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भारत ने गलवान में बना डाला वह पुल जिससे सुलगा है चीन, लेह में फाइटर प्लेन ने भरी उड़ान

लद्दाख से एक बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गलवान में भारत ने वह पुल तैयार कर लिया है, जिसे चीन रोकना चाहता था। गलवान में ही पिछले दिनों चीन के धोखे से किए वार में 20 सैनिक बलिदान हो गए थे। झड़प में 43 चीनी सैनिकों के मारे जाने की भी खबर आई थी।

रक्षा राज्य मंत्री श्रीपद नाईक ने कहा है कि भारतीय जवानों पर चीन का हमला पूर्व-नियोजित था। लेकिन भारत चीनी सशस्त्र बलों को वास्तविक नियंत्रण रेखा से एक इंच भी आगे बढ़ने नहीं देगा। यह बातें उन्होंने मीडिया के सवालों के जवाब में कहीं।

शुक्रवार (19 जून, 2020) को श्रीपद नाईक ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आज चीन की भारत के प्रति आक्रमकता अकारण है। चीन के तरफ से छह-सात पोस्ट पर हमला पूर्व नियोजित था।

सेना के इंजीनियरों ने पूर्वी लद्दाख में गलवान नदी पर 60 मीटर लंबे पुल निर्माण पूरा किया है, जो भारतीय सेना की पहाड़ी नदी के पार जाने की राह को आसान बनाता है। यह पुल संवेदनशील क्षेत्र में भारत की पकड़ मजबूत करेगा और दरबुक से दौलत बेग ओल्डी तक 255 किलोमीटर की रणनीतिक सड़क को सुरक्षित करेगा।

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक चीन ने इस पुल के निर्माण को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बावजूद भी इस पुल का निर्माण इंजीनियरों द्वारा पूरा कर लिया गया। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, “हमने स्टैंड-ऑफ के माध्यम से इस पुल पर काम नहीं रोका और 15 जून को हिंसा का सामना करने के बावजूद काम जारी रखा।”

सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण दरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (DSDBO) रोड को पूरा होने में लगभग दो दशक लग गए। इसका कारण कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा इस सड़क के निर्माण फंडों का दुरुपयोग है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है सीवीसी के निर्देश पर मुख्य तकनीकी परीक्षक (सीटीई) द्वारा की गई एक जाँच में 2011 में पाया गया कि सड़क का निर्माण इस तरह हो रहा था कि यह हर साल गर्मियों में क्षतिग्रस्त हो जाती थी, क्योंकि बर्फ पिघलने के कारण श्योक नदी में बाढ़ आ जाती थी।

CTE ने आगे अनुमान लगाया कि परियोजना के लिए आवंटित धन का आधा हिस्सा गलत तरीके से लिया गया था। DSDBO सड़क के लिए 320 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे, लेकिन इस परियोजना से लगभग 160 करोड़ रुपये का गबन किया गया। पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा की गई थी। उस समय मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। मूल सड़क को 2012 तक पूरा किया जाना था, लेकिन समय सीमा बाद में 2014 तक बढ़ा दी गई थी, बाद में इसे 2017 में कर दिया गया।

इस बीच लेह में लड़ाकू विमानों के उड़ान भरने की भी खबर आ रही है। वायु सेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने लेह और श्रीनगर का दौरा किया है।

लेह का आधा हिस्सा चीन लेना चाहिए, फिर दिल्ली में मोदी की माँ-बहन हो जाएगी…: कॉन्ग्रेस नेता जाकिर हुसैन का ऑडियो वायरल, कारगिल से गिरफ्तार

गलवान में भारतीय सैनिकों के बलिदान और चीन का महिमामंडन करते हुए कई कॉन्ग्रेसी नेताओं के बयान सामने आ चुके हैं। लेकिन, लद्दाख के कॉन्ग्रेस नेता जाकिर हुसैन ने सारी मर्यादाएँ ​लाँघ दी है।

जाकिर हुसैन की अपने एक दोस्त के साथ बातचीत की एक ऑडियो वायरल हुई है। इसमें वह भारतीय सेना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बेहद आपत्तिजनक एवं विवादित बातें करता सुनाई पड़ता है।

जाकिर LAHDC कारगिल में कॉन्ग्रेस का पार्षद है। मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। वायरल ऑडियो क्लिप में वह भारतीय सैनिकों को नीचा दिखाते हुए चीनी फौजियों का महिमामंडन कर रहा है।

जाकिर अपने दोस्त को बता रहा ​है कि चीन के सैनिक लद्दाख में 135 किलोमीटर तक घुस गए हैं और भारतीय सैनिकों को मार-मार कर खदेड़ दिया। उसने आगे कहा, पेगांग लेक को चीन यदि अपने कब्जे में ले लेता है तो भारत के पास बचता क्या है। चीन आने वाले दिनों में लद्दाख के कई टुकड़े करेगा।

जाकिर अपनी इस बातचीत के बीच में अपने दोस्त से यह भी कहता है कि भारत भले ही झड़प में मरने वालों की संख्या केवल 20 बता रहा है। लेकिन उसे लगता है यहाँ 200-250 सैनिक मर चुके हैं। जब जाकिर का दोस्त चीनी फौजियों के बारे में पूछता है, तो जाकिर बताता है कि उनके सैनिक सिर्फ़ जख्मी हुए हैं। मरे नहीं हैं।

जाकिर का दोस्त इस बातचीत में जब कहता है कि अगर उसने कुछ पैसे जमा किए हुए हैं, तो वह उसके पास आ जाए, वह उसे मकान दिला देगा। जिस पर जाकिर उसे आश्वस्त करता है कि आगे कुछ होने वाला नहीं है। वह कहता है, “सब ठीक हो जाएगा। बस लेह का आधा हिस्सा चाइना लेना चाहिए। फिर पता है क्या होगा… दिल्ली में मोदी की माँ-बहन हो जाएगी…। लद्दाख यूटी के फिर हजार टुकड़े हो जाएँगे।”

गौरतलब है कि इस ऑडियो का खुलासा होने बाद कॉन्ग्रेस ने अपने इस नेता से किनारा कर लिया है। पार्टी ने जाकिर हुसैन के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज होने के बाद इस पूरी बातचीत को एक प्राइवेट टॉक करार दिया है।

वहीं, भाजपा ने इस ऑडियो के सामने आते ही लेह में कॉन्ग्रेस पार्टी के ख़िलाफ़ बड़ा प्रदर्शन किया है। लद्दाख से भाजपा सांसद जामयांग शेरिंग नामग्याल इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। वे कहते हैं कि हुसैन के बयान से लोगों में काफी गुस्सा है। इस प्रकार का विश्वासघात किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनकी माँग है कि हुसैन के ख़िलाफ देशद्रोह के आरोप में मुकदमा दायर हो।

