केंद्र की भाजपा सरकार स्पष्ट कर चुकी है वह किसी भी कीमत पर भारतीय नागरिक संशोधन कानून (CAA) देश में लागू करेगी। इतना ही नहीं, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी गुरुवार (7 मार्च 2024) को साफ कह चुके हैं कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले CAA को लागू किया जाएगा। ऐसे में उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रमुख ने कहा कि इस कानून को लागू कराने के लिए वह हर तरह से तैयार है।
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार ने कहा कि यूपी पुलिस लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियों में जुटी हुई है। इसके साथ ही वह CAA के लागू होने को लेकर वह युद्धस्तर पर तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी तरह के विवाद की कोई सूचना मिलती है तो उससे निपटने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस पूरी तरह तैयार है।
प्रशांत कुमार ने कहा, “प्रदेश में किसी भी प्रकार से कानून व्यवस्था बिगड़ने नहीं दी जाएगी। इसके लिए मैं सभी को आश्वस्त करता हूँ। हम पूरी तरह से तैयार हैं। हम डाटा प्रोटेक्शन करते हैं तो हमारे पास वेपन भी है… हमारे पास डंडा भी है। यदि आवश्यक होगा तो उसका विधिक उपयोग किया जाएगा।”
CAA लागू होने को लेकर उन्होंने कहा कि अगर CAA और NRC लागू होने को लेकर वे सभी धर्मगुरुओं से संपर्क बनाए हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने जनशक्ति और उपकरण आदि संसाधनों को भी अपडेट करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अभी राज्य में निवेश का माहौल है और कुछ ऐसा नहीं करने दिया जाएगा जिससे राज्य की छवि पर असर पड़े।
उन्होंने कहा कि यह सब उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा है और इतना पसीना बहा रहे हैं कि खून बहाने की नौबत नहीं आएगी। डीजीपी ने कहा, “हमारी फील्ड फोर्स, हमारे उपकरण किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। सभी संस्थाओं से हम सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे हैं।
डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि राज्य की कानून-व्यवस्था का स्थिति का जायजा लेने के लिए चुनाव आयोग की एक टीम यहाँ आई थी और तीन दिनों तक रुकी। इस दौरान टीम ने प्रदेश के अधिकारियों के साथ चर्चा भी की। उन्होंने राज्य की व्यवस्था पर संतुष्टि व्यक्त की और आश्वासन दिया कि प्रदेश में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल हिंसा-मुक्त और प्रलोभन-मुक्त होंगे।
बता दें कि रिपब्लिक टीवी के एक कार्यक्रम में अमित शाह ने गुरुवार (7 मार्च 2024) को कहा कि सीएए देश का कानून है। यह पत्थर की लकीर है और ये लागू होकर रहेगा। उन्होंने कहा कि इस कानून को इस चुनाव यानी लोकसभा चुनाव 2024 से पहले लागू होगा। इसे कोई नहीं रोक सकता है।
उन्होंने कहा, “CAA संविधान सभा का वादा था। देश का जब विभाजन हुआ, तब पाकिस्तान और अब के बांग्लादेश से लाखों-करोड़ो लोग भारत आ रहे थे। तब कॉन्ग्रेस के लोगों ने ही देश से वादा किया था कि देश उनका स्वागत करेगा, लेकिन वोटबैंक के चक्कर में वे अपने वादे भूल गए। अगर भारत अपने 15 अगस्त 1947 के वादे को याद नहीं रखता है, उन्हें नागरिकता नहीं देता है तो ये विश्वासघात होगा।”
दिल्ली के राउज अवेन्यु कोर्ट मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को तलब किया है। CM केजरीवाल को 16 मार्च को कोर्ट के सामने पेश होने का आदेश दिया गया है। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर की गई अर्जी के आधार पर बुलाया गया है। एक अन्य कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और सांसद संजय सिंह की न्यायिक हिरासत को बढ़ा दिया है।
दिल्ली के राउज अवेन्यु कोर्ट में में प्रवर्तन निदेशालय ने मुख्यमंत्री केजरीवाल के खिलाफ अर्जी लगाई हुई है। एजेंसी का कहना है कि वह दिल्ली शराब घोटाला मामले में लगातार पूछताछ के लिए मुख्यमंत्री केजरीवाल को समन भेज रही है लेकिन वह इसे नहीं मान रहे। अपने समन की तामील करवाने के लिए ही एजेंसी ने कोर्ट का रास्ता अख्तियार किया है।
ED की इस अर्जी पर राउज अवेन्यु कोर्ट की न्यायाधीश दिव्या मल्होत्रा ने आदेश दिया है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल को कोर्ट के सामने 16 मार्च को मौजूद रहना होगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री केजरीवाल को अब तक 8 बार पूछताछ के लिए तलब कर चुकी है।
केजरीवाल को हाल ही में 4 मार्च को तलब किया गया था। उन्होंने तब भी पेश होने से मना कर दिया था और कहा था कि वह 12 मार्च के बाद एजेंसी के सामने पेश होंगे। इससे पहले उन्होंने फरवरी में भी कई बार पेश होने के लिए कहा गया था। मुख्यमंत्री केजरीवाल ED के समन को अवैध बताते आए हैं।
इससे पहले भेजे गए समन पर पेश ना होने के लिए केजरीवाल कई कारण देते रहे हैं। उन्होंने नवम्बर 2023 में विधानसभा चुनाव जबकि दिसम्बर 2024 में वह विपश्यना का बहाना बनाया था। इसके बाद फरवरी में वह विधानसभा सत्र की बात कह कर ED के सामने पेश नहीं हुए थे।
केजरीवाल के एजेंसी के सामने पेश ना होने के कारण ही उसने कोर्ट का रास्ता अपनाया है और कोर्ट से आदेश की मांग की है। एजेंसी उनसे दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में पूछताछ करना चाहती है। इस मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और सांसद संजय सिंह न्यायिक हिरासत में हैं।
Delhi Excise policy case | Delhi court extends the judicial custody of AAP MP Sanjay Singh and former deputy CM Manish Sisodia till March 19.
