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प्रताड़ित और धर्म परिवर्तन से बच कर भागे 34 Pak प्रवासी हिंदुओं को मिली भारतीय नागरिकता

राजस्थान सरकार ने राजस्थान के तीन ज़िलों में रहने वाले 34 पाकिस्तानी प्रवासी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता प्रदान की है। हाल ही में, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) राजीव स्वरूप ने जानकारी दी थी कि जून के महीने में सरकार द्वारा 34 पाकिस्तानी हिंदू प्रवासियों को नागरिकता प्रदान की गई थी।

ख़बर के अनुसार, इनमें से कई हिंदू एक दशक से अधिक समय से भारत में रह रहे हैं। इनमें बाड़मेर के 19, पाली के 10 और राजस्थान के जालोर ज़िले के 5 लोग शामिल हैं।

बाड़मेर में, जिला कलेक्टर हिमांशु गुप्ता और अतिरिक्त जिला कलेक्टर राकेश कुमार शर्मा ने पिछले बुधवार (19 जून) को कलेक्टोरेट में 19 हिंदू प्रवासियों को नागरिकता के प्रमाण-पत्र सौंपे थे। कलेक्टर ने नए नागरिकों से भारत के नागरिकों को दी जाने वाली सभी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करवाने के लिए कहा है।

जानकारी के अनुसार, जनवरी 2019 से, 17 जून 2019 तक, 79 विस्थापित पाकिस्तानी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता दी गई है। इससे पहले, मार्च में, राजस्थान में 44 प्रवासी पाकिस्तानी हिंदुओं को नागरिकता दी गई थी। 44 लोगों में से 12 बाड़मेर से, 15 उदयपुर से, 11 पाली से, और 06 जालोर ज़िले से थे।

पाकिस्तान में हिंदुओं पर घोर अन्याय, उत्पीड़न के साथ ही उनका जबरन धर्म-परिवर्तन के लिए भी दबाव डाला जाता है। हर हफ़्ते, कई हिंदू परिवार भारतीय वीजा के साथ थार एक्सप्रेस पर सवार होते हैं और भारत की यात्रा करते हैं, फिर कभी वापस नहीं जाते। वर्तमान में, राजस्थान और गुजरात में कई क्षेत्रों में सैकड़ों पाकिस्तानी हिंदू परिवार रहते हैं।

ख़बर के अनुसार, पाकिस्तान से आए प्रवासी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए एक व्यापक और लंबी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है। नागरिकता के लिए आईबी और स्टेट सीआईडी की रिपोर्ट जरूरी होती है पासपोर्ट समाप्ति और वीजा वैधता अवधि भी महत्वपूर्ण हैं।

पाकिस्तान के कई हिंदू अक्सर अस्थायी शिविरों में रहते हैं और पुरानी गाड़ियाँ बेचकर जीवन यापन करते हैं। यहाँ तक ​​कि शिक्षित हिंदू प्रवासी आवश्यक दस्तावेज़ों की कमी के कारण नौकरियों को सुरक्षित रख पाने में भी विफल रहते हैं।

‘गरीबों के रघुराम राजन’ ने RBI के डिप्टी गवर्नर पद से दिया इस्तीफा

रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने पद से त्यागपत्र दे दिया है। उनका कार्यकाल 20 जनवरी 2020 को पूरा हो रहा है लेकिन उन्होंने 6 महीने पहले ही त्यागपत्र दे दिया है। विरल आचार्य ने जनवरी 2017 में रिज़र्व बैंक में डिप्टी गवर्नर का पदभार ग्रहण किया था। 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद डिप्टी गवर्नर का पद संभालने वाले वे सबसे कम आयु के व्यक्ति हैं।

त्यागपत्र देने के बाद विरल आचार्य वापस न्यू यॉर्क विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक के रूप में कार्य करेंगे ऐसी संभावना प्रबल है। आचार्य को मौद्रिक नीति के विशेज्ञ के रूप में जाना जाता है। वे स्वयं को गरीबों का रघुराम राजन कहते हैं। इसलिए, रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी) जब कभी भी महंगाई के प्रति नरम रुख दिखाती, आचार्य अकसर उसके विरोध में खड़े हो जाते

