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जिस मामले में 26 साल से फरार हैं लालू प्रसाद यादव, उस केस में कोर्ट ने जारी किया गैर जमानती वारंट: बिहार के पूर्व CM पर है अवैध हथियार खरीदने का आरोप

लालू प्रसाद यादव के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ है। ये मामला दो दशक से भी ज्यादा पुराना है, जिसमें लालू यादव के नाम पर हथियार लिए गए और उन हथियारों को अलग-अलग जगहों पर सप्लाई किया गया। उनके खिलाफ मध्य प्रदेश के ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने ये वारंट जारी किया है। इस मामले 23 आरोपितों पर केस दर्ज किया गया था। लालू यादव के पेश न होने के कारण अदालत ने ऐक्शन लेते हुए उनके खिलाफ स्थाई गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये फर्जीवाड़ा 23 अगस्त 1995 से लेकर 15 मई 1997 के बीच किया गया था। कुल तीन फर्म से हथियार और कारतूस की खरीद की गई थी। इस मामले में लालू प्रसाद यादव सहित 23 आरोपित नामजद हैं। इसमें से 6 के खिलाफ ट्रायल चल रहा है, जबकि दो की मौत हो चुकी है। बाकी आरोपित फरार हैं। ग्वालियर की अदालत ने लालू प्रसाद यादव को इस मामले में 1998 में फरार घोषित किया था।

यूपी की फर्म के संचालक राजकुमार शर्मा पर आरोप है कि उसने ग्वालियर की हथियारों की तीन कंपनियों से फर्जीवाड़ा कर 1995 से 1997 के बीच हथियार और कारतूस खरीदे थे। शर्मा ने हथियार और कारतूस बिहार में बेच दिए थे। जिन लोगों को यह हथियार बेचे गए, उनमें लालू प्रसाद यादव का नाम भी है।

जानकारी के मुताबिक, इस मामले में लालू प्रसाद यादव आरोपित हैं तो, लेकिन वो राजद के नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ही हैं या कोई और, इसे लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। अदालत के रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि नहीं हो रही थी। दस्तावेजों के अनुसार आरोपी लालू प्रसाद के पिता का नाम कुंद्रिका सिंह है। वहीं, राजद नेता लालू प्रसाद के पिता का नाम कुंदन राय है। लालू प्रसाद के पिता का नाम सिर्फ फरारी पंचनामे में लिखा है। पुलिस ने कोर्ट में जो चालान और फरार आरोपितों की सूची पेश की है, उनमें पिता का नाम नहीं लिखा था। शेष आरोपितों के पिता के नाम के साथ शहर तक का उल्लेख था। हालाँकि, पूर्व सांसद और विधायक लालू प्रसाद यादव का जिक्र होने से यह केस एमपी-एमएलए कोर्ट में गया है। 

अब पुलिस का दावा है कि आरोपी लालू प्रसाद यादव कोई और नहीं बल्कि राजद नेता ही हैं। इसी आधार पर उन्हें आरोपित बनाया और गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। पुलिस ने अपने अनुसंधान के बाद ही लालू प्रसाद यादव को आरोपी बनाया है। यह केस अन्य कोर्ट से एमपी-एमएलए कोर्ट को ट्रांसफर हुआ था। अब स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी कर लालू प्रसाद यादव को कोर्ट ने तलब किया है।

अब माता-पिता को बताना होगा अपना धर्म तभी होगा बच्चे के जन्म का रजिस्ट्रेशन, मोदी सरकार ने बर्थ सर्टिफिकेट का बदला नियम

अब बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में माता पिता के नाम के साथ ही दोनों के धर्म के बारे में भी जानकारी देना पड़ेगा। केंद्र सरकार ने माता और पिता दोनों के लिए धर्म की जानकारी देना अनिवार्य बना दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए मॉडल नियमों के अनुसार, अब बच्चे के पिता और माँ दोनों को बच्चे के जन्म का पंजीकरण कराते समय अपना धर्म अलग-अलग दर्ज करना होगा। पहले जन्म रजिस्टर में केवल परिवार का धर्म दर्ज किया जाता था।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित “फॉर्म नंबर 1-जन्म रिपोर्ट” में बच्चे के “धर्म के लिए” टिक मार्क चयन की आवश्यकता वाले कॉलम का विस्तार किया जाएगा, जिसमें अब “पिता का धर्म” और “माँ का धर्म” भी बताया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए नियमों के अनुसार, अब बच्चे के जन्म का पंजीकरण करते समय बच्चे के पिता और माँ दोनों के धर्म की जानकारी देनी आवश्यक हो जाएगी। इन नियमों को राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित किया जाना बाकी है। ये नियम बच्चे को गोद लेने के मामले में भी लागू होगा, जिसमें बच्चे को गोद लेने वाले माता-पिता दोनों के धर्म का उल्लेख करना जरूरी होगा।

बता दें कि 11 अगस्त 2023 को संसद में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियस पास किया था। जिसमें कहा गया कि जन्म और मृत्यु से जुड़े डाटाबेस को राष्ट्रीय स्तर पर बनाया जाएगा। इसका इस्तेमाल राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने में किया जा सकता है। इसके साथ ही इसका इस्तेमाल मतदाता सूची तैयार करने में, आधार, राशन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, संपत्ति पंजीकरण व अन्य जरूरी कामों में होगा।

बता दें कि डिजिटल जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र पंजीकरण कानून, जो पिछले साल 1 अक्टूबर से प्रभावी हो चुकी है। उसके मुताबिक, सभी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र नागरिक पंजीकरण प्रणाली की वेबसाइट (crsorgi.gov.in) के माध्यम से जारी किए जाएँगे। वहीं, डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल स्कूलों में प्रवेश से लेकर अन्य सेवाओं में भी किया जा सकेगा।

घोषणा पत्र भारत की जनता के लिए, फोटो न्यूयॉर्क और थाइलैंड का: कॉन्ग्रेस को ‘न्याय पत्र’ पर BJP ने घेरा, पूछा- किस विदेशी एजेंसी को दिया था काम

