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मैदान DDA का, दावा कर रहा था वक्फ: हाई कोर्ट ने कहा- शाही ईदगाह में लगेगी झाँसी की रानी की प्रतिमा, मस्जिद कमिटी से कहा- माफी माँगो, सांप्रदायिक राजनीति मत करो

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार (25 सितंबर 2024) को एकल न्यायाधीश के खिलाफ निंदनीय दलीलें देने के लिए शाही ईदगाह प्रबंध समिति को फटकार लगाई और माफी माँगने के लिए कहा। एकल न्यायाधीश ने शहर के सदर बाजार क्षेत्र में स्थित शाही ईदगाह पार्क में स्थित जगह को DDA का बताया था और ‘झाँसी की रानी’ की मूर्ति स्थापित करने के खिलाफ ईदगाह समिति की याचिका खारिज कर दी थी।

न्यायालय ने मस्जिद समिति द्वारा दायर आवेदन की कुछ पंक्तियों पर कड़ी आपत्ति जताई। उसमें एकल न्यायाधीश के उस फैसले की सत्यता पर सवाल उठाया गया था, जिसके तहत दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को शाही ईदगाह पार्क में लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति दी गई थी। दरअसल, मस्जिद समिति इस जमीन को अपना बताता है, जबकि कोर्ट ने उसे DDA का घोषित किया था।

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने इस विवाद को सांप्रदायिक रंग देने के लिए मस्जिद समिति की आलोचना की। इसके साथ ही उसने यह भी निर्देश दिया है कि ईदगाह मस्जिद समिति इस तरह के आचरण के लिए कल तक बिना शर्त माफी माँगे।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन ने ईदगाह मस्जिद समिति से कहा, “अदालत के माध्यम से सांप्रदायिक राजनीति खेली जा रही है! आप (मस्जिद समिति) मामले को ऐसे पेश कर रहे हैं, जैसे कि यह एक धार्मिक मुद्दा है, लेकिन यह कानून और व्यवस्था की स्थिति से संबंधित मुद्दा है।” वहीं, न्यायमूर्ति गेडेला ने कहा कि झाँसी की रानी की प्रतिमा का होना बहुत गर्व की बात है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन ने आगे कहा, “वह (लक्ष्मीबाई) एक राष्ट्रीय नायक हैं, जो धार्मिक सीमाओं से परे हैं। याचिकाकर्ता (मस्जिद समिति) सांप्रदायिक रेखाएँ खींच रही है और अदालत का इस्तेमाल कर रही है। सांप्रदायिक आधार पर विभाजन न करें। आपका सुझाव ही विभाजनकारी है। अगर ज़मीन आपकी थी तो आपको मूर्ति स्थापित करने के लिए स्वेच्छा से आगे आना चाहिए था!”

मस्जिद समिति के वकील ने दलील दी कि शाही ईदगाह के सामने झाँसी की रानी की मूर्ति स्थापित करने से इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो सकती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली अल्पसंख्यक समिति ने यथास्थिति का आदेश दिया था। इसलिए मूर्ति स्थापित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समिति के इस आदेश को एकल न्यायाधीश के समक्ष चुनौती नहीं दी गई थी। इसलिए यह आदेश अभी भी लागू होगा।

मस्जिद समिति के वकील ने आगे तर्क दिया कि DDA और दिल्ली नगर निगम ने एक वैकल्पिक स्थल की पहचान की है, जहाँ मूर्ति स्थापित की जा सकती है। इसी दौरान DDA के वकील ने कोर्ट का ध्यान मस्जिद समिति की दलीलों में कुछ ‘निंदनीय’ पैराग्राफों की ओर आकर्षित किया। इसे कोर्ट के एकल न्यायाधीश को लेकर कहा गया था, जिन्होंने हाल ही में आदेश दिया था कि विवादित भूमि डीडीए की है।

खंडपीठ ने शाही ईदगाह प्रबंध समिति को इस तरह की दलीलें देने के लिए कल तक माफीनामा देने का आदेश दिया है। कोर्ट की फटकार के बाद समिति के वकील ने बिना शर्त माफीनामा जारी करने पर सहमति जताई। इसके साथ ही उन्होंने अपनी अपील को भी वापस लेने की अनुमति माँगी। इस मामले में कोर्ट की अगली सुनवाई 27 सितंबर को है।

दरअसल, एकल न्यायाधीश के समक्ष पेश की गई अपनी याचिका में मस्जिद समिति ने कोर्ट से यह माँग की थी कि वह शाही ईदगाह पर अतिक्रमण नहीं करने के लिए निगम के अधिकारियों को निर्देश दे। उसने यह भी दावा किया था कि यह एक वक्फ संपत्ति है। मस्जिद समिति ने कहा कि साल 1970 में प्रकाशित एक राजपत्र अधिसूचना में शाही ईदगाह पार्क को मुगल काल के दौरान निर्मित बताया गया है।

याचिका में मस्जिद समिति ने आगे कहा था कि इस शाही ईदगाह परिसर का उपयोग नमाज अता करने के लिए किया जा रहा है। इसमें एक साथ 50,000 नमाजी नमाज पढ़ सकते हैं। हालाँकि, एकल न्यायाधीश ने याचिका को खारिज कर दिया था और कहा था कि ईदगाह की सीमा के अंदर का क्षेत्र, जो पार्क या खुला मैदान है, वह DDA का है। उन्होंने यह भी कहा था कि दिल्ली वक्फ बोर्ड भी धार्मिक गतिविधियों के इस पार्क का इस्तेमाल करने के लिए अधिकृत नहीं करता है।

