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शादीशुदा महिला ने 10 साल छोटे किराएदार से किया सेक्स, फिर दर्ज करवाई रेप की FIR: मामला रद्द करते हुए SC ने कहा- सहमति से बने थे सम्बन्ध

सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ शादी का वादा करके रेप करने के मामले में दर्ज FIR रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि महिला समझदार थी और पहले से शादीशुदा भी थी, ऐसे में शादी का वादा करके रेप का मामला नहीं बन सकता।

मामले के अनुसार, एक व्यक्ति ने सतना में अपने विरुद्ध दर्ज की गई एक FIR को रद्द करने की अपील सुप्रीम कोर्ट में की थी। इस व्यक्ति के विरुद्ध के एक महिला ने शादी का वादा करके रेप करने के सम्बन्ध में दिसम्बर 2020 में FIR दर्ज करवाई थी।

महिला पहले से विवाहित थी और अपने पति से विवाद के चलते अपने माता-पिता के साथ रहती थी। उसके एक 15 वर्ष की बेटी भी है। उसी के घर में एक किराएदार आकर रहने लगा था जो कि महिला से 10 वर्ष छोटा था। दोनों के बीच में बाद में नजदीकियाँ बढ़ गई और शारीरिक सम्बन्ध बन गए। दोनों ने कई मौकों पर सेक्स किया।

महिला ने इस बीच अपने पहले पति से तलाक के लिए मामला भी दायर कर दिया। हालाँकि, महिला का बाद में किराएदार से कुछ विवाद हो गया। महिला ने उसके खिलाफ एक FIR दर्ज करवा दी। महिला ने आरोप लगाया कि उसने महिला से शादी का वादा किया था। इसी के आधार पर उसने सम्बन्ध बनाए थे। बाद में यह व्यक्ति इससे मुकर गया।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसने इस व्यक्ति से एक मंदिर में 2019 में शादी भी कर ली थी। इसी आधार पर उसने इस व्यक्ति के विरुद्ध मामला दर्ज करवाया था। आरोपित ने इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के समक्ष FIR रद्द करने की अपील की थी। हालाँकि, यहाँ से उसे निराशा हाथ लगी थी।

इसके बाद यह व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट पहुँचा। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने की। उन्होंने इस FIR को रद्द कर दिया और कुछ महत्वपूर्ण बातें इस मौके पर कहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “यहाँ स्पष्ट है कि पहले शादी का कोई वादा नहीं था। यह कोई ऐसा मामला नहीं है जहाँ महिला कोई बच्ची थी जो अपना भविष्य ना देख सके। उसे भली भांति अपना अच्छा बुरा पता था और उसने सहमति से अपनी पहली शादी के बावजूद ऐसा किया, असल में तो यह मामला अपने पति को धोखा देने का बनता है।”

कोर्ट ने कहा कि जहाँ महिला ने 2018 में ही अपने पहले पति से तलाक लेने की बात पुलिस के सामने कही, वहीं यह तलाक 2021 में कोर्ट द्वारा दिया गया। ऐसे में उसके द्वारा मंदिर में की गई शादी का कोई आधार भी नहीं बनता। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि महिला ने अपनी सहमति से ही सेक्स किया था।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यह विश्वास करना बड़ा मुश्किल होगा कि एक ही घर में दोनों सेक्स कर रहे थे और महिला के माता-पिता तथा बेटी को इसकी जानकारी भी थी जबकि महिला पहले से शादीशुदा थी। कोर्ट ने कहा कि महिला की शिकायत में कई गड़बड़ियां हैं। यह न्याय प्रक्रिया की अवहेलना के अंतर्गत आता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दर्ज FIR को रद्द कर दिया।

कहाँ जाएँ पाकिस्तानी हिंदू: गुरुद्वारा, अतिक्रमण, पर्यावरण मामले में NGT का आदेश, DDA लेगी एक्शन… लेकिन उजड़ जाएगी जिंदगियाँ

दिल्ली में मजनू का टीला के पास से अवैध अतिक्रमण हटाने का मामला इस समय गरमाया हुआ है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश पर डीडीए ने यमुना किनारे झुग्गी बनाकर रह रहे लोगों को हटने के लिए कहा है। इनमें कई पाकिस्तानी हिंदू परिवार भी हैं। लंबे समय से ये लोग यहाँ अपना घर बनाकर रहते हैं लेकिन अब ये कहाँ जाएँगे ये सवाल खड़ा हो गया है। क्षेत्र में एक गुरुद्वारा भी है। कोर्ट में जो मसला गया है उसमें ये आरोप हैं कि इसी गुरुद्वारे के दक्षिणी इलाके में अतिक्रमण हो रखा है।

किन बिंदुओं पर जारी हुआ आदेश

जानकारी के मुताबिक, पूरे मामले को जगदेव नाम के शख्श ने ग्रीन ट्रिब्यूनल के समक्ष उठाया था। अब उनकी मृत्यु के बाद उनके कानूनी उत्तराधिकारी विनायक खत्री मामला लड़ रहे हैं। सामने आई रिपोर्ट से पता चलता है कि शिकायत के मुख्य तीन कारण हैं:

