Home Blog Page 4567

16 साल की लड़की से गैंगरेप: मदद के नाम पर 30 लोगों ने लाइन में लगकर किया बलात्कार, Video वायरल

इजरायल से इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहॉं के इलट (Eilat) शहर स्थित एक होटल में 30 लोगों ने लाइन लगाकर एक 16 साल की लड़की का रेप किया और वीडियो बना ली।

आरोपित एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे और लड़की की मदद के बहाने उसके साथ रेप किया। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया है।

पुलिस ने इस मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इन्होंने पूछताछ में माना है कि लड़की के साथ कई लोगों ने रेप किया। पुलिस ने यह भी कहा है कि लड़की होटल में गेस्‍ट नहीं थी, बल्कि वह अपने दोस्‍तों के साथ शराब पीने के बाद बाथरूम गई थी।

इसके बाद लड़की को कुछ लोग होटल के कमरे में ले गए और गैंगरेप किया। ये आरोपित भी एक-दूसरे को नहीं जानते थे। एक संदिग्‍ध ने बताया कि आरोपितों ने लड़की के कमरे के बाहर लाइन लगाई और एक के बाद एक कमरे में जाकर उसके साथ बलात्‍कार करते रहे।

संदिग्ध ने बताया कि बलात्‍कारी मेडिकल सहायता देने के नाम पर लड़की के कमरे में घुसे थे। इस दौरान लड़की के नशे में होने का फायदा उठाकर उसके साथ बलात्‍कार किया। जाँचकर्ता लड़की के मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। वहीं मामला प्रकाश में आने में पूरे देश में गुस्सा है। लोग सड़कों पर उतर कर लड़की के लिए इंसाफ माँग रहे हैं।

इस पूरी घटना से बेहद दुखी इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सब बेहद हैरान करने वाला है। यह केवल लड़की के खिलाफ अपराध नहीं है, यह खुद मानवता के खिलाफ अपराध है। इसकी पुरजोर निंदा होनी चाहिए और जो लोग इसके लिए जिम्‍मेदार हैं उनके खिलाफ सख्‍त कार्रवाई होनी चाहिए।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि पुलिस ने इस मामले में जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया है, उनका कहना है कि लड़की इस महीने की शुरुआत में एक दोस्त के साथ इलट आई, जहाँ उसने अपने दोस्तों के परिचितों से मुलाकात की और उन सबने शराब पी। शराब पीने के बाद वह होटल में वॉशरूम इस्तेमाल करने गई। जहाँ कुछ लोगों ने उसका रेप किया।

इस बीच किशोरी के दोस्त ने उसकी मदद करनी चाही, लेकिन वह उन पुरुषों को रोकने में सक्षम नहीं था। यहाँ बता दें कि हिरासत में लिए गए दो संदिग्धों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि ये इजरायल के निवासी हैं और इनकी उम्र 20 के आसपास है।

गौरतलब है कि पिछले साल भी इजरायल से एक गैंगरेप केस का मामला सामने आया था। तब एक 19 साल की ब्रिटिश महिला ने 12 इजरायल युवकों पर रेप का आरोप लगाया था।। हालाँकि, बाद में उसे झूठ बोलने का आरोपित बना दिया और 4 महीने की सजा सुनाई गई। फिर, महिला अधिकारों की माँग करने वाले समूह ने इस केस को दोबारा खोला और वकील ने कहा कि महिला अपनी सजा के ख़िलाफ़ अपील करेगी।

बेंगलुरु दंगों पर येदियुरप्पा ने दिया डीके शिवकुमार को दो टूक जवाब, कहा- एक ईमानदार जाँच से कॉन्ग्रेस को डर कैसा

एक दिन पहले कॉन्ग्रेस कमेटी के मुखिया डीके शिवकुमार ने भारतीय जनता पार्टी पर बेंगलुरु दंगे की जाँच प्रभावित करने का आरोप लगाया था। इस पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा विरोधी दलों को तब तक कोई आरोप नहीं लगाना चाहिए जब तक जाँच की रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती है।    

मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने इस मुद्दे पर आधिकारिक तौर पर बयान जारी करते हुए कहा, “बेंगलुरु दंगों की जाँच अभी चल रही है। बहुत जल्द सच सामने आएगा इसलिए कॉन्ग्रेस को इस मुद्दे पर आरोप नहीं लगाने चाहिए। न ही इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना चाहिए।”

इसके पहले कर्नाटक सरकार में स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री के सुधाकर ने भी डीके शिवकुमार के बयान पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि डीके शिवकुमार ईमानदार तरीक़े से हो रही जाँच से क्यों डर रहे हैं।    

के सुधाकर ने कहा, “KPCC (कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी) के अध्यक्ष ने सार्वजनिक रूप से बेंगलुरु के मंडलायुक्त कमल पंत पर आरोप लगाया है। जबकि वह दंगों के इन मामले की निष्पक्ष रूप से जाँच कर रहे हैं। लोग उन्हें भाजपा का एजेंट कह रहे हैं। डीके शिवकुमार आखिर इस जाँच से क्यों डर रहे हैं? यह कोशिश किसे बचाने के लिए की जा रही है?”

