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जॉनी सिन्स की सेक्सुअल समस्याओं को रणवीर सिंह ने सुलझाया, बीवी को संतुष्ट करने के लिए दिया किट : Video देख लोग नहीं रोक पा रहे हँसी

बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह ने पुरुषों की यौन समस्याओं से संबंधित एक विज्ञापन किया है। इस विज्ञापन में उनके साथ पोर्न इंडस्ट्री के जाने-माने नाम जॉनी सिन्स भी हैं। विज्ञापन को इंडियन सीरियल्स की तरह बनाया गया है जिसे देखने के बाद लोग हँस-हँस कर लोट-पोट हैं।

इस विज्ञापन के सीन में रणवीर सिंह डेली सोप वाले जेठ का रोल निभा रहे हैं और अपनी भाई (जॉनी सिन्स) की बीवी से पूछते हैं कि वो घर छोड़कर क्यों जा रही है। इस पर भाई की बीवी उन्हें अपने सारी समस्या के बारे में बताती है। कभी कहती है- डाली पर फूल नहीं खिलता। कभी- पप्पू कांट डांस साला जैसे डॉयलॉग मारती है।

इसके बाद ड्रामे वाले अंदाज में भाई की बीवी को बालकनी से नीचे गिरते दिखाया जाता है। तभी रणवीर सिंह, जॉनी सिन्स को वो बोल्डकेयर का डब्बा देते हैं और ऐसे दिखाया जाता है कि जैसे जॉनी उसका सेवन करने के बाद अपनी बीवी को संतुष्ट करके जमीन पर सुरक्षित उतार लेते हैं।

फिर, एड खत्म हो जाता है और रणवीर सिंह सामने आकर बोल्डकेयर किट की जरूरत और असर पर बात करते हैं।

अब इस विज्ञापन को देख सोशल मीडिया यूजर्स हँस-हँस कर बेहाल हैं। कुछ लोग रणवीर सिंह की इस बात पर भी तारीफ कर रहे हैं कि वो पुरुषों के सेक्शुअल मुद्दों को उठा रहे हैं और इसे दिखाने का साहस भी कर रहे हैं। तो कुछ कह रहे हैं कि ऐसे विज्ञापनों की उम्मीद रणवीर सिंह से की जा सकती है।

बता दें कि ये विज्ञापन ‘#TakeBoldCareOfHerCampaign’ का हिस्सा है। बोल्डकेयर के को-फाउंडर रणवीर सिंह ने कहा, “मैं यहाँ उस पॉजिटिव इम्पैक्ट का इस्तेमाल करने आया हूँ जो मेरे पास है, ताकि हम लोगों को जागरूक कर सकें। बोल्ड केयर कैंपेन किसी बातचीत से कहीं ज्यादा है। यह मेरा एक मिशन है, जिसमें मैं गहराई से शामिल हूँ, और मैं यहाँ पुरुषों के सेक्सुअल हेल्थ के बारे में संदेश पहुँचाने के लिए आया हूँ, ताकि हम एक असरदार समाधान ला सकें, ताकि देशवासियों के जीवन पर इसका बड़ा असर पड़ सके।”

मोदी सरकार के 3 मंत्रियों ने सँभाला मोर्चा, प्रदर्शनकारियों से कर रहे बात: ‘किसान आंदोलन 2.0’ को लेकर दिल्ली में धारा-144, बॉर्डरों पर सख्ती

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी यूपी से एक बार किसानों का हुजूम दिल्ली की ओर चल पड़ा है। गाड़ियों, ट्रैक्टरों में राशन लादे किसानों के काफिले कई जगहों से आगे बढ़ रहे हैं। किसानों ने 13 फरवरी को ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया है। इस बार के आंदोलन की अगुवाई मुख्य संयुक्त किसान मोर्चा नहीं कर रहा है, बल्कि संयुक्त किसान मोर्चा (अराजनैतिक) कर रहा है। हालाँकि दिल्ली की ओर बढ़ने की तैयारी कर रहे किसानों को रोकने के लिए हरियाणा पुलिस के साथ ही दिल्ली पुलिस ने भी व्यापक इंतजाम किए हैं। किसान आंदोलन को देखते हुए पूरी दिल्ली में 12 फरवरी से 12 मार्च तक धारा 144 लागू कर दी गई है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा ने यह आदेश दिए हैं।

दिल्ली के सभी बॉर्डर पर सख्ती

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के 13 फरवरी को दिल्ली कूच की तैयारी को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने किसानों को रोकने की तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। इसके लिए सोनीपत-दिल्ली की सीमा पर स्थित कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर संपर्क मार्ग को बंद कर दिया गया है। सड़क पर लोहे के कंटेनर रखकर उनमें मिट्टी भरी जा रही है। साथ ही भारी संख्या में लोहे व पत्थर के बैरिकेड लगा दिए गए हैं। अब दिल्ली में वाहनों का आना-जाना सिर्फ फ्लाईओवर के ऊपर से हो रहा है। फ्लाईओवर के ऊपर भी खाली कंटेनर, पत्थर व लोहे के बैरिकेड और कंटीले तार रखे गए हैं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कही ये बात

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रविवार (11 फरवरी 2024) किसानों के लिए कहा था कि किसानों को दिल्ली जाने से कोई नहीं रोक रहा है। वह ट्रेन, बसों से जा सकते हैं लेकिन उन्हें ट्रैक्टरों में जाना है, हथियारों के साथ जाना है। ऐसा करना लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। सीएम ने कहा कि अगर किसान ट्रैक्टर लेकर जाएंगे और हथियार आगे बांधकर जाएंगे तो कोई भी इन्हें जाने की इजाजत नहीं देगा।

तीन मंत्री कर रहे किसानों से बातचीत

इस बीच, भारत सरकार ने किसानों की माँगों को सुनने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। इसके तीनों सदस्य केंद्रीय मंत्री हैं। सोमवार को चंडीगढ़ में केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय राज्यमंत्री नित्यानंद राय किसानों के साथ बातचीत कर रहे हैं। ये दूसरे दौर की बातचीत होगी। इससे पहले 8 फरवरी को भी किसानों और सरकार के बीच बातचीत हो चुकी है।

