केंद्र सरकार और केरल सरकार के बीच एक वित्तीय विवाद के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय अर्थव्यवस्था की जमकर तारीफ की। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अब भारत की अर्थव्यवस्था को पूरी दुनिया में पहचान मिल रही है। देश को इस पर गर्व करना चाहिए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा, “पूरी दुनिया भारत को पहचान रही है। जब भी हम देश से बाहर जाते हैं तो हमें महसूस होता है कि भारत कितनी मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ आगे बढ़ रहा है…और ये सब तथ्यों और आँकड़ों पर आधारित है। हम सभी को इस पर गर्व होना चाहिए।”
Supreme Court comments on the Indian economy: "India is now being recognized by the whole world. India is thriving on a strong economy. It's clear when we go out of the country. India's economic growth is based on facts and figures. We are proud of it". Matter of the financial… pic.twitter.com/luUT0fRlqK
जानकारी के मुताबिक, केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस बात की शिकायत की हैं कि केंद्र सरकार उन्हें धन नहीं दे रही और इसकी वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने वित्त प्रबंधन के लिए 13000 करोड़ रुपए जारी करने और अतिरिक्त 15000 करोड़ रुपए की माँग की है। अब केंद्र इस मामले में उन्हें 13000 करोड़ देने से मना नहीं कर रहा है लेकिन 15000 करोड़ देने से मना कर रहा है। इसलिए इस मामले को केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट ले गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केरल और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को आज शाम तक ये मामला सुलझाने के लिए कहा है। साथ ही ये भी कहा है कि बैठक के बाद जो भी नतीजे होंगे उसके आधार पर वह दोबारा से कोर्ट में आ सकते हैं। कोर्ट ने उन्हें यह भी कहा है कि दोनों ही पक्षों को मामले के पेंडिंग रहने तक इस विषय में मीडिया से कोई बात नहीं करनी हैं।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक अजीब-ओ-गरीब मामला सामने आया है। यहाँ प्यार में धोखा खाए एक समलैंगिक साथी अपने प्रेमी की कार पर पेट्रोल डालकर जला डाला। प्रेमी की पहचान वैभव शुक्ला के रूप में हुई है। उसके कहने पर उसके समलैंगिक साथी दीप्तेश उर्फ दीप तनवानिया ने अपनी ब्रेस्ट सर्जरी करा ली और फिर दीपा बन गई। इसके बाद वैभव शुक्ला ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया। उससे वह भड़क उठा।
रिपोर्ट के मुताबिक, दरअसल, इंदौर निवासी दीप्तेश तलवानिया की 2021 में श्यामनगर निवासी वैभव शुक्ला से इंस्टाग्राम पर दोस्ती हुई थी। दोनों की दोस्ती धीमे-धीमे प्यार में बदल गई। कुछ रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि दीप थर्ड जेंडर था। खैर जो भी हो, कभी दीप कानपुर आकर होटल में वैभव शुक्ला से मिलता तो कभी वैभव इंदौर जाता और दीप के साथ बिताता। लगभग दो वर्षों तक यह रिश्ता चला।
बात शादी तक पहुँची तो वैभव शुक्ला ने यह कहकर मना कर दिया कि वह लड़की होती तो उससे शादी कर लेता। इसके बाद दीप ने अपनी प्लास्टिक सर्जरी और ब्रेस्ट सर्जरी करवा ली। इसे करवाने में उसे लगभग 70 लाख रुपए खर्च करने पड़े। हालाँकि, वह लिंग नहीं बदलवा पाया, क्योंकि उसके पास पैसे कम पड़ गए थे। इस बीच वैभव शुक्ला ने दीप से शादी करने से मना कर दिया।
इसके बाद दीप ने वैभव को सबक सिखाने का निर्णय लिया। इसके बाद दीप अपने दोस्त के साथ कानपुर पहुँचा और वैभव के घर के नीचे खड़ी कार पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। वारदात करने के बाद दोनों आरोपित बस से इंदौर के लिए निकल चुके थे। पुलिस ने बारा टोल प्लाजा पर ओवरटेक कर बस रुकवाई और दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
