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रामलला, रामरथी के बाद अब कारसेवक की बारी: जानिए कौन हैं अजित गोपछडे, कभी ऑटो ड्राइवर रहे मयंक नायक भी जाएँगे राज्यसभा

राज्यसभा चुनावों के लिए भाजपा ने अपने अधिकांश उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र आदि राज्यों से अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। इन नामों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव तक के नाम शामिल हैं। हालाँकि, इस सूची में दो ऐसे नाम भी हैं, जिन्होंने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है।

ये दोनों नाम हैं महाराष्ट्र के अजित गोपछडे और गुजरात के मयंक भाई नायक। इनको दोनों को पार्टी ने राज्य सभा भेजने का निर्णय लिया है। दोनों ही उम्मीदवार भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता हैं। बता दें कि अयोध्या में राममंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न पुरस्कार देने के बाद अब कारसेवक को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है।

कारसेवक रहे हैं अजित गोपछड़े

महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले से आने वाले और पेशे से डॉक्टर अजित गोपछड़े लगभग तीन दशक से संघ और भाजपा से जुड़े हैं। वर्तमान में वे पार्टी के महाराष्ट्र डॉक्टर मोर्चा के अध्यक्ष हैं। इसके अलावा, वह रामजन्मभूमि आन्दोलन के दौरान सबसे आगे रहने वाले कारसेवकों में एक थे। गोपछडे की सन 1992 की वे तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें वे बाबरी ढाँचे के गुम्बद पर दिख रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि लिंगायत समुदाय से आने वाले गोपछडे तब MBBS की पढ़ाई पूरी ही की थी और बाकी कारसेवकों के साथ वे अयोध्या पहुँचे थे। उन्होंने कारसेवक के तौर पर बाबरी पर चढ़ने को लेकर कहा,” मैं वहाँ सामान्य कारसेवक के तौर पर गया था। मेरे साथ उस समय और भी कई सम्मानित लोग थे। हमने उस दिन भगवान राम के लिए अपनी सेवाएँ दी थीं।”

गोपीनाथ मुंडे, प्रमोद महाजन और नितिन गडकरी जैसे महाराष्ट्र भाजपा के बड़े नामों के करीबी रहे गोपछडे अपने छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़े रहे थे। वे पार्टी के कार्यकर्ता होने के साथ ही समाजसेवी भी हैं। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान भी काफी काम किया था। वह महाराष्ट्र में एक ब्लड बैंक शुरू करने में भी अग्रणी रहे हैं।

राज्यसभा के लिए नामित होने पर गोपछडे ने कहा कि उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने मीडिया को बताया, “मैं तो पार्टी का एक साधारण कार्यकर्ता हूँ। मुझे आशा नहीं थी कि मैं राज्यसभा के लिए नामित किया जाऊँगा। मैं भाजपा में बीते 25-30 वर्षों से हूँ। मैं मेडिकल रिसर्च और शिक्षा के क्षेत्र में काम करना चाहता हूँ।” महाराष्ट्र से गोपछड़े के अलावा अशोक चव्हाण और मेधा कुलकर्णी को भी नामित किया गया है।

गुजरात से मयंक भाई नायक को राज्य सभा टिकट, चलाते थे ऑटो

भाजपा ने गुजरात से राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के अलावा राज्य के ओबीसी मोर्चा के मुखिया मयंक भाई नायक को भी राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। मयंक नायक भी पार्टी से तीन दशक से अधिक समय से जुड़े हैं। गुजरात के मेहसाणा से आने वाले मयंक नायक मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वे 1980 के दशक में परिवार का खर्चा चलाने के लिए ऑटो भी चला चुके हैं।

मयंक नायक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। वह उनकी गाँधीनगर सीट के प्रभारी भी हैं। मयंक 2002 के बाद से गुजरात में होने वाली पार्टी की सभी यात्राओं का हिस्सा रहे हैं। वह हाल ही में सम्पन्न हुए मेरी मिट्टी, मेरा देश अभियान के गुजरात प्रभारी रहे हैं। वह पार्टी के लिए मात्र गुजरात ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में भी काम कर चुके हैं।

राज्यसभा के लिए नामित होने पर मयंक नायक ने कहा, “मैं आश्चर्यचकित हूँ कि पार्टी ने मेरे जैसे साधारण कार्यकर्ता को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दे दी है। यह स्पष्ट सन्देश है कि कार्यकर्ता को पार्टी के लिए काम करते रहना चाहिए। यह मेरे लिए सरप्राइज है।” मयंक नायक और जेपी नड्डा के अलावा गुजरात से पार्टी ने बड़े हीरा कारोबारी गोविन्द भाई ढोलकिया को भी राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया गया है।

क्या है चुनावी बाॅन्ड, कब और कैसे हुई शुरुआत: सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई रोक, क्यों माँगा हिसाब; जानिए सब कुछ

सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड (चुनावी बॉन्ड) पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक माना है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ कर रही थी, जिसकी अगुवाई खुद सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ चुनावी बॉन्ड को अवैधानिक बताया है, बल्कि अब तक इसे कितने लोगों ने खरीदा है, किन पार्टियों को चंदा दिया गया है, इसकी भी जानकारी सार्वजनिक करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए एसबीआई को तीन सप्ताह का समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चार याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली 05 न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ पिछले साल से ही मामले को सुन रही थी। इस पीठ में जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा भी रहे। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने 29 अक्टूबर 2023 को हलफनामा पेश किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्टूबर 2023 से 2 नवंबर 2023 तक तीन दिनों तक सभी पक्षों को सुना था और अब फैसला दिया है।

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनावी बॉन्ड योजना पारदर्शिता की कमी, दानदाताओं की गुमनामी और राजनीतिक दलों पर अमीर व्यक्तियों और कंपनियों के प्रभाव के कारण लोकतंत्र के लिए खतरा है। न्यायालय ने यह भी कहा कि योजना कानून के तहत स्थापित मौजूदा नियामक ढाँचे को कमजोर करती है। चुनावी बॉन्ड योजना एक विवादास्पद मुद्दा रहा है। इसके पक्ष और विपक्ष दोनों में तर्क हैं। यह अभी भी देखा जाना बाकी है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भारतीय लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

चुनावी बॉन्ड कैसे करता है काम?

चुनावी बॉण्ड को साल 2017 में एक वित्त विधेयक के माध्यम से पेश किया गया था। सरकार ने इसे 2 जनवरी 2018 में लागू किया। इससे उन्हीं पार्टियों को फायदा होता है, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकृत हों। यही नहीं, उस राजनीतिक पार्टी को लोकसभा या विधानसभा के ताजे चुनाव में कम से कम 1 प्रतिशत वोट भी हासिल करना होता है, तभी वो चुनावी बॉन्ड पा सकते हैं।

चुनावी बॉन्ड भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की चुनिंदा शाखाओं से 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, 1 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये के मूल्यवर्ग में खरीदे जा सकते हैं। एसबीआई की 29 शाखाओं को इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने और उसे भुनाने के लिए अधिकृत किया गया था। ये शाखाएँ नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, गाँधीनगर, चंडीगढ़, पटना, राँची, गुवाहाटी, भोपाल, जयपुर और बेंगलुरु में हैं। राजनीतिक दलों को चुनावी बॉन्ड को 15 दिनों के भीतर एसबीआई में भुनाना होता है, और इस राशि की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है। हालाँकि वो अपने दानदाताओं के बारे में कोई जानकारी नहीं रखते।

सरकार ने दावा किया कि यह योजना राजनीतिक दलों के लिए धन जुटाने का एक पारदर्शी तरीका प्रदान करेगी और काले धन के इस्तेमाल को कम करेगी। यह राजनीतिक दलों के लिए धन जुटाने का एक पारदर्शी तरीका प्रदान करता है। यह काले धन के इस्तेमाल को कम करने में मदद करता है। यह राजनीतिक दलों को व्यक्तियों और कंपनियों से अधिक स्वतंत्रता प्रदान करता है।

चुनावी बॉन्ड खरीदकर किसी पार्टी को देने से ‘बॉन्ड खरीदने वाले’ को कोई फायदा नहीं होगा। न ही इस पैसे का कोई रिटर्न मिलता है। ये अमाउंट पॉलिटिकल पार्टियों को दिए जाने वाले दान की तरह है, ऐसे में इससे 80जीजी 80जीजीबी के तहत इनकम टैक्स में छूट मिलती है। हालाँकि चुनावी बॉन्ड को लेकर तमाम आशंकाएँ भी जताई जा रही थी।

चुनावी बॉन्ड के खिलाफ गईं कौन सी बातें?

अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी राजनीतिक दलों को इलेक्शन कमीशन के समक्ष इलेक्टोरल बॉन्ड्स की जानकारी देनी होगी। इसके साथ दलों को बैंक डीटेल्स भी देना होगा। अदालत ने कहा है कि राजनीतिक दल,आयोग को एक सील बंद लिफाफे में सारी जानकारी दें, लेकिन ये मामला केवल यहीं नहीं थमा बल्कि इस पूरे चुनावी बॉन्ड स्कीम की वैधता को ही चुनौती दी गई।

दरअसल, चुनावी बॉन्ड को लेकर सबसे बड़ी परेशानी इसके माध्यम से पैसे दे रहे लोगों के बारे में जानकारी का सार्वजनिक न होना है। आरटीआई के माध्यम से भी इसकी जानकारी नहीं दी जा रही थी, और बोला जाता था कि ये सूचना आम नागरिकों के लिए है ही नहीं। ऐसे में कौन ये बॉन्ड खरीद रहा है और किस पार्टी को इस माध्यम से दान दे रहा है, ये जानकारी कभी बाहर ही नहीं आ पाती थी।