अब हिमाचल में भी योगी के UP का मॉडल, भोजनालय-फास्टफूड रेहड़ी पर लिखना होगा मालिक का नाम: काँवड़ यात्रा के समय आदेश को कॉन्ग्रेस ने बताया था ‘संविधान पर हमला’

हिमाचल प्रदेश में खाने-पीने की हर दुकान और रेहड़ियों पर विक्रेता का पहचान पत्र लगाया जाएगा। इससे उसकी सही पहचान का अंदाजा लोगों को हो सकेगा। खाने-पीने के सामान में शुद्धता बनी रहे, इसके लिए यह कदम उठाया जाएगा। हिमाचल प्रदेश यह कदम उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उठा रहा है।

हिमाचल प्रदेश में खाने-पीने की दुकान चलाने वालों की पहचान सामने रखने के इस कदम का ऐलान हिमाचल की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने किया। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए यह ऐलान किया है। उन्होने इस संबंध में आदेश जारी करने की जानकारी भी दी है।

विक्रमादित्य सिंह ने एक पोस्ट में लिखा, “हिमाचल में भी हर भोजनालय और फास्टफूड रेहड़ी पर ओनर की ID लगाई जाएगी, ताकि लोगों को किसी भी तरीक़े की परेशानी न हो। इसके लिए कल ही शहरी विकास एवं नगर निगम बैठक में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।”

हिमाचल प्रदेश में यह कदम उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के बाद सामने आया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हाल ही में आदेश दिया है कि होटल-रेस्टोरेंट, ढाबों और दुकानों पर मालिक और मैनेजर का नाम और उनका पता स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए। इसके अलावा सरकार ने आदेश दिया है कि रेस्टोरेंट-होटल में सब कहीं CCTV भी लगाए जाएँ।

सरकार ने कहा है कि इस CCTV फीड को मालिकों को सुरक्षित रखना होगा और माँगने पर पुलिस को दिखाना भी होगा। योगी सरकार ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि ढाबे-होटल पर काम करने वाले हर कर्मचारी का पुलिस सत्यापन भी करवाना होगा। योगी सरकार ने साफ-सफाई बरतने के विशेष ध्यान दिए हैं।

योगी सरकार ने यह आदेश खाने-पीने के सामान में मिलावट की हालिया घटनाओं को लेकर उठाए हैं। योगी सरकार ने इससे पहले काँवड यात्रा के दौरान भी श्रद्धालुओं के लिए खाने-पीने की शुद्धता बनाए रखने के लिए नियम बनाए थे। योगी सरकार के इस आदेश को लेकर कॉन्ग्रेस ने भी खूब हल्ला किया था।

योगी सरकार के इस निर्णय को लेकर कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने भी हमला बोला था। कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने दुकानों पर नाम लिखने के आदेश को विभाजनकारी और संविधान पर हमला करार दे दिया था। उन्होंने इस आदेश को वापस लेने की माँग की थी। हालाँकि, अब हिमाचल में कॉन्ग्रेस सरकार ने ऐसा ही निर्णय लागू कर दिया है।

हिमाचल प्रदेश में भी यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब राज्य में अवैध मस्जिदों और बाहर से अवैध रूप से आने वाले मुस्लिमों को लेकर गुस्सा है। यह विवाद शिमला की संजौली मस्जिद से चालू होकर पूरे राज्य में फ़ैल चुका है। हिन्दू संगठन लगातार अवैध मस्जिदों और पहचान को लकर गड़बड़ियो को उजागर कर रहे हैं।

‘मुस्लिम आक्रांताओं ने लूटे मंदिर, अब वही काम कर रही हिंदू विरोधी सरकारें’: मुक्ति के लिए आंदोलन करेगी VHP, कहा- साधु-संतों के करो हवाले

आंध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर के प्रसाद में जानवरों की चर्बी मिलने का बाद देश भर के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की आवाज उठने लगी है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने मंगलवार (24 सितंबर) को कहा कि जब अल्पसंख्यक अपने संस्थान और धार्मिक स्थलों का खुद प्रबंधन कर सकते हैं तो हिंदू क्यों नहीं कर सकते। इसके लिए उसने आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए विहिप राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाएगी। संबोधित करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकारें मंदिरों को हिंदू समाज को नहीं सौंपती हैं, तो संगठन अदालत का भी दरवाजा खटखटाएगा। विहिप ने कहा कि मंदिरों का सरकारीकरण नहीं, बल्कि समाजीकरण होना चाहिए।

जैन ने कहा कि देश के मंदिरों पर अपना नियंत्रण हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को भड़काने के साथ-साथ संविधान की आड़ में धोखाधड़ी की जा रही है। उन्होंने कहा कि मंदिरों का अधिग्रहण करके सरकारें संंविधान की धारा 12, 25 और 26 खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट कई बार कह चुका है कि सरकारों को मंदिरों के संचालन एवं उनकी संपत्ति की व्यवस्था से अलग रहना चाहिए।

उन्होंने विभिन्न सरकारों से पूछा कि आजादी के 77 सालों के बाद भी हिंदुओं को उनके धार्मिक स्थलों को संचालित करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है। मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा मंदिरों को लूटने और अंग्रेजों द्वारा उन पर कपट से नियंत्रण करने की बात कहते हुए सुरेंद्र जैन ने कहा कि औपनिवेशिक व्यवस्था को बनाए रखकर सरकारें मंदिरों को लूट रही हैं।

