भोपाल से भारतीय जनता पार्टी की सांसद साध्वी प्रज्ञा ने एक फ्लाइट के मैनेजर पर आरोप लगाया है कि उसने उन्हें नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया। अपने एक्स हैंडल पर ट्वीट करके उन्होंने इसकी जानकारी दी और साथ में उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी इस मामले में टैग किया।
अपने ट्वीट में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लिखा, “मा.उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मुंबई से दिल्ली अकासा एयर की फ्लाइट नंबर QP1120 से दिल्ली आने पर ड्यूटी मैनेजर इमरान और उसके साथियों द्वारा षड्यंत्र कर मुझे बड़ी हानि पहुँचाने का प्रयास किया। अपेक्षा करती हूँ आप कार्रवाई अवश्य करेंगे। जय श्री राम।”
मा.उड्डयन मंत्री श्री @JM_Scindia जी मुंबई से दिल्ली @AkasaAir फ्लाइट नंबर QP1120 से दिल्ली आने पर ड्यूटी मैनेजर इमरान और उसके साथियों द्वारा षड्यंत्र कर मुझे बड़ी हानि पहुंचाने का प्रयास किया।अपेक्षा करती हूं आप कार्यवाही अवश्य करेंगे। जय श्री राम
भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा के इस ट्वीट के बाद अभी सिविल एविएशन मंत्रालय से क्या कार्रवाई हुई इसका पता नहीं चल पाया है। लेकिन इस मामले पर कहा जा रहा है कि अकासा एयर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा- “हम आपके अनुभव से बहुत चिंतित हैं। आपके फीडबैक को रिव्यू के लिए टीम के साथ शेयर किया जाएगा और जरूरी एक्शन भी लेंगे।”
Hi Avi, our team is already looking into this and will reach out the customer soon.
बता दें कि यह पहली बार साध्वी प्रज्ञा फ्लाइट में बुरे अनुभव के कारण चर्चा में आईं हों, कुछ समय पहले भी उनकी स्पाइसजेट के विमान की एक वीडियो सामने आई थी जिसमें कुछ लोग उनसे बहस करते दिख रहे थे। स्पाइसजेट का कहना था कि प्रज्ञा आपातकालीन रो से हट नहीं रही थीं इसलिए उनसे लोग बहस कर रहे थे। बाद में प्रज्ञा वहाँ से चली गईं थीं।
बिहार के दरभंगा और सीतामढ़ी में 15 फरवरी 2024 को माँ सरस्वती की मूर्ति के विसर्जन के दौरान पथराव और झड़प की घटनाएँ सामने आई हैं। इसमें पहली घटना दरभंगा की है, जहाँ मूर्ति विसर्जन के लिए निकले जुलूस पर पत्थरबाजी की गई और तेजाब फेंका गया। बताया जा रहा है कि जब मूर्ति विसर्जन के लिए जुलूस मस्जिद से थोड़ी दूर पहले मुड़ रहा था, तभी उस पर पत्थरबाजी शुरू हो गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटनाक्रम भालपट्टी ओपी के मुड़िया पंचायत स्थित कसाई टोला का है। यहाँ शाम करीब 5 बजे मूर्ति विसर्जन के लिए जा रहे लोग पर पत्थरबाजी की गई। बताया जा रहा है कि मूर्ति विसर्जन के रास्ते से दो ट्रैक्टरों को पहले भी लौटाया जा चुका था। पत्थरबाजी की इस घटना में काफी लोग घायल हो गए। रिपोर्ट के मुताबिक पत्थरबाजी शुरू होते ही अचानक भगदड़ मच गयी, लोग प्रतिमा को छोड़कर वहाँ से भागे। इस दौरान सरस्वती प्रतिमा को भी तोड़ दिया गया, जिसके बाद लोग भड़क उठे। इसके बाद भीड़ ने घरों-दुकानों में भी तोड़फोड़ की। इस दौरान कई गाड़ियों को भी निशाना बनाने की बात आई। उपद्रव की सूचना मिलते ही दरभंगा के डीएम, एसएसपी और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुँचा और लोगों को शांत कराया।
भालपट्टी थाना में तैनात प्रिंस कुमार यादव ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा, “यात्रा के मार्ग परिवर्तन को लेकर अचानक तनाव हो गया। यात्रा कसाई मोहल्ले से होकर गुजर रही थी, तभी पत्थरबाजी की जाने लगी।” जब ये पूछा गया कि क्या यात्रा किसी मस्जिद के पास से होकर गुजर रही थी, तो उन्होंने साफ तौर पर इस बात को नकारा। उन्होंने कहा, “लोग मस्जिद के पास पहुँचे नहीं थे, फिर भी ये हमला हुआ।” इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
डीएम राजीव रौशन ने कही ये बात
इस बवाल के बाद दरभंगा के डीएम राजीव रौशन खुद पूरी रात उपद्रव की जगह पर कैंप करते रहे। मीडिया से बातचीत में डीएम राजीव रौशन ने कहा, “मुरिया पंचायत में प्रतिमा विसर्जन के दौरान दो समुदायों के बीच झड़प हो गई। हमने दोनों पक्षों से बातचीत की और विसर्जन के काम को आगे बढ़ाया।” उन्होंने आगे बताया, “प्रतिमा विसर्जन का रास्ता कहाँ से मुड़ना है, कोई पाँच कदम आगे, तो कोई थोड़ा पीछे, यहीं से ये विवाद शुरू हुआ, जिसमें पथराव हो गया। कई घरों के शेड भी टूटे हैं।” डीएम ने कहा कि उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। तेजाब फेंकने की बात पर उन्होंने कहा कि ऐसी बात सामने आ रही है, जाँच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