  • मजनू के टीले के पास बने गुरुद्वारे के दक्षिणी क्षेत्र में यमुना तल पर किया गया अतिक्रमण।
  • पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई, जिससे यमुना नदी के सिस्टम, बाढ़ के मैदान की समग्रता नष्ट हो रही है और क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव आ रहा है।
  • इसके अलावा झुग्गी में रहने वाले लोगों ने आउटर रिंग रोड के आसपास अपने स्टॉल लगा लिए हैं जिससे ट्रैफिक जाम होता है और जो भी कचड़ा या गंद वहाँ से निकलता है वो यमुना नदी में डाला जाता है, जो कि ग्रीन बेल्ट का हिस्सा है।

NGT के निर्देश

इस मामले में दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बारे में जानकारी दी है। इसमें बताया गया की एनजीटी ने अपने निर्देशों में बताया था कि उनके समक्ष डीडीए द्वारा मामले की रिपोर्ट 2019 में जमा की गई थी, जिसमें अवैध कब्जे की बात को स्वीकार किया गया था। इसमें कहा गया था कि इन इलाकों में पाकिस्तानी हिंदू रहते हैं जो वीजा पीरियड खत्म होने के बाद भी भारत में रह रहे हैं। इसमें ये भी जानकारी भी दी गई थी कि केंद्र सरकार इनके स्टे को बढ़ाने के लिए विचार कर रही है।

हालाँकि, NGT ने कहा कि ये मामला न्यायाधिकरण के समक्ष विचार का विषय है, पर ट्रिब्यूनल के सामने जो मसला है वो यमुना नदी के मैदान, जंगल, पेड़ और बाकी पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर है। नदी के बाढ़ के मैदानों पर कब्ज़ा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि इस तरह के कब्ज़े से नुकसान हो सकता है। एनजीटी के निर्देशों में कहा गया है कि नदी के पास बाढ़ वाले मैदान से अतिक्रण हटाया जाए और पेड़, जंगल, पर्यावरण को संरक्षित किया जाए।

इस पूरे मामले में एनजीटी ने 30 जुलाई 2019 को जारी किए गए अपने आदेश में डीडीए को नोडल एजेंसी नियुक्त किया था। अब उन्होंने ही पाकिस्तान से आए हिंदू परिवार समेत उन सभी लोगों को नोटिस भेजा है जो उस भूमि पर घर बनाकर रहे हैं। गुरुवार को इन्हें जगह खाली करने के आदेश दिए गए हैं।

रहने का इंतजाम हो भी जाए तो, लेकिन जीविका का क्या?

मीडिया रिपोर्ट बता रही हैं कि इनके रहने के लिए रैन बसेरों का इंतजाम किया गया है जहाँ ये शिफ्ट होंगे। मगर सवाल वही उठ रहा है कि इतने लंबे से एक जगह पर अपना घर बनाकर रहने वाले 160 पाकिस्तानी हिंदू के परिवार, भारत के स्थायी निवासी नहीं हैं। इनके लिए ये देश अलग है जहाँ ये सहारा लेने आए थे और जहाँ जगह मिली वहीं इन्होंने अपने सारे काम शुरू कर दिए।

अब इनके एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के चक्कर में जो उनकी जीविका व अन्य चीजें प्रभावित होंगी… उसका क्या समाधान है। ये लोग फिलहाल मजनू के टीले के आसपास स्टॉल लगाकर या कोई काम करके अपना गुजारा करते हैं उन्हें दूसरी जगह जाने पर फिर वहीं संघर्ष करने होंगे जो उन्होंने भारत आने के बाद परिवार पालने के लिए किए थे।

मजनू का टीले से अलग करके इन्हें जो आश्रय स्थान देने की व्यवस्था की जा रही है वो गृह ब्लॉक 10, गुरुद्वारा गीता कॉलोनी, आश्रय गृह सेक्टर 3, फेज-1, द्वारका में हैं।

बेंगलुरु धमाके में मजहबी कनेक्शन: आतंकी ने एक मस्जिद के पास छोड़ी टोपी, बदले कपड़े भी – NIA ने जारी की फोटो, ₹10 लाख इनाम

1 मार्च को कर्नाटक के बेंगलुरु में एक मशहूर कैफे के भीतर हुए धमाके के आरोपित की और भी जानकारी निकल कर सामने आ रही हैं। इस धमाके की जाँच अब NIA के हाथों में है। NIA ने धमाका करने वाले संदिग्ध की एक फोटो जारी करके ईनाम की घोषणा की है।

धमाका करने वाले संदिग्ध की बस और कैफे के भीतर की CCTV वीडियो सामने आई हैं। पता चला है कि वह धमाके वाली जगह पर सार्वजनिक बस में आया था। उसके चेहरे की जानकारियाँ भी स्पष्ट हुई हैं, इसमें उसका बिना टोपी का चेहरा दिखा है। जाँच एजेंसी को उसकी टोपी भी एक मस्जिद के पास से मिली है।