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार (5 अप्रैल 2024) को पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया। पार्टी ने इसे न्याय पत्र का नाम दिया। अब इस घोषणा पत्र को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी निशाने पर आ गई है। भाजपा ने कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि उसकी गंभीरता का अंदाजा इसी लगाया जा सकता है कि उसमें तस्वीरें न्यूयॉर्क और थाईलैंड की लगाई गई हैं।

भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “हाल ही में सोशल मीडिया चेयरपर्सन ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनका सोशल मीडिया अकाउंट कौन सँभाल रहा है। कम-से-कम पार्टी को तो पता होना चाहिए कि उनका घोषणा पत्र कौन बना रहा है।” घोषणा पत्र के पर्यावरण सेक्शन में इस्तेमाल की गई तस्वीर दिखाते हुए त्रिवेदी ने कहा कि यह तस्वीर राहुल गाँधी के पसंदीदा स्थान थाईलैंड की है।

उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खड़गे जी ने कहा कि जब कॉन्ग्रेस सत्ता में आई तो भारत में एक सुई भी नहीं बनती थी। यह बिल्कुल झूठ है। सीवी रमन को 1930 में नोबेल पुरस्कार मिला। भारतीय विज्ञान संस्थान (बेंगलुरु) की स्थापना 1909 में हुई थी, लेकिन वे यह मानते रहेंगे कि सब कुछ नेहरू के बाद हुआ।”

विदेश के फोटो का इस्तेमाल करने को लेकर त्रिवेदी ने कहा, “यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है कि गलत तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन चिंता की बात यह है कि ये तस्वीरें विदेशी संस्थाओं की हैं। अब तक वे विदेश जाकर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करते रहे हैं, लेकिन अब वे अपने घोषणा पत्र के लिए विदेशी तस्वीरें उधार ले रहे हैं।”

भाजपा नेता ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने शासनकाल के दौरान केंद्र या राज्य में जारी अपने घोषणा पत्र के किसी भी वादे को पूरा नहीं किया। वहीं, इस घोषणा पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने पूछा कि क्या घोषणापत्र का मसौदा तैयार करने के लिए किसी विदेशी एजेंसी को काम पर रखा गया था।

सरमा ने कहा, “कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र में एक निर्वाचित राज्य सरकार को हटाने, तीन तलाक को बहाल करने, OPS पर यू-टर्न लेने का वादा किया गया है। इसके किसी भी वादे पर कोई डिलीवरी की तारीख नहीं है। उद्योग 4.0 के लाभों का दोहन करने की योजना का अभाव है और सबसे बुरी बात यह है कि थाईलैंड और अमेरिका की तस्वीरें भारत की तरह सामने आती हैं।”

हिंदुओं को जाति-आरक्षण के नाम पर बाँटो, मुस्लिमों को निकाह से हिजाब तक फ्री हैंड: ‘न्याय पत्र’ में लिपटकर आया कॉन्ग्रेस का ‘शरिया’, आपने पढ़ा क्या

कॉन्ग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कुख्यात है। इसका परिणाम ये हुआ है कि पार्टी लगभग 52 सीटों पर सिमट गई, लेकिन तुष्टिकरण छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। कॉन्ग्रेस ने शुक्रवार (5 अप्रैल 2024) को लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना घोषणा पत्र जारी किया, जिसे न्याय पत्र नाम दिया है। इस न्याय पत्र में कॉन्ग्रेस समाज को तोड़ने वाले कई वादे किए हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि कॉन्ग्रेस ने हाल ही में मोदी सरकार द्वारा बनाए गए तीन कानून को रद्द करने, मुस्लिमों को पर्सनल लॉ को बनाए रखने और धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर कई तरह की छूट देने का संकेत अपनी घोषणा पत्र में दिया है। इसके अलावा, स्कूल-कॉलेजों में बुर्का-हिजाब को पहनने की अनुमति, भाषा और खानपान की स्वतंत्रता की बात कही है।

ऐसी स्थिति गोहत्या, लव जिहाद और लैंड जिहाद जैसे सामाजिक तानाबाना को तोड़ने वाले कार्यों को बढ़ावा मिल सकता है। यहाँ तक हेट स्पीच के नाम हिंदुओं की स्वतंत्रता की दमन, मुस्लिम जजों की नियुक्ति करके न्यायपालिका को धार्मिक आधार पर बाँटने की कोशिश और जाति जनगणना कराकर हिंदुओं को बाँटने का संकेत दिया गया है।

कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में अल्पसंख्यकों को लिए 9 प्वॉइंट जारी किया है। इसके पहले प्वॉइंट में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 15, 16, 25, 28, 29 और 30 के तहत अल्पसंख्यकों को मिलने वाले मौलिक अधिकारों का आदर करेगी और उन्हें बरकरार रखेगी। अगले प्वॉइंट में पार्टी ने कहा है कि अनुच्छेद 15, 16, 29 और 30 के तहत भाषा की दृष्टि से अल्पसंख्यकों को मिलने वाले मौलिक अधिकारों का आदर करेगी और उन्हें बरकरार रखेगी।

संविधान का अनुच्छेद 15 का नियम 2 कहता है कि किसी भी भारतीय नागरिक को जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान और वंश के आधार पर दुकानों, होटलों, सार्वजानिक भोजनालयों, सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों, कुओं, स्नान घाटों, तालाबों, सड़कों और पब्लिक रिजॉर्ट्स में जाने से नहीं रोका जा सकता। यानी कई मामलों में इससे हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच टकराव बढ़ेगा।

भाजपा सरकार द्वारा बंद किए गए मौलाना आजाद छात्रवृत्ति को फिर लागू करने और उसकी संख्या बढ़ाने की बात कही है। मुस्लिमों को ऋण देने के लिए भी कॉन्ग्रेस ने आसान नीति बनाने की बात कही है। इसके साथ ही पार्टी ने अल्पसंख्यकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी नौकरी, लोक निर्माण अनुबंध, कौशल विकास, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में उचित अवसर देने की बात कही है।