बीते दिन (20 अगस्त 2020) मीडिया वार्ता करते हुए डीके शिवकुमार ने भाजपा पर कई आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था पुलिस अपनी जाँच में कॉन्ग्रेस नेताओं को निशाना बना रही है।    

इसके अलावा डीके शिवकुमार ने अपने बयान में कहा था, “मैं पुलिसकर्मियों से निवेदन करना चाहता हूँ। खासकर मंडलायुक्त, जिनके लिए यह चेतावनी है। मैं इस बात पर चर्चा नहीं करना चाहता हूँ कि क्यों हाल ही में हिंसा की घटना हुई। लेकिन आप सभी (पुलिस अधिकारी) भाजपा के मंत्रियों से प्रभावित होकर जाँच कर रहे हैं। मिस्टर कमीश्नर हम आपको ऐसा नहीं करने देंगे। हम भले भाजपा का विरोध करें या नहीं लेकिन पुलिस वालों का विरोध ज़रूर होगा। कॉन्ग्रेस का कोई भी नेता हिंसा के लिए ज़िम्मेदार नहीं है यह पूरी तरह पुलिस की नाकामी है। पुलिस घटना को नियंत्रित नहीं कर पाई और हम इस घटना की निंदा करते हैं।” 

बेंगलुरु दंगे के सिलसिले में अब तक 61 लोगों के खिलाफ गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। सिटी पुलिस कमिश्नर के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी दी गई है।

पंत ने बताया कि मामले की जॉंच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर यह आगे बढ़ रही है। इसी आधार पर आरोपितों की गिरफ्तारी की जा रही है। जो आरोपित पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, उन्हें भी जल्द पकड़ लिया जाएगा। कर्नाटक की राजधानी में 11 अगस्त की रात हिंसा और आगजनी हुई थी। राज्य के गृहमंत्री बसवराज बोम्मई ने पिछले दिनों दंगों के पीछे संप्रदाय विशेष के कट्टरपंथी लोगों का हाथ होने की बात बताई थी। उन्होंने इसे बड़ी साजिश का हिस्सा बताते हुए जॉंच के आदेश दिए थे।

कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन द्वारा सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के कथित अपमानजनक पोस्ट को लेकर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए दंगों में उग्र भीड़ द्वारा ‘पुलिसकर्मियों को मार डालो, उन्हें मत छोड़ो, उन्हें खत्म करो’ के नारे भी लगाए गए। नवीन को भी फिलहाल गिरफ्तार किया गया है। विधायक के आवास और डीजे हाली के एक थाने में संप्रदाय विशेष के उपद्रवियों ने उत्पात मचाया, जिन्होंने कई पुलिस और निजी वाहनों को भी आग लगा दी और लूटपाट भी मचाई थी। 

मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की शाम कॉन्ग्रेस विधायक अखंडा श्रीनिवास मूर्थी के आवास पर संप्रदाय विशेष के हज़ारों लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। कुछ ही देर में भीड़ ने पूरे घर को तबाह कर दिया। इसके बाद डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने पर भी जम कर तोड़ फोड़ की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल 3 लोगों की जान गई थी और 6 लोग घायल हुए थे। दंगे की घटनाओं में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए थे जिसमें से 15 नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती हुए थे।  

103 बुद्धिजीवियों ने लिखा CJI को पत्र, प्रशांत भूषण मामले में दबाव बनाने वाले समूहों की भूमिका पर उठाए सवाल

देश की सबसे बड़ी अदालत ने प्रशांत भूषण अवमानना के मामले में दोषी करार दिया था। इस मामले पर ‘Campaign for Judicial Accountability and Reforms (CJAR)’ ने टिप्पणी की थी। टिप्पणी में CJAR ने सर्वोच्च न्यायालय को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की बात कही गई थी। 103 बुद्धिजीवियों ने इस टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है और CJAR के इस नज़रिए पर असहमति जताई है। इन 103 लोगों में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, पूर्व आईएएस-आईपीएस अधिकारी और सेना के पूर्व अधिकारी भी शामिल हैं।     

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि प्रशांत भूषण के आरोप व्यक्तिगत नहीं, बल्कि देश की एक अहम संस्था पर थे। इस निर्णय पर टिप्पणी करते हुए CJAR ने प्रशांत भूषण का समर्थन किया था। इसके अलावा उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले की आलोचना भी की थी। 15 अगस्त को CJAR की तरफ से जारी किए बयान की आलोचना करने वाले बुद्धिजीवी समूह में भी कई दिग्गज नाम शामिल थे।    

इसमें मुंबई उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केआर व्यास, पूर्व विदेश सचिव अमर सिन्हा, पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव सर्वेश कौशल और अन्य शामिल थे। इस 103 लोगों के समूह ने कहा, CJAR के दावे से ऐसा लग रहा है जैसे वह सिविल सोसायटी के इकलौते प्रतिनिधि हैं। उनके अलावा दूसरे किसी को संविधान और लोकतंत्र की चिंता ही नहीं है। इसके अलावा 103 लोगों के समूह ने कहा ऐसा करने के पीछे राजनीतिक एजेंडे के अलावा कोई और वजह नहीं है।    

प्रशांत भूषण के मामले को सिर्फ एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे सिर्फ और सिर्फ संसद, चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय जैसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुँचती है।    

103 लोगों के समूह द्वारा लिखी गई चिट्ठी (साभार – टाइम्स ऑफ़ इंडिया)

समूह ने लिखा है यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है जब CJAR ने इस तरह के भड़काऊ और छवि धूमिल करने वाली बातें कही हैं। CJAR कुछ लोगों को छोड़ कर (जैसे अरुं​धति रॉय) प्रशांत भूषण को अपना अहम हिस्सा मानता है। इसका साफ़ मतलब है कि वह एक एजेंडे पर काम कर रहे हैं और अपना पक्ष न्यायिक ढाँचे में रख कर पेश कर रहे हैं। इसके अलावा समूह ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था का हिस्सा होने पर कई संवैधानिक और नैतिक ज़िम्मेदारियाँ भी होती हैं। ऐसे में इस पेशे से जुड़े किसी भी तरह के सिद्धांतों की अनदेखी करना दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है।  

इसके बाद समूह ने मोरिस वर्सेज़ क्राउन केस का उल्लेख किया। इसके अलावा अपने बात कहने के लिए लार्ड डेनिंग्स के कथन,’न्याय के क्रम किसी भी तरह का दखल या रुकावट नहीं होनी चाहिए। जो इन प्रक्रियाओं पर हमला करते हैं वह एक तरह से समाज की नींव पर हमला कर रहे हैं’ का ज़िक्र किया है। अंत में समूह ने लिखा है, “CJAR और अन्य संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की आलोचना करते हुए टिप्पणी की है। यह सरासर गलत और निराशाजनक है। हम इस तरह की दिखावटी जागरूकता का पूरी तरह विरोध करते हैं।”   

