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एक बार फिर भतीजे से हारे शरद पवार: महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर ने भी अजित गुट को माना असली NCP, विधायकों को अयोग्य ठहराने से इनकार

दो गुटों में बँटी नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने अहम फैसला दिया है। नार्वेकर ने शरद पवार गुट को झटका देते हुए उनसे अलग हुए भतीजे अजित पवार के गुट को ही असली NCP बताया है। स्पीकर का यह फैसला उपमुख्यमंत्री अजित पवार और 8 अन्य विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए दी गई याचिका दायर पर आया है।

महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अजित पवार गुट ही ‘असली NCP’ है। नार्वेकर ने कहा, “अजित पवार गुट ने 30 जून 2023 को राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव किया और उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना। अजित पवार को 41 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इसलिए अजित पवार गुट ही असली NCP है।” बता दें कि दोनों गुटों ने दावा किया था कि वे ही असली NCP हैं।

दरअसल, शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट NCP (शरदचंद्र पवार) ने अपनी याचिका में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत 9 विधायकों को अयोग्य ठहराने की माँग की थी। नार्वेकर ने कहा कि अजित गुट के सभी विधायक योग्य हैं। कोई भी विधायक अयोग्य नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने शरद पवार गुट की याचिका खारिज कर दी।

राहुल नार्वेकर ने कहा, “शिवसेना को लेकर मैंने जो फैसला लिया था उसका आधार यहाँ लेना होगा। दोनों गुट पार्टी में अध्यक्ष पद को लेकर दावा कर रहे हैं। दोनों गुट दावा कर रहे हैं कि अध्यक्ष का चुनाव पार्टी के संविधान के मुताबिक नहीं हुआ है। पार्टी में दो समानांतर नेतृत्व खड़े हो गए हैं। दोनों समूहों द्वारा अयोग्यता याचिकाएँ भी दायर की गई हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “NCP के संविधान के अनुसार एनसीपी वर्किंग कमेटी सर्वोच्च संस्था है। इसमें 16 स्थायी सदस्य हैं। पार्टी का संविधान अस्थायी सदस्यों को इजाजत नहीं देता। पार्टी के संविधान और नेतृत्व संरचना में कोई स्पष्टता नहीं है। ऐसे में हमें नेतृत्व संरचना, पार्टी संविधान और संख्या बल के आधार पर तय करना होगा कि पार्टी किसकी है। ऐसे में संख्याबल के हिसाब से अजित पवार की अगुवाई वाला गुट की असली एनसीपी है।”

नार्वेकर ने यह भी कहा कि दलबदल के आधार पर विधायकों की अयोग्यता से संबंधित भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची में दिए गए प्रावधानों का उपयोग सदस्यों को चुप कराने या विपक्ष को कुचलने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से कानून का दुरुपयोग होगा और न्याय के सिद्धांत के विपरीत होगा।

बता दें कि चुनाव आयोग ने भी अपने फैसले में अजित पवार गुट को असली NCP बताया था और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न घड़ी आवंटित कर दिया था। इस पर NCP के संस्थापक शरद पवार ने रविवार (11 फरवरी 2024) को कहा था कि आयोग द्वारा अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने का फैसला हैरान करने वाला है।

शरद पवार ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली पार्टी को असली NCP के रूप में मान्यता देने के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। गौरतलब है कि बाद में चुनाव आयोग ने शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को ‘नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार)’ का नाम दिया था।

पूर्व पत्नी के सामने महाभारत के ‘कृष्ण’ लाचार, कहा- बेटियों से मिलने नहीं देती, IAS होने का धौंस दिखाती है: MP पुलिस से लगाई गुहार

टीवी सीरियल महाभारत में ‘कृष्ण’ का किरदार निभाने वाले अभिनेता नीतीश भारद्वाज ने अपनी पूर्व पत्नी स्मिता घाटे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्मिता उन्हें बेटियों से मिलने नहीं देती है। मानसिक तौर पर प्रताड़ित करती है। उन्होंने मध्य प्रदेश पुलिस से इस मामले में सहायता माँगी है।

नीतीश भारद्वाज ने भोपाल के पुलिस कमिश्नर को इस संबंध में शिकायत सौंपी हैं। उन्होंने इस शिकायत में अपनी पूर्व पत्नी और मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस स्मिता घाटे पर कई आरोप लगाए हैं। भारद्वाज ने कहा है कि पूर्व पत्नी उन्हें मानसिक रूप से लगातार परेशान करती हैं। जुड़वा बेटियों से मिलने और बात करने नहीं देती हैं। इसकी वजह से वे काफी परेशान हैं।

उन्होंने शिकायत में कहा है कि बेटियों को कोर्ट ने उनकी पूर्व पत्नी को नहीं सौंपा है। इस मामले में मुकदमा चल रहा है। इसके बावजूद पूर्व पत्नी ने बेटियों को अपने पास रखा हुआ है और वह नहीं जानते उनकी बेटियाँ किस हाल में हैं। भारद्वाज ने कहा है कि वह अपनी पूर्व पत्नी के आचरण को अच्छी तरह जानते हैं। इसी वजह से अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसी महिलाएँ पहले भी अपने बच्चों के लिए खतरनाक साबित हुई हैं। उन्होंने इसके लिए हाल ही में गोवा में पकड़ी गई अपने बच्चे की हत्यारोपी सूचना सेठ का उदाहरण दिया है।

भारद्वाज ने शिकायत में पूर्व पत्नी के विषय में बताया है कि उन्होंने उनकी बेटियों को इंदौर से लाकर भोपाल में एक स्कूल में दाखिला दिला दिया और उन्हें इसके विषय में कुछ नहीं बताया। यह भी आरोप लगाया है कि उनकी पूर्व पत्नी IAS होने का फायदा उठाते हुए स्कूल के प्रिंसिपल को भी धमकाती रही हैं। उन्होंने बताया है कि बाद में उनकी बेटियों को तमिलनाडु के ऊटी स्थित एक बोर्डिंग स्कूल में भेज दिया गया। उन्हें इसके बारे में भी जानकारी नहीं दी गई।

