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इजरायल ने हिज्बुल्लाह के बाद हूती आतंकियों पर गिराए बम, कई हताहत: पाकिस्तान में नसरल्लाह की मौत पर शोक मनाते मुस्लिम आपस में लड़े

इजरायल ने हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह का काम तमाम करने के बाद अब यमन में हूती आतंकियों पर निशाना साधा है। इस दौरान उन्होंने इजरायली एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों से यमन के बंदरगाह शहर होदेइदाह में स्थित हूती आतंकियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए।

इस संबंध में इजरायली डिफेंस फोर्स ने ट्वीट जारी किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने इजरायली मिलिट्री इंटेलिजेंस डायरेक्टर के निर्देश पर एयरफोर्स ने रविवार (29 सितंबर 2024) को बड़े पैमाने पर ऑपरेशन में लड़ाकू विमानों से यमन के रास इस्सार और होदेइदाह में स्थित हूती विद्रोहियों के इलाके में हमला किया।

सेना के बयान के अनुसार, “आईडीएफ ने बिजली संयंत्रों और एक बंदरगाह पर हमला किया, जिसका इस्तेमाल तेल आयात करने के लिए किया जाता है।” इजरायली सेना का कहना है कि वह अपन देश के नागरिकों के लिए खतरा पैदा करने वाले किसी भी दुश्मन पर इसी तरह कार्रवाई करेंगे और उनके खात्मे के लिए ऐसे ही प्रतिबद्ध रहेंगे। चाहे वो कितना ही दूर क्यों न बैठा हो।

आईडीएफ के अनुसार, हूती आतंकियों पर हमला हाल में इजरायल पर हुए हमले के बदले किया गया है। इससे पहले उन्होंने शुक्रवार को हिज्बुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह को मौत के घाट उतारा था। हूती आतंकियों पर हुए हमले में भी चार के मारे जाने की खबर है। वहीं 29 घायल बताए जा रहे हैं।

हूतियों पर हमले ऐसे समय में सामने आए हैं जब उन्होंने फिलीस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाने के चक्कर में हमले किए और इन हमलों को और तेज तब किया जब नसरल्लाह को मौत के घाट उतारा गया। हूती आतंकी अकेले नसरल्लाह की मौत पर रोना नहीं रो रहे थे। पाकिस्तान में भी इस्लामी कट्टरपंथी इसका शोक मना रहे हैं।

पाकिस्तान में भी इस्लामी कट्टरपंथी मना रहे नसरल्लाह की मौत का गम

सामने आई जानकारी के अनुसार नसरल्लाह के मारे जाने के खिलाफ पाकिस्तान के कराची में जमकर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी देखने को मिली। अधिकारियों ने बताया कि हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह की हत्या का विरोध जताने के लिए प्रदर्शनकारी अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की ओर जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो प्रदर्शनकारियों उग्र हो गए और हिंसा शुरू हो गई। इस दौरान पुलिस पर पथराव किया जाने लगा, उनसे झड़प हुई। आखिर में पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।

कहीं गोमांस खाने का दबाव, तो कहीं इस्लाम कबूलने की धमकी; UP, MP और उत्तराखंड में लव जिहाद के 3 केस… देहरादून में 2 बच्चों की तलाकशुदा माँ बनी शिकार

देश के 3 अलग-अलग प्रदेशों से लव जिहाद के मामले सामने आए हैं। मध्य प्रदेश में शादाब, उत्तराखंड में शहज़ाद और उत्तर प्रदेश में अरशद के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है। मध्य प्रदेश में हरदा की जनजातीय समुदाय की लड़की को इस्लाम कबूल करवाने की साजिश रची गई। उत्तराखंड में देहरादून की तलाकशुदा महिला की माँ ने अपनी बेटी को बचाने की गुहार लगाई है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ की पीड़िता को गोमांस खिलाने का प्रयास हुआ। अरशद को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पहला मामला मध्य प्रदेश के हरदा जिले से है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहाँ शुक्रवार (27 सितंबर 2024) को जनजातीय वर्ग की एक लड़की अपने परिजनों के साथ जिले के हंडिया थाने पहुँची। यहाँ पीड़िता ने तहरीर देते हुए बताया कि 2 साल पहले वह सीहोर जिले के शादाब नाम के युवक के झाँसे में आ गई थी। शादाब ने प्यार का नाटक करते हुए पीड़िता का 2 वर्षों तक यौन शोषण किया।

विरोध करने पर वह निकाह करने का वादा करते हुए पीड़िता को चुप करवा देता था। इस साल 29 मई को जब पीड़िता घर पर अकेली थी तो शादाब वहाँ आया था। उसने पीड़िता से कहा कि वो इस्लाम कबूल करने के बाद ही उस से निकाह करेगा। उसने लड़की को अपनी बेगम बनाने का वादा किया। 23 अगस्त को एक बार फिर से शादाब ने पीड़िता को बुला कर शारीरिक संबंध बनाए।

इस दौरान उसने फिर से धर्मान्तरण वाली बात दोहराई। साथ ही किसी को बताने पर पीड़िता को कत्ल करने की भी धमकी मिली। आखिरकार पीड़िता ने अपने घरवालों को सारी बात बता दी। शुक्रवार को 19 वर्षीया पीड़िता और उसके घर वाले हंडिया थाने पहुँचे। यहाँ उन्होंने मुनव्वर के बेटे शादाब के खिलाफ नामजद तहरीर दी। तहरीर में शादाब के एक अन्य नाम सलमान का भी जिक्र है।

पुलिस ने शादाब के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69, 64 (2) (ड) और 351 (3) के साथ-साथ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी अमित भावसर ने मीडिया से बताया कि मामले में जाँच एवं अन्य कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

देहरादून में शहज़ाद के खिलाफ शिकायत

लव जिहाद का दूसरा मामला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से है। यहाँ शहज़ाद पर नाम बदल कर 2 बच्चों की माँ व तलाकशुदा महिला को प्यार के जाल में फँसाने का आरोप लगा है। महिला की माँ ने गुरुवार (26 सितंबर 2024) को थाना रायपुर पुलिस को तहरीर दी है और शहज़ाद पर कार्रवाई की माँग की। तहरीर में उसने कहा है कि उसकी 30 वर्षीया बेटी तलाकशुदा व 2 बेटियों की माँ है।

