पुलवामा आतंकी हमले के बाद सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी नेताओं के ख़िलाफ़ कड़े कदम उठाते हुए फ़ैसला लिया है कि इन नेताओं को सरकार की ओर से मिलने वाली सभी सुरक्षा और सुविधाएँ वापस ले ली जाएँ।
जम्मू-कश्मीर के उच्च अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी है कि अलगाववादी नेताओं में मीरवाइज़ फ़ारुक़, अब्दुल गनी भट, बिलाल लोन, शबीर शाह और हाशिम क़ुरैशी को उपलबध कराए गए सुरक्षा और वाहनों की सभी सुविधाएँ इस रविवार तक वापस ले ली जाएँगी।
#JammuAndKashmir administration withdraws security of all separatist leaders, including that of Mirwaiz Umar Farooq, Shabir Shah, Hashim Qureshi, Bilal Lone & Abdul Ghani Bhat.
इसके अलावा हिंदुस्तान में छपी ख़बर के मुताबिक अगर कोई और अलगाववादी है जिसे सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं तो प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा इस पर समीक्षा की जाएगी। साथ ही तत्काल प्रभाव से उसकी सुरक्षा वापस ले ली जाएगी।
सरकार द्वारा लिए गए इस बड़े फ़ैसले के बाद हुर्रियत प्रेस कॉन्फ्रेंस की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ के नेतृत्व में हुई इस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि सरकार ने ख़ुद ही अलगाववादी नेताओं को सुरक्षा मुहैया कराने का फ़ैसला किया था, जिसकी कभी माँग नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा वापस लेने के फ़ैसले से न तो अलगाववादी नेताओं के रुख़ में बदलाव आएगा और न ही इससे उनकी ज़मीनी हालातों पर कोई असर पड़ने वाला है।
इसके अलावा अलगाववादी नेता अब्दुल गनी भट का कहना है कि उन्हें राज्य द्वारा मिलने वाली सुरक्षा की कोई भी आवश्यकता नहीं है। भारत और पाकिस्तान में युद्ध के आसार हैं। प्रदेश सरकार द्वारा दी गई सुरक्षा की उन्हें कोई ज़रूरत नही हैं।
Srinagar: Visuals from outside Separatist Abdul Ghani Bhat’s office&residence after J&K admin withdraws security, Bhat says, ‘Security was provided by state govt, I don’t need it. My security is Kashmiri ppl. There are chances of war b/w Pak&India.Let them address war issue first pic.twitter.com/uiK5W5sknh
आज पुलवामा आतंकी हमले के बाद कश्मीर के लोगों से जुड़ी लगातार दो ख़बरें पढ़ीं। एक ख़बर जिसमें बताया जा रहा है कि दिल दहला देने वाले इस घटना में न केवल आतंकियों ने बल्कि पत्थरबाजों ने भी अपनी भूमिका अदा की है, और दूसरी ख़बर यह कि इस हमले के बाद सीआरपीएफ के जवानों ने संकट में फँसे हर कश्मीरी के लिए एक टॉल फ्री नंबर जारी किया है।
दोनों ख़बरों को पढ़ने के बाद समझ से परे है कि क्या लिखा जाए और क्या कहा जाए। जिन सीआरपीएफ जवानों के क़ाफ़िले पर हमला हुआ है, उसी क़ाफ़ीले के एक जवान ने इस बात की सूचना दी कि जिस समय यह धमाका हुआ है उससे 10 मिनट पहले से कुछ पत्थरबाज पथराव कर रहे थे। बाज़ार में लोग जल्दी-जल्दी दुकानों के शटर को गिरा रहे थे। लेकिन, जबतक गाड़ी में बैठे जवान इन सब चीज़ों को लेकर कुछ समझ पाते तब तक धमाका हो गया।
इस मामले में आगे जाँच में सामने आया कि सीआरपीएफ के क़ाफ़िले के बारे में आतंकियों को पहले से ही जानकारी थी। इसी वजह से उन्होंने हमले के लिए एक ऐसी जगह को चुना जहाँ पर अमूमन गाड़ियों की रफ़्तार कम हो जाती है। ज़ाहिर है यह सारी ख़बरें बिना किसी स्थानीय जानकार के इकट्ठा कर पाना नामुमकिन होगा। पत्थरबाज भी वहाँ के स्थानीय ही रहे होंगे, जिन्होंने हमले के पूरी ज़मीन तैयार करने में अपनी भूमिका को अदा किया।
अब ऐसे में दूसरी ख़बर में है कि सीआरपीएफ जवानों ने एक टॉलफ्री नंबर सिर्फ़ इसलिए जारी किया है क्योंकि पुलवामा हमले के बाद कश्मीर के लोगों को कथित तौर पर धमकियाँ मिल रही हैं। इन्हीं खबरों के मद्देनज़र श्रीनगर स्थित सीआरपीएफ हेल्पलाइन ने शनिवार (16 फ़रवरी) को कहा कि वे किसी भी तरह के उत्पीड़न के मामले में उनसे संपर्क करें।
साथ ही मददगार हेल्पलाइन ने भी इसी सिलसिले में ट्वीट करके कहा है कि इस समय कश्मीर से बाहर छात्र और आम लोग ट्विटर हैंडल @CRPFmadadgaar पर संपर्क कर सकते हैं। साथ ही किसी भी कठिनाई या उत्पीड़न का सामना करने में शीघ्र सहायता के लिए वे 24 घंटे टोल फ्री नंबर 14411 या 7082814411 पर SMS कर सकते हैं।
इन दोनों ख़बरों में निहित दो पक्षों की भावनाओं में जो विरोधाभास है वो लगातार सोचने पर मजबूर करता है, कि क्या इतने सब के बाद भी कश्मीर के पत्थरबाजों को समझ नहीं आता कि जवानों का होना न केवल देश के लिए बल्कि उनकी ख़ुद की सुरक्षा के लिए कितना आवश्यक है। आज जो सुरक्षाबल के लोग अपने जवानों को खोने के बाद भी उनकी सुरक्षा के लिए तत्पर हैं, वही कल को पत्थरबाजी का शिकार होंगे। देश का हर व्यक्ति इस बात को अच्छे से जानता है कि इस पूरे हमले में आतंकियों तक सूचनाएँ बिना किसी स्थानीय के नहीं जा सकती थी। तो सोचिए जवान इस बात को नहीं जानते होंगे क्या?
