादी ढांचा पहले से तैयार है। दूसरा – अगर नौसेना और वायुसेना दोनों राफेल का इस्तेमाल करें, तो रखरखाव और उपकरणों में समानता रहेगी, जिससे लागत और समय बचेगा। तीसरा – सरकारी डील से प्रक्रिया तेज होगी, जबकि वैश्विक टेंडर में सालों लग सकते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को यह एहसास दिलाया कि आधुनिक युद्ध में मजबूत वायुसेना कितनी जरूरी है। राफेल विमानों ने इस ऑपरेशन में अपनी ताकत दिखाई, लेकिन स्क्वाड्रनों की कमी और पड़ोसियों की बढ़ती ताकत भारत के लिए चिंता का सबब है। MRFA प्रोजेक्ट के जरिए और राफेल खरीदने की माँग इस दिशा में एक बड़ा कदम है। लेकिन इसके लिए पैसा, समय और सही रणनीति की जरूरत है। अगर भारत इस दिशा में तेजी से कदम उठाता है, तो वह अपनी रक्षा को और मजबूत कर सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप की गोद में बैठ असीम मुनीर ने भारत को दी ‘न्यूक्लियर हमले’ की गीदड़भभकी, कहा- आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएँगे: सिंधु पर बाँध बना तो 10 मिसाइल मारेंगे

भूखे-प्यासे पाकिस्तान में जनता रोटी को तरस रही और हुक्मरान परमाणु बम का ख्वाब देख रहे हैं। कुछ दिनों पहले भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान बीच बचाव के लिए अमेरिका से भीख माँग रहा था। अब पाकिस्तान का फौजी चीफ असीम मुनीर डोनाल्ड ट्रंप की गोद में बैठकर भारत को गीदड़भभकी दे रहा है। वो भी न्यूक्लियर हमले की।

मुनीर ने क्या कहा?

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी दौरे पर पहुँचे मुनीर ने एक डिनर पार्टी में गीदड़भभकी देते हुए कहा कि भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान के अस्तित्व को खतरा हुआ तो वो इस क्षेत्र को परमाणु युद्ध में झोंक देगा। मुनीर ने कहा, “हम एक परमाणु राष्ट्र हैं, अगर हमें लगता है कि हम डूब रहे हैं, तो हम आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएँगे।” माना जा रहा है कि यह अमेरिकी धरती से किसी तीसरे देश को पहली परमाणु धमकी है।

पाकिस्तान द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया है। मुनीर ने इस पर भी जहर उगला है। मुनीर ने इस फैसले से 25 करोड़ लोगों को भुखमरी का खतरा बताया है। मुनीर ने कहा, “हम भारत के बांध बनाने का इंतजार करेंगे और जब वह ऐसा करेगा, तो हम उसे 10 मिसाइलों से तबाह कर देंगे।” मुनीर ने कहा, “सिंधु नदी भारत की पारिवारिक संपत्ति नहीं है। हमें मिसाइलों की कमी नहीं है, अल्हम्दुलिल्लाह।”

मुनीर ने खुद ही कर दी पाकिस्तान की बेइज्जती

मदरसे में पढ़े और कट्टर इस्लामिक विचारधारा को मानने वाले मुनीर ने खुद ही पाकिस्तान की बेइज्जती भी कर दी है। पाकिस्तान की भूखी-नंगी हालात को मुनीर से बेहतर कौन जानता होगा। उसके उदाहरण भी वैसे ही है।

मुनीर ने कहा, “भारत एक चमचमाती हुई मर्सिडीज़ है जो फेरारी की तरह हाईवे पर आ रही है। हम बजरी से भरा एक डंप ट्रक हैं। अगर ट्रक कार से टकरा जाए, तो नुकसान किसका होगा?”

पाकिस्तान खुद को सड़क छाप, टक्कर मारने वाले गुंडे से ज्यादा क्या ही समझेगा। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान का ‘डंप ट्रक’ अब बिना पेट्रोल, बिना ड्राइवर और बिना ब्रेक के खाई में गिर चुका है। मुनीर ये मत भूलना कि भारत की मर्सिडीज दौड़ती रहेगी और पाकिस्तान का ट्रक कबाड़ में ही बिकेगा।

यह बात भी साफ है कि भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ब्लैकमेल को ना सुनने का भी मन बना लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पष्ट कर चुके हैं कि अब कोई न्यूक्लियर धमकी नहीं सुनी जाएगी।

मुनीर ने अपने दौरे के दौरान अमेरिकी राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ पाकिस्तानी प्रवासी समुदाय से भी मुलाकात की। इस दौरान मुनीर ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के निवर्तमान कमांडर जनरल माइकल कुरीला के सेवानिवृत्ति समारोह और एडमिरल ब्रैड कूपर के कार्यभार ग्रहण समारोह में भी हिस्सा लिया है।