#WATCH | Darbhanga, Bihar: On clash between two communities over statue immersion, Darbhanga DM Rajeev Raushan says, "In Muriya panchayat, a clash broke out between two communities during statue immersion… We had talks with both parties and the due work of the immersion has… pic.twitter.com/BUEQ0EFrgv
दरभंगा सदर के अनुमंडल पुलिस अधिकारी ने बताया, “शाम लगभग पाँच बजे भालपट्टी थाना के मुरिया गाँव में सरस्वती प्रतिमा के विसर्जन के दौरान दो पक्षों में झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल भी हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही वरीय अधिकारी मौके पर पहुँचे। मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया है और मजिस्ट्रेट भी नजर रख रहे हैं। जाँच के हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मौके पर शांति है।”
#भालपट्टी ओ०पी० के मुड़िया गांव में मूर्ति विसर्जन के दौरान दो समुदायों के बीच आपसी झड़प हुई। उक्त घटना के संदर्भ में घटना की जानकारी देते हैं अनुमंडल पुलिस अधिकारी सदर, दरभंगा। . स्थिति सामान्य है, निगरानी रखी जा रही है। #HainTaiyaarHum#BiharPolicepic.twitter.com/PBZgDsWUDj
सोशल मीडिया पर हमले से जुड़े वीडियो तेजी से हो रहे वायरल
त्रीनि नाम के यूजर ने लिखा, “इस्लामिक भीड़ ने सरस्वती पूजा मूर्ति विसर्जन यात्रा पर हमला कर दिया। उन्होंने माँ सरस्वती की मूर्ति को तोड़ डाला। इस दौरान हिंदुओं के घरों पर हमले हुए, कई लोग घायल हो हुए।”
BREAKING: Islamists attacked Sarswati Pooja immersion ceremony, vandalized Maa Sarswati Murti, and attacked Hindu homes. Several injured.
स्वराज्य की पत्रकार स्वाति शर्मा गोयल ने दरभंगा हिंसा से जुड़े वीडियो शेयर किए। उन्होंने इस घटनाक्रम के बार में लिखा, “ये वीडियो बिहार के दरभंगा की हैं। यहाँ सरस्वती पूजा कार्यक्रम के दौरान कसाई मोहल्ला पहुँचते ही हमला कर दिया गया। एक हिंदू त्यौहार को हिंसक घटनाक्रम में बदल दिया गया, जिसमें कई लोग घायल हो गए हैं।” उन्होंने आगे ऐतिहासिक गलतियों का भी जिक्र किया है।
Visuals of a Saraswati Puja procession being attacked when they reached Kasai mohalla (butchers’ colony) in Bihar’s Darbhanga today
A Hindu festival turned into an occasion of chaos, with many participants left injured, and curfew imposed. Yet again
दरभंगा की तरह ही सीतामढ़ी से ही ऐसी ही घटना सामने आई। भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, सीतामढ़ी के परिहार थाना क्षेत्र में माता सरस्वती की प्रतिमा का विसर्जन करने जा रहे समूह पर पत्थरबाजी की गई। ये घटनाक्रम मसहा टोला वार्ड नंबर 13 का है। जानकारी के मुताबिक, प्रतिमा विसर्जन के लिए निकाली गई यात्रा पर पथराव हुआ, तो जवाब में दूसरी तरफ से भी पत्थर फेंके गए। इसमें कई लोग घायल भी हो गए। इस घटना की जानकारी मिलते ही थानाध्यक्ष राजकुमार गौतम ने स्थिति को संभाला। फिलहाल यहाँ भी स्थिति नियंत्रण में है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
पैसे को लेकर विवाद में मुस्लिम भीड़ ने एक हिंदू परिवार पर हमला कर दिया। इस घटना में राजू भोई कांति भोई राठौड़ की मौत हो गई। गुजरात के साबरकांठा जिले में लाठी-डंडों से लैस मुस्लिम भीड़ ने बुधवार (14 फरवरी 2024) को हिंदू परिवार पर हमला किया था। इस घटना के बाद पुलिस ने 30 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
जानकारी के अनुसार, बुधवार रात करीब 10 बजे साबरकांठा जिले के अंतर्गत आने वाले प्रांतिज के खोडियार कुवा मोटामाध इलाके में लाठी, लोहे के रॉड और पत्थर से लैस 30 गुंडों की मुस्लिम भीड़ ने एक हिंदू परिवार पर हमला कर राजू भोई की हत्या कर दी। इसके पीछे आपसी लेनदेन का मामला बताया बताया जा रही।
मुस्लिम भीड़ ने एक इको गाड़ी में भी तोड़फोड़ की। इस दौरान स्थानीय लोग मूकदर्शक बने रहे। दावा किया जा रहा है कि भीड़ ने पथराव करने से पहले यहाँ स्ट्रीट लाइटें बंद कर दी थी। हमला करने वाले मुस्लिम भट्टीवाला और जम्बूचोरा इलाके के निवासी थे। मुस्लिम भीड़ ने राजू भोई कांति भोई राठौड़ को खींचकर उनके सिर पर लोहे के पाइप से वार किया। उनके ऊपर मुस्लिम भीड़ ने इतने वार किए कि वह मरणासन्न हो गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई।