सुरेंद्र जैन ने कहा कि तमिलनाडु में 400 से अधिक मंदिरों पर कब्जा करके वहाँ की हिंदू विरोधी सरकार उसे मनमाने ढंग से लूट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहाँ के कई मंदिरों में विशाल चढ़ावे आने के बाद भी उन मंदिरों को घाटे में दिखाया जाता है। इसके कारण वहाँ पूजा सामग्री आदि की उचित व्यवस्था तक नहीं हो पाती है। इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार की लूटने वाली प्रवृत्ति बताई।

राजस्थान की पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकार की हरकतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उस समय ने जयपुर के प्रसिद्ध गोविंद देवजी मंदिर से 9.82 करोड़ रुपए निकालकर ईदगाह को दिए थे। इतना ही नहीं, विहिप नेता ने आंध्र प्रदेश द्वारा स्थापित बोर्ड के द्वारा संचालित तिरुपति मंदिर से राशि निकालकर धर्मांतरण करने वाली संस्थाओं को अनुदान देने का भी आरोप लगाया।

सुरेंद्र जैन ने कहा कि हिंदू मंदिरों की संपत्ति और उनकी आय का उपयोग मंदिरों के विकास और हिंदुओं के धार्मिक कार्यों के लिए होना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि ‘हिंदू आस्था की संपत्ति हिंदू कार्यों के लिए’ उपयोग होना चाहिए। उन्होंने तिरुपति मंदिर में मिलने वाले महाप्रसाद में जानवरों की चर्बी मिलने की बात हिंदुओं की श्रद्धा एवं आस्था पर घनघोर चोट पहुँचाई है।

जैन ने कहा कि राज्य सरकारों को अपने कब्जे में लिए मंदिरों को अविलंब अपने अवैधानिक एवं अनैतिक नियंत्रण से मुक्त करना चाहिए। विहिप ने कहा कि एक व्यवस्था के तहत इन मंदिरों को साधु संतों के हवाले कर देना चाहिए। जैन का कहना है कि इसके लिए साधु-संतों ने एक प्रारूप बनाया गया है, जिसका इस्तेमाल कई जगहों पर किया जा रहा है। इन मंदिरों में भी यही प्रारूप अपनाया जाना चाहिए।

जियारत के बहाने आते हैं, माँगने लगते हैं भीख: जानिए ‘उमराह वीजा’ के नाम पर चल रहा कैसा फ्रॉड, क्यों पाकिस्तानी भिखारी बने सऊदी अरब के लिए सिरदर्द

सऊदी अरब ने अपने यहाँ बढ़ती भिखारियों की संख्या को लेकर पाकिस्तान को चेताया है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वह उमराह के बहाने बड़ी संख्या में भिखारी ना भेजे। सऊदी अरब के अधिकारियों ने कहा है कि अगर पाकिस्तान इस पर जल्द एक्शन नहीं लेता तो इससे दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो सकते हैं। यदि भिखारी बढ़ते रहे तो पाकिस्तानियों के हज और उमरा करने को लेकर भी एक्शन लिया जा सकता है, सऊदी अरब सरकार ने इस बात की धमकी भी दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब के हज मंत्रालय ने पाकिस्तान के धार्मिक मंत्रालय के मामलों से कहा है कि वह उमराह के लिए दिए गए वीजा के सहारे सऊदी में घुसने वाली भिखारियों को लेकर कुछ एक्शन ले। उमरा पूरे साल चलने वाली यात्रा है जबकि हज कुछ ही दिनों का कार्यक्रम होता है।

पाकिस्तान ने इसके बाद भिखारियों को रोकने के लिए उमराह एक्ट लाने की योजना बनाई है। यह उमराह एक्ट पाकिस्तान का धार्मिक मामलों का मंत्रालय लाएगा। मंत्रालय इस एक्ट के जरिए किसी पाकिस्तानी के उमराह करने और उमराह तथा हज करवाने वाली एजेंसियों को लेकर नियम कड़े कर देगा। उसने सरकार से अपील की है कि वह भी इस संबंध में एक्शन ले।

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सऊदी अरब के राजदूत नवाफ बिन सईद अहमद अल-मल्की को आश्वासन दिया है कि सऊदी अरब में भिखारियों को भेजने वाले आपराधिक गैंग के खिलाफ कड़े एक्शन लिए जाएँगे। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने इन गैंग की जाँच केन्द्रीय जाँच एजेंसी (FIA) को सौंप दी है।

अब FIA उन गैंग को ढूंढ कर कार्रवाई करेगी जो भिखारियों को उमराह के बहाने अवैध रूप सऊदी अरब के भीतर भेजते हैं। सऊदी अरब भी इस संबंध में एक्शन ले चुका है। उसने हाल ही में बिना अनुमति के हज करने वालों पर 10,000 रियाल (₹2.2 लाख) का जुर्माना लगाने का ऐलान किया था।

क्या होता है उमराह वीजा

सऊदी अरब में मक्का और मदीना स्थित हैं जिनकी यात्रा पूरे विश्व के मुस्लिम करते हैं। हज यात्रा जहाँ साल में एक बार निश्चित समय के लिए होती है तो वहीं उमराह पूरे साल चलता है। हज के सऊदी अरब ने हर देश का कोटा भी तय किया हुआ है। इस कर्ण इसके वीजा निश्चित होते हैं।