इतना सब होने के बावजूद भी तथाकथित लोग देश की सेना पर सवाल उठाना नहीं बंद करेंगे। कुछ अपने ही लोग सेना का सोशल मीडिया पर लगातार मजाक बनाएँगे और पकड़े जाने पर अभिव्यक्ति की आज़ादी का हवाला देंगे। ऐसे लोग भूल जाएँगे कि जैश-ए-मोहम्मद जैसे कई आतंकी संगठन भारत को मिटाने के लिए अपना निशाना साधे बैठे हैं। जो मौक़ा मिलते ही अपने मनसूबों पर फ़तह हासिल करना चाहते हैं।
सोचिए, अगर यही सेना के जवान आपकी पत्थरबाजी और उठाए सवालों से तंग आकर सीमा से हट जाएँ… तो कैसे बचेंगे आप और कैसे सुरक्षित रहेगी आपकी अभिव्यक्ति की आज़ादी? अगर सेना ही आपकी और देश की सीमाओं की रक्षा करना बंद कर दे तो इन आतंकियों से कैसे कोई नेता और संविधान की कोई धारा आपकी रक्षा कर पाएगी, सोचिए जरा। सीमा पर तैनात जवान अगर ड्यूटी करना छोड़ दे तो इन आतंकियों के ख़िलाफ़ कोई न्यायालय आपकी शिक़ायत और गुहारों को न ही सुन पाएगा और न ही मामला दर्ज कर पाएगा। इसलिए थोड़े मतलबी होकर समय रहते सुरक्षाबलों की एहमियत को पहचानिए, कहीं देर न हो जाए।
केरल के कोट्टियूर में 16 साल की नाबालिग के साथ रेप करने पर थलास्सेरी स्थित विशेष अदालत ने शनिवार (फरवरी 17, 2019) को चर्च के पादरी रॉबिन वड़ाक्केनचेरिल के लिए 20 साल की सज़ा तय की है। साथ ही पादरी पर दो लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
ख़बरों के मुताबिक इस दुष्कर्म में आरोपित फॉदर के अलावा अन्य छह लोग (4 नन, 1 पादरी और 1 कर्मचारी) भी शामिल थे। जिन्हें शनिवार को बरी कर दिया गया। लेकिन, फॉदर रॉबिन को अदालत ने पूरे मामले का दोषी करार दिया।
पीड़िता द्वारा दर्ज कराए गए बयान के अनुसार यह घटना 2016 में हुई थी, इसके बाद 2017 में नाबालिग ने एक निजी हॉस्पिटल में बच्चे को जन्म भी दिया था। खबरों के मुताबिक यह पूरा मामला नाबालिग के जन्म प्रमाण-पत्र के कारण सामने आया। जिसमें साफ़ था कि जिस समय लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ उस समय उसकी उम्र 16 साल थी।
इसके अलावा नाबालिग के बच्चे का डीएनए भी फॉदर रॉबिन के डीएनए से मिलता है। इससे साबित होता है कि उसका यौन शोषण पादरी ने ही किया था।
बता दें कि फरवरी 28, 2017 में रॉबिन को उस समय पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किया गया, जब वो कनाडा भागने की फ़िराक में था।
पूरी दुनिया जब वैलेंटाइन मना रही थी, हमारा देश मातम में डूब गया था। लोग सदमे में थे। जो शहीद हुए, जो ज़ख्मी थे… उनकी पीड़ा पर क्या कहा जाए और क्या लिखा जाए… सोच से परे है, शब्द नहीं है! लेकिन एक ज़ख्म और लगा था उस दिन – ऐसा ज़ख्म जिस पर चर्चा की जा सकती है और हम सबको करनी भी चाहिए। वो ज़ख्म था – भारत की सुरक्षा पर चोट, हर नागरिक के दिल में उठती टीस वाला ज़ख्म। वो ज़ख्म था – आतंकियों का अट्टाहास – हम तुम्हें ऐसे ही मारेंगे और घुस कर मारेंगे।
लेकिन यह हुआ कैसे? यह होता क्यूँ आ रहा है? आख़िर यह रूकेगा कब – क्या कभी नहीं? कुछ सवालों को अपने अंदर खंगालिए, आस-पास की राजनीति से उसे जोड़िए – तो ऐसी हर घटना के पीछे आपको एक विभीषण दिखाई देगा। उस विभीषण का एक्कै मकसद है – वोट-बैंक। उसका एक्कै रास्ता है – मुस्लिम तुष्टिकरण। और उसका एक ही नाम है – कॉन्ग्रेस।
ज्यादा बोल गया! एकदमे भक्त हूँ! झूठा आरोप लगा रहा हूँ? पाठक होने के नाते कुछ ऐसे सवाल आप मुझ पर या हर लिखने-बोलने वाले पर भी जरूर उठाइए। किसी पर भी अंधा भरोसा मत कीजिए। क्योंकि मीडिया का एजेंडा सेट है। चौथे खंभे की आड़ में हर जगह ‘धंधा’ चालू है। ख़ैर! पहले इस स्क्रीनशॉट को देखिए।
