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सफाई करने वाली महिला, बच्चियों को भी बनाता था शिकार: मैसूर के बिशप पर हाईकोर्ट के पूर्व जज ने लगाए गंभीर आरोप

बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज माइकल एफ सल्धाना ने मैसूर के बिशप केए विलियम पर आतंक का साम्राज्य चलाने का बड़ा आरोप लगाया है। साथ ही उसके वरिष्ठ पीटर मचाडो पर उसके कृत्यों को ढकने और हत्या जिसे अपराधों का भी बचाव करने का आरोप लगाया है।

रिटायर्ड जस्टिस ने मई 29, 2020 को दोनों बिशप को भेजे गए लीगल नोटिस में कहा कि विलियम का अंडरवर्ल्ड माफिया से साँठगाँठ है और वो स्थानीय पुलिस का भी सुरक्षा के लिए उपयोग करता है।

उन्होंने कहा कि इस व्यक्ति को पिछले कई सालों से हटने को कहा जा रहा है, लेकिन उसके कारण दूसरों को ही कैथोलिक चर्च को छोड़ना पड़ रहा है। उन्होंने लिखा कि उसे 8 महीने पहले ही हटा दिया जाना चाहिए था, लेकिन उसका वरिष्ठ उसके साथ मिलकर हत्या जैसे मामलों को भी ढक रहा है।

उन्होंने दावा किया कि कई विश्वसनीय और प्रतिष्ठित लोगों ने मचाडो को सबूतों के साथ 17 बार लिखित शिकायतें भेजी, लेकिन उसकी कान पर जूँ तक न रेंगी।

पूर्व जस्टिस ने ताज़ा मामलों की बात करते हुए कहा कि बिशप विलियम ने 12 घंटे के शॉर्ट नोटिस में बैठक बुला कर ट्रांसफर ऑर्डर्स जारी कर दिए, ताकि अपने विरोधियों को हटा सके। उन्होंने कहा कि जब कोर्ट से लेकर सरकार तक में इस आपदा के वक़्त ऐसे फैसले नहीं लिए जा रहे हैं, बिशप ऐसे समय में ट्रांसफर कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही इसे वापस नहीं किया गया तो कुछ कड़े क़दम उठाए जाएँगे।

उन्होंने उन 37 पादरियों से बातचीत की, जो बिशप के खिलाफ हैं। पूर्व जज ने ‘मिड डे’ से बात करते हुए कहा कि जब भी महिलाओं के साथ संबंधों में बिशप विलियम को कोई समस्या आई, उसने चर्च के रुपए ख़र्च कर चीजें सेटल की। एसोसिएशन ऑफ कंसर्नड कैथोलिक्स के सेक्रेटरी मेल्विन फर्नांडिस ने कहा कि कई पादरियों की हत्या को एक्सीडेंट का रूप दे दिया गया। उन्होंने निर्दोष पादरियों की हत्या की पुलिसिया जाँच की माँग की।

आर्कबिशप मचाडो ने इस बारे में कहा कि उनके पास ऐसी जो भी शिकायतें आती हैं, उसे वो दिल्ली में अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों के पास भेज देते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले को भी वो ऊपर भेज चुके हैं। बिशप विलियम ने अब तक इन आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया है।

इससे पहले नवम्बर 2019 में मैसूर में 37 चर्चों के पादरियों ने पोप फ्रांसिस को पत्र लिख कर बिशप केए विलियम को अपदस्थ करने की माँग की थी। उनके ख़िलाफ़ आपराधिक कृत्य, फंड्स का दुरुपयोग और यौन शोषण सहित कई आरोप लगाए गए थे। पादरियों ने वेटिकन को पत्र लिख कर कहा था कि बिशप ने एक महिला से शादी की है, जो बंगलुरु ओडीपी में कार्यरत है। साथ ही बिशप पर गुटबंदी और अपने ख़ास लोगों को फेवर करने का आरोप भी लगा था।

बिशप पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए थे। बिशप ने जिस महिला से शादी की है, वो पहले से ही शादीशुदा थी। उसकी एक बेटी भी थी। शादी के बाद बिशप और उस महिला का एक बेटा हुआ। आरोप लगाया गया है कि उक्त महिला के पति ने उसे बिशप के साथ विवाहेतर संबंधों के कारण छोड़ दिया था। अब वो महिला अपने बच्चों के साथ अलग रहती है। पादरियों ने लिखा है कि बिशप उससे मिलता रहता है और परिवार की देखभाल भी करता है।

पादरियों ने एक प्रेस नोट जारी कर बिशप विलियम के व्यवहार को अनैतिक और पापपूर्ण बताते हुए कहा कि उस पर न सिर्फ़ रुपयों की हेराफेरी और यौन शोषण, बल्कि हत्या और अपहरण तक के आरोप हैं। क्लर्जी में उसके करियर के दौरान बिशप विलियम पर लगे आरोपों को लेकर पादरियों ने कई घटनाओं का उदाहरण दिया। हिंकल पैरिश के पादरियों ने आरोप लगाया कि वहाँ बिशप विलियम के एक एंग्लो-इंडियन महिला के साथ सम्बन्ध थे।