वहीं उमराह के लिए साल भर वीजा मिलते हैं। पाकिस्तान के कई गैंग ने इसका फायदा उठा कर भिखारियों को सऊदी अरब भेजना चालू कर दिया। सऊदी अरब जाने वाले यह भिखारी उमराह सहारे भेजे जाते हैं और फिर यह वहाँ बैठ कर भीख माँगते हैं। सऊदी अरब के लोग इनसे आतंकित हो चुके हैं और सरकार इन पर एक्शन लेना चाह रही है।

2000 भिखारियों के पासपोर्ट ब्लॉक

इससे पहले पाकिस्तान सरकार ने 2000 से ज़्यादा भिखारियों के पासपोर्ट ब्लॉक करने का फ़ैसला किया था। डॉन टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के अधिकारियों ने फ़ैसला किया है कि विदेश में भीख माँगने वाले उनके नागरिकों का पासपोर्ट सात साल के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।

2023 में FIA ने मुल्तान के हवाई अड्डे पर सऊदी अरब जाने वाली एक उड़ान से 16 भिखारियों को उतारा था। इस भिखारी गैंग में 11 महिलाएँ, 4 पुरुष और 1 बच्चा शामिल था। इन लोगों ने उमराह करने का नाटक किया था। यह सभी उमराह का वीजा हासिल कर चुके थे।

इन सभी ने यह खुलासा भी किया था कि सऊदी अरब में जितनी अवह भीख मांगते, उसका आधा हिस्सा वह उस ट्रैवल एजेंसी को देते, जो उन्हें सऊदी अरब भेज रही है। कई मामलों में सऊदी अरब में भीख माँगने वाले 90% भिखारी पाकिस्तानी निकले हैं। पाकिस्तान के भिखारियों से मात्र सऊदी अरब अरब ही नहीं बल्कि बाकी खाड़ी देश भी परेशान हैं।

भिखारी ही नहीं कामगार भी परेशानी

सिर्फ भिखारी ही नहीं बल्कि पाकिस्तानी कामगार भी खाड़ी देशों में परेशानी का सबब बने हैं। सऊदी अरब और UAE ने यह मुद्दा पाकिस्तान के साथ उठाया था। यह भी सामने आया था कि UAE के भीतर होने वाले 50% अपराध पाकिस्तानी कर रहे हैं। यह सरे खुलासे एक पाकिस्तानी संसदीय कमिटी के सामने हुए थे।

कमेटी को बताया गया था कि UAE जैसे देश पाकिस्तान से आने वाले कामगारों से कतई खुश नहीं हैं और वह अब पाकिस्तानियों को काम के लिए बुलाने की जगह बांग्लादेश जैसे जगहों के लोगों को तरजीह दे रहे हैं। पाकिस्तानी UAE के भीतर बदतमीजी भी करते हैं। UAE इनके व्यवहार से परेशान है। पाकिस्तानी दुबई जैसे शहरों में महिलाओं की बिना इजाजत के वीडियो बनाते हैं। इसके अलावा इराक ने पाकिस्तानी भिखारियों से समस्या जताई थी।

अमेरिका, सिंगापुर, स्पेन, नॉर्वे… 15 देशों के राजनयिक जम्मू-कश्मीर में घूम-घूमकर देख रहे मतदान, बोले मुख्य चुनाव आयुक्त- बन रहा है इतिहास

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में बुधवार (25 सितंबर 2024) को दूसरे चरण का मतदान जारी है। इस केंद्र शासित प्रदेश में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इस प्रक्रिया को देखने के लिए विभिन्न देशों के राजनयिकों का एक प्रतिनिधिमंडल राजधानी श्रीनगर पहुँचा और मतदान केंद्रों का दौरा करता है। अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद राज्य में कई तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

इस प्रतिनिधिमंडल में अमेरिका, मैक्सिको, गुयाना, दक्षिण कोरिया, सोमालिया, पनामा, सिंगापुर, नाइजीरिया, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, नॉर्वे, तंजानिया, रवांडा, अल्जीरिया और फिलीपींस के राजनयिक शामिल हैं। विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने बडगाम के ओमपोरा में मतदान केंद्रों का दौरा किया। इसके बाद लाल चौक निर्वाचन क्षेत्र के अमीरा कदल और एसपी कॉलेज, चिनार बाग का जायजा लिया।

चिनार बाग के एसपी कॉलेज में विदेशी प्रतिनिधियों को एक विशेष गुलाबी मतदान केंद्र का दौरा करने का मौका मिला। इस मतदान केंद्र का प्रबंधन पूरी तरह से महिलाओं द्वारा किया जाता है। यह चौथा मतदान केंद्र है, जिसका उन्होंने आज दौरा किया। इनमें से कई मतदान केंद्रों पर साल 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान बहुत कम मतदान हुआ था।

जम्मू-कश्मीर में जारी मतदान को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा, “लोग बड़ी संख्या में मतदान करने के लिए निकल रहे हैं… यह इतिहास बनने जा रहा है… हमें बहुत खुशी है कि पूरी घाटी और जम्मू में उत्साह के साथ मतदान हो रहा है… चाहे वह श्रीनगर की घाटी हो, चाहे वह ऊँची पर्वत चोटियाँ हों, जहाँ से व्यवधान के आह्वान आते थे। हर जगह लोग मतदान करने के लिए निकल रहे हैं।”