मुझ पर दागे गए सवालों का जवाब है यह स्क्रीनशॉट। लेकिन मेरा वजूद कुछ भी नहीं। असल में यह स्क्रीनशॉट है कॉन्ग्रेस की राजनीति का वो काला चिट्ठा, जो वह पिछले 70-72 सालों से खेलती आई है। यह स्क्रीनशॉट है मीडिया की वो बजबजाती गंदगी, जहाँ आतंकी कभी हेडमास्टर का बेटा बन जाता है तो कभी धोनी का फैन! हो सके आपमें से बहुतों को नेशनल हेराल्ड के बारे में नहीं पता हो। क्योंकि यह पता करने और पढ़ने के लायक है भी नहीं। बस जानकारी रखिए कि यह कॉन्ग्रेस की वेबसाइट है। यह वही नेशनल हेराल्ड है, जिसके घोटाले की आँच ‘युवा’ नेता और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल से लेकर उनकी माता सोनिया तक कब का पहुँच गई है।
पार्टी मुस्लिम-तुष्टिकरण करे और नेताजी लोग चुप बैठें, यह संभव नहीं। लोकसभा चुनाव सर पर हो तब तो नामुमकिन ही। ऐसे में कॉन्ग्रेस की एक पूर्व सांसद हैं – बेगम नूरबानो। उन पर पार्टी से टिकट लेने का (पार्टी को खुश करके) शायद भूत सवार होगा। तभी तो पुलवामा अटैक के लिए सेना को लापरवाह और जिम्मेदार दोनों ही ठहरा दिया। एक सिद्धू हैं, उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवादी देश मानने से ही मना कर दिया।
साभार: रिपब्लिक भारत
अब जरा सोचिए! जिस पार्टी की ऐसी राजनीतिक सोच रही हो और जिसने लगभग 60 सालों तक इस देश पर राज किया हो, वहाँ की अच्छी-खासी जनता भला क्यों न हाहा करे जवानों की मौत पर! कोई संपादक भला क्यों न संवेदना की जगह व्यक्तिगत घृणा थोपे!
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुआ आत्मघाती हमला देश कभी नहीं भूलेगा। आतंकवाद को पनाह देने वाले पाकिस्तान को भारत जल्द ही सबक सिखाएगा।
आइए आपको तस्वीरों के माध्यम से वायुसेना के शक्ति प्रदर्शन से अवगत कराते हैं। इन तस्वीरों को देखकर भारतवासियों को इस बात का अनुमान हो जाएगा कि पाकिस्तान की नापाक हरक़तों का जबाव देने में भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार है।
एक तरफ जहाँ देश और दुनियाभर में इस हमले की कड़ी निंदा हुई और देश के जवानों के बलिदान को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई, तो वहीं दूसरी तरफ भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान बॉर्डर से सटे पोखरण में शनिवार (16 फ़रवरी 2019) को ‘वायु शक्ति-2019’ के तहत युद्धाभ्यास किया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में वायुसेना के एयर चीफ़ मार्शल बी एस धनोवा, सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, सचिन तेंदुलकर और राजस्थान के कई सांसदों ने हिस्सा लिया।
राजस्थान के पोखरण में ‘वायु शक्ति-2019’ युद्धाभ्यास प्रदर्शन के तहत वायुसेना ने अपने अदम्य साहस का परिचय दिया।
वायु शक्ति-2019 प्रदर्शन में सीमा पर 2 घंटे तक क़रीब 137 लड़ाकू विमानों ने गरज कर अपनी शक्ति का एहसास कराया।
#WATCH Vayu Shakti 2019, firepower demonstration of the Indian Air Force at Pokhran Range in Rajasthan. pic.twitter.com/sdSV5ZxC2n
बता दें कि इस युद्धाभ्यास के दौरान वायुसेना द्वारा 137 लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों के ज़रिए रियल टाइम टारगेट करके कई धमाके भी किए।
इस दौरान मिसाइलों के साथ-साथ जीपीएस और लेज़र गाइडेड बम और रॉकेट लॉन्चर का भी सटीक इस्तेमाल किया गया। वायुसेना के स्क्वॉड्रन लीडर IS Kolkar ने युद्धाभ्यास पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
विश्व की सर्वश्रेष्ठ वायुसेना में से एक भारतीय वायु सेना ने युद्धाभ्यास के दौरान बमों, मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल कर हवा से हवा और हवा से ज़मीन पर मार करने का अभ्यास किया।
