व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के कुलपति रवीश कुमार ने अपने नए प्राइम टाइम वीडियो में आरोप लगाया है कि किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बदनाम किया जा रहा है।
रवीश कुमार ने कथित किसान आन्दोलन के बीच एक बार फिर अम्बानी-अडानी का जिक्र लाकर बहस को नई दिशा दी है। उनके दावे व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के दावों से भिन्न नहीं हैं।
ख़ुफ़िया रिपोर्टर कॉमरेड पैट्रिक जिन्ना ने बताया कि ये भारत बंद और कुछ नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से अम्बानी सहित तमाम पूँजीपतियों को फायदा पहुँचाने की साजिश का ही पहला चरण है।
कृषि कानूनों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कंगना और दिलजीत पर आरोप लगाया है कि यह उनके धरने से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह का 'सीन तैयार' कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब्बास और उसके साथी सड़क पर कुर्सी लगाकर बैठे हुए थे, जिसे हटाने की बात को लेकर व्यापारियों ने पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता और मारपीट की।
ऑपइंडिया के पास मौजूद SIT रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि यह ग्रूमिंग जिहाद के कुछ बेहद चर्चित मामले थे, जिनमें हिन्दू युवतियों को धोखा देकर उनके धर्मांतरण का प्रयास या उनका उत्पीड़न किया गया।