103 लोगों के समूह द्वारा लिखी गई चिट्ठी का दूसरा पन्न (साभार – टाइम्स ऑफ़ इंडिया )

इसके पहले 700 अधिवक्ताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने ऐसे हमलों की श्रृंखला देखी है जो संस्थाओं को हानि पहुँचाने के उद्देश्य से किए जाते हैं। ऐसे हमले ज़्यादातर न्यायाधीशों के विरोध में किए जाते हैं। इस तरह के हमले करने वाले खुद से एक लकीर खींच लेते हैं और जो उस लकीर से सहमत नहीं होता उन्हें हमले झेलने पड़ते हैं। यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब किसी अधिवक्ता के राजनीतिक हित तय नहीं हो पाते हैं, तब वह निचले दर्जे की टिप्पणी करते हैं।    

इसके बाद पत्र में लिखा था कि देश की सबसे बड़ी अदालत और न्यायाधीशों पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल, द्वेषपूर्ण हमले और बेबुनियादी आरोप नहीं किए जाने चाहिए। न्यायपालिका को अपने कर्तव्य निभाने होते हैं, दायित्वों का पूरा करना होता है। ऐसे में यह भी उतना ही ज़रूरी है कि अदालतों के सम्मान का भी उतना ही ख़याल रखा जाए। इस तरह के बयान “सर्वोच्च न्यायालय संविधान की ह्त्या कर रहा है।” लोगों में न्यायपालिका की छवि खराब करते हैं और भरोसा भी कम करते हैं।      

केजरीवाल की AAP को शेल कम्पनी के जरिए ₹2 करोड़ ‘चंदे’ के नाम पर ट्रासंफर करने वाले 2 व्यापारी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक शेल कंपनी के माध्यम से अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) को ₹2 करोड़ ‘दान’ करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स द्वारा यह जानकारी शुक्रवार (अगस्त 21, 2020) को जारी की गई है। दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दो में से एक की पहचान दिल्ली के व्यवसायी मुकेश कुमार के रूप में की गई है। दूसरे की पहचान सुधांशु बंसल के रूप में की गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आम आदमी पार्टी (AAP) को 4 फर्जी कंपनियों के जरिए चंदा देने का मामला फ़रवरी 2014 का है, जब ROC (रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज) ने 4 फ़र्ज़ी कंपनियों के जरिए आम आदमी पार्टी में ₹2 करोड़ आने की शिकायत पुलिस को दी थी। ये पैसा देहरादून की एक कंपनी ने शैल कंपनियों के जरिए दिया था।

गौरतलब है कि कल यानी, बृहस्पतिवार (अगस्त 20) को ही आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

मार्च 31, 2014 को डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP को कथित रूप से चंदा देने के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया गया है। मुकेश शर्मा दिल्ली में स्थित एक प्रॉपर्टी डीलर और तंबाकू व्यापारी हैं।

ध्यान देने की बात है कि जब तत्कालीन दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा को बर्खास्त कर दिया गया था, तभी कपिल मिश्रा ने एक आरोप लगाया था कि एक शेल कंपनी द्वारा AAP को पैसे का भुगतान किया गया था। कपिल मिश्रा, जो कि अब भाजपा नेता हैं, ने AAP की फंडिंग में ‘भारी अनियमितता’ का भी आरोप लगाया था और ₹2 करोड़ के संदिग्ध ‘दान’ के बारे में सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि कई शेल कंपनियों ने AAP को पैसे दिए थे और पार्टी को इसका पता था।

शेल कॉर्पोरेशन एक ऐसा संगठन होता है, जो बिना सक्रिय व्यवसाय या महत्वपूर्ण संपत्ति के होते हैं। इस प्रकार के कॉर्पोरेशन आवश्यक रूप से अवैध नहीं होते, लेकिन उन्हें कभी-कभी अवैध रूप से इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि कानून या जनता की नजरों से बचने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है।

शालिनी यादव से बनी फिजा फातिमा: फैसल संग किया निकाह, भाई ने बताया लव जिहाद का मामला, किए कई चौंकाने वाले खुलासे

उत्तरप्रदेश के कानपुर में इस्लाम धर्म कबूल कर शादी करने का मामला सामने आया है। पिछले 2 महीने से गायब शालिनी यादव का पता चल चुका है। लेकिन अब उसका नाम, धर्म और मैरिटल स्टेटस बदल चुका है। शालिनी यादव ने एक वीडियो जारी कर बताया कि उसका नाम अब फिजा फातिमा हो चुका है। और उसने फैसल नाम के एक शख्स से शादी कर ली है।

शालिनी के परिजनों ने पुलिस को मोहम्मद फैसल के ​खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए गाजियाबाद जाने की तैयारी में जुट गई है।

बता दें कानपुर के बर्रा 6 की रहने वाली 22 वर्षीय शालिनी यादव 29 जून से ही लापता थी। उसने अपने घरवालों से परीक्षा देने का बहाना बनाया और लखनऊ चली गई। फिर उसी दिन से वह घर नहीं लौटी। परिजनों ने उसे खोजने की खूब कोशिश की लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। परिवार ने गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।

जिसके बाद 8 अगस्त को शालिनी यादव ने खुद फेसबुक पर एक वीडियो अपलोड करके अपने घरवालों को अपनी शादी की कहानी सुनाई। शालिनी यादव इस वीडियो में अपने परिवार वालों को चकमा देकर भागने और फिर धर्म बदलकर शादी करने की बात कहती हुई दिखाई दे रही है। शालिनी ने कहा, उसने लाल कालोनी के रहने वाले मोहम्मद फैजल से शादी कर ली है और इस्लाम धर्म कबूल करके अपना नाम शालिनी यादव से फिजा फातिमा (Fiza Fatima) कर लिया है।