मुस्लिम भीड़ द्वारा हमले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची। तनाव को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। राजू भोई के बेटे ने मुस्लिम भीड़ के खिलाफ पुलिस से शिकायत की है। पुलिस ने 30 लोगों के खिलाफ हत्या समेत अन्य कई मामलों में FIR दर्ज की है।
मामले में अयाज कुरैशी, मुनाफ कुरैशी, अयूब कुरैशी, राशिद मियाँ, इमरान मियाँ कुरैशी, मकबूल मियाँ कुरैशी, जानी कमरूद्दीन, रईस मियाँ, मेहबूब खान, मालेक, समीर, मनन हारुन, निसार भाई, रफीक भट्टे, निसार मियाँ, बाबू अकबर, यूनुस मियाँ और फिरोज मियाँ की पहचान हमलावरों के रूप में हुई है।
साबरकांठा जिले के पुलिस अधीक्षक विजय पटेल ने बताया है कि 14 फरवरी की रात करीब 9.30 बजे बिग मढ़ इलाके में भोई समुदाय के मयूर भोई और मुस्लिम समुदाय के इमरान कादरी में पैसों के लेन-देन को लेकर झगड़ा हो गया था। इसके बाद हमला किया गया। एसपी पटेल ने बताया है कि राजू भोई की मौत के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है।
#Gujarat के प्रातीज शहरमें मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदूओ के धर पर पथराव किया,जिसमें कांति भोई नाम के शख्स को धर से घसीटकर ले गए दंगाईयो ने बेरहमी से हत्या कर दी, @sanghaviharsh@SPSabarkantha सिर्फ FIR से काम नही चलेगा जिहादियों के घर बुलडोजर चलाया जाए यही हिंदू समाज की मांग है। pic.twitter.com/4tnnkFAS7X
पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। इस घटना के कारण प्रांतिज नगर के सभी बाजार बंद हो गए हैं। बजरंग दल ने आरोप लगाया है कि राजू भोई कांति भोई राठौड़ के आवास पर मुस्लिम भीड़ ने पथराव भी किया था। हिंदू संगठनों ने इस मामले में आरोपितों के घरों पर बुलडोजर चलाने की माँग की है।
‘सब लोकतंत्र’ न्यूज पोर्टल के फाउंडर रचित कौशिक को पंजाब जेल से जमानत मिल गई है। उन्होंने रिहा होने के बाद एक वीडियो अपने एक्स अकॉउंट पर शेयर की है। इस वीडियो को शेयर करने के साथ उन्होंने कहा कि उन्हें पंजाब जेल से रिहाई मिल गई है। लेकिन फोन को अब भी पुलिस ने अपने पास रखा है। जल्द ही रचित कौशिश दिल्ली आएँगे।
अपनी वीडियो में उन्होंने कहा, “पंजाब पावन गुरुओं की धरती से बसंत पंचमी के दिन जमानत और अनुमति लेकर मैं आ गया हूँ त्रिपुरासुरी माता के आँचल में त्रिपुरा। अगरतला में होने वाले खेलो इंडिया गेम्स में सम्मिलित रहकर अगले हफ्ते मैं दिल्ली आऊँगा। मैं सभी लोगों का धन्यवाद करूँगा जिन्होंने मुझे सपोर्ट किया। सभी यूट्यूबर्स, ट्विटर, यूजर के एक्टिविस्ट जिन्होंने मेरे लिए आवाज उठाई, सभी व्यक्ति और संगठन चाहे वो राजनैतिक थे, सामाजिक थे, प्रशासनिक थे उन सभी का धन्यवाद।”
Baba released from Jail. (Phone still in custody. He will talk to all of you when he returns to Delhi next week). रचित कौशिक pic.twitter.com/BeZ19pHYAS
उन्होंने कहा- “बहुत सारे प्रशंसकों ने जिस प्रकार का सहयोग दिया उसका मुझपर कोई उत्तर नहीं है लेकिन हाँ बहुत से शुभचिंतकों के प्रश्न हैं कि क्या हुआ, कैसे हुआ, क्यों हुआ, क्या होगा… मेरे पास एक ही उत्तर है उसका- हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता हमें, शरण में जब रख जब माथ तो किस बात की चिंता।”
रचित कौशिक को गाड़ी से खींचकर ले गई थी पंजाब पुलिस
बता दें कि रचित कौशिक को 6 फरवरी, 2024 को पंजाब के चार पुलिसकर्मियों ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से उठाया था। कौशिक एक पारिवारिक शादी समारोह में शामिल होने के लिए मुजफ्फरनगर आए थे। वहीं शाम 7 बजे के करीब कौशिक अपनी भांजी को पार्लर से लेकर विवाह स्थल पर जा रहे थे, जिस दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया।
ऑपइंडिया से रचित कौशिक की माँ ने बताया था कि उनका बेटा अपनी भांजी को लेकर शादी वाली जगह पर जा रहा था। अचानक से एक स्कॉर्पियो उनकी गाड़ी के सामने आ गई। इस गाड़ी से एक सिख व्यक्ति सामान्य कपड़ों में बाहर निकला। कौशिक ने समझा कि उनकी कार स्कॉर्पियो को टच कर गई है, इसलिए उन्होंने इस व्यक्ति से बात करने के लिए गाड़ी का शीशा नीचे किया। लेकिन सिख व्यक्ति ने बिना किसी चेतावनी के उनकी गाड़ी का दरवाजा खोला और कौशिक को बाहर खींच लिया। इससे पहले कि कौशिक के साथ वाले लोग कुछ समझ पाते वह उन्हें खींचकर अपनी गाड़ी में ले।
परिजनों ने पुलिस को सूचित किया तो पता चला कि पंजाब पुलिस ने कौशिक को हिरासत में लेने की सूचना पहले लोकल थाने में दी थी लेकिन रचित के परिवार का कहना था कि उन्हें कोई वारंट नहीं मिला। उन्होंने यह भी जानकारी दी थी कि जब पुलिस कौशिक को पकड़ने आई तो ये कह रही थी- “तुमको लम्बे समय से ढूँढ रहे थे, आखिर में पकड़ लिया।”
FIR में क्या?