नीतीश भारद्वाज ने भोपाल के कमिश्नर हरिनारायणाचारी मिश्र से मिलकर बच्चियों के अपहरण का मामला दर्ज करने की अपील की है। कमिश्नर मिश्र ने मामले की जाँच के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि नीतीश भारद्वाज विवाह मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस स्मिता घाटे से वर्ष 2009 में विवाह हुआ था। वह उनकी दूसरी पत्नी हैं। आपसी खटपट के बाद 2019 में उन्होंने आपसी सहमति से तलाक के लिए अर्जी डाली थी।

बंगाल में 25 साल की युवती का अधनंगा शव मिला, परिजनों ने रेप के बाद हत्या की जताई आशंकाः BJP बोली- अभिशाप बनीं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में कई महिलाओं ने टीएमसी नेता शाहजहाँ शेख और उसके सहयोगियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इसके बाद से यह मामला गरमाया हुआ है। इस बीच राज्य के मालदा जिले के मोथाबारी इलाके में गुरुवार (15 फरवरी) को 25 वर्षीय एक महिला का अर्धनग्न शव उसके घर से कुछ दूरी पर मक्के के खेत में मिलने से सनसनी फैल गई है।

पीड़िता की पहचान कल्पना मंडल के रूप में हुई है। वह सरस्वती पूजा (14 फरवरी) की शाम को लापता हो गई थी। इसके बाद से ही उसका परिवार चिंता में डूब गया। उसके परिवार के सदस्यों को संदेह है कि मृतक के साथ बलात्कार किया गया है और फिर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी गई। परिजनों का दावा है कि मृतक के शरीर पर हमले के निशान और चाकू के कई घाव थे।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कल्पना सरस्वती पूजा की सुबह सब्जियां लाने के लिए मोथाबाड़ी के श्रीपुर कॉलोनी इलाके में अपने घर से निकली थी। हालाँकि, जब वह घर लौटने में विफल रही, तो उसकी तलाश शुरू की गई, जिसके बाद गुरुवार की सुबह उसकी हालत गंभीर हुई। उसके दुखी परिवार के सदस्यों ने उसके लापता होने से पहले की घटनाओं को याद किया।

मृतका की माँ ने कहा, “कल हमारे गाँव में सरस्वती पूजा का उत्सव था। उत्सव और संगीत में मेरी बेटी भी शामिल थी। उसने शाम को मेरी एक पोती से कहा कि वह बाथरूम जा रही है, लेकिन वह कभी वापस नहीं लौटी। रात होते ही मेरे बेटे ने रात का खाना बनाने के लिए अपनी बहन को खोजना शुरू किया, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। इसके बाद हमें चिंता होने लगी।”

लड़की की माँ ने बताया, “हमने रात भर अथक प्रयास कर उसकी खोज की। आज सुबह उसका शव हमें मिला। मेरी बेटी की शादी को कुछ साल हो गए थे, लेकिन वह अपने पति के साथ समस्याओं के कारण हमारे साथ रहने के लिए वापस आ गई थी। उसका कोई अन्य मामला नहीं था। मुझे नहीं पता कि उसे किसने मारा या क्यों मारा।”

मृतका कल्पना मंडल के भाई ने कहा, “सरस्वती पूजा की रात मैं खिचड़ी और करी खाना चाहता था। मैं शाम को बाहर गया और लौटकर जब अपनी बहन को ढूंढने लगा तो पता चला कि वह गायब है। हमने तुरंत उसकी खोजबीन शुरू कर दी। मैं आज सुबह मुझे पता चला कि दीदी का शव मकई के खेत में पड़ा है। शव लगभग नग्न था। हमें संदेह है कि उसके साथ दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म कर हत्या की गई है।”

परिजनों का कहना है कि उन्होंने मोथाबारी पुलिस स्टेशन में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया है। बता दें कि 31 जनवरी 2024 को मालदा शहर में 11 साल की एक लड़की की सिर कटी लाश मिली थी। उसका सिर और धड़ शहर में अलग-अलग स्थानों पर पाए गए थे। अब मालदा के पास मोथाबाड़ी में एक युवती का अर्धनग्न शव मिला है।

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने अपने एक्स पोस्ट में कहा, “ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल महिलाओं के लिए नरक बन गया है। ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब किसी महिला के साथ बलात्कार और हत्या न होती हो। अपराध की क्रूरता अक्सर इतनी रोंगटे खड़े कर देने वाली होती है कि कोई भी कई दिनों तक सो नहीं पाता है। लेकिन, जब तक ममता बनर्जी को वोट मिलते रहेंगे, तब तक उन पर कोई असर नहीं होगा।”

उन्होंने आरोप लगाया, “किसी भी अपराधी पर कभी मुकदमा नहीं चलाया जाता, क्योंकि वे लगभग हमेशा सत्तारूढ़ टीएमसी से जुड़े होते हैं। बंगाल में अराजकता है। वहाँ मुख्यमंत्री और उनका आपराधिक पुलिस बल न केवल महिलाओं को सुरक्षा देने में विफल है, बल्कि पीड़ितों को न्याय से वंचित करने के लिए भी सक्रिय रूप से काम कर रहे है। ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की महिलाओं के लिए अभिशाप हैं।”

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते से पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में महिलाएँ टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि उनका लंबे समय से यौन शोषण किया जा रहा है। मामला मीडिया में आने और विरोध प्रदर्शन के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

संदेशखाली की कई महिलाओं ने बताया कि ईडी टीम पर हमले के मास्टरमाइंड शेख शाहजहाँ और अन्य टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा क्षेत्र की महिलाओं के साथ बलात्कार किया जा रहा है। महिलाओं के अनुसार, टीएमसी कार्यकर्ता नियमित रूप से इलाके में आते हैं और ‘खूबसूरत महिलाओं’ को चुनकर अपने साथ जबरन ले जाते हैं। कुछ महिलाओं ने कहा कि उन्हें रात में पार्टी कार्यालय ले जाया गया और पुरुषों के ‘पूरी तरह संतुष्ट’ होने के बाद ही उन्हें छोड़ा गया।