आचार्य रघुराम राजन को अपना प्रेरणास्रोत और गुरु मानते हैं। उन्होंने उनके साथ मिलकर कई शोधपत्र भी प्रकाशित किए हैं। विरल आचार्य ने ‘यादों के सिलसिले’ नामक अपना म्यूजिक अल्बम भी कम्पोज़ किया था। एक बार उन्होंने केंद्र सरकार और आरबीआई के बीच के रिश्ते की व्याख्या हिंदी फिल्मों के गानों की पक्तियों से की थी।

संगीत में बेहद दिलचस्पी रखने वाले आचार्य ने न्यू यॉर्क में खुद कंपोज किए गानों की एक सीडी लॉन्च की थी और इससे हुई आमदनी परोपकार पर खर्च कर दी थी। त्यागपत्र देने के बाद वे 23 जुलाई तक ही डिप्टी गवर्नर के पद पर रहेंगे

झारखंड में बुझ गई लालू की लालटेन: RJD प्रदेश अध्यक्ष गौतम राणा ने बनाई नई पार्टी

लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिलने के बाद बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को बड़ा झटका लगा है। लालू की पार्टी राजद झारखंड में टूट गई है। झारखंड में राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष गौतम सागर राणा ने राजद से अलग होकर पार्टी के सदस्यों के साथ नई पार्टी का गठन किया है और ऐसा तब हुआ जब लालू प्रसाद राँची में ही हैं। वो चारा घोटाले के चार मामलों में राँची के बिरसा मुंडा जेल में सजा काट रहे हैं। नई पार्टी का नाम राष्ट्रीय जनता दल लोकतांत्रिक रखा गया है।

रविवार (जून 23, 2019) को विधानसभा सभागार में पूरे झारखंड से जुटे पार्टी के महत्वपूर्ण नेताओं और कुछ जिला अध्यक्षों की मौजूदगी में तीन प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुए। पहले प्रस्ताव में सभागार में मौजूद राजद के सभी नेताओं ने पार्टी से त्यागपत्र दिया। दूसरे प्रस्ताव में नई पार्टी के गठन का प्रस्ताव आया, जिसका नाम रखा गया राष्ट्रीय जनता दल लोकतांत्रिक। तीसरे प्रस्ताव में इस नई पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष के रूप में गौतम सागर राणा का नाम आया।

सभागार में मौजूद सभी लोगों ने इन तीनों प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया। नई पार्टी के गठन के बाद अध्यक्ष गौतम सागर राणा ने पत्रकारों से बात की और कहा, “मैं और झारखंड के राष्ट्रीय जनता दल के 90 फीसदी कार्यकर्ता व नेता लालू प्रसाद यादव से नाराज हैं। अब राष्ट्रीय जनता दल में लोकतंत्र नहीं बचा है, लिहाजा हमने नई पार्टी बनाई है और अब हम खुद झारखंड के लोगों की सेवा करेंगे।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ही असली राजद है। हालाँकि, वो लालटेन छाप पर दावा नहीं करेंगे। उनका चुनाव चिह्न अलग होगा। इस बारे में वो जल्द ही चुनाव आयोग को सूचित करेंगे।

गौतम सागर राणा ने कहा कि जुलाई के पहले सप्ताह में कार्यसमिति की बैठक होगी, जिसमें विधानसभा चुनाव की रणनीति बनेगी। बैठक में तय होगा कि किस दल के साथ गठबंधन करना सही होगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल सभी पार्टियाँ उनके संपर्क में हैं, मगर वो अपनी ताकत के दम पर आगे बढ़ेंगे। वहीं झारखंड के वर्तमान राजद अध्यक्ष अभय सिंह ने पार्टी की टूट पर कहा कि दल से निकाले हुए लोगों ने नई पार्टी बनाई है। इससे राजद की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। चंद पॉकेट के लोगों के साथ गौतम सागर राणा ने नया दल बनाया है, जिसका कोई असर राजद की सेहत पर नहीं पड़ेगा।