जिस मामले में रचित कौशिक को गिरफ्तार किया गया था उसमें एफआईआर लुधियाना के सलेम टाबरी थाना क्षेत्र के अलीशा सुल्तान की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि 17 जनवरी 2024 को उन्होंने ईसाई समुदाय के खिलाफ एक पोस्ट ‘नो कन्वर्जन (@noconversion)’ नाम के एक्स/ट्विटर हैंडल पर देखी, जो उन्हें अपमानजनक लगी। उन्होंने कहा कि ऐसे पोस्ट सांप्रदायिक तनाव भड़का सकते हैं जिससे देश में अशांति भी फैल सकती है। FIR में उन पोस्टों की प्रतियाँ शिकायत के साथ संलग्न थी, लेकिन उन पोस्ट के लिंक एफआईआर में नहीं थे। इस FIR को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295ए, 153ए, 153, 504 और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत दर्ज किया गया था।
कॉन्ग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गाँधी के पास उनके मूल देश इटली में अब भी सम्पत्ति है। इसके साथ ही उनके पास 88 किलोग्राम चाँदी और 1.28 किलोग्राम सोना एवं जूलरी है। इसके अलावा, उनके पास दिल्ली में जमीन भी है। सोनिया गाँधी ने राज्यसभा में नामांकन के लिए दिए गए शपथ पत्र में बताया है कि उनकी कमाई का एक स्रोत किताबों से मिलने वाली रॉयल्टी भी है।
सोनिया गाँधी ने हाल ही में राजस्थान से राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है। इसमें उन्होंने अपनी चल-अचल सम्पत्ति की जानकारी दी है। उन्होंने शपथ पत्र में अपनी कुल सम्पत्ति 12.53 करोड़ रुपए बताई है। इसमें उन्होंने कृषि भूमि से लेकर किताबों से होने वाली कमाई, सोना चाँदी, बैंक में जमा धनराशि सहित अन्य जानकारियाँ दी हैं।
सोनिया गाँधी ने बताया है कि उनके पास 1.28 किलोग्राम सोना और 88 किलोग्राम चाँदी है, जिसकी बाजार में कीमत लगभग ₹1.07 करोड़ है। सोनिया गाँधी ने बताया है कि उनके पास ₹90,000 नकद हैं, जबकि ₹5.30 लाख HDFC बैंक के एक खाते में हैं। उनके पास ₹3.88 करोड़ के म्युचुअल फंड निवेश भी हैं। उन्होंने ₹28.53 लाख के बॉन्ड खरीदे हुए हैं।
शपथ पत्र में सोनिया गाँधी ने जो बताया है, उसमें आगे कहा गया है कि उनके पास अपनी कम्पनी यंग इंडिया लिमिटेड के शेयर भी हैं, इसको लेकर कोर्ट में केस चल रहा है। इसके अलावा, उन्हें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से 1.69 लाख रुपए की रॉयल्टी मिलती है। इस तरह उनके पास कुल चल सम्पत्ति ₹6.38 करोड़ है। हालाँकि, उनके पास अपनी कोई गाड़ी नहीं है।
अचल संपत्तियों के विषय में उन्होंने बताया है कि उनके पास दिल्ली के डेरामंडी गाँव में 3 बीघा ( 2529.28 वर्ग मीटर) कृषि भूमि है, जिसकी कीमत 23,280 प्रति वर्गमीटर की दर से ₹5.88 करोड़ है। इसके अलावा इटली में उनकी एक पैतृक सम्पत्ति में भी हिस्सा मिला है, जिसका बाजार मूल्य ₹26.83 लाख है। इन अचल संपत्तियों की कुल कीमत ₹6.15 करोड़ बताई है। इस तरह उनके पास कुल 6.53 करोड़ रुपए हैं।
इससे पहले भी जब उन्होंने 2019 के चुनाव के दौरान जब अपना शपथ पत्र दाखिल किया था तो कुछ जानकारियाँ बदली हुई थीं। उन्होंने पिछली बार एक 12 बीघे जमीन के विषय में बताया था, उसका जिक्र इस बार नहीं किया गया है। सोनिया गाँधी ने चुनाव आयोग के नियमानुसार अपने खिलाफ दायर मुकदमों का जिक्र भी किया है। उन्होंने बताया है कि उन पर दो मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से एक भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दर्ज करवाया है।
गौरतलब है कि सोनिया गाँधी 1999 से लगातार लोकसभा की सदस्य रही हैं। वर्तमान में वह रायबरेली से लोकसभा सांसद हैं। हालाँकि, अब उन्होंने राजस्थान से राज्यसभा की प्रत्याशी हैं। वह उत्तर प्रदेश से इकलौती कॉन्ग्रेस सांसद हैं। उनकी जगह उनकी बेटी प्रियंका गाँधी रायबरेली से चुनाव लड़ सकती हैं। उन्होंने रायबरेली की जनता के नाम एक पत्र भी लिखा है, जिसमें उन्होंने इसके संकेत दिए हैं।
दो गुटों में बँटी नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने अहम फैसला दिया है। नार्वेकर ने शरद पवार गुट को झटका देते हुए उनसे अलग हुए भतीजे अजित पवार के गुट को ही असली NCP बताया है। स्पीकर का यह फैसला उपमुख्यमंत्री अजित पवार और 8 अन्य विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए दी गई याचिका दायर पर आया है।
महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अजित पवार गुट ही ‘असली NCP’ है। नार्वेकर ने कहा, “अजित पवार गुट ने 30 जून 2023 को राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव किया और उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना। अजित पवार को 41 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इसलिए अजित पवार गुट ही असली NCP है।” बता दें कि दोनों गुटों ने दावा किया था कि वे ही असली NCP हैं।
Maharashtra Assembly Speaker Rahul Narwekar decides that Ajit Pawar faction is the 'real NCP' political party. Decision was based on the factor of legislative majority. pic.twitter.com/HH6ab2jDVl
