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ट्रेनों को पटरी से उतारने की तालीम दे रहे हैं मदरसे, NIA और ATS की जाँच से खुलासा: कई वीडियोज मिले, मौलवी से भी पूछताछ

ट्रेन को पटरी से उतारने की बहुत सी साजिशों की खबरें आने के बीच एक नया खुलासा हुआ है। खुलासे से पता चलता है कि ट्रेन को डीरेल करने की कोशिशों में मदरसे अपनी भूमिका खास तौर पर निभा रहे हैं।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी और उत्तर प्रदेश एटीएस ने झांसी और कानपुर में ट्रेन डीरेल की कोशिश के बाद इस मामले में जाँच की थी और पाया था कि मदरसों में न केवल छात्रों के भीतर ट्रेन को डीरेल करने के लिए कट्टरपंथी बनाया जाता है बल्कि उन्हें इसकी ट्रेनिंग भी दी जाती है।

ये ट्रेनिंग ऑनलाइन मोड में दी जाती है। जाँच टीम ने ऐसे तमाम वीडियोज पाए हैं जिसमें इस्लामी कट्टरपंथी युवाओं को भड़काते हुए दिख रहे हैं और उन्हें ये भी बता रहे हैं कि ये काम किया कैसे जाता है।

एक मुफ्ती खालिद नदवी नाम के मदरसा टीचर से इसी मामले में पूछताछ भी हुई। गुरुवार को जाँच टीम ने नदवी के घर छापा मारा और कई घंटे उससे सवाल पूछे। लेकिन, जब उसे हिरासत में लिया गया वैसे ही वहाँ मुस्लिम भीड़ आई और उन्होंने नदवी को छुड़ाने का प्रयास किया।

इस भीड़ में तमाम महिलाएँ थीं जो मस्जिद से ऐलान के बाद वहाँ इकट्ठा हुई थीं। हालाँकि बाद में पुलिस बल ने मामले को संभालते हुए नदवी को हिरासत में लिया और साइबर सेल थाने में जे जाकर पूछताछ की। इस दौरान नदवी का लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य आइटम भी सीज कर लिए गए। वहीं बाद में 100 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जो हिरासत के दौरान मौलवी को छुड़ाने आए थे।

गौरतलब है कि बीते 3 महीनों में ट्रेन को पटरी से उतारने का तमाम मामले सामने आए हैं। कभी साबरमती एक्सप्रेस को निशाना बनाया गया, कभी कालिंदी एक्स्प्रेस को। यहाँ वंदे भारत पर पत्थर तक फेंके गए। कभी पटरी पर सिलेंडर मिला तो कभी आइरन की रॉड। अगर सही समय पर ट्रेन रोक इसे न हटाया जाता तो कोई भी बड़ी दुर्घटना घटी जा सकती थी।

बनवारी लाल के लिए ‘भाई’ थे मुस्लिम… फिर भी पहले पैर काटा, फिर हाथ और आखिर में गला: संभल में जब 24 हिंदुओं को दंगाइयों ने एक साथ फूँक दिया

संभल में दंगों का पुराना इतिहास रहा है। इन्हीं दंगों के बल पर संभल नगरपालिका क्षेत्र से धीरे-धीरे हिंदुओं को मिटाया गया। देश की स्वतंत्रता के समय संभल नगरपालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी 45 प्रतिशत थी जो आज घटकर 15-20% रह गई है। उस समय मुस्लिम 55% थे। आज वे बढ़कर 80-85 प्रतिशत हो गए हैं।

संभल के खग्गूसराय मोहल्ले में एक ऐसा मंदिर मिला है जिसे 1978 के दंगों के बाद गायब कर दिया गया था। संभल में दंगों को लेकर प्रशासन ने एक इंटरनल रिपोर्ट तैयार की है। इसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इससे पता चलता है कि 1978 में संभल में सबसे बड़ा दंगा हुआ था। इसी दंगे के बाद खग्गूसराय में रहने वाले करीब 100 हिंदू परिवार इस इलाके को छोड़कर चले गए।

हिंदू शिक्षक की बेटी से बलात्कार, पत्नी को किया किडनैप

यह दंगा होली के बाद 29 मार्च से शुरू हुआ था। इसमें करीब 184 लोगों की हत्या की गई थी। करीब 30 दिनों तक कर्फ्यू लगा रहा था। इसी दंगे के दौरान संभल के जाने माने कारोबारी बनवारी लाल गोयल की तड़पा-तड़पाकर हत्या की गई थी। इसी दंगे के दौरान एक हिंदू शिक्षक की बेटी और पत्नी को मंजर शफी ने उठा लिया था। इस दंगे को भड़काने के पीछे भी शफी की बड़ी भूमिका थी। हिंदू शिक्षक की बेटी को बलात्कार के बाद छोड़ा गया। उनकी पत्नी को हिंदुओं ने बचा लिया था। आज न तो इस शिक्षक और न ही बनवारी लाल गोयल का परिवार संभल में रहता है।