लद्दाख सांसद का ये भी पूछना है कि आखिर कॉन्ग्रेस इस मामले पर अपने नेता के ख़िलाफ़ कोई एक्शन क्यों नहीं ले रही है, जो स्पष्ट तौर पर चीनी सेना का महिमामंडन कर रहा है और भारतीय सेना को अपमानित कर रहा है।

यहाँ बता दें कॉन्ग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई ने भी इससे पहले भारतीय सेना का अपमान किया था और अपने पार्टी नेता राहुल गाँधी की तरह झूठ फैलाया था। दलवई ने कहा था मोदी सरकार ने बिना हथियारों के सेना को सीमा पर भेजा। इसके कारण भारतीय सैनिक LAC पर झड़प के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए।

मीडिया से बात करते हुए भी दलवई ने कहा था कि गलवान घाटी में भारत-चीन सेना के बीच हुई झड़प में केवल भारतीय सैनिक हताहत हुए हैं और चीन का कोई फौजी नहीं मरा।

सुशांत जब भी सेक्स करता है… कतरा-कतरा कर उनको मारा गया है: कंगना रनौत ने बताया मीडिया ने कैसे की लिंचिंग

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद कंगना रनौत लगातार उन लोगों पर हमलावर है, जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें सुसाइड के लिए मजबूर किया। इसी क्रम में उन्होंने अपनी हालिया वीडियो में मीडिया के उस तंत्र को लताड़ लगाई है, जो केवल खबर में तड़का देने के लिए किसी के लिए भी बिन हाथ-पाँव की उलटी-सीधी बातें लिखना शुरू कर देते हैं और जिन्हें फर्क नहीं पड़ता कि इसका असर व्यक्ति विशेष पर क्या होगा।

ट्विटर पर जारी की वीडियो में कंगना को कहते सुना जा सकता है कि उन्होंने सुशांत के जाने के बाद उनके पिता, उन्हें लॉन्च करने वाले निर्देशक अभिषेक कपूर, उनकी करीबी अंकिता के बयान सुने। इसलिए आज वो यही बताएँगी कैसे मूवी माफियाओं ने सुशांत को न केवल बैन किया, बल्कि चरणबद्ध तरीके से कतरा-कतरा कर उनके माइंड को तोड़ा। उन्हें मारा।

कंगना अपनी बात मीडिया में प्रकाशित होने वाले ब्लाइंड आइटम से शुरू करती हैं। वे कहती हैं, न्यूज में ब्लाइंड आइटम लिखे ही इसलिए जाते हैं, ताकि जब कोई झूठ बोले, तो उसके ख़िलाफ़ कोई कानूनी कार्रवाई न हो सके। मगर, उसके भीतर में जो व्यक्ति से जुड़ा विवरण होता है। वो सभी बातों को स्पष्ट कर देता है। जैसे यदि मेरे बारे में कोई लिखे तो उसमें लिखेगा- वो लड़की जिसके घुंघराले बाल हैं, नेशनल अवॉर्ड मिला हुआ, साइकोटिक है, मनाली से है… इस तरह मेरे ख़िलाफ़ लिखते हुए मेरा विवरण पूरा लिख दिया जाएगा लेकिन नाम नहीं लिखा जाएगा।”

वे सुशांत के संदर्भ में ऐसी ही मीडिया रिपोर्टों का उल्लेख कर बताती हैं कि पत्रकारिता के नाम पर मीडिया ने सुशांत को कैसे अपमानित किया। वे बताती हैं, “23 अगस्त 2017 को बॉलीवुड लाइफ सुशांत के बारे में लिखता है कि वो जब भी सेक्स करता है तो अपने ही गाने सुनता है। तो वो सबसे बड़ा नारसिसिस्ट है। 16 दिसंबर 2016 में मुंबई मिरर लिखता है कि सुशांत एक ट्रक ड्राइवर की तरह दिखता है। 22 फरवरी 2019 को मुंबई मिरर लिखता है कि पार्टी में तमाशा करने के बाद सुशांत ने काँच की बोतल एक निर्देशक के सिर पर मारी। 18 अक्टूबर 2018 को डीएनए लिखता है कि सुशांत ने अपनी को-एक्टर का रेप किया और वह मीटू के चलते अब जेल जा सकता है।”

इन मीडिया रिपोर्टों का उल्लेख करने के बाद कंगना कहती हैं कि ऐसे न जाने कितने अनगिनत झूठ बुद्धिजीवी पत्रकारों द्वारा बोले गए। वे कहती हैं, “ये जो मूवी माफिया के पाले हुए चील, कौए, गिद्ध हैं, वो इस मेंटल, इमोशनल और साइकलोजिकल रूप से की गई लिंचिंग को पत्रकारिता कहते हैं। मेरे बारे में आज तक जो भी कहा गया, मैंने कुछ नहीं कहा। लेकिन जब एक स्वतंत्रता सेनानी के ख़िलाफ़ गंदगी लिखी गई, तब मैंने उस पत्रकार को जवाब दिया। मगर, तब उसने मेरे ख़िलाफ़ एक गिल्ड बनाई और कोशिश की गई कि मेरी फिल्म को बैन किया जाए, फ्लॉप किया जाए।”

वे बताती है,”करीब 3000 पत्रकार एक लड़की के ख़िलाफ़ खड़े होते हैं। भावनात्मक तौर पर उसकी लिंचिंग करते हैं। पर ये समाज और कानून कुछ उन्हें कुछ नहीं कहता। मैंने ऐसे लोगों पर केस करने की कोशिश की, लेकिन 1 महीने बाद जब मेरी फिल्म रिलीज हुई, वे सभी पत्रकार गायब हो गए। इसलिए मेरे कहने का मतलब ये हैं कि ये समाज जिस अन्याय की बुनियाद पर खड़ा है और कभी आवाज नहीं उठाता। लोग मीडिया में छपी ऐसी बातें पढ़ते हैं और चटकारे लगाते हैं। लेकिन कभी नहीं सोचते कि नेपो किड्स के बारे में ऐसी बातें क्यों नहीं होतीं।”

गौरतलब है कि इससे पहले कंगना ने सुशांत की मौत से आहत होकर एक वीडियो और जारी की थी। इसमें उन्होंने इंडस्ट्री के असली चेहरे की पोल खोलते हुए सवाल पूछा था कि सुशांत की मौत आत्महत्या है या प्लान्ड मर्डर।

बता दें इस वीडियो में भी कंगना ने बताया कि सुशांत के पिता ने उनकी मौत के बाद बताया कि वह फिल्म इंडस्ट्री में हो रही टेंशन के कारण परेशान थे। वहीं उन्हें लॉन्च करने वाले निर्देशन अभिषेक कपूर ने कहा कि उन्हें बिलकुल चरणबद्ध तरीके से दिमागी तौर पर थोड़ा-थोड़ा करके तोड़ा गया। वहीं उनकी पार्टनर रह चुकी अंकिता का कहना है कि सुशांत सामाजिक रूप से की गई बेइज्जती को नहीं सहन कर पाए।