‘राम मंदिर से मोदी का ग्राफ चढ़ गया है, इसे गिराना है’: कथित किसानों का एजेंडा उनके ही नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने खोल दिया, Video

किसान आंदोलन के पीछे की असली वजह खुलकर सामने आ गई है। इस आंदोलन के पीछे की वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ नीचे गिराना है। खुद किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में ये बात स्वीकारी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ राम मंदिर के बाद बहुत बढ़ चुका है। इस आंदोलन में उन्होंने किसानों की तरफ से पूरा जोर लगाने की बात कही, ताकि मोदी सरकार की लोकप्रियता कम हो और उनकी सारी बातें मान ली जाएँ। हालाँकि मोदी की लोकप्रियता को गिराने की उनकी चाहत ये साफ बताती है कि ये आंदोलन क्यों खड़ा किया गया है।

किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने 14 फरवरी 2024 को ‘द अनम्यूट’ से बातचीत में कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ नीचे चला जाए तो सरकार कुछ भी मान लेगी। उन्होंने कहा कि किसानों पर लाठीचार्ज ये बताता है कि ये पीएम मोदी और बीजेपी के पतन का संकेत है।

दल्लेवाल ने अपनी मंशा साफ करते हुए बताया, अगर इस सरकार द्वारा किए गए वादे को सरकार से पूरा कराना है, तो फिर सरकार बदलने से पहले उसे हमारी बातों को मानने के लिए मजबूर करना पड़ेगा। वर्ना सरकार बदल जाएगी, तो नई सरकार कहेगी कि हमने तो वादा ही नहीं किया। इसके बाद किसानों को फिर से मेहनत करनी पड़ेगी। जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ रहा है, ऐसे में मुश्किल होगी।

दल्लेवाल ने कहा, “मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ मंदिर (अयोध्या रामलला मंदिर) बनने की वजह से तेजी से बढ़ा है। मैं लोगों से कहता रहा हूँ, उनके ग्राफ को नीचे लाना होगा। अगर उनका ग्राफ ऊपर रहेगा, तो वो कुछ नहीं करने वाले, लेकिन सरकार की लोकप्रियता गिरेगी, तो वो सारी बातों को मान लेगी।” इस दौरान उन्होंने दावा किया मोदी सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को भी मान लिया है।

बता दें कि किसान आंदोलन से जुड़े किसानों ने पंजाब में रेल रोको आंदोलन किया। उन्होंने दिन में 12 बजे से शाम 4 बजे तक रेलवे ट्रैक पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने कई टोल नाको को भी पूरी तरह से फ्री कर दिया। वहीं, सरकार और किसान नेताओं के बीच तीसरे दौर की बातचीत चंडीगढ़ में जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही कोई रास्ता निकल सकता है।

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मोदी सरकार ने खेती-किसानी को दिया खूब खाद-पानी, फिर ‘किसानों’ के नाम पर तमाशा क्यों? जानिए 10 साल में कैसे बदली कृषि क्षेत्र की तस्वीर

देश की राजधानी में पुलिस अलर्ट पर है। सड़कों पर ट्रैफिक रेंग रही है। आम आदमी परेशान है। यह स्थिति ‘दिल्ली चलो’ नाम के मार्च से उत्पन्न हुई है। कथित किसान खेत-खलिहान छोड़कर हरियाणा की सीमा पर पुलिस से भिड़ रहे हैं ताकि वे दिल्ली की तरफ बढ़ सके।

कृषि और किसानों की खुशहाली के नाम पर चल रहे इस तमाशे में प्रधानमंत्री को धमकी दी जा रही है। उनकी लोकप्रियता का ग्राफ गिराने की बात हो रही है। खालिस्तान के समर्थन में पोस्टर दिख रहे हैं। आम चुनावों से पहले किसानों के नाम पर देश में अराजक स्थिति पैदा करने की कोशिश हो रही है। इन साजिशों को काॅन्ग्रेस सहित विपक्षी दलों का भी समर्थन हासिल है।

यदि कृषि क्षेत्र में मोदी सरकार के कार्यों पर गौर करें तो इस तथ्य को और बल मिलता है कि इस तमाशे का मकसद किसानों का भला कम, राजनीति ज्यादा है। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने। के बाद से देश का कृषि बजट करीब 5 गुना बढ़ा है। 10 साल में खाद्यान्नों का उत्पादन रिकाॅर्ड स्तर पर पहुँच गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 62.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। खाद सब्सिडी तीन गुना हो चुका है। किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के जरिए कृषकों तक सीधे पैसा पहुँचाया जा रहा है।

सीधे-सरल शब्दों में कहें तो मोदी सरकार के 10 साल में किसानों की खुशहाली के लिए ढेर सारे काम हुए हैं। जमीन पर उनका असर भी दिखता है। यही कारण है कि किसानों के नाम पर बखेड़ा करने की इन कोशिशों का असर कुछ खास क्षेत्र तक सीमित है। इन कथित किसानों को आम लोगों का समर्थन नहीं मिल रहा है।

मोदी सरकार में MSP में हुआ बड़ा बदलाव

सरकार द्वारा जिन मूल्यों पर किसानों की फसल खरीदी जाती है, उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कहते हैं। हर फसली वर्ष में सरकार इन मूल्यों के विषय में घोषणा करती है। पंजाब के किसान मुख्य रूप से धान और गेँहू उगाते हैं। यदि इनके ही समर्थन मूल्य की बात की जाए तो वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सत्ता में आए थे, तब देश में धान का MSP ₹1310, जबकि गेँहू MSP ₹1475 था।

