नागरिकता संशोधन विधेयक पर कॉन्ग्रेस के दबाव और कर्नाटक विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से दुविधा में शिवसेना। उप मुख्यमंत्री और महकमों को लेकर जारी खींचतान से पिंड छुड़ाने के लिए क्या फिर भाजपा के पास लौटेंगे उद्धव ठाकरे?
महाराष्ट्र में राजनीतिक रस्साकशी के दौर में शिवसेना सांसद संजय राउत का शायराना अंदाज आपने खूब देखा होगा। सोशल मीडिया में शेरो-शायरी के इस कीड़े ने उनके नए साथी एनसीपी की मुंबई इकाई के अध्यक्ष नवाब मलिक को भी काट लिया है। गौर फरमाइए,
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एक आस्था को तरजीह देना वाला बताया गया है। कहा गया है कि हिन्दू पक्ष को जन्मभूमि की ज़मीन देने का आधार केवल आस्था को माना गया है। मस्जिद के पक्ष में पुरातात्विक साक्ष्यों को नज़रंदाज़ कर दिया गया।
नईम खान स्कूल आने जाने वाली छात्राओं पर फब्तियॉं कसता था। उन्हें देख अश्लील गाने गाता था। इसकी सूचना मिलने पर एंटी रोमियो टीम की चंचल चौरसिया ने पहले मनचले युवक को समझाया। नहीं माना तो थप्पड़ जड़े। इसके बाद पैरों से जूता निकाला और जमकर पीटा।
रिव्यू पिटिशन से पहले 29 अक्टूबर 2019 को जेल प्रशासन ने सभी कानूनी रास्ते बंद हो जाने पर दोषियों को राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने के लिए सात दिन का वक़्त दिया था। इनमें से केवल विनय शर्मा ने ही इसके लिए अर्जी दाखिल की थी।
शिवसेना का एक नेता राज्यसभा में भी नागरिकता संशोधन विधेयक पर मोदी सरकार के साथ होने की बात करता है। 10 मिनट के बाद कॉन्ग्रेस के 'वरिष्ठ नेता' राहुल गाँधी इस बिल के हर समर्थक को देश तोड़ने वाला बताते हैं। इसके 10 मिनट के बाद शिवसेना का सबसे बड़ा नेता मतलब उद्धव ठाकरे पलटी मारते हुए कहते हैं कि चीज़ें स्पष्ट नहीं, इसलिए...
“निर्भया कांड को लगभग 7 साल हो चुके हैं। अभी तक न्याय नहीं मिला। मुझे शर्म और बेबसी महसूस होती है। गुनहगारों को सजा उसी दिन मिलनी चाहिए जिस दिन उन्होंने देश की बेटी के आबरू को तार-तार किया था।”
प्रॉपर्टी डीलर के बेटे ने घर में घुसकर की बलात्कार की कोशिश। नाकाम रहने पर केरोसिन डाल जलाया। लड़की की हालत नाजुक। पीड़ित पक्ष पर समझौता करने के लिए बनाया जा रहा दबाव।