वहीं शालिनी के भाई ने आरोप लगाते हुए इस पूरे मामले को लव जिहाद बताया है। भाई ने कहा कि वह घर से 10 लाख रुपए लेकर निकली थी। फैसल ने उसे बहला-फुसलाकर प्रेमजाल में फँसाया है। भाई ने कहा कि इसके पीछे लव जिहाद गैंग का हाथ है। बहन के प्रति अपनी चिंता को जाहिर करते हुए उसने शहर में चल रहे लव जिहाद का खुलासा करते हुए कहा कि लव जिहाद का गैंग हिंदू लड़कियों को निशाना बना कर उन्हें अपने झाँसे में लेता है। फिर उनसे इस्लाम कबूल कराता है। अब तक इस गैंग ने 5 लड़कियों को अपना शिकार बनाकर उन्हें इस्लाम कबूल करवा चुका है। अगर इस पर लगाम नहीं लगाया गया तो कई हिंदू बहन-बेटियों की जिंदगी बर्बाद कर देगा।

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया एडवाइजर शलभ मणि त्रिपाठी ने भी अपने ट्विटर हैंडल से शालिनी की वीडियो को शेयर किया है। शलभ मणि त्रिपाठी ने इसे लव जेहाद का नाम देते हुए कुछ सवाल उठाए हैं।

उन्होंने ट्वीट में लिखा, “परीक्षा देने के बहाने निकली कानपुर की शालिनी यादव ने पहले धर्म बदला, फिर फैजल से निकाह कर लिया। सवाल ये है कि धर्म बदलने की क्या जरूरत? धर्म शालिनी यादव ने ही क्यों बदला? फ़ैजल ने क्यों नहीं? तभी तो कहते हैं, ये लव नहीं, ये है लव जेहाद।” यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वहीं अपर पुलिस अधीक्षक बाबूपुरवा आलोक सिंह ने बताया कि परिजनों की तहरीर पर थाना किदवई नगर में आरोपित युवक फैसल के खिलाफ धारा 364, 360, 120-B और 511 में मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि परिजनों का आरोप है कि शालिनी यादव का अपहरण कर लिया गया है। इस संदर्भ में एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें लड़की खुद को शालिनी यादव बताकर शादी और धर्म परिवर्तन करने की बात कह रही है। इस पूरे मामले की जाँच की जा रही है।

बता दें, सीओ आलोक सिंह ने बताया कि इससे पहले एक बार गाजियाबाद पुलिस टीम गई थी, इसमें शालिनी ने बयान दिया था कि वह बालिग है और उसने अपनी इच्छा से शादी की है। वायरल वीडियो में भी शालिनी (फिज़ा फातिमा) अपने अपने परिवारवालों से जान का खतरा बताते हुए अपने पति फैज़ल और अपनी सुरक्षा की माँग की है।

अब चौथी सदी के चर्च को बना दिया मस्जिद: तुर्की मिटा रहा ईसाइयों की हर पहचान

हागिया सोफिया (Hagia Sophia) के बाद तुर्की सरकार ने अब इस्तांबुल के चोरा म्यूजियम (Chora museum) को मस्जिद में तब्दील करने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति का यह फरमान आज 21 अगस्त को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया गया।

हालिया फरमान के मुताबिक इस साइट को अब धार्मिक मामलों के निदेशालय को स्थांतरित कर दिया गया है और अब इसे एस्टैबिलशमेंट ऐंड ड्यूटीस ऑफ द प्रेसीडेंसी रिलीजियस अफेयर्स कानून के आर्टिकल 35 के अनुसार संप्रदाय विशेष के लोगों की नमाज के लिए खोला जाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, म्यूजियम को मस्जिद बनाने का निर्णय साल 2019 में ही ले लिया गया था। लेकिन तुर्की की स्टेट काउंसिल ने इसे कार्यान्वित नहीं किया था। पर, आज वहाँ की सरकार ने यह फरमान निकाल दिया कि चौथी सदी में बनी इस इमारत को मस्जिद बनाया जा रहा है।

चोरा म्यूजियम की पहचान इंटरनेट पर एक चर्च के तौर पर मिलती है। इसे चौथी सदी में बाइजेंटाइन शासकों ने बनवाया था। इस्तांबुल पर ओटोमेन्स ने 1453 पर कब्जा किया और इसे 1511 में मस्जिद बनाया। 434 वर्ष तक इसे मस्जिद माना गया। फिर 1945 में तुर्की सरकार ने इसे म्यूजियम बना दिया।

11 नवंबर, 2019 के अपने निर्णय में, राज्य की परिषद ने निष्कर्ष निकाला कि राष्ट्रीय शिक्षा मंत्रालय को संग्रहालय और संग्रहालय के गोदाम के रूप में उपयोग किए जाने के लिए भवन का आवंटन “कानून के विपरीत है।” वास्तविकता में तो 22 जून, 1965 के चोरा संग्रहालय प्रशासन के एस्टैबिलशमेंट ऐंड ड्यूटीस ऑफ द प्रेसीडेंसी रिलीजियस अफेयर्स कानून के आर्टिकल 35 के अनुसार, इसे नमाज अता करने के लिए खोलने का निर्णय लिया गया था।

गौरतलब है कि इससे पहले पिछले महीने हागिया सोफिया चर्च को तुर्की में मस्जिद में तब्दील करने का फैसला हुआ था। इसके बाद कैथलिक समाज के प्रमुख पोप ने इस फैसले पर अफसोस जताया था और यूनेस्को ने भी इसकी आलोचना की थी।