चंडीगड़ में किसानों और सरकार के बीच बातचीत अगर असफल रहती है तो गाजीपुर बॉर्डर को पूरी तरह से सील किया जा सकता है। दिल्ली पुलिस टिकरी बॉर्डर पर ड्रोन के जरिए निगरानी कर रही है। वहीं, सिंघु बॉर्डर पर 3 लेयर सिक्योरिटी का प्लान बनाया गया है। बैरिकेडिंग के साथ-साथ पूरे सिंघु बॉर्डर से लेकर मुकरबा चौक तक 16 किलोमीटर के रास्ते को 8 जोन में बांटा गया है। वहीं, हरियाणा के फतेहाबाद में अस्थाई जेल बनाई गई है। इसके अलावा हरियाणा में वाटर कैनन और वज्र वाहनों को तैनात किया गया है। हरियाणा सरकार ने 11 से 13 फरवरी तक अंबाला, कुरूक्षेत्र, कैथल, जिंद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा समेत सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं और बल्क एसएमएस निलंबित कर दिए हैं।

क्या है किसानों की माँगे?

इस बार ‘दिल्ली चलो’ का नारा देकर कूच कर रहे किसान संगठनों की भी नही माँग है, जो पिछली बार थी। एमएसपी की गारंटी के साथ ही बिजली की दलों में छूट और कर्ज माफी की भी माँग है। किसानों ने पिछले आंदोलन के समय दर्ज हुए मुकदमों को भी तुरंत खारिज करने की माँग की है और लखीमपुर में मारे गए चार किसानों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद की माँग कर रहे हैं। किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की माँग भी कर रहे हैं, जिसमें लागत की तुलना में एमएसपी को डेढ़ गुना करने की माँग है।

वैसे, 13 फरवरी को ‘दिल्ली चलो’ नारे के साथ दिल्ली कूच कर रहे किसानों की मोर्चेबंदी काफी कड़ी है। इस बार उन्होंने ट्रैक्टरों को मोडिफाई किया है और पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेडिंग को तोड़ने की भी रणनीति बनाई है। इस आंदोलन के तीन दिन बाद ही यानी 16 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चा ने भी भारत बंद का ऐलान किया है। इस दौरान दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक देश के सभी नेशनल हाईवे को ब्लॉक करने की रणनीति बनाई गई है

महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस का तीसरा बड़ा विकेट गिरा, 2 बार CM रहे अशोक चव्हाण ने छोड़ी पार्टी: मिलिंद देवड़ा और बाबा सिद्दीकी भी दे चुके हैं झटका

महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। महाराष्ट्र में कुछ ही महीनों में न सिर्फ लोकसभा चुनाव, बल्कि उसके बाद विधानसभा चुनाव भी होने हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अशोक चव्हाण के बारे में ये भी अटकलें हैं कि वो पर्दे के पीछे भाजपा के साथ बातचीत कर रहे हैं। चर्चा ये भी है कि अशोक चव्हाण को राज्यसभा सांसद बनाया जा सकता है।

अशोक चव्हाण नांदेड़ के भोकर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। 2009 में भी उन्होंने यहाँ से जीत दर्ज की थी, जबकि 2014 में उनकी पत्नी अमीता यहाँ से विधायक बनी थीं। वो 2 बार महाराष्ट्र के CM रहे हैं – एक बार दिसंबर 2008 से लेकर नवंबर 2009 तक और दूसरी बार दिसंबर 2019 से लेकर जून 2022 तक। उनके कार्यकाल में महाराष्ट्र में आदर्श सोसाइटी घोटाला भी सामने आया। आदर्श सोसाइटी बलिदानी सैनिकों के परिजनों को घर देने के लिए बनाई गई थी, जिसमें बड़ा घपला हुआ था।

अशोक चव्हाण ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से मिल कर विधायक पद से भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इससे पहले मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे मिलिंद देवड़ा भी कॉन्ग्रेस छोड़ कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। मिलिंद देवड़ा राजनीतिक परिवार से आते हैं और केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। इन दोनों के अलावा महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता बाबा सिद्दीकी भी पार्टी छोड़ कर अजीत पवार के गुट वाली NCP का दामन थाम चुके हैं।

महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस पार्टी के भीतर काफी अंतरकलह है। कई छोटे नेता-कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गाँधी OBC को गाली देते हैं, इसे कैसे कोई सहन करेगा। उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कहा है कि कॉन्ग्रेस के कई अच्छे नेता भाजपा के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा था कि जनता से जुड़े हुए नेता कॉन्ग्रेस में घुटन महसूस कर रहे हैं।

जिनको फाँसी से बचा लाई मोदी सरकार, उनको मरने देना चाहता था AAP से कुर्सी पाया जफरुल इस्लाम: कॉन्ग्रेस और चमचे पत्रकारों ने भी की थी देश-विरोधी लॉबिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार हस्तक्षेप के बाद आखिरकार कतर ने भारत के 8 पूर्व नौसेना अधिकारियों को रिहा कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने सोमवार (12 फरवरी 2024) को तड़के इसकी जानकारी दी। वहीं, कतर से लौटकर आए पूर्व अधिकारियों ने भी पीएम मोदी को धन्यवाद दिया है। दरअसल, कतर ने इन पूर्व अधिकारियों को इजरायल के लिए जासूसी के झूठे आरोप में मौत की सजा दी थी।

पूर्व अधिकारियों की वापसी के बाद उन नेताओं, कथित बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और पत्रकारों के पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जिन्होंने इन पूर्व अधिकारियों को दी गई मौत की सजा का समर्थन किया था। भारत सरकार द्वारा इन पूर्व अधिकारियों के पक्ष में कूटनीतिक प्रयास करने पर उन्होंने भारत सरकार और पीएम मोदी पर निशाना भी साधा था। इसके साथ ही कुछ लोगों ने इन पूर्व अधिकारियों को वापस नहीं लाने पर पीएम मोदी को असक्षम बताया था।