अलीगढ़ में कचौड़ी वाला निकला करोड़पति, जाँच अधिकारियों ने जारी किया नोटिस

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक कचौड़ी बेचने वाला व्यापारी करोड़पति निकला है। इस बात का खुलासा व्यापारी की जाँच करने गई वाणिज्य कर विभाग (Commercial Tax Department) की टीम ने किया। दरअसल, टीम ने जाँच के दौरान दुकान पर खड़े होकर कचौड़ी वाले की बिक्री और खाद्य वस्तुओं के आधार पर ₹60 लाख का सालाना टर्न ओवर निकाला, जो आगे की जाँच में बढ़कर 1 करोड़ पहुँच सकता है। जाँच अधिकारियों ने फिलहाल दुकानदार को नोटिस जारी कर दिया है।

हिन्दुस्तान की खबर के अनुसार मुकेश नाम का व्यापारी अलीगढ़ में सीमा टॉकीज के पास पिछले 10-12 साल से समोसे-कचौड़ी बेच रहा है। पिछले दिनों स्टेट इंटेलीजेंस ब्यूरो को इस कचौड़ी वाले के ख़िलाफ़ शिकायत मिली। मामले को लखनऊ से अलीगढ़ भेजा गया। वाणिज्य कर विभाग के एसआईबी के अधिकारियों ने पहले कचौड़ी वाले को ढूँढा और फिर 2 दिन तक आस-पास बैठकर उसकी बिक्री का जायजा लिया। 21 जून को विभाग की टीम मुकेश की दुकान पर जाँच करने पहुँची। जाँच में व्यापारी ने खुद सालाना लाखों रुपए के टर्नओवर की बात को स्वीकारा। मुकेश ने खुद ही ग्राहकों की संख्या, कच्चे माल की खरीद, रिफाइंड, चीनी व गैस सिलेंडर के बारे में जाँच अधिकारियों को पूरी जानकारी दी

इसके बाद जाँच एजेंसियों के अधिकारियों ने अपनी शुरूआती जाँच में पाया कि कचौड़ी व्यापारी मुकेश का सालाना टर्नओवर ₹60 लाख से अधिक बैठ रहा है लेकिन फिर भी मुकेश की दुकान को जीएसटी से पंजीकृत नहीं मिला, जबकि नियमानुसार ₹40 लाख का टर्नओवर वालों को पंजीयन करवाना होता है। अधिकारियों ने अपनी जाँच में दावा किया है कि ₹60 लाख का टर्नओवर शुरूआती जाँच में सामने आया है, लेकिन विस्तृत जाँच में ये टर्नओवर एक से डेढ़ करोड़ पहुँचने की पूरी संभावना है।

बता दें कि तैयार माल पर 5 प्रतिशत का जीएसटी लगता है। ऐसे में कारोबारी पिछले 10 सालों से बिना कोई कर चुकाए कारोबार कर रहा है। अब उसे जीएसटी का पंजीयन कराना होगा और साथ ही एक साल के टैक्स पर कर अदा करना होगा। मुकेश के इस कारोबार और सालाना टर्नओवर का खुलासा होने के बाद अधिकारियों का शक ऐसा कारोबार करने वाले बाकी व्यापारियों पर भी हो रहा है।

सरकारी योजनाओं में दलाली के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले BJP नेता के घर फेंका बम: बदहाल बंगाल