अब अगर वर्तमान मूल्यों की बात की जाए तो इसमें काफी बढ़ोतरी हुई है। फसली सीजन 2023-24 के लिए सरकार ने धान और गेँहू का MSP क्रमशः ₹2183 और ₹2200 रखा है। यह 2014 में ₹1310 और ₹1475 हुआ करता था। ऐसे में अगर 2014 से तुलना की जाए तो धान के MSP में 66.6% जबकि गेँहू के MSP में लगभग 50% की बढ़ोतरी हुई है। ऐसा भी नहीं है कि सिर्फ इन्हीं फसलों के दामों में बढ़ोतरी हुई है। अन्य फसलों पर भी सरकार ने धान दिया है।

मोदी सरकार ने MSP में उत्तरोतर बढ़ोतरी की है।

धान और गेँहू के अलावा बाजरा, मक्का और अरहर जैसी प्रमुख फसलों की MSP मोदी सरकार ने बढ़ाई है। बाजरे के MSP में सरकार ने 2014 से अब तक कुल 106% की बढ़ोतरी की है। यह 2014 में ₹1500 हुआ करता था, अब यह बढ़कर ₹3180 हो चुका है। अरहर दाल का MSP 2014 में ₹4300 हुआ करता था जो अब बढ़कर ₹7000 हो चुका है। यानी इसके MSP में 62% की बढ़ोतरी हुई है। इससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार MSP के मुद्दे पर काफी गंभीर है। इस दिशा में 10 साल में 62.5% की औसतन वृद्धि देखने को मिली है।

मोदी सरकार में सरकारी खरीद 30 फीसदी बढ़ी

ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार ने सिर्फ MSP बढ़ाई है, बल्कि वह लगातार MSP की दरों पर खरीदी जाने वाली फसलों की मात्रा भी लगातार बढ़ाती आई है। केंद्र सरकार की रिपोर्ट बताती है कि 2014-15 के दौरान सरकार ने MSP पर 761 लाख मीट्रिक टन फसल खरीदी थी। यह 2022-24 में यह आँकड़ा बढ़ कर 1062 लाख टन हो चुका है। इसका अर्थ है कि इस दौरान देश में फसलों की सरकारी खरीद में लगभग 30% की बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी का सीधा फायदा किसानों को हुआ है।

मोदी सरकार में खाद सब्सिडी तिगुनी

केंद्र सरकार ने MSP बढ़ाने और उस पर ज्यादा अन्न खरीदने के साथ ही साथ खेती की लागत घटाने पर भी ध्यान दिया है। केंद्र सरकार लगातार खाद और बीज पर सब्सिडी बढ़ाती आई है। एक रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2014-15 में केंद्र सरकार किसानों को ₹73,067 करोड़ की खाद सब्सिडी दिया करती थी। यह वर्ष 2022-23 में बढ़ कर ₹2.54 लाख करोड़ पहुँच गई।

खाद सब्सिडी बढ़ने के साथ ही देश में खाद का उत्पादन भी अधिक हो रहा है। यूरिया के ही उत्पादन को देखा जाए तो वर्ष 2014 में यह 225 लाख टन था, अब बढ़ कर 284 लाख टन हो चुका है। देश में नैनो यूरिया का भी उत्पादन हो रहा है।

कृषि बजट पाँच गुना, किसान सम्मान निधि भी

वर्ष 2014 के बाद से अब तक कृषि बजट भी पाँच गुना हो चुका है। वर्ष 2013-14 में UPA सरकार ने कृषि क्षेत्र को ₹29,687 करोड़ दिए थे। यह 2024-25 के अंतरिम बजट में बढ़कर ₹1.27 लाख करोड़ हो गया है। यानी इन दस वर्षों में कृषि के लिए दिए जाने वाले पैसे में 436% की वृद्धि हुई है। सरकार ने कृषि बजट बढ़ाने के साथ ही किसान सम्मान निधि जैसी योजना लाकर उन्हें सीधा लाभ भी दिया है। इस योजना के तहत सरकार हर किसान को ₹6000 प्रतिवर्ष देती है।

आँकड़े बताते हैं कि फरवरी 2019 में से अब तक इसके अंतर्गत किसानों को ₹2.82 लाख करोड़ सीधे उनके खाते में सरकार दे चुकी है। इस योजना के तहत देश के 11 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। पंजाब में भी इस योजना का लाभ 8.5 लाख किसानों को दिया जा रहा है।

कॉन्ग्रेस-आप के शासन में पंजाब बेपटरी

पंजाब को भारत के अग्रणी अन्न उत्पादक राज्यों में गिना जाता रहा है। हालाँकि, बीते कुछ वर्षों से यह तस्वीर बदल रही है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा खाद्य उत्पादन के लिए जारी किए गए आँकड़ों को देखने से पता चलता है कि अन्न उत्पादन में पंजाब में 2017-18 के बाद से वृद्धि ही नहीं हुई है। पंजाब में उगाई जाने वाली मुख्य फसलें धान और गेहूँ में यह स्थिति स्पष्ट रूप से देखने को मिलती है।

यह बात ध्यान देने वाली है कि पंजाब में 2017 में ही सरकार बदली थी और अकाली-भाजपा गठबंधन को हराकर कॉन्ग्रेस सत्ता में आई थी। इसके बाद 2022 में फिर आम आदमी पार्टी ने कॉन्ग्रेस को बेदखल कर दिया। दोनों पार्टियों पर राज्य के कुप्रबन्धन और किसानों को गुमराह करने के आरोप लगते रहे हैं।

किसानों के प्रदर्शन पर राजनीति हावी

इस बार के किसानों के प्रदर्शन को किसान आन्दोलन 2.0 बताया जा रहा है। पिछली बार हुए एक मुद्दा किसान कानूनों का था। वर्तमान में ऐसा कोई भी मुद्दा उनके सामने नहीं है। किसानों के यूनियन द्वारा रखी गई माँगे भी स्पष्ट नहीं हैं। उलटे बीच-बीच में खालिस्तान की माँग हो रही है।

इसी प्रदर्शन से किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल का एक बयान भी सामने आया है, जहाँ वह प्रधानमंत्री मोदी के ग्राफ को नीचे लाने की बात कर रहे हैं। इस बयान के बाद प्रश्न उठ रहे हैं कि यदि यह किसानों का प्रदर्शन है और अपनी माँगें मनवाने के लिए किया जा रहा है तो फिर इससे प्रधानमंत्री मोदी के ग्राफ का क्या लेना-देना है?