स्वयं तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन 10 जुलाई को इस्तांबुल में 1500 साल पुराने ऑर्थोडॉक्स क्रिश्चियन कैथेड्रल हागिया सोफिया को मस्जिद में बदलने की घोषणा की थी। उससे पहले तुर्की के एक अदालत ने यह निर्देश दिया था।

इसका इतिहास भी बाइजेंटाइन काल से जुड़ा है। जब इसे सम्राट जस्टिनियन I के आदेश से 537 में एक भव्य चर्च के रूप निर्मित किया गया था। इसे दुनिया का सबसे बड़ा चर्च माना जाता था। 1453 में ओटोमन शासन के दौरान इसे मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया। उससे पहले बाइजेंटाइनों ने इसे सदियों तक संभाला था।

सुल्तान मेहमेद II के कब्जा करने से पहले इस्तांबुल को कॉन्स्टेंटिनोपोल के नाम से जाना जाता था। उसने ही तब गिरजाघर के भीतर जुमे की नमाज शुरू की थी। इसके बाद चार मीनारों को मूल संरचना के साथ में जोड़ा गया था। इतना ही नहीं ईसाई मोज़ेक को इस्लामी चित्रकला के साथ ढक दिया गया था।

इसे 1453 में मॉडर्न तुर्की के संस्थापक केमल अतातुर्क द्वारा एक संग्रहालय का दर्जा दिया गया था। लेकिन, अब यहाँ के सभी चीजों को बदलने की तैयारी की जा रही है। हालाँकि, हागिया सोफिया लंबे समय से इस्लाम-ईसाई प्रतिद्वंद्विता का प्रतीक रही है।

लगभग 900 वर्षों तक, हागिया सोफिया को पूर्वी ईसाइयों के लिए का तीर्थस्थल माना जाता था। तीर्थ स्थल पर रखे गए कलाकृतियों में ईसा मसीह का मूल क्रॉस भी शामिल था। सदियों से, ईसाई तीर्थयात्री इन सभी वस्तुओं से आत्मिक शांति प्राप्त करते आ रहे हैं।

मुंबई ​पुलिस की पिटाई से मरा वेलु, बनाई मॉब लिंचिंग की कहानी; बॉम्बे HC के संज्ञान के बाद 4 कॉन्स्टेबल सस्पेंड

मार्च 25, 2020 से देशभर में कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन प्रभावी हो चुका था। इसके बाद एक घटना 29 मार्च को मुंबई स्थित जुहू में हुई थी। चार कॉन्स्टेबल- संतोष देसाई, दिगंबर चौहान, अंकुश पालवे और आनंद गायकवाड़ ने लॉकडाउन के नियम का उल्लंघन करने के आरोप में 22 वर्षीय राजू वेलु देवेन्द्र के साथ मारपीट की, जिसमें उसकी मौत हो गई।

हालाँकि, इस मामले के बॉम्बे हाईकोर्ट के पास जाने तक भी जुहू पुलिस के पास इस घटना की एक अलग ही कहानी थी। इसमें बताया गया कि राजू वेलु की मौत मॉब लिंचिंग के कारण हुई, ना कि पुलिस कस्टडी में पिटाई के कारण!

मार्च से शुरू हुए इस घटनाक्रम पर एक नजर –

मॉब लिंचिंग या पुलिस कस्टडी में पिटाई से मौत?

जुहू पुलिस द्वारा राजू वेलु की बर्बरता से पिटाई करने के बाद पुलिस ने कहा था कि राजू वेलु को स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया था और उसकी कथित मॉब लिंचिंग की। इसी आरोप में आठ लोगों के खिलाफ हत्या, महामारी के दौरान जमा होने और दंगा करने का मामला दर्ज कर लिया। लेकिन, राजू वेलु के रिश्तेदारों ने दावा किया कि उसे पुलिस ने ही पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद मृतक राजू वेलु के भाई ने हाईकोर्ट में एक PIL दायर की।

हालाँकि, मुंबई पुलिस ने राजू वेलू देवेन्द्र के परिवार से कहा कि उसे डकैती के प्रयास में भीड़ द्वारा मारा गया था, उसके भाई ने इस घटना के सीसीटीवी फुटेज तक पहुँचने की कोशिश की। वेलु की माँ सायरा देवेंद्र का कहना है कि वेलु के शरीर पर जो चोट के निशान थे और जैसा स्थानीय लोगों ने भी उन्हें बताया था, उसके कारण उनका संदेह पहले से ही था कि जुहू पुलिस झूठी कहानी तैयार कर उन्हें सुना रही है।

पुलिस कॉन्स्टेबल संतोष देसाई, दिगंबर चौहान, अंकुश पालवे और आनंद गायकवाड़, पर वेलु के परिवार को गुमराह करने का आरोप है। 31 मार्च को दर्ज शिकायत में, पुलिस ने राजू वेलु की मौत के लिए आठ अज्ञात लोगों को दोषी ठहराया था, और बाद में दावा किया कि 2 ने अपराध कबूल कर लिया है। उन्हें आठ दिनों की हिरासत के बाद रिहा भी कर दिया गया।

सायरा देवेन्द्र ने अपने चार बेटों को एक फूड स्टॉल पर काम कर के पाला था। 30 मार्च की सुबह 09 बजे पुलिस वेलु के घर पहुँची और राजू के घरवालों से कहा कि वह कई बार क़ानून का उल्लंघन भी कर चुका है और वो छोटा-मोटा चोर भी था। उसकी 51 साल की माँ सायरा देवेन्द्र कहती हैं, “उन्होंने मुझे बताया कि वेलु पास में एक फुटपाथ पर नशे में पड़ा हुआ था।”

जुहू पुलिस की कहानी

पुलिस ने राजू की माँ से कहा कि जब वह मौके पर पहुँचे, तो मुश्किल से 200 मीटर की दूरी पर उन्होंने वेलु को बेहोश पाया। सायरा का कहना है कि वे उसे अस्पताल ले जाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें मना किया। जब पुलिस राजू को उसके घर ले गए, तो घरवालों ने उसके शरीर पर चोट के निशान खोजे। वे कहती हैं कि आखिरकार वेलु को पाँच घंटे बाद भी होश नहीं आने पर अस्पताल जाने का फैसला किया। कूपर अस्पताल पहुँचने पर राजू को मृत घोषित कर दिया गया।