जिहाद के लिए उकसाने वाला इनामुल हक बरेली से गिरफ्तार, पूछताछ में जुटी यूपी ATS

उत्तर प्रदेश में एन्टी टेरर स्क्वाड (ATS) ने मोहम्मद इनामुल हक को बरेली से गिरफ्तार किया है। एटीएस ने बताया कि 30 वर्षीय मोहम्मद इनामुल पूरी तरह से रेडिकलाइज्ड है। वह युवाओं को जिहाद के नाम पर भड़काता था।

यूपी एटीएस के मुताबिक इनामुल के पास से बरामद मोबाइल में अलकायदा (Al-Qaida) से जुड़े भड़काऊ दस्तावेज मिले हैं। वह युवाओं को जिहाद के नाम पर भड़काने के लिए फेसबुक, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया एप का इस्तेमाल करता था।

न्यूज़ 18 के रिपोर्ट के मुताबिक यूपी एटीएस को जानकारी मिली थी कि मोहम्मद शोएब इलियास उर्फ अबु मुहम्मद अल हिंदी नाम का एक व्यक्ति पूरी तरह से रेडिकलाइज्ड है और युवकों को आतंकवादी संगठन में शामिल होने के लिए उकसा रहा है। जाँच के बाद सामने आया कि उसका असली नाम मोहम्मद इनामुल हक़ है, जोकि बरेली के रियाज़ कॉलोनी कालोनी में रहता है।

यूपी एटीएस के एडिशनल जनरल डायरेक्टर डीके ठाकुर ने कहा कि इनामुल सोशल मीडिया के जरिए मैसेज कर लोगों को आतंकी गतिविधियों के लिए उकसाता था। सोशल मीडिया की रैंडम स्कैनिंग के दौरान खुफिया एजेंसियों को उसका अकाउंट संदिग्ध लगा था। इसके बाद उसकी तलाश शुरू की गई थी।

उन्होंने बताया, ” इनामुल फेसबुक के जरिए लोगों से आंतकी गतिविधियों और जिहाद के लिए उकसाता था। उसके व्हाट्सएप्प और इंस्टाग्राम पर कई आपत्तिजनक संदेश मिले हैं।”

डीके ठाकुर ने यह भी बताया कि पुलिस ने उसके पास से अल-अलकायदा जैसे इंटरनेशनल आतंकी संगठनों से जुड़े भड़काऊ साहित्य भी बरामद किए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उसके फ़ोन से हिंदू नेता कमलेश तिवारी की फ़ोटो भी मिली हैं। इस पर पर अरबी में कुछ लिखा था। हिंदू समाज पार्टी के संस्थापक कमलेश तिवारी की पिछले साल अक्टूबर में जिहादियों ने हत्या कर दी थी।

इनामुल को अदालत में पेश कर एटीएस ने 10 दिन की रिमांड पर लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। एटीएस की नजर उसके अन्य साथियों पर भी है।

चीन सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए अयोध्या में राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण कार्य को किया स्थगित

गलवान घाटी में भारत और चीन की सेना के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए अयोध्या में राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने श्रीराम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन कार्यक्रम को फिलहाल टाल दिया है। साथ ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया है कि देश की परिस्थितियों को देखकर आने वाले समय में नई तारीख का ऐलान किया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने पहले तो सीमा पर शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि सीमा पर फिलहाल स्थिति गंभीर है, जो कि देश के लिए चिंता का विषय है। इसलिए देश की सुरक्षा हम सभी के लिए सबसे पहले है।

ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, “निर्माण (मंदिर का) शुरू करने का निर्णय देश में स्थिति के अनुसार लिया जाएगा और आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा भी की जाएगी।”

दरअसल, चीन सीमा पर 20 सैनिकों के वीरगति को प्राप्त होने के बाद देश में जगह-जगह चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए और चीनी सामानों का भी बहिष्कार किया गया। इस बीच अयोध्या में भी हिंदू संगठनों ने चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद पीटीआई ने खबर दी थी कि ट्रस्ट ने अयोध्या में मंदिर का निर्माण शुरू करने की योजना को फिलहाल स्थगित कर दिया है।

वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो लाखों नागा साधु अपनी स्वेच्छा से सेना की मदद करने को तैयार हैं।

गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के खिलाफ चीनी सेना द्वारा किए गए नृशंस हमले की निंदा करते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि भारतीय सेना सीमा पर चीनी सैनिकों को संभालने में सक्षम है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो लाखों नागा साधु भी मातृभूमि की रक्षा के लिए स्वयंसेवक होंगे।

उन्होंने कहा नागा साधु शास्त्र (धार्मिक ग्रंथ) और शस्त्र (हथियार) में समान रूप से माहिर हैं, “नागा साधुओं को मार्शल आर्ट में भी प्रशिक्षित किया जाता है और वे त्रिशूल, तलवार, बेंत और भाले भी अपने साथ ले जा सकते हैं”।

गिरी ने आगे बताया कि नागा सन्यासियों ने एक बार मुगल उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, हालाँकि आज की स्थिति अलग है। गिरि ने कहा देश की स्वतंत्रता के बाद से नागाओं को सैन्य गतिविधियों में सक्रिय रहने की कोई आवश्यकता नहीं थी, इसलिए उन्होंने धर्म की ओर रुख किया।

गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हिंसक झड़पें

आपको बता दें कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ सोमवार (15 जून, 2020) को भारतीय सेना की हिंसक झड़प हो गई थी। इस घटना में भारत के 20 सैनिक वीर गति को प्राप्त हो गए थे।

1999 में कारगिल युद्ध के बाद यह भारतीय सेना की सबसे बड़ी क्षति है। यह लड़ाई 1967 के बाद से भारत और चीन के बीच सबसे तीव्र सैन्य लड़ाई का संकेत देती है। 1967 की लड़ाई में भी करीब 80 भारतीय सैनिक और कम से कम 300 चीनी PLA सैनिक मारे गए थे।

मई की 30 घटनाएँ जब मजहबी भीड़ ने हिंदुओं को बनाया निशाना, मंदिरों पर भी हमला: बांग्लादेश छोड़ने के लिए धमकाया

पाकिस्तान की तरह बांग्लादेश में भी हिंदुओं पर अत्याचार बहुत तेजी से हो रहा है। इसका खुलासा बांग्लादेश के द वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन चैप्टर के एक प्रेस नोट से हुआ है। इस नोट में केवल मई की उन घटनाओं का उल्लेख है जब इस्लामी भीड़ ने हिंदुओं को निशाना बनाया।

इस सूची में मंदिर विध्वंस, धर्मांतरण, बलात्कार और हिंदू लड़कियों के अपहरण के अलावा 4 से ज्यादा ऐसे मामले हैं, जब बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या हुई। 12 मामले लूटपाट और जमीन हड़पने के हैं।