वायु शक्ति प्रदर्शन में सुखोई 30-MKI, मिराज 2000, जगुआर, मिग 27, तेजस, हॉक जैसे विमान मुख्य थे। इसके अलावा एयर डिफेंस सिस्टम काउंटर, सरफेस कोर्सेज, ऑपरेशन सर्च और रेस्क्यू का भी प्रदर्शन किया गया।
आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि वायुसेना के शक्ति प्रदर्शन की शुरुआत 1953 में हुई थी। यह अभ्यास हर तीन साल में एक बार किया जाता है।
युद्धाभ्यास को लेकर ख़ुफ़िया एजेंसियाँ मुस्तैदी के साथ सतर्क रहती हैं। युद्धाभ्यास के अपने प्रदर्शन में वायुसेवा ने यह साफ़ किया कि वो दुश्मन का ख़ात्मा करने के लिए तत्पर है।
CAS (Chemical Abstracts Service) ने वायु शक्ति युद्धाभ्यास में भाग लेने वाले वायुसेना के योद्धाओं को उनके प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए बधाई दी।
बता दें कि ऐसा पहली बार होगा जब किसी युद्धाभ्यास के दौरान वायुसेना के किसी लड़ाकू विमान से अस्त्र मिसाइल को छोड़ने का लाइव नज़ारा पेश किया गया।
वायुसेना के इस पराक्रम से जुड़े प्रदर्शन के दौरान, फ्रंटलाइन लड़ाकू विमान, परिवहन विमान, हेलीकॉप्टर और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली ने भी अपनी ताक़त दिखाई।
अवसर था “वंदे भारत एक्सप्रेस” की पहली यात्रा का। वन्दे भारत एक्सप्रेस अर्थात ट्रेन-18 मतलब 2018 में बनी भारत की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन। इसकी पहली यात्रा अर्थात अत्याधुनिक अंतरराष्ट्रीय ट्रेन सुविधाओं का अपने ही देश में गवाह बनने का पहला मौका। यह यात्रा मेक इन इंडिया के तहत देश में उन्नत ट्रेन संचालन की गौरव यात्रा भी थी, साथ ही ट्रेन के विकास का अगला पड़ाव भी तो भला कैसे छोड़ देता, बनते हुए इतिहास के इस प्रस्थान विन्दु का साक्षी होने का मौका।
सुबह जल्दी से तैयार होकर निर्धारित समय से पहले ही स्टेशन पहुँच गया था। थोड़ा डरा भी था कि पुलवामा की घटना की वजह से आज की यात्रा ही कहीं कैंसिल न हो जाए। तभी खबर आई कि प्रधानमंत्री सुरक्षा पर आपात मीटिंग के बाद निर्धारित समय पर ही इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाएँगे।
मेरे मन में अनायास पूरा रेलवे सिस्टम घूम रहा था कि कैसे पहले गंदे स्टेशन हुआ करते थे? ट्रेन की लेटलतीफ़ी का क्या अब भी वही हाल है? बदबूदार फिनायल, जहाँ-तहाँ फेंका कूड़ा कचरा, टीटी की अवैध वसूली? क्या सब वैसा ही होगा या प्रधानमंत्री के कार्यकाल में कुछ बदला भी है? पता नहीं क्यों आज मन एक पत्रकार की नज़र से कम और एक आम उपभोक्ता की नज़र से ज़्यादा इस पूरे बदलाव व हालात को देखना और समझना चाहता था, तो इस ट्रेन यात्रा में मेरे अंदर का सामान्य रेल-यात्री हावी रहा।
सब अपनी गति से हो रहा था। वन्दे भारत एक्सप्रेस सामने थी और मैं बोर्ड होने के इंतज़ार में बाहर। वह पल भी आया जब ट्रेन के स्वचालित दरवाजे खुले, पावदान बाहर आया, सिक्योरिटी चेक के बाद ट्रेन में पहले कदम की आहट से ही कुछ अलग महसूस होने लगा था। लग ही नहीं रहा था कि ये सब अपने देश में सम्भव है? इस यात्रा की शुरुआत से पहले मेरे संपादक अजीत भारती ने अपने बीजिंग और मॉस्को यात्रा में वहाँ के ट्रेनों के बारे में कई किस्से सुनाए थे। दिल्ली की मेट्रो ट्रेन की सुविधाओं का मेरा ख़ुद का अनुभव भी साथ था। ऐसे में मेरे अंदर कुछ सवाल भी चल रहे थे। जैसे – मेरे अंदर के आम आदमी को क्या महसूस हो रहा है? क्या उसकी अवधारणाएँ इस यात्रा के बाद बदलने वाली हैं भारतीय रेल परिवहन तंत्र के बारे में? इन्हीं सवालों के साथ चलिए आप भी एक आम रेल यात्री की नज़र से वंदे भारत एक्सप्रेस का जायज़ा लीजिए।