फिलहाल वह अपने मायके में दोनों बेटियों के साथ रह रही है। लॉकडाउन में महिला को शहज़ाद नाम का युवक मोनू चौधरी बनकर मिला था। मोनू चौधरी बना शहज़ाद मूलतः दिल्ली का निवासी है। कुछ ही दिनों की बातचीत में शहज़ाद ने पीड़िता को अपने जाल में फँसा लिया। मोनू बने शहज़ाद के मुस्लिम होने की पोल खुल जाने के बावजूद महिला उसी से निकाह पर अड़ गई।

पी़ड़ित महिला की माँ ने अपनी बेटी को लेकर आगे बताया कि जब उसने बेटी को रोका तो वह नाराज होकर घर से निकल गई और शहज़ाद के साथ रहने वाली। शहजाद के साथ जाते-जाते वह अपने मायके से बाइक भी उठा ले गई। महिला ने अपनी दोनों बेटियों को भी मायके में छोड़ दिया है। महिला की माँ ने आरोप लगाया है कि शहज़ाद ने उसकी बेटी का ब्रेनवॉश किया है।

महिला का कहना है कि उसने अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर डाली कि उसकी बेटी शहज़ाद से दूर रहे, लेकिन वह नाकाम रही। अपनी शिकायत में पीड़िता की माँ ने पुलिस से बेटी को खोजने व शहज़ाद के खिलाफ कड़ी करवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। फिलहाल पुलिस इस मामले में भी जाँच व जरूरी कार्रवाई में जुटी हुई है।

लखनऊ में अरशद ने हिन्दू लड़की को गोमांस खाने पर मजबूर किया

लव जिहाद का तीसरा मामला UP की राजधानी लखनऊ का है। यहाँ के थाना मदेयगंज में 27 सितंबर 2024 (शुक्रवार) को एक हिन्दू महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि डेढ़ साल पहले अपनी सहेली के जन्मदिन पार्टी में में उसकी मुलाकात अरशद नाम के युवक से हुई थी। यहीं से दोनों का परिचय हुआ तो पहले बातचीत और बाद में प्यार में बदल गया।

पीड़िता के मुताबिक, थोड़े ही समय में अरशद ने पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाने शुरू कर दिए। अरशद द्वारा बनाए गए कई बार के शारीरिक संबंधों की वजह से वह 2 बार गर्भवती हुई। तब अरशद ने दोनों बार उसका गर्भपात करवा दिया। जब लड़की ने अरशद पर शादी का दबाव बनाया तो उसने पहले इस्लाम कबूल करने की शर्त रखी।

पीड़िता का यह भी आरोप है कि अरशद ने उस पर गोमांस खाने का भी दबाव बनाया। जब उसने अरशद के अब्बा से बेटे की करतूत बताई तो वह मदद करने के बजाय उसे ही खामोश रहने के लिए कहा। साथ ही उसने कहा कि यदि वह ऐसा नहीं करेगी तो वह उसे मार डालेगा। धमकाने वालों में अरशद का रिश्तेदार राशिद भी शामिल है। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69, 89 और 351 (2) के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन के विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। हिन्दू महासभा ने अरशद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। अरशद को गिरफ्तार कर लिया गया है। फ़िलहाल पुलिस पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों की जाँच सहित अन्य कानूनी कार्रवाई कर रही है।

जो बिहार इस बार था सूखा, वहाँ नेपाल के सैलाब से जल प्रलय का खतरा: कोसी ने 56 तो गंडक ने 21 साल बाद देखा इतना पानी, रेलवे ट्रैक से लेकर एयरपोर्ट तक डूबे

बिहार में इस बार सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद वहाँ के कई जिलों में बाढ़ आ गई है। इसके कारण लोग अपने-अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। रेलवे लाइन और बस डिपो से लेकर एयरपोर्ट तक में पानी भर गया है। कोसी, गंडक और गंगा नदी उफान पर है। इधर कोसी में 56 साल बाद और गंडक में 21 साल बाद इतना पानी देखने को मिल रहा है। नेपाल में भारी बारिश के कारण बिहार डूब रहा है।

हालात को देखते हुए सरकार और NDRF की टीमें अलर्ट हो गई हैं। बिहार सरकार ने बताया कि नेपाल में भारी वर्षा के कारण रविवार (29 सितंबर 2024) की सुबह 5 बजे कोसी बैराज वीरपुर (नेपाल) से 6,61,295 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह साल 1968 के बाद सबसे अधिक पानी छोड़ गया है। राज्य के सीमांचल क्षेत्र के लगभग 13 जिले जलमग्न होने के कगार पर पहुँच चुके हैं। बाढ़ पर नजर बनाए रखने के लिए पटना में वॉर रूम स्थापित किया गया है।

सोशल मीडिया पर बिहार में आई बाढ़ के कई खौफनाक वीडियो देखने को देखने को मिल रहे हैं। गाँवों में पानी भरा हुआ है। घर-मकान भरभरा कर गिर रहे हैं। लोगों को अब 2008 जैसी बाढ़ की आशंका सताने लगी है। उस समय कुशहा बाँध टूट गया था। दो-तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जिससे बाँध टूट गया था। इस बार नेपाल में लगातार बारिश के बाद कोसी बराज से 6.5 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा जा चुका है।

इस समय बाढ़ का सबसे ज्यादा असर सीतामढ़ी, सुपौल और पश्चिमी चंपारण के इलाके में देखने को मिल रहा है। अररिया में भी बारिश और बाढ़ के कारण पानी रेलवे ट्रैक पर आ गया है। जोगबनी स्टेशन की पटरियाँ पानी में डूब गई हैं। जो जिले प्रभावित हुए हैं उनमें इनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, शिवहर, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, मधुबनी, दरभंगा, खगड़िया, भागलपुर शामिल हैं।

बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग ने 45 जूनियर इंजीनियर, 25 सहायक इंजीनियर, 17 कार्यपालक अभियंता और 3 अधीक्षण अभियंता को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया है। ये अधिकारी तटबंधों की स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार हैं। तटबंधों की सुरक्षा के लिए चौकसी बढ़ा दी गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में इन पर विशेष नजर है।

‘गोली का जवाब गोली से, गोले का जवाब गोले से’: पाकिस्तान में सरकार को मुख्यमंत्री ही दे रहे धमकी, जानिए खैबर-पख्तूनख्वा में क्यों उठी बगावत की चिंगारी?