  1. 1 मई को बांग्लादेश के गोपालगंज के कोटलिपारा उपजिला में लखीरपारा गाँव में लगभग 50 स्थानीय कट्टरपंथियों ने अनंत विश्वास के घर पर हमला किया। एक छोटे से पेड़ की शाखा को तोड़ने के आरोप में। उनके परिवार के सदस्यों को देश न छोड़ने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और परिवार के लोगो को गंभीर रूप से घायल कर गए।
  1. 1 मई की रात ही उपजिला के चेयरमैन एमए मोईद फारूक के नेतृत्व में कुछ गुंडों ने बांग्लादेश के मौलवीबाजार जिला के जुरी थाने के अंतर्गत आने वाले अमेट गाँव में श्री दीनबंधु सेन के मुर्गीपालन फार्म पर हमला किया।
  1. इसके बाद 1 मई को ही एक अन्य मामले में हिंदू लड़के रोनी सत्यार्थी को इस्लाम व पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक पोस्ट लिखने के झूठे आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया। इस बीच कई उपद्रवियों ने रोनी के घर में लूटपाट की और हमला किया।  साथ ही उसपर घर छोड़कर जाने का भी दबाव बनाया गया।
  1. चार मई को डॉ. काजल कुमार भौमिक पर घर लौटते हुए स्थानीय मार्केट कोमिला में आतंकियों ने हमला किया। इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और कोमिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया।
  1. 4 मई को ही स्वप्न चंद्र सरकार पर हमला हुआ और उनकी लाश सोमेश्वरी नदी में तैरती मिली। पुलिस व फायर सर्विस कर्मियों की मदद से शव को निकाला गया और फिर उसे परिजनों को सौंपा गया। जाँच में पता चला कि स्वप्न चंद्र की बॉडी मिलने से 33 घंटे पहले वो दुर्गापुर के नेट्रोकोना से गायब हुए थे।
  1. 4 मई को बांग्लादेश पुलिस ने इस्लाम का अपमान करने के आरोप में हबीगंज के बनियाचांग उपज़िला के सुबिदपुर गाँव के राजकुमार सरकार के बेटे संजय सरकार को गिरफ्तार किया।
  1. इसी तरह एक अन्य मामले में 4 मई को कुछ स्थानीयों ने दुलान राजभर के शव को एक पास की नदी में तैरते हुए पाया। इसके बाद पुलिस को इसकी सूचना दी गई।
  1. 5 मई को पुलिस ने ढाका के नवाबगंज उपजिला में मजहबी भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में हिंदू युवक राकेश चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया।
  1. 5 मई को ही कुछ अज्ञात आतंकियों ने कार्तिक को मारने के लिए उसके घर पर पीछे के रास्ते से धारदार हथियारों से हमला किया। हालाँकि, घटना को अंजाम देने से पहले कार्तिक के घरवाले जाग गए और उन्होंने शोर मचा दिया। जिससे सभी आतंकी भाग गए।
  2. 5 मई को 15-20 को कुछ स्थानीय आतंकियों ने चितरंजन के घर पर कब्जा करके वहाँ नई इमारत खड़ी करने के लिए हमला किया। इस हमले में चितरंजन, उनकी दो बेटी पिंकी देवी और काली देवी बुरी तरह घायल हो गए। बाद में उन्हें सीता कुंदा सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा।
  1. 5 मई को कालीदास के बेटे रविदास को कुछ स्थानीय बदमाशों ने मारा। बाद में रात के समय उसके घर को आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा घर की महिलाओं को भी परेशान किया।
  1. 7 मई को स्थानीय लैंड माफिया मिंटू मियाँ और उसके गुंडों ने 10 हिंदू परिवारों पर नरैल जिले के कालिया उपजिले में हमला किया। इस घटना में पीड़ितों के घर तोड़े गए, पेड़ों को काटा गया और उन्हें देश छोड़ने की धमकी दी गई।
  2. 8 मई को आतंकियों ने सुनील चंद्रा नाम के एक दिहाड़ी मजदूर को मार डाला। बाद में उसे बांस की झाड़ी में छोड़कर वहाँ से फरार हो गए। उसके शरीर पर घाव के काफी निशान मिले थे। 
  1. 9 मई को रुबेल मियाँ ने अपने साथियों के साथ ब्राह्मणबारिया दूर के नासिरनगर उपज़िला के नाथपारा गाँव में रंजीत देबनाथ के घर पर हमला किया। इस घटना में रंजीत और उनका परिवार बुरी तरह घायल हो ङए। बाद में उन्होंने घर में घुसकर लूटपाट की और सोने-चांदी के जेवहरात चुराए। साथ ही 2 लाख 10 हजार टका कैश ले गए।
  1. 9 मई को एक अन्य मामले में माटिन गंग्रा के ड्रग माफिया ने सुधीर कुमार के घर पर हमला किया और उनका घर व जायदाद  हड़पने की कोशिश की।
  1.  10 मई को सुनामगंज जिले में छतक नगर पालिका के टाटीकोना गाँव में फेसबुक पर टिप्पणी को लेकर आतंकवादियों ने हिंदू परिवारों पर निशाना साधा। साथ ही उनके घरों और मंदिरों पर भी हमला बोला। इस भीषण हमले में कम से कम 10 हिंदू घायल हो गए।
  1. 10 मई को ब्राह्मणबारिया जिले के नसीरनगर उपज़िला उप-पंजीयक कार्यालय के कुछ सदस्यों ने सोने के एक हिंदू व्यापारी मिहिर देव पर हमला किया और उनसे उनका सभी कीमती सामान लूट लिया।
  1. 12 मई को बंशारामपुर यूनियन के पूर्व सदस्य मोहम्मद उमर फारूक ने श्मशान से टैगोर दास नामक एक हिंदू के शव को बलपूर्वक कब्रिस्तान में ले जाकर दफन कर दिया। ऐसा उमर ने केवल हिंदू धर्म और हिंदू मान्यताओं को कथित तौर पर नीचा दिखाने और अपमानित करने के लिए किया।
  1. 13 मई को कुरीग्राम जिले के फूलबाड़ी तेनोडंगा संघ के कुरुशफेरुशा गाँव में कुछ स्थानीयों ने हिंदुओं की संपत्ति हड़पने के इरादे से उनपर हमला किया। कम से कम 10 हिंदू घायल हो गए। इसके बाद उनके घरों में तोड़फोड़ की गई।
  1. 13-14 मई को मौलवीबाजार जिले के उप जिले कमलगंज में एक लड़की संचिता शब्दाकार ने लगातार एक मजहबी युवक द्वारा अपहरण और यौन शोषण से तंग आकर सुसाइड कर ली। इस मामले में आरोपित की पहचान मधु मियाँ के रूप में हुई थी। जिसपर आरोप था कि उसने निकाह के लिए पीड़िता को धमकाया, उसका अपहरण किया और यौन शोषण किया। इनके सबसे अलावा मधु मियाँ ने लड़की के पिता को भी धमकाया।
  1.  14 मई को उपद्रवियों ने 14 मई (गुरुवार) को नयन मल्लिक के घर के खलिहान में आग लगा दी। इस घटना में मल्लिक की गाय और एक सांड की मौत हो गई, जबकि अन्य दो गाय 80 प्रतिशत तक जल गईं।
  1. 15 मई को भोला जिले में ईशनिंदा की अफवाह फैलाकर स्थानीय संघ के अध्यक्ष और उनके गुंडों ने लगभग 20 अल्पसंख्यक हिंदू पुरुषों को संघ परिषद कार्यालय में ले जाकर हमला किया। पुलिस चुप होकर केवल देखती रही।
  1. 16 मई को पटुआखली जिले के कालापारा के पखीमारा गाँव में एक बदमाश सुल्तान और उसके गुंडों ने एक अल्पसंख्यक हिंदू परिवार की जमीन हड़पने के लिए उनपर हमला कर दिया। इसमें 3 हिंदू महिलाएँ गंभीर रूप से घायल हो गई।
  1. 17 मई को कुछ अज्ञात बदमाशों ने दीनाम अपसिला के इन्सानगंज जिले के उझांदल गाँव के बौल रणेश चक्रवर्ती टैगोर (55) के घर में आग लगा दी। पुलिस अभी तक अपराधियों की पहचान नहीं कर पाई है।
  1. 18 मई को पुलिस ने ब्राह्मणबारिया जिले के नसीरनगर थाने के तिलपारा से एक हिंदू किसान मोहन लाल दास (48 वर्ष) का शव बरामद किया। वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन, बांग्लादेश चैप्टर की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हिंदू किसान का शव रसूलपुर के एक जूट के खेत में पाया गया था।
  1. 19 मई को बागोर जिले के मोरेलगंज के अंब्रिया गाँव में समीर हलधर (55) नाम के हिंदू पुजारी और उनकी पत्नी पर स्थानीय चेयरमैन शाहजहाँ अली खान और उनके गुंडे ने उनके आवासीय घर और जमीन पर कब्जा करने के लिए हमला किया।
  1. 25 मई को पटुआखाली जिले के एक हिंदू छत्र लीग कार्यकर्ता तपस दास की बर्लिस शेर-ए-बांग्ला मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान राजनीतिक बदला लेने के लिए हत्या कर दी गई थी।
  1. 28 मई को सुमा विष्णु नाम की हिंदू लड़की की पुरखों की जमीन हड़पने के लिए लोकल लैंड माफिया मोहम्मद अब्दुस सलाम ने उसपर हमला किया। इस दौरान लड़की के रोकने पर सलाम ने उसके सर पर लोहे की रॉड पर हमला किया।
  1. 28 मई को बोगरा जिले के शेरपुर पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले शहर घोषपारा में आतंकवादियों ने बिपुल महंत के एक हिंदू व्यापारी पर हमला किया। बदमाशों ने उनके घर में तोड़फोड़ की और घर में रखे गहने और अन्य कीमती सामान लूट लिया। हमले में उनके परिवार के सदस्य घायल हो गए।
  1. 29 मई: सतखीरा जिले के कालीगंज के फतेहपुर गाँव में झूठे आरोप में मोहम्मद अब्दुल जलील शफीकुल इस्लाम, मोहम्मद मामून और नकी खातून ने श्रीधाम विश्वास और सरल विश्वास के घर पर हमला किया और उन्हें देश छोड़ने को मजबूर किया। 