रामेश्वरम कैफे में धमाका करने वाला संदिग्ध सुबह 10:45 मिनट पर एक सार्वजनिक बस से उतरा था। यह बस स्टॉप कैफे से मात्र 100 मीटर ही दूर है। इसके बाद वह घूमता हुआ 11:34 पर कैफे में घुसा और 8 मिनट बाद ही बाहर निकल गया। इस बीच ही उसने यहाँ बम रखा।

वह यहाँ से निकलने के बाद एक किलोमीटर दूर स्थित एक बस स्टॉप पर गया और वहाँ से बस पकड़ ली। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह संदिग्ध अपने इस रास्ते में एक मुस्लिम मजहबी केंद्र पर भी रुका था। यहाँ उसने अपना भेष बदला था और टोपी भी छोड़ दी थी।

NIA ने यह टोपी बरामद कर ली है। यह इस मामले में एक बड़ा सुराग मानी जा रही है। अपने 8 मिनट के ठहराव के दौरान ही उसने इस कैफे में हाथ धोने वाली जगह पर बम का बैग रख दिया। यह एक IED था, जिसमें टाइमर लगा हुआ था। संदिग्ध के जाने के लगभग 1 घंटे बाद (12:56 बजे) यह धमाका हो गया। जिसमें 9 लोग घायल हुए।

इस बम को बनाने के लिए कुछ विस्फोटक और लोहे के नट बोल्ट इस्तेमाल किए गए थे। धमाका होने पर यह उड़ कर लोगों को चोट पहुँचाते। हालाँकि, यह बैग रखने में इस आतंकी से चूक हुई जिसके कारण इसका असर सीमित रहा और कोई हताहत नहीं हुआ।

इस संदिग्ध की पहचान के लिए NIA ने उसकी फोटो वाला एक पोस्टर जारी किया है। इसमें वह टोपी लगाए हुए नजर आता है, उसके कंधे पर एक बैग भी है। इसने काले रंग की पैंट और ग्रे रंग की शर्ट पहनी है। इसी के साथ उसने काले रंग के जूते पहने हैं जबकि उसकी टोपी क्रीम कलर की है।

उसने एक चश्मा भी लगाया है। बस के अंदर से सामने आई फोटो में वह बिना टोपी के दिखा है। इसमें स्पष्ट नहीं है लेकिन जहाँ तक उसने एक टीशर्ट पहनी हुई है। NIA ने इसके विषय में जानकारी देने पर ₹10 लाख ईनाम घोषित किया है।

गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार (1 मार्च, 2024) को बेंगलुरु के वाइटफील्ड इलाके में स्थित रामेश्वरम कैफे में दोपहर में एक धमाका हुआ था। इस धमाके में 9 लोग घायल हुए थे। धमाके के पीछे की जानकारी बाद में निकल कर सामने आई थी। इसके बाद इस मामले की जाँच NIA ने चालू कर दी थी। तब से ही इस संदिग्ध की पहचान स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

UP के 13000 अवैध मदरसों पर लगेगा ताला? SIT ने दी रिपोर्ट: अधिकतर नेपाल सीमा पर बने, खाड़ी देशों ने दिया पैसा

उत्तरप्रदेश में योगी सराकर के आदेश के बाद अवैध मदरसों की जाँच कर रही विशेष जाँच टीम (SIT) ने अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में 13 हजार अवैध मदरसों को बंद कराने की सिफारिश की गई है। इनमें अधिकतर मदरसे नेपाल सीमा के पास चलते मिले। ये भी पता चला कि इन अवैध मदरसों को पिछले दो दशकों में ही बनाकर खड़ा गया है और इसे बनाने के लिए पैसा खाड़ी देशों से आया था।

सूत्रों से दी गई एसआईटी रिपोर्ट की अन्य जानकारियों में बताया गया है कि जिन 13 हजार मदरसों पर कार्रवाई के लिए कहा गया है, उनमें से कुछ बहराइच, श्रावस्ती, महराजगंज जैसे 7 जिलों में है। चौंकाने वाली बात ये है कि हर बॉर्डर वाले जिले में इनकी संख्या 500 पार है, लेकिन जब एसआईटी ने इनकी आमदनी और खर्चे का हिसाब-किताब माँगा तो इनके पास कोई जवाब नहीं था।

टीम को आशंका है कि कहीं किसी सोची-समझी साजिश के तहत इन मदरसों का निर्माण न हुआ हो और इन्हें बनाने में टेरर फंडिंग के लिए जुटाई गई रकम हवाला के जरिए न भेजी गई हो।

ये शक इसलिए भी और बढ़ रहा है क्योंकि जाँच के दौरान जब अधिकारियों ने पूछा कि मदरसा कैसे बना तो उन्होंने बताया कि चंदे की रकम से। मगर, जब कहा गया कि वो चंदा देने वालों का नाम बताएँ तो उन्होंने इस पर कुछ नहीं कहा और न ही वह दानदाताओं का नाम बता पाए।