दीप्तेश तलवानिया इंदौर का रहने वाला है। वहीं, उसका दोस्त रोहन यादव भोपाल का रहने वाला है। वैभव शुक्ला कानपुर का रहने वाला है। उसका पिता का निरवाना नाम से एक रेस्टोरेंट चलाता है। परिवार में पिता, माँ और भाई हैं। दीप का कहना है कि वैभव शुक्ला के परिवार वालों को उसके संबंधों के बारे में जानकारी थी।
डीसीपी पूर्वी श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के अलावा त्रिनेत्र योजना के तहत घटनास्थल के आसपास लगाए गए कैमरों में खोजबीन की गई तो स्कूटी का नंबर मिला। स्कूटी के नंबर के जरिए रेपिडो नाम की फर्म के ऑफिस पहुँचे। वहाँ से दीप का आईडी और मोबाइल नंबर मिला। उसे सर्विलांस पर लिया तो बस की लोकेशन मिली। पुलिस ने बाराजोड़ टोल प्लाजा के पास घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3 साल की एक बच्ची के साथ रेप और अप्राकृतिक कृत्य के बाद हत्या करने वाले आरोपित को निचली अदालत से मिली मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। सजा पाए अपराधी का नाम दिनेश पासवान है। अपने फैसले का आधार अदालत ने मुल्जिम का आपराधिक इतिहास न होना बताया है। उच्च न्यायालय ने यह भी माना है कि अभी दिनेश पासवान में सुधार की गुंजाइश है। यह निर्णय 21 फरवरी 2024 को सुनाया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना उत्तर प्रदेश में फतेहपुर जिले के थानाक्षेत्र खागा की है। यहाँ 15 अक्टूबर 2021 को बच्ची के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। तब शिकायतकर्ता पिता ने बताया था कि 25 वर्षीय आरोपित दिनेश पासवान उनका पड़ोसी था। उसने उनकी 3 वर्षीया बेटी को सेब का लालच देकर अपने कमरे में बुलाने की कोशिश की थी। हालाँकि पहली कोशिश में नाकाम रहने के बाद आरोपित 12 बजे बच्ची को अकेला पाकर उसे अपने कमरे में ले आया। यहाँ उसने बच्ची के साथ रेप और अप्राकृतिक कुकृत्य किया था।
बाद में अपना नाम खुलने के डर से दिनेश पासवान से बच्ची की हत्या कर दी और लाश को छिपा दिया। आरोपित को 15 अक्टूबर की रात को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। अदालत में यह केस IPC की धारा 364, 376 AB,377, 302 और 201 के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत चलाया गया। 18 जनवरी 2022 को इस केस की सुनवाई के बाद फतेहपुर के पॉक्सो मामलों के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अभियुक्त दिनेश पासवान को दोषी पाया और मृत्युदंड की सजा सुनाई।
दिनेश पासवान ने अपनी इस सजा के खिलाफ हाईकोर्ट इलाहाबाद में अपील की थी। दिनेश की तरफ से वकील तनीषा जहाँगीर मुनीर और प्रदीप कुमार ने बहस की। यह सुनवाई न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति सैयद आफ़ताब हुसैन रिज़वी की बेंच में हुई। बचाव पक्ष ने दिनेश पासवान को बेगुनाह बताते हुए पुलिस की जाँच में तमाम कमियाँ गिनाईं। हालाँकि अभियोजन पक्ष ने दिनेश को मिली मौत की सजा को उचित ठहराया। अंत में दोनों पक्षों को सुनंने के बाद अदालत ने दिनेश पासवान के गुनाह को गंभीर माना।
इसके बावजूद अपने निर्णय में अदालत ने कहा कि मुल्जिम दिनेश पासवान शादीशुदा और 1 बच्चे का पिता है। इसी के साथ दिनेश का कोई पुराना आपराधिक इतिहास भी नहीं पाया गया। अदालत ने माना कि अभियुक्त दिनेश में भविष्य में सुधार की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। अंत में हाईकोर्ट ने दिनेश को मिली मृत्युदंड की सजा को 30 वर्ष के कारावास में तब्दील कर दिया।
झारखंड के कुछ इलाकों में आदम सेना नाम की एक नई सेना सामने आ रही है, जो मुस्लिमों की रहनुमाई की बात करती है। इस संगठन के लोग शरिया लॉ की तर्ज पर अपने नियम कानून थोपते हैं। मुस्लिम लड़कियाँ अगर किसी हिंदू से बात करते भी दिख जाए, तो ये उसे सबक सिखाते हैं। इन सब बातों का खुलासा हुआ रामपुर से, जहाँ आदम सेना के लोगों ने एक मुस्लिम लड़की को धमकाया। हालाँकि अब ये मामला बढ़ चुका है, तो आदम सेना के बारे में कई बड़ी जानकारियाँ भी निकल कर सामने आ रही हैं। क्या है ये आदम सेना, क्योंकि ये तेजी से चर्चा में आ रही है और क्या काम करती है ये सेना, इसकी जानकारी हम आपको दे रहे हैं।
क्या है आदम सेना?
