मेडिकल टीम के सदस्यों को स्थानीय लोगों ने दौड़ा दिया। गिरते-पड़ते किसी तरह टीम वहाँ से जान बचाकर भागी। भीड़ इतनी उग्र थी कि उनके पास भागने के अवाला कोई और विकल्प नहीं था। पहले तो स्थानीय लोगों ने गाली-गलौज की और फिर इन पर हमला कर दिया।
सोचने वाली बात है कि आखिर कोई आयरिश अखबार भारत की इस छोटी सी सूचना को अपनी मुख्य हेडलाइन क्यों बनाएगा? इस समय तो भारत में कई लोग ऐसे हैं जो बड़ा-बड़ा दान कर रहे हैं, तो फिर आयरिश अखबार सिर्फ मो. साद को ही क्यों चुनता?
कैफ ने अपनी पत्नी के साथ 9 मिनट के लिए मोमबत्ती जलाते हुए साफ किया कि वे ये सब उन योद्धाओं के लिए कर रहे हैं, जो हमारी जान बचाने के लिए अपनी जान को खतरे में डाले हुए हैं। मगर, इस्लामी कट्टरपंथियों को इससे क्या? वे तो यहाँ भी कैफ को मजहब का पाठ पढ़ाने लगे, अपशब्द बोलने लगे।
सोशल मीडिया समेत ऑपइंडिया के भी कुछ सुझाव हैं कि आने वाले समय में 'नौ बजे नौ मिनट' के नाम पर कैसी दर्द भरी कहानियाँ आ सकती हैं। हमने ये सुझाव वामपंथियों की कम होती क्रिएटिविटी के कारण उन पर तरस खाकर दिए हैं।
कल से आज तक 472 नए मामले सामने आए हैं, जिससे देश में कोरोना संक्रमित कुल मामलों की संख्या अब 3374 तक पहुँच चुकी है। अग्रवाल ने यह भी बताया कि अब तक देश के 274 जिलों से कोरोना संक्रमण के केसेस आ चुके हैं। जबकि भारत में अब तक कोरोना के कारण मरने वालों की संख्या 79 हो चुकी है, जिसमें से 11 शनिवार और रविवार को मिलाकर हुई हैं।
ग्वालियर से कॉन्ग्रेस विधायक प्रवीण पाठक ने प्रधानमंत्री मोदी के रात नौ बजे नौ मिनट पर 'दिया जलाने' की मुहिम का समर्थन करने का एलान कर दिया। ट्विटर पर पूर्व प्रधानंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता "आओ फिर से दिया जलाएँ" के जरिए उन्होंने कहा कि यही एकता प्रदर्शित करने का समय है और...
ओवैसी के ये सारे आरोप महज राजनीति से ही प्रेरित नजर आते हैं क्योंकि प्रधामंत्री कार्यालय की तरफ से इस संदर्भ में जो प्रेस रिलीज जारी की गई है, उसमें यह स्पष्ट तौर पर रेखांकित है कि प्रधामंत्री इस विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली मीटिंग में सिर्फ उन्हीं राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स से बात करेंगे, जिनके सदस्यों की संख्या दोनों सदनों में मिलाकर कम से कम 5 है।
26 तबलीगी जमात के सदस्यों को दरियापुर से लाकर सोला के सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया था। जब मेडिकल टीम ने उनकी जाँच करने की कोशिश की, तो उन्होंने जाँच करवाने से मना करते हुए हँगामा खड़ा कर दिया। इनका आरोप था कि सरकार इन्हें जान से मारने की कोशिश कर रही है।