गन्ने की खोई और टायर का ढेर लगाकर 24 हिंदुओं को जलाया

दंगे भड़कने के बाद बनवारी लाल गोयल ने कई हिंदू दुकानदारों को अपने साले मुरारी लाल की कोठी में छिप जाने को कहा था। मुस्लिम आढ़तियों ने इसकी सूचना दंगाइयों को दी। इसके बाद मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ ने ट्रैक्टर लगाकर मुरारी लाल की कोठी का गेट तोड़ दिया। यहाँ 24 हिंदुओं की हत्या कर उन्हें गन्ने की खोई और टायर का ढेर लगाकर मुस्लिम दंगाइयों ने जला दिया। हालात इतने बदतर थे कि अधिकतर हिंदुओं ने कपड़ों के पुतले बनाकर बृजघाट पर अपनों का अंतिम संस्कार किया था।

दैनिक भास्कर ने संभल के इतिहास के जानकार 58 साल के संजय शंखधर के हवाले से भी इस घटना के बारे में बताया है। शंखधर के अनुार इस दंगे से पहले संभल में हिंदुओं की आबादी 35% थी, अब करीब 20 प्रतिशत ही है। उन्होंने कहा, “1978 का दंगा संभल का सबसे बड़ा दंगा है। लाला मुरारी लाल की कोठी में दंगे से बचने के लिए कई लोग छिपे थे। इसका पता चलते ही दंगाइयों ने उनकी कोठी पर हमला कर दिया। जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई। इनमें 24 हिंदू थे।”

बनवारी लाल बोले गोली मार दो, पर दंगाइयों ने काट-काटकर मारा

ऑपइंडिया के पास मौजूद इंटरनल रिपोर्ट बताती है कि दंगे भड़कने की सूचना मिलने पर बनवारी लाल गोयल प्रभावित इलाके में जाने लगे। उनकी पत्नी और बेटे ने उन्हें रोका। लेकिन वे यह कहते हुए दंगा प्रभावित इलाके में चले गए,

सारे मुस्लिम मेरे मित्र और भाई जैसे हैं। सब मेरे साथ काम करते हैं। मुझे कुछ नहीं होगा।

लेकिन बनवारी लाल गोयल को मुस्लिम दंगाइयों ने पकड़ लिया। उनसे कहा कि तुम इन पैरों से पैसे लेने आए हो और उनके पैर काट दिए। फिर कहा कि तुम इन हाथों से पैसे लेने आए हो और हाथ भी काट दिए। इसके बाद गर्दन काट कर उनकी हत्या कर दी गई। इस दौरान मुस्लिम दंगाइयों के सामने बनवारी लाल गिड़गिड़ाते रहे कि मुझे काटो मत, गोली मार दो। पर किसी ने नहीं सुनी। इस घटना को हरद्वारी लाल शर्मा और सुभाष चंद्र रस्तोगी ने अपनी आँखों से देखा था। इस कत्लेआम के दौरान दोनों ने एक ड्रम में छिपकर अपनी जान बचाई थी। हाई स्कूल में पढ़ने वाले हरद्वारी लाल के सगे भाई को भी मुस्लिम दंगाइयों ने चाकू से गोदकर इसी दौरान मार डाला था।

शर्मा और रस्तोगी भी इस कत्लेआम के गवाह थे। इरफान, वाजिद, जाहिद, मंजर, शाहिद, कामिल, अच्छन जैसे नाम आरोपित थे। लेकिन 2010 में यह केस बंद करना पड़ा, क्योंकि गवाह ही हाजिर नहीं हुए। जज ने यह टिप्पणी करते हुए केस बंद किया कि मैं सोच भी नहीं सकता कि इनलोगों (आरोपितों) को फाँसी नहीं हो रही है।

गवाहों पर किस तरह का दबाव रहा होगा इसे इस बात से समझा जा सकता है कि बनवारी लाल के बेटे विनीत गोयल के कारोबारी साझेदार रहे प्रदीप अग्रवाल के भाई की वसीम ने गोली मारकर हत्या कर दी। साथ ही धमकी दी कि यदि उसके खिलाफ किसी ने एफआईआर करवाई तो उसकी भी हत्या कर दी जाएगी। उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।

इंटरनल रिपोर्ट के अनुसार बनवारी लाल के परिवार पर डॉक्टर शफीकुर रहमान बर्क की ओर से भी दबाव डाला गया था। बर्क संभल से समाजवादी पार्टी से सांसद रहे हैं। फिलहाल उनके पोते जियाउर्रहमान बर्क इस सीट से सपा के सांसद हैं। जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हुई हिंसा में जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। 1995 के आसपास बनवारी लाल गोयल के परिवार ने संभल ही छोड़ दिया।

संभल में 46 साल बाद मिला जो मंदिर, उसके कुएँ की खुदाई में निकली देवी-देवताओं की खंडित मूर्ति: लोग दर्शन के लिए उमड़े, प्रशासन करवाएगा जाँच

उत्तर प्रदेश के संभल के खग्गू सराय में शिव मंदिर के पट खोले जाने के बाद अब उस मंदिर के पास स्थित एक कुएँ की खुदाई की जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक प्रशासन ने 15-20 फीट तक मंदिर की खुदाई कर ली है और इतनी ही गहराई में उन्हें देवी-देवताओं की खंडित प्रतिमाएँ मिलनी लगी हैं।

