"वायरस से मृत लोगों के शवों को दफनाया नहीं जाना जाहिए और न ही इनके शवों को किसी भी प्रकार से सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इस जानलेवा वायरस के कारण मारे गए लोगों को दफनाने की जगह उन्हें जलाया जाना चाहिए।"
“ये भारतीय छात्र हैं, इन्हें एयरपोर्ट ले जाया जाएगा और वहाँ से फिर इन्हें इनके घर पहुँचाया जाएगा। बांग्लादेश वाले भी चले जाएँगे। एक हम पाकिस्तानी हैं, जो यहाँ पर फँसे हैं। जिनकी सरकार कहती है कि आप मरो या जियो, हम आपको नहीं निकालेंगे। शेम ऑन यू पाकिस्तान, सीखो भारत से कुछ सीखो।”
निकाह होने के बाद से ही पीड़िता पर उसके ससुर और देवर की नीयत खराब थी। दोनों उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालते थे। जब उसने इनकार कर दिया तो उसे और उसके ढाई साल के बच्चे को मारपीट कर घर से निकाल दिया।
पुलिस रंजीत बच्चन के सोशल मीडिया अकाउंट्स खँगाल रही है। कमलेश तिवारी हत्याकांड के 3 आरोपित हाल ही में जमानत पर बाहर निकले हैं। कमलेश को सोशल मीडिया के जरिए फँसाया गया था। रंजीत के हत्या की भी इस कोण से जाँच हो रही है।
घटना 31 जनवरी की बताई जा रही है। तोड़फोड़ का वीडियो भी सामने आया है। स्कूल प्रबंधन ने इसकी शिकायत करते हुए सुरक्षा की माँग की है। लेकिन, पुलिस मामला दर्ज करने में आनाकानी कर रही है।
साकेत ने ट्वीट कर दावा किया था कि उसे 'देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को' नारे के साथ रैली की अनुमति मिली है। बिना पुष्टि के कई मीडिया हाउस ने इसे हवा दी। इनमें प्रोपेगेंडा साइट द वायर से लेकर कॉन्ग्रेस मुखपत्र नेशनल हेराल्ड तक शामिल है।