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वाक्कुशल सुधांशु त्रिवेदी, कॉन्ग्रेस से आए RPN सिंह, हरियाणा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला… BJP की राज्यसभा वाली लिस्ट आ गई, देखें किस राज्य से किनका नाम

भाजपा ने राज्यसभा के चुनाव को लेकर अपनी सूची जारी की है, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की सीटों से नाम तय किए गए हैं। उत्तर प्रदेश कोटे से सुधांशु त्रिवेदी को फिर से राज्यसभा भेजा जाएगा। वहीं हरियाणा में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे सुभाष बराला भी राज्यसभा भेजे जाएँगे। उत्तर प्रदेश से RPN सिंह भी राज्यसभा भेजा गया है। वो कॉन्ग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए थे। बिहार के डॉ धर्मशील गुप्ता और भीम सिंह का नाम है।

भीम सिंह अति-पिछड़ा समाज से आते हैं। वहीं डॉ धर्मशील गुप्ता वैश्य समाज से आते हैं। राज्यसभा वाली लिस्ट में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी और पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का नाम नहीं है। NDA के पास बिहार में 3 सीटें हैं, जिनमें से 2 पर उम्मीदवार उतारे गए हैं और एक पर जदयू नेता संजय झा को राज्यसभा भेजा जा सकता है। यूपी से लिस्ट में चौधरी तेजवीर सिंह, साधना सिंह, अमरपाल मौर्य, संगीता बलवंत और नवीन जैन का भी नाम है।

पश्चिम बंगाल से सामिक भट्टाचार्य, उत्तराखंड से महेंद्र भट्ट, कर्नाटक से नारायणा कृष्णासा भांडगे और छत्तीसगढ़ से देवेंद्र प्रताप सिंह को भी इस सूची में डाला गया है। ये सब राज्यसभा सांसद बनेंगे। बता दें कि देश भर में 56 सीटों के लिए 27 फरवरी, 2024 को राज्यसभा के चुनाव होने हैं। 15 फरवरी नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है, जबकि 20 फरवरी तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा।

इससे पहले TMC ने भी अपनी सूची जारी की है, जिसमें सागरिका घोष, ममता बाला ठाकुर, सुष्मिता देव और नदीमुल हक़ का नाम है। सागरिका घोष ने इंदिरा गाँधी पर एक किताब लिख रखी है। मार्च 2018 में उनकी इस अंग्रेजी किताब का हिन्दू अनुवाद ‘इंदिरा: भारत की सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री’ Amazon पर लिस्ट हुई थी। उन्होंने जब इस बारे में ट्वीट किया तो अजय खंडेलवाल नामक एक शख्स ने तंज कसा कि सागरिका घोष को राज्यसभा टिकट नहीं दिया गया।

इस पर जवाब देते हुए सागरिका ने लिखा, “हाहा! मैं कभी कोई RS टिकट, PS टिकट या CS टिकट किसी भी राजनीतिक पार्टी से स्वीकार नहीं करूँगी सर।”

फ्रांस के बाद अब श्रीलंका और मॉरीशस में चलेगा UPI, पेमेंट के लिए RuPay कार्ड भी कर सकेंगे इस्तेमाल: डिजिटल कनेक्टिविटी में भारत ने बढ़ाया एक और कदम

भारत के बाद अब फ्रांस, श्रीलंका और मॉरीशस में भी भारत का ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांसफर सिस्टम UPI (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ की मौजूदगी में सोमवार (12 फरवरी, 2024) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए श्रीलंका-मॉरीशस में UPI के लॉन्च का हिस्सा बनेंगे। रविवार को इसकी घोषणा की है। भारतीय उच्चायोग ने इस संबंध में जानकारी दी है।

