Saturday, July 31, 2021
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चीन सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए अयोध्या में राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण कार्य को किया स्थगित

अयोध्या में राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने श्रीराम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन कार्यक्रम को फिलहाल टाल दिया है। साथ ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया है कि देश की परिस्थितियों को देखकर आने वाले समय में नई तारीख का ऐलान किया जाएगा।

गलवान घाटी में भारत और चीन की सेना के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए अयोध्या में राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने श्रीराम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन कार्यक्रम को फिलहाल टाल दिया है। साथ ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया है कि देश की परिस्थितियों को देखकर आने वाले समय में नई तारीख का ऐलान किया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने पहले तो सीमा पर शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि सीमा पर फिलहाल स्थिति गंभीर है, जो कि देश के लिए चिंता का विषय है। इसलिए देश की सुरक्षा हम सभी के लिए सबसे पहले है।

ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, “निर्माण (मंदिर का) शुरू करने का निर्णय देश में स्थिति के अनुसार लिया जाएगा और आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा भी की जाएगी।”

दरअसल, चीन सीमा पर 20 सैनिकों के वीरगति को प्राप्त होने के बाद देश में जगह-जगह चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए और चीनी सामानों का भी बहिष्कार किया गया। इस बीच अयोध्या में भी हिंदू संगठनों ने चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद पीटीआई ने खबर दी थी कि ट्रस्ट ने अयोध्या में मंदिर का निर्माण शुरू करने की योजना को फिलहाल स्थगित कर दिया है।

वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो लाखों नागा साधु अपनी स्वेच्छा से सेना की मदद करने को तैयार हैं।

गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के खिलाफ चीनी सेना द्वारा किए गए नृशंस हमले की निंदा करते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि भारतीय सेना सीमा पर चीनी सैनिकों को संभालने में सक्षम है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो लाखों नागा साधु भी मातृभूमि की रक्षा के लिए स्वयंसेवक होंगे।

उन्होंने कहा नागा साधु शास्त्र (धार्मिक ग्रंथ) और शस्त्र (हथियार) में समान रूप से माहिर हैं, “नागा साधुओं को मार्शल आर्ट में भी प्रशिक्षित किया जाता है और वे त्रिशूल, तलवार, बेंत और भाले भी अपने साथ ले जा सकते हैं”।

गिरी ने आगे बताया कि नागा सन्यासियों ने एक बार मुगल उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, हालाँकि आज की स्थिति अलग है। गिरि ने कहा देश की स्वतंत्रता के बाद से नागाओं को सैन्य गतिविधियों में सक्रिय रहने की कोई आवश्यकता नहीं थी, इसलिए उन्होंने धर्म की ओर रुख किया।

गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हिंसक झड़पें

आपको बता दें कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ सोमवार (15 जून, 2020) को भारतीय सेना की हिंसक झड़प हो गई थी। इस घटना में भारत के 20 सैनिक वीर गति को प्राप्त हो गए थे।

1999 में कारगिल युद्ध के बाद यह भारतीय सेना की सबसे बड़ी क्षति है। यह लड़ाई 1967 के बाद से भारत और चीन के बीच सबसे तीव्र सैन्य लड़ाई का संकेत देती है। 1967 की लड़ाई में भी करीब 80 भारतीय सैनिक और कम से कम 300 चीनी PLA सैनिक मारे गए थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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