मोदी सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में किए गए बदलावों से यह स्थिति भी स्पष्ट है कि देश में किसानों की हालत में बदलाव आया है। ऐसे में प्रदर्शन के पीछे के राजनैतिक हितों के होने और उन्हें साधने के प्रयासों से इनकार नहीं किया जा सकता।

‘संदेशखाली में RSS का बेस’: शाहजहाँ को CM ममता बनर्जी ने दी क्लीनचिट, कहा- मास्क पहनकर बयान दे रहे BJP कार्यकर्ता

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं के साथ सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के स्थानीय नेताओं द्वारा यौन दुराचार करने के मामले में घिरी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि संदेशखाली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का बेस है। वहाँ पहले भी दंगे हो चुके हैं। ममता के इस बयान पर भाजपा ने तृणमूल सुप्रीमो को आड़े हाथों लिया है।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की विधानसभा में ममता बनर्जी ने कहा कि संदेशखाली में बाहर से आकर बीजेपी के कार्यकर्ता मास्क पहनकर बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वहाँ टारगेट शाहजहाँ शेख था। ED ने सबसे पहले उसे निशाने पर लिया और अब बीजेपी बाहर से लोगों को ला रही है। शाहजहाँ को एक तरह से क्लिनचिट देते हुए ममता ने कहा, “इस मामले में हमने एक्शन लेते हुए एक कमेटी बनाई है।”

संदेशखाली हिंसा पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “मैंने कभी भी अन्याय का समर्थन नहीं किया। मैंने राज्य आयोग और प्रशासन को वहाँ भेजा है। इस मामले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हमारी महिला टीम वहाँ मौजूद है। एक महिला पुलिस टीम लोगों से मुलाकात कर रही है। उनकी शिकायतों को सुनने के लिए उनके दरवाजे पर है।”

ममता ने आगे कहा, “हम निश्चित रूप से उन मुद्दों का समाधान करेंगे, जो रिपोर्ट किए जाएँगे। मुझे इस पर कार्रवाई करने के लिए पहले मामले को जानना होगा। वहाँ आरएसएस का बेस है। वहाँ 7-8 साल पहले दंगे हुए थे। यह एक संवेदनशील दंगा स्थल है। हमने सरस्वती पूजा के दौरान स्थिति को दृढ़ता से सँभाला, अन्यथा कुछ और प्लान था।”

ममता बनर्जी के बयान पर भाजपा के नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा, ममता जी ने जो बात कही है, वह बेहद शर्मनाक बात कही है। जो महिलाएँ टीम के साथ अपने चेहरे को आधा ढँक कर अपने खिलाफ यौन शोषण की बात कह रही थीं, उनको लेकर इन्होंने (ममता बनर्जी ने) कहा है कि ये महिलाएँ अपना मुँह खोलकर क्यों नहीं बोलतीं? मैं इनके खिलाफ कार्रवाई करूँगी।”

रविशंकर ने आगे कहा, “उन्होंने कहा कि संदेशखाली RSS का बर्नर है। इसका क्या मतलब है? आप इतना क्रूर और महिला विरोधी कैसे हो सकती हैं ममता जी? आज आपके TMC के गुर्गे रात में महिलाओं के दरवाजे खटखटाते हैं। उनका यौन शोषण करने का प्रयास करते हैं। ये महिलाएँ खुलकर बोल रही हैं। वो राज्यपाल जी के समाने गईं। दुनिया के सामने अपनी भयावहता खुद बयां कर रही हैं और ममता जी कह रही हैं कि RSS बर्नर है।”

इससे पहले संदेशखाली मुद्दे को लेकर स्मृति ईरानी ने भी बंगाल की ममता सरकार पर हमला बोला था। स्मृति ईरानी ने कहा था कि संदेशखाली की हिंदू महिलाएँ मदद माँग रही हैं। टीएमसी नेता शाहजहाँ कहाँ है? ममता और उनकी सरकार के लोगों ने कभी उन गुंडों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। स्मृति ईरानी ने यह भी दावा किया था कि महिलाओं के साथ हुए अत्याचार पर पुलिसकर्मी भी मूकदर्शक है।

बता दें कि पुलिस ने बुधवार (14 फरवरी 2024) को कहा था कि संदेशखाली पर मीडिया ने जानबूझकर गलत खबर फैलाई। उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं है कि स्थानीय महिलाओं से रेप हुआ है।इसलिए पुलिस उन मीडिया संस्थानों के खिलाफ एक्शन लेगी, जिन्होंने ऐसी खबरें फैलाने का काम किया है।

पुलिस ने कहा कि संदेशखाली में राज्य महिला आयोग द्वारा की गई जाँच में अभी तक किसी महिला के द्वारा रेप की कोई शिकायत नहीं दी गई है। राज्य महिला आयोग की टीम में 10 महिला सदस्य हैं और इसकी अध्यक्षता डीआईजी-सीआईडी कर रही हैं। इस टीम ने संदेशखाली में दौरा किया और उन्होंने भी यही कहा कि स्थानीय महिलाओं ने जाँच में रेप की बात नहीं कही है।

वहीं, बंगाल अशोकनगर के टीएमसी विधायक नारायण गोस्वामी ने एक इंटरव्यू में संदेशखाली की महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, “संदेशखाली की जनजातीय महिलाओं को उनके डील-डौल, रंग-रूप से पहचाना जा सकता है। लेकिन जो महिलाएँ कैमरे पर आकर आरोप लगा रही हैं वो गोरी हैं। क्या फिर भी हम उन्हें स्थानीय जनजातीय महिला कहेंगे।”