आदम सेना मुस्लिमों का एक संगठन है, जिसमें कट्टरपंथी युवाओं की भरमार है। दावा है कि आदम सेना शरिया कानून लागू करना चाहती है। खासकर मुस्लिम महिलाओं पर। कहने के लिए ये मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा का विरोध करती है, लेकिन इससे जुड़े लोगों के वायरल वीडियो में सीधे-सीधे मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों को धमकाया जाता है कि अगर उन्होंने हिंदुओं से कोई मेलजोल रखा, तो फिर शरिया के हिसाब से उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रामगढ़ में पुलिस से शिकायत, पीड़ित ने सुनाई आपबीती
इस समय आदम सेना की वजह से झारखंड का रामगढ़ जिला चर्चा में है। यहाँ आदम सेना ने स्थानीय गाँवों में शरिया कानून लागू किया है। इसके तहत मुस्लिम लड़कियों को गैर-मुस्लिमों के साथ बातचीत करने पर प्रतिबंध है और उन्हें बुर्का पहनना अनिवार्य है। असहमति जताने वालों को आदम सेना के सदस्यों द्वारा बलात्कार, हत्या या समुदाय से निष्कासन की धमकियों का सामना करना पड़ता है। ये मामला रजरप्पा थाना क्षेत्र का है, जहाँ शिकायतकर्ता लड़की ने थाने में गुहार लगाई है कि उसे आदम सेना के कथित नेता सलमान और अहमद से जान का खतरा है।
पीड़ित लड़की ने कहा कि, “उन दोनों ने मुझसे कहा, ‘हम प्रशासनिक कार्रवाई को स्वीकार नहीं करते हैं, यहाँ शरिया कानून चलता है। इन लोगों ने मुझे और पूरे परिवार को पीटा और हमारा सामान भी घर से बाहर फेंक दिया और घर पर ताला लगा दिया।” पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा कि उसके परिवार को परेशान किया जा रहा है और अगर प्रशासन ने आदम सेना के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो वह एसपी आवास के सामने आत्महत्या कर लेगी। हालाँकि रजरप्पा थाना प्रभारी नवीन प्रकाश पांडे का कहना है। जिस आदम सेना का नाम लिया जा रहा है, वह इस इलाके में कहीं भी सक्रिय नहीं है। न ही इसके खिलाफ ऐसी कोई शिकायत मिली है।
आदम सेना झारखंड में सक्रिय, ये रहे सबूत
जितेंद्र प्रताप सिंह ने एक्स पर इस संगठन से जुड़े डिटेल्स शेयर किए हैं। इसमें एक रील में आदम सेना से जुड़ा जहाँगीर नाम का युवक बोल रहा है, ‘मोहब्बत का बुखार चढ़ा है तो आके हमसे माफी माँग ले, नहीं तो बुखार उतारने में आदम सेना कभी पीछे नहीं हटती।’
बिग ब्रेकिंग
झारखंड के रामगढ़ के कई गांवों में सख्त शरिया कानून लागू; महिलाओं का आरोप
शरिया कानूनों का सख्ती से कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए 'आदम सेना' नामक एक इस्लामी समूह का गठन किया गया है। इससे दुरामी, चित्तरपुर समेत कई गांव प्रभावित हुए हैं।
इस संगठन से जुड़ी एक फेसबुक आईडी पर डाली गई रील्स पर अगर मस्जिद की हिफाजत करने वाला तालीबानी होता है, तो हाँ मैं हूँ तालीबानी। अगर अपने हक की आवाज उठाने वाला आतंकवादी होता है, तो हाँ मैं हूँ आतंकवादी। मैं फिलिस्तीन की नहीं, बल्कि फिलिस्तीन के हर उस शख्स के साथ खड़ा हूँ, जो मस्जिद-ए-अक्सा के लिए अपनी जान कुर्बान कर रहा है। …ये आखिरी जंग है अक्सा की, अब मिट के रहेंगे….।”
इस संगठन के लोग जमीन पर काफी सक्रिय दिखते हैं। सर्दियों में मदरसों में कंबल बाँटने से लेकर तमाम कार्य आदम सेना कर रही है, ताकि लोगों को अपने साथ जोड़ा जा सके। इस संगठन से जुड़े तमाम पदाधिकारी झारखंड में हैं। इसका राष्ट्रीय अध्यक्ष मजरूल खान है, तो रेयाज खान नाम का आदमी झारखंड प्रदेश संयोजक है। मोहम्मद शाहनवाज इसका झारखंड प्रदेश अध्यक्ष है, जो सैफ खान लोहरदगा जिले का जिलाध्यक्ष।
इरशाद इब्र तहमीद रशादी नाम का युवक आदम सेना नाम लेकर लेकर मुस्लिम लड़कियों को धमका रहा है। उसकी प्रोफाइल पर लिखा है, “अल्लाह करे तुम डेट पर जाओ फलानी और हम आदम सेना अपनी पूरी टीम लेकर पहुँच जाए।”
सोशल मीडिया पर आदम सेना नाम का ये संगठन खूब सक्रिय है। इंस्टाग्राम पर इस संगठन के 19 हजार से ज्यादा फॉलोवर हैं तो जमीन पर भी इसकी सक्रियता दिखती है।
आदम सेना के इंस्टाग्राम अकाउंट का स्क्रीनशॉट
पूर्व मुख्यमंत्री ने उठाया मामला