एक आँकड़े के मुताबिक, चुनावी बॉन्ड के जरिए अब तक 5851 करोड़ रुपए जुटाए जा चुके हैं। सिर्फ मई 2023 में ही 822 करोड़ रुपए के चुनावी बॉन्ड जारी किए गए। वहीं, पिछले लोकसभा चुनाव के समय जनवरी से मई 2019 तक 4794 करोड़ रुपए के बॉन्ड जारी किए गए। ये चुनावी बॉन्ड हर साल दो बार जारी किए जाते हैं। आम तौर पर चुनाव के समय। साल 2018 से अब तक इसे 11 बार जारी किया जा चुका है। इसके माध्यम से राजनीतिक पार्टियों को 5851 करोड़ रुपए का चंदा मिला।

BJP को छोड़ो नहीं तो बम से उड़ा देंगेः नीतीश कुमार को धमकी देना वाला निकला बोरी सिलाई करने वाला, दिल्ली HC को भी उड़ाने की धमकी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दिल्ली हाई कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को बुधवार (14 फरवरी 2024) की देर शाम को ईमेल मिला, जिसमें कहा गया कि गुरुवार को कोर्ट में बड़ा धमाका करने की बात कही गई है। वहीं, बिहार में नीतीश कुमार को भाजपा से अलग नहीं होने पर उन्हें बम से उड़ाने और उनके विधायकों को जान से मारने की धमकी दी गई है। यह धमकी DGP को ऑडियो क्लिप भेजकर दी गई है।

दरअसल, एक बदमाश ने बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) आरएस भट्टी को एक ऑडियो क्लिप भेजा। आरोपित ने अपने वीडियो में कहा, “नीतीश को कहें कि वह भाजपा के साथ नहीं जाएँ, वरना उन्हें बम से उड़ा देंगे और उनके विधायकों को भी मारेंगे।” ऑडियो सामने आने के बाद पुलिस ने सोनू पासवान नाम के बदमाश को अरेस्ट कर लिया है। 

ऑडियो क्लिप के बाद आर्थिक अपराध इकाई में पहले सनहा हुआ। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज की गई। फिर बिहार पुलिस बदमाश की पहचान में जुट गई। जाँच में पुलिस को पता चला कि धमकी देने वाला आरोपित सोनू पासवान बिहार के ही समस्तीपुर के दयानगर का रहना वाला है और वह बेंगलुरु में बोरी सिलाई का काम करता है।

सोनू को कर्नाटक के देवनगिरी जिले से गिरफ्तार किया गया है। सोनू ने बताया कि यूट्यूब और टीवी चैनलों पर तख्ता पलट की खबरों से विचलित होकर उसने धमकी वाला मैसेज भेजा था। बार-बार तख्ता पलट से बिहार में विकास प्रभावित हो रहा था और गरीबी एवं बेरोजगारी बढ़ रही है। पुलिस ने उसके मोबाइल को भी जब्त कर लिया है।

उधर, दिल्ली हाई कोर्ट में विस्फोट की धमकी मिलने के बाद पुलिस सतर्क हो गई। इसको लेकर भेजे गए ईमेल में कहा गया है, “मैं तुम्हें 15 फरवरी को बम से उड़ा दूँगा। यह विस्फोट दिल्ली में सबसे बड़ा विस्फोट होगा। जितना संभव हो सके उतनी सुरक्षा तैनात कर लो… सभी मंत्रियों को बुला लो। हम तुम सबको एक साथ उड़ा देंगे।”

दिल्ली हाई कोर्ट में विस्फोट की धमकी मिलने के बाद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पूरे परिसर की तलाशी ली जा रही है। हालाँकि, जाँच के बाद परिसर में किसी तरह की संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। वहीं, धमकी वाला ईमेल भेजने वाले शख्स की पहचान करने की कोशिश जारी है।

‘ये तो गोरी महिलाएँ, इनका डील-डौल संदेशखाली की आदिवासी औरतों जैसा नहीं’: पीड़िताओं का TMC विधायक ने उड़ाया मजाक, बीजेपी MP ने लताड़ा

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों से सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं को कोई फर्क नहीं पड़ा। उनके बयानों से ऐसा जान पड़ रहा है कि उनके भीतर पीड़िताओं का दर्द समझने के लिए संवेदनशीलता भी नहीं बची।

हाल में 24 परगना जिला परिषद के अध्यक्ष और अशोकनगर के टीएमसी विधायत नारायण गोस्वामी ने अपने एक इंटरव्यू के वक्त पीड़ित महिलाओं पर आपत्तिजनक बयान दिया था। उन्होंने आरोप लगाने वाली महिलाओं का मखौल उड़ाते हुए उनके रंग-रूप पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद अब भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने उन्हें करारा जवाब दिया।

तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक नारायण गोस्वामी ने कहा था- “संदेशखाली की जनजातीय महिलाओं को उनके डील-डौल, रंग-रूप से पहचाना जा सकता है। लेकिन जो महिलाएँ कैमरे पर आकर आरोप लगा रही हैं वो गोरी हैं। क्या फिर भी हम उन्हें स्थानीय जनजातीय महिला कहेंगे।”