जितना सुना था ट्रेन-18 के बारे में, सबसे पहले उसे चेक कर लेना चाहता था। सीट आरामदायक है कि नहीं? बैठने में तो ठीक लग रहा लेकिन लम्बी यात्रा में कैसा लगेगा? मन ने कहा ये बाद में पता चलेगा, इसे छोड़ बाकि का देख। फिर क्या था, एक के बाद एक पड़ताल होने लगी।
लाइट टच करते ही जल गई थी। फिर टच किया तो बुझ गई। मतलब ये जो डेडिकेटेड लाइट सिस्टम है, सेंसर बेस्ड है। कर्टेन का अलग ही लुक है, ट्रांसपेरेंट मगर आकर्षक। तभी ख्याल आया सामान कहाँ रखना है? देखा तो हर सीट के ऊपर भरपूर सामान रखने की व्यवस्था। सामान रखा ही था कि गायब होने का डर भी सताने लगा। ख़ासतौर जब हम अकेले यात्रा करते हैं तो पहला डर तो यही होता है कि सामान सुरक्षित रहे बस! तभी हर जगह लगे CCTV कैमरे पर नज़र गई तो बात समझ आ गई कि सुरक्षा न सिर्फ़ आपके सामान की बल्कि रेलवे की प्रॉपर्टी की भी पुख्ता होगी। मुझे महामना एक्सप्रेस की बात याद आ गई कि कैसे कुछ लोगों ने उसकी पहली यात्रा में ही बाथरूम से मग खोल लिया था, तो कुछ को जो आकर्षक लगा वह उसे ही ज़्यादा छेड़ने लगा था। तब गुस्सा भी आया था कि कैसे कोई सरकार यहाँ अंतरराष्ट्रीय सुविधाएँ मुहैया कराए? लोगों ने गतिमान एक्सप्रेस को भी नहीं छोड़ा था, हेडफोन तक गायब कर दिए थे।
सोचा जल्दी से पूरे ट्रेन का एक राउंड लगा लिया जाए। आगे दूसरे डब्बे के लिए बढ़ा ही था कि सामने का काँच का दरवाजा स्वतः खुल गया और जैसे ही पार हुआ वो बंद। मतलब कनेक्टिंग डोर भी सेंसर युक्त। आगे दरवाजे के बगल में ही अत्याधुनिक फ़ूड स्टोरेज एंड सर्विसिंग सिस्टम से भी परिचय हुआ, जिसमें अवन, फ्रीज़, बॉयलर के साथ-साथ सर्विसिंग की हर ज़रूरी सुविधा दिखी।
वहीं पास ही एक तरफ वेल ड्रेस्ड डेडिकेटेड क्लीनिंग एंड कैटरिंग स्टाफ भी दिखा – पूरी तरह सेवा के लिए मुस्तैद। पास खड़े एक स्टाफ ने एमर्जेन्सी स्पीक सिस्टम के बारे में भी बताया। हम फट से समझ गए कि ई जंजीर खींचने का विकल्प है। पहले लोग यूँ ही ज़ंजीर खींच, ट्रेन की टाइमिंग का बेड़ा गर्क करते थे। अब इस सिस्टम से, पहले ट्रेन के ड्राइवर (कैप्टेन) को बताना होगा कि मामला क्या है? ज़रूरी लगने पर ही ट्रेन रोकी जाएगी। हमारे देश में ट्रेन की टाइमिंग गड़बड़ होने का एक बड़ा कारण चेन पुलिंग भी है।
सोचे बाथरूम भी चेक कर लिया जाए। देखे तो बाथरूम हाईटेक के साथ ही बहुत अलग लगा। रेलवे में मुझे पहले बाथरूम ही सबसे ख़राब दिखता था। पहली बार सेंसर बेस्ड बाथरूम की फिटिंग ट्रेन में देखने का अवसर मिला। दोनों तरफ नज़र दौड़ाया तो टॉयलेट फिजिकली चैलेंज़्ड लोगों के लिए भी सुविधाजनक बनाया गया है, साथ ही दूसरी तरफ वेस्टर्न फिटिंग वाला भी।
इतना बताते-बताते एक बात तो भूल ही गया! पूरी ट्रेन वाई-फाई सुविधा से युक्त है, साथ ही सामूहिक इंफोटेनमेंट स्क्रीन भी लगा है। इसके साथ ही यात्री अपने मोबाइल या अन्य डिवाइस पर भी रेलवे के इंफोटेनमेंट सिस्टम का आनंद उठा सकते हैं।
अब बारी थी एग्जीक्यूटिव क्लास की। पता लगा पूरी ट्रेन में केवल दो डब्बा ही एग्जीक्यूटिव क्लास का है बाकि पूरी ट्रेन कम पैसे में बेहतरीन सुविधाओं से युक्त है। एग्जीक्यूटिव क्लास की सीटें 180 डिग्री रोटेट कर रही थीं। यानि सुविधानुसार खुद मत घूमिए बल्कि सीट ही घुमा लीजिए। फिर कीजिए आपस में बातचीत या बिजनेस मीटिंग – दोनों सुविधाजनक।
यहाँ भी बैठकर चेक किया। सीट आरामदायक होने के साथ थोड़ा ज़्यादा स्पेसियस भी थी, आगे-पीछे भी स्लाइड हो रही थी। बाकि सुविधा तो पूरे ट्रेन में समता के भाव से बिना भेद-भाव के बँटी है अर्थात सेम है।