ये मामला बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी उठाया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “झारखंड में पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे मुस्लिम महिलाओं पर जबरन शरिया कानून थोपने का काम चल रहा है। आदम सेना नामक गिरोह बनाकर कुछ असामाजिक तत्व मुस्लिम महिलाओं को हिन्दुओं से बातचीत नहीं करने का दबाव बनाते हुए घरों में घुसकर छेड़खानी भी कर रहे हैं। याद रहे… झारखंड देश के संविधान से चलेगा, किसी शरिया-शरीयत से नहीं! मुख्यमंत्री @ChampaiSoren जी, वोट बैंक के लालच में आदम सेना जैसे गिरोह को संरक्षण देने की बजाय इनके नापाक मंसूबे को कुचलने का काम करें।”
झारखंड में पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे मुस्लिम महिलाओं पर जबरन शरिया कानून थोपने का काम चल रहा है। आदम सेना नामक गिरोह बनाकर कुछ असामाजिक तत्व मुस्लिम महिलाओं को हिन्दुओं से बातचीत नहीं करने का दबाव बनाते हुए घरों में घुसकर छेड़खानी भी कर रहे हैं।
याद रहे… झारखंड देश के…
— Babulal Marandi (Modi Ka Parivar ) (@yourBabulal) March 6, 2024
इन सब बातों को देखने के बाद भी रामगढ़ के रजरप्पा पुलिस थाना प्रभारी के इस दावे कि ‘आदम सेना जैसी कोई ताकत जमीन पर नहीं है और न ही इस तरह की कोई बात सामने आई है’, इस पर कई सवाल खड़े होते हैं। चूँकि पीड़ित खुद कह रही है कि उसे आदम सेना के नाम से धमकाया जा रहा है और शरिया लागू करने की बात की जा रही है, ऐसे में आदम सेना के खिलाफ कार्रवाई न करके सीधे-सीधे पलड़ा झाड़ लेना कहीं न कहीं झारखंड सरकार के साथ ही पुलिस और प्रशासन की मंशा पर भी सवाल खड़े करता है।
कर्नाटक सरकार ने कक्षा एक से दस तक के पाठ्यपुस्तकों के संशोधन को अंतिम रूप दे दिया है, जिसमें महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसके तहत बच्चों को ‘सनातन धर्म’ आधारित पाठ में इसे विस्तार से बताया जाएगा। इसके अलावा, सरकार ने पी. लंकेश, सावित्रीबाई फुले, गिरीश कर्नाड, पेरियार, देवनूर महादेव, थिरुनाकुडु चिन्नास्वामी, नागेश हेगड़े जैसे लेखकों की रचनाओं को भी शामिल किया है।
प्रो. मंजूनाथ जी. हेगड़े की अध्यक्षता वाली पाठ्यपुस्तक संशोधन समिति ने कर्नाटक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। समिति ने सावित्रीबाई फुले और पेरियार जैसे कट्टरपंथी लेखकों से संबंधित विषयों पर पाठ को फिर से शुरू करने की सिफारिश की है। हालाँकि, समिति ने टीपू सुल्तान और हैदर अली से संबंधित पाठों को फिर से शुरू करने की सिफारिश नहीं की है। भाजपा सरकार ने इन्हें हटा दिया था।
इन पाठ्यपुस्तकों में जैन धर्म और बौद्ध धर्म के बारे में बताने वाले नए अध्याय शामिल किए गए हैं। वहीं, ‘धर्म’ जैसे कुछ शब्दों को ‘रिलिजन’ में बदल दिया गया है। जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राजवंश वाले भागों को काट दिया गया है। दसवीं कक्षा की इतिहास में ‘सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलन’ शामिल किया गया है। भक्ति आंदोलन में कनक दास, पुरंदर दास और शिशुनाला शरीफ को जोड़ा गया है।
जून में कर्नाटक टेक्स्टबुक सोसाइटी ने एक पत्र के माध्यम से घोषित महत्वपूर्ण बदलावों में दसवीं कक्षा की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक में आरएसएस संस्थापक के.बी. हेडगेवार के ‘निजवाड़ा आदर्श पुरुष यारागाबेकु’ को शिवकोट्याचार्य के ‘सुकुमार स्वामीया कथे’ से स्थान्नपन शामिल है। वहीं, दसवीं कक्षा की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक में शतावधानी आर. गणेश की ‘श्रेष्ठ भारतीय चिंतानेगलु’ को सारा अबूबकर की ‘युद्ध’ से बदल दिया गया।
जिन लेखकों की रचनाओं या उनकी जीवनी को कर्नाटक सरकार ने पाठ्य-पुस्तकों में शामिल किया है, वे हिंदू विरोधी और घनघोर वामपंथी विचारधारा के रहे हैं। उन्होंने भारत की संस्कृति को हमेशा नीचा दिखाने की कोशिश की। उनकी रचनाओं में भी इसका असर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इसमें पी. लंकेश और गिरीश कर्नाड जैसे लेखक वामपंथी विचारधारा को पोषक रहे हैं।
दूसरी तरफ, पाठ्य-पुस्तकों में पेरियार को भी शामिल किया गया है। वे बेहद कट्टर विचारधारा के रहे हैं। पेरियार का असली नाम ई वी रामास्वामी था। वे एक धार्मिक हिंदू परिवार में पैदा हुए थे, लेकिन ब्राह्मणवाद के विरोधी रहे। उन्होंने न केवल ब्राह्मण ग्रंथों की होली जलाई, बल्कि रावण को अपना नायक भी माना था। वो बाल विवाह और देवदासी प्रथा के खिलाफ थे।
दरअसल, पिछले साल कॉन्ग्रेस के सत्ता में आते ही पाठ्य पुस्तकों में किए गए सभी सुधारों को समिति ने बरकरार रखा है। कर्नाटक टेक्स्ट बुक सोसायटी ने मंगलवार (5 मार्च 2024) को एक रिपोर्ट जारी की और कक्षा 1 से लेकर 10 तक के पाठ्य-पुस्तकों में किए गए बदलावों की जानकारी दी। ये बदलाव 2024-25 के लिए किए गए हैं।