मुस्लिमों को लेकर कॉन्ग्रेस ने जो भी घोषणा की है, उनमें से अधिकांश की माँग ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) करता रहा है। AIMPLB मुस्लिमों के कानून में किसी भी तरह के संशोधन या हस्तक्षेप का विरोध करता है। इस संस्था का कहना है कि मुस्लिमों के कानून शरिया यानी इस्लामी कानून एवं कुरान द्वारा संचालित हैं, इसलिए उसे बदला नहीं जा सकता।

कॉन्ग्रेस ने चुनाव आयोग और मानवाधिकार आयोग की तर्ज पर ST/SC और OBC आयोग के साथ-साथ अल्पसंख्यक आयोग को भी स्वायत्तता देने की बात कही है। कॉन्ग्रेस ने नफरत भरे भाषणों, घृणा अपराधों और सांप्रदायिक विवादों को सख्ती से खत्म करने की बात कही है। ऐसे अपराधियों और उनके प्रायोजकों की पहचान कर उन्हें दंडित करने की बात कही है।

कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में उन तमामों मुद्दों को सांकेतिक रूप से जगह दी है, जिसके जरिए तुष्टिकरण के लिए वह कुख्यात रही है। पार्टी ने सांप्रदायिक विवादों और हेट स्पीच को लेकर इसे और इसके प्रायोजकों की पहचान करने के नाम पर हिंदुओं और हिंदू संगठनों पर कार्रवाई का संकेत दिया है। बता दें कि कॉन्ग्रेस UPA-II के दौरान एक कानून का मसौदा तैयार किया था, जिसमें दंगों के लिए बहुसंख्यतक समुदायो को जिम्मेदार ठहराया गया था।

कॉन्ग्रेस की तुष्टिकरण की सीमा कुछ ऐसी थी कि तत्कालीन सरकार में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को यहाँ तक कहना था कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुस्लिमों का है। यह बयान कुछ ऐसा था, जो भारत के विभाजन से पहले मुहम्मद अली जिन्ना की मुस्लिम लीग ने कहा था। मुस्लिम लीग कहती थी कि अंग्रेजों ने सत्ता मुस्लिमों से लिया है, इसलिए इसका हस्तांतरण भी मुस्लिमों को होना चाहिए।

हैदराबाद की ‘हिंदू शेरनी’ ने भरी हुंकार, कहा- BJP ने धर्म की रक्षा का दिया मौका, ओवैसी को नहीं मानती हूँ चुनौती… वे संसद से बाहर जाएँगे और मैं अंदर

तेलंगाना के हैदराबाद से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा/BJP) की प्रत्याशी माधवी लता इस समय खूब चर्चा में हैं। भाजपा ने उन्हें जब से ओवैसी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारा है तब से हैदराबाद की सड़कों पर उनके पोस्टर दिख रहे हैं जिसमें उन्हें ‘कट्टर हिंदू शेरनी’ कहा जा रहा है। माधवी ने अपने नाम का ऐलान होने के बाद से अपना चुनावी प्रचार शुरू किया हुआ है। बीच-बीच में वो मीडिया से भी रूबरू हो रही हैं। इस बार उन्होंने दैनिक भास्कर से बात की है।

अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि हैदराबाद में वो ओवैसी को चुनौती ही नहीं मानती हैं। वो कहती हैं अगर हिंदू भाई-बहन एक हो गए तो ‘असद भाई’ के लिए बहुत मुश्किल हो जाएगी। उन्होंने बताया कि वो 18 साल से लोगों की सेवा में लगी हुई हैं जब हैदराबाद से बीजेपी ने उनके नाम का ऐलान किया तो उन्हें लगा कि उनके धर्म ने उन्हें मौका दिया कि वो उसकी रक्षा करें। उन्होंने बताया कि वो हैदराबाद के पसमांदा मुस्लिम महिलाओं के लिए सालों से काम कर रही हैं, मदरसों में बच्चों को खाना खिलाती हैं, इन सबका मतलब ये नहीं कि वो पूजा पाठ करना या मंदिर जाना छोड़ देंगी, ये उनके निजी मामले हैं।

उन्होंने बताया, “अगर मुस्लिम मुझे वोट नहीं देंगे तो वो हम जबरदस्ती नहीं कर सकते…हम अकबरुद्दीन और असदुद्दीन ओवैसी जैसे लोग नहीं, जो चुटकी बजाकर हवा में कह दें कि 15 मिनट में आपका काम करा देंगे। हम जमीन पर उतरकर काम करने में भरोसा रखते हैं।” उन्होंने दावा किया कि में BJP का ऐसा रिजल्ट आने वाला है कि AIMIM और कॉन्ग्रेस दोनों चौंक जाएँगे। इनकी जुबान बंद हो जाएगी और भाजपा इतिहास रचेगी। उन्होंने कहा कि हैदराबाद के अलावा बची 16 सीटों में से BJP को इस बार 13 से 14 सीटें मिलेंगी। उन्होंने राज्य में बीआरएस की हालत की तुलना खराब गाड़ी से की।

उन्होंने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि 40 साल तक ओवैसी परिवार ने हैदराबाद में कोई विकास नहीं किया। पुराने शहर की गरीब जनता के पास कचरे वाले को देने के लिए महीने के 100 रुपए तक नहीं होते। घर में 4-5 दिन का राशन नहीं होता। ओवैसी अपने भाषणों में सिर्फ हैदराबाद के चार मीनार का जिक्र करते हैं लेकिन क्षेत्र में बने हजारों साल पुराने भव्य मंदिर का कभी नहीं करते। वो कहती हैं कि क्या एक सांसद के तौर पर उन्हें सबको एक साथ लेकर नहीं चलना चाहिए।