दिल्ली शराब घोटाला मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में संजय सिंह और मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 19 मार्च तक बढ़ा दी है। उनकी न्यायिक हिरासत आज (7 मार्च, 2024) को खत्म हो रही थी। यह हिरासत 2 मार्च जो दी गई थी।
पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में हुए जमीन पर कब्जों और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले में पूरे देश में चर्चा हो रही है। मुख्य आरोपित शेख शाहजहाँ की गिरफ्तारी को लेकर मचे बचाव पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया। इस बीच संदेशखाली जा रहे बीजेपी के नेताओं को लगातार रोकने की कोशिश हो रही है। इसी कड़ी में बीजेपी सांसद लॉकेट चटर्जी, विधायक अग्निमित्रा पाल और महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष फाल्गुनी पात्रा भी संदेशखाली जा रही थी, लेकिन उन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस ने कोलकाता के न्यू टाउन में ही रोक लिया और बाद में हिरासत में ले लिया।
लॉकेट चटर्जी की अगुवाई में बीजेपी नेताओं ने संदेशखाली जाने और पीड़ित महिलाओं से मिलने का ऐलान किया था, लेकिन कोलकाता के न्यू टाउन में सुरक्षाबलों ने उन लोगों को रोक दिया। इसके साथ ही बीजेपी सांसद लॉकेट चटर्जी और अग्निमित्रा पॉल समेत कई नेताओं को हिरासत में भी ले लिया है।
पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा रोके जाने पर लॉकेट चटर्जी ने तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा, “पूरा देश संदेशखाली की स्थिति देख रहा है, लेकिन सीएम ममता बनर्जी संदेशखाली जाने के बजाय टीएमसी की रैली में भाग ले रही हैं। ममता बनर्जी डरी हुई हैं। बंगाल में कई संदेशखाली हैं। एक दिन, पश्चिम बंगाल के लोग यह सुनिश्चित करेंगे कि ममता बनर्जी सड़क पर आ जाएँ। पुलिस हमें गिरफ्तार क्यों कर रही है, हमने क्या किया है?”
#WATCH | Women leaders of West Bengal BJP including MP Locket Chatterjee and Agnimitra Paul have been detained by police in New Town, Kolkata.
बंगाल की भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने कहा, “रोहिंग्या ममता बनर्जी का वोट बैंक हैं। राष्ट्रवादी मुस्लिम और राज्य के हिंदू उन्हें वोट नहीं देंगे। शेख शाहजहाँ जैसे अपराधी रोहिंग्याओं को पश्चिम बंगाल में घुसने में मदद कर रहे हैं।”
गौरतलब है कि पिछले महीने राशन घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय शाहजहाँ शेख के घर छापा मारने आई थी। हालाँकि उसके समर्थकों ने ईडी पर ही उलटा हमला कर दिया और शाहजहाँ शेख फरार हो गया। उसके बाद से टीएमसी नेता कहाँ था ये किसी को नहीं पता था। बाद में संदेशखाली में महिलाओं का मुद्दा उठा और गिरफ्तारी की माँग तेज हो गई। कई टीएमसी नेता पकड़े गए और आखिर में 27 फरवरी शाहजहाँ शेख भी गिरफ्तार हुआ। पश्चिम बंगाल सरकार ने भरपूर कोशिश की कि शेख शाहजहाँ को सीबीआई गिरफ्तार न कर सके, लेकिन सुप्रीम कोर्ट तक दौड़ लगाने के बावजूद उसे बचा नहीं सकी और सीबीआई ने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद उसे अपनी हिरासत में ले लिया।
एक घरेलू मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि शादी के बाद एक पति द्वारा अपनी पत्नी से घरेलू काम करने की अपेक्षा करना क्रूरता नहीं कहा जा सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी द्वारा पति को अपने परिवार से अलग रहने के लिए कहना क्रूरता के समान है। इस आधार पर उच्च न्यायालय ने पति को तलाक की मंजूरी दे दी।
न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने एक पति की अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा, “अगर एक विवाहित महिला को घरेलू काम करने के लिए कहा जाता है तो इसे नौकरानी के काम के बराबर नहीं माना जा सकता है और इसे अपने परिवार के लिए उसके प्यार और स्नेह के रूप में गिना जाएगा।”
पीठ ने यह भी कहा कि कुछ स्तरों में पति वित्तीय दायित्वों को वहन करता है और पत्नी घर की जिम्मेदारी को स्वीकार करती है। मौजूदा मामला भी ऐसा ही है। भले ही अपीलकर्ता पति ने प्रतिवादी पत्नी से घर का काम करने की अपेक्षा की हो, फिर भी इसे क्रूरता नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इसमें प्रत्येक साथी अपनी क्षमताओं और परिस्थितियों के अनुसार योगदान देता है।
दरअसल, दोनों की शादी 30 मार्च 2007 को हुई थी। इसके बाद 2 फरवरी 2008 को उनके बच्चे का जन्म हुआ। इसके बाद पति-पत्नी में विवाद हो गए। पत्नी ने पति के परिवार पर दहेज माँगने और क्रूरता के आरोप लगाए थे। पति का यह भी आरोप था कि उसकी पत्नी संयुक्त परिवार को छोड़कर अलग रहने के लिए उस पर दबाव डालती है।
सीआईएसएफ में काम करने वाले पति ने कोर्ट को बताया कि वह पत्नी द्वराा घर के कामों में हाथ नहीं बँटाने, वैवाहिक घर छोड़ने के लिए कहने और उसे आपराधिक मामलों में झूठे फँसाने से वह व्यथित था। इस आधार पर वह अपनी से अलग होना चाहता था, लेकिन पारिवारिक न्यायालय ने इससे इनकार दिया। इसके बाद पति ने इस निर्णय को कोर्ट में चुनौती दी।
हाई कोर्ट ने कहा कि अपनी पत्नी की इच्छाओं के आगे झुकते हुए पति ने वैवाहिक जीवन को बचाने के लिए एक अलग आवास की व्यवस्था की थी, लेकिन पत्नी ज्यादातर अपने माता-पिता के साथ रहती थी। अपने माता-पिता के साथ रहने का विकल्प चुनकर महिला ने न केवल अपने वैवाहिक दायित्वों की अनदेखी की, बल्कि पति को उसके बेटे से दूर रखकर उसके पितृत्व से भी वंचित कर दिया।
