262 कुल लेख

अजीत झा

संपादक, ऑपइंडिया (हिंदी)

क्या बिहार की सियासत के रामविलास हैं जीतनराम मांझी?

रामविलास पासवान राजनीति के मौसम वैज्ञानिक कहे जाते थे। बिहार की राजनीति में जीतनराम मांझी की यात्रा भी ऐसी ही रही है।

दो मजहबी भेड़ियों के बीच फँसी लड़की की यह तस्वीर भले धुँधली है, लेकिन इसके बारे में आपकी जानकारी साफ होनी चाहिए

इस्लामपरस्त, वामपंथी, लिबरल... पूरा गिरोह डर में है। 90 के दशक में जिस कहानी पर लीपापोती कर दी गई, वह गोदी मीडिया के जमाने में गाँव-गाँव तक पहुँच रही है।

टिकैत नहीं, मैग्नेट के कारण गंगा में नहीं बहे मेडल: बजरंग-विनेश-साक्षी ने बताई ‘इनसाइड स्टोरी’, कहा- FIR के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएँगे

बजरंग पुनिया, साक्षी मल्लिक और विनेश फोगाट ने एक साथ पहली बार इंटरव्यू दिया है। बताया है कि क्यों हरिद्वार में मुहुर्त बीत गया। गंगा में मेडल नहीं बहा।

ऑपइंडिया इम्पैक्ट: NIMHR ने डिप्टी रजिस्ट्रार मोहम्मद अशफाक को निकाला, ‘राष्ट्रीय संस्थान का मदरसे सा हाल’ वाली रिपोर्ट के बाद PMO ने की थी...

मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान (NIMHR) के डिप्टी रजिस्ट्रार मोहम्मद अशफाक को नौकरी से निकाल दिया गया है। ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद उसके खिलाफ जाँच शुरू हुई थी।

कॉन्ग्रेस ने जैसे-तैसे सजा ली कर्नाटक की मेज, पर सिद्धारमैया को छोड़ सबकी प्लेट रह गई खाली

कर्नाटक पर अब कॉन्ग्रेस सिद्धारमैया और शिवकुमार की तस्वीरों से संदेश देने की कोशिश कर रही। पर बयान कुछ और ही कहानी कह रहे।

पानि में माछ आ नौ कुट्टी बखरा… क्या कर्नाटक और कॉन्ग्रेस को चैन से जीने देगी खुशफहमी वाला ये जनादेश

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस को मिला जनादेश कुछ समुदायों और एक विशेष मजहब की खुशफहमियों की उपज है। क्या मनवांछित हिस्सेदारी नहीं मिलने पर ये कॉन्ग्रेस और कर्नाटक को चैन से जीने देंगे?

कॉन्ग्रेस के लिए अब दिल्ली कितनी दूर?

भाड़े के सैनिकों से भी युद्ध तभी जीते जाते हैं जब सेनापति खुद सक्षम हो। पर कॉन्ग्रेस का 'स्वयंभू सेनापति' निस्तेज और सामर्थ्यहीन है। खासकर जब मुकाबला नरेंद्र मोदी नाम के राजनीतिक बाहुबली से हो।

दिल्ली की मीडिया के दावों जैसी नहीं कर्नाटक की हवा, क्या फिर पोल पंडितों का गणित निकलेगा कमजोर

कर्नाटक चुनाव को लेकर जैसे दावे दिल्ली की मीडिया में रहे हैं, उसका समर्थन एग्जिट पोल्स के नंबर्स नहीं करते। क्या 13 मई को एक बार फिर पोल पंडित गलत साबित होंगे?