आरोप है कि बिशप ने उक्त महिला को गर्भवती कर दिया था। फ़िलहाल वो अपने बच्चे के साथ विदेश में शिफ्ट हो गई है। पत्र में एक अन्य घटना के बारे में बताया गया है, जब बिशप हाउस के एक कमरे में कर्मचारियों ने बिशप विलियम को महिला के साथ हमबिस्तर देखा था। पादरियों का कहना है कि उसके लिए महिलाओं की सहमति लेना आसान था, क्योंकि वो अपने अंतर्गत कार्यरत महिलाओं को तमाम तरह के लालच देता था।

पत्र की मानें तो वो महिलाओं को घर और नौकरी से लेकर हर प्रकार की लग्जरी सुविधाएँ उपलब्ध कराता था। कैम्पस में साफ़-सफाई करने आने वाली महिलाओं और लड़कियों का भी उसने यौन शोषण किया था। उसके ख़िलाफ़ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत कई मामले दर्ज हैं। उसने कई डील्स में हिस्सेदारी कर अपने लिए किकबैक के तहत रुपए और संपत्ति जुटाए। उसकी कई सम्पत्तियाँ जाँच के दायरे में है।

सफूरा जरगर का कॉन्ग्रेस से भी था रिश्ता, NSUI की जनरल सेक्रेटरी थी जामिया में… CAA प्रदर्शन में बुलाया था कई कॉन्ग्रेसी नेताओं को

दिल्ली में हिन्दू-विरोधी दंगों के मामले में गिरफ़्तार की गई सफूरा ज़रगर जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन ‘नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की जनरल सेक्रेटरी थीं। वो NSUI के जामिया यूनिट की महासचिव थीं। अप्रैल 2018 में सफूरा द्वारा ट्वीट किए गए एक फोटो में वो NSUI का बैनर लेकर खड़ी दिख रही हैं। उसमें उन्होंने NSUI के नेशनल सेक्रेटरी गुलजेब अहमद को भी टैग कर रखा है।

वहीं जनवरी 2017 को ट्वीट किए गए एक अन्य फोटो में भी सफूरा ज़रगर ने NSUI को टैग कर रखा है। मूल रूप से जम्मू कश्मीर से सम्बन्ध रखने वाली सफूरा ज़रगर मई 2018 तक कॉन्ग्रेस के NSUI के जामिया यूनिट की जनरल सेक्रेटरी थी। उसी महीने टीम को भंग कर दिया गया था लेकिन तब तक वो पद पर बनी रही थीं। सफूरा ज़रगर NSUI के विभिन्न कार्यक्रमों को अटेंड करती थीं और इसके नेताओं से मिलती थीं।

बता दें कि सफूरा ज़रगर को दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में संलिप्तता के लिए पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किया जा चुका है। अदालत में उसकी जमानत याचिका ख़ारिज होने के बाद वामपंथी गैंग ने उसके गर्भवती होने की बात उठाते हुए हंगामा मचाया। हालाँकि, तिहाड़ जेल में 2013-18 के बीच 24 बच्चों का जन्म हुआ है, जिसके लालन-पालन की उचित व्यवस्था की गई। साथ ही झूले, खिलौने और शिक्षा तक की व्यवस्था की जाती है। उन बच्चों को उचित मेडिकल केयर दिया जाता है।

सफूरा ज़रगर ने दिल्ली दंगों के दौरान जाफराबाद मेट्रो के पास मेन रोड को जाम करने में अहम भूमिका निभाई थी। पुलिस का कहना है कि उसने महिलाओं और बच्चों को भड़का कर हिंसा करवाया था। हाल ही में इस मामले में दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दायर कर आम आदमी पार्टी के (अब निलंबित) पार्षद ताहिर हुसैन को आरोपित बनाया है। सफूरा ज़रगर “दिल्ली तेरे खून से, इंकलाब आएगा” नारा लगाती भी देखी गई थी। उस समय वहाँ अरुंधति रॉय भी मौजूद थी।

सफूरा ज़रगर जामिया कॉर्डिनेशन कमिटी की कोऑर्डिनेटर भी थीं। सीएए के विरोध में हुए प्रदर्शन और हिंसा में उसका अहम रोल था। जामिया मिलिया इस्लामिया में हो रहे सीएए प्रदर्शनों में कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेता शामिल हुए थे। वहाँ गेस्ट स्पीकर्स की व्यवस्था करने में सफूरा ज़रगर का अहम किरदार था। शशि थरूर से लेकर सलमान खुर्शीद तक जैसे कॉन्ग्रेस नेताओं ने जामिया में हो रहे प्रदर्शनों में शिरकत की थी।

