उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही ‘खेत तालाब योजना’ पानी बचाने और सिंचाई में मदद करने वाली एक बड़ी योजना है। यह योजना 2017 में शुरू हुई थी। इसका मकसद है कि किसान अपने खेतों में छोटे-छोटे तालाब बनवाएँ, बारिश का पानी उसमें जमा करें और सूखे के दिनों में फसलों की सिंचाई के लिए उसका इस्तेमाल करें।
यह योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत चल रही है और भारत सरकार से भी पैसा मिलता है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर 50-50 फीसदी खर्च उठाते हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य है कि भूजल पर निर्भरता कम हो, सिंचाई ज्यादा भरोसेमंद बने और खेती मजबूत हो।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस योजना ने सूखे वाले इलाकों में बड़ा बदलाव लाया है। पहले यह योजना बुंदेलखंड के सात जिलों में शुरू हुई थी, अब पूरे राज्य के कई जिलों में फैल चुकी है। ऑपइंडिया ने आरटीआई के जरिए जो आधिकारिक आँकड़े हासिल किए हैं, वे बताते हैं कि इस योजना का दायरा लगातार बढ़ता गया है।
क्यों शुरू की गई खेत तालाब योजना?
दशकों से बुंदेलखंड के किसान सूखे, सूखे कुओं और फसल खराब होने की समस्या से जूझते थे। गर्मी आते ही हैंडपंप सूख जाते थे और खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहती थी। खेत तालाब योजना इसी समस्या का छोटा-मोटा, स्थानीय समाधान है। खेत में बने तालाब बारिश का पानी रोकते हैं, जिसे किसान जरूरत पड़ने पर फसल को पानी दे सकते हैं। लंबे समय में भूजल स्तर भी सुधरता है।
यूपी तक की एक रिपोर्ट में बुंदेलखंड के बदलाव को ‘खामोश बदलाव’ बताया गया है। खेतों में छोटे तालाब बनने से अब साल भर सिंचाई हो रही है। पानी की उपलब्धता बढ़ने से खेती सुधरी है और किसानों को मछली पालन से अतिरिक्त कमाई भी हो रही है।
खेत तालाब योजना कई चरणों में, बुंदेलखंड से हुई शुरुआत
उत्तर प्रदेश सरकार की वेबसाइट के अनुसार योजना की शुरुआत बुंदेलखंड के सात जिलों में हुई थी। पहले चरण में 12.20 करोड़ रुपए खर्च करके 2,000 तालाब बनाए गए। ये सात जिले थे झाँसी, जालौन, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा।
अगले चरण में योजना 73 जिलों तक फैली। इसके लिए 167 विकास खंडों को चुना गया, जहाँ पानी की जरूरत ज्यादा थी और भूजल की स्थिति चिंताजनक थी। इन 73 जिलों में 27.88 करोड़ रुपए खर्च करके 3,384 तालाब बनाए गए। इसके बाद राज्य और केंद्र सरकार ने लगातार पैसा दिया।
पूरे उत्तर प्रदेश में इस योजना के तहत अब तक 37,403 तालाब बन चुके हैं। एक तरफ जहाँ साल 2017-18 में 2,000 तालाब बने थे, तो 2022-23 में सबसे ज्यादा 6,306 तालाब बने।

आरटीआई से मिली अहम जानकारियाँ, बुंदेलखंड को मिला सबसे ज्यादा फायदा
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के मृदा संरक्षण विंग ने ऑपइंडिया के आरटीआई के जवाब में बताया कि योजना शुरू होने से अब तक 37,403 तालाब बनाए गए हैं। राज्य सरकार ने कुल 311.43 करोड़ रुपए अनुदान दिए हैं।
आँकड़ों से पता चलता है कि शुरुआती सात बुंदेलखंड जिले हर साल सबसे ज्यादा लाभ पाते रहे हैं। 2016-17 से 2024-25 तक के कुल अनुदान में इन जिलों पर लगातार फोकस रहा।
इस योजना के तहत झाँसी में सबसे ज्यादा 6,213 तालाब बने, बाँदा में 4,743, जालौन में 4,504, महोबा में 4,321, चित्रकूट में 4,228, हमीरपुर में 3,922 और ललितपुर में 3,200 तालाब बने।