इसके अलावा ये भी सामने आया है कि इन मदरसों में बच्चों का यौन शोषण भी होता रहा है। साथ ही ये बात भी निकलकर आई है कि यहाँ पढ़ने वाले बच्चों को नौकरी पाने में समस्या होती है।

ऐसे ही कुछ 23 हजार मदरसे जिनकी जाँच एसआईटी ने की, उनमें से 5 हजार के पास मान्यता अस्थायी मिली। वहीं कुछ ऐसे मिले जिन्हें देखकर लगा कि वो मान्यता के मानक पूरे करने में कोई दिलचस्पी नहीं रखते। राज्य में केवल 5 हजार मदरसे ही ऐसे थे जिनमें कोई दिक्कत नहीं दिखी।

बता दें कि अवैध मदरसों का यह मामला ऑपइंडिया ने पिछले साल 2022 में प्रमुखता से उठाया था। हमारी साइट पर इस मामले पर 25 से अधिक ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित हैं। इन रिपोर्टों में नेपाल सीमा से सटे ग्रामों में होता डेमोग्राफी चेंज, वहाँ पसरा लव जिहाद के बारे में बताया गया था। इसके बाद

दीपक को साबिर, सुहान, ऐजाद ने गला घोंट कर मारा, आँख निकाली, हाथ-पाँव-दांत तोड़े, एसिड डालकर जलाया: 3 गिरफ्तार

हरियाणा के फरीदाबाद में एक नाबालिग दीपक की कुछ मुस्लिमों ने निर्दयता से हत्या कर दी और शव दफना दिया। मृतक के परिवार ने आरोप लगाया है कि दीपक ने इन मुस्लिमों को गोकशी करते हुए देखा था इसलिए उसे मार दिया गया। अभी इस मामले में पुलिस ने 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार, 29 फरवरी, 2024 को फरीदाबाद के अरुआ गाँव का रहने वाला 17 वर्षीय दीपक अपने घर से गायब हो गया था। दीपक के भाई अर्जुन ने बताया कि वह शाम को घर से निकला था लेकिन जब काफी देर तक नहीं लौटा तो घर वालों ने उसकी तलाश चालू की।

हालाँकि, दीपक का कोई सुराग नहीं लग सका। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में जाँच चालू की। इस मामले में पुलिस को पास के ही गाँव के ऐजाद, सुहान और साबिर पर शक हुआ। इन तीनों को गौतम बुद्ध नगर के दनकौर से पुलिस ने हिरासत में लिया। उनसे पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि उन्होंने दीपक की हत्या कर दी है।

इस पूछताछ के दौरान आरोपितों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने शव को यमुना नदी में फेंका है। हालाँकि, जब नदी में शव नहीं मिला तो दोबारा पूछताछ हुई। इसमें उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने दीपक का शव एक गड्ढे में दफनाया है। यह शव बाद में पुलिस ने काफी खराब अवस्था में बरामद किया।

दीपक का सड़ी गली अवस्था में बरामद हुआ था। इससे लग रहा था कि शव पर तेज़ाब डाल कर पहचान मिटाने की कोशिश की गई। इसके अलावा दीपक की हत्या के बाद उसके हाथ पाँव और दांत भी तोड़ दिए गए थे। दीपक की एक आँख भी इन हत्यारों ने निकाल ली थी। उसके साथ बर्बरता से पहले मफलर से उसका गला घोंटा गया था।

दीपक के परिजनों का कहना है कि दीपक ने ऐजाद को उसके परिजनों समेत खेतों की तरफ गौकशी करते हुए देख लिया था। दीपक किसी को यह बात बता ना दे इसके लिए ऐजाद ने साबिर और सुहान के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी।

इस हत्या को लेकर अरुआ गाँव में पंचायत भी बुलाई गई थी। इस पंचायत में इन तीनों गिरफ्तार आरोपितों के अलावा और भी लोगों को गिरफ्तार करने की माँग की गई, इनके नाम भी दिए गए हैं। पंचायत में जिन लोगों के नाम दिए गए हैं, वह सभी मुस्लिम हैं। पंचायत में लगभग 15 और लोगों को गिरफ्तार करने की माँग की गई है।

पुलिस ने बताया है कि जिन आरोपितों को दीपक हत्याकांड के सम्बन्ध में पकड़ा गया है, वह इसका दूसरा कारण बता रहे हैं। छायन्सा थाने के पुलिस अधिकारी ने बताया है कि आरोपितों का कहना है कि दीपक उनकी बहन से बातचीत करता था इसलिए हत्या की गई। अब इस मामले में की जाँच थाने से लेकर क्राइम ब्रांच को दे दी गई है।