पुलिस ने वेलु की माँ से कहा कि वेलु किसी के घर में चोरी करने के लिए घुसने की कोशिश कर रहा था, जहाँ लोगों ने उसकी मॉब लिंचिंग कर डाली और वो जल्द ही अपराधियों की तलाश कर लेंगे। पुलिस द्वारा कैद किए गए कथित आरोपितों में से एक ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि 29-30 मार्च की रात को वेलु को चार पुलिसकर्मियों ने पकड़ा था। स्थानीय लोगों ने उसे घर में घुसने की कोशिश करते हुए देखा और पकड़कर उसकी पिटाई की।

29 और 30 मार्च की रात को, राजू वेलु देवेंद्र और उसके दोस्त बाहर निकले थे। पुलिस ने दावा किया था कि राजू की लोगों ने मॉब लिंचिंग की और उसका शव उन्हें नेहरू नगर चौक पर मिला।

मृतक राजू के भाई के मुताबिक, राजू को रात 2.30 बजे पुलिस स्टेशन ले जाया गया था और सुबह 6 बजे के आसपास, पुलिस ने परिवार को सूचित किया कि उसकी हत्या कर दी गई है। सार्वजनिक विरोध के बाद ही विभाग ने आंतरिक जाँच का आदेश दिया था।

वेलु की मॉं का बयान (साभार: Click News Media)

राजू के भाई का कहना है कि उच्च न्यायलय की सुनवाई के पहले तक भी पुलिस अपने इसी बयान पर अडिग थी कि पब्लिक द्वारा लिंचिंग किए जाने के कारण राजू की मौत हुई। पुलिस ने यहाँ तक भी कहानी गढ़ी कि राजू के 2 दोस्त भागने में कामयाब रहे और वह छत से गिर गया था। पुलिस ने कहानी बनाई कि उनके पास इस घटना का चश्मदीद गवाह भी मौजूद है।

लेकिन जब मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में पहुँचा, तब पुलिस ने आंतरिक जाँच की रिपोर्ट तैयार की और स्वीकार किया कि देवेद्र की मौत मॉब लिंचिंग का मामला नहीं है, बल्कि पुलिस हिरासत में हुई मौत है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सांता क्रूज़ के एक वकील ने वेलु के परिवार को प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, राष्ट्रमंडल मानवाधिकार पहल (सीएचआरआई) और मुंबई पुलिस आयुक्त को पत्र भेजने में मदद की।

सायरा का कहना है कि लॉकडाउन शुरू होने के बाद से ही उनका परिवार एनजीओ द्वारा बाँटे गए भोजन और राशन पर निर्भर हो गए थे, ऐसे में गरीबी के चलते न्याय के लिए आवाज उठाने की उम्मीद ही उन्होंने छोड़ दी थी। उन्होंने कहा, “हमने सोचा था कि हम पैसे की तंगी के दूर होते ही इस मुद्दे को उठाएँगे। फिर, अगस्त के पहले सप्ताह में, हमें एक अधिवक्ता का फोन आया, जिसमें उन्होंने बॉम्बे उच्च न्यायालय में पुलिस की बर्बरता का यह मुद्दा उठाया था।”

इस पर अधिवक्ता, बहराइज़ ईरानी ने कहा, “शुरू में हमने बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि वह राज्य भर में हो रही पुलिस की क्रूरताओं का संज्ञान लें, लेकिन तब हमें सलाह दी गई थी कि आवश्यक पत्र दाखिल करें, क्योंकि एक पत्र पर्याप्त नहीं था। इसके चलते हमें जनहित याचिका दायर करनी पड़ी। हम सीएचआरआई की रिपोर्टों पर भरोसा करते हैं, जिसमें राजू वेलु के मामले को उजागर किया गया था।”

जबकि, ज़ोन के पहले पुलिस उपायुक्त ने उस समय कहा था कि राजू वेलु को लोगों की भीड़ द्वारा मार दिया गया था, सहायक पुलिस आयुक्त ने पिछले महीने बॉम्बे उच्च न्यायालय में स्वीकार किया कि पुलिस हिरासत में ही पिटाई के कारण राजू की मृत्यु हो गई थी।

मुंबई पुलिस के बांद्रा डिवीजन के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) ने 22 जुलाई को बॉम्बे उच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसने उन चार पुलिस कर्मियों की पहचान की है, जिन्होंने राजू वेलु देवेंद्र के साथ मारपीट की थी। लेकिन, हाईकोर्ट ने इस मामले की जाँच में देरी पर नाराजगी व्यक्त की, और एसीपी को जाँच में तेजी लाने और 5 अगस्त तक एक प्रोग्रेस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

पहले की सुनवाई के दौरान, मुंबई पुलिस ने आरोपों से इनकार किया और दो हलफनामे दायर किए। एक स्थिति रिपोर्ट भी दर्ज की गई थी जिसमें चार पुलिसकर्मियों की पहचान की गई थी, जिन्होंने कथित तौर पर मृतक के साथ मारपीट की थी, और पुलिस ने उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही करने का प्रस्ताव दिया था।

बॉम्बे HC के हस्तक्षेप के बाद, मुंबई पुलिस ने संज्ञान लिया और 16 अगस्त को आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक निलंबन (सस्पेंड) आदेश जारी किया गया और कहा कि विभागीय जाँच अभी जारी है। हालाँकि, यह भी दिलचस्प बात है कि इन पुलिसकर्मियों को सिर्फ निलंबित किया गया, ना कि उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