अब बारी थी खाने की। नाश्ता और चाय दोनों देखकर लग रहा था कि हम रेलवे में सफर कर रहें हैं या किसी रेस्टॉरेंट में बैठे हैं! मतलब उम्दा थी – सर्विस भी और क़्वालिटी भी। समय बीतने के साथ लंच आया तो वो भी कमाल का। चूँकि ट्रेन रास्ते में दो प्रमुख स्टेशनों पर विशेष कार्यक्रम के लिए ठीक-ठाक समय तक रुकी तो डिनर का भी समय आ गया। फिर जैसे ही पिंड बलूची का डिनर हाथ आया, मज़ा गया।
बीच में मौका निकालकर इंजन तक भी हो आया। वहाँ कुछ और बातें भी पता चलीं। जैसे वन्दे भारत एक्सप्रेस से ट्रेन संचालन के इतिहास में प्लेन की तरह पहली बार ‘ट्रेन कैप्टेन’ इस ट्रेन से इंट्रोड्यूस हुआ। कोई एक इंजन ट्रेन को नहीं खींच रहा और न ही इसमें कोई अलग से इंजन लगाने का सिस्टम है बल्कि हर डब्बे में ट्रेन को आगे बढ़ाने का सिस्टम है। सभी डब्बों के सामूहिक प्रयास से ही ट्रेन 180 किलोमीटर की औसत गति सीमा को छू सकती है। फ़िलहाल अभी चूँकि ट्रेन ट्रैक अपडेट नहीं हुआ है तो कहीं 130 तो कहीं 110 किलोमीटर की रफ़्तार से चल रही है। जैसे ही ट्रैक अपडेट हो जाएगा और कुछ घनी आबादी वाली जगहों पर बाड़ लग जाएगा तो ट्रेन अपनी उच्चतर क्षमता से चलेगी।
पिछले साल घटी पंजाब की घटना से हमने सोचा कि ब्रेक के बारे में भी पूछ ही लिया जाए तो केबिन के सूचना प्रदाता ने हमें बताया कि ब्रेक इतना पावरफुल है कि एमर्जेन्सी ब्रेक से हाई स्पीड गाड़ी को बिना जर्क के 600 मीटर के दायरे में रोका जा सकता है। एक बात और ट्रेन के अंदर शायद ही आपको यह महसूस हो कि ट्रेन की स्पीड इतनी ज़्यादा है। ट्रेन जर्क फ्री होकर छुक-छुक ट्रेन के अपने मुहावरे को बदलने को तैयार है।
ट्रेन-18 जारी, ट्रेन-20 की बारी
ख़ास बात ये भी थी इस यात्रा की कि रेल मंत्री ख़ुद भी हम लोगों के साथ ही ट्रेन में सवार थे। उनसे मिलने और बात करने का मौका भी मिला। बात आगे बढ़ी तो रेल मंत्री पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री का सपना साझा करते हुए बताया, “आने वाले दौर में जल्द ही ऐसे 30 और सेमी हाई स्पीड ट्रेनों को चलाने की तैयारी है। ट्रेन-18 सीरीज के स्लीपर ट्रेन भी आएँगे, फिर 2020 तक ट्रेन-20 और साथ ही भारत के विस्तृत क्षेत्र को बुलेट ट्रेन से जोड़ देने का भी प्रधानमंत्री का सपना है।”
रेल मंत्री ने बताया, “भारतीय मेधा ने मात्र 97 करोड़ रुपए की लागत में रिकॉर्ड 18 महीने में ट्रेन-18 का निर्माण किया है। एक ट्रेन को मेक इन इण्डिया के तहत बनाकर हमारे देश के इंजीनियरों ने देश का 100 करोड़ रुपए से ज़्यादा का राजस्व बचाया है। देश ने जिस तरह से वन्दे भारत एक्सप्रेस के प्रति उत्साह दिखाया है, हम जल्द ही ऐसे 100 और ट्रेनों के निर्माण को हरी झंडी दिखाने की तैयारी कर रहे हैं। देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ ही हर क्षेत्र में रोजगार और देश के समुचित बुनियादी विकास को गति मिलेगी। हमारा लक्ष्य नॉर्थ ईस्ट सहित सम्पूर्ण भारत के विकास को गति देना है।”
कुल मिलाकर, आम रेल यात्री के नज़रिए से वंदे भारत एक्सप्रेस की यह यात्रा बेहद शानदार रही लेकिन एक बात थोड़ी खटकी भी। ट्रेन में ज़्यादातर लोग बड़े पत्रकार, संपादक तमाम नामी-गिरामी लोग थे। लेकिन मुझे जो बात बुरी लगी वो था लोगों का आज इतने जागरूकता अभियानों के बाद भी सफ़ाई के प्रति लापरवाह होना। प्लेट, रैपर, पेपर कप आदि को यहाँ-वहाँ फेंक देना, या पास में ही तुरंत कहीं ठिकाने लगा देने की जल्दबाजी। यह ख़राब आदत जो वर्षों से इस कदर जड़ हो चुकी है कि बदलने का नाम ही नहीं ले रही। जब इतने उच्च वर्गीय लोगों का यह हाल है तो पता नहीं आने वाले समय में बाकि जनता किस तरह से इन संसाधनों का उपयोग करे! क्योंकि तब तक कोई भी मिशन कारगर अंजाम तक नहीं पहुँच सकती जब तक उसके दायरे में आने वाला हर शख़्स उसमें अपना समुचित योगदान न दे।