हिंदुस्तान टाइम्स बांग्ला के अनुसार, उन्होंने ये भी कहा कि वह इस बिंदु पर जाँच कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर मामला पुलिस को दिया जाएगा। कुछ जानकारी पहले सामने आ गई हैं। जिन महिलाओं ने कैमरे पर आरोप लगाए वो संभवत: सीपीएम की महिला समिति की सदस्य हैं। इनमें कोई आशा कार्यकर्ता है, कोई आईसीडीएस कर्मी। उन्हें सामने लाकर नाटक हो रहा है। जो वीडियो आप लोग देख रहे हैं वो स्क्रिप्टेड है।

नारायण गोस्वामी के इस बयान के बाद भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी ने इस टिप्पणी को बेहद शर्मनाक बताया है। चटर्जी ने कहा-

“टीएमसी विधायक नारायण गोस्वामी द्वारा संदेशखाली की महिलाओं पर की गई अभद्र टिप्पणी स्पष्ट रूप से उनकी गंदी मानसिकता को व्यक्त करती है। जनजातीय समुदाय और महिलाओं को उनकी शारीरिक संरचना और त्वचा के रंग के आधार पर कमतर आंकना पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस की विकृत और नस्लवादी राजनीति का स्पष्ट संकेत है। नील-शदा (काली-गोरी) बहिनी का नस्लवाद कब रुकेगा?”

बता दें कि एक ओर संदेशखाली की महिलाओं के बयान आने के बाद जहाँ टीएमसी नेता ऐसे असंवेदनशील बयान देखते दिख रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेता लगातार उनके साथ अपनी एकजुटता दिखा रहे हैं। प्रदेश में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने 30 अन्य विधायकों के साथ इस मामले में प्रदर्शन किया। वहीं भाजप नेता सुकंता मजूमदार भी पीड़िताओं से मिलने के लिए जब जा रहे थे तो पुलिसकर्मियों द्वारा उन्हें रोका गया। इसके बाद झड़प की खबर सामने आई और बाद में पता चला कि सुकंता मजूमदार अस्पताल में भर्ती हैं।

सड़क चौड़ी करने पर चर्च से बवाल: पत्थरबाजी और तोड़फोड़ में 18 घायल, 11 गिरफ्तार

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से सटे एक जिले में दो पक्षों के बीच भिडंत हो गई, जिसमें 18 लोग घायल हो गए। इस मामले में 11 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है। लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने धारा-144 लागू कर दी है। मामला चर्च से जुड़ा होने चलते सुर्खियों में आ गया है। चर्च से जुड़े लोगों ने कमिश्नर से भी मुलाकात की है और कार्रवाई की माँग की है। इस मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ है। दोनों पक्षों ने क्रॉस एफआईआर कराई है। हालाँकि चर्च से जुड़े लोगों के पक्ष में राजनीतिक दल भी खड़े हो गए हैं।

ये पूरा मामला रंगा रेड्डी जिले में स्थित एक मेथडिस्ट चर्च से जुड़ा है। विवाद के केंद्र में चर्च ही है, क्योंकि अब उसमें तोड़फोड़ की जानकारी सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, नरसिंगी इलाके में जनवाडा नाम का गाँव है। इस गाँव में एक मैथडिस्ट चर्च है। जहाँ मंगलवार (13 फरवरी 2024) को चर्च के सामने की सड़क को चौड़ा करने को लेकर बवाल हो गया। यहाँ सड़क चौड़ा करने का विरोध चर्च के लोगों ने किया, इसके विरोध में ग्रामीण चर्च के लोगों से भिड़ गए। अब मामला एससी-एसटी एक्ट के तहत भी दर्ज किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाँव की अधिकतर आबादी अनुसूचित जाति के लोगों की है। गाँव में संपर्क के लिए खडंजा है, जिसे सीमेंट-कॉन्क्रीट का बनाया जा रहा है। इस सड़क को चौड़ा करने की माँग ग्रामीण कर रहे थे, तो चर्च के सामने भी ग्रामीणों ने यही माँग की। काम शुरू हो गया, तो चर्च के अंदर इकट्ठा हुए लोगों ने इसका विरोध किया। इस बीच, बहस हुई और फिर दोनों पक्षों की तरफ से लड़ाई शुरू हो गई। चर्च के लोगों ने अंदर से भी पत्थर, ईंट फेंकी, जिसके बाद बाहर मौजूद लोग भड़क गए। चर्च में घुस गए और फिर जवाबी हमले में चर्च के अंदर काफी तोड़फोड़ की। इस तोड़फोड़ के दौरान दोनों तरफ से 18 लोग घायल हुए हैं, साथ ही चर्च को भी नुकसान पहुँचा। यहाँ तक कि ‘होली क्रॉस’ भी टूट गया।

चर्च से जुड़ा होने की वजह से मामले को गंभीरता से लिया गया और प्रशासन ने भारी पुलिस बल की तैनाती करते हुए प्रभावित इलाके में धारा-144 लागू कर दिया है। साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर अविनाश मोहंती ने मानव जीवन और सुरक्षा को खतरे से बचाने के लिए मोकिला पुलिस स्टेशन की सीमा में सीआरपीसी की धारा 144 लगा दी। यह आदेश 14 फरवरी से 21 फरवरी तक लागू रहेगा। इस दौरान पाँच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर बैन लगा दिया गया है।