‘आजकल बस सीता-नीता का पति मैटर करता है….’: बॉलीवुड के मशहूर पत्रकार ने हिंदू आस्था का उड़ाया मजाक, विवाद बढ़ने पर तीन बार माँगी माफी

सोशल मीडिया पर क्रिएटिव होने के नाम पर कब कोई सीमा लांघ जाता है उसे खुद नहीं पता चलता। इन दिनों सबसे तेज इंटरटेनमेंट न्यूज देने वाले पैपराजी विरल भयानी के साथ हाल में यही हुआ। उनके पेज से मुकेश अंबानी द्वारा जामनगर में आयोजित कराए गए कार्यक्रम की मीडिया कवरेज पर स्टोरी डाली गई। लेकिन इस दौरान जोक के नाम पर उन्होंने अपनी स्टोरी में माता सीता का नाम भी घुसा दिया।

स्टोरी में विरल भयानी के पेज से लिखा गया- “आजकल भारत में सिर्फ 2 पति ही मैटर करते हैं। एक सीता का और दूसरा नीता।” उनकी इस स्टोरी लगाने के बाद इसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। विरल भयानी को टैग कर करके स्टोरी डिलीट करने को कहा जाने लगा।

जब विवाद बढ़ा तो विरल भयानी के पेज से इस संबंध में लोगों के ट्वीट के नीचे ट्वीट कर करके माफी माँगी जाने लगी। जैसे रैंडम सेना ने इस मुद्दे को उठाते हुए स्टोरी का स्क्रीनशॉट शेयर करके लिखा- “इस स्टोरी को डिलीट करो विरल भयानी और माफी माँगो वरना कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहो। हमें तुम्हारा पता भी पता है।”

इस ट्वीट के नीचे पहले विरल भयानी ने लिखा- “माफ करना अगर किसी को पीड़ा हुई। मैं दिल से माफी माँगता हूँ। मैंने स्टोरी को डिलीट कर दिया है।”

इस ट्वीट पर उन्होंने अगला ट्वीट किया, “मैं अपनी टीम और अपनी ओर से पोस्ट की गई स्टोरी के लिए गहराई से माफी माँगता हूँ। यह सिर्फ एक फारवर्ड था और मेरी टीम ने अनजाने में इसे डाल दिया। लेकिन मुझे एहसास हुआ कि यह गलत था और श्री राम का प्रबल अनुयायी होने के नाते, मैं समझता हूँ कि मैंने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई है।”

बता दें कि इस वर्ष जो मुद्दे मीडिया में काफी चर्चा में रहे उनमें अयोध्या का राम मंदिर और अब जामनगर में मुकेश अंबानी द्वारा अपने छोटे बेटे के लिए आयोजित कराया गया कार्यक्रम शामिल हैं। ऐसे में लोग इन्हें आपस में जोड़कर इनपर कॉमेडी करने का प्रयास कर रहे हैं बिन ये समझे कि मुकेश अंबानी तो एक इंसान है। लेकिन भगवान राम और माता सीता से भक्तों की श्रद्धा जुड़ी हुई है। उनका नाम इस तरह कॉमेडी के लिए लेना न केवल अपमान है बल्कि तुच्छ मानसिकता का प्रमाण भी।

यही वजह है कि विरल भयानी ने अपनी गलती का एहसास होते ही अपनी स्टोरी को हटाकर वहाँ माफी माँगते हुए एक पोस्ट डाला है। इसमें लिखा है- “मैं इस स्टोरी के लिए माफी माँगता हूँ, मेरा किसी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की मंशा नहीं थी।” इसी पोस्ट को उन्होंने तीसरी बार रैंडम सेना के ट्वीट के नीचे भी डाला।

कौन हैं विरल भयानी?

विरल भयानी एक भारतीय फोटोग्राफर और कंटेंट क्रिएटर हैं। उन्हें बॉलीवुड के फेमस पैपराज़ी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने पहले मीडिया हाउस के लिए एक पत्रकार के रूप में अपना करियर शुरू किया। अब उनकी खुद की एक टीम है जो फिल्म जगत की हस्तियों से जुड़ी जानकारी सबसे पहले दर्शकों को देने के प्रयास में रहती है।

मथुरा में जिस कुएँ को भगवान कृष्ण के परपोते ने बनवाया, वहाँ हिंदुओं के पूजा में मुस्लिम डाल रहे अड़ंगा: इलाहाबाद हाई कोर्ट में पूजा के अधिकार के लिए याचिका

मथुरा में शाही ईदगाह विवादित ढाँचा के भीतर बने कुँए पर हिन्दुओं ने होली के मौके पर पूजा करने की माँग की है। इसके लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की गई है। कहा गया है कि मुस्लिम पक्ष लगातार यहाँ पूजा में व्यवधान उत्पन्न करता आया है ऐसे में पूजा को सुचारू रूप से करवाया जाए।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष यह याचिका श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेन्द्र प्रताप सिंह ने लगाई है। उन्होंने कहा है कि शाही ईदगाह विवादित ढाँचा में सीढ़ियों के पास बने कुँए पर लम्बे समय से हिन्दू पूजा करते आए हैं, लेकिन अब मुस्लिम इसमें व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं। यह कुआँ हिन्दुओं के लिए धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है और इसका निर्माण श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने करवाया था।