यह निरंतरता दिखाती है कि बुंदेलखंड को सिर्फ शुरुआती प्रयोग नहीं समझा गया, बल्कि योजना के फैलने के बाद भी यहाँ सरकार की ओर से बड़ा सहयोग मिलता रहा।
जमीन पर लोगों की राय और योजना का मकसद
आँकड़ों से आगे बढ़कर लाभार्थियों की बात करें, तो लाभ पाने वाले लोगों की बातें योजना के उद्देश्य से बिल्कुल मेल खाती हैं। बाँदा के लुकतरा गाँव में लोगों ने बताया कि अब रोजमर्रा के पानी और पशुओं के लिए पानी उपलब्ध है, खेती बारिश पर निर्भर नहीं रह गई है। झाँसी के एक किसान ने कहा, “हम अब बारिश पर निर्भर नहीं रहते।”
यूपी तक से बात करते हुए झाँसी के एक सरकारी कृषि अधिकारी ने योजना की कार्यप्रणाली के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अनुदान सीधे डीबीटी से किसानों के खाते में जाता है। झाँसी में छह हजार से ज्यादा तालाब बन चुके हैं। आरटीआई के आँकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। अधिकारी ने कहा कि योजना से स्थानीय भूजल स्तर में काफी सुधार हुआ है।
बुंदेलखंड के बाहर भी योजना का विस्तार
बुंदेलखंड के बाद योजना कई अन्य जिलों में फैली। इनमें मेरठ, गाजियाबाद, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत, गौतम बुद्ध नगर, अलीगढ़, हाथरस, कासगंज, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, मैनपुरी, इटावा, औरैया, बरेली, बिजनौर, बदायूँ, पीलीभीत, रामपुर, मुरादाबाद, संभल, अयोध्या, अंबेडकर नगर, गोंडा आदि शामिल हैं।
योजना का यह विस्तार दिखाता है कि राज्य सरकार ने पहले बुंदेलखंड पर फोकस किया और फिर पूरे उत्तर प्रदेश के पानी की समस्या वाले इलाकों तक पहुँचाया।
खेत तालाब योजना के लिए यूपी-केंद्र सरकार ने दिया फंड
खेत तालाब योजना के लिए पैसा चरणबद्ध तरीके से बढ़ता गया। 2016-17 में ₹12.20 करोड़, 2017-18 में ₹24.50 करोड़, 2018-19 में ₹43.22 करोड़ दिए गए। बाद के सालों में भी खर्च बड़ा रहा। 2022-23 में सबसे ज्यादा ₹63.51 करोड़, फिर 2023-24 में ₹35.81 करोड़ और 2024-25 में ₹10.77 करोड़। कुल मिलाकर अब तक 311.43 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।

तालाबों के साइज के आधार पर सरकार देती है पैसा
मान लीजिए कि इस योजना में दो साइज के तालाब हैं, दोनों की गहराई 3 मीटर है। छोटा तालाब 22x20x3 मीटर का होता है, जिसकी अनुमानित लागत 1,05,000 रुपए है। मध्यम तालाब 35x30x3 मीटर का होता है, लागत 2,28,400 रुपए है।
इसके लिए किसानों को 50 फीसदी अनुदान मिलता है, जो डीबीटी से सीधे खाते में जाता है। आमतौर पर काम की प्रगति और पूरा होने पर किस्तों में पैसा मिलता है। इससे छोटे-सीमांत किसानों के लिए निर्माण आसान हो जाता है और वे खुद भी योगदान देते हैं।
खेत तालाब योजना के लिए पात्रता, किसे मिलती है प्राथमिकता और योजना की शर्तें क्या हैं
खेत तालाब योजना में अनुसूचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यक और छोटे-सीमांत किसानों को प्राथमिकता है, लेकिन आरटीआई जवाब में राज्य कृषि विभाग ने कहा कि इस तरह का अलग डेटा रखा नहीं जाता। किसान को आवेदन करना पड़ता है, जिला स्तर से मंजूरी मिलती है। एक किसान को सिर्फ एक तालाब के लिए ही मदद मिल सकती है।
इस योजना के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी है और रजिस्ट्रेशन में खेत तालाब विकल्प चुनना पड़ता है।
एक बड़ी शर्त यह है कि लाभार्थी के पास पिछले सात साल में कृषि या उद्यान विभाग से लगा हुआ और अभी चल रहा माइक्रो सिंचाई सिस्टम (ड्रिप या स्प्रिंकलर) होना चाहिए।
कैसे आवेदन करें, कहाँ करें और जरूरी कागजात क्या चाहिए
खेत तालाब योजना के लिए आवेदन उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के पोर्टल agridarshan.up.gov.in पर ऑनलाइन करना होता है।
आवेदक अपनी और जमीन की जानकारी भरते हैं, जरूरी दस्तावेज अपलोड करते हैं और आवेदन के समय टोकन राशि जमा करते हैं। चयन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होता है। इसकी पात्रता का सत्यापन होता है और फिर आगे का प्रोसेस होता है।
जरूरी दस्तावेजों में आमतौर पर आधार कार्ड, बैंक विवरण, खसरा-खतौनी जैसे जमीन के कागजात, हाल की फोटो, घोषणा-पत्र और माइक्रो सिंचाई से जुड़े दस्तावेज (तीन पक्षीय समझौता जहाँ लागू हो) शामिल होते हैं।
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने खेत तालाब योजना से लंबे समय का समाधान चुना है, न कि सिर्फ तत्काल राहत के लिए। इस योजना में बारिश का पानी जमा करना और स्थानीय स्तर पर सिंचाई को जोड़ा गया है। डीबीटी से अनुदान सीधे किसानों तक पहुँचता है। इन सबके साथ योजना ने जमीन पर ठोस नतीजे दिए हैं, खासकर सूखे से जूझते बुंदेलखंड में।
मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।