शशि थरूर ने जनवरी 2020 में जामिया में प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए कहा था कि असहमति का अधिकार हमारे देश में सबसे ज्यादा क़ीमती है।उन्होंने जामिया और जेएनयू में हिंसक दंगाइयों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा था कि यहाँ छात्रों के साथ बेशर्मी से दुर्व्यवहार किया गया है। साथ ही उन्होंने पुलिस द्वारा लाइब्रेरी में घुस कर छात्रों की पिटाई करने का आरोप लगाया था। उन्होंने सीएए को एनआरसी से भी जोड़ कर देखा था। उनके साथ दिल्ली कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा भी जामिया गए थे।

वहीं वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने तो एक छोटे से बच्चे से आज़ादी का नारा लगवाया था। फ़रवरी 2020 में जामिया मिलिया इस्लामिया पहुँचे सलमान खुर्शीद के सामने अपनी माँ की गोद से ही बच्चे ने नारा लगाया था ‘हम छीन के लेंगे’, जिस पर खुर्शीद व अन्य ने चिल्ला कर जवाब दिया था- ‘आज़ादी’। विवाद होने के बाद उन्होंने पूछा था कि क्या आज़ादी हमारे देश में एक बुरा शब्द हो गया है। क्या लोगों के पास फ्री स्पीच का अधिकार नहीं?

इससे पहले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सफूरा ज़रगर की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि ऑन रिकॉर्ड बातों को ध्यान में रखते हुए, ये नहीं कहा जा सकता कि अभियुक्त के ख़िलाफ़ कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं है। इससे पहले भी दो बार सफूरा जरगर की याचिका को खारिज की जा चुकी है। इससे पूर्व पटियाला कोर्ट ने जरगर की बेल याचिका को खारिज करते हुए उसकी न्यायिक हिरासत की अवधि 25 जून तक बढ़ा दी थी।

उससे पहले 23 अप्रैल को मेट्रोपोलिटियन मजिस्ट्रेट वसुंधरा छौंकर ने सफूरा को आरोपों को मद्देनजर राहत देने से मना कर दिया था। सफूरा जरगर के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला चल रहा है। उसपर आरोप है कि उसने जाफराबाद-सीलमपुर में 50 दिनों के हंगामा की साजिश रची थी और वहाँ महिलाओं-बच्चों को बिठाने के लिए पूरा जोर लगाया था। कॉन्ग्रेस के फिरोज खान ने सफूरा को रिहा करने की माँग की थी।

गर्भवती होते हुए भी नक्सलियों से मोर्चा लेने वाली कमांडो सुनैना पटेल ने बेटी को दिया जन्म

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके में तैनात कमांडो सुनैना पटेल की कहानी इस साल इंटरनेशनल वूमेंस डे पर इंटरनेट पर छाई हुई थी। इसकी वजह थी गर्भवती होते हुए भी मोर्चे पर उनका डटे रहना। यह स्टोरी न्यूज एजेंसी एएनआई के रिपोर्टर लोकेश ने की थी।

छत्तीसगढ़ की ‘सुपर वुमन’ सुनैना पटेल ने नक्सलियों से लड़ने के लिए दंतेश्वरी फाइटर की टीम लीडर के तौर पर तब ज्वाइन किया था, जब वह दो महीने की गर्भवती थीं।

इसके बाद से वह मोर्चे पर लगातार डटी रहीं। अधिकारियों के कहने पर भी गर्भ के दौरान छुट्टी नहीं ली। एके-47 व अन्य हथियारों तथा 10 किलो का बैग पीठ पर लादकर पेट्रोलिंग करती रहीं।

अब एएनआई के रिपोर्टर तन्मय ने ट्वीट कर बताया है कि सुनैना ने एक बच्ची को जन्म दिया है। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। इसके साथ ही उसने बेटी के साथ सुनैना की कुछ तस्वीरें भी शेयर की है।

दंतेवाड़ा के एसपी के मुताबिक ड्यूटी के दौरान एक बार सुनैना का गर्भ गिर चुका था। बावजूद इसके उन्होंने अपने कत्वर्य से पैर पीछे नहीं खींचे। हर किसी को उसकी और उसके बच्चे की चिंता थी। उन्होंने बताया कि सुनैना का हौसाल अन्य महिलाओं को भी नक्सल विरोधी फोर्स ज्वाइन करने की प्रेरणा देगा।

सुनैना के बेटी को जन्म देने की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया में कई लोगों ने मॉं-बेटी के स्वास्थ्य की कामना करते हुए बधाई दी है। कहा है कि उनकी कहानी युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगी और महिलाओं को राष्ट्र विरोधी ताकतों के खिलाफ मोर्चा लेने के लिए फोर्सेस ज्वाइन करने को प्रेरित करेगी।

निःस्वार्थ सेवा कर रहे डॉक्टरों को धमका रहे केजरीवाल: मेडिकल एसोसिएशन ने दिल्ली CM के बयान की निंदा की

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (DMA) ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर निशाना साधा है और उनके द्वारा डॉक्टरों को चेतावनी दिए जाने के लहजे पर सवाल खड़ा किया है। एसोसिएशन ने कहा कि सीएम केजरीवाल जिस तरह से हॉस्पिटलों को धमका रहे हैं, वो निंदनीय है। साथ ही सर गंगाराम हॉस्पिटल पर हुए एफआईआर की भी निंदा की गई है। एसोसिएशन ने कहा कि दिल्ली सरकार पूरे मेडिकल फ्रेटर्निटी को विलेन बना कर पेश कर रही है।