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ने आगे कहा, “यहाँ तक ​​कि उन इलाकों में भी जहाँ से बहिष्कार के आह्वान होते थे, मतदाताओं में उत्साह है… यह दुनिया को देखना है कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्ष तरीके से कैसे हो सकते हैं… विधानसभा चुनाव देखने के लिए बड़ी संख्या में राजनयिक भी इलाके में हैं।”

बता दें कि राज्य की 90 विधानसभा सीटों पर मतदान होने हैं। इसमें पहले चरण का चुनाव 18 सितंबर को हो चुका है, जबकि आज 25 सितंबर को दूसरे चरण का चुनाव हो रहा है। इसके बाद तीसरा एवं अंतिम चरण का मतदान 1 अक्टूबर 2024 को होगा। पहले फेज में 24 सीटों, दूसरे फेज में 26 सीटों और तीसरे फेज में 40 सीटों पर मतदान होना है। नतीजे 4 अक्टूबर को घोषित होंगे।

10 साल छोटे मोहसिन मीर से 8 साल पहले निकाह, अब तलाक ले रही हैं उर्मिला मातोंडकर: रिपोर्टस में दावा- लम्बे समय से अलग रह रहे मियाँ-बीवी

बॉलीवुड अभिनेत्री और नेता उर्मिला मातोंडकर कथित तौर पर अपने पति मोहसिन अख्तर मीर से तलाक ले रही हैं। उन्होंने इसके लिए कोर्ट में आवेदन भी दे दिया है। अभी तलाक का कारण स्पष्ट नहीं है। दोनों की शादी को 8 वर्ष हो चुके हैं। इस तलाक का आधिकारिक तौर पर ऐलान नहीं किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई की जिस अदालत में उर्मिला मातोंडकर ने तलाक के लिए आवेदन दिया है वहाँ के एक सूत्र ने इसकी जानकारी दी है। यह भी बताया गया है कि उर्मिला मातोंडकर और मोहसिन मीर के बीच हो रहे तलाक को लेकर आपसी सहमति नहीं है।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि उर्मिला मातोंडकर और मोहसिन मीर के बीच तलाक की शर्तों पर भी सहमति नहीं बनी है। उर्मिला मातोंडकर और मोहसिन मीर की तरफ से इस संबंध में अभी आधिकारिक रूप से कोई सूचना नहीं दी गई है। तलाक का कारण दोनों के रिश्ते में खटास आना माना जा रहा है।

इंडिया टुडे को उर्मिला मातोंडकर की टीम ने बताया है कि वह तलाक लेकर बॉलीवुड में वापस आना चाहती हैं। टीम ने यह बताया कि वह फिल्मों में दोबारा से काम करना चाहती हैं। उर्मिला मातोंडकर और मोहसिन मीर कुछ समय से अलग-अलग रह रहे हैं, यह भी टीम ने बताया है।

उर्मिला मातोंडकर और मोहसिन अख्तर मीर ने 2016 में निकाह किया था। उर्मिला मातोंडकर, मोहसिन मीर से 10 वर्ष बड़ी हैं। उर्मिला की उम्र 50 वर्ष है और मोहसिन 40 वर्ष के हैं। दोनों की पृष्ठभूमि भी काफी अलग है। बताया गया कि 2014 में ही यह दोनों एक दूसरे से मिले थे और 2016 में निकाह करने का निर्णय किया था।

उर्मिला मातोंडकर का करियर बॉलीवुड में रहा है, जबकि मोहसिन अख्तर मीर कश्मीरी व्यापारी और मॉडल हैं। मोहसिन अख्तर मीर ने कुछ फिल्मों में भी काम किया है। हालाँकि, वह एक्टर के तौर पर ज्यादा सफल नहीं हो पाए। वर्तमान में वह बड़े डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के साथ मिलकर फैशन डिजाइनिंग में हैं।

उर्मिला मातोंडकर और मोहसिन अख्तर मीर की 2016 में शादी को लेकर भी खूब चर्चा हुई थी। तब दोनों के मजहब अलग-अलग लेने को लेकर चर्चा हुई थी। 8 साल चले इस विवाह के रिश्ते में अब खटास होने की बातें सामने आ रही हैं। शादी के इन्हीं सालों के बीच उर्मिला मातोंडकर 2019 में उर्मिला ने मुंबई से चुनाव भी लड़ा था लेकिन हार गई थीं।

उर्मिला मातोंडकर के तलाक की खबर के बाद लोगों ने बॉलीवुड में बढ़ते तलाक के मामलों पर चिंता जताई है।

वहीं एक और व्यक्ति ने लिखा कि उर्मिला मातोंडकर का भी तलाक हो रहा है ऐसे में देखना है कि सोनाक्षी सिन्हा की शादी कितने दिन चलती है। उन्होंने मुस्लिमों की तरफ इशारा करते हुए विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठाए।

उर्मिला मातोंडकर के तलाक के आवेदन की बात तो सामने आ गई है लेकिन मोहसिन मीर की तरफ ऐसा कोई कदम उठाया गया है या नहीं इसकी कोई जानकारी नहीं सामने आई है।

‘न्यायालय में जो कुछ भी हो रहा है उसे दबाना नहीं चाहिए’: सुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग पर लगी रोक हटाई, कर्नाटक हाई कोर्ट ने क्लिप शेयर करने से भी रोका था