इस कुएँ पर महिलाएँ होली के त्यौहार के बाद शीतला माता की पूजा करती हैं। यह बासोड़ा की पूजा कही जाती है। यह पूजा लम्बे समय से होती आई है। लेकिन जबसे श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर हिन्दुओं ने सर्वे सहित अन्य माँगे चालू की हैं, तबसे मुस्लिम पक्ष इस पूजा में व्यवधान डालने लगा है। अब इस पूजा को करवाने के लिए प्रशासन को भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ती है। पिछले वर्ष भी ऐसा ही हुआ था।

याचिका लगाने वाले महेन्द्र प्रताप सिंह का कहना है कि मुस्लिम पक्ष का यह रवैया तब है जब यहाँ पूजा को लेकर कोर्ट का रोक जैसा कोई आदेश नहीं है। उन्होंने कहा कि यहाँ लोग अपने बच्चों का मुंडन आदि करवाते थे। यहाँ पर हिन्दुओं का पूजा का अधिकार सुरक्षित हो सके, ऐसे में हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई है। इस याचिका पर सुनवाई 13 मार्च, 2024 को हो सकती है। इस दिन शाही ईदगाह – कृष्ण जन्मभूमि मामले को कोर्ट द्वारा सुना जाना है।

गौरतलब है कि यह शाही ईदगाह वर्तमान में विवादित है और इसको लेकर न्यायालयों में कई याचिकाएँ पड़ी हुई हैं। हिन्दू पक्ष का कहना है कि मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बराबर में बनी शाही ईदगाह वाला ढाँचा जबरन वही बना दिया गया जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस जगह पर कब्जा करके ढाँचा बनाया गया है। यहाँ अभी भी कई ऐसे सबूत हैं जो कि यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ पहले एक मंदिर हुआ करता था।

हिन्दू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ था और यह जन्मस्थान शाही ईदगाह के वर्तमान ढाँचे के ठीक नीचे है। सन् 1670 में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने मथुरा पर हमला कर दिया था और केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करके उसके ऊपर शाही ईदगाह ढाँचा बनवा दिया था और इसे मस्जिद कहने लगे। 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए हिन्दू यहाँ से शाही ईदगाह ढाँचे को हटाने की माँग करते रहे हैं।

रिपब्लिक टीवी के खिलाफ दर्ज TRP मामला निराधार: कोर्ट ने केस वापस लेने की दी अनुमति, उद्धव सरकार ने धमकी देकर तैयार किए थे गवाह

मुंबई की एक अदालत ने बुधवार (6 मार्च 2024) को रिपब्लिक टीवी और उसके एडिटर अर्नब गोस्वामी के खिलाफ दर्ज फर्जी टीआरपी मामले को वापस लेने का अनुमति दे दी। दरअसल, मुंबई पुलिस ने कोर्ट में एक आवेदन दिया था। इस आवेदन में उद्धव ठाकरे की सरकार के कार्यकाल में दर्ज मामले को बंद करने की अपील की थी। कोर्ट ने इस आवेदन को स्वीकार कर लिया।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि यह मामला झूठे सबूतों पर टिका हुआ है। महाराष्ट्र राज्य सरकार ने भी अदालत में यह स्वीकार किया है कि अर्नब गोस्वामी और उनके रिपब्लिक टीवी चैनल के खिलाफ दर्ज मामला झूठे सबूतों पर आधारित था।

बताते चलें TRP और व्यूवरशिप बढ़ाने को लेकर कुछ अन्य चैनलों के खिलाफ लगे थे। इसके बाद तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार ने बिना किसी ठोस सबूत के ही रिपब्लिक टीवी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली थी। अदालत ने यह भी माना कि रिपब्लिक टीवी के खिलाफ तत्कालीन सरकार द्वारा कोर्ट में झूठे सबूत पेश किए गए थे।

यहाँ तक कि कोर्ट ने यह भी माना कि तब गवाहों को रिपब्लिक टीवी के खिलाफ झूठी गवाही देने के लिए धमकी देकर मजबूर भी किया गया था। अर्बन गोस्वामी ने इस मौके पर कहा कि सत्य की हमेशा जीत होती है और झूठ कभी भी नहीं जीत सकता। हालाँकि, इस मामले में विस्तृत आदेश की अभी प्रतीक्षा है।

राज्य सरकार ने कोर्ट में दाखिल की थी ये एप्लिकेशन

रिपब्लिक टीवी के मामले में महाराष्ट्र की वर्तमान राज्य सरकार ने अदालत में नई एप्लिकेशन दाखिल की है। इस एप्लिकेशन में बताया गया है कि अधिकतर गवाहों ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत अपने शपथ पत्र में यह माना कि उन्हें पुलिस अधिकारियों द्वारा धमकी दी गई थी। उन गवाहों ने सरकारी मशीनरी के दबाव में तब ऐसा कदम उठाने की हामी भरी थी।