पाकिस्तान में उठापटक तेज हो गई है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर ने हाल ही में पाकिस्तान में एक बड़े राजनीतिक आंदोलन की घोषणा की। उनका कहना था कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि बिना इस आंदोलन के देश में कोई सुधार संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “अब सरकार की ओर से होने वाले किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा। अगर गोली चलाई गई, तो उसका जवाब गोली से दिया जाएगा, अगर किसी ने लाठी चलाई, तो लाठी से जवाब मिलेगा, और अगर गोले दागे गए, तो उसका जवाब भी गोले से ही दिया जाएगा।”

गंडापुर ने कहा कि अब अगर कोई चलाएगा तो उसके ऊपर गोली चलाई जाएगी। अगर तुम एक गोली मारोगे तो हम तो हम 10 गोली चलाएँगे। यह बयान तब आया जब गंडापुर रावलपिंडी में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके, क्योंकि उन्हें बुरहान इंटरचेंज पर रोक दिया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रावलपिंडी में PTI के समर्थक अपने नेता इमरान खान के आह्वान पर सड़कों पर उतरे थे। यह प्रदर्शन तब हुआ जब पार्टी के कई बड़े नेता देश में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने का आह्वान कर रहे थे। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य था सरकार की नीतियों का विरोध करना और PTI के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना। हालाँकि, इस प्रदर्शन में हिंसा भड़क उठी और PTI समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हो गईं। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और रबर की गोलियां चलाईं, जबकि प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी और लाठीचार्ज का सामना किया।

अली अमीन गंडापुर, जो कि इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे थे, उन्हें बुरहान इंटरचेंज पर कई घंटों तक रोका गया। प्रशासन ने PTI के विरोध को रोकने के लिए कई जगहों पर कंटेनर लगा दिए थे और सड़कों को बंद कर दिया था। इससे गंडापुर का काफिला भी कई घंटे तक इंटरचेंज पर फँसा रहा। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संदेश भेजा कि उन्हें प्रदर्शन खत्म करना होगा और वापस लौटना होगा।

उन्होंने अपने समर्थकों से कहा, “हम अपने संवैधानिक अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार हमें हमारा अधिकार देने को तैयार नहीं है। जब हम वापस लौटेंगे, तो अपने साथ सभी संसाधन लाकर फिर से संघर्ष करेंगे।” उनके इस बयान से साफ था कि वह इस संघर्ष को और अधिक तीव्रता से जारी रखने के लिए तैयार हैं।

गंडापुर ने एक वीडियो संदेश में दावा किया कि पुलिस ने उनके समर्थकों पर सीधे फायरिंग की और आंसँ गैस के गोले दागे। उनके मुताबिक, हर तीन किलोमीटर पर पंजाब पुलिस गोलियाँ और गोले दाग रही थी। इस दौरान तीन PTI कार्यकर्ताओं को गोली लगी और 50 से अधिक लोग घायल हुए। यह एक गंभीर आरोप था, जिसने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया।

गंडापुर ने यह भी दावा किया कि PTI कार्यकर्ताओं ने कुछ पुलिसकर्मियों को पकड़ लिया था, लेकिन उनके आदेश पर उन्हें रिहा कर दिया गया। इस बयान के साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह इसे कोई धमकी नहीं मानते, बल्कि इसे एक “अंतिम चेतावनी” के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका संदेश था कि अगर सरकार और संस्थाएं जनता की आवाज नहीं सुन सकतीं, तो उन्हें पीछे हट जाना चाहिए और राजनीतिक निर्णयों को राजनीतिक नेताओं के हाथों में छोड़ देना चाहिए।

हालाँकि, जब गंडापुर ने प्रदर्शन को स्थगित करने का ऐलान किया, तो PTI के समर्थकों में भारी नाराजगी देखी गई। बुरहान इंटरचेंज पर प्रदर्शनकारियों ने गंडापुर के खिलाफ नारेबाजी की और उनके वाहन को घेर लिया। उन्होंने गंडापुर से इस्तीफा देने की मांग की, क्योंकि वे प्रदर्शन खत्म करने के उनके फैसले से सहमत नहीं थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्हें संघर्ष जारी रखना चाहिए था।

PTI नेता आज़म स्वाती ने इस स्थिति में हस्तक्षेप किया और प्रदर्शनकारियों को शांत किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय PTI के अध्यक्ष इमरान खान के निर्देशों पर लिया गया है और हमें उनके आदेश का पालन करना होगा। स्वाती के हस्तक्षेप से प्रदर्शनकारियों को शांत किया गया और अंततः प्रदर्शन खत्म हो गया।

इससे पहले, पंजाब सरकार ने रावलपिंडी में धारा 144 लागू कर दी थी, जिससे किसी भी प्रकार की राजनीतिक रैली, धरना या विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद PTI ने प्रदर्शन करने का फैसला किया था, जो बाद में हिंसक रूप में बदल गया। पुलिस ने शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे और शहर को “हाई अलर्ट” पर रखा गया था। रावलपिंडी के सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस के प्रवक्ता ने साफ कर दिया था कि शहर में किसी भी अवैध जनसभा की अनुमति नहीं दी जाएगी और अगर किसी ने कानून का उल्लंघन किया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रदर्शन के दौरान PTI के कुछ प्रमुख नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया। PTI अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर अली खान और सलमान अकरम राजा को रावलपिंडी के पास सेक्टर H-13 में हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया था, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। गोहर और सलमान ने बाद में बताया कि पुलिस ने उन्हें रावलपिंडी जाने से मना कर दिया था और वापस लौटने का निर्देश दिया था।

PTI ने पहले रावलपिंडी के लियाकत बाग में एक बड़ी जनसभा करने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में इमरान खान के निर्देश पर इसे प्रदर्शन में बदल दिया गया। PTI ने लाहौर हाई कोर्ट की रावलपिंडी बेंच से रैली के लिए NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) माँगने की अर्जी भी वापस ले ली थी।

गंडापुर के नेतृत्व में यह आंदोलन सरकार के खिलाफ PTI के संघर्ष का एक हिस्सा है, जो लंबे समय से जारी है। PTI के समर्थकों का मानना है कि उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और इस आंदोलन का उद्देश्य इन अधिकारों को पुनः प्राप्त करना है।

अली अमीन गंडापुर के नेतृत्व में PTI का यह नया आंदोलन पाकिस्तान की राजनीति में एक नया मोड़ ले सकता है। उनके नेतृत्व में पार्टी ने सरकार के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई और प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस और प्रशासन के कड़े कदमों के कारण उन्हें अपने समर्थकों को वापस बुलाना पड़ा। इसके बावजूद, गंडापुर और PTI के अन्य नेता इस संघर्ष को जारी रखने का संकल्प ले चुके हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है और पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