अदालत ने कहा कि अस्थायी अलगाव जीवनसाथी के मन में असुरक्षा की भावना पैदा करता है और महिला का संयुक्त परिवार में रहने का कोई इरादा नहीं था। पीठ ने कहा कि एक बेटे का अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल करना नैतिक और कानूनी दायित्व है, खासकर ऐसे हालात में जब माता-पिता के पास आय का कोई दूसरा स्रोत नहीं है या फिर है तो नगण्य है।
“नरेंद्र बनाम के. मीना के मामले का हवाला देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह देखा है कि एक बेटे को अपने परिवार से अलग होने के लिए कहना क्रूरता है। इसमें कहा गया था कि भारत में एक हिंदू बेटे के लिए आम बात नहीं है और ना ही शादी के बाद अपने परिवार से अलग होने की वांछनीय संस्कृति है।
अदालत ने कहा, “जब दोनों पक्ष विवाह के बंधन में बँधते हैं तो उनका इरादा भविष्य के जीवन की ज़िम्मेदारियों को साझा करना होता है। कई निर्णयों में यह पहले ही माना जा चुका है कि यदि एक विवाहित महिला को घरेलू काम करने के लिए कहा जाता है तो उसे नौकरानी के बराबर नहीं माना जाता, बल्कि उसे अपने परिवार के प्रति उसके प्यार और स्नेह के रूप में गिना जाता है।
आर्टिकल 370 जम्मू-कश्मीर से हटाए जाने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (7 मार्च 2024) श्रीनगर पहुँचे। वहाँ जाकर उन्होंने दूर से पहले एक पर्वत को प्रणाम किया और उसके बाद वहाँ फोटों खिंचवाई। ये तस्वीरें शेयर करते हुए पीएम ने जानकारी दी कि आज उन्हें शंकराचार्य पर्वत को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
पीएम के इस ट्वीट के बाद जो शंकराचार्य पर्वत चर्चा में आया है उसका अपना इतिहास है। यहाँ बना मंदिर समुद्र तल से 1100 फीट की ऊँचाई पर है, जो कि कश्मीर के सबसे पुराने मंदिरों से जाना जाता है। इसके बारे में मौजूद जानकारी बताती है कि मंदिर का निर्माण राजा गोपादात्य ने करवाया था। बाद में डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह ने मंदिर तक पँहुचने के लिए सीढ़ियाँ बनवाई थी। जब जगद्गुरु शंकराचार्य अपने भारत यात्रा के दौरान यहाँ आए थे तो उन्होंने इसी पर्वत पर साधना की थी। उनका साधना स्थल आज भी यहाँ मौजूद है।
Upon reaching Srinagar a short while ago, had the opportunity to see the majestic Shankaracharya Hill from a distance. pic.twitter.com/9kEdq5OgjX
शंकराचार्य पर्वत को इस्लामी कट्टरपंथी बुलाते हैं तख्त-ए-सुलेमान
हर हिंदू के लिए जहाँ शंकराचार्य पर्वत एक पवित्र स्थान है। वहीं इस्लामी कट्टरपंथियों की आँख में इसकी पवित्रता खटकती रहती है। जगहों के नाम बदलने की रिवायत उन्होंने इस स्थान के लिए प्रयोग की हुई है। आप अगर इंटरनेट पर देखेंगे तो पाएँगे कि कई जगह इस जगह को लोग तख्त-ए-सुलेमान का नाम देकर आज भी बुलाते हैं और शंकराचार्य पर्वत का नाम लोगों की स्मृति से मिटाने का काम करते हैं।
इस पर्वत का नाम लोगों की जुबान पर तख्त-ए-सुलेमान करने का काम आज से नहीं हो रहा। साल 2014 में भी इस पर विवाद हुआ था। तब, तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि इस पर्वत के और भी नाम हैं और वो रहेंगे। ये अकेली जगह नहीं है जिसके एक से ज्यादा नाम नहीं होते…
शंकराचार्य पर्वत का नाम भले ही सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से नहीं बदला गया हो लेकिन कश्मीर के इस्लामी कट्टरपंथियों ने इसे तख्त-ए-सुलेमान बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
अनंंतनाग को कहते हैं इस्लामाबाद
मालूम हो कश्मीर का ये कोई पहला ऐसा स्थान नहीं है जिसका नाम बदलकर वहाँ का इस्लामीकरण करने का प्रयास किया गया हो। इसी कश्मीर के अनंतनाग जिले को इस्लामाबाद कहते भी कई लोगों को सुना जा चुका है।
अनंतनाग जिला जिसे कभी कश्मीर की प्राचीन राजधानी कहते थे। लेकिन मुस्लिम आक्रांताओं ने यहाँ के मंदिर को नष्ट करके इसे इस्लामाबाद नाम दिया था। आज के समय में इस्लामाबाद पाकिस्तान की राजधानी है। लेकिन, कश्मीर के कट्टरपंथी अनंतनाग फिर भी इस स्थान को इस्लामाबाद बुलाने से नहीं चूकते।
सरकारी एंकर ने कहा था अनंतनाग को इस्लामाबाद
गौरतलब है कि कश्मीर की धरती पर हिंदू नाम वाले स्थानों का इस्लामीकरण कितना ज्यादा आम करने के प्रयास हुआ है इसका अंदाजा एक घटना से भी लगाया जा सकता है। ये मामला साल 2014 का है। तब, बाढ़ में खबर को पढ़ते वक्त डीडी के एक एंकर ने अनंतनाग को इस्लामाबाद कहा था और शंकराचार्य पर्वत को कोह-ए-सुलेमान कहा था।
सरकारी चैनल के एंकर की इस हरकत का बाद में बहुत विरोध हुआ था जिसके बाद उसे एंकरिंग से हटाकर अलग कामों में लगा दिया गया। लेकिन सोचिए अगर वो विरोध नहीं होता तो क्या धीरे-धीरे इस्लामाबाद आम लोगों की भाषा में सामान्य नहीं हो जाता। जैसे शंकराचार्य पर्वत से जुड़ा एक इतिहास है वैसे ही अनंतनाग नाम से भी हिंदू आस्था जुड़ी है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार ये वो स्थान है जहाँ भगवान शिव ने अमरनाथ गुफाओं के रास्ते में अपने कई सांपों को छोड़ा था। इसलिए इसे यह नाम मिला जिसका अर्थ है ‘अनंत’ (अनंत) ‘सर्प’ (नाग)। इसके अलावा कश्मीर में नाग का अर्थ झरने से बताया जाता है इसलिए ये भी मान्यता है कि अनंत झरने होने से इस स्थान को अनंत नाग कहा गया है।
सूर्य मंदिर को दिखाया शैतान की गुफा
इन दोनों जगहों के अतिरिक्त भी कई ऐसे स्थान हैं जिनपर इस्लामी आतताइयों का कहर बरपा और उनका नामोंनिशान मिटाने का प्रयास हुआ। इनमें एक नाम मार्तंड सूर्य मंदिर का है जिसकी स्थापना कश्मीर के महान राजा ललितादित्य मुक्तिपीड ने की थी। लेकिन बाद में इसे सुल्तान सिकंदर शाह मीरी ने ध्वस्त करवा दिया… और हिंदू आज भी इसके टूटे हिस्से देख मीरी द्वारा दिए गए घाव को महसूस करते हैं।
Martand Sun Temple
One of the oldest temple ruins,now called “Shaitan ki Gufa "by Kashmiri Muslims.