यानी, अब भारत के जो भी लोग घूमने के लिए श्रीलंका या मॉरीशस जाएँगे, वो UPI का इस्तेमाल कर के पेमेंट्स कर सकेंगे। इसके अलावा श्रीलंका या मॉरीशस से जो लोग भारत आएँगे, वो भी यूपीआई के माध्यम से पेमेंट कर पाएँगे। भारतीय उच्चायोग ने अपने बयान में कहा कि फिनटेक इनोवेशन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत भारत नेतृत्वकर्ता बन कर उभर रहा है। कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमारे विकास के अनुभवों एवं खोजों को साझा करने पर जोर दिया है।

भारतीय उच्चायोग ने कहा कि श्रीलंका और मॉरीशस के साथ भारत के मजबूत सांस्कृतिक एवं पीपल-टू-पीपल कॉन्टैक्ट को देखते हुए इस लॉन्च से एक बड़े वर्ग को फायदा मिलेगा, साथ ही इन देशों के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। इससे पेमेंट्स तेज होंगे, बिना किसी दिक्कत के होंगे। इसी महीने की शुरुआत में फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित एफिल टॉवर पर फ्रांस में UPI सेवाओं को लॉन्च किया गया। इस त्वरित पेमेंट सिस्टम को ‘नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI)’ ने 2016 में लॉन्च किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपना रहा कि भारत में इस तरह का तेज़ डिजिटल पेमेंट सिस्टम हो। अब भारत का RuPay कार्ड भी श्रीलंका व मॉरीशस में चलेगा। फ्रांस में UPI के लॉन्च को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इसे वैश्विक बनाने की तरफ ये एक महत्वपूर्ण कदम है। एफिल टॉवर घूमने के लिए भी यूपीआई से पेमेंट्स हो रहे हैं। बता दें कि UPI के माध्यम से एक से अधिक बैंक खाते एक ही प्लेटफॉर्म पर रखे जा सकते हैं।

‘लिख कर दे सकती हूँ – कभी किसी पार्टी का राज्यसभा ऑफर स्वीकार नहीं करूँगी’: 6 साल बाद TMC की हुईं सागरिका घोष, पति कहते थे – मोदी काल में संसद का महत्व ही नहीं

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने ‘पत्रकार’ सागरिका घोष को राज्यसभा सांसद बनाए जाने की घोषणा की है। सागरिका घोष जहाँ ‘टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI)’ में लिखती हैं, वहीं उनके पति राजदीप सरदेसाई ‘इंडिया टुडे’ में काम करते हैं। राज्यसभा नॉमिनेशन के बाद पति-पत्नी का दोहरा रवैया भी सामने आया है। जहाँ राजदीप सरदेसाई कहते थे कि राज्यसभा सीट बिकती है, सागरिका घोष का कहना था कि वो कभी ऐसा ऑफर स्वीकार नहीं करेंगी।

सागरिका घोष ने इंदिरा गाँधी पर एक किताब लिख रखी है। मार्च 2018 में उनकी इस अंग्रेजी किताब का हिन्दू अनुवाद ‘इंदिरा: भारत की सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री’ Amazon पर लिस्ट हुई थी। उन्होंने जब इस बारे में ट्वीट किया तो अजय खंडेलवाल नामक एक शख्स ने तंज कसा कि सागरिका घोष को राज्यसभा टिकट नहीं दिया गया। इस पर जवाब देते हुए सागरिका ने लिखा, “हाहा! मैं कभी कोई RS टिकट, PS टिकट या CS टिकट किसी भी राजनीतिक पार्टी से स्वीकार नहीं करूँगी सर।”

साथ ही उन्होंने चुनौती देते हुए कहा था कि वो ये चीज लिख कर भी दे सकती हैं, या फिर उनके इस ट्वीट को सेव भी किया जा सकता है। अब इसके 6 साल बाद जब सागरिका घोष खुद को राज्यसभा सांसद बनाए जाने की TMC की घोषणा को रीट्वीट कर रही है, लोग उनसे पूछ रहे हैं कि क्या अब उनकी राय बदल गई है? सागरिका घोष ने एक बार लिखा था कि पत्रकार होना ज्यादा बड़ी बात है, सरकार में शामिल होने या राज्यसभा जाने से।