संदेशखाली का दौरा करके लौटे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष अरुण हलदर ने कहा, “मुझे संदेशखाली के बारे में रिपोर्ट मिली है। बहुत से लोग बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं दे रहे। पीड़ित लोग अनुसूचित जाति के हैं। उनको सुनने के लिए पूरा कमीशन आया है। इन लोगों की बातों को सुनकर मैं राष्ट्रपति को रिपोर्ट दूँगा। सच और झूठ लोगों की बात से पता चलेगा। एकतरफा राज्य सरकार जो कर रही है, उस पर भरोसा नहीं कर सकते।”

बता दें कि इससे पहले संदेशखाली की एक महिला ने मीडिया से बात करते हुए बताया था कि टीएमसी के गुंडों द्वारा बलात्कार की बात बताने पर रेप का मेडिकल प्रमाण पत्र दिखाने के लिए कहा जा रहा है। महिला ने पूछा कि आखिर कौन-सी पीड़िता सामने आकर यह स्वीकार करेगी। महिला ने बताया कि उसके साथ यौन दुराचार नहीं हुआ है, लेकिन गाँव की कई महिलाओं के साथ ऐसा हुआ है।

ध्यान देने वाली बात है कि संदेशखाली में पिछले कुछ दिनों से महिलाएँ सत्ताधारी पार्टी के गुंडों के विरुद्ध सड़कों पर उतरी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने टीएमसी गुंडों के भयावह कारनामों का खुलासा किया है। महिलाओं ने बताया कि वहाँ की महिलाओं के साथ टीएमसी के गुंडों द्वारा रेप और गैंगरेप आम बात है। वो टीएमसी की महिला कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ते।

महिलाओं का आरोप है कि पार्टी की मीटिंग में ये नेता सिर्फ महिलाओं को ही बुलाते हैं। महिला कार्यकर्ताओं को धमकाते हुए कहते हैं कि पति को मरने से बचाना है तो पार्टी के दफ्तर में आना पड़ेगा। जब महिलाएँ पार्टी के दफ्तर जाती हैं तो टीएमसी के गुंडे उनका यौन शोषण करते हैं। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें अपनी अपने परिजनों की सुरक्षा के लिए चुप रहना पड़ता है।

महिलाओं का ये भी आरोप है कि टीएमसी के गुंडे जमीनों पर कब्जा करते हैं और विरोध करने वालों को गैंगरेप की धमकी देते हैं। यही नहीं, उन्हें जो भी महिला पसंद आती है, उसे उठाकर अपने साथ ले जात हैं और मन भर जाता है तो घर भेज देते हैं। महिलाओं का यह भी आरोप है कि पश्चिम बंगाल की पुलिस टीएमसी के गुंडों के लिए सहायक का काम करती है और पीड़ितों को ही दबाती है।

हिरोइन से सांसद बनी मिमी चकवर्ती ने ‘राजनीति’ से की तौबा, ममता बनर्जी को भेजा इस्तीफा: TMC के स्थानीय नेतृत्व से नाराजगी बनी वजह

बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री और पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद मिमी चक्रवर्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मिमी ने अपना इस्तीफा TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी को सौंपा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वे अपनी जादवपुर सीट और स्थानीय नेतृत्व से खुश नहीं हैं। उन्हें स्थानीय नेताओं का पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा है। इसलिए वो अपने पद से इस्तीफा दे रही हैं।

मिमी चक्रवर्ती ने अपना इस्तीफा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को नहीं सौंपा है। इसलिए फिलहाल उनकी सांसदी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इससे पहले मिमी ने दो स्थायी समितियों की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। मिमी औद्योगिक मामलों पर संसद की स्थायी समिति की सदस्य थीं। वह केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की संयुक्त समिति की भी सदस्य भी थीं।

इतना ही नहीं, मिमी चक्रवर्ती ने अपने लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले स्वास्थ्य केंद्र संगठन के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था। मिमी जादवपुर लोकसभा के अंतर्गत नलमुड़ी और जिरंगछा ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोगी कल्याण संघ की अध्यक्ष थीं। इस इस्तीफे के बाद उनके अगले कदम को लेकर राजनीतिक गलियारे में अटकलें तेज हो गई थीं।

आखिरकार मिमी चक्रवर्ती ने गुरुवार (15 फरवरी 2024) को अपने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया। अब देखना है कि वह राजनीति से संन्यास लेती हैं या कोई और पार्टी में शामिल होती हैं। हालाँकि, अपने इस्तीफे को लेकर जो बयान दिया है, उससे लगता है कि वह संन्यास लेने के ही मूड में हैं। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि वह अपने लोकसभा सीट और स्थानीय नेतृत्व से खुश नहीं हैं।

मिमी चक्रवर्ती ने कहा, “राजनीति मेरे लिए नहीं है। अगर आप किसी की मदद कर रहे हैं तो आपको यहाँ (राजनीति में) किसी को बढ़ावा देना होगा… एक राजनेता होने के अलावा मैं एक अभिनेत्री के रूप में भी काम करती हूँ। मेरी समान जिम्मेदारियाँ हैं। यदि आप राजनीति में हैं तो आपकी आलोचना की जाती है, चाहे आप काम करें या नहीं। मैंने अपने मुद्दों के बारे में ममता बनर्जी से बात की है।”

तृणमूल सांसद ने आगे कहा, “मैं उन्हें (ममता बनर्जी को) उस पार्टी से अपने इस्तीफे के बारे में बताना चाहती थी, जिसने मुझे आगे बढ़ने का मौका दिया। मैंने उन्हें साल 2022 में भी सांसद पद से अपने इस्तीफे के बारे में बताया था। उस समय उन्होंने इसे खारिज कर दिया था। वह जो कहेंगी उसके बाद मैं आगे की प्रक्रिया पूरी करूँगी।”