इस मामले में चर्च की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर एससी-एसटी एक्ट के साथ धारा 477, 295 ए (धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने का जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादा), धारा 504, धारा 506 ( आपराधिक धमकी), 143 (गैरकानूनी सभा), धारा 147, 148 (दंगा) दर्ज किया गया है। वहीं, ग्रामीणों ने भी जो शिकायत दी है, उसमें चर्च के अंदर से हमला करने, गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठे होने, खतरनाक हथियारों के इस्तेमाल, दंगे की धाराएँ लगी है।

चर्च के लोग कमिश्नर से मिलने पहुँचे

इस बीच, मेथडिस्ट चर्च के बिशप एमए डेनियल ने मानवाधिकार आयोग के सदस्यों के साथ साइबराबाद पुलिस कमिश्नर अविनाश मोहंती से मुलाकात की। उन्होंने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया। बिशप की अगुवाई में उस टीम ने पीड़ितों से भी मुलाकात की। वहीं, तेलंगाना के बीएसपी अध्यक्ष डॉ आरएस प्रवीण कुमार ने 14 फरवरी 2024 जनवाड़ा का दौरा किया। उन्होंने कहा कि 200 से ज्यादा लोगों ने चर्च पर हमला किया है। मामला भले ही सड़क का हो, लेकिन ये हमला नफरती तत्वों ने किया है। चर्च के अंदर लोगों को लोहे की छड़ों और लाठियों से पीटा गया।

बता दें कि भारत में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है, जो हिंदू धर्म छोड़कर दूसरे धर्म अपना चुके हैं, लेकिन कागजों में वो अभी भी अनुसूचित जाति के ही हैं। यही वजह रही कि दोनों पक्षों की तरफ से दी गई शिकायत के बावजूद ग्रामीण के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में केस दर्ज हुआ।

सरस्वती माता की ‘क्लीवेज’ वाली मूर्ति, साड़ी भी नहीं: त्रिपुरा में बवाल, ABVP और बजरंग दल के प्रदर्शन के बाद ढकी गई मूर्ति

त्रिपुरा के एक आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज में सरस्वती माँ की मूर्ति को अश्लीलता से गढ़ने और बिना पारंपरिक साड़ी के दिखाने पर विवाद हो गया। मूर्ति देखने के बाद अखिल भातीय विद्यार्थी परिषद और बजरंग दल ने प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरस्वती माता को इस तरह दिखाना अश्लीलता फैलाने से अधिक कुछ नहीं।

बता दें कि सरस्वती माता की जिस मूर्ति को लेकर इतना बवाल हुआ है उसकी वीडियो फोटो भी एबीवीपी त्रिपुरा ने अपने हैंडल पर शेयर की है। इस मूर्ति की फोटो में साफ पता चल रहा है कि कितने अश्लील ढंग से माता को प्रदर्शित करने का प्रयास हुआ है। मूर्ति में क्लीवेज का डिजाइन गढ़ा गया और मूर्ति पर पारंपरिक साड़ी तो दूर कोई कपड़ा तक नहीं है। इस मूर्ति की जानकारी जब हिंदूवादी कार्यकर्ताओं को हुई तो वो बहुत भड़के।

इस मामले पर एबीवीपी के त्रिपुरा यूनिट के महासचिव दिबाकर आचार्यजी ने कहा कि उन्हें इस प्रकार सरस्वती माता गलत चित्रण से समस्या है। उन्होंने कहा- “जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आज बसंत पंचमी है और पूरे देश में देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। सुबह-सुबह हम सभी को खबर मिली कि गवर्नमेंट आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज में देवी सरस्वती की मूर्ति को बहुत गलत और अश्लील तरीके से बनाया गया है।”

प्रदर्शनकारियों के विरोध के बाद त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में स्थित आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज में रखी गई मूर्ति को साड़ी पहनाई गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध छात्र संगठन एबीवीपी ने कॉलेज प्राधिकरण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

वहीं कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि मूर्ति हिंदू मंदिरों में देखी जाने वाली पारंपरिक मूर्तिकला के अनुसार है और इसका धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। मूर्ति को अंततः कॉलेज अधिकारियों द्वारा बदल दिया गया और पूजा पंडाल के पीछे प्लास्टिक की चादरों से ढक दिया गया। प्रदर्शन के बाद मौके पर पुलिस भी आई लेकिन कोई आधिकारिक कंप्लेन नहीं हुई।

26 जनवरी लाल किला कब्जा वाला गैंगस्टर लखा सिधाना जेल से निकलते ही ‘हिंसा प्लानिंग’ के साथ किसान आंदोलन में: पंजाब में ट्रेनों को रोकने का ऐलान

पंजाब से दिल्ली की ओर कूच कर रहे किसान शंभू बॉर्डर पर डटे हैं। किसानों की आड़ में अपना फायदा उठा रहे अपराधी तत्व भी इसमें शामिल हो गए हैं। ऐसे चेहरों में से एक पूर्व गैंगस्टर और दो दर्जन से ज्यादा केस वाला लखा सिधाना भी है। वो किसानों के बीच दिखा है। यही नहीं, उसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वो किसानों से बैरियर को हटाने के लिए उकसा रहा है। वहीं, पंजाब में रेल रोको अभियान का भी ऐलान किया गया है।