ये पूरा मुद्दा मरीजों को एडमिट करने और उनकी कोरोना वायरस टेस्टिंग करने से जुड़ा हुआ है। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने ध्यान दिलाया कि सभी डॉक्टरों पिछले दो महीने से अपनी जान हथेली पर रख कर कोविड-19 आपदा के बीच लोगों की सेवा में लगातार लगे हुए हैं, और उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, उससे वो अपमानित महसूस कर रहे हैं। एसोसिएशन ने कहा कि अस्पताल स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं और सभी मरीजों का इलाज करता है, वो कोरोना संक्रमित हों या नहीं हों।

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन का आरोप है कि अस्पतालों के जनसेवा के लिए उनकी सराहना किए जाने की बजाए दिल्ली सरकार द्वारा उनके लिए नित नए फरमान जारी किए जा रही है। एसोसिएशन का कहना है कि सर गंगाराम अस्पताल ने पिछले एक दशक में लाखों ज़िंदगियाँ बचाई हैं और आज उसे ही धमकी दी जा रही है। डीएमए ने कहा कि ये कर्मचारियों को डराने और धमकाने का मामला है, जिनकी वो निंदा करता है। उसने आगे कहा:

“आपदा की इस घड़ी में दिल्ली के सभी डॉक्टर काम के अतिरिक्त बोझ तले दबे हुए हैं और काफ़ी ज्यादा तनाव में हैं। दिल्ली सरकार बिना किसी ज़रूरत के स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बना रही है। डीएमए के 15,000 सदस्य और सभी शाखाएँ केजरीवाल सरकार के व्यवहार की निंदा करती है। हम पिछले 100 सालों से जनसेवा के प्रति समर्पित हैं और लाख रुकावटें आने के बावजूद यही करते रहे हैं। निःस्वार्थ भाव से जनसेवा कर रहे डॉक्टरों के सम्मान पर आँच नहीं आने दिया जाएगा। जो लोग ज़मीनी हकीकत से वाकिफ हैं, उन्हें पता है कि इस आपदा के समय डॉक्टरों को कितनी मेहनत करनी पड़ रही है और किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है।”

डीएमए ने माँग की है कि एक कॉर्डिनेशन कमिटी बनाई जाए, जिसमें उसके सदस्यों के साथ-साथ दिल्ली सरकार के भी अधिकारी हों। यही कमिटी कोरोना आपदा का उचित प्रबंधन और स्वास्थ्य व्यवस्था की सुविधाओं की निगरानी करे और फ़ैसले ले। साथ ही कोविड-19 की टेस्टिंग कर रहे सभी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स में एक डेडिकेटेड लैब फैसिलिटी की माँग की गई है। एसोसिएशन ने कहा है कि अस्पतालों को कोरोना की जाँच और इलाज हेतु पर्याप्त टेस्टिंग की व्यवस्था की जाए।

दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन की ये भी माँग की है कि कोरोना से होने वाली मौतों के मामले में शव को ले जाने और उसका अंतिम संस्कार करने के मामले में दिशा-निर्देशों के पालन के लिए एक योग्य सिस्टम बनाया जाए। ऐसा ही गंभीर रूप से बीमार मरीजों को रेफर करने के मामले में भी किया जाए। साथ ही कोरोना मामलों की निगरानी के लिए हर क्षेत्र में एक नोडल अधिकारी तैनात करने की माँग भी की गई है।

बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवील ने कहा था कि कोई भी अस्पताल किसी भी मरीज को एडमिट करने से इनकार नहीं कर सकता और अगर कोरोना के लक्षण किसी में दिख रहे हैं तो अस्पताल को उसके इलाज की उचित व्यवस्था करनी ही है। साथ ही उन्होंने कहा था कि कुछ अस्पताल ‘दूसरी पार्टी में’ बैठे अपने आकाओं के दम पर उछल रहे हैं और मनमानी कर रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जिसने माँ सीता के लिए लिखी गाली, वो मैं नहीं… मेरा हमनाम है: GoAir से निकाले गए आसिफ खान का दावा

सोशल मीडिया पर लोग ऐसी चर्चा कर रहे हैं कि एयरलाइन्स कम्पनी GoAir ने माँ सीता पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले आसिफ खान की जगह किसी और आसिफ खान के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर दी है। रूपा मूर्ति ने एक ट्वीट शेयर किया, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि जिस आसिफ खान ने ये हरकत की थी, वो GoAir के केबिन क्रू का हिस्सा है जबकि जिस आसिफ खान को GoAir ने निकाल बाहर किया है, वो पायलट है।