टी राजा सिंह के घर की रेकी करते पकड़े गए शेख इस्माइल और मोहम्मद खाजा, तस्वीरें/वीडियो भेज रहे थे मुंबई: इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं BJP विधायक

हैदराबाद की गोशामहल विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक टी राजा सिंह के घर की रेकी किए जाने का मामला सामने आया है। रेकी 4 संदिग्धों द्वारा की जा रही थी। स्थानीय लोगों ने रेकी कर रहे 2 लोगों को पकड़ लिया जबकि बाकी संदिग्ध फरार हो गए। पकड़े गए संदिग्धों के नाम मोहम्मद खाजा और शेख इस्माइल हैं। ये संदिग्ध राजा सिंह के घर के फोटो और वीडियो बना कर मुंबई में किसी को भेज रहे थे। इनके मोबाइल से भी राजा सिंह की तस्वीरें मिली हैं। घटना 27-28 सितंबर रात की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए भाजपा MLA ने बताया कि पुलिस दोनों संदिग्धों की जाँच कर रही है।

राजा सिंह द्वारा ऑपइंडिया से साझा किए गए एक वीडियो संदेश के मुताबिक 27 सितंबर की रात लगभग डेढ़ से 2 बजे के बीच उनके घर के आसपास 4 संदिग्ध घूमते दिखे। कुछ स्थानीय युवाओं को शक हुआ तो उन्होंने इन चारों को पकड़ने की कोशिश की। इस दौरान 2 लोगों को दौड़ा कर पकड़ लिया गया जबकि 2 अन्य फरार होने में कामयाब रहे। पकड़े गए दोनों संदिग्धों का फ़ोन चेक किया गया तो उसमें राजा सिंह सहित उनके घर की फोटो और वीडियो मिलीं।

राजा सिंह का दावा है कि इन वीडियो और फोटो को मुंबई में किसी व्यक्ति के पास व्हाट्सएप के जरिए भेजा जा रहा था। एक तस्वीर पिस्टल और करतूत की भी है। पूछताछ के दौरान पकड़े गए पहले व्यक्ति ने अपना नाम मोहम्मद खाजा बताया। लगभग 24 वर्षीय मोहम्मद खाजा मूलतः कर्नाटक के बीदर जिले का निवासी है। वह 15 साल पहले हैदराबाद आया था। आने की वजह खाजा हैदराबाद में काम-धंधा की तलाश बताया है। हैदराबाद में वह अल्लापुर बोराबांदा में रह रहा था। खाजा के अब्बू का नाम नबी साब है।

वहीं पकड़े गए दूसरे संदिग्ध का नाम शेख इस्माइल है। वह मूलतः हैदराबाद के ही अल्लापुर बोराबांदा इलाके में रहता है। लगभग 30 वर्षीय शेख इस्माइल के अब्बा का नाम चाँद पाशा है। हैदराबाद में शेख इस्माइल ड्राइवर की नौकरी करता है। मामले की सूचना फ़ौरन ही स्थानीय मंगलहाट पुलिस स्टेशन को दी गई। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच कर दोनों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। राजा सिंह को अपने घर के आसपास हुई इस संदिग्ध हरकत का पता अगले दिन स्थानीय मीडिया चैनलों की खबरों को देख कर चला।

राजा सिंह आगे बताते हैं कि 29 सितंबर को उन्होंने पुलिस से पकड़े गए संदिग्धों के बारे में बात की। तब इंस्पेक्टर ने उन्हें बताया कि दोनों से उच्चस्तरीय पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की भी टीमें शामिल हैं। 24 घंटे बीत जाने के बाद भी अभी तक पुलिस ने राजा सिंह को आरोपितों के बारे में कोई भी सूचना नहीं दी है। राजा सिंह ने आगे बताया कि साल 2010 और 2011 में भी उनके घर की रेकी ISIS से जुड़े आतंकियों द्वारा की गई थी।

तिरुपति के जिस बीफ वाले लड्डू से हिंदुओं को लगा आघात, वह मिंट के लिए मात्र ‘मिलावट’: एक भक्त की वेदना का निशा सुसान ने ‘क्या अम्मा मर गई’ से उड़ाया मजाक

अंग्रेजी के मिंट अखबार ने 28 सितंबर 2024 को लेखिका निशा सुसान का एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने तिरुपति लड्डू विवाद पर चर्चा करने की कोशिश की, लेकिन इसमें तंज और मजाक उड़ाने की भावना अधिक थी। हालाँकि, यह लेख पत्रकारिता मानकों का मजाक बनकर रह गया। उन्होंने तिरुपति लड्डू बनाने में इस्तेमाल किए गए घी में जानवरों की चर्बी की मौजूदगी को सिर्फ एक प्रकार के मिलावट का मामला बताया। सुसान द्वारा लिखे गए इस लेख की शुरुआत एक अत्यधिक असंवेदनशील और विवादास्पद टिप्पणी से हुई, जिससे सोशल मीडिया पर हलचल मच गई।

सुसान ने अपने लेख की शुरुआत लेखिका साई स्वरूपा अय्यर के एक पोस्ट से की थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि उनकी माँ ने तिरुपति लड्डू की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई। सुसान ने साई स्वरूपा का नाम लेने से सावधानी बरती। हालाँकि, चीजें उनके अनुमान के अनुसार नहीं हुईं। साई स्वरूपा की भक्त माता की मृत्यु की इच्छा जाहिर करते हुए सुसान ने कहा, “क्या अम्मा मर गई?” उन्होंने यहाँ नहीं रुकीं और सैस्वरूपा की माँ द्वारा उठाई गई चिंताओं की तुलना पालतू जानवरों से जुड़ी घटनाओं से की।

सुसान ने जिस पोस्ट को चुना, वो 19 सितंबर 2024 को लिखा गया था। अपने पोस्ट में साई स्वरूपा ने लिखा, “2-3 सालों से, अम्मा जब भी तिरुपति लड्डू खाती थी, वो बीमार पड़ जाती थी। हमें भी वो रोकती थी कि इसे ज्यादा मत खाओ। हमने इसे उनकी सामान्य चिंता समझा, क्योंकि उनके पास हर जगह स्वच्छता के बारे में सौ शिकायतें होती थीं। अब मुझे लगता है कि उनके अंदर लड्डू में कुछ गलत होने का अहसास था।”

