262 कुल लेख

अजीत झा

संपादक, ऑपइंडिया (हिंदी)

जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी: अब राबड़ी नहीं, रामरतिया का बेटा होगा राजद का नेता

राबड़ी देवी का पटना वाला घर। जातीय जनगणना के नंबर्स को लेकर मच गया बवाल। न बिहार पुलिस से हुआ काबू। न सैप से। जानिए फिर कैसे सुलझा विवाद।

मोनू मानेसर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की नीयत पर क्यों उठ रहे सवाल, क्या तुष्टिकरण की राजनीति के लिए हो रहा गोरक्षक का...

गोरक्षा से जुड़े होने के कारण इस्लामी कट्टरपंथियों को मोनू मानेसर नहीं सुहाता है। नूहं में कट्टरपंथी मुस्लिमों के हमले के बाद भी सारा दोष मोनू मानेसर के मत्थे मढ़ने को लेकर कैंपेन चला था।

जिन्होंने रखी राम मंदिर की पहली ईंट, उनसे जानिए कैसे बदला मिथिला के मुस्लिमों का ‘कैरेक्टर’: क्यों बात दरभंगा में शव के साथ अमानवीयता...

हिंदुओं के धार्मिक आयोजनों पर पत्थर फेंकते-फेंकते बात अब शव के साथ अमानवीयता तक पहुँच गई है। मजहबी जुलूसों से पहले नेटबंदी हो रही है। जानिए क्यों?

दरभंगा में सोशल साइट्स बंद कर क्या छिपा रही बिहार पुलिस, सांसद बोले- जहाँ मुस्लिम ज्यादा, वहाँ सत्यनारायण पूजा भी नहीं कर सकते हिंदू

महादलित श्रीकांत पासवान के अंतिम संस्कार पर बवाल करने वालों के नाम पुलिस ने नहीं बताए हैं। विरोध करने वाले लोगों की पहचान 'अन्य समुदाय' के तौर पर सोशल मीडिया में बताई है।

BJP सरकार की दो धुरी- विकास और विरासत: जिस संस्कृति को भारतीय राजनीति मानती रही अछूत, उसे PM मोदी ने बना दिया कूटनीति का...

विकास और विरासत मोदी सरकार की दो धुरी हैं। यही कारण है कि प्रधानमंत्री बार-बार कहते हैं कि यह समय अपनी विरासत पर गर्व करने का है।

लालू जी ने सही कहा है, PM-CM बाल-बच्चेदार ही अच्छे; क्योंकि चाराखोरी का आनंद अकेले-अकेले में नहीं है

प्रधानमंत्री और पत्नी को लेकर लालू प्रसाद यादव का ताजा बयान उनका चुटीला अंदाज नहीं। उनका अनुभव है। उनके वे राजनीतिक प्रयोग हैं जो उन्होंने परिवार के नाम पर किए हैं।

स्वीडन में कुरान जलने पर मुंबई की मीनारा मस्जिद के बाहर जुटी इस भीड़ के खतरे बड़े, क्योंकि इसके पीछे है रजा अकादमी

लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध अधिकार है। लेकिन जब विरोध-प्रदर्शन के पीछे रजा अकादमी हो तो वह घड़ी व्यवस्था के लिए अलर्ट हो जाने का है।

दिलनूर जैसी मुस्लिम युवतियों को कौन दिलाएगा मुक्ति, भाभी देती है ताने- तेरे साथ तो बकरा भी नहीं रहेगा: ‘पैगाम’ वाली रवायत से निकाह...

इस्लामी कानून, रवायत और कठमुल्ले किसी के लिए मुस्लिम महिलाओं की आवाज का मोल नहीं। उलटे तकरीरों में उन्हें इस तरह पेश किया जाता है जैसे 'भोग की वस्तु' से अधिक उनका मोल न हो।