पश्चिम बंगाल के वीरभूम में एक बार फिर से तनाव का माहौल है। यहाँ सरकारी योजनाओं में दलाली के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले भाजपा नेता के घर में बमबारी और फायरिंग की गई है। हालाँकि इस घटना में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है, लेकिन भाजपा का आरोप है कि यह हमला टीएमसी द्वारा करवाया गया है।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार दलाली की रकम को वापस किए जाने की माँग को लेकर नानूर के पांचसोया ग्राम पंचायत में रविवार (23 जून) को भाजपा ने प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी, लेकिन प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही भाजपा नेता के घर को निशाना बना दिया गया। तृणमूल के गुंडों को इसका जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

बंगाल में इस घटना के अलावा नॉर्थ 24 परगना जिले के नरेंद्रपुर थाना क्षेत्र में ‘जय श्रीराम’ बोलने पर टीएमसी द्वारा बीजेपी कार्यकर्ताओं की पिटाई का मामला भी सामने आया, जिसके कारण रविवार (जून 23, 2019) को बड़ी तादाद में भाजपा समर्थकों ने नरेंद्रपुर थाने का घेराव कर आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग के लिए प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि इलाके में रहने वाले भाजपा समर्थकों को तृणमूल गुंडों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है और ये सब बेवजह हो रहा है।

खबर के मुताबिक, नॉर्थ 24 परगना जिले के भाटपाड़ा में 20 जून को हुई घटना के कारण इलाके में लगी 144 धारा के बाद भी माहौल में तनाव बना हुआ है। माहौल को देखते हुए रविवार को दुकान-बाजार भी बंद रखे गए और छुट्टी के दिन लोगों ने घर में रहना ही उचित समझा। हालाँकि, पुलिस की ओर से इलाके में हालात सामान्य करने की पूरी कोशिश की जा रही है, लेकिन हालात अभी भी बेकाबू हैं। बिगड़ते माहौल के मद्देनजर ही शनिवार (22 जून) को भाजपा का 3 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पश्चिम बंगाल के भाटपारा का दौरा करने पहुँचा था। जिसका नेतृत्व भाजपा सांसद एसएस अहलूवालिया ने किया था।

बिहार के वोटर: ‘लापता’ MLA जब मिलने आए तो बनाया बंधक, पैसे और दवाई लेने के बाद छोड़ा

वैशाली के हरिवंशपुर गाँव में शनिवार (जून 22, 2019) को लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) सुप्रीमो रामविलास पासवान और स्थानीय विधायक के लापता होने का पोस्टर लगने के बाद रविवार (जून 23, 2019) को हाजीपुर के सांसद पशुपति कुमार पारस और लालगंज के लोजपा विधायक राजकुमार साह हरिवंशपुर पहुँचे। यहाँ दोनों को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। लोग इतने गुस्से में थे कि कोई सांसद को दरवाजे पर कुर्सी तक देने को तैयार नहीं था। उग्र ग्रामीणों ने विधायक को बंधक बना लिया

विधायक के बंधक बनाए जाने की खबर मिलते ही पुलिस विभाग में खलबली मच गई। भारी तादात में पुलिस फोर्स वहाँ पहुँच गई, लेकिन ग्रामीण राजकुमार शाह को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थी। काफी समझाने के बाद शाह ने पीड़ित परिवारों को ₹5,000 की आर्थिक सहायता दी और साथ ही जरूरी दवाओं का वितरण किया, तब जाकर लोगों ने विधायक को जाने दिया।

दरअसल, गाँव में बीते 10 दिनों में चमकी बुखार से 7 बच्चों की मौत हो चुकी है। 7 बच्चों की मौत के बाद भी किसी जनप्रतिनिधि के गाँव में नहीं पहुँचने पर लोग काफी नाराज थे। नाराज ग्रामीणों का कहना था कि बीमारी से बच्चों की मौत हो जाती है और विधायक इसकी सुध लेने भी नहीं आते हैं। गाँव के निवासी उनसे काफी आक्रोशित थे। ग्रामीण उनसे पूछ रहे थे कि वो उस वक्त कहाँ थे जब वो लोग ऐसी विकट स्थिति से जूझ रहे थे कि उनके पास पानी भी नहीं था। एक ग्रामीण ने तो यहाँ तक कह दिया कि विधायक के पास गाँव वालों की समस्याएँ सुनने का भी समय नहीं है। जब कुछ लोग उन्हें मौजूदा हालात के बारे में बताने के लिए गए तो उनके बेटे ने उन लोगों को दरवाजे से धक्का देकर बाहर कर दिया।

