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वोटिंग लिस्ट में हेर-फेर करने वाले 4 कर्मचारियों को बचा नहीं पाई ममता सरकार, EC के आदेश के बाद आखिरकार करना पड़ा सस्पेंड: फर्जी तरीके से जोड़े गए थे मतदाता

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में फर्जी मतदाता आवेदन पंजीकृत करने के आरोप में 4 चुनाव अधिकारियों को निलंबित कर एक डेटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था।

ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार (20 अगस्त 2025) को वोटर आईडी कार्ड के रजिस्ट्रेशन में गड़बड़ी के आरोप में 4 अधिकारियों को निलंबित कर दिया। इससे पहले चुनाव आयोग (ECI) ने इन दागी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बीते 13 अगस्त को राज्य सरकार को 7 दिनों की समय सीमा दी थी।

‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य सचिव मनोज पंत ने चुनाव आयोग को इस संबंध में रिपोर्ट भेज दी है। हालाँकि, अब तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई है लेकिन अधिकारियों ने विभागीय कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है। चुनाव आयोग ने इन अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के भी निर्देश दिए थे।

गौर करने वाली बात यह है कि मनोज पंत ने इससे पहले इन दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को रोकने की कोशिश थी। उनका तर्क था कि ऐसी कार्रवाई न केवल दोषी व्यक्तियों पर बल्कि चुनावी जिम्मेदारियों और अन्य प्रशासनिक कामकाज में लगे अधिकारियों की पूरी टीम के मनोबल पर भी असर डाल सकती है।

फर्जी मतदाता मामले में कार्रवाई का आदेश

इस महीने की शुरुआत में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में चार चुनाव अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। इन पर आरोप था कि उन्होंने अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर फर्जी मतदाता आवेदनों को पंजीकृत करने की अनुमति दी।

पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के अपडेट के लिए फॉर्म-6 की सैंपल जाँच के दौरान यह गड़बड़ी सामने आई। जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई उनमें दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) देबोत्तम दत्ता चौधरी और बिप्लब सरकार और दो सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) तथागत मंडल और सुदीप्त दास शामिल हैं। इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था।

इसके अलावा, चुनाव आयोग ने अस्थाई डेटा एंट्री ऑपरेटर सुरोजित हलधर के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। आयोग ने कहा कि इन अधिकारियों की हरकतें आपराधिक कदाचार के बराबर हैं।

ECI ने बिना देरी किए इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए और प्राथमिकी दर्ज करने को भी कहा। साथ ही, राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि फर्जी मतदाताओं को सूची में जोड़ने के मामले में दोषी अधिकारियों पर 7 दिन के भीतर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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