Made by King Lalitaditya around 5th Century A.D.&it was destructed by Muslim ruler Sikander Butshikan. Scintillating piece of architecture, could have awed everyone who saw it. pic.twitter.com/mP0hMInul0
लेकिन इससे इस्लामी कट्टरपंथियों, वामपंथियों को कोई फर्क नहीं पड़ता। वो इस पवित्र स्थान को शैतान की गुफा बताकर दुनिया के आगे पेश करते हैं। जैसे साल 2014 में हैदर फिल्म में किया गया था। इस फिल्म में इस पवित्र स्थान को शैतान की गुफा का तमगा दिया गया था और तब किसी ने इसका विरोध तक नहीं किया था। हाँ… कश्मीरी पंडितों ने अपने मंदिर की छवि गलत दिखाने की जानकारी होने पर इसका विरोध किया था लेकिन उस समय उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था।
ऋषि कश्यप की धरती बना बाद में कश्मीर
बता दें कि कश्मीर की जिस धरती पर इस्लाम थोपने का प्रयास मुस्लिम शासकों द्वारा किया गया, वो कश्मीर कभी ऋषि कश्यप की धरती के नाम से जाना जाता था। यहाँ के मंदिर जग के प्रसिद्ध मंदिरों में से थे। यहाँ की आबादी कभी सिर्फ हिंदुओं की थी। यहाँ धर्म सिर्फ सनातन था। यहाँ नदी-झरनों की पूजा होती थी… लेकिन मुस्लिम शासकों के घुसते ही सब बदल गया। सूफियों की परंपरा ने यहाँ कट्टरपंथ के पैर फैलवाए और देखते ही देखते हिंदुओं के मंदिर ध्वस्त किए जाने लगे, जगहों के नामों का इस्लामीकरण होने लगे और हिंदुओं का नरसंहार कश्मीर के इतिहास में जुड़ गया।
बॉलीवुड के चॉकलेटी बॉयज में शुमार रहे आमिर खान के भांजे इमरान खान एक बार फिर से चर्चा में हैं। सालों से वो फिल्मों से दूर हैं, लेकिन इस बार वो निजी जीवन को लेकर मीडिया की सुर्खियाँ पा रहे हैं। वजह है उनकी नई गर्लफ्रेंड लेखा वॉशिंगटन। हालाँकि कई मौकों पर दोनों साथ में दिख चुके हैं, लेकिन अब इमरान खान ने लेखा के साथ अपने रिश्ते पर मुहर लगा दी है। हालाँकि इस दौरान वो इस बात से खफा दिख रहे हैं कि लेखा वॉशिंगटन को मीडिया के लोग ‘घर तोड़ू’ कह रहे हैं, जो कि सही नहीं है।
लेखा वाशिंगटन के साथ रिश्ते पर इमरान ने मुहर लगाते हुए वॉग से बातचीत की है। इमरान खान ने बताया कि फरवरी 2029 में वो पत्नी अवंतिका मलिक से अलग हो गए थे। इसके करीब डेढ़ साल बाद लेखा उनकी जिंदगी में आई। दोनों पहले एक फिल्म में साथ काम कर चुके थे। लेकिन जब हम रिश्ते में आए, तो लेखा भी अपने पार्टनर (पति नहीं) से एक साल पहले ही अलग हो चुकी थी। ऐसे में लेखा पर जो आरोप लगाए जाते हैं, कि उन्होंने मेरा और अवंतिका का घर थोड़ा, तो ये बिल्कुल भी सच नहीं है।
इमरान ने कहा, “लेखा के घर तोड़ने वाली जो कहानियां चल रही हैं, उन्हें सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आता है। यह न केवल महिला को बदनाम करता है, बल्कि एक इंसान के रूप में उसकी छवि को भी चोट पहुँचाता है।” बता दें कि कुछ समय पहले में इमरान अपनी गर्लफ्रेंड लेखा संग अपने मामा आमिर खान की बेटी इरा खान की शादी भी शामिल हुए थे। इमरान और लेखा को इरा और उनके पति नुपुर शिखरे के साथ मस्ती करते हुए देखा गया था। इसके साथ इन लेखा ने इमरान संग अपनी कुछ तस्वीरें भी अपने इंस्टाग्राम पर शेयर की थी।
निजी जीवन को लेकर चुप रहते हैं इमरान खान
बता दें कि फिल्मी दुनिया से दूर जाने के बाद से ही इमरान अपनी निजी जिंदगी को लेकर कोई भी बात करना पसंद नहीं करते हैं। यहाँ तक कि 2019 में उनके तलाक की खबरों ने सुर्खियां पकड़ी थीं, तब भी इमरान ने इस पर कोई बयान नहीं दिया था। हालाँकि अब वो सोशल मीडिया पर वापसी कर चुके हैं और इंस्टाग्राम पर खूब सक्रिय रहते हैं। माना जा रहा है कि वो जल्द ही बॉलीवुड में वापसी कर सकते हैं।
गौरतलब है कि इमरान और उनकी पूर्व पत्नी अवंतिका ने साल 2011 में लंबे समय तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद शादी कर ली थी। दोनों की बेटी इमारा का जन्म 2014 में हुआ था। शादी के 8 साल बाद दोनों ने साल 2019 में तलाक ले लिया था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज (7 मार्च, 2024) को जम्मू कश्मीर के श्रीनगर पहुँचे हैं। यहाँ पीएम मोदी ने कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया। यहाँ उन्होंने जनता को संबोधित भी किया। प्रधानमंत्री की इस रैली में कश्मीर के अलग अलग हिस्से से लोग शामिल होने पहुँचे हैं।
प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में हुआ। पीएम मोदी ने यहाँ ₹6400 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। यहाँ उन्होंने कई योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद किया और फिर जनता को संबोधित किया।
पीएम मोदी ने कहा कि धरती के स्वर्ग पर आने का यह अनुभव शब्दों से परे हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ के लोग तकनीक के जरिए हमसे जुड़े हैं। इस जम्मू कश्मीर का इन्तजार हमें दशकों से था। पीएम मोदी ने कहा कि 2014 के बाद से मैं दिल जीतने का प्रयास कर रहा हूँ। मुहे लगता है मैं इसमें सफल हुआ हूँ।