सामने आई तस्वीरों को देख लगता है कि ये 7 से 8 इंच लंबी मूर्तियाँ माता पार्वती, भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की हैं। कुएँ से इन तीन मूर्तियों के निकलने के बाद स्थल पर एडिशनल एसपी श्रीशचंद्र अनुज चौधरी भी मौके पर पहुँचे और उन्होंने खुदाई में निकली मूर्तियाँ देखीं। अब इन प्रतिमाओं को आगे जाँच के लिए भेजा जाएगा।

बता दें कि इन तीन मूर्तियों के मिलने की खबर के बाद एक तरफ जहाँ लोग इन प्रतिमाओं को देखने के लिए उमड़ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर ये अनुमान भी लगाए जा रहे हैं कि 46 साल पहले मंदिर को बंद करने से पहले मंदिर की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करके इस कुएँ में डाला गया होगा और बाद में मंदिर बंद करके कुएँ को पाट दिया गया होगा।

अब प्रशासन पूरे मामले की जाँच में जुटा है। इस बीच संभल में 46 साल बाद खुले मंदिर के ऊपर लोगों ने प्राचीन संभलेश्वर महादेव मंदिर का नाम लिख दिया है। इसके अलावा मंदिर की दीवारों पर भी हर-हर महादेव लिखा हुआ है। लोग इस मंदिर में स्थापित मूर्तियों की पूजा-अर्चना और जल अर्पित करने के लिए आतुर हैं ,लेकिन पुलिस लगातार स्थिति संभालते हुए निगरानी बनाए हुए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक संभल बॉर्डर पर पुलिस ने भारी नाकेबंदी की हुई है। किसी गाड़ी को संभल में बिना चेकिंग के एंट्री नहीं दी जा रही है। हालातों को देखते हुए पुलिस ने सतर्कता बढ़ाई है। ये सब उस समय हो रहा है जब संभल में बीते दिनों हिंसा के बाद बिजली चोरों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान शिव मंदिर मिला, हर ओर इसकी कवरेज हुई और लोगों में उत्सुकता बढ़ी। पुलिस को इसी बीच खुफिया जानकारी मिली कि कुछ लोग बाहर से संभल में प्रवेश करने की फिराक में हैं। ऐसे में पुलिस लगातार सतर्क है। वहीं 4 दशक से बंद पड़े मंदिर की कार्बन डेटिंग कराने की बात चल रही है। इसे लेकर जिला प्रशासन ने एएसआई को पत्र भी लिखा है।

ममेरे भाई से चल रहा था अफेयर, दुल्हन ने शादी के 4 दिन बाद ही मरवा डाला पति: गुजरात पुलिस ने 4 को दबोचा, सख्ती से पूछताछ में कबूला सच

गुजरात के गांधीनगर में एक पत्नी द्वारा अपने पति की हत्या कराए जाने का मामला सामने आया है। महिला का अपने ममेरे भाई से अफेयर था। वह अपनी शादी कहीं और कराए जाने से खुश नहीं थी। आरोपित महिला की शादी को महज 4 दिन ही हुए थे। पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुए महिला, उसके प्रेमी सहित कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना शनिवार (14 दिसंबर 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 1 हफ्ते पहले गांधीनगर की रहने वाली पायल की शादी अहमदाबाद के भाविक से हुई थी। शादी के 4 दिनों के बाद शनिवार (14 दिसंबर) को भाविक अपनी पत्नी को लेने एक्टिवा से उसके घर जा रहा था। तभी रास्ते में एक कार ने भाविक की एक्टिवा को टक्कर मार दी। भाविक जमीन में गिर पड़ा तो कार सवारों ने उसे अंदर खींच लिया। गाड़ी में बिठा कर भाविक का गला दबा दिया गया। बाद में इन सभी ने शव को नर्मदा नहर में फेंक दिया और मौके से फरार हो गए।

भाविक जब बहुत देर तक घर नहीं पहुँचा तो उसके परिजन परेशान हो उठे। उनका फोन भी बंद आ रहा था। तलाश करने के दौरान भाविक की स्कूटी रास्ते में पड़ी मिली। आखिरकार मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने अपनी पड़ताल शुरू की तो शक की सुई भाविक की पत्नी पायल की तरफ गई। पायल से पूछताछ की गई तो शुरुआत में उसने पुलिस को गुमराह किया। थोड़ी ही देर के सवाल जवाब में तो टूट गई और सच उगल दिया।

पायल ने पुलिस को बताया कि उनका अपने ममेरे भाई कल्पेश से लम्बे समय से अफेयर चल रहा था। इन दोनों की मर्जी के खिलाफ पायल की शादी भाविक से करवा दी गई। इसी बात से नाराज होकर पायल और कल्पेश ने मिल कर भाविक को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया था। पायल को गिरफ्तार कर लिया गया है। उससे हुई पूछताछ के आधार पर पुलिस ने कल्पेश को भी पकड़ा। कल्पेश ने अपने साथ इस अपराध में दो अन्य लोगों को भी शामिल बताया। उन दोनों को भी दबोच लिया गया। मामले में जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है।