भाजपा विधायक और पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री अश्वथ नारायण ने कर्नाटक सरकार के इस कदम का विरोध किया है। उन्होंने कहा, “वे संविधान और कर्नाटक के लोगों की आस्था और विश्वास का सम्मान नहीं करते हैं। वे अराजकता, भ्रम और ध्रुवीकरण पैदा करना चाहते हैं। वे उस सनातन धर्म का सम्मान नहीं करते हैं। इसलिए वे ऐसे लोगों को लाने की कोशिश कर रहे हैं जो सनातन धर्म के खिलाफ हैं।”
उन्होंने कहा, “यह हमारी आस्था के खिलाफ है। ऐसा करके वे (कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार) भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही है। वे सनातन धर्म के खिलाफ काम कर रहे हैं, जिसकी हम निंदा करते हैं। हम कॉन्ग्रेस सरकार को बेनकाब करेंगे और जागरूकता पैदा करेंगे। हम पाठ्यक्रम का पुरजोर विरोध करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि इसमें समावेशन न हो।”
देश की राजधानी दिल्ली में तीन तलाक का एक मामला सामने आया है। यहाँ मुस्लिम समुदाय के एक प्रॉपर्टी डीलर पर पहले 14 साल की नाबालिग से रेप करने और बाद में उससे निकाह करने के बाद तीन तलाक देने का आरोप है। बीच में पीड़िता गर्भवती हुई तो गर्भनिरोधक गोलियाँ देकर उसका गर्भपात करवा दिया गया। शनिवार (2 मार्च 2024) को पुलिस ने FIR दर्ज कर के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला उत्तर पूर्वी दिल्ली के थानाक्षेत्र दयालपुर का है। 14 साल की नाबालिग पीड़िता के अब्बा की मौत 2021 में हो चुकी थी। उनकी अम्मी की भी दिमागी हालात ठीक नहीं, जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है। घर में भाई और बहन हैं, जिनका जैसे-तैसे गुजारा चल रहा था।
इस बीच किराए का मकान दिलवाने के बहाने उसके घर आरोपित प्रॉपर्टी डीलर आया। कुछ दिनों में उसका पीड़िता के घर पर आना-जाना हो गया। 14 अगस्त 2023 को उसने लड़की को अकेला पाकर बलात्कार किया। इसके बाद उसने पीड़िता को डरा-धमका कर कई बार उससे रेप किया।
इस बीच पीड़िता गर्भवती हो गई तो आरोपित द्वारा गर्भनिरोधक गोलियाँ देकर उसका गर्भपात करवा दिया गया। पीड़िता के साथ हो रहे दुष्कर्म की जानकारी लड़की के घर वालों को हुई। अंत में सबने बातचीत करके 17 नवंबर 2023 को पीड़िता का निकाह आरोपित प्रॉपर्टी डीलर से करवा दिया।
यह निकाह कुछ ही दिन चला और 21 जनवरी 2024 को उसने पीड़िता को तीन तलाक देकर घर से बाहर कर दिया। आरोप है कि इसी के साथ प्रॉपर्टी डीलर ने धमकी भी दी कि अगर किसी से बताया तो लड़की और उसके पूरे परिवार को खत्म कर दिया जाएगा।
आरोप है कि अपने साथ हुए इस अत्याचार की शिकायत जब पीड़िता पुलिस में करने गई तब उसे भगा दिया गया। अंत में पीड़िता ने महिला हेल्पलाइन में इसकी शिकायत दर्ज करवाई। महिला हेल्पलाइन के हस्तक्षेप के बाद पीड़िता 30 जनवरी 2024 को उत्तर पूर्वी दिल्ली के DCP से मिलीं और उन्हें सारे मामले में अवगत करवाया।
DCP के आदेश के बाद आरोपित प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ शनिवार (2 मार्च 2024) को FIR दर्ज हुई। यह केस रेप, धमकी, पिटाई आदि धाराओं के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुआ है। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है। पीड़िता फिलहाल अपने माँ और भाई-बहन के साथ अपने मायके में रह रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार पर उठाए गए सवालों का जब से भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने जवाब देना शुरू किया है, उसके बाद से विपक्ष भड़का हुआ है। इसी तिलमिलाहट में वो अपनी कुंठा जाहिर करने से भी पीछे नहीं हट रहे। सबसे ताजा उदाहरण इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस का है जिन्होंने इस कुंठा में ऐसा विवादित ट्वीट कर डाला, जिस पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। मामला तुकलकाबाद पुलिस थाने में दर्ज हुआ है।
5 मार्च 2024 को किए गए अपने ट्वीट में इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस ने लिखा- “बलात्कारी, आतंकी, घृणा फैलाने वाले, भगोड़े और हत्यारे। सबका साथ-सबका विकास। ये है मोदी का असली परिवार।”