वहीं राजदीप सरदेसाई का एक अन्य वीडियो भी सामने आया है जिसमें वो कहते दिख रहे हैं कि एक जमाने में राज्यसभा की अहमियत हुआ करती थी, लेकिन अब नरेंद्र मोदी के काल में तो संसद की ही कोई अहमियत नहीं रह गई है। उन्होंने कहा था कि उन्हें ये समझ ही नहीं आता है कि लोग राज्यसभा जाना क्यों चाहते हैं। अगस्त 2010 में CNN-IBN में काम करने के दौरान राजदीप सरदेसाई ने ‘खुलासा’ चलाया था कि राज्यसभा के टिकट बिक रहे हैं।

सागरिका घोष के पति राजदीप सरदेसाई को ‘रसगुल्ला पत्रकारिता’ के लिए भी जाना जाता है, जिसका इनाम शायद उन्हें पत्नी की राज्यसभा सांसदी के रूप में मिला है। राजदीप ने एक प्रश्न के उत्तर में स्वीकार किया था कि अगर वे ममता बनर्जी से उनके राज्य में हो रही हिंसा पर कठिन प्रश्न पूछते तो उन्हें रसगुल्ले नहीं मिलते। पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को लेकर राजदीप सरदेसाई ने सीएम ममता बनर्जी से कोई सवाल नहीं पूछा था, क्योंकि वो ‘चाय पर चर्चा’ के लिए गए थे और सवाल पूछने पर उन्हें रसगुल्ले नहीं मिलते।

‘हाथ दर्द करेगा बेटा, मुझे मिल गया तुम्हारा प्यार’: जब रैली में PM मोदी ने बच्चे को दिया आशीर्वाद, बोले – हमारे लिए जनजातीय समाज वोट बैंक नहीं, देश का गौरव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (11 फरवरी, 2024) को मध्य प्रदेश के झाबुआ में पहुँचे, जहाँ एक बच्चे ने उनका ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने जो कहा, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। पीएम मोदी यहाँ 7550 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन व शिलान्यास के लिए पहुँचे थे। उन्होंने जनजातीय महासभा को भी संबोधित किया। इस दौरान एक छोटा सा बच्चा बार-बार पीएम मोदी की तरफ देख कर हाथ हिला रहा था।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने उसे टोका और हाथ न हिलाने के लिए कहा, ताकि उसे दर्द ना हो। पीएम मोदी इस दौरान बच्चे से कहते हैं, “मुझे तुम्हारा प्यार मिल गया बेटा। कृपया अपना हाथ नीचे कर लें, नहीं तो दर्द होने लगेगा।” उक्त बच्चा अपने पिता के साथ आया था और पीएम मोदी को देख कर खासा खुश था। वो उनकी तरफ देख कर अपना हाथ हिला रहा था और उनका ध्यान आकर्षित कर रहा था। पीएम मोदी के इस वीडियो को देख कर लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं।

वीडियो में वो कहते हैं, “बेटा, तुम्हारा हाथ दर्द करेगा, दुःख जाएगा। तुमने बहुत किया। मिल गया मुझे बेटा, मिल गया तेरा प्यार। तेरा हाथ दर्द करेगा बेटा। अब हाथ नीचे करो, मुझे मिल गया।” जब उक्त बच्चे ने अपना हाथ नीचे कर लिया तब पीएम मोदी बोले, “शाबाश, समझदार हो।” इस रैली में पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस और उसके दोस्तों की दो ही ताकत हैं – जब ये सत्ता में रहते हैं- तब लूटते हैं, जब सत्ता से बाहर जाते हैं, तो लोगों को लड़वाते हैं, यानी लूट और फूट- यही कॉन्ग्रेस का ऑक्सीजन है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इनको बंद करते ही कॉन्ग्रेस पार्टी का सियासी दम टूटने लगता है।