भारत में नहीं पैदा हुआ राम जैसा कोई नायक, वह फिल्मों की तरह मात्र एक काल्पनिक पात्र: सपा नेता

समाजवादी पार्टी के नेता चौधरी लौटन राम निषाद ने मंगलवार (18 अगस्त, 2020) को राम मंदिर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। निषाद ने भगवान राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाया है।

समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी लौटन राम निषाद ने कहा कि भगवान श्री राम फिल्मों की तरह ही एक काल्पनिक पात्र थे। निषाद पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों का चयन करने के लिए मंगलवार को अयोध्या पहुँचे थे।

अपने हिंदू विरोधी बयानबाजी को जारी रखते हुए, सपा नेता निषाद ने आगे दावा किया कि संविधान ने भी स्वीकार किया है कि भगवान राम जैसा कोई नायक कभी भारत में पैदा नहीं हुआ था।

मीडिया से बात करते हुए निषाद ने कहा, “अयोध्या में राम मंदिर बने या कृष्ण मंदिर, उससे मुझे कोई लेना देना नहीं है। भगवान राम में मेरी आस्था नहीं है। यह मेरा व्यक्तिगत विचार है। मेरा विश्वास डॉ.भीमराव अंबेडकर, कर्पूरी ठाकुर, छत्रपति साहूजी महाराज, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले द्वारा बनाए गए संविधान पर है, जिनसे हमें सरकारी नौकरियों में पढ़ने, लिखने, बैठने का अधिकार मिला है।” इसके अलावा समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा मेरी आस्था उनमें है जिनकी वजह से मुझे सीधा लाभ मिला।

भगवान राम के अस्तित्व पर संदेह जताते हुए निषाद ने आगे कहा, “राम पर ही नहीं मैं उनके अस्तित्व पर भी सवाल उठाता हूँ। राम एक काल्पनिक पात्र है, जो फिल्म की पटकथा के समान है। राम एक ऐसा चरित्र है, जिसका कोई अस्तित्व नहीं है। संविधान ने यह भी कहा है कि राम का जन्म किसी नायक से नहीं हुआ, राम नाम का कोई नायक भारत में पैदा नहीं हुआ।”

इस बीच, भाजपा ने सपा नेता लोटन राम निषाद के बयानों पर प्रतिक्रिया दी है और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से स्पष्टीकरण की माँग की है।

पाकिस्तान में फँसी जनता, भारत में हैं पति और 3 बच्चे: भारत लौटने को बेचैन हैं हिंदू, NORI की अवधि बढ़ाने की गुहार

पाकिस्तान में फँसी 33 साल की जनता माली हर हाल में भारत आना चाहती है। लॉकडाउन से पहले जनता अपनी बीमार माँ से मिलने मीरपुर गई थी, जिसके बाद वह वहाँ फँस गई। जून के आखिरी सप्ताह में जब भारत-पाकिस्तान की सीमाओं पर फँसे नागरिकों को अभियान चलाकर वापस लाया गया, तब उसके पति और बच्चे भारतीय नागरिक होने के कारण जोधपुर ले आए गए। लेकिन जनता माली वहीं फँसी रही। वह साल 2007 से भारत में लॉन्ग टर्म वीजा पर रह रही थी।

जनता की ही तरह कई पाकिस्तानी प्रवासी जो अपने रिश्तेदारों से मिलने पाकिस्तान गए थे और उन्हें अपना पासपोर्ट या अन्य पहचान पत्र नवीकरण करवाना था, वह सब वहाँ फँसे हुए हैं। ये प्रवासी पाकिस्तानी NORI (नो ऑब्जेक्शन रिटर्न ऑफ इंडिया) वीजा पर गए थे, जो अमूमन 60 दिन के लिए वैध होता है। अब यह समय पूरा हो गया है।

बता दें कि साल 2017 में, राजस्थान उच्च न्यायालय ने अल्पसंख्यक समुदायों के पाकिस्तानी नागरिकों के निर्वासन पर संज्ञान लिया था। बुधवार को इस पर सुनवाई के दौरान सज्जन सिंह राठौर ने पाकिस्तान में फँसे लोगों के मामले को न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और रामेश्वर व्यास की खंडपीठ के समक्ष उठाया।

उन्होंने कहा, “NORI वीजा समाप्त होने के कारण और अंतरराष्ट्रीय मार्गों के बंद करने के कारण कई लोग पाकिस्तान में फँसे हुए हैं।” इसके बाद कोर्ट ने केंद्र और राज्य से इस मामले पर उनकी प्रतिक्रिया माँगी।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राठौर ने कोर्ट के सामने कहा कि जनता माली समेत कई लोगो का NORI वीजा विदेश मंत्रालय द्वारा बढ़ाया नहीं जा रहा। वहाँ के कई हिंदू अत्याचारों से तंग आकर भारत में लॉन्ग टर्म वीजा पर भारत में रहते हैं, वह इसका सहारा तब तक लेते हैं जब तक उन्हें नागरिकता नहीं मिलती।

पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को भारत में नागरिकता दिलवाने का काम करने वाले सीमांत लोक संगठन के अध्यक्ष हिंदू सिंह सोढ़ा ने कहा, “NORI वीजा का समय 60 दिन है। अगर वह इतने समय में नहीं लौटते तो उनका वीजा रद्द हो जाता है। इसके बाद उन्हें नए वीजा के लिए अप्लाई करना पड़ता है। जब वह लोग ऐसा करते हैं तो पहले वाला समय जो उन्होंने भारत में बिताया उसे नहीं गिना जाता। इसलिए NORI वीजा को बढ़ाया जाना चाहिए और उन्हें भारत लौटने की अनुमति देनी चाहिए।”

बता दें कि सीमांत लोक संगठन ने भी 11 जुलाई को केंद्र सरकार को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था। उन्होंने एक पत्र समन्वय सेल के प्रभारी राजस्थान अधिकारी सुबोध अग्रवाल को भी लिखा। फिर, राज्य सरकार ने पाकिस्तान में फँसे हुए लोगों के मामले में हस्तक्षेप करने के लिए गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को पिछले महीने एक पत्र लिखा।