रूपा ने अभद्र टिप्पणी करने वाले आसिफ खान और पायलट आसिफ खान के प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट शेयर किया। इसमें दिख रहा है कि आरोपित आसिफ खान ने खुद को GoAir के केबिन क्रू का हिस्सा बताया है और साथ ही राजनीतिक विज्ञान का छात्र भी लिखा है। उसने अपनी प्रोफाइल पर लिखा है कि वो सेक्युलर है और अंधभक्त नहीं है। वहीं पायलट आसिफ खान ने अपना लोकेशन मुंबई डाला हुआ है। उसकी प्रोफाइल पर दिलीप मंडल का ट्वीट रीट्वीट हुआ दिख रहा है।

पायलट आसिफ खान ने भी फेसबुक पर अपना दर्द बयाँ किया है। उन्होंने लिखा कि वो 2 दिनों से नारकीय घटनाक्रम से गुजर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया है कि जिस आसिफ ने ये हरकत की, वो अलग है। उसे तो इस बारे में तब पता चला जब उसके वरिष्ठ अधिकारियों का कॉल आया। उसने देखा तो उसे पता चला कि उसके नाम से ट्विटर पर भद्दी टिप्पणियाँ की गई हैं। अपनी सफाई में पायलट आसिफ ने लिखा है कि ये उसका पहला ‘ड्रीम जॉब’ है और एक घटना के कारण सब कुछ रुक सा गया है।

आसिफ ने लिखा कि एक यूट्यब चैनल ने ये कन्फ्यूजन क्रिएट किया था। उस मामले में उन्होंने थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है। अभद्र टिप्पणी करने वाले अकाउंट के बारे में आसिफ ने कहा कि वो उनका अकाउंट नहीं है। साथ ही उन्होंने GoAir से इस मामले में जाँच की गुहार लगाते हुए न्यायिक व्यवस्था में भरोसा जताने की बात कही है। उनका कहना है कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

हालाँकि, सच्चाई GoAir द्वारा स्पष्टीकरण जारी करने के बाद ही सामने आएगी, जो अब तक नहीं आया है। वहीं केबिन क्रू वाला मोहम्मद आसिफ खान का ट्विटर अकाउंट डिलीट हो चुका है। ऐसे में लोग ये सवाल कर रहे हैं कि क्या असली गुनाहगार बच कर निकल गया या फिर दोनों एक ही हैं?

पायलट आसिफ खान का दावा सच्चा या झूठा?

इससे पहले ख़बर आई थी कि सोशल मीडिया पर सीता माता को लेकर अभद्र टिप्पणी करने वाले ट्रेनी ऑफिसर आसिफ खान को गोएयर (GoAir) ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। एयरलाइन ने कहा कि किसी व्यक्ति या कर्मचारी के निजी विचारों से उसका कोई लेना-देना नहीं है। गोएयर ने कहा था कि हमारी नीति सभी कर्मचारियों के लिए शून्य सहिष्णुता की है, जिसमें कर्मचारियों को रोजगार नियमों का पालन करना पड़ता है, इसमें सोशल मीडिया का भी व्यवहार शामिल है।

जिस गर्भवती गाय को खिलाया गया था बम, उसने दिया बछड़ा… विस्फोटक खिलाने वाला आरोपित भी गिरफ्तार

हिमाचल में बिलासपुर जिले के झंडुत्ता इलाके में एक गर्भवती गाय को विस्फोटक मिश्रित खाद्य पदार्थ देकर घायल करने वाले आरोपित नंद लाल को शनिवार (6 जून 2020) को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 429 और पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत मामला दर्ज किया है।

बता दें कि जख्मी गाय ने इलाज के दौरान एक बछड़े को जन्म दिया है। घायल गाय के मुँह और जबड़े में गंभीर चोटें आई हैं। साथ ही घायल जगह से कुछ हिस्सों और खून को लेकर फोरेंसिक प्रयोगशाला में जाँच के लिए भी भेजा गया हैं। पशु चिकित्सकों का कहना है कि गाय अब नॉर्मल दिनों की तरह ढेर सारा चारा एक साथ नहीं खा सकेगी।

गाय को विस्फोटक खिलाने के मामले ने तूल तब पकड़ा, जब उसकी वीडियो वायरल होने के बाद खुद हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इसमें सीधे हस्तक्षेप किया। साथ ही घटना पर सख्त निर्देश देते ही उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आदेश मिलते ही पुलिस ने आरोपित को 24 घण्टे के अंदर ही जेल में डाल दिया। खुद डीएसपी बिलासपुर संजय शर्मा मौके पर पहुँचे थे। पुलिस ने मामले में आगे के कार्रवाई शुरू कर दी है।

दरअसल हिमाचल में बिलासपुर जिले के झंडुत्ता इलाके में एक गर्भवती गाय को किसी ने विस्फोटक खिला दिया, जिससे गाय बुरी तरह से घायल हो गई थी। सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे एक वीडियो में गुरदयाल सिंह इस जख्मी गाय के साथ नजर आ रहे हैं।