पीएम मोदी ने कहा, “हमारे लिए जनजातीय समाज वोट बैंक नहीं, देश का गौरव है। आपका सम्मान भी और आपका विकास भी – ये मोदी की गारंटी है। जिस समाज को पिछली सरकारों ने पिछड़ा बताकर जंगल तक सीमित कर दिया था, आज उसका गौरव पूरा विश्व जान रहा है। मुझे विश्वास है, आप सबके आशीर्वाद से ये मध्य प्रदेश के विकास की जो संकल्प यात्रा शुरू हुई है, वो और गति से आगे बढ़ेगी। जनता ने कॉन्ग्रेस को जो जवाब अब तक दिया है, वो केवल ब्याज ही था। कॉन्ग्रेस का पूरा हिसाब तो अभी बाकी है।”

भारत में ₹66000 करोड़ का निवेश करेगी इजरायल की कंपनी, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आगे बढ़ेगा देश: मोदी सरकार के पास आया प्रस्ताव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि भारत सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में निवेश भी आकर्षित किए जा रहे हैं। अब इजरायल भी इस क्षेत्र में भारत का साथ देने के लिए आ गया है। इजरायल की कंपनी ‘टॉवर सेमीकंडक्टर’ ने भारत में 800 करोड़ डॉलर (66,411 करोड़ रुपए) के निवेश का प्रस्ताव दिया है। साथ ही कंपनी ने इसके लिए भारत सरकार से ज़रूरी मंजूरी भी माँगी है। कंपनी का कहना है कि वो भारत में 65 नैनोमीटर और 40 नैनोमीटर के चिप का निर्माण करेगी।

मोदी सरकार के प्रमुख कारोबारी एजेंडों में सेमीकंडक्टर भी है। इसके लिए दिसंबर 2021 में केंद्र सरकार ने 10 बिलियन डॉलर की योजनाएँ भी लॉन्च की हैं। अक्टूबर 2023 में केंद्रीय IT मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने ‘टॉवर सेमीकंडक्टर’ के CEO रसल्ल सी एललवंगेर से मुलाकात भी की थी। इस बैठक में भारत में इजरायल के एम्बेस्डर नाओर गिलोन ने भी हिस्सा लिया था। उस समय भी भारत और इजरायली कंपनी के बीच सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में पार्टनरशिप की बात हुई थी।

वहीं 2022 में International Semiconductor Consortium (ISMC), जिसका ‘टॉवर सेमीकंडक्टर’ भी एक हिस्सा है, उसने भारत की सेमीकंडक्टर योजना में सहभागिता के लिए प्रस्ताव दिया था। उस समय Intel ने ‘टॉवर सेमीकंडक्टर’ को खरीदने का प्रस्ताव दिया था। उधर इसकी प्रक्रिया चल रही थी, इसीलिए ISMC के प्रस्ताव को भारत सरकार ने ठन्डे बस्ते में रखे हुआ था। भारत सरकार चाहती थी कि Intel अपनी प्रक्रिया पूरी कर ले, फिर इस पर आगे बढ़ा जाए।

Intel के सीईओ पेट गेलसिंगेर ने भी पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। साथ ही वो MeiTY मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी 2022 में मिले थे। उस दौरान उन्होंने कहा था कि निकट भविष्य में भारत में यूनिट स्थापित करने की कोई योजना नहीं है। अब अन्तर-टॉवर सेमीकंडक्टर की डील रद्द हो गई है। भारत सरकार फिर से अब इजरायली कंपनी के संपर्क में है। 300 से अधिक संस्थाएँ व कंपनियाँ इसकी ग्राहक हैं। अमेरिका की Micron पहले ही भारत में बड़े निवेश का ऐलान कर चुकी है।