दरअसल, शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट NCP (शरदचंद्र पवार) ने अपनी याचिका में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत 9 विधायकों को अयोग्य ठहराने की माँग की थी। नार्वेकर ने कहा कि अजित गुट के सभी विधायक योग्य हैं। कोई भी विधायक अयोग्य नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने शरद पवार गुट की याचिका खारिज कर दी।
राहुल नार्वेकर ने कहा, “शिवसेना को लेकर मैंने जो फैसला लिया था उसका आधार यहाँ लेना होगा। दोनों गुट पार्टी में अध्यक्ष पद को लेकर दावा कर रहे हैं। दोनों गुट दावा कर रहे हैं कि अध्यक्ष का चुनाव पार्टी के संविधान के मुताबिक नहीं हुआ है। पार्टी में दो समानांतर नेतृत्व खड़े हो गए हैं। दोनों समूहों द्वारा अयोग्यता याचिकाएँ भी दायर की गई हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “NCP के संविधान के अनुसार एनसीपी वर्किंग कमेटी सर्वोच्च संस्था है। इसमें 16 स्थायी सदस्य हैं। पार्टी का संविधान अस्थायी सदस्यों को इजाजत नहीं देता। पार्टी के संविधान और नेतृत्व संरचना में कोई स्पष्टता नहीं है। ऐसे में हमें नेतृत्व संरचना, पार्टी संविधान और संख्या बल के आधार पर तय करना होगा कि पार्टी किसकी है। ऐसे में संख्याबल के हिसाब से अजित पवार की अगुवाई वाला गुट की असली एनसीपी है।”
नार्वेकर ने यह भी कहा कि दलबदल के आधार पर विधायकों की अयोग्यता से संबंधित भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची में दिए गए प्रावधानों का उपयोग सदस्यों को चुप कराने या विपक्ष को कुचलने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से कानून का दुरुपयोग होगा और न्याय के सिद्धांत के विपरीत होगा।
बता दें कि चुनाव आयोग ने भी अपने फैसले में अजित पवार गुट को असली NCP बताया था और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न घड़ी आवंटित कर दिया था। इस पर NCP के संस्थापक शरद पवार ने रविवार (11 फरवरी 2024) को कहा था कि आयोग द्वारा अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए जाने का फैसला हैरान करने वाला है।
शरद पवार ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली पार्टी को असली NCP के रूप में मान्यता देने के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। गौरतलब है कि बाद में चुनाव आयोग ने शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को ‘नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार)’ का नाम दिया था।
टीवी सीरियल महाभारत में ‘कृष्ण’ का किरदार निभाने वाले अभिनेता नीतीश भारद्वाज ने अपनी पूर्व पत्नी स्मिता घाटे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्मिता उन्हें बेटियों से मिलने नहीं देती है। मानसिक तौर पर प्रताड़ित करती है। उन्होंने मध्य प्रदेश पुलिस से इस मामले में सहायता माँगी है।
नीतीश भारद्वाज ने भोपाल के पुलिस कमिश्नर को इस संबंध में शिकायत सौंपी हैं। उन्होंने इस शिकायत में अपनी पूर्व पत्नी और मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस स्मिता घाटे पर कई आरोप लगाए हैं। भारद्वाज ने कहा है कि पूर्व पत्नी उन्हें मानसिक रूप से लगातार परेशान करती हैं। जुड़वा बेटियों से मिलने और बात करने नहीं देती हैं। इसकी वजह से वे काफी परेशान हैं।
उन्होंने शिकायत में कहा है कि बेटियों को कोर्ट ने उनकी पूर्व पत्नी को नहीं सौंपा है। इस मामले में मुकदमा चल रहा है। इसके बावजूद पूर्व पत्नी ने बेटियों को अपने पास रखा हुआ है और वह नहीं जानते उनकी बेटियाँ किस हाल में हैं। भारद्वाज ने कहा है कि वह अपनी पूर्व पत्नी के आचरण को अच्छी तरह जानते हैं। इसी वजह से अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसी महिलाएँ पहले भी अपने बच्चों के लिए खतरनाक साबित हुई हैं। उन्होंने इसके लिए हाल ही में गोवा में पकड़ी गई अपने बच्चे की हत्यारोपी सूचना सेठ का उदाहरण दिया है।
भारद्वाज ने शिकायत में पूर्व पत्नी के विषय में बताया है कि उन्होंने उनकी बेटियों को इंदौर से लाकर भोपाल में एक स्कूल में दाखिला दिला दिया और उन्हें इसके विषय में कुछ नहीं बताया। यह भी आरोप लगाया है कि उनकी पूर्व पत्नी IAS होने का फायदा उठाते हुए स्कूल के प्रिंसिपल को भी धमकाती रही हैं। उन्होंने बताया है कि बाद में उनकी बेटियों को तमिलनाडु के ऊटी स्थित एक बोर्डिंग स्कूल में भेज दिया गया। उन्हें इसके बारे में भी जानकारी नहीं दी गई।
नीतीश भारद्वाज ने भोपाल के कमिश्नर हरिनारायणाचारी मिश्र से मिलकर बच्चियों के अपहरण का मामला दर्ज करने की अपील की है। कमिश्नर मिश्र ने मामले की जाँच के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि नीतीश भारद्वाज विवाह मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस स्मिता घाटे से वर्ष 2009 में विवाह हुआ था। वह उनकी दूसरी पत्नी हैं। आपसी खटपट के बाद 2019 में उन्होंने आपसी सहमति से तलाक के लिए अर्जी डाली थी।
पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में कई महिलाओं ने टीएमसी नेता शाहजहाँ शेख और उसके सहयोगियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इसके बाद से यह मामला गरमाया हुआ है। इस बीच राज्य के मालदा जिले के मोथाबारी इलाके में गुरुवार (15 फरवरी) को 25 वर्षीय एक महिला का अर्धनग्न शव उसके घर से कुछ दूरी पर मक्के के खेत में मिलने से सनसनी फैल गई है।
पीड़िता की पहचान कल्पना मंडल के रूप में हुई है। वह सरस्वती पूजा (14 फरवरी) की शाम को लापता हो गई थी। इसके बाद से ही उसका परिवार चिंता में डूब गया। उसके परिवार के सदस्यों को संदेह है कि मृतक के साथ बलात्कार किया गया है और फिर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी गई। परिजनों का दावा है कि मृतक के शरीर पर हमले के निशान और चाकू के कई घाव थे।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कल्पना सरस्वती पूजा की सुबह सब्जियां लाने के लिए मोथाबाड़ी के श्रीपुर कॉलोनी इलाके में अपने घर से निकली थी। हालाँकि, जब वह घर लौटने में विफल रही, तो उसकी तलाश शुरू की गई, जिसके बाद गुरुवार की सुबह उसकी हालत गंभीर हुई। उसके दुखी परिवार के सदस्यों ने उसके लापता होने से पहले की घटनाओं को याद किया।
मृतका की माँ ने कहा, “कल हमारे गाँव में सरस्वती पूजा का उत्सव था। उत्सव और संगीत में मेरी बेटी भी शामिल थी। उसने शाम को मेरी एक पोती से कहा कि वह बाथरूम जा रही है, लेकिन वह कभी वापस नहीं लौटी। रात होते ही मेरे बेटे ने रात का खाना बनाने के लिए अपनी बहन को खोजना शुरू किया, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। इसके बाद हमें चिंता होने लगी।”
लड़की की माँ ने बताया, “हमने रात भर अथक प्रयास कर उसकी खोज की। आज सुबह उसका शव हमें मिला। मेरी बेटी की शादी को कुछ साल हो गए थे, लेकिन वह अपने पति के साथ समस्याओं के कारण हमारे साथ रहने के लिए वापस आ गई थी। उसका कोई अन्य मामला नहीं था। मुझे नहीं पता कि उसे किसने मारा या क्यों मारा।”
मृतका कल्पना मंडल के भाई ने कहा, “सरस्वती पूजा की रात मैं खिचड़ी और करी खाना चाहता था। मैं शाम को बाहर गया और लौटकर जब अपनी बहन को ढूंढने लगा तो पता चला कि वह गायब है। हमने तुरंत उसकी खोजबीन शुरू कर दी। मैं आज सुबह मुझे पता चला कि दीदी का शव मकई के खेत में पड़ा है। शव लगभग नग्न था। हमें संदेह है कि उसके साथ दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म कर हत्या की गई है।”
परिजनों का कहना है कि उन्होंने मोथाबारी पुलिस स्टेशन में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया है। बता दें कि 31 जनवरी 2024 को मालदा शहर में 11 साल की एक लड़की की सिर कटी लाश मिली थी। उसका सिर और धड़ शहर में अलग-अलग स्थानों पर पाए गए थे। अब मालदा के पास मोथाबाड़ी में एक युवती का अर्धनग्न शव मिला है।
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने अपने एक्स पोस्ट में कहा, “ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल महिलाओं के लिए नरक बन गया है। ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब किसी महिला के साथ बलात्कार और हत्या न होती हो। अपराध की क्रूरता अक्सर इतनी रोंगटे खड़े कर देने वाली होती है कि कोई भी कई दिनों तक सो नहीं पाता है। लेकिन, जब तक ममता बनर्जी को वोट मिलते रहेंगे, तब तक उन पर कोई असर नहीं होगा।”
उन्होंने आरोप लगाया, “किसी भी अपराधी पर कभी मुकदमा नहीं चलाया जाता, क्योंकि वे लगभग हमेशा सत्तारूढ़ टीएमसी से जुड़े होते हैं। बंगाल में अराजकता है। वहाँ मुख्यमंत्री और उनका आपराधिक पुलिस बल न केवल महिलाओं को सुरक्षा देने में विफल है, बल्कि पीड़ितों को न्याय से वंचित करने के लिए भी सक्रिय रूप से काम कर रहे है। ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की महिलाओं के लिए अभिशाप हैं।”
West Bengal, under Mamata Banerjee, has become hell for women… Not a day goes when a woman is not raped and murdered. The brutality of the crime is often so spine chilling that one can’t sleep for days. But nothing affects Mamata Banerjee, as long as she keeps getting the… pic.twitter.com/bREGJop4Mb
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते से पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में महिलाएँ टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि उनका लंबे समय से यौन शोषण किया जा रहा है। मामला मीडिया में आने और विरोध प्रदर्शन के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
संदेशखाली की कई महिलाओं ने बताया कि ईडी टीम पर हमले के मास्टरमाइंड शेख शाहजहाँ और अन्य टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा क्षेत्र की महिलाओं के साथ बलात्कार किया जा रहा है। महिलाओं के अनुसार, टीएमसी कार्यकर्ता नियमित रूप से इलाके में आते हैं और ‘खूबसूरत महिलाओं’ को चुनकर अपने साथ जबरन ले जाते हैं। कुछ महिलाओं ने कहा कि उन्हें रात में पार्टी कार्यालय ले जाया गया और पुरुषों के ‘पूरी तरह संतुष्ट’ होने के बाद ही उन्हें छोड़ा गया।