उन्होंने इस इंटरव्यू में फ्री इलाज के दावों पर पूछा कि हैदराबाद में 21 लाख वोटर्स हैं, उनके परिवार में 1 करोड़ से ज्यादा लोग कहते हैं। ओवैसी को बताना चाहिए कि क्या वो इन 1 करोड़ लोगों को फ्री इलाज दे रहे हैं? लता ने दावा किया कि ओवैसी के अस्पताल में कोई गरीब नहीं जाता है। उन्होंने कहा कि ओवैसी को सबसे मिलने का समय है लेकिन उनके पास आम जनता से मिलने का समय नहीं हैं। हालाँकि, अब लगता है कि उनसे मुलाकात जल्द होगी जब वो संसद से बाहर जाएँगे और हम अंदर।

इससे पहले पिछले इंटरव्यू में माधवी लता ने दावा किया था कि हैदराबाद में ओवैसी बाहरी मुस्लिमों को बसा रहे हैं और उनको दो कमरों का फ्लैट भी दिया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने यह जानकारी भी दी थी कि उनके लिए हैदराबाद में चुनाव प्रचार करना बहुत मुश्किल काम है क्योंकि वहाँ पत्थर तक मारे जाते हैं, लेकिन फिर भी वो इस जगह से अपना शत-प्रतिशत देने को तैयार हैं और कोशिशों में लगी हैं

उल्लेखनीय है कि माधवी लता ने हैदराबाद से ही शिक्षा ली है और सोशल वर्क वो पिछले 20 साल से कर रही हैं। माधवी लता के पति का नाम विश्वनाथ है। वो एमिरेट्स विरिंची नाम की कम्पनी के संस्थापक हैं। माधवी तेलंगाना टुडे को बताती हैं कि उन्होंने कई अनाथालयों को दान दिए हैं। माधवी लता प्रोफेशनल भरतनाट्यम नृत्यांगना हैं। वो अब तक 100 से ज्यादा स्टेज प्रस्तुति दे चुकी हैं। माधवी अपने छात्रा जीवन में NCC कैडेट भी रह चुकी हैं। डॉक्टर माधवी लता को तेलंगाना में हिंदुत्व का मुखर चेहरा माना जाता है। कोटी महिला कॉलेज से राजनीति शास्त्र में MA करने के बाद वह मूलतः शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक कार्यों में काफी सक्रिय रही हैं। इन कार्यों को वो ट्रस्ट और संस्थाओं के माध्यम से करती हैं। हैदराबाद से भाजपा की पहली महिला प्रत्याशी माधवी के हिन्दू धर्म को लेकर दिए जाने वाले भाषण अक्सर वायरल होते हैं।

दिल्ली की मंत्री आतिशी से चुनाव आयोग ने माँगा जवाब, AAP नेता ने कहा था- बीजेपी में शामिल नहीं होने पर गिरफ्तारी की दी गई है धमकी

चुनाव आयोग ने दिल्ली सरकार में मंत्री और AAP नेता आतिशी को नोटिस भेजा है। यह नोटिस उनके भाजपा में शामिल होने को लेकर मिले ऑफर के दावे पर भेजा गया है। इस मामले में भाजपा ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। आयोग ने आतिशी को 8 अप्रैल, 2024 तक का समय जवाब देने के लिए दिया है।

चुनाव आयोग ने आतिशी को भेजे गए नोटिस में कहा कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से 4 अप्रैल, 2024 को उसे एक शिकायत मिली है। यह शिकायत आतिशी के 2 अप्रैल, 2024 को दिए गए बयान पर की गई है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उनके एक करीबी के जरिए उन्हें भाजपा में शामिल होने का ऑफर दिया गया। भाजपा में शामिल नहीं होने पर गिरफ्तारी की बात कही गई।

आयोग ने कहा, ”आप दिल्ली सरकार में मंत्री और एक राष्ट्रीय पार्टी की नेता हैं। देश के मतदाता उनके नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंच से कही गई बातों पर विश्वास करते हैं और उनके बयान चुनाव प्रचार अभियान को प्रभावित करते हैं।”

आयोग ने कहा वह इस बात की आशा करता है कि उनके पास भाजपा में शामिल होने को लेकर दिए गए बयान का कोई तथ्यात्मक आधार होगा और विवाद की स्थिति में वह इसे पेश कर सकती हैं। आयोग ने कहा कि वह इस मामले की आचार संहिता नियमों के तहत जाँच कर रहा है।

आतिशी को चुनाव आयोग ने भेजा नोटिस
चुनाव आयोग द्वारा आतिशी को भेजा गया नोटिस

चुनाव आयोग ने 8 अप्रैल, 2024 दोपहर 12 बजे तक इस मामले में भेजे गए नोटिस का जवाब आतिशी से माँगा है। आतिशी के इस बयान को लेकर दिल्ली भाजपा ने भी उन्हें कानूनी नोटिस भेजा था। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने इस मामले में कहा था, ”हमने दिल्ली की मंत्री और आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी मार्लेना को कानूनी नोटिस भेजा है कि वो अपनी कही बात के सबूत दें। हम उन्हें छोड़ेंगे नहीं। इस बार उन्हें जवाब देना ही होगा।”

उन्होंने कहा था कि आतिशी ने अपने बयान के साथ कोई ठोस या सही जानकारी नहीं दी है। उन्होंने आतिशी और आम आदमी पार्टी के लगातार आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि आतिशी या उनकी पार्टी जब भी राजनीतिक हालत में गिरकर जवाबदेह होते हैं तो हमेशा विधायक तोड़ने या नेताओं की गिरफ्तारी की कहानी सुनाते हैं।

2 अप्रैल, 2024 को आतिशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भाजपा के एक नेता ने उनके करीबी से संपर्क साधा है। उनको बोला है की आतिशी को अपना करियर बचा के रखना है तो वह जल्द भाजपा में शामिल हो जाए, अन्यथा उसे भी गिरफ्तार किया जाएगा। उन्हें मालूम हुआ कि भाजपा आम आदमी पार्टी को कुचलना चाहती है।