राजदीप सरदेसाई को ‘रसगुल्ला पत्रकारिता’ का मिला इनाम, TMC ने बीवी को बनाया राज्यसभा सांसद: बंगाल हिंसा पर नहीं पूछा था सवाल

राजदीप सरदेसाई की पत्नी सागरिका घोष को पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) ने राज्यसभा भेजा है। सागरिका घोष के अलावा ममता बाला ठाकुर और नदीमुल हक़ को भी राज्यसभा भेजे जाने की घोषणा की गई है। वहीं सुष्मिता देव को भी दोबारा राज्यसभा भेजा जाएगा। वो 2021 में TMC में शामिल हुई थीं और उसी साल उन्हें राज्यसभा भेजा गया था। कुछ दिन पहले ही उनका कार्यकाल खत्म हुआ था। नदीमुल हक़ भी पहले से तृणमूल से ही राज्यसभा सांसद हैं।

ममता ठाकुर को मतुआ समुदाय ‘माँ’ के रूप में मानता है। वो 2019 में बनगाँव लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं, लेकिन भाजपा के शांतनु ठाकुर ने उन्हें शिकस्त दे दी थी। जहाँ तक बात सागरिका घोष की है, वो पत्रकार हैं और उनके पति राजदीप सरदेसाई भी पत्रकार हैं। राजदीप सरदेसाई को अक्सर सोशल मीडिया और ‘इंडिया टुडे’ न्यूज़ चैनल के माध्यम से भाजपा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध प्रोपेगंडा के लिए जाना जाता है। दोनों पति-पत्नी इस मामले में समान राय रखते हैं।

राजदीप सरदेसाई को ‘रसगुल्ला पत्रकारिता’ के लिए भी जाना जाता है, जिसका इनाम शायद उन्हें पत्नी की राज्यसभा सांसदी के रूप में मिला है। राजदीप ने एक प्रश्न के उत्तर में स्वीकार किया था कि अगर वे ममता बनर्जी से उनके राज्य में हो रही हिंसा पर कठिन प्रश्न पूछते तो उन्हें रसगुल्ले नहीं मिलते। पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को लेकर राजदीप सरदेसाई ने सीएम ममता बनर्जी से कोई सवाल नहीं पूछा था, क्योंकि वो ‘चाय पर चर्चा’ के लिए गए थे और सवाल पूछने पर उन्हें रसगुल्ले नहीं मिलते।

ये वही सागरिका घोष हैं, जिन्होंने बेहद सुविधाजनक तरीके से ग्रूमिंग जिहाद के ज़रिए होने वाले जबरन धर्मांतरण के ख़तरे को, हिन्दू परिवारों और मुस्लिम दामादों के बीच बतौर ‘मानसिक उन्माद’ तोड़-मरोड़ कर रख दिया था। सागारिका घोष जघन्य अपराध के पीड़ितों को चुप कराते हुए पीड़ित को ही दोष देने लगी थीं। उनका मानना था कि उन महिलाओं की आपबीती जिन्हें इस तरह के भयावह हालातों का सामना करना पड़ता है, यह ‘मुस्लिम दामादों’ के प्रति मानसिक उन्माद का नतीजा है।

किसान आंदोलन को लेकर दिल्ली पुलिस सतर्क: सीलमपुर सहित कई इलाकों में धारा 144 लागू, बॉर्डर पर बैरिकेंडिग

न्यूनतम समर्थन मूल्य की माँग को लेकर किसानों द्वारा मंगलवार (13 फरवरी 2024) को दिल्ली मार्च को देखते हुए सुरक्षा को पुख्ता कर दिया गया है। दूसरे राज्यों से लगने वाली सीमा पर हर तरह की सुरक्षा तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इसके अलावा, पूर्वी दिल्ली और सीलमपुर एरिया में अगले एक महीने तक जमावड़े पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