गौरतलब है कि, शनिवार (जून 22, 2019) को हरिवंशपुर के ग्रामीणों ने केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान और स्थानीय  विधायक के लापता होने के पेस्टर लगाए थे। इन पोस्टरों पर विधायक को खोजने के लिए ₹5000 और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को खोजने के लिए ₹15000 के इनाम की घोषणा की गई थी। बैनर पर निवेदक के रूप में हरिवंशपुर के पीड़ित परिवार लिखा हुआ था। 

वर्दी के नाम पर कलंक बन चुके पुलिसकर्मियों के लिए कोई जगह नहीं: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार और बेईमान अधिकारियों की नाक में नकेल कसने में लगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस विभाग में भी सख़्त रवैया अपनाया है। उन्होंने यूपी में 50 वर्ष के पार हो चुके नकारा पुलिसवालों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निश्चय कर लिया है। रविवार (23 जून) को आज़मगढ़ ज़िले की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने पुलिस प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कहा कि वर्दी के नाम पर कलंक बन चुके पुलिसकर्मियों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है।

योगी आदित्यनाथ ने इस बैठक में यूपी में आपराधिक घटनाओं के न थमने पर आला अफ़सरों से कड़े सवाल किए। उन्होंने पूछा, “आप के आसपास सारे संसाधन मौजूद हैं, पूरी छूट है और दावे के अनुसार आप सड़क पर ही रहते हैं फिर भी अपराध की घटनाएँ क्यों हो रही हैं? अपराध होने के बाद भी आपका ऐक्शन क्यों नहीं दिखता। किसी घटना का जब मीडिया ट्रायल शुरू हो जाता है, उसके बाद ही आपका ऐक्शन क्यों दिखता है?”

मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा,

“जिन पुलिसकर्मियों की अपराधियों से सांठगांठ है, अभियान चलाकर उनकी पहचान (चिह्नित) करें। वर्दी के नाम पर कलंक बन चुके लोगों की विभाग में कोई जगह नहीं है। चौकीदार सूचनाएँ देकर अपराध को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हर पखवाड़े इनके साथ बैठक करें। प्रधानों और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी लगातार संवाद बनाए रखें। लोकतंत्र में समस्याओं के हल का सबसे प्रभावी जरिया है- संवाद। लूट होने पर संबंधित थाने के बीट सिपाही से लेकर अन्य पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करें।”

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने इस बात पर कड़ी नाराज़गी जताई कि जेलों को अपराधियों के आराम और अपराध संचालन का अड्डा बना दिया गया है। उन्होंने ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश जारी किया। साथ ही यह भी कहा कि आँकड़ों को नहीं बल्कि जनता के भरोसे को क़ानून व्यवस्था का मानक बनाना चाहिए, इस भरोसे की बदौलत ही जनता में सकारात्मक संदेश जाता है। महिलाओं और मासूम बच्चों के साथ हुए दुष्कर्म मामलों के ख़िलाफ़ उन्होंने कड़ा रुख़ अख़्तियार करते हुए ऐसे मामलों में कड़ाई से कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इन मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में जाया जाए और मज़बूती के साथ पैरवी कर दोषियों को दो महीने में अधिकतम सज़ा दिलवाई जाए, इसके बाद ही अपराधियों के मन में ख़ौफ़ पैदा हो सकेगा।