इसके अलावा, इस केस में व्यूवरशिप का डाटा रखने वाली BARC ने भी जाँच अधिकरी के पास कोई शिकायत नहीं दर्ज करवाई थी। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अब इस केस को चलाना एक बेवजह का प्रयास होगा। आवेदन में आगे कहा गया है कि राज्य सरकार ने काफी सोच-विचार कर रिपब्लिक टीवी के खिलाफ दर्ज केस को वापस लेने की सिफारिश की है।

केस वापसी की इस कार्रवाई के लिए पुलिस कमिश्नर ऑफिस को भी सूचना दे दी गई है। केस के जाँच अधिकारी ने सीआरपीसी की धारा 321 के तहत लोक अभियोजक कार्यालय को भी सरकार के इस फैसले से अवगत करा दिया है। ऑपइंडिया के पास राज्य सरकार द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र की कॉपी मौजूद है।

क्या था फर्जी TRP घोटाला

साल 2020 के अक्टूबर माह में मुंबई के पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने अपने एक बयान में रिपब्लिक टीवी पर टीआरपी में हेरफेर करने का आरोप लगाया था। तब मुंबई पुलिस कमिश्नर ने दावा किया था कि रिपब्लिक टीवी चैनल ने अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए कुछ परिवारों को तब भी चैनल चालू रखने के लिए अवैध रूप से पैसे दिए थे।

आरोपों के मुताबिक, भले ही वो परिवार घर पर न हों पर उन्हें टीवी पर रिपब्लिक चैनल चला कर रखने के लिए कहा गया था। इसके अलावा तब मुंबई पुलिस ने टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट (टीआरपी) में हेरफेर करने के आरोप में फक्त मराठी, बॉक्स सिनेमा और रिपब्लिक टीवी के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। यह सब कुछ तत्कालीन उद्धव सरकार के कहने पर हो रहा था।

उस समय हमें पता चला था कि मूल FIR में रिपब्लिक टीवी का कहीं जिक्र भी नहीं था। दरअसल, मूल एफआईआर में इंडिया टुडे का नाम था। यह FIR हंसा रिसर्च ग्रुप द्वारा दर्ज करवाई गई थी। मामला सामने आने के बाद मुंबई पुलिस के जॉइंट कमिश्नर को यह सच कबूल करना पड़ा था कि ‘फर्जी टीआरपी’ वाली एफआईआर में इंडिया टुडे का भी नाम था।

सितंबर 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुंबई की एक अदालत में इस पूरे मामले की जाँच कर के चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में भी इस बात की पुष्टि हुई थी कि फर्जी टीआरपी मामले में रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। रिपब्लिक के खिलाफ इस आरोप को आधारहीन बताया गया था।

ED की चार्जशीट से ही यह बात साफ हो गई थी कि मुंबई पुलिस की जाँच की दिशा उन से पूरी तरह से अलग थी। तब उन परिवारों के भी बयान दर्ज हुए थे, जिन पर मुंबई पुलिस ने पैसे लेकर रिपब्लिक टीवी वाला चैनल ऑन रखने के आरोप लगाए थे। हालाँकि उन परिवारों ने अपने बयान में इन आरोपों से इंकार किया था और किसी भी तरह के पैसे आदि लेने की बातों को आधारहीन बताया था।

‘तू च**र, मैं नहीं कर सकता शादी’: आकाश बनकर अनीस ने दलित महिला को फाँसा, रेप और इस्लाम में धर्मांतरण केस में उम्रकैद की सजा

उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर की जिला अदालत ने बुधवार (6 मार्च 2024) को एक दलित लड़की के साथ रेप और धर्मान्तरण के आरोपित अनीस अहमद को उम्रकैद की सजा सुनाई। अनीस ने आकाश बनकर हिन्दू लड़की से दोस्ती की थी। उसके बाद शादी का झाँसा देकर रेप किया और फिर इस्लाम में जबरन धर्मान्तरण करवा दिया था। अदालत ने अनीस पर 4 लाख 6 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोका है।

बुलंदशहर पुलिस के मुताबिक, अनीस अहमद पुत्र हप्पू मूल रूप से हापुड़ जिले के आवास विकास कॉलोनी का निवासी है। साल 2022 में उसने अपना नाम बदलकर दिल्ली के मंगोलपुरी की रहने वाली और हापुड़ में ब्याही एक दलित महिला से दोस्ती की और फिर शादी का झाँसा देकर यौन संबंध बनाए। बाद में अनीस ने पीड़िता का धर्म परिवर्तन भी करवाया। पुलिस ने इसे दुस्साहसिक हरकत माना था।