पीएम ने अपने जम्मू दौरे का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि वहां मैंने ₹32,000 करोड़ के प्रोजेक्ट का शिलान्यास और लोकार्पण किया था। पीएम ने कहा कि कश्मीर में मुझे आज टूरिज्म और विकास से जुड़ी कई परियोजनाओं को समर्पित करने का मौक़ा मिला है। उन्होंने कहा कि विकसित जम्मू कश्मीर का रास्ता विकास से होकर जाता है।
पीएम मोदी ने कहा “जम्मू कश्मीर मात्र एक क्षेत्र नहीं बल्कि भारत का मस्तक है और ऊँचा उठा मस्तक ही विकास और सम्मान का प्रतीक होता है, इसलिए विकसित जम्मू कश्मीर, विकसित भारत की प्राथमिकता है।” पीएम मोदी ने कहा कि एक जमाना था जब देश में लागू होने वाले कानून जम्मू कश्मीर में नहीं लागू होते थे। उन्होंने कहा कि अब वक्त ने करवट बदल ली है, अब श्रीनगर जम्मू कश्मीर ही नहीं बल्कि देश के लिए पर्यटन की नई पहल कर रहा है।
पीएम मोदी ने ऐलान किया कि 40 जगहों को अगले 2 साल में पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करेगी। पीएम मोदी ने प्रवासी भारतीयों से अपील की कि वह पाँच परिवारों को भारत आने के लिए प्रेरित करें। पीएम मोदी ने जम्मू कश्मीर के लोगों को विकास कार्यों के लिए बधाई दी।
उन्होंने भारत के भीतर ही लोगों को शादियों का आयोजन करने की अपील दोहराई। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर आकर लोग ‘वेड इन इंडिया’ को बढ़ावा दें। पीएम मोदी ने जम्मू कश्मीर में जी 20 के आयोजन का जिक्र किया और बताया कि 2023 में 2 करोड़ लोग यहाँ आए हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि जम्मू कश्मीर तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। इस राज्य को 2 AIIMS मिल रहे हैं। पीएम मोदी ने जम्मू कश्मीर में हाल ही में चालू हुई रेल सेवाओं की बात की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जम्मू कश्मीर की सक्सेस स्टोरी पूरी दुनिया के लिए उदाहरण बनेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू कश्मीर बैंक को दोबारा से मजबूत करने की बात की। उन्होंने कहा कि यह बैंक अब ₹1700 करोड़ से अधिक लाभ कमा रहा है। उन्होंने बैंक पर आए संकट को उबारने के लिए उठाए गए क़दमों को बताया। पीएम मोदी ने यहाँ से देश को रमजान महीने की बधाई दी। उन्होंने कहा कि कश्मीर आदि शंकराचार्य की भूमि है और कल महाशिवरात्रि है। उन्होंने देश को इस पर्व की बधाई भी दी।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित देवबंद दारुल उलूम ने गजवा-ए-हिंद ने फतवा जारी किया था। इसको लेकर भेजी गई रिपोर्ट पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने सहारनपुर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को दिल्ली तलब किया है।
NCPCR अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि आयोग ने प्रशासन को दारुल उलूम के खिलाफ कार्रवाई करने का नोटिस दिया था, लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने अपनी जाँच रिपोर्ट में कहा कि फतवा 2009 में जारी किया गया।
कानूनगो ने कहा कि दक्षिण एशिया को दारुल उलूम मदरसा शिक्षा प्रणाली नियंत्रित करती है। फतवे में गजवा-ए-हिंद का महिमामंडन किया है। इस संबंध में दारुल उलूम के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए 21 फरवरी 2024 को नोटिस दिया था, लेकिन कार्रवाई की बजाए एक रिपोर्ट बनाकर भेज दिया गया।
उन्होंने कहा, “फतवे में कहा गया था कि गजवा-ए-हिंद के दौरान मारा जाने वाला शहीद माना जाएगा। यह फतवा दारुल ने 26/11 हमले के ठीक बाद 1 दिसंबर 2008 को जारी किया गया था। NCPCR ने एक रिपोर्ट और स्पष्टीकरण के साथ सहारनपुर डीएम और एसएसपी को दिल्ली बुलाया है।”
कानूनगो ने कहा कि दारुल उलूम से जुड़े मौलानाओं को जमीयत उलेमा-ए-हिंद (UK) से करोड़ों रुपए की फंडिंग होती है। यह संगठन पाकिस्तान को भी फंड देता है। उन्होंने पूछा, “क्या वे बच्चों की नजर में अजमल कसाब को शहीद के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं? इसका जवाब अधिकारियों को देना होगा।”
दरअसल, प्रियांक कानूनगो ने दारुल उलूम के गजवा-ए-हिंद पर पुराने फतवे का संज्ञान लिया। इस संबंध में सहारनपुर के डीएम और एसपी को 21 फरवरी 2024 को मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने का आदेश दिया था। इस संबंध में डीएम दिनेश चंद्रा ने देवबंद के एसडीएम और सीओ को नेतृत्व में टीम गठित की थी।
टीम ने जाँच करने के बाद एक रिपोर्ट तैयार की और उसे आयोग को भेजी गई। इस रिपोर्ट में मुकदमा दर्ज न करने समेत कई पहलुओं का जिक्र किया गया था, जिसमें कहा गया था कि यह फतवा साल 2009 का है। इसके बाद आयोग ने प्रशासन की ओर से मिली रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है।