वीडियो में देखा जा सकता है कि गाय का मुँह गंभीर रूप से जख्मी है और उससे बहुत खून भी निकल रहा है। यह वीडियो शेयर किए जाने के पीछे एक वजह केरल में गर्भवती हथिनी को पटाखों से भरा अनानास खिलाने के बाद उसकी मौत की घटना भी है। इसे लेकर देश भर में लोग पहले से ही आक्रोशित थे।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले केरल के मलप्पुरम एक 15 वर्षीय गर्भवती हथिनी एक अमानवीय कृत्य का शिकार हो गई। उसे किसी उपद्रवी शख्स ने पटाखों से भरा अनानास खिलाया, जिससे हथिनी के मुँह में विस्फोट हो गया और वह बुरी तरह जख्मी हो गई। हथिनी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि वह गर्भवती थी। उसका जबड़ा टूट गया था और मुँह में विस्फोट के कारण वह अनानास चबाने के बाद कुछ खा नहीं पा रही थी।

इस विस्फोट से उसकी जीभ और मुँह पर गंभीर चोटें आईं। इसके बाद वह एक नदी में चली गई और तीन दिनों के बाद आखिर में उसने प्राण त्याग दिए।

अमूल ने जारी किया चीनी सामान के बहिष्कार का पोस्टर: ट्विटर ने अमूल का ट्विटर एकाउंट किया सस्पेंड

लद्दाख सीमा पर चल रहे तनाव को ध्यान में रखते हुए अमूल इंडस्ट्रीज ने सोशल मीडिया के माध्यम से चीनी सामान का बहिष्कार करने का एक पोस्टर जारी किया, जैसा कि अक्सर समसामयिक मुद्दों पर तंजिया विज्ञापन जारी करता रहता है। यही बात ट्विटर को इतनी नागवार लगी कि उसने अमूल के आधिकारिक ट्विटर एकाउंट को बिना किसी पूर्व सूचना के सस्पेंड कर दिया।

दरअसल, 3 जून, 2020 को अमूल की ओर से ट्विटर पर शेयर किए गए पोस्टर में एक लड़की चीनी समान का बहिष्कार करने का संदेश दे रही है, जिस पर लिखा था, “एग्जिट द ड्रैगन”।

इसके एक दिन बाद ट्विटर ने अमूल के आधिकारिक ट्विटर एकाउंट को बिना किसी सूचना के निष्क्रीय कर दिया। इसकी जानकारी जैसे ही यूजर्स को हुई उन्होंने तत्काल ट्विटर को अपने निशाने पर ले लिया।

यहाँ यह ध्यान देने वाली बात है कि चीन ने ट्विटर जैसे कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, सर्च इंजन और अन्य प्रमुख वेबसाइटों पर अपने देश में प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन इसके बाद भी चीन के खिलाफ एक ट्वीट के करने पर अमूल के ट्विटर एकाउंट को सस्पेंड कर दिया गया।

अमूल प्रबंधन की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि हमने पूरे मामले को देखा है और अकाउंट सस्पेंड करने के कारणों को जानने की माँग की है, क्योंकि हमारे ट्विटर फॉलोवर्स हमारे ट्वीट्स को नहीं देख पा रहे थे। इसके बाद वे अमूल के समर्थन में सामने आए और ट्विटर के इस व्यवहार पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हमने ट्विटर से इस कार्रवाई के कारणों को जानने की कोशिश की। उन्होंने अपने बयान में आगे कहा कि अमूल बटर गर्ल न किसी का अहसान लेती है न किसी का पक्ष लेती है और न ही किसी से डरती है। वह देश का मूड बताती है।

इसके आगे प्रबंधन ने कहा कि अमूल दुनिया भर के समसामयिक मामलों जैसे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के चुनाव, ब्रेक्सिट, कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन, स्पोर्ट्स इवेंट, पहली बार 1987 और 1989 में रामायण और महाभारत का प्रसारण के अलावा 1976 में भारत में लगाए गए आपातकाल पर पोस्टर प्रकाशित करता आया है।

लद्दाख की सीमा पर भारत-चीन का गतिरोध जारी

इसके अलावा देश के सबसे बड़े पैकेज्ड मिल्क सप्लायर होने के नाते अमूल सामयिक घटनाओं पर इस तरह के पोस्टर जारी करके देश के मूड को बताता है। वहीं चीनी सैनिकों और भारतीय सेनाओं के बीच लद्दाख में सीमा पर LAC पर गतिरोध के बाद दक्षिण-पूर्व एशियाई पड़ोसियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमूल के ट्विटर अकाउंट को सस्पेंड करना एक बड़ी बात है।

भारतीयों की चीन विरोधी भावनाएँ उग्र हैं। क्योंकि चीन के कोरोनो वायरस के संकट ने भारत की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है। इस बीच भारत के लद्दाख क्षेत्र में चीनी घुसपैठ ने भी लोगों की भावनाओं को और उग्र कर दिया है। क्या ट्विटर चीन का विरोध करने वाले ट्विटर एकाउंट को निलंबित करके उनकी भावनाओं को दबाने की कोशिश कर रहा है। ट्विटर इंडिया को सामने आना चाहिए और भारतीयों को फिर से आश्वस्त करना चाहिए कि यह एक ऐसा संगठन नहीं है जिसके तार चीन द्वारा खींचे जा सकते हैं।

