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Anurag

Anurag is a Chief Sub Editor at OpIndia with over twenty one years of professional experience, including more than five years in journalism. He is known for deep dive, research driven reporting on national security, terrorism cases, judiciary and governance, backed by RTIs, court records and on-ground evidence. He also writes hard hitting op-eds that challenge distorted narratives. Beyond investigations, he explores history, fiction and visual storytelling. Email: [email protected]

छात्र प्रदर्शन के नाम पर चल रहा राजनैतिक एजेंडा: जानिए पंजाब यूनिवर्सिटी में बड़े गुटों ने की कैसे घुसपैठ, ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में...

जिन छात्रों से ऑपइंडिया ने बात की, वे चाहते थे कि चुनाव की तारीख घोषित हो जाएँ तो वे तुरंत कक्षाओं में लौटें और अपनी पढ़ाई फिर से शुरू करें। छात्र स्पष्टता चाहते थे, अव्यवस्था नहीं।

दिल्ली ब्लास्ट से जाँच के घेरे में फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी, जानिए कौन है इसका चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी

जवाद अहमद सिद्दीकी नाम का शख्स अपने दो भाइयों के साथ तिहाड़ जेल में था क्योंकि अल-फलाह इन्वेस्टमेंट लिमिटेड ने निवेशकों को ठगा था।

‘लोगों के जीवन की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है’: सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों और हाईवे से आवारा कुत्तों को हटाने के दिए निर्देश, जानें...

सुप्रीम कोर्ट ने 07 नवंबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, खेल परिसर, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और सरकारी इमारतों से सभी आवारा कुत्तों को हटाएँ।

राहुल गाँधी के ‘वोट चोरी’ प्रोपेगेंडा का निकला दम, जिन पोस्टल बैलट पर मचाया जोर उसका EC के डाटा से जानिए सच: हवा में...

राहुल गाँधी का कहना था कि पोस्टल बैलट काउंटिंग में कॉन्ग्रेस कुछ सीटों पर बीजेपी से आगे थी, लेकिन ईवीएम वोटिंग के बाद बीजेपी जीत गई।

OpIndia Exclusive: लाल आतंक के खिलाफ मोदी सरकार ने पुलिस सिस्टम पर खर्च किए ₹630 करोड़+, RTI ने साफ की पूरी तस्वीर

मोदी सरकार की रणनीति ने जमीन पर आक्रामक कार्रवाई को राज्यों की पुलिस व्यवस्था के व्यवस्थित आधुनिकीकरण के साथ जोड़ा है।

OpIndia Exclusive वामपंथी आतंक को खत्म करने की ओर बढ़ी मोदी सरकार, RTI के आँकड़े दे रहे गवाही: 2014 से हजारों का सरेंडर, 2025...

10 राज्यों में छत्तीसगढ़ पहले नंबर पर है जहाँ दो-तिहाई नक्सलियों का खात्मा किया गया या आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया गया।

21 साल की उम्र में परमवीर चक्र, बलिदान के बाद भी जिसकी दुश्मन करता है तारीफ: जानें अरुण खेत्रपाल की कहानी, जिसने आमने-सामने की...

मात्र 21 वर्ष की उम्र में अरुण खेत्रपाल अपने जलते हुए टैंक में अकेले खड़े रहे। बसंतर की लड़ाई में उनके साहस ने 1971 के युद्ध का रुख मोड़ दिया।

वैचारिक विरोधियों को ब्लॉक करता है वामपंथी प्रोपेगेंडा वाला विकिपीडिया, को-फाउंडर जिमी वेल्स ने खुद किया स्वीकार: पूर्वाग्रहों के आधार पर करता है काम

विकिपीडिया के रीडर्स को उसके फाउंडरों से भरोसेमंद और गैर-भरोसेमंद सोर्स को लेकर लेक्चर पाने की जरूरत नहीं है। अपनी गलती स्वीकारना जरूरी है।