उन्होंने दावा किया था कि इस कड़ी में उनके साथ-साथ सौरव भारद्वाज, राघव चड्ढा और दुर्गेश पाठक को जल्दी ही गिरफ्तार किया जाएगा। उनके घरों पर भी रेड की जाएगी और फिर समन भेज कर तलब किया जाएगा। उस दौरान उन्हें गिरफ्तार करने की योजना है।

आतिशी ने यह बयान ED द्वारा कोर्ट में शराब घोटाले में उनका नाम लिए जाने के बाद दिया था। गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के 21 मार्च, 2024 को शराब घोटाले में गिरफ्तार होने के बाद लगातार AAP नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। अरविन्द केजरीवाल को कोर्ट ने 15 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

कहीं 3 बार बदले कैंडिडेट, कहीं 2 को दे दिया सिंबल: क्यों बार-बार ‘साइकिल’ की हवा निकाल रहे अखिलेश यादव, क्या नतीजों से पहले ही मान ली है हार

लोकसभा चुनाव 2024 में टिकटों का बँटवारा अखिलेश यादव के लिए सिरदर्द बन चुका है। एक नहीं, दो नहीं बल्कि कई सीटों पर सपा ने प्रत्याशी बदले हैं। कुछ सीटों पर तो 3-3 बार। ये अखिलेश यादव का कन्फ्यूजन है या बात कुछ और है, किसी को समझ नहीं आ रहा है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता तक परेशान हैं कि वो आखिर किस प्रत्याशी के लिए प्रचार करें? ये परेशानी सिर्फ एक जगह नहीं दिखी, बल्कि कई लोकसभा सीटों पर अखिलेश यादव ऐसी परेशानी में फंसते दिखे।

इंडी गठबंधन का हिस्सा समाजवादी पार्टी यूपी में 63 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी, लेकिन उसने एक सीट पहले ही सरेंडर कर दी। सपा ने भदोही लोकसभा सीट टीएमसी को दे दिया और बाकी की 62 सीटों को अपने पास रखा। वैसे, इंडी गठबंधन में एक तरफ तो कॉन्ग्रेस को ढंग के प्रत्याशी ही नहीं मिल रहे, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी इतने प्रत्याशी बदल चुकी है कि उसके कार्यकर्ता परेशान हो गए हैं। ये परेशानी यूपी ही नहीं, मध्य प्रदेश की खजुराहो सीट पर दिखी, जब इंडी गठबंधन के बैनर तले मिली इकलौती सीट पर भी उसे दो बार प्रत्याशी घोषित करने पड़े। आइए, उन सीटों पर नजर डालते हैं, जिनपर सपा ने प्रत्याशी बदल दिए।

मेरठ लोकसभा सीट

अखिलेश यादव ने यूपी की जिन सीटों पर कई बार उम्मीदवारों को बदला, उसमें सबसे ताजा और चर्चित मामला मेरठ का है, जहाँ समाजवादी पार्टी ने तीन-तीन बार प्रत्याशी बदल दिए। मेरठ में पहले सपा ने भानु प्रताप को टिकट दिया। उनका टिकट काट कर सरधना के विधायक अतुल प्रधान को टिकट दे दिया और फिर नामांकन के आखिरी दिन एक बार फिर से सपा ने मेरठ का उम्मीदवार बदला और नामांकन करा चुके अतुल प्रधान की जगह सुनीता वर्मा को टिकट दे दिया।

गौतम बुद्ध नगर

समाजवादी पार्टी के लिए गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) लोकसभा सीट पर काफी मुश्किल वाली दिख रही है। यहाँ भी पार्टी तीन-तीन बार प्रत्याशी बदल चुकी है। समाजवादी पार्टी ने पहले यहाँ से महेंद्र नागर को अपना उम्मीदवार बनाया। लेकिन स्थानीय विरोध को देखते सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यहाँ से युवा राहुल अवाना को टिकट दे दिया। इसके बाद फिर दबाव बढ़ा, तो वापस महेंद्र नागर को ही अपना उम्मीदवार बना लिया।

मिश्रिख लोकसभा सीट

सपा और अखिलेश यादव किस तरह से प्रत्याशियों के नामों का फैसला कर रहे हैं, इसे इस तरह से समझा जा सकता है कि कोई भी, किसी के भी नाम पर टिकट ले आता है। दरअसल, मिश्रिख लोकसभा सीट पर अखिलेश यादव ने पहले तो रामपाल राजवंशी को टिकट दिया था। लेकिन उन्होंने खुद को अस्वस्थ बताया तो अखिलेश यादव ने उनके बेटे मनोज राजवंशी को टिकट दे दिया। मनोज राजवंशी 2022 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। ऐसे में अखिलेश यादव ने फिर से प्रत्याशी बदल दिया, लेकिन इस बार मनोज राजवंशी की पत्नी संगीता राजवंशी को टिकट दे दिया। भले ही यहाँ अखिलेश यादव ने तीन बार प्रत्याशी के नाम की घोषणा की हो, लेकिन टिकट एक ही परिवार में गया। ऐसे में सपा कार्यकर्ता भी इस बात को लेकर परेशान हैं कि आखिर राजवंशी परिवार के साथ उनका ऐसा क्या लगाव है कि उस परिवार को छोड़कर पूरे लोकसभा में कोई प्रत्याशी ही नहीं मिल रहा।

बागपत

पश्चिमी यूपी की बागपत लोकसभा सीट पर भी समाजवादी पार्टी अपने प्रत्याशी को बदल चुकी है। समाजवादी पार्टी ने पहले यहाँ से मनोज चौधरी को टिकट दिया था, लेकिन उनका टिकट काटकर गाजियाबाद के रहने वाले और साहिबाबाद लोकसभा सीट से डेढ़ दशक पहले बीएसपी के टिकट पर विधायक रहे अमरपाल शर्मा को टिकट दे दिया है। अमरपाल शर्मा पिछला कई चुनाव हार चुके हैं।