NCPCR की नाराजगी के बाद जिला प्रशासन ने नए सिरे से जाँच रिपोर्ट तैयार करने की बात कही है। वहीं, दारुल उलूम की सर्वोच्च कमिटी मजलिस-ए-शूरा ने हाल ही में कहा था कि वह अपनी वेबसाइट बंद नहीं करेगा। उसने यह भी कहा था कि यदि उस पर कोई कानूनी कार्रवाई की गई तो वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।
दारुल उलूम के अशरफ उस्मानी ने कहा कि इस संस्था ने अपना जवाब प्रशासन को दे दिया था। संस्था ने 2009 में एक व्यक्ति द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में 211 ईस्वी में लिखी गई पुस्तक सना नसाई के हवाले से दिया था। इसे अरबी लेखक अल-इमाम अल हिजाज अबू अब्दुर्रहमान अहमद बिन नसाई ने लिखी गई थी।
गृह मंत्री अमित शाह ने रिपब्लिक भारत द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में उन्होंने कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। अमित शाह ने पीएम मोदी द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए 370 सीटों और एनडीए के लिए 400 सीटों के लक्ष्य, यूसीसी, देश को विकसित बनाने के लक्ष्य के साथ ही सीएए और देश में कमजोर विपक्ष जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान अमित शाह ने ऐलान किया कि सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (सीएए) देश का कानून है और ये कानून लोकसभा चुनाव 2024 से पहले लागू होकर रहेगा।
सीएए देश का कानून, लोकसभा चुनाव से पहले होगा लागू
मंच पर अमित शाह से पूछा गया कि सीएए कब लागू होगा? इस सवाल के जवाब में अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में जवाब दिया कि सीएए देश का कानून है। पत्थर की लकीर है। ये लागू होकर रहेगा। ये इस चुनाव से पहले लागू होगा। इसे कोई नहीं रोक सकता है। उन्होंने कहा, “सीएए कानून कोई नई बात नहीं है। कॉन्ग्रेस पार्टी कई चीजों को भूल गई। वोटबैंक की लालच में कई चीजें भूल गई। सीएए संविधान सभा का वादा था। देश का जब विभाजन हुआ, तब पाकिस्तान और अब के बांग्लादेश से लाखों-करोड़ो लोग भारत आ रहे थे, तब कॉन्ग्रेस के लोगों ने ही देश से वादा किया था कि आप धैर्य रखिए, देश आपका स्वागत करेगा। लेकिन कॉन्ग्रेस के लोग वोट बैंक के चक्कर में सबकुछ भूल गए। अगर भारत अपने 15 अगस्त 1947 के वादे को याद नहीं रखता है, उन्हें नागरिकता नहीं देता है, तो ये विश्वासघात होगा। हमारी सरकार उनको नागरिकता भी देगी, अधिकार भी देगी।”
यूनिफॉर्म सिविल कोड को धर्म से जोड़ना गलत
गृहमंत्री अमित शाह ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को धर्म से जोड़ने को गलत बताया। उन्होंने कहा कि यूसीसी सिर्फ बीजेपी ही नहीं, बल्कि पूरे देश का मुद्दा है। अमित शाह ने कहा, “ये दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड को धर्म के साथ जोड़ दिया गया। मैं बताना चाहता हूँ कि यूनिफॉर्म सिविल कोड सिर्फ बीजेपी की बात नहीं है। इसे संविधान सभा ने आर्टिकल 44 में डायरेक्टिव प्रिंसिपल में कहा है कि देश की संसद और राज्यों की विधानसभा इसे लागू करे। अगर आप पंथनिरपेक्ष देश चाहते हैं, तो धर्म के आधार पर कानून नहीं होना चाहिए। इसलिए हर किसी के लिए एक ही कानून होना जरूरी है।”
यूसीसी को बड़ा पॉलिटिकल और सोशल रिफॉर्म बताते हुए अमित शाह ने कहा, “ये बहुत बड़ा सोशल रिफॉर्म है। देश में लागू होने का सवाल जहाँ तक है, तो इस देश में हर बात पर बहस होती है। उत्तराखंड में यूसीसी का जो कानून बनाया गया है, इस पर पूरे देश में बहस होनी चाहिए। सभी धर्मों और धर्माचार्यों के बीच होना चाहिए। इसमें जरूरी हुआ, तो सुधार करके देश के सभी राज्य इसे लागू करना चाहेंगे। भारत कश्मीर से कन्याकुमारी, कमाख्या से गुजरात तक। पूरे देश में एक कानून होना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “कानून के आधार पर कोई देश पंथनिरपेक्ष नहीं होता, ये जनता तय करती है। धर्म व्यक्तिगत मामला है, राज्य का नहीं। हम हजारों सालों से ऐसे ही हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक कानून लागू होना चाहिए।”
भारत जोड़ो बैनर के नाम तहत ‘भारत तोड़ने’ की एक्सरसाइज
अमित शाह ने कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी के भारत जोड़ो यात्रा पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, “भारत जोड़ो बैनर के तहत भारत को तोड़ने की एक्सरसाइज चल रही है। मुझे मालूम नहीं है कि कॉन्ग्रेस पार्टी को क्या हो गया है। उनकी पार्टी का बड़ा नेता कहता है कि देश के नॉर्थ-साउथ दो टुकड़े कर दो। इनके सहयोगी सनातन धर्म के खिलाफ जहर उगल रहे हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस रोकती नहीं। यात्रा लेकर निकलते हैं भारत जोड़ो की, लेकिन इनका एकमात्र लक्ष्य है तुष्टिकरण कर सत्ता प्राप्त करने की। जिन लोगों ने भारत को तोड़ने की बात कही है, जिन लोगों ने विश्व की सबसे पुरानी संस्कृति-परंपरा को अपमानित करने की कोशिश की, जनता को उन्हें पहचानने और दंडित करने की जरूरत है। मैं चैलेंज देता हूँ कि ये लोग ऐसी बातें चुनावी मंच से कहें। इनके मुँह से अगर कोई बात गलती से निकली, तो भी ये उसकी माफी नहीं माँगते।”