अमूल का ट्विटर एकाउंट निलंबित करने पर ट्विटर ने दी सफाई

ट्विटर ने अमूल के आधिकारिक अकाउंट के अस्थायी रुप से निलंबित किए जाने पर एक स्पष्टीकरण जारी किया है।

अमूल के प्रबंध निदेशक आर एस सोढ़ी ने ट्विटर पर जानकारी देते हुए कहा कि ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी से बातचीत की है जिन्होंने यह दावा करते हुए एक स्पष्टीकरण जारी किया है कि अमूल का अकाउंट तकनीकी कारणों से अवरुद्ध हो गया था और इसका प्रकाशित सामग्री से कोई संबंध नहीं है।

सभी सिख अपना अलग खालिस्तान चाहते हैं: ऑपरेशन ब्लूस्टार की वर्षगाँठ पर अकाल तख्त जत्थेदार की माँग

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने शनिवार (6 जून,2020) को खालिस्तान के मुद्दे पर तंज कसते हुए कहा कि सभी सिख एक अलग खालिस्तान का सपना देखते हैं और वे खुशी से अलग खालिस्तान स्वीकार कर लेंगे अगर सरकार उन्हें एक करने की पेशकश करती है।

ऑपरेशन ब्लू स्टार की 36 वीं वर्षगाँठ पर अकाल तख्त प्रमुख द्वारा विवादास्पद टिप्पणी आई। बता दें यह ऑपरेशन भारतीय सेना द्वारा 1 और 8 जून, 1984 के बीच दरबार साहिब परिसर के अंदर छिपे भारी हथियारों से लैस आतंकियों को काबू करने के लिए चलाया गया था।

शनिवार को सिखों की सबसे अस्थाई सीट, अकाल तख्त में वार्षिक समारोह के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान सिखों के लिए एक अलग खालिस्तान का विवादास्पद मुद्दा उठाया।

खालिस्तान के पक्ष में उठाए जा रहे नारों पर पूछे गए सवालों के जवाब में सिंह ने कहा, “अगर समारोह के बाद कट्टरपंथी सिखों द्वारा खालिस्तान के पक्ष में नारे लगाए गए तो इसमें कोई बुराई नहीं है। अगर सरकार हमें खालिस्तान ऑफर करती है, तो हमें और कुछ नहीं चाहिए। हम इसे स्वीकार करेंगे क्योंकि हर सिख इसे चाहता है।”

हालाँकि, सिंह ने बाद में कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के आधिकारिक समारोह के दौरान इस तरह के नारे नहीं लगाए जाने चाहिए।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लोंगोवाल ने भी सिंह के विचारों का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “यदि सरकार हमें खालिस्तान पेश करती है तो हम इसे स्वीकार करेंगे।”

दिन की शुरुआत में ऑपरेशन ब्लूस्टार में मारे गए लोगों की याद में तख्त में भोग समारोह, अरदास और कीर्तन किया गया।

सूत्रों के अनुसार, कड़ी सुरक्षा के बीच समारोह आयोजित किया गया और मीडिया को स्वर्ण मंदिर परिसर के अंदर कार्यक्रम को कवर करने की अनुमति नहीं दी गई।

कथित तौर पर पुलिस ने विभिन्न सिख संगठनों के कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश भी की। जो सोशल डिस्टेंसिंग के निर्देशों का उल्लंघन कर गोल्डन टेम्पल में अपने लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सुबह जल्दी पहुँचने की कोशिश कर रहे थे। हालाँकि, वे पुलिस कर्मियों के साथ तीखी बहस करने के बाद परिसर के अंदर जाने में कामयाब रहे।

बता दें स्वर्ण मंदिर के प्रवेश द्वार पर सुरक्षाबलों द्वारा सिमरनजीत सिंह मान के पुत्र इमान सिंह मान को सेना द्वारा रोके जाने के बाद शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के समर्थकों और पुलिस के बीच मामूली हाथापाई भी हुई। लेकिन प्रदर्शन के बाद उन्हें मंदिर के अंदर जाने की अनुमति दी गई।

कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्वर्ण मंदिर परिसर के बाहर 5,000 पुलिस बलों की तैनाती की गई थी। मंदिर के अंदर प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं के लिए पुलिस के साथ-साथ कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य टीम को भी घटनास्थल पर तैनात किया गया था।

हालाँकि, SGPC टास्क फोर्स और सादे कपड़ों में मौजूद पुलिस द्वारा स्वर्ण मंदिर परिसर के अंदर सोशल डिस्टेंसिग का पालन नहीं कराया जा सका।

कार में पड़ी मिली दिल्ली दंगों की जाँच कर रहे पुलिस अधिकारी की लाश, चोट के कोई निशान नहीं: मौत का कारण स्पष्ट नहीं

दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर की लाश एक कार में संदिग्ध अवस्था में मिली है। उनकी लाश केशवपुरम थाना क्षेत्र के रामपुर इलाके में मिली। इंस्पेक्टर विशाल खानवलकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में कार्यरत थे। उनके शव पर चोट के कोई निशान नहीं थे, जिससे फ़िलहाल मौत के कारण का अंदाजा नहीं लगाया जा सका है। लोधी कॉलनी में तैनात विशाल दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों की जाँच कर रही टीम का भी हिस्सा थे।