ख़बर के अनुसार, इसी संदर्भ में एडीजी स्थापना पीयूष आनन्द ने पुलिस की सभी इकाईयों के प्रमुखों, सभी आईजी रेंज और एडीजी ज़ोन को ऐसे नकारा पुलिसवालों की सूची 30 जून तक भेजने का पत्र लिखा है। दरअसल, गृह विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने भ्रष्ट और नकारा पुलिसकर्मियों को जबरन सेवानिवृत्ति देने के निर्देश दिए थे। उसके बाद एडीजी स्थापना पीयूष आनन्द ने सभी इकाईयों और ज़िलों में बनाई गई स्क्रीनिंग कमिटी की रिपोर्ट तलब कर ली थी। अब उन पुलिसवालों की छंटनी की जाएगी, जिन्होंने 31 मार्च 2019 को 50 वर्ष की आयु पार कर ली है।

हाल ही में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार और बेईमान अफ़सरों के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाते हुए फ़रमान जारी किया था कि ऐसे अधिकारियों के लिए सरकार में कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा था कि ऐसे अधिकारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लें अन्यथा उन्हें सेवानिवृत्ति के लिए बाध्य कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं योगी आदित्यनाथ ने उन अधिकारियों की सूची तैयार करने के आदेश भी जारी किए थे जिनके पास मामले काफ़ी समय से लंबित हैं या वे संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं। खबर के मुताबिक, सीएम के सख़्त रवैये के बाद सचिवालय प्रशासन द्वारा अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के लिए 30 भ्रष्ट अधिकारियों के नाम छाँटे जा चुके हैं।

‘दाढ़ी वाला ऑटो ड्राइवर मुझे देखकर हस्तमैथुन कर रहा था’: MBA कर रही 19 साल की लड़की की आपबीती

ये है मुंबई नगरिया तू देख बबुआ… इस गाने को लिखते वक्त गीतकार ने दूर-दूर तक जिन-जिन चीजों को दिखाने की कल्पना की होगी, उसमें निश्चित ही इस खबर से संबंधित घटना नहीं रही होगी। हो भी नहीं सकती है। यह घटना कोई विक्षिप्त दिमाग का इंसान ही कर सकता है। क्योंकि जिस भी ऑटो चालक ने 19 साल की लड़की को देखकर उसके सामने हस्तमैथुन करने की सोची होगी, वो दिमागी तौर पर संतुलित तो नहीं ही होगा।

रेखा (बदला हुआ नाम) 19 साल की लड़की है। MBA कर रही है। रात को 11 बजकर 54 मिनट पर वो हिरानंदानी इलाके में वो जॉगिंग कर रही थी। तभी उसके साथ वो हुआ, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। जो घटना घटी, उसके बारे में रेखा ने बताया, “लगभग 11.54 बजे मैं हीरानंदानी में जॉगिंग कर रही थी। मैं झील की तरफ दौड़ रही थी, फिर हाईवे देखा और वापस मुड़ गई। मैंने वहाँ कुछ लोगों को देखा, थोड़ा सहमी फिर पास के एक बैंक एटीएम की सीढ़ियों पर बैठ गई। अपना फोन देखने में बिजी हो गई। जैसे ही मेरी नजर फोन से हटकर ऊपर को हुई तो सामने एक ऑटो में एक आदमी बैठा मुझे घूर रहा था। फिर जल्द ही यह भी समझ आ गया कि वह सिर्फ मुझे घूर ही नहीं रहा था बल्कि वो हस्तमैथुन भी कर रहा था।”

रेखा अचंभित हो गई। या यूँ कहिए कि डर गई। वह न तो वहाँ से भाग पाई, न उस ऑटो ड्राइवर से बहस कर पाई और न ही उसकी गाड़ी के नंबर प्लेट को ही देख पाई। हाँ, उसने दिमाग चलाया और मुंबई पुलिस को फटाफट ट्वीट कर दिया। पुलिस ने तुंरत तत्परता दिखाते हुए रेखा की मदद के लिए एक टीम भेजी।