राहुल गाँधी के ओबीसी मुद्दे पर कही ये बात
अमित शाह ने कहा कि ओबीसी समुदाय का सबसे ज्यादा नुकसान किसी ने किया, तो ये कॉन्ग्रेस पार्टी है। उन्होंने कहा, “काका काकेलकर कमेटी, मंडल कमीशन का विरोध कॉन्ग्रेस ने किया। ओबीसी आयोग नहीं बनाया। नीट जैसी चीजों में ओबीसी आरक्षण नहीं दिया, लेकिन पीएम मोदी की सरकार ने ये सब किया। मोदी सरकार में 27 मंत्री ओबीसी हैं। भारत सरकार के अभी के सेक्रेटरी कॉन्ग्रेस शासनकाल में भर्ती हुए थे, पदोन्नति पाते-पाते यहाँ तक पहुँचे हैं। राहुल गाँधी को देश की जनता एंटरटेनमेंट के तौर पर देखती है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने ओबीसी का सबसे ज्यादा नुकसान किया है।”
आतंकवाद की कदम तोड़ी, फंडिंग रोकी
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने साल 2014 से आतंकवाद को ध्वस्त करने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं। टेरर फंडिंग, नार्को टेरर फंडिंग को खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं। सैकड़ों रेड हुई हैं, बड़ी कार्रवाई हुई है। ये बातें सार्वजनिक रूप से नहीं बोलनी चाहिए, लेकिन ये मोदी सरकार की बहुत बड़ी सफलता है कि हमने टेरर फंडिंग को लगभग तोड़ दिया है। इस मौके पर जब उनसे पूछा गया कि नक्सलवाद से भारत को संपूर्ण छुटकारा कब मिलेगा? तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मोदी सरकार 3.0 में तीन साल में नक्सलवाद से पूरा देश मुक्त हो जाएगा।
बीजेपी ने 195 उम्मीदवारों की घोषणा, 370 का लक्ष्य कैसे तय किया गया?
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बीजेपी ने 370 सीटों का लक्ष्य ऐसे ही तय नहीं किया है, बल्कि काफी काम करने के बाद इस लक्ष्य को निर्धारित किया गया है। अमित शाह ने कहा, “बीजेपी राजनीति में विजय प्राप्त करके सिर्फ सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ काम नहीं करते। जब से हमारी पार्टी बनी है, हमारी पार्टी का मकसद सिर्फ भारत देश को बेहतर बनाने और भारत को विश्व का सिरमौर बनाना ही रहा है। आजादी का आंदोलन सशक्त, समृद्ध, सुरक्षित, शिक्षित और विश्वगुरु के स्थान पर बैठे भारत की रचना के लिए लड़ा गया था, उसी लक्ष्य के लिए हम राजनीति में हैं और उसी लक्ष्य के लिए हम काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “सीटों की बात है कि 1950 से आज तक हमने जनता के सामने जो एजेंडे रखे, उसके लिए मोदी जी के नेतृत्व में जनता ने 2 टर्म पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई, हमने उसी दिशा में काम किए। इन 10 सालों में हमने भारत के विकास के लिए, भारत की सुरक्षा की दृष्टि से और भारत के विश्व में गौरव बढ़ाने के दृष्टि से ये भारत का स्वर्णिम काल रहा है। ये शुरुआत है। अच्छा समय आने वाला है। इसके लिए हमने जो प्रयास 10 सालों में किए हैं, जिसके लिए 10 साल से पूर्ण समर्थन पूरे देश से एनडीए-बीजेपी को मिल रहा है। मैंने अभी तक 136 सीटों का विजिट किया है। मैं आपको बता सकता हूँ कि देश की जनता पीएम मोदी के साथ खड़ी है, इसीलिए हमने 370 और 200 का लक्ष्य रखा है। ये हकीकत है।
संदेशखाली की घटनाओं ने ममता सरकार को किया एक्सपोज
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संदेशखाली की घटनाओं ने पश्चिम बंगाल सरकार को एक्सपोज करके रख दिया है। ममता सरकार में जिस तरह से धर्म के आधार पर महिलाओं का शोषण हुआ है, हम उसके खिलाफ लड़ेंगे, पूरा जोर लगाकर लड़ेंगे और जनता सरकार को उखाड़ फेंकेगी। उन्होंने कहा, “बंगाल एक बॉर्डर स्टेट है। हम सब जानते हैं कि घुसपैठ की सबसे ज्यादा समस्या अब बंगाल में बची है। मैं विश्वास के साथ, तथ्यों के साथ देश की जनता को बता रहा हूँ कि बंगाल में स्टेट स्पॉन्सर्ड घुसपैठ कराई जा रही है।”
उन्होंने कहा, “वोटबैंक के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रखा जा रहा है। बंगाल की जनता भी ये जानती है। पूरा देश बंगाल के साथ खड़ा है, बॉर्डर स्टेट बंगाल में भी जागरुकता आई है। हमारे पास एक भी सीट नहीं थी, हम 18 जीते, हम 25 जीतेंगे। 2 एमएलए से 77 जीते, अब बंगाल की भ्रष्टाचारी सरकारी को उखाड़ फेंकने की जरूरत है। देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि बंगाल में परिवर्तन हो। हम बंगाल को फिर से सोनार बंगला बनाना चाहते हैं, इसमें जनता को हमारे साथ खड़े होने की जरूरत है।”