कतर द्वारा भारत के पूर्व अधिकारियों को दी गई मौत की सजा का जफरुल इस्लाम खान ने समर्थन किया था। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जफरुल इस्लाम ने सोशल मीडिया X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा था, “अगर ये पूर्व नौसेना अधिकारी सचमुच इजराइल के लिए जासूसी करते हैं तो कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। भारत को उनके बचाव में कूदने से पहले ठीक से जाँच करनी चाहिए।”

जफरुल इस्लाम मिल्ली गैजेट नाम के मीडिया संस्थान के संस्थापक है। ये वही संस्थान है, जिसने गोधरा में रामभक्तों को ट्रेन में ज़िंदा जलाए जाने वाली घटना का भी समर्थन किया था। इतना ही नहीं, जफरुल ने अप्रैल 2021 में ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के समुदाय विशेष ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के लोग एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।

जब इन अधिकारियों को मौत की सजा मिली थी तो प्रोपेगेंडा वेबसाइट AltNews चलाने वाले मोहम्मद जुबैर ने एक्स पर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट करके पीएम मोदी का मजाक उड़ाने की कोशिश की थी। ये वही जुबैर है, जिसने भाजपा के पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ अभियान चलाया था, जिसके बाद देश भर में हिंसा हुई थी। जुबैर ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री ने कतर को अपना दूसरा घर बताया था।

यूट्यूबर साक्षी जोशी ने भी कतर द्वारा पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा देने पर यूट्यूबर साक्षी जोशी ने भी पीएम मोदी पर सवाल उठाया था। कॉन्ग्रेस समर्थक पूर्व पत्रकार साक्षी जोशी ने इस मामले पर 27 अक्टूबर 2023 को 10 मिनट का वीडियो बनाया और इसे ’56 इंच की विफलता’ कहा था। इन भारतीयों की रिहाई पर उन्होंने अभी तक अपनी खुशी व्यक्त नहीं की है। यही हाल प्रज्ञा मिश्रा यादव नाम की यूट्यूबर का है।

वहीं, पत्रकार से यूट्यूबर बने रवीश कुमार ने भी इस मामले पर पीएम मोदी और भारत सरकार पर निशाना साधते हुए एक वीडियो बनाया था। हालाँकि, इन पूर्व अधिकारियों की रिहाई के बाद रवीश कुमार ‘सदमे’ से उबर नहीं पाए होंगे। इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक उन्होंने रिहाई को लेकर कोई बयान पोस्ट नहीं किया है।

कुछ ऐसा ही हाल कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश का था। जयराम ने 6 अप्रैल 2023 को बयान जारी कर इन पूर्व अधिकारियों को वापस लाने में भारत सरकार की ‘अक्षमता’ पर सवाल उठाया था। एक्स पर एक पोस्ट में बयान को साझा करते हुए जयराम ने लिखा था, “एक ऐसा देश जिसके साथ मोदानी (पीएम मोदी और अडानी को लेकर अपमानजनक शब्द) के विशेष संबंध हैं। इस रिश्ते से अब तक पूर्व सैनिकों को मदद क्यों नहीं मिली?”

पीएम मोदी के विरोध में डूबे इन यूट्यूबर्स और नेताओं ने इन पूर्व अधिकारियों की सजा को अपनी प्रोपेगेंडा और राजनीति के लिए इस्तेमाल किया था। वहीं, जफरूल इस्लाम जैसे लोग इसलिए इन पूर्व अधिकारियों की मौत की सजा को जायज ठहरा रहे थे, क्योंकि उन पर इजरायल के लिए जासूसी का आरोप लगाया गया। बता दें कि अधिकांश मुस्लिम देश फिलिस्तीन को लेकर इजरायल से नफरत करते हैं।

जो अनंत सिंह के लिए ‘लौ# की सरकार’, उनके ही साथ हो गईं उनकी बीवी नीलम देवी: बिहार में RJD के तीन विधायक NDA सरकार के साथ

बिहार विधानसभा में आज (12 फरवरी 2024) नीतीश सरकार का बहुमत परीक्षण होना है। उससे ठीक पहले राजद खेमे के तीन विधायकों के एनडीए के साथ जाने की खबर आ रही है। इनमें से एक शिवहर के विधायक चेतन आनंद और दूसरी मोकामा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली नीलम देवी हैं। राजद ने अपने इन दोनों विधायकों को ‘बंधक’ बनाने का आरोप सत्ता पक्ष पर लगाया है। इनके अलावा राजद विधायक प्रह्लाद यादव भी विधानसभा में सत्ता पक्ष की बेंच पर बैठे नजर आए हैं।

नीलम देवी बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी हैं। जेल में बंद अनंत सिंह को उनके समर्थक ‘छोटे सरकार’ कहते हैं। वे कभी नीतीश कुमार के करीबी माने जाते थे। लेकिन बाद में दोनों के रास्ते अलग हो गए। यहाँ तक कि एक मौके पर उन्होंने नीतीश कुमार की सरकार को ‘लौ# की सरकार’ भी कह दिया था। उनका यह बयान काफी वायरल हुआ था। बाद में वे राजद में शामिल हो गए थे।

वहीं चेतन आनंद बाहुबली आनंद मोहन सिंह के बेटे हैं। पिछले दिनों जब राजद के सांसद मनोज झा ने राज्यसभा में ‘ठाकुर का कुआँ’ नाम की कविता पढ़ी थी तो आनंद मोहन ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उस समय लालू यादव ने मनोज झा का समर्थन करते हुए उन्हें ‘बुद्धिजीवी’ बताया था।

चेतन आनंद उन राजद विधायकों में भी शामिल थे जिन्हें पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के आवास पर रखा गया था। उनका क्रिकेट खेलते एक वीडियो भी सामने आया था। लेकिन 11 फरवरी 2024 को पटना पुलिस उन्हें तेजस्वी यादव के आवास से छुड़ाकर ले आई। असल में चेतन आनंद के लापता होने की शिकायत उनके छोटे भाई ने दर्ज कराई थी।

अपने इन दोनों विधायकों के सत्ता पक्ष में जाने पर राजद की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा है, “राजद के दो विधायक चेतन आनंद और नीलम देवी को सत्ता पक्ष के लोगों ने सचेतक के कमरे में बिठा रखा है। उन्हें धमकी देकर जबर्दस्ती बैठाया गया है। उनके साथ क्या-क्या किया गया यह छिपा नहीं है।” उन्होंने सत्ता पक्ष पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए पूछा है कि यह किस तरह की ट्रेडिंग है?