मुरादाबाद

मुरादाबाद लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी की काफी फजीहत हो चुकी है। आजम खान के दबाव का असर कहें या कुछ और, आखिरकार रुचिवीरा को ही पार्टी ने अपना उम्मीदवार मान लिया है। यहाँ से मौजूदा सांसद एसटी हसन को टिकट दिया, फिर रुचिवीरा को सिंबल दिया, फिर एसटी हसन को टिकट दिया गया, फिर दोनों ने ही नामांकन कर दिया और अब रुचि वीरा के पक्ष में पार्टी ने एक पत्र लिखकर बताया है कि उम्मीदवार रुचि वीरा ही हैं। इस उठापटक के खेल में सपा कार्यकर्ताओं में भी मायूसी छाई रही।

बिजनौर

बिजनौर लोकसभा सीट पर भी समाजवादी पार्टी अपना उम्मीदवार बदल चुकी है। बिजनौर सीट पर पहले सपा ने यशवीर सिंह को टिकट दिया था, लेकिन 24 मार्च को उनका टिकट काट दिया गया और दीपक सैनी को उम्मीदवार बना दिया गया।

रामपुर

रामपुर लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी में गजब का खींचतान चला। यहाँ मानों अखिलेश यादव और आजम खान में मुख्य मुकाबला हो रहा है। अखिलेश यादव ने रामपुर से मुहिउबुल्लाह मदनी को उम्मीदवार बनाया है। इसके बदले में सपा की जिला इकाई ने चुनाव के ही बहिष्कार की घोषणा कर दी थी। आसिम रजा ने तो बाकायदा नामांकन भी दाखिल कर दिया था। हालाँकि उनका पर्चा खारिज हो गया है और बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव द्वारा तय प्रत्याशी मदनी ही पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार हैं।

बदायूँ

बदायूँ लोकसभी सीट को लेकर खबर है कि यहाँ से शिवपाल सिंह यादव चुनाव नहीं लड़ना चाहते, बल्कि वो अपने बेटे आदित्य यादव के लिए टिकट माँग रहे हैं। मीडिया से बातचीत में भी उन्होंने कहा था कि बदायूँ लोकसभा सीट युवा नेतृत्व माँग रही है। हालाँकि अभी तक बदायूँ से उम्मीदवार तो नहीं बदला गया है, लेकिन शिवपाल यादव के कद को देखते हुए उन्हें मना कर पाना अखिलेश यादव के लिए संभव नहीं दिखता। ऐसे में देर-सवेर यहाँ भी उम्मीदवार बदल सकता है।

खजुराहो

मध्य प्रदेश की 29 सीटों में से एक सीट पर समाजवादी पार्टी ने गठबंधन के तहत खजुराहो सीट से बीते दिनों मनोज यादव को चुनावी मैदान में उतारा था। दो दिन बाद मनोज यादव का टिकट काटकर समाजवादी पार्टी ने खजुराहो सीट से मीरा दीप नारायण यादव को चुनावी मैदान में उतार दिया। मीरा यादव उत्तर प्रदेश की झांसी जिले की गरौठा विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके दीप नारायण यादव की पत्नी है। अब मनोज यादव को एडजस्ट करने के लिए उन्हें मध्य प्रदेश में पार्टी का अध्यक्ष बना दिया गया है।

ये सारी सीटें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हैं और एक लोकसभा सीट मध्य प्रदेश की है। अभी दो ही चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हुई है। उत्तर प्रदेश में 7 चरणों में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कुछ रिपोर्ट्स ऐसी भी आ रही हैं, जिसमें अब अखिलेश यादव पूर्वी उत्तर प्रदेश की सीटों पर भी प्रत्याशियों को बदल सकते हैं। बहरहाल, अखिलेश यादव के उम्मीदवारों को बदलने के पीछे चाहे जो वजह हो, लेकिन इसका गलत मैसेज तो जनता में जा रहा है। वहीं, विपक्षी भी इस बार पर चुटकी लेने से नहीं चूक रहे हैं।

कुछ समय पहले तक अखिलेश यादव के साथी रहे लेकिन अब एनडीए में शामिल हो चुके चौधरी जयंत सिंह ने भी उम्मीदवारों के बदले जाने को लेकर तंज कसा है। जयंत सिंह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वो लोग किस्मत वाले हैं, जिन्हें कुछ घंटे के लिए टिकट मिलता है। उन्होंने पोस्ट किया, “विपक्ष में किस्मत वालों को ही कुछ घंटों के लिए लोकसभा प्रत्याशी का टिकट मिलता है! और जिनका टिकट नहीं कटा, उनका नसीब…”

‘पुजारी की बेटी से शादी कर शुद्धिकरण करो, 2% ब्राह्मणों को खदेड़ कर मारो’: रूद्र और राकेश कुशवाहा के Video वायरल; मुस्लिमों को बताते हैं ‘भाई’, राम मंदिर पर फैलाते हैं घृणा

सेकुलर होने के नाम पर कई नेताओं के हिंदू विरोधी बयान सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। इस बार बारी आई है खुद को दलितों का नेता कहने वाले रुद्र प्रताप कुशवाहा की। वायरल वीडियोज में कुशवाहा को खुले तौर पर देश के ब्राह्मणों को मारने की बातें कहते सुना जा सकता है।

वायरल वीडियो में कुशवाहा कहता है- “अब देश में हिंदू मुस्लिम नहीं, बैकवर्ड और फॉर्वर्ड दंगा करेगा तुम लोगों को भारत से भगाने के लिए। आगे कुशवाहा कहता है कि इन 2 फीसद ब्राह्मणों को देश से खदेड़ कर मारिए।

आगे वो कहता है- “न हिंदू खतरे में है, न मुसलमान खतरे में है, न गीता खतरे में न कुरान खतरे में है। अरे सही से अपनी आँखों से धर्म का चश्मा उतारकर देखो, इन 2 % ब्राह्मणों के कारण पूरा हिंदुस्तान खतरे में है।”