एक तरफ किसानों की आड़ में छिपे कट्टरपंथी लगातार आक्रामक कदम उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार किसानों को मनाने में लगी है। इसी कड़ी में आज (15 फरवरी 2024) केंद्र सरकार के मंत्री किसान नेताओं से तीसरी बार मुलाकात करेंगे। बताया जा रहा है कि सरकार किसानों की कई माँगों पर सहमत हो चुकी है, बस दो-तीन माँगें ऐसी हैं, जिनपर विचार किया जा रहा है। बता दें कि किसानों की मुख्य माँग एमएसपी की कानूनी गारंटी की है, साथ ही वो स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के हिसाब से एमएसपी चाहते हैं।

शंभू बॉर्डर बना शक्ति प्रदर्शन का केंद्र, दिखा गैंगस्टर

चंडीगढ़ से दिल्ली कूच करने वाले किसानों को पंजाब की सीमा पर रोक लिया गया है। हरियाणा सरकार ने शंभू बॉर्डर को सील कर दिया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी किसान शंभू बॉर्डर से आगे बढ़ने की कोशिश रहे हैं। वहीं, इस बीच किसान आंदोलनकारियों के बीच ही एक पूर्व गैंगस्टर लखा सिधाना के भी होने की खबर आ रही है। लखा कुछ साल पहले तक बहुत खतरनाक गैंगस्टर था, अब वो राजनीति करता है।

एक जानकारी ये भी मिली है कि उसके 44 से ज्यादा आदमी लोग पुलिस मुठभेड़ में अलग-अलग समय पर ढेर हो चुके हैं। हालाँकि अब वो खुद को नेता बताता है और पंजाब में चुनाव लड़ चुका है। लेकिन यही लखा सिधाना 26 जनवरी 2021 को लाल किले पर हिंसा के मामले में भी सक्रिय था। वो दीप सिद्धू का दोस्त था और अब उसकी जगह लेना चाहता है। खास बात ये है कि उगाही के मामले में वो 2 दिन पहले ही जमानत पर बाहर आया है और आते ही लोगों को हिंसा के लिए उकसाता दिख रहा है। वो जेसीबी पर खड़ा होकर लोगों को उकसाते हुए बैरियर तोड़ने के बाद ही दिल्ली जाने की बात कह रहा है।

किसानों से तीसरे दौर की बातचीत कर रही सरकार

केंद्र सरकार ने किसान नेताओं से तीसरे दौर की बातचीत के लिए कहा, जिस पर सहमति बन गई है। चंडीगढ़ में आज (15 फरवरी 2024) शाम को 5 बजे ये बैठक होगी। इस बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी शामिल रहेंगे। पंजाब किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने कहा है कि किसान सकारात्मक तरीके से बैठक में शामिल होंगे। उन्होंने बैठक से समाधान निकलने की भी बात कही। जानकारी के मुताबिक, 14 फरवरी 2024 को कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा और अन्य नेताओं ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद ही सरकार ने किसानों से तीसरे दौर की बातचीत के लिए संदेश भेजा।

पंजाब में रेल रोको अभियान

किसान आंदोलन 2.0 के तीसरे दिन सरकार और किसानों के बीच तीसरे दौर की बातचीत होने जा रही है, जिसमें बाकी बचे मुद्दों का भी समाधान निकल सकता है। इस बीच, पंजाब में किसानों ने रेल रोकने का ऐलान कर दिया है। पंजाब के किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (उग्रहा) ने आज (15 फरवरी 2024) पंजाब में ट्रेनों को रोकने का ऐलान किया है। पंजाब में दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ट्रेनों को चलने नहीं दिया जाएगा। बीकेयू(उग्रहा) ने शंभू बॉर्डर पर किसानों को रोकने और उनके खिलाफ बल-प्रयोग के विरोध में ये ऐलान किया। इसके बाद आनन-फानन में कई ट्रेनों को रद्द किया गया है। वहीं, किसानों ने 4 घंटों के लिए सभी टोल प्लाजा भी फ्री कर देने का ऐलान कर दिया है।

बता दें कि किसानों के दिल्ली मार्च के दूसरे दिन शंभू बॉर्डर पर किसानों ने जमकर पथराव किया। उन्होंने बैरियर तोड़ने की भी कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। पुलिस ने किसानों को बैरियर तोड़ने से रोकने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़े और उन्हें तितर बितर किया। वहीं, छिटपुट दिल्ली की तरफ बढ़े किसानों को दिल्ली में आने से रोकने के लिए पूरी दिल्ली को सील कर दिया गया है। दिल्ली में हरियाणा से लगे टिकरी-सिंघु और झरोदा बॉर्डर की लगभग किलेबंदी कर दी गई है। वहीं, दिल्ली-यूपी सीमा पर चिल्ला-गाजीपुर बॉर्डर को भी सील कर दिया गया है और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम कर दिए गए हैं।