गौरतलब है कि बिहार विधानसभा की जो मौजूदा स्थिति है उसमें राजद, काॅन्ग्रेस और वाम दल मिलाकर 114 विधायक होते हैं। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के इकलौते विधायक ने भी विपक्ष के समर्थन का ऐलान किया है। लेकिन बहुमत का आँकड़ा 122 है। सत्ताधारी बीजेपी, जदयू और जीतनराम मांझी की पार्टी HUM को मिलाकर 127 विधायक हैं। इन्हें निर्दलीय सुमित सिंह का भी समर्थन हासिल है, जो मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं।

लेकिन अवध बिहारी चौधरी ने विधानसभा अध्यक्ष का पद छोड़ने से इनकार कर इस पूरे गणित को लेकर सस्पेंस बढ़ा दिया है। वे राजद के विधायक हैं। सोमवार को न केवल एनडीए का शक्ति परीक्षण होना है, बल्कि विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव आना है। मीडिया रिपोर्टों में सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों के गायब होने का भी दावा किया जा रहा है। हालाँकि ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।

सागरिका घोष को गिरा-पड़ा के लात-मुक्कों से मारी थी, ‘गलत कार पार्किंग’ कर विदेशी महिला को दिखा रही थीं तेवर: ‘सांसदी’ के बाद खबर वायरल

वर्तमान में जो सागरिका घोष तृणमूल कॉन्ग्रेस की तरफ से राज्यसभा सांसद का टिकट पाने के कारण चर्चा में हैं, वहीं सागरिका बतौर पत्रकार कभी प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए, कभी फर्जी खबरों को बढ़ावा देने के लिए चर्चा में रहती थीं। इसके अलावा एक बार तो वह भरे बाजार में पिटने की वजह से भी अखबारों की हेडलाइन बनी थीं।

घटना है 26 साल पहले की। 16 फरवरी 1998 को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार सागरिका घोष अपने तीन साल के बेटे के साथ खान मार्केट शॉपिंग करने गईं थीं। लेकिन वहाँ उनके साथ कुछ ऐसा हुआ जो उन्होंने सोचा भी नहीं होगा।

दरअसल, उस दिन खान मार्केट में गाड़ी पार्क करने के विवाद पर सागरिका घोष को एक विदेशी महिला ने मुँह पर ताबड़तोड़ मुक्के मारे थे। ये महिला कोई और नहीं बल्कि अलजीरियाई दूतावास में बतौर काउंसलर काम करने वाले अब्दुल हामिद की पत्नी थी। सागरिका घोष उस समय आउटलुक वीकली में काम करती थीं।

तस्वीर साभार: Outlook

घटना वाले दिन वह मार्केट में अपनी मारूति कार लेकर गई थीं, जो उन्होंने अल्जीरियाई महिला की कार के सामने लगा दी थी। इसी पर विदेशी महिला ने आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे तो उसके लिए बहुत कम जगह बचेगी निकलने की। ये सुन सागरिका ने उसे समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा- पागल मत बनो, तुम्हारे निकलने के लिए काफी जगह है।

मगर तब तक विदेशी महिला गुस्से में आ गई थी। वह अपनी कार से बाहर निकली। उसने सागरिका को उनकी मारूति से निकाला और रोड किनारे पटक दिया। इसके बाद वो वहीं बीच सड़क पर सागरिका घोष को झापड़, मुक्के, घूँसे मारती रही।

अजीब बात यह थी कि इस घटना के समय पास में पीसीआर थी लेकिन पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर मामला शांत कराने का प्रयास नहीं किया। वहीं सागरिका का बेटा यह सब देख रो रहा था। पुलिस से बाद में जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस घटना को देख वह असमंजस में थे क्योंकि घटना में 2 महिलाएँ शामिल थीं।

हालाँकि, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि इस झगड़े को रोकने के लिए एक पानवाला कूदा और उसने दोनों महिलाओं को अलग करने का प्रयास किया। उसे देख अन्य दुकानदार भी आए और विदेशी महिला की पकड़ से सागरिका को छुड़ाने में सफल हुए। दोनों महिलाओं को छुड़ाने वालों ने कहा- “वो बहुत ताकतवर थी। उसे हटाना बहुत मुश्किल था। “

उन्होंने यह भी बताया कि घटना के बाद भी महिला लगातार सागरिका को गाली दे रही थी। इस दौरान महिला ने चूँकि भारतीयों के लिए भी अपशब्द कहे थे इसलिए उस महिला से स्थानीय लोग भी नाराज थे। उसके पति के पहुँचने के बाद भी उन्होंने हामिद को वहाँ रोक लिया था और कहा था कि जब तक पुलिस केस रजिस्टर नहीं करेगी तब तक वह उसे नहीं छोड़ेंगे।

सागरिका घोष से हो रहे सवाल

बता दें कि 11 फरवरी को पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने ‘पत्रकार’ सागरिका घोष को राज्यसभा सांसद बनाए जाने की घोषणा की। ये काफी हैरान करने वाली बात थी क्योंकि सागरिका सोशल मीडिया पर कहती थीं कि वह कभी किसी राजनैतिक पार्टी की टिकट को स्वीकर नहीं करेंगी। इस दावे को करते हुए वह चुनौती भी देती थीं कि वो ये चीज लिख कर भी दे सकती हैं, या फिर उनके इस ट्वीट को सेव भी किया जा सकता है। अब इसके 6 साल बाद जब सागरिका घोष खुद को राज्यसभा सांसद बनाए जाने की TMC की घोषणा को रीट्वीट कर रही है, लोग उनसे पूछ रहे हैं कि क्या अब उनकी राय बदल गई है?