52000 फर्जी सर्टिफिकेट… बांग्लादेशियों-पाकिस्तानियों को बसाने के लिए: रायबरेली के 11 गाँवों में मिला ‘असली’ दिखने वाला जन्म प्रमाण पत्र, मोहम्मद जीशान और रियाज समेत 4 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में 18 जुलाई 2024 में हजारों रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के जन्म प्रमाण पत्रों को बनाने का खुलासा हुआ था, तब इस मामले में जाँच बिठा दी गई थी जो अब पूरी हो चुकी है। कुल 52 हजार से अधिक प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। इस फर्जीवाड़े में भारत के कई राज्यों सहित पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल तक के लोगों के प्रमाण पत्र शामिल हैं। शासन ने इन सभी फर्जी प्रमाण पत्रों को निरस्त करने का ऐलान किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों से सलोन ब्लॉक के कुल 11 गाँव बुरी तरह प्रभावित हैं। इन 11 गाँवों को मिला कर कुल 52,594 जन्म प्रमाण पत्र फर्जी निकले हैं। ये जन्म प्रमाण पत्र बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, तमिलनाडु, केरल व पंजाब राज्यों के साथ बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल तक के नागरिकों के नाम पर बनाए गए थे। उप-निदेशक पंचायती राज सास्वत आनंद सिंह ने इन सभी फर्जी प्रमाणपत्रों को निरस्त करने के आदेश दिए हैं।

इसी के साथ जिले के DPRO को भविष्य में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने में खास सावधानी बरतने के निर्देश मिले हैं। जाँच में पता चला है कि कई गाँवों में तो जालसाजों ने एक ही दिन के अंदर 500 से लेकर 1000 तक फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बना डाले थे जबकि एक कंप्यूटर से 24 घंटे में 100 प्रमाणपत्र से अधिक नहीं निकल सकते हैं। माना जा रहा है कि एक ही आईडी और पासवर्ड से एक दिन में इतने ज्यादा प्रमाण पत्र बनाने के लिए कई प्रदेशों में बैठे साजिशकर्ताओं ने मिल कर काम किया था।

जिन 11 गाँवों में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पाए गए हैं जिसमें सबसे अधिक प्रभावित पाल्हीपुर है। यहाँ 13707 फर्जी प्रमाण पत्र पाए गए हैं। दूसरे नंबर पर नुरुद्दीनपुर है जहाँ मिले प्रमाण पत्रों की संख्या 10151 है। तीसरा नंबर पृथ्वीपुर का है। यहाँ 9393 फर्जी प्रमाण पत्र मिले हैं। इसके अलावा सांडा सैदन में 4897, माधौपुर निनैया में 3746, लहुरेपुर में 3780, गढ़ी इस्लामनगर में 2255, औनानीश में 1665, गोपालपुर उर्फ अनंतपुर में 225 और दुबहन में 2 फर्जी प्रमाण पत्र खोजे गए हैं।

इस फर्जीवाड़े का मुख्य आरोपित मोहम्मद जीशान है जो रायबरेली के ही सलोन का निवासी है। उसके साथ साजिश में शामिल रियाज, सुहेल खान और वीडीओ विजय सिंह यादव को भी दबोच लिया गया है। मामले की जाँच में ATS के साथ NIA को भी लगाया गया है। जाँच एजेंसियाँ इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य आरोपितों की मिलीभगत की पड़ताल में जुटी हैं।

बताते चलें कि मामले का खुलासा तब हुआ जब जुलाई 2024 में कुछ गाँवों की आबादी से अधिक जन्म प्रमाण पत्र बना डाले गए। शुरुआत में इस साजिश की भनक गाँवों के कई प्रधानों तक को नहीं लगी थी। खुद को पाक-साफ दिखाने के लिए विजय यादव ने ही इस फर्जीवाड़े की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी। पुलिस की जाँच में यह आया कि विजय यादव ने अपना सरकारी CUG नंबर जीशान को दे रखा था। इसी नंबर पर हर जन्म प्रमाण को एप्रूवल देने वाली OTP आती थी।

₹30 लाख की सुपारी वकील कामिल मुस्तफा ने दी, दुश्मनी हैदर और असद की थी… महिला अधिवक्ता मोहिनी तोमर के कत्ल मामले में दो और गिरफ्तार, कासगंज पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में रविवार (3 सितंबर, 2024) को मोहिनी तोमर नाम की महिला वकील की हत्या कर दी गई थी। उनका शव एक नहर से बरामद हुआ था। महिला वकील के पति ने पुलिस में FIR दर्ज करके मुस्तफा कामिल, असद मुस्तफा, हैदर मुस्तफा, सलमान, मुनाजिर रफी के साथ केशव मिश्रा को नामजद किया था। अब इस मामले में पुलिस ने रविवार (15 दिसंबर 2024) को हत्या की सुपारी लेने वाले 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इन्हें वकील मुस्तफा कामिल और उसके बेटों ने 30 लाख रुपयों की सुपारी दी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिवक्ता मोहिनी तोमर हत्याकांड में रविवार को कासगंज पुलिस ने सुनील फौजी और रजत सोलंकी नाम के 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को ये दोनों सुबह 9 बजे उसी हजारा नहर के पास मिले जिसमें से मोहिनी का शव मिला था। दोनों पर प्रशासन ने 1-1 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। तलाशी और पूछताछ के बाद इन दोनों के पास से हत्या में प्रयोग की गई कार, देसी पिस्टल, तमंचा, मृतका का मोबाइल फोन और मोहिनी के नाम की मोहर आदि बरामद हुई हैं।