पीड़िता की शिकायत पर गुलावठी थाने में 15 मार्च 2022 को अनीस के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। तब पुलिस ने IPC की धारा 420, 376(2), 406 के साथ 3/5 धर्म संपरिवर्तन और 3(2)5 एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। पुलिस ने जाँच कर के 27 अप्रैल 2022 को इस मामले की चार्जशीट अदालत में पेश कर दी थी। पुलिस ने इस केस में कड़ी पैरवी की थी।

कुल 5 गवाहों ने अनीस अहमद के खिलाफ गवाही दी। आखिरकार 6 मार्च 2024 को बुलंदशहर के एडीजे स्पेशल एससी/एसटी कोर्ट ने अनीस को आजीवन कारावास और 4 लाख 6 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया। अनीस की सजा को बुलन्दशहर पुलिस ने अपनी बड़ी सफलता माना है। अनीस के खिलाफ सरकारी वकील विपुल कुमार राघव ने बहस की।

तू च**र है, तुझ से शादी नहीं कर सकता

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR की कॉपी में पीड़िता ने बताया था कि वह शादीशुदा थी। आकाश बनकर उससे मिला अनीस पीड़िता को बुलंदशहर लेकर आ गया था। यहाँ उसने गुलावठी कस्बे में हनुमान मंदिर के पास किराये पर एक कमरा लिया। इसके बाद अनीस ने कई बार पीड़िता का यौन शोषण किया। विरोध करने पर वह शादी करने का झाँसा दिया करता था।

थोड़े दिन बाद अनीस की असलियत पीड़िता के आगे आ गई। पीड़िता को पता चल गया कि जिसे वह आकाश समझ रही थी, दरअसल वह हिन्दू है ही नहीं। वह तो मुस्लिम है और उसका नाम आकाश नहीं बल्कि अनीस है। आखिरकार शादी के नाम पर अनीस ने पीड़िता को जबरन इस्लाम कबूल करवा दिया। धर्मान्तरण के बाद पीड़िता का नाम आयशा रखा गया।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया था कि कुछ दिनों बाद ही अनीस उसे छोड़कर चला गया। पीड़िता ने उसे फोन करके जाने की वजह पूछी तो अनीस ने उसे जातिसूचक शब्द बोले। आरोप है कि अनीस ने तब कहा, “तू च**र है। तुझ से शादी नहीं कर सकता।” इतना कहकर अनीस ने फोन काट दिया। फरार होने से पहले अनीस ने पीड़िता के ढाई लाख रुपए कैश और कुछ गहने भी हड़प लिए थे।

बॉडी बनाने के चक्कर में जहरीला साँप भून कर खा गए बच्चे, मोहम्मद मुनाजिर और फहद अजीम को अस्पताल में कराया गया भर्ती

बिहार के जमुई जिले में मंगलवार (5 मार्च 2014) को 2 बच्चों ने साँप को मार कर खा लिया। दोनों की पहचान मोहम्मद मुनाजिर और फहद अजीम के तौर पर हुई है। इन दोनों की उम्र लगभग 5 वर्ष बताई जा रही है। मुनाजिर और फ़हद को अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई है। बताया जा रहा है कि किसी तीसरे बच्चे ने इन दोनों को साँप खाने पर ताकत आने जैसे बातें कहकर बहकाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला अमारी पंचायत में आने वाले गाँव खड़ूई का है। साँप खाने वाले दोनों बच्चों की माँ रूबी खातून ने बताया कि गाँव का एक ही बड़ा बच्चा कहीं से मरा हुआ साँप लेकर आया था। यह साँप जहरीली करैत प्रजाति का था। आरोप है कि बड़े बच्चे ने मुनाजिर और फहद को लालच दिया कि अगर वो मरे हुए साँप को खा लेते हैं तो उनकी बॉडी बन जाएगी और शरीर में ताकत आ जाएगी। इस लालच में दोनों बच्चे साँप को खाने के लिए तैयार हो गए।

बच्चों ने घर के पीछे आग जलाया और वहाँ साँप को भूना। फिर दोनों ने भुने हुए साँप को खाना शुरू कर दिया। इस बीच किसी ने इसके बारे में बच्चों के घर में इसकी जानकारी दे दी। घर वाले भागकर घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने देखा कि आग में भुने साँप के कुछ हिस्से दोनों बच्चे खा चुके थे। शरीर में जहर फैलने की आशंका के चलते घर वाले दोनों बच्चों को अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने दोनों को प्राथमिक चिकित्सा दी। वहीं, साँप लाने वाले बच्चे ने उसे खाने से मना कर दिया।

मुनाजिर की नानी जहाना खातून ने आरोप लगाया है कि उसके नाती को साँप खाने की एवज में पैसे देने का भी लालच दिया गया था। दोनों बच्चों को साँप के मांस की गोलियाँ बनाकर खाने के लिए कहा गया था। कुछ देर की निगरानी के बाद दोनों बच्चों को अस्पताल में छुट्टी दे दी गई। सदर अस्पताल के डॉक्टर घनश्याम ने बताया कि फहद और मुनाजिर की हालत खतरे से बाहर है।