‘राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में केवल अरबपतियों को न्योता’: जिस छत्तीसगढ़ में राहुल गाँधी ने फैलाया झूठ वहीं की कूड़ा बीनने वाली बुजुर्ग को भूले

राहुल गाँधी अक्सर भ्रामक बातें फैलाने के लिए जाने जाते हैं। अब उन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भ्रम फैलाया है। छत्तीसगढ़ के कोरबा में ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान राहुल गाँधी ने झूठ फैलाया। इस दौरान उन्होंने लोगों से कहा, “आप मुझे बताओ, राम मंदिर का उद्घाटन हुआ, देखा आपने। उसमें आपने एक भी गरीब आदमी को देखा? एक देखा आपने? उसमें मुझे अमिताभ बच्चन दिखा, ऐश्वर्या राय दिखीं, अम्बानी-अडानी था, सारे के सारे बिजनेस वाले दिखे।”

राहुल गाँधी ने आगे कहा कि उन्हें एक भी गरीब वहाँ नहीं दिखा, एक भी किसान-मजदूर-बेरोजगार नहीं दिखा। राहुल गाँधी ने कहा कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में एक भी छोटा दुकानदार या चाय वाला उन्हें नहीं दिखा, सारे के सारे अरबपति दिखे। उन्होंने ये तक दावा किया कि अम्बानी-अडानी और उनके बीवी-बच्चों ने वहाँ भाषण दिया। बकौल राहुल गाँधी, गरीबों के लिए इस देश में कुछ नहीं बचा है। आइए, राहुल गाँधी के इस झूठ का पर्दाफाश करते हैं।

असल में राहुल गाँधी ऐसा इसीलिए बोल रहे थे, क्योंकि उन्हें छत्तीसगढ़ की ही बिदुला देवी के बारे में नहीं पता। वही छत्तीसगढ़, जहाँ आजकल राहुल गाँधी की यात्रा पहुँची हुई है। बिदुला देवी छत्तीसगढ़ के गारियाबंद की रहने वाली हैं। उनका पूरा जीवन संघर्षों और गरीबी में बीता। आज भी वो कूड़ा-कचरा बीन कर ही अपना जीवन-यापन करती हैं। भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति, आस्था और समर्पण को देखते हुए उन्हें अयोध्या के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में आने का न्योता मिला था।

उनका नाम तब भी सामने आया था, जब 2021 में राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा जमा किया जा रहा था। जब बिदुला देवी को पता चला कि VHP कार्यकर्ता राम मंदिर के लिए चंदा जमा कर रहे हैं, तब उन्होंने अपने उस दिन की 40 रुपए की कमाई में से 20 रुपए दान कर दिए थे। गारियाबंद के विहिप के जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह राजपूत ने इसे एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण रकम करार दिया था। उन्होंने ये बात संगठन के अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी बताई।

VHP के राज्य प्रमुख चंद्रशेखर वर्मा ने बिदुला देवी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का न्योता दिया था। हालाँकि, अस्वस्थता के कारण वो इस कार्यक्रम में नहीं पहुँच पाई थीं। लेकिन, बिदुला देवी का कहना है कि वो रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या ज़रूर जाएँगी। राम मंदिर के लिए कारसेवा के दौरान बलिदान देने वाले सभी अधिकतर परिवार के ही लोग थे, उनके परिजनों को भी न्योता मिला। बड़ी संख्या में साधु-संतों ने भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, इनमें से अधिकतर सामान्य ही थे, VIP नहीं।

देश भर में 47 जगहों पर रोजगार मेला, PM मोदी ने 1 लाख को दिए नौकरी के लेटर: ;कर्मयोगी भवन’ की रखी आधारशिला, कहा- भर्ती प्रक्रिया अब पूरी तरह पारदर्शी

सोमवार (12 फरवरी 2024) को देश भर में 47 जगहों पर रोजगार मेला का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए 1 लाख से अधिक युवाओं को नियुक्ति-पत्र दिए। उन्होंने दिल्ली में ‘कर्मयोगी भवन’ के प्रथम चरण की आधारिशला भी रखी। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने भर्ती की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है। भर्ती प्रक्रिया को निश्चित अवधि में पूरा करने पर सरकार का जोर है। इससे हर युवा को अपनी योग्यता साबित करने का समान अवसर मिल रहा है।

पिछली सरकार के मुकाबले डेढ़ गुणा अधिक सरकारी नौकरी देने की बात कहते हुए पीएम मोदी ने कहा, “युवाओं को भारत सरकार में नौकरी देने का अभियान लगातार तेज गति से चल रहा है। पहले की सरकारों में नौकरी के लिए विज्ञापन जारी होने से लेकर नियुक्ति पत्र देने तक बहुत लंबा समय लगता था। इस देरी का फायदा उठाकर उस दौरान रिश्वत का खेल भी जमकर होता था। हमने भारत सरकार में भर्ती की प्रक्रिया को अब पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है। इतना ही नहीं सरकार का बहुत जोर है कि भर्ती प्रक्रिया एक तय समय के भीतर पूरी कर ली जाए।”