पुलिस की पूछताछ में सुनील और रजत ने मोहिनी हत्याकांड में अपनी मिलीभगत की बात स्वीकार की। इन दोनों ने बताया कि 3 सितंबर 2024 को वो एक साथ कार से सुनील फौजी के साथ कासगंज कोर्ट गए थे। सुनील फौजी ने एक शादी कराने का बहाना लेकर मोहिनी को अपनी कार में बिठा लिया। बाद में इन सभी ने मोहिनी को गला दबा कर उन्हें मार डाला और लाश को नहर में फेंक दिया। इस साजिश में शामिल रहीं रेनू के साथ बॉबी को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

कासगंज के एडिशनल एसपी राजेश भारती ने मीडिया को बताया कि पूछताछ में सुनील फौजी ने कबूला है कि उसे वकील मुस्तफा कामिल, उसके बेटे हैदर मुस्तफा, असद मुस्तफा और मुस्तफा सलमान के साथ मुनाजिर रफी और केशव मिश्रा की तरफ से 30 लाख रुपए की सुपारी मिली थी। सुनील फौजी ने इस साजिश को अंजाम देने के लिए अपने साथ रजत सहित बॉबी और रेनू को भी शामिल कर लिया था। इन्हीं दोनों की कोर्ट मैरिज करने का झाँसा दे कर मोहिनी को अदालत से बाहर बुलवाया गया था।

बताते चलें कि मोहिनी तोमर को वकील मुस्तफा कामिल के बेटों की जमानत अर्जी का विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी मिली थी। तब मृतका ने अपने पति से भविष्य में खुद के साथ किसी अनहोनी की आशंका भी जताई थी। वकील कामिल के बेटों हैदर और सलमान ने 30 जुलाई 2024 को कासगंज की कचेहरी में शिवशंकर नाम के एक युवक को बेरहमी से पीट कर उसकी शिखा उखाड़ ली थी।

कामिल मुस्तफा के रुतबे की वजह से इस केस में शिवशंकर को कोई वकील नहीं मिल रहा था। तब मोहिनी तोमर ने शिवशंकर का केस लड़ने का ऐलान किया था। मोहिनी की वकालत के चलते कामिल मुस्तफा के बेटों को जमानत मिलने में देरी हुई। इसी बात से कामिल मुस्तफा नाराज था। आखिरकार उसने सुपारी दे कर मोहिनी की हत्या करवा दी। फिलहाल पुलिस इस केस में आगे की जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

एडविना माउंटबेटन को जवाहरलाल नेहरू ने चिट्ठी में क्या कहा… पत्र अपने पास रखकर बैठीं सोनिया गाँधी: प्रधानमंत्री संग्रहालय ने की वापसी की माँग, अब राहुल गाँधी को चिट्ठी लिखी

प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (PMML) ने एक बार फिर कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी से उनके परिवार के पास मौजूद जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक दस्तावेजों को लौटाने की माँग की है। अहमदाबाद के इतिहासकार और PMML के सदस्य रिजवान कादरी ने 10 दिसंबर 2024 को राहुल गाँधी को लिखे पत्र में 2008 में सोनिया गाँधी द्वारा लिए गए 51 बॉक्स दस्तावेजों को लौटाने की माँग दोहराई है।

इन दस्तावेजों में नेहरू और जयप्रकाश नारायण, एडविना माउंटबेटन, अल्बर्ट आइंस्टीन, अरुणा आसफ अली, विजया लक्ष्मी पंडित और बाबू जगजीवन राम जैसी हस्तियों के बीच हुए पत्राचार शामिल हैं। यह पहली बार नहीं है जब PMML ने यह अनुरोध किया है। इससे पहले सितंबर 2024 में सोनिया गाँधी को भी ऐसा पत्र भेजा गया था।

कादरी के अनुसार, इन दस्तावेजों का ऐतिहासिक महत्व अत्यधिक है और इन्हें शोध और अध्ययन के लिए जनता के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर मूल दस्तावेज वापस नहीं किए जा सकते तो उनकी प्रतियाँ या डिजिटल संस्करण उपलब्ध कराए जाएँ।

यह मामला 2008 का है, जब UPA सरकार के दौरान सोनिया गाँधी ने नेहरू मेमोरियल म्यूजियम से 51 बॉक्स निजी दस्तावेज लिए थे। इनमें नेहरू और अन्य हस्तियों के बीच पत्राचार शामिल था। इन दस्तावेजों में नेहरू और एडविना माउंटबेटन के पत्र भी थे, जो हमेशा विवाद का विषय रहे हैं।

सोनिया गाँधी ने साध रखी है चुप्पी

सितंबर 2024 में भेजे गए पत्र का सोनिया गाँधी की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया। इस बार, कादरी ने राहुल गाँधी से हस्तक्षेप की अपील की है। कादरी ने लिखा कि ये दस्तावेज भारत के इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और नेहरू के विचारों को समझने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि अगर दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए तो यह इतिहास के प्रति अन्याय होगा।