इस ट्वीट के साथ IYC ने अपने ट्वीट के साथ एक बोर्ड लगाया है। इसमें मोदी का असली परिवार बताकर उन विवादित नामों को जोड़ा गया है जिनपर कोई न कोई केस हुए हों, या फिर कोई आरोप लगे हों।
ट्वीट का स्क्रीनशॉट (तस्वीर साभार:इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस)
इसमें गौतम अडानी को लुटेरा कहा गया। मेहुल चौकसी, ललित मोदी, विजय माल्या, नीरव मोदी को भगोड़ा बताते हुए मोदी का असली परिवार बताया गया है। इसके अलावा इसमें उपेंद्र रावत को अश्लीलता फैलाने, बृज भूषण सिंह को यौन शोषण के आरोपित, अनुराग ठाकुर को दंगे भड़काने वाला, अजय सिंह टेनी को लोगों को गाड़ी से कुचलने वाला कहा गया।
बोर्ड की फोटो (तस्वीर साभार:इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस)
यहाँ साध्वी प्रज्ञा को आतंकवादी कहा गया है। साथ ही कुलदीप सेंगर पर गैंगरेप, चिन्मयानंद पर रेप और संदीप सोनी पर शारीरिक शोषण का इल्जाम दिखाकर उन्हें भी मोदी का परिवार बताया गया है।
ये ट्वीट 5 मार्च 2024 को किया गया था। इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस के आधिकारिक अकॉउंट पर ये खबर लिखने तक मौजूद था। कॉन्ग्रेस की यूथ यूनिट द्वारा की गई ये हरकत उस पूरे विवाद के क्रम में आई है जो विपक्षी गठबंधन की बैठक में लालू यादव के बयान के बाद शुरू हुआ।
दरअसल बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गाँधी मैदान में रविवार (03 मार्च 2024) को आयोजित ‘जनविश्वास महारैली’ के दौरान राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पीएम मोदी को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, “अगर नरेंद्र मोदी के पास अपना परिवार नहीं है तो हम क्या कर सकते हैं। वह राम मंदिर के बारे में डींगें हाँकते रहते हैं। वह एक सच्चे हिंदू भी नहीं हैं। हिंदू परंपरा में एक बेटे को अपने माता-पिता के निधन पर अपना सिर और दाढ़ी मुँडवानी चाहिए। मोदी ने तब ऐसा नहीं किया जब उनकी माँ की मृत्यु हो गई।”
इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 04 मार्च 2024 को तेलंगाना के अदिलाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए आरजेडी सुप्रीमो पर पलटवार किया। पीएम मोदी ने कहा, “मेरे परिवार को लेकर मुझ पर निशाना साधा गया। लेकिन, अब पूरा देश बोल रहा है कि मैं हूँ मोदी का परिवार।”
पीएम मोदी के इस ऐलान के बाद केंद्रीय मंत्रियों से लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक ने एक्स पर अपनी प्रोफाइल में ‘मोदी का परिवार’ जोड़कर लालू के सवाल का जवाब दिया। लेकिन ये सब कॉन्ग्रेस से नहीं देखा गया और उन्होंने दो कदम आगे बढ़कर विवादित ट्वीट कर डाला। अब इस ट्वीट पर दिल्ली पुलिस अपनी कार्रवाई करेगी।
बांग्लादेशी से भागकर पश्चिम बंगाल आए एक शरणार्थी ने वहाँ के दर्दनाक स्थिति के बारे में बताया है। उसने बताया कि अपनी सुरक्षा के लिए बांग्लादेश के 100 व्यक्तियों वाले 25 हिंदू परिवारों को भागकर पश्चिम बंगाल में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। वहाँ हत्या, बलात्कार, मंदिरों पर हमले, जमीन पर कब्जे जैसे नियमित उत्पीड़न झेल रहे हिंदुओं को डरकर जीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय का उत्पीड़न और बढ़ जाता है, जब चुनाव आते हैं। चुनाव से पहले इस्लामी उन्मादी भीड़ हिंदू परिवारों को बेरोकटोक निशाना बनाती है। इस साल 7 जनवरी को बांग्लादेश में संघीय चुनाव हुए थे। इस दौरान हिंदुओं को आगजनी और हमलों का सामना करने के बाद अपने घरों से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
इससे पहले ऑपइंडिया ने बताया था कि फरीदपुर, सिराजगंज, बागेरहाट, जेनाइदाह, फिरोजपुर, कुश्तिया, मदारीपुर, लालमोनिरहाट, दाउदकंडी, ठाकुरगाँव, मुंशीगंज और गैबाँधा सहित पूरे बांग्लादेश में सांप्रदायिक हमले हुए थे। इन हिंसक घटनाओं में अवामी लीग से जुड़े इस्लामवादियों ने उन हिंदुओं के घरों पर हमला किया, जिन्होंने अन्य दलों या निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन किया था।
भारत में शरण लेने के बाद एक बांग्लादेशी नागरिक 45 वर्षीय अविनाश कुमार मंडल (बदला हुआ नाम) ने कहा, “इस (चुनाव से पहले और बाद की हिंसा) ने उजिरपुर के हिंदुओं में इतना डर पैदा कर दिया कि 7 जनवरी से अब तक 25 परिवार, जिसमें बच्चों-महिलाओं सहित लगभग 100 व्यक्ति हैं, सुरक्षा के लिए पश्चिम बंगाल के लिए निकलने में ज्यादा समय बर्बाद नहीं किया।”
रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश चुनाव के मद्देनजर हिंसक दमन से बचने के लिए बारिसल के उजीरपुर उपजिला के ये 25 हिंदू परिवार सीमा पार कर भारत आ गए और अविनाश उनमें से एक हैं। 27 फरवरी 2024 को अविनाश ने धमकी और इस्लामी हिंसा के बीच बांग्लादेश के में अपना घर छोड़ दिया। अविनाश गोपालगंज से खुलना होते हुए जेसोर के लिए बस मार्ग लेकर भारत-बांग्लादेश सीमा पर पहुँचे।
पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के चकदाह में अपने आश्रय स्थल से फोन पर उन्होंने बताया, “मैंने जानबूझकर बेनापोल पहुँचने के लिए एक घुमावदार रास्ता अपनाया। स्थानीय ताकतवर गाजी अबू हनीफ के आदेश पर पुलिस द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट मेरे खिलाफ लंबित था। इसमें बाहुबलियों और कट्टरपंथियों ने अवामी लीग के आधिकारिक उम्मीदवार राशेद खान मेनन का हाथ था।”
नॉर्थईस्ट न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, उजीरपुर के अल्पसंख्यक हिंदुओं ने अवामी लीग के प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों का समर्थन किया और उन्हें वोट किया था। ऐसे लोगों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया था। इसी कारण 25 से अधिक हिंदू परिवार क्षेत्र से भाग गए। अविनाश ने ज़ोर देकर कहा, “उजीरपुर लौटने का उनका कोई इरादा नहीं है।”
बारिसल-2 निर्वाचन क्षेत्र के दो उपजिले- उजीरपुर और बनारीपारा में लगभग 2,000 हिंदू परिवार थे। स्थानीय निवासियों और अवामी लीग के सूत्रों का कहना है कि 7 जनवरी की हिंसा के बाद उजीरपुर की तुलना में बनारीपारा से अधिक हिंदुओं ने घर छोड़ा। हालाँकि, चुनाव संबंधी हिंसा को कुछ स्थानीय समाचार पत्रों में कवर किया, लेकिन चुनाव से पहले और बाद में झड़पों की अनदेखी की गई।
दूसरी तरफ, भारत सरकार ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को जल्द ही लागू करने की बात कही है, लेकिन उजीरपुर और बनारीपारा से हाल ही में आए हिंदुओं को शायद ही इससे मदद मिले। CAA में पड़ोसी देशों से आए उन्हीं अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने की बात कही गई है, जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए हैं।
नॉर्थईस्ट न्यूज के मुताबिक, नए बांग्लादेशी हिंदू प्रवासियों में से एक अविनाश को इस कानून के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। अविनाश का कहना है कि बांग्लादेश से भागने का उसका निर्णय कोई तात्कालिक विचार नहीं था। लगभग एक साल पहले उनकी पत्नी और दो किशोर बच्चे भारत (चकदाह) आ गए थे, जबकि वे यहाँ पहुँचने के लिए समय का इंतजार कर रहे थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के अपने दौरे के वक्त बारासत में आज (6 मार्च 2024) रैली की। इस दौरान उन्होंने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर जमकार निशाना साधा। उन्होंने नारीशक्ति पर बात करते हुए संदेशखाली का मुद्दा उठाया। वह बोले कि संदेशखाली में जो कुछ भी हुआ है उससे तो किसी का भी सिर झुक जाएगा।
उन्होंने भाषण की शुरुआत में कहा कि बंगाल की ये भूमि नारीशक्ति की बहुत बड़ी प्रेरणा केंद्र रही है, यहाँ से नारीशक्ति ने देश को दिशा दी है। इस धरती ने अनेक शक्ति स्वरूपा इस देश को दी है। लेकिन इसी धरती पर TMC के राज में नारीशक्ति पर अत्याचार का घोर पाप हुआ है। संदेशखाली जो कुछ भी हुआ, उससे किसी का भी सिर शर्म से झुक जाएगा। लेकिन यहाँ की TMC सरकार को, लोगों के दुख से कोई फर्क नहीं पड़ता।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- “TMC घोर पाप कोरे छे… संदेशखाली में जो हुआ, उससे किसी का भी सर झुक जाएगा। इसके बावजूद TMC अपराधियों और अत्याचारियों को बचा रही। बांग्ला बहु-बेटियों पर TMC का भरोसा नहीं है, अत्याचारी नेताओं पर भरोसा है। दलितों-आदिवासियों की बहु-बेटियों पर अत्याचार हुआ है।”
उन्होंने कहा, “TMC सरकार बंगाल की महिलाओं के गुनाहगारों को बचाने के लिए पूरी शक्ति लगा रही है। लेकिन पहले हाइकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट से भी राज्य सरकार को झटका लगा है।”
उन्होंने कहा, “गरीब, दलित, आदिवासी परिवारों की बहन-बेटियों के साथ TMC के नेता जगह-जगह अत्याचार कर रहे हैं। लेकिन TMC सरकार को अपने अत्याचारी नेता पर भरोसा है, बांग्ला बहन-बेटियों पर भरोसा नहीं है। इस व्यवहार से बंगाल की महिलाएँ, देश की महिलाएँ आक्रोश में हैं। नारीशक्ति के आक्रोश का ये ज्वार संदेशखाली तक ही सीमित नहीं रहने वाला।”