प्रधानमंत्री ने जिन युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए हैं उनकी बहाली, राजस्व, गृह, उच्च शिक्षा, परमाणु ऊर्जा, रक्षा, वित्तीय सेवा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, जनजातीय मामले, रेलवे जैसे विभिन्न मंत्रालयों में होगी। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने हर युवा को अपनी योग्यता साबित करने का समान अवसर मुहैया कराया है। आज हर युवा के मन विश्वास है कि वह कड़ी मेहनत और अपनी प्रतिभा की दम पर अपनी जगह बना सकता है। उन्होंने कहा, “2014 के बाद से ही बीजेपी सरकार का प्रयास रहा है कि युवाओं को भारत सरकार से जोड़कर उन्हें राष्ट्र निर्माण की यात्रा में शामिल करें।”

उल्लेखनीय है कि जिस ‘कर्मयोगी भवन’ की पीएम मोदी ने आधारशिला रखी है, उसका मकसद ‘मिशन कर्मयोगी’ के विभिन्न हिस्सों के बीच सहयोग और तालमेल को बढ़ावा देना है। इस मिशन के जरिए नवनियुक्त कर्मियों को आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर एक ऑनलाइन मॉड्यूल ‘कर्मयोगी प्रारंभ’ के जरिए खुद को प्रशिक्षित किया जा रहा है। आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर 800 से अधिक ई लर्निंग पाठ्यक्रम मुहैया कराए गए हैं।

कब-कब लगे रोजगार मेले

रोजगार मेले का सिलसिला 22 अक्‍टूबर 2022 से शुरू हुआ था। इस पहले रोजगार मेला में 75 हजार से अधिक नियुक्ति पत्र बाँटे गए थे। इसके बाद 22 नवंबर 2022 को आयोजित दूसरे मेले में 71 हजार से ज्‍यादा युवाओं को जॉइनिंग लेटर मिले थे।

तीसरा मेला 20 जनवरी 2023 और चौथा 13 अप्रैल 2023 को लगा था। इन दोनों में 71-71 हजार से ज्‍यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। पांचवाँ रोजगार मेला 16 मई, छठा 13 जून और सातवाँ 22 जुलाई 2023 को लगा था। इसमें 70-70 हजार से ज्‍यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए।

वहीं आठवाँ रोजगार मेला 28 अगस्त 2023 को लगा था। इसमें भी 51,000 से ज्‍यादा देश के युवाओं को सरकारी नौकरी के अपॉइंटमेंट लेटर दिए गए। इसके बाद 9वाँ रोजगार मेला 26 सितंबर को हुआ, जिसमें 51 हजार से ज्यादा लोगों को मिला अपॉइंटमेंट लेटर मिले थे। इसी तरह 30 नवंबर 2023 को देश के 37 जगहों पर लगे रोजगार मेले के दौरान 51 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे।

कुँवारी या शादीशुदा… कम उम्र वाली सुंदरी को चुनते हैं, मर्दों को मौत से बचाने के लिए जाना पड़ता है: 12 वीडियो से जानिए क्या झेल रहीं बंगाल में संदेशखाली की महिलाएँ

उत्तर 24 परगना के संदेशखाली से टीएमसी गुंडों के भयावह कारनामे सामने आ रहे हैं। यहाँ टीएमसी के गुंडों के लिए रेप और गैंगरेप आम बात है। वो टीएमसी की महिला कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ते। मीटिंग में सिर्फ महिलाओं को बुलाते हैं। पति को मरने से बचाना है तो पार्टी के दफ्तर में आना पड़ेगा, वहाँ टीएमसी के गुंडे यौन शोषण करते हैं, लेकिन महिलाओं को चुप रहना पड़ता है। टीएमसी के गुंडे जमीनों पर कब्जा करते हैं, विरोध करने वालों को गैंगरेप की धमकी देते हैं। यही नहीं, उन्हें जो भी महिला पसंद आ गई, उसे वो रात भर उठाकर ‘भोगते’ हैं और मन भर जाने पर सुबह घर भेज देते हैं। पश्चिम बंगाल की पुलिस टीएमसी के गुंडों के लिए सहायक का काम करती है। वो पीड़ितों को ही दबाती है।

ये सब उसी संदेशखाली की पीड़ित महिलाएँ कह रही हैं, जिन्होंने अब इन अत्याचारों के खिलाफ उठ खड़े होने के ऐलान कर दिया है और पूरे संदेश खाली में टीएमसी के फरार नेता और ममता बनर्जी के खास शेख शाहजहाँ और उनके गुर्गों शिबू हाजरा और उत्तम सरदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 8 फरवरी 2024 से संदेशखाली की महिलाएँ अब टीएमसी के गुंडों का सामना लाठी-डंडों के साथ कर रही हैं। इन्हें कंट्रोल करने के लिए 10 फरवरी 2024 को प्रशासन ने धारा-144 तो लगाई, लेकिन टीएमसी गुंडों को अत्याचार करने की पूरी छूट दी। हम मीडिया संस्थानों से उन्हीं पीड़ित महिलाओं की बातचीत सामने रख रहे हैं, जिसमें वो टीएमसी के गुंडों की करतूतों को सामने रख रही हैं।

इसी कड़ी में टीवी9 बांग्ला से बातचीत में संदेशखाली की महिलाओं ने बताया है कि कैसे शिबू हाजरा और उत्तर सरदार की अगुवाई टीएमसी के गुंडों ने लोगों की जमीनों पर कब्जा किए। एक महिला ने बताया कि बीडीओ और स्थानीय पुलिस के जवान टीएमसी के पार्टी काडर की तरह काम करते हैं। यही नहीं, स्थानीय लोगों ने बताया कि टीएमसी के गुंडों को ‘कट मनी’ का भुगतान करना पड़ता है और अगर किसी वजह से ‘कट मनी’ नहीं दे सके, तो फिर टीएमसी के गुंडे उनकी पिटाई करते हैं। बीजेपी सांसद दिलीप घोष ने ये वीडियो एक्स पर शेयर किया है।