देश में मजबूत विपक्ष जरूरी, लेकिन ये जनता तय करती है
अमित शाह ने कहा कि मैं मानता हूँ कि देश में मजबूत विपक्ष होना चाहिए। लेकिन वो हम नहीं बना सकते। वो जनता के हाथ में है। विपक्ष को मजबूत या कमजोर बनाने का काम देश की जनता करती है, सरकार नहीं। विपक्ष निर्बल हो तो भी बीजेपी रोज आत्मचिंतन करती रहे, हमारे यहाँ भ्रष्टाचार न आए, परिवारवाद न आए, निर्बलता न आए.. हम सिर्फ इसी की चिंता कर सकते हैं। बाकी विपक्ष की पार्टियों के बारे में जनता सोचती है और वो अपना फैसला देती आ रही है।
‘परफॉरमेंस बेस्ड डेमोक्रेसी, अगले 10 साल तक मोदी जी ही प्रधानमंत्री’
अमित शाह ने कहा कि अब भारत देश में डायनमिक डेमोक्रेसी है। देश की जनता काम को देखकर फैसले करती है। पहले जाति-धर्म पर वोटिंग होती थी, लेकिन मोदी जी ने परफॉर्मेंस बेस्ड डेमोक्रेसी को बढ़ाया है। अब देश की जनता ही हमारे काम को देखकर फैसला करेगी। हम पैदा हो रही बुराइयों को कंट्रोल नहीं कर पाएँगे, तो हम भी विपक्ष में बैठेंगे, लेकिन अगले दस साल तक तो मोदी जी हैं।
देश को विकसित बनाना पूरे देश का सामूहिक लक्ष्य
गृहमंत्री ने कहा कि ये समय देश की आजादी का अमृत महोत्सव का मौका है। जब पीएम मोदी सत्ता में आए, तो उन्होंने देश अमृत महोत्सव का उपयोग बहुत ही विजनरी तरीके से किया है। एक युगदृष्टा नेता ही ऐसा सोच सकता है। उन्होंने देश की युवा पीढ़ी को आजादी के आंदोलन की याद दिलाई। उन्होंने पार्टी पॉलिटिक्स से हटकर सभी स्वतंत्रता सेनानियों का महिमामंडन किया। हमारा देश 2047 में विकसित देश बनेगा, इसके लिए देश की जनता को संकल्प दिलाकर देश के विकास में सहभागी बनाया है। 25 वर्ष के बाद शायद हम तो नही होंगे, लेकिन देश के युवा देख पाएँगे कि भारत सबसे आगे होगा। पूरी दुनिया हमारा लोहा मानेगी। हमारा धर्म, हमारी भाषा सम्मान के साथ देखी जाएगी। ये हम पूरे देश का सामूहिक लक्ष्य है।
उत्तर प्रदेश के जौनपुर में अज्ञात बदमाशों ने भाजपा नेता प्रमोद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी। गोली लगने के बाद स्थानीय लोग यादव को अस्पताल ले गए, लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँचकर उसकी जाँच की। इस मामले में पुलिस हत्यारों की पहचान करने में जुट गई है।
प्रमोद यादव जौनपुर भाजपा के जिला मंत्री थे। वे सिकरारा थाना क्षेत्र के बोधापुर गाँव के रहने वाले थे। बताया जा रहा है कि गुरुवार (7 मार्च 2024) की सुबह 10 बजे प्रमोद यादव घर से बाहर निकले थे। भाजपा नेता बोधापुर मोड़ के पास पहुँचे। उसी दौरान तीन बाइक सवार आए और उन्हें कार्ड देने के बहाने रोक लिया।
प्रमोद यादव जैसे ही रूके, बदमाशों ने उनसे तमंचा सटाकर तीन गोली मार दी। गोली लगते ही वे जमीन पर गिर गए। गोली की आवाज सुनकर जैसे ही आसपास को लोग जुटने लगे, बदमाश अपना बाइक छोड़कर भाग गए। इस बाइक की पहचान की जा रही है। इसके मालिक के बारे में पुलिस पता लगा रही है। इसके जरिए बदमाशों तक पहुँचने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रमोद यादव साल 2012 में भाजपा की टिकट पर मल्हनी विधानसभा से चुनाव लड़ा था। कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका नामांकन रद्द हो गया था। वहीं, कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि वे इस चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे थे। इस चुनाव में सपा के समाजवादी पार्टी के पारसनाथ यादव विजयी हुए थे। दूसरे स्थान पर धनंजय सिंह की पूर्व पत्नी जागृति सिंह रही थीं।
प्रमोद यादव के पिता राजबली यादव भी नेता थे। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे। साल 1980 में उनकी भी हत्या कर दी गई थी। एक दिन वे अपने एक मित्र के साथ शहर से मूरकटवा आए थे। बाइक छोड़कर पैदल घर जा रहे थे। उसी दौरान घात लगाकर बैठे बदमाशों ने उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी थी। वे एक बार जनसंघ के टिकट पर रारी विधानसभा से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए थे।
जौनपुर के पुलिस अधीक्षक अजयपाल शर्मा ने बताया कि शादी का कार्ड देने के बहाने तीन बदमाश बाइक से आए। उन्होंने प्रमोद यादव को रोक कर उनसे बातचीत करने लगे। इसी दौरान उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस दौरान एक बदमाश कुछ दूरी पर खड़ा था। हत्या को अंजाम देने के बाद तीनों मौके से फरार हो गए। तीनों की तलाश की जा रही है।
भाजपा नेता की हत्या के मामले में पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। पुलिस हर एंगल से इसकी जाँच कर रही है। अभी तक पीड़ित परिवार की तरफ से किसी पर आरोप नहीं लगाए गए हैं। पुलिस इलाके के सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाल रही है। फिलहाल घटनास्थल पर पुलिस को तैनात कर दिया गया है।