पुलिस को शनिवार (जून 6, 2020) की शाम 4 बजे ही सूचना दी गई थी कि रुमाल वाली गली के पास एक कार सुबह 11 बजे से ही खड़ी है। साथ ही उसके भीतर एक शख्स के बेहोशी में पड़े होने की सूचना पुलिस को मिली थी। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर पाया कि उनकी पहले ही मौत हो चुकी थी। 47 वर्षीय विशाल अपने परिवार के साथ शालीमार बाग़ क्षेत्र में रहते थे। वो फ़िलहाल डीसीपी प्रमोद कुशवाहा के एसओ का काम देख रहे थे।

लाश को पोस्टमोर्टम के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट हो सकेंगे। विशाल 1998 बैच के अधिकारी थे। पुलिस ने गाड़ी में से उन्हें निकाल कर बीजेआरएम हॉस्पिटल लेकर गई, जहाँ डॉक्टरों द्वारा अधिकारिक रूप से मृत घोषित किया गया। पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी है।

बता दें कि फ़रवरी में दिल्ली में हिन्दू-विरोधी दंगे भड़क गए थे, जिसमें कई लोगों की हत्या हुई थी। हाल ही में पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दायर किए थे, जिसमें ताहिर हुसैन को मुख्य आरोपित बनाया गया था। साथ ही इससे सम्बंधित अन्य मामलों में ‘पिंजरा तोड़’ की महिलाओं सहित सफूरा जरगर और उमर खालिद भी आरोपित हैं। दिल्ली में हुए अंकित शर्मा के हत्या ममले में भी ताहिर हुसैन आरोपित था। इस मामले में यूएपीए के तहत कार्रवाई की जा रही है।

दिल्ली के अस्पताल में लावारिस हालत में पड़े शवों के बीच चल रहा कोरोना मरीजों का इलाज, भाजपा नेता ने दिखाई हकीकत

दिल्ली के एक अस्पताल से एक बार फिर अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का मामला सामने आया है, जहाँ शवों के पास ही कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है और कई मरीजों को कोरोना का इलाज भी नहीं मिल रहा है।

वीडियो को भाजपा नेता नंदिनी शर्मा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। वीडियो में दिखाई दे रहा एक शख्स जानकारी दे रहा है कि अस्पताल में शवों को घंटों तक ऐसे ही पड़े हुए छोड़ दिया जा रहा है। इतना ही नहीं इस दौरान शवों के पास में ही कोरोना के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर आए इस वीडियो ने केजरीवाल सरकार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वीडियो में एक शख्स ने कहा, अस्पताल में कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों के शवों को अस्पताल में इलाज करा रहे रोगियों के बगल में ही पड़े हुए छोड़ दिया गया है। इस दौरान उसने बताया कि मेरी भाभी का शव सुबह 9 बजे से यहाँ पड़ा हुआ है। उन्होंने अस्पताल में कोरोना वार्ड के सामने अंतिम साँस ली।

अस्पताल से सभी अनुमति लेने के बावजूद भी उन्हें अस्पताल में कोई इलाज नहीं मिला, जबकि वह कोरोना वार्ड के बाहर करीब एक घंटे मौजूद रहीं। वह एक घंटे तक इसलिए बची रहीं, क्योंकि हमने उसे एम्बुलेंस की ऑक्सीजन मशीन लगा दी थी।

उक्त व्यक्ति ने आरोप लगाया कि उसकी भाभी को कोरोनो वायरस से मरे 5 घंटे से अधिक हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी डेड बॉडी को कवर नहीं किया गया है। व्यक्ति ने अफसोस जताया कि उसके परिवार को उसकी भाभी को अस्पताल में भर्ती कराने के कई बार इधर से उधर चक्कर लगाने पड़े।

इससे पहले भी भाभी को भर्ती कराने के लिए कई अस्पतालों में गए, लेकिन सभी ने कोरोनो वायरस की रिपोर्ट आने तक भर्ती करने से इंकार कर दिया। व्यक्ति ने बताया कि हम गंगा राम अस्पताल गए। इससे पहले हम बी एल कपूर अस्पताल गए। उसके बाद हम आरएमएल गए, उसके बाद हम संजीवनी अस्पताल गए और आखिर में फिर हम इस अस्पताल में आए।

यहाँ भी कहा गया कि जब तक कोरोनो वायरस की रिपोर्ट नहीं आ जाती तब हम भर्ती नहीं कर सकते, जबकि कल रात जो 9 बजे हमने कोरोना का परीक्षण कराया था उसकी रिपोर्ट आज रात 9 बजे तक आएगी। यानि कि कोरोना की रिपोर्ट आने में 24 घंटे लगते हैं। इस पर अस्पताल वालों ने कहा कि जब तक मरीज की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव नहीं आ जाती तब तक हम भर्ती नहीं कर सकते।