PUBG और सर्जिकल स्ट्राइक्स का अंतर समझने में ‘छोटा भीम’ को अभी वक़्त लगेगा

जिन सैन्य एनकाउंटर्स के सर्जिकल स्ट्राइक का दावा मनमोहन सिंह कर रहे हैं, यदि उन्हें भी सर्जिकल स्ट्राइक नाम दे दिया जाए, तो इस तरह से शायद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे ज्यादा वाहवाही के हकदार हैं।

आए दिन सेना के राजनीतिकरण करने का रोना रोने वाली कॉन्ग्रेस को अचानक चुनावों के बीचों-बीच ध्यान आता है कि उनकी सरकार ने भी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की थी। राफेल फ़ाइल के घोटालों की ही तरह एक बार फिर बेशर्मी से राहुल गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस पार्टी मीडिया के सामने आई है। इस बार UPA के दौरान हुई सर्जिकल स्ट्राइक का दावा करने के लिए एक ऐसे सज्जन को आगे किया गया है, जिनकी जुबान तब नहीं खुली थी जब मीडिया के सामने आस्तीनें चढ़ाकर राहुल गाँधी ने मनमोहन सिंह की ही कैबिनेट द्वारा पारित एक अध्यादेश फाड़ दिया था।

जिस तरह के कल्पनालोक में कॉन्ग्रेस पार्टी वर्तमान में जी रही है और उसी कल्पनालोक के आधार पर 2019 का चुनाव जीतने का सपना भी देख रही है, ये हर हाल में उनका अपने समर्थकों के साथ किया गया धोखा है। 5 साल तक मोदी सरकार को घेरने के लिए सर से पाँव तक का जोर लगाने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी का हाल ये है कि उसके पास मोदी सरकार के खिलाफ मात्र एक ‘चौकीदार चोर है’ का नारा है और वो नारा भी कहीं ना कहीं मोदी सरकार की ही मार्केटिंग करता है। इसके अलावा राहुल गाँधी की अध्यक्षता वाली कॉन्ग्रेस पार्टी को जब कुछ भी ऐसा नहीं मिला, जिस पर कि वो सीना चौड़ा कर के मीडिया को बता सके, या कम से कम बता सके कि मोदी सरकार को घेरने के लिए उनके पास ‘फलाना’ तथ्य है और वो वाकई में तार्किक भी है, तब वो मनमोहन सिंह के मुँह में शब्द ठूँसकर चुनाव जीतने का यह आखिरी हथकंडा भी आजमा रही है।

UPA के दौरान 10 साल तक, 2G, आदर्श हाउसिंग, कॉमनवेल्थ और कोयला घोटाला पर जिन मनमोहन सिंह के मुँह में दही जमी रही, वही अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह अचानक से आम चुनावों के बीच प्रकट होकर कहते हैं, “रुको-रुको, याद आया कि हमने भी सर्जिकल स्ट्राइक की थी।”

वो दिन दूर नहीं जब पूरा दिन PUBG खेलने के बाद राहुल गाँधी PUBG को ही कॉन्ग्रेस द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक साबित कर देंगे। ऐसा करने के लिए उनके पास मीडिया गिरोह से लेकर नेहरुवियन सभ्यता वाले, किसी भी समय अवार्ड वापस करने वालों के गैंग स्लीपर सेल अवस्था में हर वक़्त मौजूद तो हैं ही।

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जिन सैन्य एनकाउंटर्स के सर्जिकल स्ट्राइक का दावा मनमोहन सिंह कर रहे हैं, यदि उन्हें भी सर्जिकल स्ट्राइक नाम दे दिया जाए, तो इस तरह से शायद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सबसे ज्यादा वाहवाही के हकदार हैं।

यह जानना भी आवश्यक है कि UPA के दौरान 11 सर्जिकल स्ट्राइक्स का दावा करने वाले मनमोहन सिंह वही हैं, जिनके बारे में सेना ने कहा था कि मुंबई हमलों के बाद सेना की समस्त तैयारियों के बाद भी मनमोहन सिंह पाकिस्तान पर कोई कार्यवाही करने से पीछे हट गए थे।

टाइमलाइन में थोड़ा सा पीछे जाकर देखें, तो हमें पता चलता है कि कॉन्ग्रेस के ही होनहार नेताओं की बदौलत भाजपा आज सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर जनता के बीच बढ़त (जैसा कि कॉन्ग्रेस का मानना है) बना रही है। यही वो कॉन्ग्रेस है, जो लगातार मोदी सरकार से सुबूत माँग कर उन पर सर्जिकल स्ट्राइक को जनता के बीच लाने का दबाव बनाती रही। हालात ये थे कि पाकिस्तान के F-16 विमान को मार गिराने के साक्ष्य सरकार को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से ज्यादा देश की मीडिया और कॉन्ग्रेस को देने पड़ रहे थे।

कॉन्ग्रेस का ऐसा भस्मासुरी दौर चल रहा है, जिसमें उनका हर दाँव उनके विपरीत हो जाता है। उनके नेता कदम उठाते तो हैं, लेकिन वही कहीं ना कहीं से उनके लिए नुकसानदायक साबित हो ही जाता है।

तमाम समीकरणों को देखते हुए बेहतर अभी यही होगा कि कॉन्ग्रेस समय के हाथों में अपने भविष्य को छोड़ दे। ऐसा इसलिए, क्योंकि ‘युवा नेतृत्व’ को बदल पाने के लिए उन्हें चमचागिरी और जी हजूरी से बाहर आना होगा और ऐसा कॉन्ग्रेस जैसे सत्तापरस्त दल के लिए इस युग में तो कम से कम संभव नजर नहीं आता है।

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