पुलिस को रेखा ने पूरी घटना की जानकारी दी। उसने बताया कि ऑटो में बैठा हुआ आदमी ऑटो ड्राइवर के ड्रेस में था और दाढ़ी रखे हुए था। चूँकि उसने ऑटो का नंबर प्लेट नहीं देखा था, इसलिए पुलिस को CCTV से फुटेज निकालने की सलाह भी उसी ने दी। रेखा का कहना है कि वहाँ कई सारे ऑफिस हैं, इसलिए जगह-जगह CCTV लगे हुए हैं, जिसके फुटेज से आरोपित को पकड़ा जा सकता है।

पुलिस ने मीडिया को बताया कि यह एक गंभीर अपराध है और वे लोग इस संबंध में छानबीन कर रहे हैं। हीरानंदानी इलाके में ऑपरेट करने वाले ऑटो ड्राइवरों से पूछताछ किया जा रहा है। आरोपित को पकड़ने के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं।

यह एक आम घटना नहीं है। और ना ही ऐसा जो सिर्फ मुंबई में हुआ है। ऐसी घृणित मानसिकता के लोग आपको हर शहर में मिल जाएँगे। जैसे हफ्ते-10 दिन पहले गुरुग्राम की घटना ही ले लीजिए। एक लड़की हुडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन में बने स्टोर से निकल कर स्वचालित सीढ़ियों से नीचे उतर रही थी कि उसे ‘कुछ अजीब’ लगा। ‘कुछ अजीब’ इसलिए क्योंकि उस लड़की के ठीक पीछे एक लड़का हस्तमैथुन कर रहा था।

त्रिपुरा के आदिवासी इलाकों में बंद पड़े स्कूलों का संचालन संभालेगा ISKCON

त्रिपुरा राज्य सरकार ने 20 सरकारी स्कूलों को संचालन के लिए इस्कॉन के हाथों सौंपने का फैसला किया है। इनमें से 13 स्कूल बंद पड़े हुए हैं जिनमें एक भी बच्चा नहीं पढ़ता। प्राप्त समाचार के अनुसार शिक्षा मंत्री रतनलाल नाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, “मंत्रिपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 13 बंद पड़े स्कूलों और 7 अन्य स्कूलों को इस्कॉन को सौंप दिया जाएगा।” इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) संस्था इन स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने को तैयार है।

त्रिपुरा में फ़िलहाल 4,389 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल हैं। नाथ ने कहा कि राज्य सरकार के अधीन आने वाले 147 स्कूलों ऐसे हैं जिनमें अधिकतम 10 बच्चे पढ़ते हैं। बाकी 13 बंद पड़े हैं क्योंकि उनमें एक भी बच्चा नहीं पढ़ता। बंद पड़े स्कूलों और 7 अन्य स्कूलों का संचालन इस्कॉन संस्था को सौंपा जाएगा। इस्कॉन का इंडियन ट्राइबल केयर ट्रस्ट नामक विभाग है जो त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों में स्थित इन स्कूलों को चलाने की जिम्मेदारी लेगा।  

मंत्री ने कहा कि लेफ्ट को हराकर जब भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन सरकार सत्ता में आई थी तभी शिक्षा में सुधार का निर्णय लिया गया था। आरंभ में इस्कॉन ने 53 स्कूलों का चयन किया था। लेकिन राज्य सरकार ने पाँच साल के लिए 20 स्कूल देने का निर्णय लिया जिसमें से 7 पश्चिमी त्रिपुरा ज़िले में हैं, एक गोमती ज़िले में है, 2 खोवाई ज़िले में है, तीन सेपाहीजाला ज़िले में और 7 दक्षिण त्रिपुरा ज़िले में है।

त्रिपुरा राज्य सरकार और इंडियन ट्राइबल केयर ट्रस्ट जल्दी ही मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंग पर हस्ताक्षर करेंगे। इस्कॉन को स्कूलों का संचालन कुछ शर्तों और नियमों पर दिया जाएगा। इस्कॉन को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिन स्कूलों का संचालन उन्होंने अपने हाथ में लिया है उनमें पढ़ने वाले बच्चों की संख्या कम से कम 30 तक पहुँचे। इसके अतिरिक्त स्कूलों को सीबीएसई या आईसीएसई से मान्यता प्राप्त करना और शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के प्रावधानों को मानना अनिवार्य होगा।