‘संदेशखाली में एक भी रेप नहीं’ – बंगाल पुलिस ने खबर को बताया भ्रामक, मीडिया पर लेंगे एक्शन: NCW ने बताया ‘धमकी’ टैक्टिक्स

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं के यौन उत्पीड़न की खबर मीडिया में आने के बाद अब बंगाल पुलिस ने अपना बयान जारी किया है। पुलिस ने कहा है कि संदेशखाली पर मीडिया ने जानबूझकर गलत खबर फैलाई। उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं है कि स्थानीय महिलाओं से रेप हुआ इसलिए वो उस मीडिया के खिलाफ एक्शन लेंगे जिन्होंने ऐसी खबरें फैलाने का काम किया।

पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा किए गए ट्वीट में उन्होंने कहा कि संदेशखाली के घटनाक्रम पर मीडिया के एक वर्ग द्वारा फर्जी खबर फैलाई गई। पुलिस ने कहा कि वह इस बात की पुष्टि करते हैं कि संदेशखाली में राज्य महिला आयोग द्वारा की गई जाँच में अभी तक किसी महिला के द्वारा रेप की कोई शिकायत नहीं दी गई है। राज्य महिला आयोग की टीम में 10 महिला सदस्य हैं और इसकी अध्यक्षता डीआईजी-सीआईडी कर रही हैं। इस टीम ने संदेशखाली में दौरा किया और उन्होंने भी यही कहा कि स्थानीय महिलाओं ने जाँच में रेप की बात नहीं कही है।

अपने ट्वीट में पुलिस ने यह भी कहा कि इस संबंध में लगे सभी आरोपों और प्राप्त शिकायतों के विरुद्ध वह विधिवत कार्रवाई करेंगे और साथ में उस मीडिया के खिलाफ भी एक्शन लेंगे जिसने इस संबंध में भ्रामक खबरें फैलाईं। अपने इस ट्वीट के साथ उन्होंने न्यूज 18 का वीडियो लगाया है।

बता दें कि संदेशखाली में महिलाओं के यौन उत्पीड़न का मामला मीडिया में आने के बाद जहाँ पुलिस ने राज्य महिला आयोग की जाँच के बाद मीडिया खबरों को ‘भ्रामक’ बताया है तो वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि संदेशखाली मामले को सटीक को सटीक मीडिया कवरेज न मिल पाने के कारण वह चिंतित हैं। उनके मुताबित जाँच समिति ने पाया कि पश्चिम बंगाल में पीड़ितों को स्थानीय पुलिस द्वारा धमकी दी जा रही है, उन्हें बाहर आने और यौन और शारीरिक उत्पीड़न की घटनाओं की रिपोर्ट करने से रोका जा रहा है।

इससे पहले खबर आई थी कि कुछ महिलाओं ने कहा है कि जाँच के दौरान प्रशासन उनसे रेप के मेडिकल प्रमाण माँग रहा है। मीडिया से बात करते हुए एक महिला ने बताया कि उसने गुंडों द्वारा बलात्कार की बात बताई तो उससे अब रेप का मेडिकल प्रमाण पत्र दिखाने के लिए कहा जा रहा है। महिला ने पूछा कि आखिर कौन-सी पीड़िता सामने आकर यह स्वीकार करेगी। महिला ने बताया कि उसके साथ यौन दुराचार नहीं हुआ है, लेकिन गाँव की कई महिलाओं के साथ ऐसा हुआ है।

असम में अपने ही विधायकों से नहीं मिले राहुल, दुनिया भर की पार्टियों से करते रहे बातचीत: 2 कॉन्ग्रेस MLA का समर्थन मिलने को CM हिमंता ने बताया तोहफा

भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने असम में अपनी पार्टी के किसी भी विधायक से नहीं मिले थे। असम में उत्तरी करीमगंज से कॉन्ग्रेस विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने आरोप लगाया है कि असम में एक सप्ताह तक राहुल गाँधी उन पार्टियों से मिलते रहे, जिनका कोई जनाधार नहीं है। उधर, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गाँधी को तोहफा दिया है।

पुरकायस्थ ने कहा, “यहाँ हमारे 24 विधायक हैं। वह (राहुल गाँधी) यहाँ 15 पार्टियों से मिले, जो कि INDI गठबंधन में शामिल हैं। इनकी अपनी कोई पहचान नहीं है और लोगों ने इनका नाम तक नहीं सुना है। अब ये पार्टियाँ 2-3 सीट माँग रही हैं। जब इनसे गठबंधन हुआ तब भूपेन बोरा (असम कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष) ने हमसे कोई सलाह नहीं ली।”

पुरकायस्थ ने राहुल गाँधी को लेकर निराशा व्यक्त की और कहा, “राहुल गाँधी को यहाँ के 24 विधायकों के साथ कम-से-कम आधे घंटे तक बातचीत करनी चाहिए थी। वह यहाँ आठ दिनों तक थे। इस बीच उनकी विधायकों से कोई बातचीत नहीं हुई। आखिरी दिन भी उनकी बस में एक मीटिंग हुई और मुझे नहीं मालूम उसमें क्या बात हुई।” उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी के कई विधायक मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के संपर्क में हैं।