उल्लेखनीय है कि इस तरह अत्याचार बांग्लादेश में बेहद आम हो गए हैं। पिछली रिपोर्ट में हमने बताया भी था कि कैसे वहाँ इस्लामिक भीड़ ने मई महीने में कम से कम 10 मंदिरों को निशाना बनाया और हिंदुओं पर अत्याचार किए। यहाँ बता दें पाकिस्तान की तरह यहाँ पर हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होता है।  

हुसैन दलवई, नीरज भारती, कलैगनार TV, सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे: गलवान में सैनिकों के बलिदान पर बिगड़े बोल

हुसैन दलवई कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। नीरज भारती का फेसबुक प्रोफाइल बताता है कि वे हिमाचल प्रदेश में कॉन्ग्रेस के विधायक थे। कलैगनार टीवी का स्वामित्व उस डीएमके के पास है जो तमिलनाडु में कॉन्ग्रेस की सहयोगी है। गलवान में बलिदान देने वाले सैनिकों के नाम पर अनर्गल बयानबाजी के मामले में ये सब एक ही मोर्चे पर खड़े हैं।

हुसैन दलवई का कहना है कि चीन की तरफ से कोई सैनिक नहीं मरा है। भारतीय सेना को अपमानित करते हुए कहा है कि उन्हें वहाँ लाठी लेकर क्यों भेजा गया, क्या वहाँ आरएसएस की कोई शाखा थी? महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेता दलवई ने कहा कि भारत-चीन के बीच हुई झड़प में चीन की तरफ से कोई सैनिक नहीं मरा, सिर्फ हमारे जवान मारे गए हैं।

उन्होंने कहा, “हमने जवानों को लाठियाँ देकर क्यों बॉर्डर पर भेजा, क्या वहाँ RSS की शाखा थी? ऐसा है तो सैनिकों को क्यों आरएसएस के लोगों को ही बॉर्डर पर भेजो। वे सीमा पर पहरा देंगे।”

ये वही हुसैन दलवई हैं जिनसे मार्च में कोरोना वायरस को लेकर पत्रकारों ने सवाल किया था तो उन्होंने ‘करो ना प्यार है करो ना प्यार है’ गाना शुरू कर दिया था।

डीएमके के टीवी चैनल ने चीन के हमले को बताया जायज

राजनीतिक पार्टी डीएमके (DMK) के आधिकारिक ‘कलैगनार टीवी’ (Kalaignar TV) पर प्रसारित एक शो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें वरवणई सेंथिल (Varavanai Senthil) नाम के होस्ट को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पर गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हुए चीनी आक्रामण का बचाव करते देखा जा सकता है।

वीडियो में टीवी एंकर सेंथिल को चीन का समर्थन करते हुए करते हुए सुना जा सकता है कि भारतीयों के खिलाफ पीएलए सैनिकों द्वारा किया गया हमला मोदी सरकार की कुछ नीतियों की प्रतिक्रिया थी, विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करना।

हर प्रकार की ‘कॉन्सपिरेसी थ्योरी’ को पीछे छोड़ते हुए डीएमके के इस टीवी चैनल के एंकर का कहना है, “मोदी ने इजरायल के साथ लद्दाख और हिमाचल प्रदेश को यहूदी बस्तियों के रूप में बनाने के लिए एक अनौपचारिक समझौता किया है, इसे रोकने के लिए चीन ने कार्रवाई की है। चीन को यह काम सिर्फ इसलिए करना पड़ा क्योंकि मोदी ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा रद्द कर दिया और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया।”

‘चीन ने कुछ नहीं किया होगा… पुलवामा की तरह ही..’

विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले हिमाचल प्रदेश के पूर्व कॉन्ग्रेसी सरकार में संसदीय सचिव रहे नीरज भारती ने तो सारी हदें पार करते हुए अपने फेसबुक प्रोफ़ाइल पर बिहार रेजिमेंट के जवानों को साजिशाना तरीके से ‘मरवाने’ तक की बात कहते हुए लिखा है कि चीन ने कुछ किया ही नहीं होगा।

नीरज भारती ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है – “मुझे पूरा यकीन है कि बिहार में चुनावों को देखते हुए बिहार रेजिमेंट चाइना बॉर्डर पर लगाई गई और जान-बूझकर बिहार रेजिमेंट के जवानों को किसी शातिर तरीके से मरवाया गया है, ताकि बिहार चुनावों में राष्ट्रवादी माहौल बनाया जा सके। क्योंकि चाइना बॉर्डर पर कभी खून-खराबा होता ही नहीं है और इस बार भी चाइना ने कुछ नहीं किया होगा, बल्कि जैसे पुलवामा में पूरी सख्ती होने के बावजूद एक कार जवानों के काफिले में घुस गई थी और बहुत से जवान मारे गए थे, वैसे ही किसी चाल के तहत इस बार भी बिहार रेजिमेंट के और साथ में कुछ पंजाब रेजिमेंट के जवानों को मरवाया गया है… पर अक्ल के अंधे अंधभक्तों को ये बात समझ नहीं आएगी।”

नीरज भारती और विवादों का इतिहास पुराना है। ये वही नीरज भारती है जिनके खिलाफ गत अप्रैल माह में हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ पुलिस थाने और पंचरुखी पुलिस स्टेशन में हिन्दुओं के खिलाफ बेहूदा टिप्पणी करने पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने को लेकर FIR दर्ज हुई थी।

2018 में नीरज भारती तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और स्मृति ईरानी पर अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने भाजपा नेता स्मृति ईरानी को लेकर ‘बॉडी शेमिंग’ बेहूदा टिप्पणी की थी।

फेसबुक पर विवादित पोस्ट के जरिए लोकप्रियता तलाशने वाले नीरज भारती ने जन्माष्टमी पर भी श्रीकृष्ण भगवान की एक फोटो फेसबुक पर शेयर की थी, जिसमें वह पेड़ पर बैठे हैं और नीचे नग्न अवस्था में गोपियाँ थीं।

कोरोना वायरस और चीन के साथ हुई ताजा झड़प ने नीरज भारती को एकबार फिर से सुर्ख़ियों में आने में मदद की है। नीरज भारती का फेसबुक एकाउंट ऐसे ही तमाम बेसिर-पैर के आरोपों से भरा पड़ा है।

इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर देव कुमार ने भी चीन के साथ झड़प की तुलना बिहार चुनाव से की थी। चीन के साथ हुई झड़प को केंद्र सरकार का काम बताते हुए कहा था कि सरकार चीन के साथ बिहार चुनावों की वजह से लड़ रही है। उन्होंने यह भी दवा किया था कि लोकसभा चुनाव जीतने के लिए पुलवामा का आतंकी हमला करवाया गया था।

सोनू निगम ने लगाया सलमान खान पर आरोप: म्यूजिक इंडस्ट्री में एकाधिकार चलाते माफियाओं का किया खुलासा

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद बॉलीवुड इंडस्ट्री कई तरह की हलचल है। आए दिन बॉलीवुड के अलग-अलग सेलेब्रिटीज़ नेपोटिज्म और गुटबाजी को लेकर खुल कर अपनी बात रख रहें हैं। नए खुलासे कर रहे हैं। वहीं अब इसी कड़ी में गुरुवार (18 जून, 2020) को दिग्गज सिंगर सोनू निगम ने अपना एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया हैं।

अपनी वीडियो में उन्होंने बॉलिवुड की म्यूजिक इंडस्ट्री में म्यूजिक माफिया के खेमेबाजी का खुलासा किया हैं। साथ ही प्रॉफेशनल सिंगर्स को परेशान किए जाने का भी आरोप लगाया है। इस वीडियो की शुरुआत उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत के दुखद और असामयिक मौत पर प्रकाश डालते हुए की है।

वीडियो की शुरुआत में ही सिंगर सोनू निगम ने इस बात को स्पष्ट किया कि वो अपनी इस वीडियो के जरिए म्यूजिक प्रोडक्शन कंपनियों से रिक्वेस्ट करना चाहते हैं। अपने व्लॉग में सोनू निगम ने अपने फैंस से कहा, “क्योंकि आज सुशांत सिंह राजपूत मरा है। आप एक अभिनेता की मौत के बारे में सुन रहें है। कल को आप ये किसी गायक के बारे में ऐसा सुन सकते हैं, किसी संगीतकार के बारे में या किसी गीतकार के रूप में भी सुन सकते हैं क्योंकि एक्टिंग इंडस्ट्री की तुलना में म्यूजिक इंडस्ट्री में काफी बड़े माफिया हैं।”

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You might soon hear about Suicides in the Music Industry.

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वे कहते हैं “मैं बहुत लकी हूँ कि कम उम्र में यहाँ आया था और इन सबके चंगुल से निकल गया लेकिन प्रोडक्शन कंपनियों के रुख, युवाओं और टैलेंटेड सिंगर्स की मुश्किलों को देखकर मुझे दुख होता हैं। निर्माता, निर्देशक, संगीतकार किसी कलाकार के साथ काम करना चाहेंगे लेकिन म्यूजिक कंपनी कहेगी ये हमारा आर्टिस्ट नहीं है।”

सोनू निगम रिक्वेस्ट करते है, “मैं समझ सकता हूँ कि आप लोग (म्यूजिक कंपनी) बहुत बड़े लोग हो और आपके पास फ़िल्म और रेडियो इंडस्ट्री का पूरा कंट्रोल हैं, लेकिन प्लीज ऐसा मत करिए।” म्यूजिक इंडस्ट्री पर केवल दो कंपनियों का कब्जा है। उनके हाथों में ये ताकत है कि इसे गाने में इसे लो और इसे मत लो। बिजनेस करना ठीक है, लेकिन इस तरह रूल करना ठीक नहीं है।