लेकिन इस सारी प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच जनता माली के पति लीला राम को अपने तीन बच्चों की चिंता परेशान किए जा रही है। लीलाराम और जनता माली के 3 बच्चे हैं- कुलदीप (9), मोहित (8) और चंचल (6)। ये सारे बच्चे अपनी माँ से अब केवल व्हॉट्सएप पर बात कर पाते है और माँ अपने बच्चों को देखकर रोने के अलावा कुछ नहीं कर पाती। इन सबकी बस यही उम्मीद है कि उनकी सुनवाई हो और वह भारत लौट पाएँ।

घाटी में आतंक को बढ़ावा देने के लिए आतंकियों ने जारी की बारामूला में सुरक्षाबलों पर हमले की बॉडी कैमरा फुटेज: 72 घंटे में हुए ढेर

हाल ही में जम्मू-कश्मीर के बारामूला स्थित क्रीरी में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसमें कुल 5 सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए थे और 3 आतंकवादी मारे गए थे। घटना के दो दिन बाद आतंकियों ने घटनास्थल पर हुई गोलीबारी का वीडियो इंटरनेट पर साझा किया है। पूरे वीडियो में आतंकवादी अपनी बहादुरी और गोरिल्ला कौशल दिखाते हुए नज़र आ रहे हैं। People’s Anti-Fascist Front (PAAF) ने यह वीडियो साझा किया था। जम्मू कश्मीर पुलिस के मुताबिक़ यह संगठन लश्कर-ए-तैय्यबा से संबंधित है।    

यह वीडियो 3 आतंकवादियों ने मिल कर बनाया है जो इस हमले में शामिल थे। वीडियो में यह साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे वह घात लगा कर छिप कर हमले की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने योजना कुछ इस तरह बनाई थी कि जैसे ही सुरक्षाबल मौके पर पहुँचते। आतंकी उन पर गोलीबारी शुरू कर देते। इनमें से 3 आतंकी जो सेब के पेड़ों के पीछे घात लगाए बैठे थे सुरक्षाबलों  के आते ही उन पर गोली चलाना शुरू कर देते हैं। वह तब तक गोली चलाना जारी रखते हैं जब तक पक्का सड़क के नज़दीक नहीं पहुँच जाते हैं।    

उसी जगह पर सुरक्षाबलों का वाहन भी मौजूद था। वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि दो आतंकी लगातार गोलियाँ चला रहे हैं जबकि तीसरा उन्हें कवर दे रहा है। घटना के दौरान एक मौक़ा ऐसा भी आता है जब उसे मैगज़ीन बदलते हुए भी देखा जा सकता है। यह वीडियो फिलहाल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो को एडिट भी किया गया है जिसके बाद इसमें म्यूज़िक भी जोड़ा गया है। तीन हमलावरों को प्रभावी रूप में दिखाने के लिए इफेक्ट्स भी जोड़े गए हैं।    

5 मिनट के इस वीडियो में दो सुरक्षाबलों को सिर गोली लगती है और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो जाती है। लेकिन वीडियो में यह साफ़ नहीं हो पाता है कि जब सुरक्षाबलों के वाहन के नज़दीक गोलीबारी होती है तब क्या होता है। गोलीबारी तब रूकती है जब एक आतंकवादी अपने दूसरे साथी से कहता है “थावो” (रुको)। इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस ने कहा कि इस हमले के 72 घंटे के भीतर सभी आतंकियों को मार गिराया गया है।            

पुलिस ने इस घटना पर ट्वीट करते हुए लिखा, “इस तरह का वीडियो साझा करके वह आतंकवाद को सम्मानित करना चाहते हैं। लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकते हैं। हमने आतंकियों को इसका मुँह तोड़ जवाब दिया है। हमारे अभियान में अभी तक उनके कई कमांडर मारे जा चुके हैं। सज्जाद हैदर, तैमूर खान, अबू उस्मान (वीडियो में भी नज़र आया था), नसीर, साद भाई, अली भाई, दानिश यह सब 72 घंटे के भीतर मारे गए हैं।” 

इसके पहले भी आतंकवादी बनने वाले नए युवा सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा करते थे। यह सब पिछले 1 दशक के दौरान देखा गया था। पिछले एक दो बार की घटनाओं में ऐसा देखा गया है कि शूटआउट के वीडियो साझा किए जाते हैं। लेकिन इस घटना में देखा गया था कि वीडियो गो प्रो जैसे बॉडी कैमरा से शूट किया गया था। पहली बार किसी गोलीबारी की घटना रिकॉर्ड करने के लिए गो प्रो कैमरे का इस्तेमाल किया गया है।       

इसके पहले साल 2013 में सुरक्षाबलों पर आतंकियों द्वारा की गई गोलीबारी का वीडियो इंटरनेट और सोशल मीडिया वायरल हुआ था। एक स्थानीय आतंकी कमांडर इरशाद गनिया और उसके साथियों ने श्रीनगर स्थित हैदरपुरा बाईपास के नज़दीक इस हमले को अंजाम दिया था। इसमें हमले में कुल 8 जवान शहीद हुए थे और हमला करने वाले दो आतंकवादी लश्कर-ए-तैय्यबा से जुड़े हुए थे।    

कुछ महीने बाद कमांडर इरशाद गनिया भी पुलिस और सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। दो साल पहले श्रीनगर से 14 किलोमीटर दूर स्थित पम्पोर में सुरक्षाबलों की बस पर आतंकवादी हमला हुआ था। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया और इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ था। दो आतंकी बस पर सीधे गोली चलाते हुए नज़र आ रहे थे वहीं एक और आतंकी दूसरी तरफ से एके 47 से बस पर गोलियाँ चला रहा था।