एक महिला ने टीवी9 बांग्ला को बताया कि कैसे टीएमसी के गुंडे युवा लड़कों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं और उन्हें आपराधिक गतिविधियों में शामिल कर रहे हैं। उसने बताया कि टीएमसी के गुंडे नए और पढ़ाई लिखाई वाले बच्चों को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल करते हैं। महिला ने बताया, “बच्चों से कहा जाता है कि ‘दीदी’ उनका पेट भरती हैं। वो राजनीतिक काम नहीं करेंगे तो खाने के लिए मर जाएँगे। टीएमसी के गुंडे उन बच्चों से विपक्षी कार्यकर्ताओं के घरों पर हमला करवाते हैं, लोगों को परेशान कराते हैं और लूट जैसी वारदात कराते हैं। वो बच्चों को शराब और हथियार देकर बर्बाद कर रहे हैं। वो शाहजहाँ की पसंद की औरतों को उठाने के लिए दबाव डालते हैं।”

रिपब्लिक बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी कार्यकर्ता और उनके गुंडों ने शेख शाहजहाँ, उत्तर सरदार और शिबू हाजरा के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर हमला किया और उनका उत्पीड़न किया, तो पुलिस ने उनका हाथ दिया। एक महिला ने पूरी बात बताते हुए कहा, “हम रात में नींद की एक झपकी तक नहीं ले सके। भारी संख्या में पुलिस वाले बाइकों और कारों पर सवार होकर पहुँचे। वो रात में जोर-जोर से हम सबको धमका रहे थे। हमारे परिवार के मर्द भाग गए थे, क्योंकि उन्हें पुलिस उठा लेती।”

बजरंग दल के कार्यकर्ता की पत्नी ने बताया, “पुलिस हमारे घर में रात 3 बजे घुसी। पुलिस वालों ने मेरे पति को गालियाँ दी और मेरा उत्पीड़न करने की कोशिश की। उन्होंने मेरा पोला (शादीशुदा बंगाली महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला कड़ा) तोड़ दिया। पुलिस ने मेरी बेटी को दूर फेक दिया। वो पुलिस वाले इतने नशे में थे कि वो सही से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे।”

संदेशखाली की एक अन्य महिला ने स्थानीय पुलिसकर्मियों की बदतमीजियों के बारे में बताया। एक महिला ने कहा, “पुलिस वाले ने मुझसे पूछा कि मैं दूसरे मर्दों के सोती हूँ? वो कैसे ये सवाल पूछ सकते हैं। मुझे जवाब चाहिए। मैंने क्या गलत किया है कि मुझे ‘मादर**’ जैसी गालियाँ दी गई?” महिला ने आगे बताया, “पुलिस वालों ने मेरे पति को ‘सुवर का बच्चा’ कहा। वो मेरे पति को घसीटकर घर से बाहर ले गए। उन्होंने क्या गलत किया था? हमें न्याय चाहिए। क्या पुलिस वाले किसी को भी इस तरह गालियाँ दे सकते हैं?”

संदेशखाली में एक महिला ने कहा, “टीएमसी के गुंडे हमारे पतियों को जबरदस्ती पकड़ कर अपने साथ ले जाते हैं। वो उनसे काम कराते हैं और पैसे भी नहीं देते। अगर कोई पैसों की माँग करता है, तो उसे बेहरमी के साथ पीटा जाता है।”

एक महिला ने एबीपी आनंदा से बातचीत में कहा, “हम कानून को अपने हाथों में नहीं लेना चाहते। उत्तम सरदार ने हमें डंडे उठाने पर मजबूर कर दिया। वो पिछले 4 साल से हमारा उत्पीड़न कर रहा है। अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। इसी वज से हम यहाँ प्रदर्शन कर रहे है। हम अगर टीएमसी की बैठकों में जाते हैं, तो हमारे पतियों को उठा लिया जाता है। संदेशखाली कभी शांत माहौल वाली जगह हुआ करती थी, लेकिन उसे नष्ट कर दिया गया। हम फिर से संदेशखाली में शांति चाहते हैं।”

संदेशखाली की एक महिला ने ममता बनर्जी को निशाने पर लिया और कहा कि सरकार ने लोखिर भंडार योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी को 500 रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 1000 रुपए प्रति माह कर दिया है। क्या सरकार पार्टी की कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न के बदले ‘आर्थिक सहायता’ के तौर पर ऐसा कर रही है?

रिपब्लिक बाँग्ला से बात करते हुए पीड़ित महिला ने कहा, “क्या हम अपने सम्मान के बदले पैसे पा रहे हैं? क्या हमें इस लिए पैसे दिए जा रहे हैं कि टीएमसी कार्यकर्ताओं को रात में ‘कंपनी’ दें? क्या मुख्यमंत्री हमें अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए पैसे दे रही हैं?”

संदेशखाली में प्रदर्सन के दौरान एक महिला ने बताया, “तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता बाइक पर 20-30 के ग्रुप में आते हैं और वे इलाके की हर महिला की जाँच करते हैं। वे सबसे कम उम्र की और सबसे अच्छी दिखने वाली महिला को चुनते हैं और उसे अपने साथ ले जाते हैं। वह कहती हैं, वे रात-रात भर उसके साथ संबंध बनाते हैं, और उसे तभी छोड़ते हैं जब वे “संतुष्ट” हो जाते हैं।”

महिला शेख शाहजहाँ और उसके आदमियों की ओर से फैलाए गए आतंक और डर को बयान करती है। महिला ने कहा कि “जिस भी महिला पर इन गुंडों की नजर पड़ गई, भले ही वो कुँवारी हो या शादीशुदा, वो उसे उठा ले जाते हैं। यही नहीं, शादीशुदा महिलाओं के पति को भी उसपर कोई हक नहीं होता। बस उन्हें महिला पसंद आनी चाहिए, इसके बाद सबकुछ उनकी मर्जी।” इस बात को वहाँ मौजूद एक महिला ने भी दोहराया।

एबीवी आनंदा से बात करते हुए एक पीड़ित ने बताया, “हम सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। टीएमसी के गुंडों ने हमें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है। यहाँ तक कि उन्होंने ग्रामीणों द्वारा बनवाई गई कंक्रीट की सड़क को भी नष्ट कर दिया।” एक महिला ने बताया है कि उन्हें पीने का साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है।