सुसान ने इस पोस्ट को कोट करते हुए लिखा, “मुझे यह पोस्ट इसके उदास, निराशाजनक स्वर के लिए दिलचस्प लगी। क्या अम्मा मर गई? और ऐसा क्यों नहीं होता कि लेखक इसे इस तरह से लिखे, जैसे कोई परिवार के पालतू जानवर की बात कर रहा हो, जैसे घोड़ा जो क्षतिग्रस्त पुल पर नहीं गया, या कुत्ता जो लकड़ी के ढेर के नीचे नागिन पर भौंका और परिवार के बच्चे को बचा लिया? क्यों न अम्मा, उस अनसुने नायक से पूछें कि लड्डू उन्हें क्यों परेशान करते हैं? मैंने इस पोस्ट को उसकी कृत्रिम आकर्षण के लिए कई बार पढ़ा, जिस तरह से इसने एक ऐसे भविष्यवक्ता का चित्रण किया जिसे घर पर मान्यता नहीं मिली।”

महत्वपूर्ण बात यह है कि साई स्वरूपा का पोस्ट कई अन्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं द्वारा नकल किया गया, या हमें कहना चाहिए, प्लेगराइज किया गया, ताकि वे ध्यान आकर्षित कर सकें। मूल लेखक ने इसका विरोध नहीं किया, लेकिन उन्हें वाम-उदारवादियों और तथाकथित तथ्य-चेकर्स से नफरत का सामना करना पड़ा, जिन्होंने दावा किया कि वह पूर्व आंध्र प्रदेश सरकार के खिलाफ “टूलकिट” का हिस्सा थीं, जिसका नेतृत्व वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी कर रहे थे।

हालाँकि, साई स्वरूपा ने उस समय प्लेगरिज़्म को हल्का लिया। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “कोई भी आधा दिमाग वाला इंसान समय की मुहर देखकर समझ सकता है। लेकिन यह पेरिपेरिटार्ड्स और उनकी तरह के लोगों से अपेक्षित है। मैं म्यूट करके फ्री पब्लिसिटी का आनंद ले रही हूँ, आप लोगों ने मुझे 200+ नए फॉलोअर्स दिए हैं। धन्यवाद।”

साई स्वरूपा पर एक और तंज करते हुए, सुसान ने लिखा, “जैसा कि यह साबित हुआ, मुझे इसे पढ़ने के और भी मौके मिलेंगे क्योंकि यह अत्यधिक विशिष्ट कहानी दर्जनों खातों द्वारा ट्वीट की गई, हर कोई ‘मिलावट वाले’ तिरुपति लड्डू के स्कैंडल में अपनी व्यक्तिगत कहानी साझा करने का बहाना बना रहा है। एक्स के लड़ाकुओं द्वारा इस घटना को ‘एक राष्ट्र, एक अम्मा, एक लड्डू’ योजना घोषित कर दिया गया।”

सैस्वरूपा की माँ पर सुसान के असंवेदनशील ट्वीट पर बवाल

ऑपइंडिया से बात करते हुए, साई स्वरूपा ने कहा, “मुझे उम्मीद नहीं थी कि यह पोस्ट वायरल हो जाएगा और पिछले दस दिन बहुत परेशान करने वाले रहे हैं, और अब मिंट द्वारा प्रकाशित यह लेख एक क्रूर आघात था।” उन्होंने सुसान की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए एक पोस्ट भी साझा की। उन्होंने लिखा, “आपको कितनी सस्ती लोकप्रियता चाहिए कि आप एक माँ की मृत्यु की कामना करें निशा सुसान? इस सस्ती गंदगी को प्रकाशित करने के लिए लाइव मिंट पर शर्म आनी चाहिए।”

सुसान के लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए, कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने लेखिका द्वारा इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा पर चिंता जताई। लेखक अभिषेक अग्रवाल ने लिखा, “क्या वह मर गई?” यह लाइव मिंट में संपादकीय समीक्षा खत्म हो चुकी है? गंभीरता से, आपके साथ क्या गलत है? आपकी एजेंडा के लिए, क्या कोई गहराई है जिसे आप पार नहीं करेंगे? और निशा सुसान के बारे में, जितना कम कहा जाए उतना ही अच्छा है। हिंदुओं के प्रति जितना घृणा वह रखती हैं, भगवान उन पर दया करें।”

लेखक अरुण कृष्णन ने लिखा, “शर्म आनी चाहिए लाइव मिंट। किसी की माँ के बारे में “क्या वह मर गई है” पूछना? वह भी एक सच्ची इंसान और साई स्वरूपा जैसी अद्भुत लेखिका के बारे में?”

एक्स उपयोगकर्ता समीर ने लिखा, “लाइव मिंट ने अपने पेज पर ऐसी बकवास छापने की अनुमति कैसे दे दी? इस गंदगी की लेखिका कैसे हिम्मत कर सकती है यह पूछने की ‘क्या अम्मा मर गई?’ साई स्वरूपा जी की अम्मा के लिए? सैस्वरूपा जी को इस प्रकाशन और लेखिका निशा सुसान के खिलाफ मुकदमा करना चाहिए, जिनका यह मुद्दा नहीं है क्योंकि यह उनकी आस्था से जुड़ा नहीं है।”

ऑपइंडिया की संपादक-इन-चीफ, नुपुर जे शर्मा ने लिखा, “मैं इस बात से बहुत हैरान नहीं हूँ कि यह बकवास लाइव मिंट की संपादकीय टीम के सामने पास हो गई। एक हिंदू मंदिर को ईसाई जगन के तहत अपमानित किया गया और एक ईसाई ‘निशा सुसान’ हमें बताती है कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। और क्या? वह साई स्वरूपा की माँ के लिए “क्या वह मर गई” लिखती हैं और उनकी तुलना एक पालतू कुत्ते से करती हैं।”

मामले के मूल पर आएँ तो साई स्वरूपा का मूल ट्वीट किसी मजाक उड़ाने की भावना से नहीं लिखा गया था, बल्कि यह विश्वास और पारिवारिक दायित्वों के बारे में चिंता का एक दिल से भरा इज़हार था। परिवारों में माँ की प्रवृत्तियों पर अक्सर भरोसा किया जाता है, और यह उदाहरण कोई अलग नहीं था। हालाँकि, सुसान के लिए, यह विश्वास प्रणाली का उपहास करने का एक सही अवसर था, और यह उनकी ओर से एक गंभीर चूक थी। किसी की माँ की भलाई की कामना करना केवल उसकी भक्तिभाव के कारण, किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

