Friday, July 19, 2024
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इस नंगई से डरना नहीं है, इसको मारते रहिए भाला… ठीक वैसे ही जैसे लक्ष्य भेदते हैं नीरज चोपड़ा

हिंदू और भारत घृणा से ग्रसित भांडो पर लगातार प्रहार करते रहना जरूरी है। चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हो, इनकी बैंड बजती रहनी चाहिए। इनकी नंगई के चिथड़े लगातार प्रहार से ही होंगे।

नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने रविवार (24 जुलाई 2022) को देश को गौरव का एक और क्षण दिया। वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप (World Athletics Championships) में उन्होंने जैवलिन थ्रो का सिल्वर पदक देश के लिए जीता। इसके बाद से वे ट्रेंड कर रहे हैं।

नीरज के छाने से पहले सोशल मीडिया में तमिल एक्टर विष्णु विशाल ने अपनी कुछ नंग-धड़ंग तस्वीरें शेयर की थी, जो कथित तौर पर उनकी पत्नी ज्वाला गुट्टा ने खींची है। दिमाग पर थोड़ा सा जोर डालेंगे तो याद आएगा कि ज्वाला भी एक खिलाड़ी रही हैं और बैडमिंटन की कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व किया है।

दरअसल, विष्णु जिस नंगई से देश को परिचित कराना चाह रहे थे, कुछ दिनों पहले उसका सार्वजनिक प्रदर्शन कर बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह इंटरनेट पर छा गए थे। विष्णु हो या रणवीर ये उस दुनिया से आते हैं, जो हमारे ही पैसों से तिजोरी भर हिंदू घृणा का प्रसार करती है। हमारे नायकों, बिंबों को छोटा कर कथित सेकुलर प्रतिमान गढ़ती है ताकि हम खुद को भारतीय, हिंदू कहने पर हीन महसूस करे। हमारे युवा कलाकारों को ठिकाने लगाती है। भारत में इस्लामी आतंकवाद का जहर खोलने वाले पाकिस्तान के कलाकारों को हम पर थोपती है। जय श्रीराम को उन्माद का नारा बताती है…

जब कुकर्मों की वजह से इनकी फिल्मों का बायकॉट शुरू हुआ तो ये सीधे दबंगई पर उतर आए हैं। कहते हैं कि नंगे से नारायण भी डरते हैं। इसलिए इन्होंने सोचा होगा कि भक्तों की क्या औकात। लेकिन, ये शायद भूल गए कि इन्हीं भक्तों के दबाव ने इनके छिद्र-छिद्र इस तरह से खोले हैं कि अब वे उस स्तर पर पहुँच गए हैं, जहाँ अपना बचाव करने के लिए वे यह कहने को मजबूर हैं कि उन्हें हजारों की भीड़ के सामने भी नंगा होने में शर्म नहीं आएगी। वह दिन दूर नहीं जब इस दबाव के कारण ये सार्वजानिक रूप से एक-दूसरे को ही नोंचते दिखेंगे।

आखिर यह दबाव का ही असर है कि त्रिपुण्ड-शिखा वाला गुंडा दिखाने वाली ‘शमशेरा’ दर्शकों को तरस गई है। कपिल देव, मिताली राज, झूलन गोस्वामी से स्नेह करने वाला यह देश उनकी बॉयोपिक को नकार देता है, क्योंकि पर्दे पर उनके किरदार रचने वालों का मुखौटा उतर चुका है। ‘स्पेशल स्क्रीनिंग देखते हुए आमिर खान रो पड़े’ जैसी सहानुभूति पैदा करने वाली प्लान्ड स्टोरी के बावजूद देश ‘लाल सिंह चड्ढा’ को फ्लॉप कराने की प्रतीक्षा बेसब्री से करता नजर आ रहा है… संदेश साफ है कि देश को अब लूटेरों को महिमामंडित करने वालों में रूचि नहीं है। उनमें अब युवाओं को अपना रोल मॉडल नहीं दिखता जो हिंदुओं के पैसे से खजाना भर उन्हें ही नीचा दिखाते हैं।

नीरज चोपड़ा वाले भारत को रणवीर सिंह की जरूरत नहीं। हिंदू और भारत घृणा से ग्रसित भांडो पर लगातार प्रहार करते रहना जरूरी है। चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हो, इनकी बैंड बजती रहनी चाहिए। जब वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में नीरज अपना भाला लेकर दौड़ रहे थे तो हवा उनके साथ नहीं थी। तीसरे राउंड तक आते-आते पदक जीतने की उनकी उम्मीद धुँधली हो चुकी थी। लेकिन चौथे राउंड में वह करिश्मा हुआ, जिसने देश को गर्व का क्षण दिया।

इस नंगई के चिथड़े भी लगातार प्रहार से ही होंगे। ‘माय लाइफ, माय च्वाइस’ की थोथी दलीलों से इस सार्वजनिक नंगई का बचाव नहीं किया जा सकता। हमारे समय, प्रेम, पैसे से बनकर वे हमें ही दबंगई नहीं दिखा सकते। इनकी रस्सी जल चुकी है, बल भी जाएगा ही।

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अजीत झा
अजीत झा
देसिल बयना सब जन मिट्ठा

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