ऐसे माफियाओं पर आरोप लगाते हुए सोनू निगम कहते है, “कभी-कभी देखता हूँ मैं कि नए संगीतकार, नए गीतकार, नए गायक खून के आँसू रोते हैं। अगर उन्हें कुछ हो गया कल को, तो आपके ऊपर ही प्रश्नचिह्न उठेगा। लेकिन ऐसा मत कीजिए, दुआ-बद्दुआ बहुत बड़ी चीज़ होती है, उनको टॉर्चर करना बंद कर दीजिए।”

बिना किसी एक्टर का नाम लिए, सोनू निगम सलमान खान की तरफ इशारा करते हुए अपने बारे में कहते हैं कि उन्हें और अरिजीत सिंह को कई बार उनके खुद के गानों को गाने के लिए रोका गया हैं। सोनू ने पूछा, “ये क्या है? आप अपनी पावर का इस तरह से इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? मेरे कितने गाने मैंने गा रखे हैं जो डंप हो चुके हैं। ये बहुत शर्मिंदगी पैदा करता है। मैं किसी से काम नहीं माँगता। पर वो मुझे बुला कर मुझसे गाना गवा कर फिर उसे डंप कर देते हैं। क्या ये कोई मजाक चल रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि मैं 1989 से म्ज़ूजिक इंडस्ट्री में हूँ। मेरे साथ ऐसा कर सकते हो तो छोटे बच्चों के साथ में क्या-क्या नहीं कर रहे होओगे आप लोग।

सोनू निगम ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि, “आप लोग एक ही गाने को 9-9 लोगों से गवाते हो। यह सही है?” सोनू निगम ने म्यूजिक प्रोडक्शन कंपनियों से आग्रह किया कि ये इंडस्ट्री में जो नए बच्चे हैं, आपकी सहायता चाहते हैं। इंसानियत के नाते थोड़ा सा दयालु बनिए।

उन्होंने दुखी होकर बोला कि, “एक गाने को 10 सिंगर से दस बार गाना गवाया जाता है, लेकिन उन सभी को बाद में डंप कर दिया जाता है। और फिर आप चाहते हो आपके लिए 11वां व्यक्ति गाना गाए। क्या इस तरह से गायकों, गीतकारों और संगीतकारों के साथ व्यवहार करना गलत नहीं है?”

उन्होंने आगे बताया कि किस तरह टैलेंटेड सिंगर अवसरों की तलाश में रह जाते हैं। अगर वें इनमें से किसी भी कंपनी के साथ काम नहीं करना चाहते हैं। इनके द्वारा गायकों को अपने जूते के नीचे रखा जाता हैं। सिंगर्स को हमेशा इन संघर्षों से जूझना पड़ता हैं।”

सोनू निगम ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि लोग इस वीडियो को देखने के बाद गुस्सा नहीं होंगे। मैं स्पष्ट कह रहा हूँ कि गायक, संगीत निर्देशक, और गीतकार जिन्होंने इन चीजों को झेला हैं, वे सभी मेरी बातों से से सहमत होंगे। डायरेक्टर, प्रोड्यूसर भी ख़ुश नहीं हैं। उन्हें उनकी मर्ज़ी का म्यूज़िक बनाने नहीं दिया जा रहा।”

सोनू निगम ने जोर देते हुए कहा कि म्यूजिक इंडस्ट्री सिर्फ दो लोगो के हाथों में नहीं होनी चाहिए। अगर म्यूजिक कम्पनियाँ ही सब कुछ डिसाइड करती हैं तो हुनर की जगह बिल्कुल कम हो जाएगी।

उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने मुंबई के अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। सुशांत की आत्महत्या से अभी तक हर कोई हैरान, स्तब्ध है। एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद से ही बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) का मुद्दा चर्चा में आ गया है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी लोग बॉलीवुड के बड़े फिल्ममेकर और एक्टर्स के विरोध में आ गए हैं।

बातों से से सहमत होंगे। डायरेक्टर, प्रोड्यूसर भी ख़ुश नहीं हैं। उन्हें उनकी मर्ज़ी का म्यूज़िक बनाने नहीं दिया जा रहा।”

सोनू निगम ने जोर देते हुए कहा कि म्यूजिक इंडस्ट्री सिर्फ दो लोगो के हाथों में नहीं होनी चाहिए। अगर म्यूजिक कंपनिया ही सब कुछ डिसाइड करती हैं तो हुनर की जगह बिल्कुल कम हो जाएगी।

उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने मुंबई के अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। सुशांत की आत्महत्या से हर कोई हैरान, स्तब्ध है। वहीं एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद से ही बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) का मुद्दा चर्चा में गया हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी लोग बॉलीवुड के बड़े फिल्ममेकर और एक्टर्स के विरोध में आ गए हैं।

शरजील इमाम को राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- राज्यों का जवाब जाने बिना नहीं दे सकते ऑर्डर

देशद्रोह के आरोपित व JNU के छात्र शरजील इमाम की याचिका पर सुनवाई करते हुए आज (जून 19, 2020) सुप्रीम कोर्ट ने उसके ख़िलाफ विभिन्न अदालतों में मुकदमा चलाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि इमाम की याचिका पर सभी पाँच राज्यों के जवाब देखे बगैर कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने इस संबंध में मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश से 2 सप्ताह के भीतर हलफनामा दायर करने को कहा है। दिल्ली और यूपी हलफनामा दायर कर चुकी है। अब इस मामले में तीन हफ्ते बाद सुनवाई होगी।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमणियन की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान कहा, “हम अन्य राज्यों के जवाब देखे बगैर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं कर सकते।”

असम के वकील ने कहा कि उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए कुछ और वक्त चाहिए। इस पर पीठ ने कहा, “हम समय देंगे”। इसके साथ ही पीठ ने असम, मणिपुर और अरूणाचल प्रदेश को याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दे दिया। 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि उसके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में दर्ज FIR को एक साथ संलग्न किया जाए और एक ही एजेंसी जाँच करे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया।

शरजील इमाम ने पिछले साल सीएए विरोधी प्रोटेस्ट के दौरान भड़काऊ बयान देकर असम को भारत से अलग करने की बात की थी। मामला तूल पकड़ने के बाद शरजील ने कई दिनों तक पुलिस से बचने का प्रयास किया। मगर बाद में उसकी गिरफ्तारी बिहार के जहानाबाद से हुई थी। पूछताछ में पता चला था कि शरजील भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता था। अपने इस काम के लिए उसने मस्जिदों में भड़काऊ पर्चे बँटवाए थे।

इससे पहले 26 मई को शरजील की याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई की थी। मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण, संजय किशन कौल और एमआर शाह की बेंच ने असम, यूपी, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश को नोटिस जारी किया था। इन राज्यों में शरजील के खिलाफ FIR दर्ज है।