बता दें कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने तिरुपति मंदिर के प्रसाद में मिलाए जाने वाले घी में जानवरों की चर्बी का मुद्दा उठाया था। बाद में लैब में की गई टेस्टिंग में भी ये सामने आया कि तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू प्रसाद में बीफ, सुअर की चर्बी, मछली का तेल और कई प्रकार के वनस्पति तेल मौजूद थे।

हालाँकि, निशा सुसान के अनुसार, घी केवल सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल या पाम तेल जैसे वनस्पति तेलों की मिलावट वाला था। उनके अनुसार, “यह विचार था कि लड्डू में जानवरों की चर्बी थी, जिसने इसे एक राष्ट्रीय विवाद में बदल दिया।” लेकिन सच यह है कि यह कोई कल्पना या विचार नहीं है कि घी में जानवरों की चर्बी थी, बल्कि ये ऐसा सच है, जो लैब रिपोर्ट से साबित हुई है।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की “पशुधन और खाद्य विश्लेषण केंद्र” (CALF) प्रयोगशाला द्वारा घी के नमूनों पर किए गए परीक्षणों ने गोश्त (गाय की चर्बी), सुअर की चर्बी और मछली के तेल की उपस्थिति की पुष्टि की, इसके अलावा सोयाबीन, सूरजमुखी, जैतून, रैपसीड, अलसी, गेहूं के बीज, मक्का के बीज, कपास के बीज, नारियल, पाम कर्नेल वसा और पाम तेल जैसे वनस्पति तेल। टीटीडब्ल्यू द्वारा जाँच में यह भी स्पष्ट हुआ कि तिरुपति लड्डू में चूरा और अन्य माँस-आधारित पदार्थों का उपयोग किया गया था।

ऐसे में ये साफ है कि सुसान का लेख उनके विवादास्पद दृष्टिकोण का प्रतीक बन गया है और तिरुपति लड्डू के प्रति एक और व्यक्ति का नकारात्मक दृष्टिकोण दिखा रहा है, जो कि एक हिन्दू विश्वास का प्रतीक है। ऐसे लेख न केवल असंवेदनशीलता को उजागर करते हैं बल्कि एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं के प्रति असम्मान भी प्रकट करते हैं।

सुसान की टिप्पणियाँ और लेख न केवल असंवेदनशीलता का एक उदाहरण हैं, बल्कि यह एक बड़े सामाजिक और धार्मिक संकट को भी उजागर करते हैं। जब हम ऐसे मुद्दों पर विचार करते हैं, हमें यह याद रखना चाहिए कि हर विश्वास का सम्मान किया जाना चाहिए और हमें संवेदनशीलता के साथ संवाद करना चाहिए। जब व्यक्तिगत विश्वास और परंपराओं का मजाक उड़ाया जाता है, तो यह केवल एक समुदाय को नहीं बल्कि समाज के एक बड़े हिस्से को प्रभावित करता है।

मूल लेख अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

30 लाख रुपए दो और एक रात मेरे साथ बिताओ: प्राइवेट तस्वीरों के नाम पर लड़की को ब्लैकमेल कर रहा था सरफराज, बिहार पुलिस ने साथी इम्तियाज के साथ दबोचा

बिहार के जमुई जिले में एक लड़की की प्राइवेट तस्वीरें वायरल करके ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। ब्लैकमेलिंग में 30 लाख रुपए और अपने साथ एक रात बिताने की माँग की गई थी। पुलिस ने केस दर्ज करके शनिवार (28 सितंबर 2024) को मोहम्मद सरफराज और इम्तियाज को गिरफ्तार कर लिया। सरफराज पीड़िता का पूर्व प्रेमी है। उसी ने पीड़िता की प्राइवेट तस्वीरें खींची थीं।

जमुई पुलिस ने बताया कि बुधवार (25 सितंबर) को जिले के साइबर थाने में एक शिकायती पत्र दिया गया था। उसमें कहा गया था कि एक लड़की से 30 लाख रुपए की माँग और साथ में एक रात बिताने के लिए कहा जा रहा है। इनकार करने पर पीड़िता के प्राइवेट फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई थी। सबूत के तौर पर पेन ड्राइव में पुलिस को व्हाट्सएप चैट के कुछ स्क्रीनशॉट सौंपे गए।

पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी। धमकाने वाले का नंबर 9534989473 था। इस नंबर की जाँच की गई तो यह जमुई के ही मोहम्मद इम्तियाज के नाम पर पाया गया। पुलिस ने इम्तियाज को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। पूछताछ में उसने बताया कि पीड़िता को ब्लैकमेल करने में इम्तियाज़ के साथ पीडि़ता का पूर्व प्रेमी मोहम्मद सरफराज भी शामिल है।

मोहम्मद सरफराज और पीड़िता के बीच कुछ समय पहले प्रेम प्रसंग था। इस दौरान सरफराज ने पीड़िता की प्राइवेट तस्वीरें खींच लिए और वीडियो बना लिए थे। बाद में दोनों अलग हो गए। इसके बाद मोहम्मद सरफराज ने इम्तियाज के साथ मिलकर यह धंधा शुरू कर दिया। मोहम्मद सरफराज भी जमुई का ही रहने वाला है। पुलिस ने दबिश देकर सरफराज को गिरफ्तार कर लिया।

ब्लैकमेलिंग के लिए सरफराज ने पीड़िता का नंबर इम्तियाज को दे दिया था। तलाशी के दौरान इन आरोपितों के पास से पुलिस को HP कम्पनी के पेन ड्राइव और व्हाट्सएप चैट का स्क्रीनशॉट मिला है, जिसे जब्त कर लिया गया है। इम्तियाज़ और सरफराज को जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

धरना-प्रदर्शन के लिए बच्चों को लेकर जाने वाले माता-पिता की खैर नहीं: केरल हाई कोर्ट ने कहा- ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो, जानबूझकर करते हैं इस्तेमाल

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि छोटे बच्चों को विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों में ले जाने वाले माता-पिता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। न्यायमूर्ति पीवी कुन्हिकृष्णन ने साफ कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसे माता-पिता के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो ऐसे विरोध प्रदर्शनों पर ध्यान आकर्षित करने के प्रयास में जानबूझकर छोटे बच्चों को विरोध प्रदर्शनों में शामिल करते हैं।