राज्य सरकार पुस्तकें, यूनिफार्म और मिड डे मील मुफ्त में उपलब्ध करवाएगी और स्कूलों का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा। केवल संचालन का दायित्व इस्कॉन को दिया जाएगा।   

‘अखिलेश यादव मुस्लिमों को लोकसभा चुनाव में ज्यादा टिकट नहीं देना चाहते थे, क्योंकि…’

बसपा सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद बयान दिया है कि अखिलेश यादव मुस्लिमों को ज्यादा टिकट नहीं देना चाहते थे, क्योंकि उनका कहना था इससे ध्रुवीकरण होगा, लेकिन मायावती ने उनकी बात नहीं मानी। मायावती ने बताया कि प्रचार के दौरान आरक्षण का विरोध करने की वजह से दलितों और पिछड़ों ने सपा को वोट नहीं किया है।

प्रदेश मुख्यालय पर पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में मायावती ने यूपी में हुए गठबंधन और नतीजे के बाद की गतिविधियों पर जानकारी साझा की और बताया कि गठबंधन से उनकी पार्टी को अब तक किसी चुनाव में कोई फायदा नहीं हुआ है और यही हाल इस चुनाव में भी रहा। अपनी पूरी बातचीत से मायावती ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी नजर में अखिलेश यादव की कोई अहमियत नहीं रह गई है।

मायावती ने इस दौरान अखिलेश से नाराज़गी जताते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद अखिलेश ने उन्हें फोन तक नहीं किया। सतीश मिश्रा ने उनसे कहा भी, लेकिन फिर भी उन्होंने फोन नहीं किया। मायावती ने बताया कि इस दौरान उन्होंने बड़े होने का फर्ज निभाया और काउंटिंग के दिन 23 तारीख को अखिलेश के पास फोन करके उनके परिवार की हार पर अफसोस जताया।

मायावती ने इस बातचीत में सपा नेता राम गोविंद चौधरी पर आरोप लगाया कि सलेमपुर से बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा को उन्होंने हरवाया है। उन्होंने सपा के वोट भाजपा को ट्रांसफर करवा दिए लेकिन फिर भी सपा नेता ने उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की।

मायावती के मुताबिक 3 जून को जब उन्होंने गठबंधन तोड़ने की बात की, तब भी अखिलेश ने सतीश चंद्र मिश्रा को फोन किया, लेकिन उनसे बात नहीं की। मायावती की मानें तो अखिलेश सरकार में गैर यादव और पिछड़ों के साथ नाइंसाफी हुई, इसलिए उन्हें वोट नहीं मिला।

इसके अलावा पुरानी दुशमनी को भुलाकर चुनाव के दौरान हुए सपा-बसपा के गठबंधन से लग रहा था कि पिछले मनमुटाव खत्म हो चुके हैं लेकिन इस बातचीत में मायावती ने उस घटना का दोबारा जिक्र किया। जिससे साफ़ हो गया कि उनके जख्म अभी भी ताजा हैं। उन्होंने कहा कि ताज कॉरिडोर मामले में उनके खिलाफ बीजेपी की साजिश में सपा के तत्कालीन अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव भी शामिल थे। उन्होंने 2006 के समय को याद किया जब बसपा संस्थापक कांशीराम की मृत्यु हुई थी और केंद्र की कॉन्ग्रेस सरकार की तरह मुलायम सरकार ने भी न तो एक भी दिन का शोक घोषित किया और न ही दो फूल ही चढ़ाने पहुँचे थे।

बता दें कि इन दिनों मायावती आगामी चुनावों को अकेले लड़ने की योजना बना रही हैं। इसके मद्देनजर उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोआर्डिनेटर बना दिया है।