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने बुधवार (25 सितंबर 2024) को कहा कि न्यायाधीशों द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों के वायरल होने से हुए विवाद के कारण अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग नहीं बंद की जा सकती। CJI ने कहा कि सूर्य के प्रकाश का उत्तर है अधिक सूर्य का प्रकाश। न्यायालय में जो कुछ भी हो रहा है, उसे दबाना नहीं चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ दरअसल कर्नाटक हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति वी श्रीशानंद द्वारा की गई टिप्पणियों पर स्वत: संज्ञान लिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई की। इसका वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया था।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपने आदेश में जजों को स्त्री द्वेषी या किसी समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह वाली टिप्पणी से बचने की जरूरत को लेकर कुछ सख्त टिप्पणी भी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक युग में कार्यवाही की व्यापक रिपोर्टिंग होती है। ऐसे में न्यायाधीशों को सावधानी और सतर्कता से काम करने की जरूरत है। पीठ ने न्यायाधीश द्वारा क्षमा याचना के बाद स्वत: संज्ञान वाली कार्यवाही बंद कर दी।

गौरतलब है कि विवाद के बाद कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक अधिसूचना जारी करके लोगों को लाइव-स्ट्रीम वीडियो की अनधिकृत क्लिपिंग और शेयरिंग के खिलाफ नियमों की याद दिलाई थी। साथ ही हाई कोर्ट ने एक आदेश पारित कर अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीम से बनाई गई क्लिप को शेयर करने पर रोक लगा दी थी।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश एडवोकेट एसोसिएशन बेंगलुरु की एक याचिका पर दिया। एडवोकेट ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि लाइव स्ट्रिमिंग से उनकी प्रतिष्ठा का हनन हो रहा है। ये याचिका पब्लिक में, खासकर सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा कोर्ट प्रोसिडिंग्स की लाइव स्ट्रीम वीडियो के इस्तेमाल के खिलाफ दायर की गई है।

एक वीडियो में जस्टिस श्रीशानंद बेंगलुरु के एक इलाके को ‘पाकिस्तान’ कहते नज़र आए थे। दूसरे वीडियो में वे एक महिला वकील के लिए कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते नज़र आए थे। वीडियो वायरल होने के बाद इसकी बड़े पैमाने पर आलोचना हुई थी। इसके बाद जज श्रीशानंद ने शनिवार (21 सितंबर 2024) को न्यायालय में अपनी टिप्पणी के लिए खेद व्यक्त किया था। 

बताते चलें कि इसी तरह की कुछ दलील RG कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई रेप एवं उसकी हत्या के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे कपिल सिब्बल ने भी दिया था। उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग का विरोध किया था और कहा था कि 5 दशकों में बनाई गई प्रतिष्ठा लाइव स्ट्रीमिंग से नष्ट हो जाएगी।

इजरायल के हमले में हिजबुल्लाह का मिसाइल प्रोग्राम का सरगना ढेर, 250 से ज्यादा फाइटर जेट बरसा रहे बम: अब तक 550+ की मौत

इजरायल के हवाई हमले में लेबनान के भीतर छुप कर बैठे इस्लामी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के मिसाइल प्रोग्राम का कमांडर ढेर हो गया। इजरायल के हवाई हमलों के कारण हिजबुल्लाह की कमर टूट गई है। हिजबुल्लाह के समर्थक ईरान ने कहा है कि यह आतंकी संगठन अकेले इजरायल का मुकाबला नहीं कर सकता।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने मंगलवार (24 सितम्बर, 2024) को इजरायल ने बेरूत के दाहियेह इलाके में हवाई हमला किया। इस हमले में हिजबुल्लाह का रॉकेट और मिसाइल विशेषज्ञ इब्राहीम कुबाईसी मारा गया। कुबाईसी हिजबुल्लाह की रॉकेट यूनिट का बड़ा नाम था और इजरायल में कई हमलों के लिए जिम्मेदार था।

कुबाईसी की मौत की पुष्टि आतंकी संगठन हिजबुल्लाह ने भी कर दी है। हिजबुल्लाह ने उसे शहीद बताया है। इजरायल ने बताया कि कुबाईसी इजरायल के भीतर होने वाले सैकड़ों रॉकेट हमले के लिए जिम्मेदार था। उसके इन हमलों के कारण 2000 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हमले में हिजबुल्लाह के दो और कमांडर मारे गए हैं।

कुबाईसी 1980 से ही हिजबुल्लाह से जुड़ा हुआ था। उसकी मौत के बाद हिजबुल्लाह ने बदला लेने की बात कही है। इजरायल हिजबुल्लाह पर बीते लगभग एक सप्ताह से हमलावर है। इजरायल लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है।

इजरायल के लगभग 250 जेट विमान लेबनान के भीतर बम बरसा रहे हैं। इजरायल उन इमारतों को निशाना बनाया है कि जहाँ हिजबुल्लाह ने अपने हथियार छुपा कर रखे थे। हिजबुल्लाह ने लेबनान के कई घरों में रॉकेट और मिसाइल भी भर रखे थे। इजरायल ने इसकी तस्वीरें भी जारी की।

हिजबुल्लाह ने इजरायल का जवाब देने के लिए रॉकेट इजरायल की तरफ दागे हैं। उसने अब तक 300 से अधिक रॉकेट हमले इजरायल के अलग-अलग हिस्सों में किए हैं। इजरायल ने बताया कि एक क्रूज मिसाइल भी उसकी तरफ दागी गई थी लेकिन उसे रास्ते में ही मार गिराया गया।

इजरायल के लेबनान के भीतर हिजबुल्लाह पर बढ़ते हमलों के बीच ईरान ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने कहा है कि हिजबुल्लाह इजरायल के खिलाफ अकेले खड़ा नहीं हो सकता। ईरान का कहना है कि इजरायल को पश्चिमी देश लगातार मदद करते हैं और ऐसे में हिजबुल्लाह उसका सामना नहीं कर सकता।

