सूत्रों का तो ये भी कहना है कि जब भी केजरीवाल को कहीं पर थप्पड़ या घूँसा पड़ता है, तब-तब आम आदमी पार्टी के चंदों में व्यापक उछाल आता है। भारत को अंग्रेजों से आजाद करवाने के लिए महात्मा गाँधी ने अनशन का मार्ग चुना था और संत केजरीवाल ने मोदी के चंगुल से देश को छुड़ाने के लिए अगर अपनी कुटाई करवाने का मार्ग चुना है तो इसमें बुराई है क्या?
कॉन्ग्रेस ने ट्विटर पर पूरी बेशर्मी के साथ एक ऐसी रिपोर्ट ट्वीट की है, जिसमें 2014 में RBI का 200 टन सोना स्विट्जरलैंड भेजने की बात कही गई है। कॉन्ग्रेस ने नेशनल हेराल्ड की एक ‘खोजी रिपोर्ट’ को टैग करते हुए लिखा, “क्या मोदी सरकार ने गुपचुप तरीके से RBI का 200 टन सोना 2014 में स्विट्जरलैंड भेजा?”
हमारी राय यही है कि लोगों को सोशल मीडिया पर इस प्रकार की तस्वीरों को वायरल करने से बचना चाहिए। इसकी कड़ी से कड़ी निंदा की जानी चाहिए। उन्हें कॉन्ग्रेस से जुड़े होने के बाद भी सही कॉमेडी ना कर पाने की वजह से टारगेट किया जा रहा है, जो कि निंदनीय है।
वो दिन दूर नहीं जब पूरा दिन PUBG खेलने के बाद राहुल गाँधी PUBG को ही कॉन्ग्रेस द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक साबित कर देंगे। ऐसा करने के लिए उनके पास मीडिया गिरोह से लेकर नेहरुवियन सभ्यता वाले, किसी भी समय अवार्ड वापस करने वालों के गैंग, स्लीपर सेल अवस्था में हर वक़्त मौजूद तो हैं ही।
माओवादी कहीं ना कहीं अब ये बात जान और समझ गए हैं कि 'जल-जंगल-जमीन' का उनका नारा अब प्रासंगिक नहीं रहा है। इनके पोषक ये बात अच्छे से जानते है कि यदि अब यह 3 मुद्दे ही प्रासंगिक नहीं रहे, तो अब माओवंशी किस तरह से अपना अभियान आगे बढ़ाएँ? लोगों के बीच डर पैदा कर के ही ये आतंकवादी संगठन अब प्रासंगिक बने रहना चाहते हैं।
'वीरे दी वेडिंग' फिल्म में खुलकर अपने 'मन की बात' करने वाली स्वरा भास्कर को बहुत आसानी से नारीवाद का चेहरा बना कर पेश किया जाने लगा है। यह वर्तमान समय का सबसे बड़ा दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि महिलाओं के अधिकारों को उसके शारीरिक सुख और जबरन फूहड़पन मात्र से जोड़कर पेश कर देने से वो समाज में महिलाओं की नई पहचान दिलाने वाले ठहराए जाने लगते हैं।
एक वक्त ऐसा भी था, जब भाजपा को अपनी 'माँ' बताने वाले सिद्धू का कई साल तक भारतीय जनता पार्टी के साथ 'बेटे' जैसा जुड़ाव रहा था। लेकिन, पार्टी बदलते ही उन्होंने 'माँ' को 'गाली' देनी शुरू कर दी है।
कन्हैया कुमार के LPG सिलेंडर दिखाकर मीडिया गिरोह की TRP में भी उछाल आने के कारण कामरेड की गरीबी पर निष्पक्ष पत्रकारों को खूब चरमसुख मिलता नजर आ रहा है। लेकिन अचानक ‘वन फाइन डे’ इस LPG सिलेंडर न जुटा पाने वाले कामरेड की तस्वीरों से बेगूसराय के लगभग हर हिंदी और अंग्रेजी समाचार पत्र के पहले पन्ने भर गए।