कादरी ने अपने पत्र में लिखा कि इन दस्तावेजों का ऐतिहासिक महत्व अत्यधिक है, और इन तक पहुँच सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि देश के इतिहास को समग्रता से समझा जा सके। उनका कहना है कि इन कागजातों तक पहुँच होने से भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय निर्माण और भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की जा सकेगी। उनके अनुसार, गाँधी जी के लेखन को व्यवस्थित रूप से दस्तावेज किया गया है, लेकिन सरदार पटेल के योगदान को लेकर इतने व्यापक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए नेहरू और उनके पिता मोतीलाल नेहरू द्वारा छोड़े गए दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण हैं।

कादरी ने अपने पत्र में यह भी कहा कि अगर सोनिया गाँधी दस्तावेज वापस नहीं करना चाहतीं, तो वे उनकी डिजिटल प्रतियाँ उपलब्ध कराएँ। उन्होंने यह भी पेशकश की कि वह खुद दस्तावेजों का डिजिटलीकरण करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि सोनिया गाँधी द्वारा किए गए दस्तावेजों की वापसी अच्छे इरादों से की गई थी ताकि इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हालाँकि, अब समय आ गया है कि इन दस्तावेजों तक पहुँच प्रदान की जाए ताकि राष्ट्र के इतिहास का व्यापक अध्ययन हो सके।

यह मामला केवल दस्तावेजों की वापसी तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी उठता है कि क्या ऐसे ऐतिहासिक दस्तावेज किसी परिवार की निजी संपत्ति हो सकते हैं, या उन्हें राष्ट्रीय विरासत के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए। PMML के अनुसार, इन दस्तावेजों की सार्वजनिक उपलब्धता इतिहास के व्यापक अध्ययन और राष्ट्र की समझ के लिए जरूरी है।

बता दें कि फरवरी 2023 में PMML की वार्षिक बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में यह मुद्दा उठाया गया था। बैठक में कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया था कि इन दस्तावेजों को फॉरेंसिक ऑडिट के जरिए सत्यापित किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब न हो।

संभल में हिंसा से पहले आसपास के जिलों से बुलाए गए थे मदरसा छात्र, पुलिस को ‘पत्रों’ से मिली जानकारी: उपद्रवियों के खिलाफ नए एंगल से जाँच शुरू, SP बोले- किसी को बख्शा नहीं जाएगा

उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा मामले में पुलिस ने नए एंगल से अपनी जाँच शुरू की है। पुलिस के हवाले से मीडिया में बताया जा रहा है कि पुलिस को कुछ गुमनाम पत्र मिले हैं। इन पत्रों में दावा है कि हिंसा से पहले आसपास के जिले के मदरसों के छात्रों को समन किया गया था। कथिततौर पर ऐसा सिर्फ इसलिए किया गया ताकि मस्जिद के सर्वे वाले दिन (24 नवंबर को) इलाके में बड़े पैमाने पर हिंसा को अंजाम दिया जा सके।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संभल के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा, “हमें कई पत्र मिले हैं, जिनमें दावा किया गया है कि उस दिन रामपुर, हापुड़ और बुलंदशहर जिलों के मदरसों से छात्रों को विशेष रूप से संभल बुलाया गया था। हम इन पत्रों की प्रामाणिकता की पुष्टि कर रहे हैं और उचित जाँच के बाद अगर पत्रों की सामग्री सही पाई जाती है, तो हम सख्त कार्रवाई करेंगे।”

गौरतलब है कि पुलिस ने अब तक हिंसा में शामिल होने के आरोप में 3 महिलाओं समेत करीब 40 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा, पुलिस ने झड़पों में 93 लोगों की पहचान की है जिनकी इस हिंसा में ‘सक्रिय भागीदारी’ रही। संभल पुलिस जल्द ही इन भगोड़ों को पकड़ने में मदद करने वाली सूचना देने वालों को इनाम देने की घोषणा करेगी।

पुलिस अधीक्षक ने साफ कहा है कि हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस सभी आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी। वहीं फरार आरोपितों को पकड़ने के लिए जल्द ही इनाम की घोषणा भी की जाएगी।

बता दें कि अभी तक इस मामले में कार्रवाई करते हुए 400 संदिग्धों की तस्वीरें जारी की जा चुकी हैं। वहीं इस मामले में बार एफआईआर दर्ज हुई हैं जिनमें से 7 को पुलिस अधिकारियों द्वारा दर्ज करवाया गया है और बाकी की 5 उन लोगों द्वारा दर्ज करवाई गई है जिनके परिजन इस हिंसा में मारे गए हैं।

कहाँ है अतुल सुभाष का 4 साल का बेटा? निकिता की गिरफ्तारी के बाद पीड़ित परिजन जता रहे अनहोनी की आशंका: पति की आत्महत्या से 1 दिन पहले बुक किया था PG, गूगल ड्राइव से फाइलें गायब

बेंगलुरु के AI इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या केस में पुलिस ने उनकी पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा सिंघानिया और साले अनुराग सिंघानिया को गिरफ्तार कर लिया है। अब अतुल के भाई ने सवाल पूछा है कि उनका भतीजा कहाँ है। अतुल के भाई विकास मोदी ने कहा कि हम सब ये जानना चाहते हैं कि मेरा भतीजा यानि कि अतुल सुभाष का बेटा किस कंडीशन में है, उसको सार्वजनिक रखा जाए। अगर हो सके, तो उसे हमें दिया जाए। हम उसे अपने पास रखने के लिए तैयार हैं। इस बीच, ये जानकारी सामने आ रही है कि अतुल सुभाष के लैपटॉप से जरूरी फोल्डर गायब हैं, खासकर सुसाइड नोट से जुड़ी फाइल और वीडियो।