लेबनान ने कहा है कि इजरायली हमलों में अब 550 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं जबकि बड़ी संख्या में लोग उन इलाकों से भागने पर मजबूर हैं जहाँ हिजबुल्लाह का प्रभाव है। बड़ी संख्या में लोग घायल भी हैं। इससे पहले इजरायल ने लेबनान के भीतर हजारों पेजरों पर एक साथ हमला किया था।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया था। इस हमले में 1000 से अधिक लोग मारे गए थे। हिजबुल्लाह ने इस हमले का समर्थन किया था और लेबनान की तरफ से इजरायल को निशाना बनाया था। अब इजरायल हिजबुल्लाह पर कहर बरपा रहा है।

जम्मू के रियाज अहमद ने हिंदू बन त्रिपुरा की महिला से की दोस्ती, फिर आंध्र प्रदेश के मंदिर में की शादी: अब कह रहा- मुस्लिम बनो, नहीं तो हत्या कर दूँगा

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक हिन्दू महिला से लव जिहाद का मामला सामने आया है। त्रिपुरा की रहने वाली पीड़िता ने सोमवार (23 सितंबर 2024) को दी गई तहरीर में आरोप कि जम्मू-कश्मीर का रहने वाले रियाज़ ने गुलशन बनकर उससे शादी की और बच्चा होने के बाद उस पर इस्लाम अपनाने का दबाव बनाने लगा। इनकार करने पर उसने पीड़िता को शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक NGO के माध्यम से बच्चों को पढ़ाती है। सोमवार को वह शिकायत लेकर रायगढ़ कलेक्ट्रेट पहुँची। अपनी शिकायत में पीड़िता ने कहा कि लगभग 4 साल पहले सोशल मीडिया के जरिए उसका परिचय जम्मू के गाँव कांदी का रहने वाले रियाज़ अहमद से हुआ था। तब रियाज़ ने अपनी प्रोफ़ाइल गुलशन मन्हास के नाम से बना रखी थी।

लगभग 4-5 महीनों की बातचीत में ही रियाज़ और पीड़िता में गहरी दोस्ती हो गई। उन्होंने आपस में मोबाइल नंबर शेयर करके बातचीत शुरू कर दी। साल भर के अंदर ही रियाज़ ने पीड़िता को अपने प्यार के जाल में फँसा लिया। साल 2021 में रियाज़ अहमद ने महिला से शादी करने के लिए कहा और जब वह तैयार हो गई तो उसे आंध्र प्रदेश के व्रदापालम शहर बुलाया।

पीड़िता बिना किसी को बताए व्रदापालम पहुँच गई और वहाँ के एक मंदिर में जून 2021 में दोनों ने शादी कर ली। यह शादी हिन्दू विधि विधान से हुई। शादी के बाद रियाज़ पीड़िता के साथ आंध्र प्रदेश में ही एक किराए के मकान में रहने लगा। जब भी पीड़िता उससे परिवार के बारे में पूछती तो वो टाल-मटोल करने लगता था। थोड़े समय बाद पीड़िता गर्भवती हो गई।

इसके बाद पीड़िता ने 7 दिसंबर 2022 को आंध्र प्रदेश के एक अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया। इस बच्चे का नाम गुरदीप रखा गया। जब बच्चा 4 माह का हो गया तब पहली बार रियाज़ पीड़िता के साथ अपने गाँव जम्मू गया। जब पीड़िता उसके घर पहुँची तो वहाँ गुलशन बने रियाज़ का घरेलू माहौल एवं तौर-तरीका हिन्दू जैसा नहीं लगा। वह असमंजस में फँस गई।

एक दिन पीड़िता के सामने रियाज़ मुर्गा काटने लगा। मुर्गा को हलाल करते देख पीड़िता को लग गया कि उसने किसी मुस्लिम से शादी कर ली है। महिला ने आसपास पूछताछ शुरू की। तमाम मुस्लिम पड़ोसियों ने राज को दबाए रखा। हालाँकि, कुछ हिन्दू परिवारों ने पीड़िता को बताया कि गुलशन का असली नाम रियाज़ अहमद है। इसके बाद पीड़िता सन्न रह गई। पीड़िता के सामने अब रियाज़ की पोल खुल गई थी।

पोल खुल जाने के बाद रियाज पीड़िता पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगा। इसमें रियाज़ और उसके परिजन भी शामिल थे। हालाँकि, पीड़िता ने धर्मांतरण से इनकार किया तो उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। रियाज़ और उसके घर वालों ने पीड़िता को कत्ल करने की भी धमकी दी। पीड़िता का दावा है कि इस अत्याचार की शिकायत उसने जम्मू के कांदी थाने में की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

पुलिस से मदद नहीं मिलने पर पीड़िता रियाज़ के घर से भागने की फिराक में जुट गई। एक दिन मौक़ा पाते ही वह जम्मू से निकल गई और सीधे दिल्ली पहुँची। खुद को बचाने के लिए पीड़िता ने बार-बार अपनी लोकेशन बदली। वह दिल्ली से भागकर राजस्थान पहुँची। इस बीच रियाज़ को पता चला कि पीड़िता राजस्थान में है और वह वहाँ पहुँचकर पीड़िता को जबरन अपने घर जम्मू ले आया।

