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बिहार SIR पर राहुल गाँधी का एक और प्रोपेगेंडा हुआ ध्वस्त: जिस अमन ने की थी ‘गरीबों’ के नाम हटाने की शिकायत, उसने वीडियो जारी कर माँग ली माफी

अपनी वोट अधिकार यात्रा के जरिए राहुल गाँधी मतदाता सूची में गड़बड़ी होने की बात उठाना चाह रहे थे, जो असल में हुई नहीं। राहुल गाँधी ने इस मुद्दे को 'वोट चोरी' की साजिश बताया था और दावा किया था कि देशभर में गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और राजद नेता तेजस्वी यादव ने जोर शोर से बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाली, SIR पर जमकर लोगों को भड़काया। अनर्गल बातें फैलाईं। अब उनके एक-एक झूठ की कलई खुल करल सामने आती जा रही है।

ताजा मामला एक वायरल वीडियो का है। वीडियो में रफीगंज निवासी अमन कुमार से नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव ने पूछा कि वह SIR के बारे में क्या जानते हैं। इस पर अमन ने कहा कि इसका मतलब है कि गरीबों का नाम वोटर्स लिस्ट से हटा दिया जाएगा।

असल में उसकी शिकायत थी कि उसके पिता रजाक का नाम लिस्ट से हटा दिया गया। अमन ने तो राहुल गाँधी के सामने ये तक कह दिया कि आग चलकर गरीबों से मतदान करने का अधिकार छीन लिया जाएगा।

अमन के बयान के बाद राहुल गाँधी ये कहा, “बिल्कुल, यही हो रहा है।”

खुल गई पोल

वीडियो वायरल हुआ तो स्थानीय प्रशासन और चुनाव आयोग ने अमन की शिकायत की जाँच की। इसमें पता चला कि रजाक के साथ अमन का भी का नाम वास्तव में वोटर लिस्ट में मौजूद था। प्रशासन ने अमन से इस पर सवाल पूछे तो उसने कहा कि लिस्ट उसने चेक ही नहीं की थी।

इसके बाद अमन कुमार ने वीडियो बनाकर ही सार्वजनिक रूप से माफी माँगी और कहा कि उसे गलत जानकारी मिली थी।

अमन ही नहीं, राहुल ने अलग अलग क्षेत्रों से कई लोगों से ये कहलवाया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से गायब है। नहाटा के चकला गाँव की एक महिला को भी ये कहकर वोट अधिकार यात्रा में शामिल किया गया कि उसके घरवालों के नाम सूची में नहीं हैं। उसे वह राहुल गाँधी से मिल कर जुड़वा सकती हैं। बाद में पता चला कि उसके घरल के सभी लोगों का नाम लिस्ट में शामिल है।

प्रशासन के पूछे जाने पर महिला ने बताया कि उसे जबरन बुलाया गया था। उसे सही जानकारी नहीं थी।

जबरन मुद्दा बनाने की कोशिश

असल में राहुल गाँधी इस यात्रा के जरिए मतदाता सूची में गड़बड़ी होने की बात उठाना चाह रहे थे, जो असल में हुई नहीं। राहुल गाँधी ने इस मुद्दे को ‘वोट चोरी’ की साजिश बताया था और दावा किया था कि देशभर में गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं।

चुनाव आयोग ने भी इस पूरे मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और स्पष्ट रूप से कहा कि SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया का उद्देश्य मृत या फर्जी नामों को हटाना है, न कि गरीबों या अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना। सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग की प्रक्रिया को सही ठहराया और कहा कि आधार कार्ड को वोटर सत्यापन के लिए अनिवार्य नहीं माना गया है।

चुनाव आयोग ने कहा ता कि वोटर लिस्ट से 65 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं। इन्हीं 65 लाख कटे नामों के सहारे राहुल गाँधी राजनीतिक संजीवनी खोजने की कोशिश कर रहे थे। हालाँकि उनका असर लोगों पर नहीं दिख पा रहा है क्योंकि लगभग सभी लोगों के नाम वोटर लिस्ट में मौजूद हैं।

इसके बाद कॉन्ग्रेस नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग ने भाजपा के साथ मिलीभगत करके, लाखों फर्जी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए हैं। इश पर भी चुनाव आय़ोग ने उनके एक एक आरोपों का तथ्य सहित जवाब पेश कर दिया।

नाम हटाने को लेकर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने पटना से दिल्ली तक एसआईआर के खिलाफ बवाल खड़ा करने की कोशिश की। गले फाड़-फाड़ कर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन आयोग के बार बार पूछे जाने के बावजूद ये नहीं बता पा रहे कि उन्हें आखिर आपत्ति किस बात पर है?

सासाराम में भी यात्रा के दौरान उन्होंने वोट चोरी और मतदाता के हक की बात दोहराते रहे लेकिन यहाँ पर भी लोगों ने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया। ऐसे में झूठी शिकायतों के सहारे वे लोगों का बरगलाने का प्रयास तो कर सकते हैं पर सफल नहीं हो सकते।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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