बता दें कि कुशवाहा की अन्य वीडियो भी सोशल मीडिया पर चल रही हैं। इन वीडियो में वो कहता है कि अगर देश चलाना है तो मुस्लिम को देश से भगाना जरूरी नहीं है, ब्राह्मणों को देश से भगाकर खत्म कर देना चाहिए।

आगे वो मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक कानून बनाने पर आपत्ति जताता है। वो पीएम मोदी को ‘मुसलमान की औलाद’ जैसे शब्द कहता है। इसके बाद वो भगवान की शक्तियों पर सवाल उठाता है। राम मंदिर के लिए घृणा दर्शाता है। धर्म को नीचा दिखाने के लिए कहता है कि धर्म के कारण बैकवर्ड क्लास पढ़ नहीं पाई ऐसे में वो इस धर्म को आग लगाने का काम करेंगे। कुशवाहा ने हिंदुओं के देवी-देवताओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ये जो ब्रह्मा, विष्णु, महेश हैं इन्हें सब सृष्टि का मालिक कहते हैं। अगर ये लोग सच में सृष्टि के मालिक हैं तो ये हिंदुस्तान में ही क्यों पैदा हुए, चीन, जापान में क्यों नहीं हुए।

बता दें कि रुद्र प्रताप कुशवाहा युवा विचार मंच संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष है। वो समय समय पर ब्राह्मणों के खिलाफ बयानबाजी करता रहता है। जो दलित ब्राह्मणों का समर्थन करता है उनके लिए रुद्र प्रताप कहता है कि वो लोग ब्राह्मणों की नाजायज औलाद हैं। उसके अनुसार इस देश में दलितों को मुस्लिमों को भाई मानना चाहिए क्योंकि सबसे बड़ा इतिहास मुगल वंश का है और ब्राह्मणों को मारकर भगा देना चाहिए। उसके मुताबिक जो इनका समर्थन करता है उनमें मर्दानगी नहीं है।

गौरतलब है कि रुद्र प्रताप के अलावा युवा विचार मंच संरक्षण राकेश कुशवाहा भी ऐसे आपत्तिजनक बयानों के लिए जाने जाते रहे हैं। राकेश कुशवाहा की एक वीडियो वायरल है जिसमें उन्हें कहते सुना गया था, “पंडित, ब्राह्मण और पुजारी की बेटी से शादी कीजिए। उसका शुद्धिकरण कीजिए। मैं कोर्ट केस का जितना खर्चा आएगा, सब दूँगा। मैं लड़ूँगा। किसी का बाप मुझपर केस नहीं करेगा।”

PM के रोड शो में स्कूल यूनिफॉर्म में दिखे बच्चे, तमिलनाडु पुलिस ने दर्ज कर दी FIR: मद्रास हाई कोर्ट ने लताड़ा, बोला- यह अपराध कैसे

मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। यह फटकार पीएम नरेन्द्र मोदी के रोड शो में यूनिफार्म पहने बच्चों के शामिल होने पर FIR दर्ज किए जाने को लेकर लगाई गई। मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस से पूछा कि आखिर सिर्फ इस बात को लेकर स्कूल के खिलाफ क्यों FIR दर्ज की गई कि इसमें पढ़ने वाले बच्चे रोड में शो में शामिल हुए थे।

इस मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी जयचन्द्रन ने कहा कि वह स्वयं बचपन में बड़े नेताओं या प्रसिद्ध शख्सियतों को देखने जाया करते थे। उन्होंने कहा कि FIR दर्ज करने से बच्चों के राजनीतिक रैलियों में भाग लेने पर काफी असर पड़ेगा।

कोर्ट ने कोयम्बटूर पुलिस से FIR दर्ज करने पर सफाई पेश करने को कहा। कोर्ट ने पुलिस से 8 मार्च, 2024 को यह जवाब देने को कहा है। कोर्ट ने अन्य कई महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ इस मामले में की। यह मामला 18 मार्च, 2024 को कोयम्बटूर में हुए पीएम मोदी के रोड शो से जुड़ा है।

इस रोड शो में 32 स्कूली बच्चे यूनिफार्म पहन कर पहुँचे थे। इन बच्चों को स्कूल द्वारा रोड शो में शामिल होने को लेकर बुलाया गया था। इस मामले में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने कहा था कि बच्चों का शमिल होना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।

इसके बाद कोयम्बटूर की बाल संरक्षण अधिकारी ने स्कूल के खिलाफ मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर किशोर न्याय कानून (जुवेनाइल जस्टिस) के तहत मामला दर्ज करवा दिया था। यह मामला स्कूल साईं बाबा विद्यालयम मिडल स्कूल की प्रधानाध्यापिका के विरुद्ध दर्ज करवाई गई थी।

बाल संरक्षण अधिकारी ने पुलिस को दी गई शिकायत में दावा किया था कि इन बच्चों को भीड़ में ले जाया गया, जिससे इन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना हुई। हालाँकि, इन 32 में से किसी भी बच्चे के परिजन ने ऐसी शिकायत नहीं की थी।

इसके बाद अपने खिलाफ दर्ज FIR को लेकर प्रधानाध्यापिका ने मद्रास हाई कोर्ट के समक्ष FIR रद्द किए जाने को लेकर याचिका लगाई थी। प्रधानाध्यापिका ने कहा था कि उनको और स्कूल को प्रताड़ित करने के लिए यह FIR उनके विरुद्ध दर्ज करवाई गई है।

उन्होंने कहा था कि जिन भी बच्चों को बुलाया गया था, उन्हें उनके घर छोड़ दिया गया था और उन्हें किसी की प्रकार की प्रताड़ना का सामना नहीं करना पड़ा। मद्रास हाई कोर्ट ने इसी याचिका की सुनवाई के दौरान तमिलनाडु पुलिस के FIR दर्ज करने को लेकर लताड़ लगाई और अगले आदेश तक कोई भी कार्रवाई करने पर रोक लगा दी।