अगली कड़ी में मेरे अंदर का एक पत्रकार आपको बताएगा वंदे भारत एक्सप्रेस से जुड़ी कुछ ऐसी बातें भी, जो भारत में रेलवे का पूरा अनुभव बदलने वाली है।
वंदे भारत एक्सप्रेस के रूप में भारत ने विकास की गति में एक नई उपलब्धि को हासिल किया है। शुक्रवार (फरवरी 15, 2019) को पीएम मोदी ने इसे हरी झंडी दिखाकर इसकी शुरुआत की थी। इसके पहले कमर्शियल रन की शुरुआत आज से यानी 17 फरवरी से होनी थी, जोकि शुरू हो चुकी है।
रेलमंत्री पीयूष गोयल ने इस बारे में ट्वीट करके जानकारी दी है कि वंदे भारत एक्सप्रेस अपने पहले कमर्शियल रन के लिए दिल्ली से वाराणसी के लिए रवाना हो चुकी है।
Vande Bharat Express left Delhi for Varanasi today morning on its first commercial run. Tickets sold out for the next two weeks already. Get yours today! pic.twitter.com/LwokUNHRJj
इस ट्रेन के बारे में आपको बता दें कि यह भारत की पहली इंजनलेस ट्रेन (मतलब अलग से इंजन जैसा कॉन्सेप्ट नहीं है बल्कि हर एक बोगी अपने-आप में एक इंजन है और पूरी ट्रेन एक यूनिट के समान चलती है) है। मेक इन इंडिया की उम्मीदों पर सफलता पूर्वक खरी उतरती हुई इस ट्रेन को पायलट द्वारा संचालित किया जा रहा है।
पुलवामा हमले के बाद भारत के कड़े रुख़ से पाकिस्तान डर गया है। सर्जिकल स्ट्राइक + के डर से उसने नियंत्रण रेखा (LoC) के पास लॉन्च पैड्स से अपने आतंकवादियों को सेना के शिविरों में स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। आपको बता दें कि हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़ा रवैया अपनाते हुए कहा था कि जैश-ए-मोहम्मद के इस आत्मघाती हमले का जवाब देने के लिए सैन्य बलों को पूरी छूट दे दी गई है।
ख़बरों के अनुसार, कश्मीर में टॉप इंटेलिजेंस ने बताया है कि सरहद के दोनों ओर तनाव जारी है लेकिन किसी तरह की तैनाती नहीं की गई है और फिलहाल नियंत्रण रेखा के पार बने आतंकियों के लॉन्च पैड्स पर कोई स्ट्राइक करने का लक्ष्य नहीं है। एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि ऐसे में भारतीय सेना के पास पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई करने का विकल्प बचता है लेकिन उससे तनाव और भी बढ़ सकता है।
बता दें कि पाकिस्तान ने इस साल अपने विंटर पोस्ट्स को खाली नहीं कराया है इसलिए माना जा रहा है कि वह आतंकवादी हमलों के जवाब में कार्रवाई की संभावना मान रहा है। सूत्रों के मुताबिक कम से कम 50-60 विंटर पोस्ट, जो इस वक्त तक खाली करा लिए जाते थे, फिलहाल वहाँ पाकिस्तानी सैनिक तैनात हैं।
पुलवामा अटैक के बाद मोदी सरकार ने पाकिस्तान को चौतरफा घेरने के लिए ताबड़तोड़ और कड़े फै़सले लिए हैं। इन्हीं फ़ैसलों में से एक है – पाकिस्तान से भारत को निर्यात किए जाने वाले सामानों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 200% तक बढ़ाना।
जब यह ख़बर आई तो इंडियन एक्सप्रेस के ट्विटर हैंडल से इसे ट्वीट किया गया। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री और AAP नेता ने केंद्र सरकार के इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए एक ट्वीट किया। लेकिन इसी ट्वीट में उन्होंने राजनीति भी घुसेड़ दी। और यहीं सब गुड़-गोबर हो गया।