पुरकायस्थ ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सरमा राहुल गाँधी के साथ अन्य पार्टियों के नेताओं की हुई मीटिंग के बारे में उनसे अधिक और विस्तार में जानते हैं। पुरकायस्थ ने आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस में आपसी संवाद नहीं है। अब उन्होंने कॉन्ग्रेस विधायक बसंत दास के साथ विधानसभा में भाजपा सरकार का समर्थन करने का निर्णय लिया है। हालाँकि, वह अभी कॉन्ग्रेस नहीं छोड़ेंगे, लेकिन विधानसभा के भीतर सरकार का साथ देंगे। इसका ऐलान मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी किया है।

बता दें कि पुरकायस्थ राज्य की विपक्षी दल कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष थे और बसंत दास इसके पहले वाली कॉन्ग्रेस की तरुण गोगोई सरकार में मंत्री थे। इन दोंनों कॉन्ग्रेस नेताओं का समर्थन मिलने के बाद CM सरमा ने बुधवार (14 फरवरी 2024) को इसे कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को दिया गया तोहफा बताया।

उन्होंने इस बाबत एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “एक कहानी सुनिए- जब राहुल गाँधी असम आए, उन्होंने कॉन्ग्रेस के सारे विधायकों को अपनी आलीशान बस में बुलाकर, धमका कर कहा कि असम विधानसभा को चलने नहीं देना चाहिए। हमने भी उन्हें एक तोहफ़ा दिया। अब कॉन्ग्रेस के विधायक सरकार का समर्थन कर सदन को शांतिपूर्ण तरीक़े से चलने दे रहे हैं।”

मेला देखने गईं हिन्दू महिलाओं को शमीम और सदरुद्दीन ने पीटा, पेट पर मारी लात: साधुओं ने किसी तरह बचाया, भाई को मिली धमकी – कब्रिस्तान में दफन कर देंगे

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में एक हिन्दू युवक, उसकी माँ और बहन पर हमले की खबर है। हमले का आरोप शमीम और सदरुद्दीन के साथ उनके 2 अन्य अज्ञात साथियों पर लगा है। पीड़ित युवक परिवार सहित मेला देखने आया था। बीच-बचाव मेले में मौजूद कुछ साधुओं ने किया। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना सोमवार (12 फरवरी, 2024) की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित युवक ने बताया कि उन्हें मार कर कब्रिस्तान में दफन करने की धमकी दी गई थी।

यह मामला फर्रुखाबाद जिले के थाना क्षेत्र कादरी गेट का है। पीड़ित युवक विकास राजपूत ने मंगलवार (13 फरवरी, 2024) को मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है। शिकायत में विकास ने बताया कि सोमवार (12 फरवरी, 2024) को वह अपने परिवार के साथ मेला रामनगरिया में घूमने गए थे। विकास के साथ उनका एक भाई, माँ और 2 बहनें थीं। रात लगभग 10:15 बजे विकास परिवार सहित एक चूड़ी कंगन की दुकान पर पहुँचे। यहाँ वो एक बिछी चारपाई पर बैठने लगे। तभी युसूफ का बेटा शमीम और शाकिर का बेटा सदरुद्दीन अपने 2 अन्य अज्ञात साथियों सहित विकास को गालियाँ देने लगा।

जब विकास ने इसका विरोध किया तब आरोपितों ने मिल कर उसकी पिटाई शुरू कर दी। विकास की माँ, दोनों बहनें और भाई भी मदद के लिए दौड़े तो उनको भी गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए आरोपितों ने मारा-पीटा। दावा है कि इस हमले में विकास के परिजनों को काफी चोटें आईं हैं। जब आसपास के लोग जमा होने लगे तो आरोपित गालियाँ और जान से मार डालने की धमकी देते हुए मौके से भाग निकले। ऑपइंडिया से बात करते हुए विकास ने बताया कि उन्हें कब्रिस्तान में दफन करने की धमकी दी गई थी।

पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 323, 504 व 506 के तहत FIR दर्ज की है। FIR में सदरुद्दीन और शमीम को नामजद किया गया है। 2 अन्य आरोपित अज्ञात में दिखाए गए हैं। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। न्यूज़लाइन नेटवर्क की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 2 आरोपितों को हिरासत में भी लिया जा चुका है।

इस मामले में चश्मदीद साधुओं का वीडियो सामने आया है। साधुओं का कहना है कि उन्होंने अपनी आँखों से देखा कि हमलावर न सिर्फ युवक बल्कि उनके घर की औरतों को बुरी तरह से पीट रहे थे। महिलाओं के पेट में भी लात मारे जाने का दावा किया गया है। साधुओं ने यह भी कहा कि अगर उन्होंने एकजुट हो कर पीड़ितों को न बचाया होता तो आशंका थी कि आरोपित उनकी हत्या कर देते। साधुओं ने हमलावरों पर कठोर कार्रवाई की भी आशा जताई है।