किसान आंदोलन के पीछे की असली वजह खुलकर सामने आ गई है। इस आंदोलन के पीछे की वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ नीचे गिराना है। खुद किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में ये बात स्वीकारी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ राम मंदिर के बाद बहुत बढ़ चुका है। इस आंदोलन में उन्होंने किसानों की तरफ से पूरा जोर लगाने की बात कही, ताकि मोदी सरकार की लोकप्रियता कम हो और उनकी सारी बातें मान ली जाएँ। हालाँकि मोदी की लोकप्रियता को गिराने की उनकी चाहत ये साफ बताती है कि ये आंदोलन क्यों खड़ा किया गया है।
किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने 14 फरवरी 2024 को ‘द अनम्यूट’ से बातचीत में कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ नीचे चला जाए तो सरकार कुछ भी मान लेगी। उन्होंने कहा कि किसानों पर लाठीचार्ज ये बताता है कि ये पीएम मोदी और बीजेपी के पतन का संकेत है।
दल्लेवाल ने अपनी मंशा साफ करते हुए बताया, अगर इस सरकार द्वारा किए गए वादे को सरकार से पूरा कराना है, तो फिर सरकार बदलने से पहले उसे हमारी बातों को मानने के लिए मजबूर करना पड़ेगा। वर्ना सरकार बदल जाएगी, तो नई सरकार कहेगी कि हमने तो वादा ही नहीं किया। इसके बाद किसानों को फिर से मेहनत करनी पड़ेगी। जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ रहा है, ऐसे में मुश्किल होगी।
दल्लेवाल ने कहा, “मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ मंदिर (अयोध्या रामलला मंदिर) बनने की वजह से तेजी से बढ़ा है। मैं लोगों से कहता रहा हूँ, उनके ग्राफ को नीचे लाना होगा। अगर उनका ग्राफ ऊपर रहेगा, तो वो कुछ नहीं करने वाले, लेकिन सरकार की लोकप्रियता गिरेगी, तो वो सारी बातों को मान लेगी।” इस दौरान उन्होंने दावा किया मोदी सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को भी मान लिया है।
बता दें कि किसान आंदोलन से जुड़े किसानों ने पंजाब में रेल रोको आंदोलन किया। उन्होंने दिन में 12 बजे से शाम 4 बजे तक रेलवे ट्रैक पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने कई टोल नाको को भी पूरी तरह से फ्री कर दिया। वहीं, सरकार और किसान नेताओं के बीच तीसरे दौर की बातचीत चंडीगढ़ में जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही कोई रास्ता निकल सकता है।
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देश की राजधानी में पुलिस अलर्ट पर है। सड़कों पर ट्रैफिक रेंग रही है। आम आदमी परेशान है। यह स्थिति ‘दिल्ली चलो’ नाम के मार्च से उत्पन्न हुई है। कथित किसान खेत-खलिहान छोड़कर हरियाणा की सीमा पर पुलिस से भिड़ रहे हैं ताकि वे दिल्ली की तरफ बढ़ सके।
कृषि और किसानों की खुशहाली के नाम पर चल रहे इस तमाशे में प्रधानमंत्री को धमकी दी जा रही है। उनकी लोकप्रियता का ग्राफ गिराने की बात हो रही है। खालिस्तान के समर्थन में पोस्टर दिख रहे हैं। आम चुनावों से पहले किसानों के नाम पर देश में अराजक स्थिति पैदा करने की कोशिश हो रही है। इन साजिशों को काॅन्ग्रेस सहित विपक्षी दलों का भी समर्थन हासिल है।
यदि कृषि क्षेत्र में मोदी सरकार के कार्यों पर गौर करें तो इस तथ्य को और बल मिलता है कि इस तमाशे का मकसद किसानों का भला कम, राजनीति ज्यादा है। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने। के बाद से देश का कृषि बजट करीब 5 गुना बढ़ा है। 10 साल में खाद्यान्नों का उत्पादन रिकाॅर्ड स्तर पर पहुँच गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 62.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। खाद सब्सिडी तीन गुना हो चुका है। किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के जरिए कृषकों तक सीधे पैसा पहुँचाया जा रहा है।
सीधे-सरल शब्दों में कहें तो मोदी सरकार के 10 साल में किसानों की खुशहाली के लिए ढेर सारे काम हुए हैं। जमीन पर उनका असर भी दिखता है। यही कारण है कि किसानों के नाम पर बखेड़ा करने की इन कोशिशों का असर कुछ खास क्षेत्र तक सीमित है। इन कथित किसानों को आम लोगों का समर्थन नहीं मिल रहा है।
मोदी सरकार में MSP में हुआ बड़ा बदलाव
सरकार द्वारा जिन मूल्यों पर किसानों की फसल खरीदी जाती है, उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कहते हैं। हर फसली वर्ष में सरकार इन मूल्यों के विषय में घोषणा करती है। पंजाब के किसान मुख्य रूप से धान और गेँहू उगाते हैं। यदि इनके ही समर्थन मूल्य की बात की जाए तो वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सत्ता में आए थे, तब देश में धान का MSP ₹1310, जबकि गेँहू MSP ₹1475 था।
अब अगर वर्तमान मूल्यों की बात की जाए तो इसमें काफी बढ़ोतरी हुई है। फसली सीजन 2023-24 के लिए सरकार ने धान और गेँहू का MSP क्रमशः ₹2183 और ₹2200 रखा है। यह 2014 में ₹1310 और ₹1475 हुआ करता था। ऐसे में अगर 2014 से तुलना की जाए तो धान के MSP में 66.6% जबकि गेँहू के MSP में लगभग 50% की बढ़ोतरी हुई है। ऐसा भी नहीं है कि सिर्फ इन्हीं फसलों के दामों में बढ़ोतरी हुई है। अन्य फसलों पर भी सरकार ने धान दिया है।