मनीष सिसोदिया ने इसी ट्वीट में प्राइवेट कंपनी अडानी द्वारा पाकिस्तान को बिजली सप्लाई किए जाने पर सवाल उठाए। सिसोदिया के अनुसार अडानी को यह बिजली अपने ही देश में वितरित करनी चाहिए, क्योंकि हमारे यहाँ भी बिजली की कमी है।
AAP नेता सिसोदिया के ट्वीट का तर्क कहीं से भी गलत नहीं है। बल्कि गलत है उनका पूरा ट्वीट। भारतीय कंपनी अडानी ने मनीष के ट्वीट पर ही रिप्लाई करते हुए पाकिस्तान को बिजली सप्लाई करने की बात का खंडन किया। साथ ही उन्हें गलत और गैर-ज़िम्मेदार स्टेटमेंट को डिलीट करने को भी कहा।
अडानी के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से आए जवाब के बाद मनीष सिसोदिया ने ट्वीट तो डिलीट कर लिया लेकिन सोशल मीडिया-‘वीरों’ ने उनकी जमकर क्लास ले ली। चूँकि सिसोदिया द्वारा ट्वीट डिलीट किया जा चुका था, इसलिए ट्विटर से लेकर फेसबुक तक अडानी के ट्वीट और AAP मंत्री के स्क्रीनशॉट लोगों ने जमकर शेयर किए। फ़र्ज़ी देशभक्ति के नाम पर झूठ परोसने और किसी पर कुछ भी आरोप लगाने के लिए लोगों ने उप-मुख्यमंत्री को जमकर लताड़ा।
The Adani Group would like to inform you that we do not supply electricity to Pakistan. You must withdraw such incorrect and irresponsible statements.
आम आदमी पार्टी की पूरी जमात ही झूठ की बुनियाद पर पैदा हुई है। झूठ ही इनकी राजनीति रही है। इनका कॉन्सेप्ट क्लियर है – ‘हम AAP के लोग हरिश्चंद्र की संतान हैं, जो हमसे अलग हैं वो झूठ के पुलिंदे।’ ऐसे ब्रह्म वाक्य वाले नेताओं के लिए पुलवामा हो या करगिल, राजनीति को छोड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है।
पुलवामा आतंकी हमले का पूरा दारोमदार पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने लिया है। इस संगठन के सरगना मसूद अज़हर ने ही पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित आर्मी बेस अस्पताल में बैठकर अपने आतंकियों को सीआरपीएफ जवानों के काफ़िले पर आत्मघाती हमले के निर्देश दिए थे।
जानकारी के अनुसार, अज़हर ने अस्पताल से एक ऑडियो जारी करके इस हमले का आदेश दिया। अज़हर का पिछले चार महीने से आर्मी बेस अस्पताल में इलाज चल रहा है। अपनी बीमारी की वजह से मसूद यूजेसी (यूनाईटिड जिहाद काउंसिल) की 6 प्रमुख बैठकों का हिस्सा भी नहीं बन पाया। यूजेसी के बारे में आपको बता दें कि यह भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किए जाना वाला जिहादी संगठन है। जिसको पाकिस्तान द्वारा संरक्षित किया जाता रहा है।
खबरों के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी इस हमले के लिए आठ दिन पहले ही तैयार हो गए थे, जिसके बाद अज़हर ने धीमी आवाज़ में अपने संगठन के आतंकियों के लिए ऑडियो संदेश जारी किया था।
इस ऑडियो में मसूद अज़हर ने जैश संगठन के आतंकियों से अपने भतीजे उस्मान की मौत का बदला लेने की बात कही थी। ये वही उस्मान है जिसे पिछले साल 2018 में भारतीय सुरक्षाबलों ने मार गिराया था।
ऑडियो में अज़हर को यह भी कहते सुना गया कि इस हमले में होने वाली मौत से आनंददायक और कुछ भी नहीं। मसूद द्वारा जारी ऑडियो में वो फिदायीन हमलावार को भारत के ख़िलाफ़ भड़काते हुए भी सुना गया।
इसके अलावा ख़बरें हैं कि अज़हर ने जिहादी काउंसिल के लिए ख़ुफ़िया ढंग से अपने दूसरे भतीजे मोहम्मद उमैर और अब्दुल राशिद गाजी को नियुक्त किया है। इनका काम युवकों का ब्रेनवॉश करके उन्हें फिदायीन हमलों के लिए तैयार करना होगा।
कश्मीर के टॉप इंटेलिजेंस अफ़सर की मानें तो कश्मीर में इस समय क़रीब जैश-ए-मोहम्मद के 60 आतंकी काम कर रहे हैं, जिसमें से 35 तो पाकिस्तान से हैं और बाक़ी स्थानीय क्षेत्रों से हैं।