अतुल के भाई विकास मोदी ने पुलिस को धन्यवाद दिया, लेकिन कहा कि यह गिरफ्तारी न्याय का अंत नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि इस केस में पुरुषों के साथ हो रहे उत्पीड़न पर भी ध्यान दिया जाए। विकास ने कहा, “हमेशा महिलाओं के अधिकारों की बात होती है, लेकिन पुरुषों के अधिकारों पर कोई चर्चा नहीं होती।” विकास मोदी ने कहा कि निकिता की गिरफ्तारी के बाद अब भी कई सवाल बाकी हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि अतुल का बेटा कहाँ है। उन्होंने कहा, “निकिता की तस्वीर में हमारा भतीजा नहीं दिख रहा। हम जानना चाहते हैं कि वह किस हाल में है।”

परिवार की अपील: पोते की कस्टडी चाहिए

अतुल के पिता पवन कुमार मोदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य नेताओं से अपील की है कि उनके पोते को सुरक्षित उनके पास लाया जाए। उन्होंने चिंता जताई, “हमें नहीं पता कि हमारा पोता जिंदा है या उसे मार दिया गया है। हमें उसके बारे में कुछ नहीं पता। एक दादा के लिए उसका पोता उसके बेटे से भी ज्यादा मायने रखता है।” पवन कुमार ने बताया कि निकिता ने पोते के नाम पर उनके खिलाफ एक और मामला दर्ज कर दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे पोते की परवरिश खुद करना चाहते हैं, ताकि उसे एक सुरक्षित और अच्छा जीवन मिल सके।

पवन कुमार मोदी ने कहा कि अतुल को शादी के बाद से ही लगातार परेशान किया जा रहा था। उन्होंने बताया, “मेरे बेटे को झूठे आरोपों और केसों में फंसाकर इतना प्रताड़ित किया गया कि उसने जान दे दी। कानून को इस तरह के मामलों पर ध्यान देना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो कई और अतुल सुभाष इस अन्याय का शिकार होंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और सख्ती की जरूरत है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील की।

अतुल के परिवार ने कहा कि उनकी प्राथमिकता अब अतुल के बेटे को अपने पास लाने की है। उन्होंने पुलिस से अपील की कि बच्चे की स्थिति सार्वजनिक की जाए। विकास मोदी ने कहा, “हम तैयार हैं कि पोते की परवरिश हम करें। पुलिस और कोर्ट को सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चा हमारे पास सुरक्षित लौट आए।”

गुरुग्राम से हुई पत्नी की गिरफ्तारी

पुलिस ने निकिता को गुरुग्राम के एक पीजी से गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि निकिता ने पीजी में अपने नाम पर रजिस्ट्रेशन कराया था और एक महीने का किराया भी भरा, लेकिन वहाँ रुकी नहीं। पुलिस के मुताबिक, निकिता के सामान अब भी उस पीजी में मौजूद हैं। वहीं, निकिता की माँ निशा और भाई अनुराग को प्रयागराज के एक होटल से गिरफ्तार किया गया। तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

अतुल के लैपटॉप से गूगल ड्राइव गायब

इस बीच, इस मामले से जुड़ी नई जानकारी निकल कर सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि अतुल सुभाष की आत्महत्या के लगभग एक सप्ताह बाद, जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी निकिता और उसके परिवार के सदस्यों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था, उनकी मृत्यु से पहले उनके द्वारा साझा किए गए Google Drive लिंक में कई फ़ाइलें रहस्यमय तरीके से गायब हो गई हैं। जो फाइलें गायब हुई हैं, उनमें उनका 24-पृष्ठ का सुसाइड नोट और ‘टू मिलॉर्ड्स’ शीर्षक वाला एक पत्र शामिल है। इस फाइल में न्याय प्रणाली की आलोचना की गई थी।

क्या हुआ था अतुल के साथ?

बेंगलुरु में एक प्राइवेट कंपनी में डिप्टी जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत रहे अतुल सुभाष ने 9 दिसंबर 2024 को आत्महत्या की। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि उनकी पत्नी और ससुराल वाले उन्हें बार-बार परेशान कर रहे थे। निकिता 2021 में घर छोड़कर अपने बेटे को लेकर चली गई थी और झूठे आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराए थे। अतुल ने यह भी आरोप लगाया कि उनके केस की सुनवाई कर रहे एक जज ने रिश्वत माँगी थी। उन्होंने कहा था कि उनकी पत्नी ने उनके बेटे को उनसे दूर कर दिया और उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर किया।