मिमी चक्रवर्ती को TMC ने साल 2019 के लोकसभा चुनावों में जादवपुर सीट से चुनावी मैदान में उतारा था। मिमी ने भाजपा के उम्मीदवार अनुपम हजरा को 2.95 लाख वोटों से हराया था। इस चुनाव में मिमी चक्रवर्ती को कुल 6,88,472 वोट मिले थे। वहीं, भाजपा प्रत्याशी अनुपम हजरा को 3,93,233 वोट हासिल मिले थे।

मिमी चक्रवर्ती का जन्म 11 फरवरी 1989 को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में हुआ था। आज बंगाली फिल्म इंडस्ट्री का एक जाना-माना नाम हैं। उन्होंने साल 2012 में फिल्म ‘चैंपियन’ से अपने करियर की शुरुआत की थी और अब तक 25 से अधिक सफल फिल्मों में काम चुकी हैं। वह बंगाल में काफी लोकप्रिय हैं। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें 2019 में टिकट दी गई थी।

INDI गठबंधन की डूबती नाव से अब NC कूदी, अकेले लड़ेगी चुनाव: फारूक अब्दुल्ला ने मोदी लहर में ‘घर वापसी’ के भी दिए संकेत

इंडी गठबंधन को झटके पर झटके लग रहे हैं। एक एक करके सारे साथी दूर होते जा रहे हैं। अब नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी इंडी गठबंधन की जगह अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार (15 फरवरी 2024) को इस बात का ऐलान कर दिया है कि उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस इस साल के लोकसभा चुनाव में अकेले मैदान में उतरेगी। यही नहीं, उन्होंने एनडीए से भी जुड़ने के संकेत दिए हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “मुझे लगता है कि दोनों राज्यों में संसदीय चुनावों के साथ चुनाव शुरू होंगे। रही बात सीट बँटवारे की तो नेशनल कॉन्फ्रेंस अकेले चुनाव लड़ेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है।” इंडी गठबंधन के तमाम साथियों ने एक-एक करके अपनी राहें जुदा कर ली है। ममता बनर्जी, नीतीश कुमार, अरविंद केजरीवाल के बाद अब फारूक अब्दुल्ला का ये ऐलान उस गठबंधन के ताबूत में एक और कील की तरह है।

गुपकार गठबंधन के साथी क्या करेंगे?

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में गुपकार नाम का गठबंधन है, जिसमें महबूबा मुफ्ती की पीडीपी समेत कई पार्टियाँ शामिल हैं। वहीं फारूक अब्दुल्ला ने एनडीए से भी जुड़ने के संकेत दिए हैं। आजतक से बात करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि मुझे देश बनाने के लिए जो करना पड़ेगा, वो करूँगा। वहीं प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मुलाकात के सवाल पर कहा कि जब वो बुलाएँगे तो कौन बात नहीं करना चाहेगा। फारूक अब्दुल्ला ने एनडीए में शामिल होने पर कहा कि हम भविष्य में एनडीए में शामिल होने की संभावनाओं को नकार नहीं सकते। उन्होंने बताया कि इंडिया ब्लॉक में सीटों की शेयरिंग पर बातचीत फेल हो गई, जिसकी वजह से ये फैसला लिया है।

अरविंद केजरीवाल-ममता बनर्जी भी कर चुके हैं राह अलग

फारूक अब्दुल्ला से पहले ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, नीतीश कुमार, जयंत चौधरी जैसे साथी इंडी गठबंधन को छोड़ चुके हैं। ममता बनर्जी पहले ही पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं। अरविंद केजरीवाल ने भी पंजाब और चंडीगढ़ में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की है, तो आप ने अरुणाचल प्रदेश में भी पार्टी अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर चुकी है।

यही नहीं, दिल्ली में भी आम आदमी पार्टी ने 7 में से 6 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इसके अलावा नीतीश कुमार, जिन्होंने इस इंडी गठबंधन को खड़ा किया, वो इंडी गठबंधन को छोड़कर एनडीए में आ चुके हैं और बिहार में सत्ता बदल चुकी है। वहीं, उत्तर प्रदेश में सपा और इंडी गठबंधन के साथ रहे जयंत चौधरी भी इंडी गठबंधन से अलग होकर एनडीए में आ चुके हैं।

‘लोग बहुत कुछ कहना चाहते हैं पर उन्हें बोलने नहीं दे रहे’: संदेशखाली की पीड़िताओं से मिला SC आयोग, राष्ट्रपति को जाएगी रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में तनाव के बीच राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की टीम संदेशखाली पहुँची। इस टीम ने पीड़ितों से मुलाकात की। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की टीम राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य अंजू बाला ने कहा कि प्रशासन ने पीड़ितों की शिकायत तक दर्ज नहीं की है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष अरुण हलदर ने कहा, “मुझे संदेशखाली के बारे में रिपोर्ट मिली है। बहुत से लोग बहुत कुछ कहना चाहते थे लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं दे रहे। पीड़ित लोग अनुसूचित जाति के हैं। उनको सुनने के लिए पूरा कमीशन आया है। इन लोगों की बातों को सुनकर मैं राष्ट्रपति को रिपोर्ट दूँगा। सच और झूठ लोगों की बात से पता चलेगा। एकतरफा राज्य सरकार जो कर रही है, उस पर भरोसा नहीं कर सकते। कल सुबह 11 बजे राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजी जाएगी।” उन्होंने कहा कि ये आयोग राजनीतिक नहीं है, संवैधानिक है। हम यहाँ राजनीति करने नहीं, बल्कि लोगों की परेशानियों को सुनने आए हैं।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य अंजू बाला ने कहा, “यह एक शर्मनाक घटना है कि आज के समय में भी महिलाओं के साथ ऐसा कुछ हो सकता है। कोई भी महिला उन्हें पसंद आती थी, तो वो उसे ले जाते थे। यहाँ राजनीति का स्तर इस तरह गिर जाएगा कि आप महिलाओं को यूज करेंगे और यूज करने के बाद हटा देंगे। इस तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। यहाँ की मुख्यमंत्री खुद एक महिला हैं, उनका नाम ममता रखती है लेकिन दिल में ममता नाम की चीज नहीं है। यहाँ तो 376 तक का मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। हम मुलाकात करेंगे और जो धाराएँ लगनी चाहिए, वो लगवाने की कोशिश करेंगे।”