न्यायालय ने कहा, “यदि कानून लागू करने वाली संस्था को लगता है कि बच्चों को उनकी कम उम्र में विरोध, सत्याग्रह, धरना आदि के लिए ले जाया जा रहा है और यदि इरादा उनके विरोध की ओर ध्यान आकर्षित करने का है तो उन्हें कानून के अनुसार आगे बढ़ने का पूरा अधिकार है। 10 वर्ष से कम आयु के छोटे बच्चे को विरोध, धरना आदि का उद्देश्य पता नहीं हो सकता है।”

जज कुन्हिकृष्णन ने आगे कहा, “उन्हें बचपन में अपनी इच्छानुसार अपने दोस्तों के साथ खेलने दें या स्कूल जाने दें या गाने और नाचने दें। यदि माता-पिता बच्चे को इस तरह के विरोध, सत्याग्रह, धरना आदि के लिए ले जाकर ऐसा कोई भी जानबूझकर किया गया कार्य करते हैं तो कानून लागू करने वाली संस्था को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।”

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब छोटे बच्चों को विरोध प्रदर्शनों या धरनों के लिए ले जाया जाता है तो उन्हें अत्यधिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिससे उन्हें भावनात्मक और शारीरिक क्षति पहुँचती है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अत्यधिक तापमान और बिना साफ-सफाई के भीड़-भाड़ वाली स्थितियों में रहने से बच्चे बीमार पड़ सकते हैं।

कोर्ट नेआगे कहा, “आंदोलन से बच्चे की नियमित दिनचर्या बाधित हो सकती है, जिसमें भोजन, नींद, खेल, शिक्षा आदि शामिल हैं। विरोध प्रदर्शन में हिंसा की आशंका होती है। अगर किसी बच्चे को वहाँ में ले जाया जाता है तो बच्चे को शारीरिक नुकसान होने का खतरा होता है। इसके अलावा, तेज आवाज, भीड़ और संघर्ष बच्चे को भावनात्मक आघात पहुँचा सकते हैं।”

कोर्ट ने 24 सितंबर 2024 को सुनाया है। फैसले की विस्तृत कॉपी अब सामने आई है। दरअसल, न्यायालय ने यह टिप्पणी एक तीन वर्षीय बच्चे के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। माता-पिता पर पुलिस ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2000 की धारा 23 (बच्चों के प्रति क्रूरता) के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था।

याचिकाकर्ताओं पर अपने तीन वर्षीय बच्चे को लेकर तिरुवनंतपुरम में राज्य सचिवालय के बाहर भीषण गर्मी में प्रदर्शन करने का आरोप था। वे साल 2016 में एक अस्पताल द्वारा चिकित्सा लापरवाही के कारण अपने पहले बच्चे को खोने का विरोध कर रहे थे। उन्होंने सरकार से वित्तीय मदद की भी माँग थी।

अधिकारियों के अनुरोध के बावजूद माता-पिता ने विरोध जारी रखा था, जिसके कारण मामला दर्ज किया गया। याचिकाकर्ताओं ने बाद में आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए केरल उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय ने माना कि बच्चे को खोने के सदमे ने माता-पिता को विरोध प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।

इसको देखते हुए न्यायालय ने मामले को रद्द कर दिया और कहा कि याचिकाकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते समय अपने बच्चे की ‘जानबूझकर उपेक्षा‘ नहीं की थी। हालाँकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले को मिसाल नहीं माना जाना चाहिए और माता-पिता को छोटे बच्चों को विरोध प्रदर्शन में ले जाने के खिलाफ चेतावनी दी।

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि इस तरह की हरकतों से कानून प्रवर्तन द्वारा सख्त कार्रवाई की जा सकती है। बता दें कि Suresh & anr v State of Kerala & anr मामले में याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता पीवी वेणुगोपाल ने किया था। वहीं, सरकारी वकील संगीतराज एनआर राज्य की ओर से पेश हुए।

गायत्री मंदिर की जमीन पर बना दी मस्जिद, अब बढ़ा रहे आकार: यूँ ही नहीं उबला जबलपुर का हिंदू समाज, VHP ने कहा- 10 दिन में एक्शन लो, नहीं तो करेंगे कारसेवा

मध्य प्रदेश के जबलपुर में पिछले दिनों गायत्री मंदिर की जमीन पर मस्जिद बनाने के मामले को लेकर हिंदू संगठनों ने जमकर विरोध किया था। कहा गया था कि अगर इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो कारसेवा होगी। उस समय मुस्लिम समुदाय का कहना था कि ये दावा गलत है और वो जमीन उनकी ही है। हालाँकि अब दैनिक भास्कर की रिपोर्ट से सामने आया है कि मुस्लिम समुदाय ने जिस भूमि पर मस्जिद बनाया है वो रिकॉर्ड में साफ तौर पर हिंदू मंदिर के नाम पर दर्ज है।

पूरा मामला जबलपुर की रांझी तहसील में पड़ने वाले गाँव मड़ई का है। विश्व हिन्दू परिषद के विभाग संयोजक सुमित सिंह ठाकुर ने गुरुवार को बताया था कि खसरा नंबर 169 पर एक मस्जिद अवैध तौर पर बनाई गई। जब दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने इस विवाद की हकीकत जानने के लिए जमीन के रिकॉर्ड देखे तो सामने आया कि खसरे में मस्जिद की जमीन गायत्री बाल मंदिर और एक परिवार के नाम पर दर्ज है।

वहीं मुस्लिम समुदाय का कहना है कि उनकी मस्जिद तो 50 साल पहले बनी थी। विश्व हिन्दू परिषद इस मस्जिद को लैंड जिहाद बताते हुए 3 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। उनका कहना है कि मुस्लिम समुदाय धीरे-धीरे मस्जिद का आकार और बड़ा कर रहा है, जिस पर तत्काल रोक लगाने की आवश्यकता है। अगर ऐसा नहीं हुआ वो कारसेवा होगी।

बता दें कि गुरुवार को विश्व हिन्दू परिषद सहित अन्य कई हिन्दू संगठनों के सदस्य इस विवादित स्थल पर जमा हुए थे। उन्होंने इस दौरान नारेबाजी की थी। मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी तत्काल मौके पर पहुँचे थे। उन्होंने प्रदर्शनकरियों को शांत करवाया था और मामले की जल्द जाँच करके कार्रवाई का भरोसा दिया था। इस बीच हिन्दू संगठनों ने भी अपनी तरफ से प्रशासन को 10 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए धरना खत्म किया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर 10 दिनों में एक्शन नहीं हुआ तो विवादित मस्जिद पर कारसेवा की जाएगी।

