Thursday, June 4, 2020
116 कुल लेख

रवि अग्रहरि

तबियत से मस्त-मौला, तरबियत से बनारसी हूँ, बस यूँ समझिए कि ज़िन्दगी के नाटक का अहम किरदार हूँ मैं.... राजनीति, कला, इतिहास, संस्कृति, फ़िल्म, मनोविज्ञान से लेकर ज्ञान-विज्ञान की किसी भी परम्परा का विशेषज्ञ नहीं....

मसूद अज़हर पर गूँगी-बहरी हैं अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, क्योंकि वो खुलेआम Pak से दे रहा है धमकी

मसूद अज़हर एक तक़रीर में खुलेआम पुलवामा का नाम ले रहा है। वह पाकिस्तानी सैनिकों को धन्यवाद दे रहा है। वह फिदाइनों की तारीफ़ कर अन्य को फिदाईन बनने के लिए उकसा रहा है। यह सब पाकिस्तान की सरजमीं पर वहाँ के आर्मी की सरपरस्ती में हो रहा है।

Exclusive ट्रेन यात्रा: जब रेल मंत्री ने दिल खोलकर की बातें

कुछ मीडिया संस्थानों ने जितना इस विकास यात्रा को कवर नहीं किया था, उससे ज़्यादा ये साबित करने में लग गए कि ट्रेन अपनी पहली यात्रा में ही ख़राब हो गई। व्यक्तिगत रूप से ख़ार खाए कुछ तथाकथित पत्रकार बड़ी चालाकी से मवेशी हिट की घटना को छिपा गए।

वन्दे भारत एक्सप्रेस: ट्रेन-18 से ट्रेन-20 का सफर तय करते हुए बुलेट ट्रेन चलाना है!

"देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ ही हर क्षेत्र में रोजगार और देश के समुचित बुनियादी विकास को गति मिलेगी। हमारा लक्ष्य नॉर्थ ईस्ट सहित सम्पूर्ण भारत के विकास को गति देना है।"

Exclusive: ‘वन्दे भारत एक्सप्रेस’ में रेल मंत्री के साथ यात्रा की कहानी, Photo की जुबानी

मेक इन इण्डिया के तहत इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई में निर्मित बदलते भारत की तस्वीर पेश करती वन्दे भारत एक्सप्रेस में ऐसी कई खूबियाँ हैं जो ट्रेन यात्रा को सुगम, समयबद्ध और आरामदायक बनाते हुए दिल्ली से वाराणसी की यात्रा को महज़ 8 घंटे में समेट देती है।

अनशन, आंदोलन, सत्याग्रह के ख़िलाफ़ गाँधी जी का मौन व्रत!

गर आज गाँधी जी ज़िन्दा होते तो एक अनशन और करते... कि देश में कोई और अनशन न करे।

मेरे प्यारे PRIME MINISTER: खुले में शौच पर रोकथाम, स्वच्छता अभियान की मुहीम को आगे बढ़ाएगी यह फ़िल्म

ट्रेलर में एक तंज भी है, जब कन्हैया नोट को ध्यान से अपने दोस्तों को दिखाते हुए कहता है, "माँगने से कुछ नहीं होता, करने से होता है और वह सिर्फ़ एक ही आदमी कर सकता है- गाँधी जी।"

हिन्दुओं की जिस परिक्रमा को अकबर ने करवा दिया था बंद, योगी सरकार ने करवाई विधिवत शुरुआत

पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रयागराज पहुँचकर इन चारों पावन स्थानों के दर्शन मात्र से ही प्रयाग की परिक्रमा पूरी मानी जाती है।

वैरागी जीवन जीते हुए वीतरागी हो जाना है नागा संन्यासी होना

कई मुस्लिम, ईसाई और बाकी धर्मों के लोग भी स्वीकार किए गए हैं। इनमें वो लोग भी शामिल हैं जो पहले डॉक्टर और इंजीनियर रह चुके हैं।

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