जम्मू आने के बाद रियाज और उसके घर वालों ने पीड़िता के कहीं आने-जाने पर सख्त पहरा लगा दिया। खुद को संकट में घिरा देखकर पीड़िता 5 माह बाद फिर से जैसे-तैसे करके रियाज़ के घर से भागने में कामयाब रही। इस बार वह राजस्थान के बजाय छत्तीसगढ़ पहुँची। यहाँ उसे एक NGO ने सहारा दिया।

वह इसी NGO में बच्चों को पढ़ाने का काम करने लगी। बच्चा गुरदीप फिलहाल पीड़िता के ही पास है। सोमवार को महिला ने राजगढ़ जिले के पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई। राजगढ़ के एडिशनल एसपी आकाश मरकाम के मुताबिक, पूरे मामले की जाँच कर के कार्रवाई की जाएगी।

कॉन्ग्रेस की सरकार बनी तो अन्याय करने वालों को मेवात छोड़ना होगा: मामन खान, नूहँ दंगों में गया था जेल; फिर से पार्टी ने दिया है टिकट

हरियाणा के कॉन्ग्रेस के विधायक मामन खान ने विधानसभा चुनावों के प्रचार के दौरान एक बार फिर भड़काऊ भाषण दिया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की सरकार बनते ही अन्याय करने वालों को को मेवात छोड़ना पड़ेगा। फिरोजपुर झिरका विधानसभा सीट से विधायक का नाम नूहँ दंगों के दौरान आया था और उन पर हिंदुओं पर हमले के लिए मुस्लिमों को भड़काने का आरोप लगा था।

हरियाणा में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया जारी है और कॉन्ग्रेस ने फिर से उन्हें फिरोजपुर झिरका सीट से टिकट दी है। चुनाव प्रचार के लिए वे बीवाँ गाँव में गए थे। यहीं पर लोगों को संबोधित करते हुए मामन खान ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जिन लोगों ने मेवात के बच्चों के साथ अन्याय किया है, कॉन्ग्रेस की सरकार बनते ही उन्हें मेवात छोड़ना पड़ेगा।

नूहँ दंगों को लेकर मामन खान ने कहा, “मुझे पता है कि जब यह कांड हुआ था तो तब काफी घरों में चूल्हे भी नहीं सुलगे थे। सरकार ने मुझे बेवजह जेल में डाल दिया था, लेकिन हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। मेरा परिवार और आपका परिवार कोई अलग नहीं है। हम सबका परिवार एक है। हमें इस बात का दुख नहीं होना चाहिए कि मेरे घर में चूल्हा नहीं सुलगा, आपके घर में चूल्हा नहीं सुलगा।”

कॉन्ग्रेस विधायक ने आगे कहा, “मेरे बच्चे ने रोटी नहीं खाई, आपके बच्चे ने रोटी नहीं खाई। दर्द सबको है। पता सबको है। वक्त आएगा और सरकार बनेगी। इंशाअल्लाह। जिन जालिमों ने हमारे बच्चों के साथ अन्याय किया है, मुझे एक-एक की जानकारी है। एक-एक को जानता हूँ। जिन्होंने लिस्ट दी है, किसी भी सूरत में बख्शूंगा नहीं। उन्हें मेवात छोड़ना पड़ेगा और बाहर जाना पड़ेगा।”

मामन खान का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस बयान ने कॉन्ग्रेस की पोल-पट्टी खोल दी। है। इसके बाद मामन खान ने एक स्पष्टीकरण जारी किया और कहा कि कुछ लोगों ने उनके बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया है। हालाँकि, लोगों पर उनकी इस लीपापोती पर विश्वास नहीं हो रहा है।

मामन खान के इस बयान पर हरियाणा भाजपा ने सोशल मीडिया X पर लिखा, “अगर कॉन्ग्रेस सत्ता में आई तो दंगे करवाएगी। गलती से भी अगर कॉन्ग्रेस की सरकार बन गई तो हिंदुओं को पलायन करना पड़ेगा।” वहीं, राज्य के वन मंत्री एवं भाजपा नेता संजय सिंह ने कहा कि मामन खान में अगर हिम्मत है किसी भी व्यक्ति को हाथ लगाकर दिखाएँ। उन्होंने चुनाव आयोग से मामन खाँ को अयोग्य घोषित करने की माँग की।

बताते चलें कि 31 जुलाई 2023 को हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा हमला किया गया, जिसमें कई मौत हो गई और पुलिस सहित दर्जनों लोग घायल हो गए थे। कट्टरपंथियों ने पानीपत बजरंग दल के प्रखंड संयोजक अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत की हत्या कर दी। अभिषेक को पहले गोली मारी गई, फिर उनका गला काट दिया गया था। उन्होंने एक महिलाओं को बचाने के लिए अपनी जान गँवा दी थी।

VHP ने स्थानीय कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान और आफताब पर हिंसा के उकसाने का आरोप लगाया और इनके द्वारा किए गए कई ट्वीट को साझा किया। विश्व हिंदू परिषद के महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि मामन खान ने चार महीने पहले विधानसभा में कहा था कि किसी की हिम्मत है तो मेवात में घुसकर दिखा दे। उन्होंने कहा कि मामन खान की तरह ही कॉन्ग्रेस नेता आफताब ने कहा था कि अगर गाँव में पुलिस वाले आएँ तो उनके हाथ-पैर तोड़ दो। उनकी चिंदी-चिंदी कर दो। उन्होंने कहा कि आफताब मेवात में ही रहते हैं।