धान और गेँहू के अलावा बाजरा, मक्का और अरहर जैसी प्रमुख फसलों की MSP मोदी सरकार ने बढ़ाई है। बाजरे के MSP में सरकार ने 2014 से अब तक कुल 106% की बढ़ोतरी की है। यह 2014 में ₹1500 हुआ करता था, अब यह बढ़कर ₹3180 हो चुका है। अरहर दाल का MSP 2014 में ₹4300 हुआ करता था जो अब बढ़कर ₹7000 हो चुका है। यानी इसके MSP में 62% की बढ़ोतरी हुई है। इससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार MSP के मुद्दे पर काफी गंभीर है। इस दिशा में 10 साल में 62.5% की औसतन वृद्धि देखने को मिली है।
मोदी सरकार में सरकारी खरीद 30 फीसदी बढ़ी
ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार ने सिर्फ MSP बढ़ाई है, बल्कि वह लगातार MSP की दरों पर खरीदी जाने वाली फसलों की मात्रा भी लगातार बढ़ाती आई है। केंद्र सरकार की रिपोर्ट बताती है कि 2014-15 के दौरान सरकार ने MSP पर 761 लाख मीट्रिक टन फसल खरीदी थी। यह 2022-24 में यह आँकड़ा बढ़ कर 1062 लाख टन हो चुका है। इसका अर्थ है कि इस दौरान देश में फसलों की सरकारी खरीद में लगभग 30% की बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी का सीधा फायदा किसानों को हुआ है।
मोदी सरकार में खाद सब्सिडी तिगुनी
केंद्र सरकार ने MSP बढ़ाने और उस पर ज्यादा अन्न खरीदने के साथ ही साथ खेती की लागत घटाने पर भी ध्यान दिया है। केंद्र सरकार लगातार खाद और बीज पर सब्सिडी बढ़ाती आई है। एक रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2014-15 में केंद्र सरकार किसानों को ₹73,067 करोड़ की खाद सब्सिडी दिया करती थी। यह वर्ष 2022-23 में बढ़ कर ₹2.54 लाख करोड़ पहुँच गई।
खाद सब्सिडी बढ़ने के साथ ही देश में खाद का उत्पादन भी अधिक हो रहा है। यूरिया के ही उत्पादन को देखा जाए तो वर्ष 2014 में यह 225 लाख टन था, अब बढ़ कर 284 लाख टन हो चुका है। देश में नैनो यूरिया का भी उत्पादन हो रहा है।
कृषि बजट पाँच गुना, किसान सम्मान निधि भी
वर्ष 2014 के बाद से अब तक कृषि बजट भी पाँच गुना हो चुका है। वर्ष 2013-14 में UPA सरकार ने कृषि क्षेत्र को ₹29,687 करोड़ दिए थे। यह 2024-25 के अंतरिम बजट में बढ़कर ₹1.27 लाख करोड़ हो गया है। यानी इन दस वर्षों में कृषि के लिए दिए जाने वाले पैसे में 436% की वृद्धि हुई है। सरकार ने कृषि बजट बढ़ाने के साथ ही किसान सम्मान निधि जैसी योजना लाकर उन्हें सीधा लाभ भी दिया है। इस योजना के तहत सरकार हर किसान को ₹6000 प्रतिवर्ष देती है।
A decade of Agricultural Excellence!
In the financial year 2024-25, MoA&FW was allotted ₹ 1,27,469.88 crores—a five-fold increase over the ₹ 29,687 crores allotted for the fiscal year 2013–14.#AnnadataKaSamman@AgriGoIpic.twitter.com/HupNXe7taJ
आँकड़े बताते हैं कि फरवरी 2019 में से अब तक इसके अंतर्गत किसानों को ₹2.82 लाख करोड़ सीधे उनके खाते में सरकार दे चुकी है। इस योजना के तहत देश के 11 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। पंजाब में भी इस योजना का लाभ 8.5 लाख किसानों को दिया जा रहा है।
कॉन्ग्रेस-आप के शासन में पंजाब बेपटरी
पंजाब को भारत के अग्रणी अन्न उत्पादक राज्यों में गिना जाता रहा है। हालाँकि, बीते कुछ वर्षों से यह तस्वीर बदल रही है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा खाद्य उत्पादन के लिए जारी किए गए आँकड़ों को देखने से पता चलता है कि अन्न उत्पादन में पंजाब में 2017-18 के बाद से वृद्धि ही नहीं हुई है। पंजाब में उगाई जाने वाली मुख्य फसलें धान और गेहूँ में यह स्थिति स्पष्ट रूप से देखने को मिलती है।
यह बात ध्यान देने वाली है कि पंजाब में 2017 में ही सरकार बदली थी और अकाली-भाजपा गठबंधन को हराकर कॉन्ग्रेस सत्ता में आई थी। इसके बाद 2022 में फिर आम आदमी पार्टी ने कॉन्ग्रेस को बेदखल कर दिया। दोनों पार्टियों पर राज्य के कुप्रबन्धन और किसानों को गुमराह करने के आरोप लगते रहे हैं।
किसानों के प्रदर्शन पर राजनीति हावी
इस बार के किसानों के प्रदर्शन को किसान आन्दोलन 2.0 बताया जा रहा है। पिछली बार हुए एक मुद्दा किसान कानूनों का था। वर्तमान में ऐसा कोई भी मुद्दा उनके सामने नहीं है। किसानों के यूनियन द्वारा रखी गई माँगे भी स्पष्ट नहीं हैं। उलटे बीच-बीच में खालिस्तान की माँग हो रही है।
इसी प्रदर्शन से किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल का एक बयान भी सामने आया है, जहाँ वह प्रधानमंत्री मोदी के ग्राफ को नीचे लाने की बात कर रहे हैं। इस बयान के बाद प्रश्न उठ रहे हैं कि यदि यह किसानों का प्रदर्शन है और अपनी माँगें मनवाने के लिए किया जा रहा है तो फिर इससे प्रधानमंत्री मोदी के ग्राफ का क्या लेना-देना है?
मोदी सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में किए गए बदलावों से यह स्थिति भी स्पष्ट है कि देश में किसानों की हालत में बदलाव आया है। ऐसे में प्रदर्शन के पीछे के राजनैतिक हितों के होने और उन्हें साधने के प्रयासों से इनकार नहीं किया जा सकता।