उन्होंने बंगाल की जनता को बताया कि कैसे तृणमूल कॉन्ग्रेस ने कभी भी महिलाओं को प्रोटेक्शन नहीं दिया। वहीं, भाजपा सरकार ने बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के लिए फाँसी की सजा देने का प्रावधान भी किया है। उन्होंने जानकारी दी कि महिलाओं की शिकायतों के आसान पंजीकरण के लिए मोदी सरकार ने जो ‘महिला हेल्पलाइन’ की व्यवस्था की है, टीएमसी सरकार उसे भी बंगाल में संचालित नहीं होने दे रही है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में महिलाओं की रैली को संबोधित किया। भाजपा ने नारी शक्ति वंधन अभिनंदन रैली का आयोजन किया है। ये सारी बातें इसी रैली में कहीं गईं।
संदेशखाली के ‘शैतान’ शेख शाहजहाँ को कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने ये भी कहा था कि सीबीआई और ईडी भी उसकी गिरफ्तारी कर सकती हैं, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार शेख शाहजहाँ का कुछ ऐसे बचाव कर रही है, जैसे वो ममता सरकार का ‘सबसे कीमती’ आदमी हो। कलकत्ता हाई कोर्ट ने सोमवार (05 मार्च 2024) को जब सीबीआई को शेख शाहजहाँ को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की अनुमति दी, तो ममता बनर्जी की सरकार तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुँच गई। ममता बनर्जी की सरकार शेख शाहजहाँ को सीबीआई को सौंपने का विरोध कर रही है। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को झटका दे दिया।
ममता बनर्जी की सरकार ने संदेशखाली और शेख शाहजहाँ मामले में सीबीआई जाँच के तुरंत सुनवाई की माँग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई तुरंत करने की जगह इस पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को फैसला करना है कि मामले की सुनवाई कब हो।
बता दें कि मंगलवार (5 मार्च) को कलकत्ता हाईकोर्ट ने ईडी टीम पर हमले की जाँच को सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए थे। दरअसल, ममता सरकार का कहना है कि एसआईटी इस मामले की गंभीरता से जाँच कर रही है। सीबीआई को मामला सौंपना बिल्कुल गलत है। ममता सरकार का दावा है कि पश्चिम बंगाल सरकार की एसआईटी की जाँच सही दिखा में जा रही है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जाँच के खिलाफ पहुँची ममता बनर्जी की सरकार ने तुरंत दूसरी अर्जी भी दाखिल की थी और इस मामले की तुरंत सुनवाई की माँग की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट 2 सदस्यीय पीठ ने कहा कि ये काम आप सीजेआई को करने दें, वो लंच के बाद इस केस को सूचीबद्ध करने पर फैसला लेंगे। ये उन्हीं का विशेषाधिकार है।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अदालत में ये अर्जी लगाई थी। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सीबीआई जाँच सौंपे जाने के हाई कोर्ट के फैसले पर सीबीआई तुरंत शेख शाहजहाँ को अपने कब्जे में लेना चाहती है, जबकि हमारे राज्य की एसआईटी इस मामले की जाँच कर रही है। ऐसे में शेख शाहजहाँ को सीबीआई को तुरंत नहीं सौंपना चाहिए।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस के खिलाफ ईडी को याचिका दायर करने की दी अनुमति
इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार (06 मार्च 2024) को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को इस बात की अनुमति दे दी कि वो पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर सके। हाई कोर्ट ने शेख शाहजहाँ को ईडी और सीबीआई को सौंपने के निर्देश पश्चिम बंगाल सरकार को दिए थे, लेकिन पश्चिम बंगाल पुलिस और सरकार ने शेख शाहजहाँ को सीबीआई को नहीं सौंपा था। इस मामले में ईडी के वकील कलकत्ता हाई कोर्ट से अवमानना की कार्रवाई के तहत केस दर्ज कराने की अनुमति माँगी थी, जिसे कलकत्ता हाई कोर्ट ने मान लिया।
गौरतलब है कि पिछले महीने राशन घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय शाहजहाँ शेख के घर छापा मारने आई थी। हालाँकि उसके समर्थकों ने ईडी पर ही उलटा हमला कर दिया और शाहजहाँ शेख फरार हो गया। उसके बाद से टीएमसी नेता कहाँ था ये किसी को नहीं पता था। बाद में संदेशखाली में महिलाओं का मुद्दा उठा और गिरफ्तारी की माँग तेज हो गई। कई टीएमसी नेता पकड़े गए और आखिर में 27 फरवरी शाहजहाँ शेख भी गिरफ्तार हुआ।