डीएस बिंद्रा के ‘लंगर’ से क्विंट की मोहब्बतें: कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या की चार्जशीट में नाम, बचाव में उतरा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों को लेकर मीडिया का एक धड़ा शुरुआत से ही इन कोशिशों में जुटा हुआ है कि किसी तरह इसे मुस्लिम विरोधी दंगा साबित किया जाए। इसी क्रम में मीडिया गिरोह न केवल मुस्लिम समुदाय के अपराधों को छिपाने का प्रयास कर रहा है, बल्कि दंगों को उकसाने वाले लोगों को निर्दोष साबित करने की भी कोशिश कर रहा है।

ताजा कारनामा द क्विंट ने किया है। द क्विंट ने अपने लेख के जरिए डीएस बिंद्रा नाम के उस आरोपित को बचाने का प्रयास किया है, जिस पर बकायदा चार्जशीट में आरोप लगा है कि उसने उन दंगों को भड़काने का काम किया, जिसमें कॉन्स्टेबल रतनलाल की जान गई थी।

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की चार्जशीट पर अपनी हालिया एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में हमने आपको बताया था कि हलफनामे में क्या आरोप लगाए गए हैं। चार्जशीट में लिखा था कि षड्यंत्रकारी ये बात पहले से जानते थे कि दंगे हो सकते हैं। इसलिए उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों को हथियार से लैस रहने को कहा था।

चार्जशीट में कहा गया, “23 फरवरी को संयोजकों, षड्यंत्रकारियों, दंगाइयों की चांद बाग में एक बैठक हुई। इस बैठक में उन्हें लोहे की रॉड, डंडे, पेट्रोल बम आदि के साथ तैयार रहने को कहा गया। अगले दिन 24 तारीख को 1 बजे, प्लान के मुताबिक दंगे शुरू हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला किया। कई पुलिस वाले उस हमले में घायल हुए। कॉन्स्टेबल रतनलाल इसमें मारे गए।”

बता दें दिल्ली के हालातों को देखते हुए घटना से पहले बीट अधिकारियों को नियमित रूप से इलाके में तैनात किया गया था, ताकि कानून-व्यवस्था को सुनिश्चित किया जा सके। रतनलाल की हत्या के बाद, इन्हीं दो बीट अधिकारियों से पूछताछ हुई और उनके बयानों से तथ्यों का पता लगाया गया। उन्होंने खुलासा किया कि सलीम खान, सलीम मुन्ना, डीएस बिंद्रा, सुलेमान सिद्दीकी, अयूब, अतहर, शादाब, उपासना, रविशंद अन्य लोग आयोजक थे।

The Quint article shielding DS Bindra

लेकिन, ऑपइंडिया के रिपोर्ट करने के बाद, द क्विंट ने दिल्ली क्राइम ब्रांच द्वारा दायर चार्जशीट पर न केवल रिपोर्ट की, बल्कि डीएस बिंद्रा को बेक़सूर साबित करने की कोशिश की।

क्विंट ने अपने आर्टिकल की हेडलाइन दी- “क्या लंगर लगाना जुर्म है?: डीएस बिंद्रा का नाम दंगों से जोड़ा जा रहा है।” अपने इस लेख में द क्विंट ने केवल उन्हीं लोगों की बात पेश की है जिन्होंने डीएस बिंद्रा की भूमिका केवल लंगर बाँटने या फिर प्रोटेस्ट आयोजित करने तक बताई। लेकिन यहाँ उन बिंदुओं को बिलकुल दरकिनार कर दिया गया जिसके कारण डीएस बिंद्रा का नाम चार्जशीट में है।

उदहारण के लिए लेख में नज्म उल हसन का बयान जोड़ा गया। उसने बताया कि डीएस बिंद्रा ने स्थानीय लोगों से सीएए के ख़िलाफ प्रदर्शन का अनुरोध किया था और कहा, “मैं लंगर और मेडिकल कैंप लगाऊँगा। पूरा सिख समुदाय आपके साथ है। अगर आप लोग आगे नहीं आओगे तो आप लोगों की किस्मत भी वैसी ही हो जाएगी जैसे 1984 में सिखों की हुई थी।”

The Quint article shielding DS Bindra

दिलचस्प बात ये है कि इस लेख में द क्विंट ने ऑपइंडिया का नाम भी शामिल किया और कहा कि हमने अपनी रिपोर्ट में केवल डीएस बिंद्रा पर लगे आरोपों के बारे में बात की है। साथ ही यह बताया है कि बिंद्रा AIMIM का सदस्य है, जबकि बिंद्रा के अनुसार तो उनका कनेक्शन किसी राजनैतिक पार्टी से है ही नहीं।

अब आपको बता दें कि ऑपइंडिया ने जिस चार्जशीट के संबंध में रिपोर्ट की थी वह 1100 पन्नों की है और इसका एक हिस्सा ऑपइंडिया द्वारा एक्सेस किया गया था। शायद ये बात तो द क्विंट के पत्रकार भी जानते ही होंगे कि किसी भी लंबी चार्जशीट के बारे में एक बार में रिपोर्ट करना संभव नहीं है। हाँ, ये बात और है कि अगर वह हिस्सों में बँटी है, तो उसे आसानी से समझा जा सकता है।

क्विंट ने डीएस बिंद्रा की टिप्पणी को आपने आर्टिकल में जोड़ा। इसमें बिंद्रा ने आरोप लगाया था कि ऑपइंडिया ने उनसे बात करने की कोशिश नहीं की। जबकि आरोपों पर सफाई देना उनका अधिकार है। यहाँ बता दें कि हमारी रिपोर्ट दिल्ली क्राइम ब्रांच की एफआईआर पर थी। अगर, बिंद्रा अपने आप को डिफेंड करना चाहते ही हैं तो उन्हें पुलिस के सामने या फिर कोर्ट के सामने खुद के बचाव में बोलना चाहिए। चार्जशीट पर रिपोर्ट करते हुए हमें क्या आवश्यकता कि हम आरोपित से उसका पक्ष जानें। हमने केवल वह बातें लिखीं थी, जो चार्जशीट में कही गई।

यहाँ बता दें कि द क्विंट की ऐसी हरकत ज्यादा हैरान करने वाली नहीं है। लेकिन इन प्रयासों में यह गौर करने वाली बात जरूर है कि पूरे वामपंथी मीडिया ने क्यों चार्जशीट पर रिपोर्ट करते हुए इस बात का जिक्र तक नहीं किया कि इसमें डीएस बिंद्रा का नाम भी शामिल है।

याद दिला दें, प्रदर्शन के दौरान लंबे समय से डीएस बिंद्रा की तारीफों के पुलिंदे मीडिया में बाँधे जा रहे थे। मगर, चार्जशीट से संबंधित सभी जानकारी होने के बाद भी इस पूरे लेफ्ट इकोसिस्टम ने अपने पाठकों के सामने सत्य बताने की कोशिश नहीं की। इसका मतलब साफ है कि वह केवल दंगाइयों को, षड्यंत्रकारियों को बचाने का प्रयास कर रहे।