‘दुश्मन भी जानते हैं नया भारत घर में घुसकर मारता है’: द गार्जियन की रिपोर्ट के बाद चुरू से गरजे PM मोदी, कहा- मेरा वचन है भारत माँ का शीश नहीं झुकने दूँगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2024 की घोषणा के साथ ही अपनी चुनावी रैलियों का ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि उसमें विपक्षी दल फँस कर रह गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुक्रवार (5 अप्रैल 2024) को राजस्थान के चुरू में कॉन्ग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये पहले वाला भारत नहीं है। ये नया भारत है, जो घर में घुसकर मारता है।

पीएम मोदी का जनसभा के बीच यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने गुरुवार (4 अप्रैल 2024) को पाकिस्तान में हत्याओं को लेकर एक विवादास्पद लेख छापा। गार्डियन ने ‘भारत सरकार ने पाकिस्तान में हत्याओं का आदेश दिया, खुफिया अधिकारियों का दावा है’ शीर्षक से यह लेख छापा है। अखबार ने अज्ञात स्रोतों, खासकर पाकिस्तानी खुफिया को आधार बनाकर पीएम मोदी को ‘अतिरिक्त-क्षेत्रीय हत्याओं’ के सूत्रधार के रूप में प्रदर्शित किया है।

जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 26 फरवरी 2019 को अपनी चुरू यात्रा को याद किया और कहा, “हमने आतंकवादियों को सबक सिखाया है।” दरअसल, 26 फरवरी 2019 वही दिन था, जब भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक करके आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया था। यह भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण दिन है।

पीएम मोदी ने कहा, “मैंने उस दिन चुरू की धरती पर जो शब्द कहे थे, मैं आज उन भावनाओं को वीरों की धरती पर दोहराना चाहता हूँ। मैंने यहाँ कहा था- ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूँगा… मैं देश नहीं रुकने दूँगा… मैं देश नहीं झुकने दूँगा। मेरा वचन है भारत माँ को, तेरा शीश नहीं झुकने दूँगा’।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आपको याद होगा, “जब हमारी सेना सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की, तब कॉन्ग्रेस और उसके साथी क्या भाषा बोल रहे थे? इसी घमंडिया गठबंधन के लोग हमारी सेना से शौर्य के सबूत माँग रहे थे। सेनाओं का अपमान… देश का विभाजन… ये कॉन्ग्रेस पार्टी की पहचान है। जब तक इंडी अलायंस के लोग सत्ता में रहे, इन्होंने हमारे जवानों के हाथ बाँध कर रखे। चुनौतियों को चुनौती देना हमारी ताकत है।”

उन्होंने कहा, “दुश्मन हमला करके चला जाता था, ये जवानों को जवाब देने की इजाजत नहीं देते थे। हमारे जवान ‘वन रैंक, वन पेंशन’ की माँग करते थे, कॉन्ग्रेस ने इसे भी पूरा नहीं होने दिया। हमारी सरकार बनी तो हमने सैनिकों को ‘वन रैंक, वन पेंशन’ का अधिकार भी दिया और सीमा पर पलटवार करने की खुली छूट भी दे दी। आज दुश्मन को भी पता है कि ये मोदी है… ये नया भारत है… ये नया भारत घर में घुसकर मारता है।”

कॉन्ग्रेस की तुष्टिकरण की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “देशहित से भी ज्यादा कॉन्ग्रेस ने तुष्टिकरण को प्राथमिकता दी है। ये लोग तुष्टिकरण के लिए किस हद तक जा सकते हैं, इसे देश ने देखा है। ये लोग हैं, जिन्होंने कोर्ट में जाकर कहा था कि प्रभु श्रीराम तो काल्पनिक हैं। अभी कुछ महीने पहले ही अयोध्या में राम मंदिर बनने का सपना पूरा हुआ है। पूरा देश प्राण प्रतिष्ठा का उत्सवा मना रहा था, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी खुलेआम हमारी आस्था का अपमान कर रही थी।”

कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “इस देश ने कॉन्ग्रेस के पापों की हमेशा कीमत चुकाई है। अभी हमें पता चला है कि कॉन्ग्रेस ने डरे-डरे एक एडवायजरी निकाली है कि अगर अयोध्या राम मंदिर की चर्चा चले तो अपने मुँह पर ताला लगा लेना। कुछ बोलना ही मत। उन्हें लगने लगा है कि अगर राम का नाम लिया तो कब उनका राम-राम हो जाए।” (उसे वीडियो में 47:50 से 52:10 मिनट पर सुना जा सकता है।)

प्रधानमंत्री ने कहा, “मोदी ने हर मुस्लिम परिवार की रक्षा की है। मुस्लिम परिवार का हर पिता सोचता था कि बेटी की शादी कर दी, लेकिन अगर 2-3 बच्चे होने के बाद अगर तीन तलाक करके भेज देगा तो मैं बेटी को कैसे सँभालूँगा। तीन तलाक पर कानून हमारी मुस्लिम बहनों की मदद कर रहा है।”

पीएम मोदी ने कहा कि आज दुनिया हैरान है कि भारत कैसे इतनी तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम जो ठान लेते हैं, वो पूरा करते हैं। 10 साल पहले देश की हालत खस्ता थी। कॉन्ग्रेस के बड़े-बड़े घोटालों और लूट के कारण अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी। कॉन्ग्रेस की वजह से दुनिया में भारत की साख गिरती जा रही थी। लोग छोटी-छोटी जरूरतों के लिए जूझ रहे थे।”

उन्होंने कहा कि अब हालात बदल गए हैं। बीते 10 साल में मोदी सरकार ने देश में जो काम किए हैं, उसने विकसित भारत की नींव तैयार कर दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब राजस्थान विकसित होगा तो भारत भी विकसित होगा। भाजपा जो कहती है, वो जरूर करती है। उन्होंने कहा, “भाजपा घोषणापत्र नहीं, संकल्प पत्र लेकर आती है। 2019 में हमने जो संकल्प पत्र जारी किया था, उसके ज्यादातर संकल्प पूरे हो चुके हैं।”