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अजीत झा

संपादक, ऑपइंडिया (हिंदी)

पसमांदा से ही मुस्लिम ‘वोट बैंक’, मजहबी भीड़ भी इनसे ही: चाहिए दलितों का कोटा, पर वोट उनको जिधर मदरसे-मौलवी

कौन हैं पसमांदा मुस्लिम? 'सबका साथ-सबका विकास' के बाद क्यों चर्चा में पसमांदा प्लान? क्या 2024 के लिए ऐसे किसी प्रयोग की बीजेपी को सच में जरूरत है?

स्वतंत्रता के 75वें साल में भी वही मजहबी खतरे, किस ‘अवतार’ की प्रतीक्षा में हैं हिंदू: आखिर कब तक सरकार से सवाल को ही...

यह आवश्यक नहीं कि हिंदू किसी खास संगठन, दल के साथ खड़े हों। जरूरी है कि हिंदू के साथ हिंदू खड़े हों।

बालपन की कुछ सफेद कहानियाँ और काले कपड़ों वाली कॉन्ग्रेस…

कॉन्ग्रेस के कर्म ऐसे हैं कि काले कपड़ों में प्रदर्शन कर वह उन्हें ढक नहीं सकती। इसलिए संसद से सड़क तक जुमे पर उसने जो सियासी तमाशा किया, वह बेअसर साबित हुई।

दरगाहों से हिंदुओं ने मोड़ा मुँह तो गैर इस्लामी हुआ ‘सिर तन से जुदा’, उस PFI की कुर्बानी भी कबूल जो भारत को मुस्लिम...

जिस आर्थिक बहिष्कार की बात होती है, वह हिंदू आज भी नहीं कर पाए हैं। लेकिन हिंदुओं के छिटपुट प्रयासों और दगाहो-मजारों पर सन्नाटे ने इनकी छटपटाहट बढ़ा दी है।

इस नंगई से डरना नहीं है, इसको मारते रहिए भाला… ठीक वैसे ही जैसे लक्ष्य भेदते हैं नीरज चोपड़ा

नीरज चोपड़ा वाले भारत को रणवीर सिंह जैसों की जरूरत नहीं। हमारे समय, प्रेम, पैसे से बनकर बॉलीवुड के भांड हमें ही दबंगई नहीं दिखा सकते। इनकी रस्सी जल चुकी है, बल भी जाएगा ही।

नूपुर शर्मा ने जो कहा वह गलत है, उसे इस्लाम माफ नहीं करेगा: निजामुद्दीन दरगाह के दीवान अली मूसा निजामी, कहा- मंदिर जाकर करे...

कन्हैया लाल के जिक्र पर अपनी हँसी नहीं रोक पाने वाले निजामुद्दीन दरगाह के दीवान का कहना है कि नूपुर शर्मा ने जो कहा उसके लिए इस्लाम में माफी नहीं है।

बात हो किसी का गला काट देने की तो क्या छूटेगी आपकी हँसी? कन्हैया लाल पर ‘खुशी’ नहीं छिपा पाए निजामुद्दीन दरगाह के दीवान,...

उदयपुर में कन्हैया लाल का गला काट डाला गया। लेकिन दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन की दरगाह के दीवान अली मूसा निजामी उसका जिक्र आते ही हँस पड़े। ऐसा क्यों?

‘यहाँ पहले शाम में हिंदू ही हिंदू दिखते, अनाज-पैसा बाँटते, लेकिन अब…’: दिल्ली में निजामुद्दीन की दरगाह पर आने वाले हिंदू 60% तक हुए...

दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन दरगाह पर आने वाले हिंदुओं की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। दीवान अली मूसा निजामी के अनुसार यह सिलसिला करीब सालभर से चल रहा।