अतुल ने डेढ़ घंटे का वीडियो और 23 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़कर खुदकुशी की थी, जिसमें उन्होंने पत्नी और ससुरालवालों पर उत्पीड़न और झूठे केसों का आरोप लगाया। अतुल ने अपने सुसाइड नोट और वीडियो में शादी के बाद से लेकर आत्महत्या के दिन तक के सभी घटनाक्रम विस्तार से बताए थे। उन्होंने कहा था कि उनकी पत्नी और ससुराल वाले उन्हें दहेज उत्पीड़न, हत्या और जबरन वसूली जैसे झूठे केसों में फंसा रहे हैं। अतुल ने एक जज पर भी पाँच लाख रुपये की रिश्वत माँगने का आरोप लगाया था।

पुलिस ने इस मामले में चार आरोपितों की पहचान की थी, जिनमें से तीन की गिरफ्तारी हो चुकी है। निकिता के चाचा सुशील अभी फरार हैं, और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।

रवींद्र सिंह यादव के ठिकानों पर छापे में मिली अकूत संपत्ति: नोएडा में ₹16 करोड़ का घर तो इटावा में ₹15 करोड़ का स्कूल, योगी के मंत्री ने ऑन द स्पॉट किया था सस्पेंड

उत्तर प्रदेश के नोएडा विकास प्राधिकरण के निलंबित विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) रवींद्र यादव के खिलाफ विजिलेंस विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शनिवार (14 दिसंबर 2024) को उनके नोएडा और इटावा स्थित ठिकानों पर छापेमारी की। 18 घंटे चले इस तलाशी अभियान में यादव की आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ। उनके तीन मंजिला आलीशान मकान, करोड़ों की संपत्ति, लाखों के गहने और अन्य दस्तावेजों ने अधिकारियों को चौंका दिया।

नोएडा में 16 करोड़ का आलीशान घर और 60 लाख के गहने बरामद

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएडा सेक्टर-47 में स्थित रवींद्र यादव का तीन मंजिला आवास उनकी अवैध संपत्ति का मुख्य केंद्र निकला। इस मकान की अनुमानित कीमत करीब 16 करोड़ रुपये बताई गई है। तलाशी के दौरान टीम को इस घर से 60 लाख रुपये के आभूषण, 2.5 लाख रुपये नकद और 37 लाख रुपये के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले। इनमें कई महँगे घरेलू सामान शामिल हैं।

विजिलेंस टीम को यहाँ से पासपोर्ट भी मिला, जिससे यादव और उनके परिवार की विदेश यात्राओं का ब्यौरा खंगाला जा रहा है। इसके अलावा, दो गाड़ियाँ- इनोवा और क्विड भी बरामद हुईं। टीम ने छह बैंक खातों और विभिन्न निवेशों के दस्तावेज जब्त किए, जिनकी अभी जाँच जारी है।

इटावा में करोड़ों का स्कूल

छापेमारी के दौरान इटावा के जसवंतनगर स्थित उनके बेटे निखिल यादव के नाम पंजीकृत अरिस्टोटल वर्ल्ड स्कूल में भी अनियमितताओं के प्रमाण मिले। इस स्कूल की जमीन और इमारत की कीमत करीब 15 करोड़ रुपये आँकी गई है। स्कूल में सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशनिंग और महंगे फर्नीचर का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी कुल लागत 2 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा, स्कूल में 10 बसें मिलीं, जिनकी कीमत 1.04 करोड़ रुपये आँकी गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजिलेंस विभाग की जाँच में पाया गया कि 2005 से 2018 के बीच रवींद्र यादव की आय 94.49 लाख रुपये थी, जबकि उन्होंने 2.44 करोड़ रुपये का खर्च दिखाया। इसमें लगभग 1.5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का कोई स्रोत नहीं मिला। इस अवधि में यादव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित की।

छापेमारी के दौरान विजिलेंस टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। इनमें लगभग एक दर्जन भूखंडों के कागजात, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और एक प्राइवेट ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी से जुड़े फर्जी लेन-देन के प्रमाण शामिल हैं। यह भी पता चला है कि रवींद्र यादव ने 2007 में नोएडा प्राधिकरण में विशेष कार्याधिकारी रहते हुए सरकारी भूखंड को नियम विरुद्ध तरीके से प्राइवेट सोसाइटी को आवंटित किया था। इस मामले की जाँच पहले सीबीआई द्वारा की जा चुकी है।

फरवरी 2023 में योगी सरकार ने मंत्री के निर्देश पर हुआ था सस्पेंड

यादव पर पहले भी नोएडा अथॉरिटी में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। उन्हें फरवरी 2023 में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के निर्देश पर निलंबित कर दिया गया था। जाँच में उनके द्वारा अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति के कई प्रमाण मिले थे, जिनमें नोएडा और इटावा के अलावा एटा, लखनऊ, और अन्य स्थानों पर संपत्तियों के दस्तावेज शामिल हैं।

रवींद्र यादव ने इन आरोपों को साजिश करार दिया है और खुद को निर्दोष बताया है। वहीं, विजिलेंस विभाग ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जाँच तेज कर दी है। टीम द्वारा जब्त दस्तावेजों और साक्ष्यों की गहन पड़ताल की जा रही है।

विजिलेंस विभाग अब जब्त संपत्ति और दस्तावेजों का विश्लेषण कर यह तय करेगा कि रवींद्र यादव और उनके परिवार के खिलाफ अगली कानूनी कार्रवाई क्या होगी। बता दें कि औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने विजिलेंस जाँच का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए थे।