हालाँकि मुस्लिम पक्ष हिन्दू संगठनों के इस दावे को बेबुनियाद बता रहा है। मस्जिद कमेटी के सचिव दिलशाद अली ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि भीड़ बढ़ने की वजह से कुछ निर्माण कार्य करवाया जा रहा है जिसे बेवजह विवाद का मुद्दा बनाया जा रहा है। दिलशाद ने मस्जिद को 50 साल पहले की बनी बताया। उन्होंने विश्व हिन्दू परिषद से कोर्ट में अपने दस्तावेज दिखाने की अपील की है।

दिलशाद ने जमीन के खसरे में ट्रस्ट का नाम चढ़ना किसी की गलती करार दे डाला है। हालाँकि सुमित ठाकुर ने दिलशाद के दावों को मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि साल 2022 में मस्जिद पर स्टे है लेकिन अब तक उसे खाली नहीं किया गया। बकौल सुमित अगर कब्जेदार न हटे तो नवरात्रि में ढाँचा टूटा हुआ मिलेगा। उन्होंने इलाके में रोहिंग्या मुस्लिमों की भी घुसपैठ होने की आशंका जताई है।

‘भारत माता की जय’ कहने से बढ़ती है दुश्मनी… हाई कोर्ट ने कर्नाटक पुलिस को रगड़ा: कहा- यह नफरती नारा नहीं, यह सद्भाव बढ़ाता है; जानिए क्या है मामला

कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा है कि ‘भारत माता की जय’ बोलना नफरत फैलाना नहीं है। ‘भारत माता की जय’ बोलने से सिर्फ सद्भाव बढ़ता है, वैमनस्य नहीं फैलता। इसके साथ ही कोर्ट ने दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, अपमान और धमकी से संबंधित भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं में दर्ज FIR को रद्द कर दिया। कर्नाटक पुलिस ने पाँच हिंदुओं के खिलाफ दर्ज की थी।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने हाल ही में IPC की धारा 153A के तहत दर्ज प्राथमिकी को खारिज करते हुए कहा कि भारत माता की जय कहना किसी भी तरह से धर्मों के बीच वैमनस्यता या दुश्मनी को बढ़ावा देने के रूप में नहीं माना जा सकता है। एकल न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने पाँचों आरोपितों को राहत दी है।

एफआईआर को रद्द करते हुए न्यायाधीश नागप्रसन्ना ने कहा, “उपर्युक्त तथ्यों और ऊपर दिए गए निर्णयों के आलोक में इस मामले की जाँच की अनुमति देना भी प्रथम दृष्टया भारत माता की जय बोलने की जाँच की अनुमति देना होगा। यह किसी भी तरह से धर्मों के बीच वैमनस्य या दुश्मनी को बढ़ावा देने वाला नहीं हो सकता है।”

याचिकाकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने भी कहा कि यह याचिकाकर्ताओं द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत का यह एफआईआर जवाबी हमला था। न्यायाधीश ने आगे कहा कि मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153A का एक भी तत्व पूरा नहीं होता है। कोर्ट ने इस मामले को धारा का दुरुपयोग बताया।

हाईकोर्ट ने कहा “धारा 153A के अनुसार, यदि विभिन्न धर्मों के बीच शत्रुता को बढ़ावा दिया जाता है तो यह अपराध है। वर्तमान मामला आईपीसी की धारा 153ए के दुरुपयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह इन याचिकाकर्ताओं द्वारा दर्ज की गई शिकायत का जवाबी हमला है। बचाव पक्ष का कहना है कि याचिकाकर्ता भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे और देश के प्रधानमंत्री की प्रशंसा कर रहे थे।”

कोर्ट ने आगे कहा, “शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों में इनमें से किसी भी बात का उल्लेख नहीं है। शिकायतकर्ता और अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए याचिकाकर्ताओं की खाल उधेड़ने की कोशिश की जा रही है। यह आईपीसी की धारा 153A के एक भी तत्व को पूरा नहीं करता है।”

न्यायाधीश नागप्रसन्ना ने कहा, “IPC की धारा 153A के तहत जवाबी हमले के एक शुद्ध मामले को अपराध के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है। धारा 153A के तहत शिकायत को सही साबित करने के लिए जो तत्व आवश्यक हैं, उन्हें इस न्यायालय को लंबे समय तक रोके रखने या मामले की गहराई से जाँच करने की आवश्यकता नहीं है।”

क्या है मामला?

दरअसल, केस रद्द कराने की माँग लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट पहुँचे पाँच याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 9 जून 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथ लेने के बाद वे रात 8.45 से 9.15 के बीच समारोह से लौट रहे थे। आरोप है कि जब वे दक्षिण कन्नड़ जिले की उल्लाल तालुका में बोलीयार ग्राम के समादान बार पहुँचे तो 25 लोगों ने उन पर हमला कर दिया।

हमलावरों ने उनसे कहा कि ‘तुम भारत माता की जय के नारे कैसे लगा सकते हो’। इसके बाद उन पर चाकू से भी वार किया गया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उसी रात 11 बजे 23 लोगों के विरुद्ध घटना की एफआईआर दर्ज कराई गई। चोटों के कारण वे लोग अस्पताल गए और पुलिस ने रात 12 बजे वहीं उनका बयान दर्ज किया।

अगले दिन सुबह मैंगलोर निवासी पीके अब्दुल्ला नाम के एक मुस्लिम व्यक्ति ने याचिकाकर्ता हिंदुओं के खिलाफ एक काउंटर FIR दर्ज कराई। अब्दुल्ला ने अपनी FIR में आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता सुरेश, विनय कुमार, सुभाष, रंजन और धनंजय ने उसे धमकी दी और कहा कि वह तुरंत देश छोड़ दे। अब्दुल्ला ने खुद को स्थानीय मस्जिद का अध्यक्ष बताया था। 

अब्दुल्ला नाम के मुस्लिम व्यक्ति की शिकायत पर पुलिस ने पाँचों याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध IPC की धारा 143, 147, 148, 153A, 504, 506 और 149 में केस दर्ज कर लिया। IPC की धारा 153A धर्म, जाति और जन्म स्थान के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने को दंडित करती है।