पीड़ितों से मुलाकात के बाच अंजू बाला ने अपनी बातों को दोहराया। उन्होंने कहा कि “ममता बनर्जी में ममता नाम की कोई चीज नहीं” है। उन्होंने कहा, “सीएम ममता बनर्जी कुछ भी खुलासा नहीं करना चाहतीं, वह महिलाओं पर अत्याचार की एफआईआर दर्ज नहीं करतीं। देश उन्हें माफ नहीं करेगा। हम चाहते हैं कि संदेशखाली में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए, क्योंकि यहाँ लोग बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं।” अंजू बाला ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को भी धन्यवाद कहा, क्योंकि उन्हीं की वजह से इस घटनाक्रम के बारे में पूरे देश को पता चला।

बता दें कि 8 फरवरी को संदेशखाली में महिलाओं ने टीएमसी के नेता और कथित तौर पर ममता बनर्जी के करीबी शेख शाहजहाँ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इस दौरान वहाँ काफी बवाल हुआ, जिसमें कई लोग घायल भी हो गए। संदेशखाली की महिलाओं ने आरोप लगाए हैं कि उन पर अत्याचार किया गया है। यहाँ तक कि टीएमसी की महिला कार्यकर्ताओं ने भी ये गंभीर आरोप लगाए। इस मामले में अब महिलाओं ने आरोप लगाए हैं कि उनसे बलात्कार का सर्टिफिकेट माँगा जा रहा है।

बता दें कि संदेशखाली में पिछले कुछ दिनों से महिलाएँ सत्ताधारी पार्टी के गुंडों के विरुद्ध सड़कों पर उतरी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने टीएमसी गुंडों के भयावह कारनामों का खुलासा किया है। महिलाओं ने बताया कि वहाँ की महिलाओं के साथ टीएमसी के गुंडों द्वारा रेप और गैंगरेप आम बात है। वो टीएमसी की महिला कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ते।

महिलाओं का आरोप है कि पार्टी की मीटिंग में ये नेता सिर्फ महिलाओं को ही बुलाते हैं। महिला कार्यकर्ताओं को धमकाते हुए कहते हैं कि पति को मरने से बचाना है तो पार्टी के दफ्तर में आना पड़ेगा। जब महिलाएँ पार्टी के दफ्तर जाती हैं तो टीएमसी के गुंडे उनका यौन शोषण करते हैं। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें अपनी अपने परिजनों की सुरक्षा के लिए चुप रहना पड़ता।

जूनागढ़ में जहर उगलने के लिए मुफ्ती अजहरी को मिले थे ₹40,000: रिपोर्ट में दावा- पुलिस एक्शन से सहमे दंगाइयों को उकसाने का दिया गया था टास्क

गुजरात के जूनागढ़ में भड़काऊ भाषण देने वाले मुफ़्ती सलमान अजहरी से राज्य के अलग-अलग हिस्सों की पुलिस अब भी पूछताछ कर रही है। उसे जूनागढ़ वाले मामले में अदालत से राहत मिल गई थी, लेकिन इसके बाद मोडासा और कच्छ के समख्याली में उसके विरुद्ध दर्ज मामलों में पूछताछ हो रही है। अजहरी के खिलाफ जूनागढ़, कच्छ और मोडासा में भड़काऊ भाषण देने के मामले दर्ज हैं।

मुफ़्ती अजहरी से जूनागढ़ पुलिस की पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जूनागढ़ क्राइम ब्रांच की जाँच में सामने आया है कि मुफ्ती सलमान अजहरी को यह जहरीले भाषण देने के लिए ₹40,000 दिए गए थे। यह पैसे उसे इन कार्यक्रमों के आयोजकों ने दिए थे।

इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि मुफ़्ती सलमान अजहरी ने जिस कार्यक्रम में यह जहरीला भाषण दिया था, वह नशा छुड़ाने के नाम पर आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम नरसिंह विद्यामंदिर स्कूल के मैदान में आयोजित किया गया था। पुलिस ऐसे ही और भी कार्यक्रमों की जाँच कर रही है।

मुफ़्ती सलमान अजहरी जहरीले भाषणों के लिए काफी कुख्यात है। अजहरी की सोशल मीडिया पर 4.69 लाख की अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है। वह कट्टरपंथी विचार फैलाता रहा है। उसके यूट्यूब वीडियो से भी उसे बड़ी कमाई होती है। यह बात अलग है कि जब पुलिस ने उससे सोशल मीडिया से होने वाली कमाई के बारे में पूछा तो उसने इसकी जानकारी होने से मना कर दिया।

अजहरी ने दावा किया कि उसके सोशल मीडिया अकाउंट दूसरे लोग सम्भालते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस जाँच में मुफ़्ती अजहरी ने और भी कई बातें उगली हैं। यह भी सामने आया है कि जूनागढ़ में जून 2023 में हुए माजेवाड़ी दंगे में जब पुलिस ने दंगाइयों पर कार्रवाई की तो उनका हौसला टूट गया था। इन दंगाइयों का हौसला बुलंद करने के लिए अजहरी को यहाँ बुलाया गया था।

जब मुफ़्ती सलमान अजहरी का यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था तो आयोजकों को कुछ लोगों ने इस विषय में चेताया भी था। लोगों ने आयोजकों से कहा था कि मुफ़्ती सलमान अजहरी हमेशा भड़काऊ भाषण देता है। ऐसे में अगर वह यही दोहराता है तो समस्याएँ खड़ी हो सकती हैं। हालाँकि, मुफ़्ती के भड़काऊ भाषणों के दीवानों ने इस पर ध्यान नहीं दिया और उसे बुलाया जिसके बाद उसने यहाँ जहर उगला।