एक महिला ने रिपब्लिक बाँग्ला के साथ अपनी आपबीती साझा की। महिला ने कहा, “टीएमसी के गुंडों ने मेरी खिड़की तोड़ दी। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ खींचा और बाहर को कहा। उन्होंने कहा कि वो उसका (महिला का) गैंगरेप करेंगे। ये सब पुलिस की मौजूदगी में हो रहा था। वहाँ एक और महिला को बाल पकड़ कर खींचा गया और उसकी साड़ी खींचकर अलग कर दी गई। संदेशखाली में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं। वो मेरे पति के सामने ही मुझसे बदतमीजी करते रहे। हम शांति चाहते हैं। मुझे लगता है कि ऐसी जिल्लत भरी जिंदगी जीने से बेहतर है मर जाना।”

एक महिला ने रोते हुए बताया, “टीएमसी के कार्यकर्ता सिर्फ महिलाओं को ही पार्टी में बुलाते हैं और उनका शोषण करते हैं। हमें अपने पतियों की जान बचाने के लिए उनकी बात माननी (यौन उत्पीड़न के लिए हाँ) पड़ती है।” महिला ये बात कहती हुई रो पड़ती है और कहती है कि टीएमसी के गुंडे ये भी नहीं सोचते कि वो पार्टी सपोर्टर है।

संदेशखाली में आखिर चल क्या रहा है?

पश्चिम बंगाल में उत्तर 24 परगना जिला है। यहाँ संदेशखाली नाम की जगह है। इस साल की शुरुआत में इसी जगह के टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ पर रेड करने की गई ईडी की टीम पर जानलेवा हमले हुए थे। यहाँ गुरुवार (8 फरवरी 2024) को केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल को फंड न देने को लेकर टीएमसी नेताओं ने संदेशखाली के त्रिमोहानी बाजार में लोगों के साथ मिलकर रैली निकाली थी। इस रैली में शाहजहाँ शेख के नारे लगाने पर बवाल मच गया।

संदेशखाली की महिलाओं और पुरुषों ने लाठी-डंडे लेकर टीएमसी के गुंडों को दौड़ा लिया। इस दौरान दोनों ओर से मारपीट शुरू हो गई। इसके अगले दिन शाहजहाँ शेख के गुंडों ने पलटवार किया, तो ग्रामीणों ने कई जगहों पर उत्पात कर दिया। इस बवाल में कई लोग घायल भी हो गए। इसके बाद ही पुलिस ने इलाके में धारा 144 लागू करने के साथ ही इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थी। हालाँकि ऊपर के वीडियो में पीड़ित महिलाएँ उन्हीं अत्याचारों को बयान कर रही हैं, जो इस दौरान महिलाओं ने झेला।

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हल्द्वानी में खुद की ही गोली से मरा फईम कुरैशी, चश्मदीद ने किया खुलासा: हिंदुओं को पीटने वाली भीड़ में शामिल था मृत मुस्लिम युवक का भाई

हल्द्वानी हिंसा की एक्सक्लूसिव वीडियो ऑपइंडिया को मिल गई हैं। इनमें से एक में दिख रहा है कि बनभूलपुरा में हिंसा की शुरुआत से पहले एक जगह मुस्लिम भीड़ एक हिंदू युवक को पकड़कर उसको पीट रही है। इस भीड़ में एक हरी टीशर्ट में युवक भी दिख रहा है। दावा है कि हल्द्वानी हिंसा के समय जो फायरिंग हुई उसमें उसका भाई फईम कुरैशी (26) भी मरा है। कुछ लोग जहाँ इस मौत पर पुलिस को बदनाम कर रहे हैं वहीं चश्मदीदों का कहना कुछ और ही है।

ऑपइंडिया को प्राप्त वीडियो में फईम कुरैशी पुलिस को हाथ दिखाते दिख रहा था। वहीं उसका भाई हिंदू युवक को पीटने वाली भीड़ में शामिल था। हमने जब चश्मदीदों से घटना पर बात की तो गाँधी नगर में एक दलित समुदाय के युवक ने बताया- “जो मरे वो किसी की गोली से नहीं मरे। हुआ क्या कि जब वो गोली चला रहा था तो उसे उसकी ही गोली लग गई।”

नीचे वीडियो में आप चश्मदीद की बात सुन सकते हैं।

चश्मदीद के बयान के अलावा ऑपइंडिया के पास फईम कुरैशी की वीडियो भी मौजूद है जिसका जिक्र चश्मदीद ने किया। वीडियो में देख सकते हैं कि पीली शर्ट में वो लड़का पहले अपनी भीड़ के साथ सड़क के बीच में खड़ा होता है और फिर जाकर किनारे में खड़ा हो जाता है। जब पुलिस उसके सामने से गुजरती है तो वो उन्हें हाथ हिलाकर ललकारने वाले अंदाज में कुछ कहता दिखता है। वहीं बाकी भीड़ पुलिस को देखने लगती है।

बता दें कि हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को एक अवैध मस्जिद हटाने की प्रक्रिया के दौरान इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिस पर हमला किया था। पहले इस भीड़ ने पुलिस पर छतों से पत्थर फेंके थे, उसके बाद यह लोग पेट्रोल बम आदि लेकर सड़कों पर उतर आए थे। दंगाई भीड़ के पास असलहे भी थे। इन्होंने पुलिसकर्मियों को मारने और जलाने की कोशिश की थी। इसके अलावा थाने पर हमला करके उसे भी लूटा था। दंगाई भीड़ पर काबू पाने के बाद पुलिस ने इन पर कार्रवाई शुरू की तो अब तक इस मामले में 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। पूरे प्रकरण में 3 एफआईआर दर्ज हुई हैं। सीसीटीवी आदि के माध्यम से बाकी आरोपितों को पकड़ने का प्रयास भी हो रहा है।