मार्च में हिस्सा लेने के लिए 2,000-2,500 ट्रैक्टरों पर 15,000 से 20,000 किसान दिल्ली पहुँच सकते हैं। मार्च को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली-नोएडा सीमा पर हेवी-ड्यूटी बुलडोजर, बैकहो मशीन, दंगा नियंत्रण वाहन और वॉटर कैनन पार्क किए हैं।

पुलिस का कहना है कि किसी भी तरह की अपरिहार्य घटना केस निपटने के लिए और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते CrPC की धारा 144 लागू कर दिया गया है। पुलिस का यह भी कहना है कि जान और संपत्तियों को नुकसान से बचाने के लिए जैसा करना जरूरी है। वहीें, दिल्ली के टिकरी बॉर्डर और सिंघू बॉर्डर पर भी सुरक्षा को चाक-चौबंद कर दी गई है।

किसानों के आंदोलन को लेकर एक खुफिया रिपोर्ट भी सामने आई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस आंदोलन के लिए कई महीने पहले से ही तैयारी शुरू हो चुकी थी। कुछ किसान गुपचुप तरीके से प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, कृषि मंत्री और भाजपा के अन्य बड़े नेताओं के घर के बाहर डेरा डाल सकते हैं। दिल्ली में घुसने के लिए वे बच्चों और महिलाओं को आगे कर सकते हैं।

इतना ही नहीं, ट्रैक्टर मार्च निकालने के लिए कथित किसान 40 रिहर्सल कर चुके हैं। इनमें पंजाब में 30 रिहर्सल और हरियाणा में 10 किए गए हैं। सिर्फ पंजाब के गुरुरदासपुर में ही 15 रिहर्सल किए गए हैं। वहीं, किसान संगठन 100 से अधिक मीटिंग भी कर चुका है। खुफिया रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि दिल्ली के आसपास के राज्यों के ये कथित किसान कार, बाइक, रेल, बस मेट्रो आदि से दिल्ली में घुस सकते हैं।

इंटेलिजेंस रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि अगर किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर रोका गया तो वहाँ 2 हजार से 25 हजार ट्रैक्टर एवं ट्रॉलियों के साथ 25 हजार तक प्रदर्शनकारी किसान जमा हो सकते हैं। इसके साथ ही यह भी आशंका जताई गई है कि इस दौरान पुलिस पर हमले और आगजनी भी हो सकती है। फेंसिंग, कंटेनर और क्रेन के साथ सुरक्षाबलों ने इसके लिए तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।

पिछले आंदोलनों से सबक लेते हुए पुलिस प्रशासन इन किसानों को दिल्ली में पहुँचने से रोकने के लिए तैयारियाँ शुरू कर चुका है। दिल्ली की सीमाओं पर रास्ते को रोकने के लिए बड़े-बड़े ब्रेकर लगाए गए हैं। इसके अलावा, सड़कों पर लोहे की कील वाले चादर बिछाए गए हैं, ताकि जब किसान राजधानी में घुसने की कोशिश करें तो उन्हें रोका जा सके। वहीं, हरियाणा के सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई है।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा है, “एक तरफ तो सरकार हमें बातचीत का न्योता दे रही है और दूसरी तरफ हरियाणा में हमें डराने की कोशिश की जा रही है। बॉर्डर सील किए जा रहे हैं। धारा 144 लगा दी गई है। इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। ऐसे माहौल में बातचीत नहीं हो सकती है। सरकार इस तरफ तुरंत ध्यान दे।” दरअसल, हरियाणा के 13 जिलों में धारा 144 लागू की गई है।

दरअसल, तीन केंद्रीय मंत्री किसान नेताओं की माँगों पर विचार करने के लिए सोमवार (12 फरवरी 2024) को उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि पीयूष गोयल, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने के लिए 12 फरवरी को चंडीगढ़ पहुँचेंगे।

बता दें कि हरियाणा पुलिस ने राज्य में 152 से ज्यादा जगहों पर वाहनों की जाँच के लिए चेकिंग प्वॉइंट स्थापित किए हैं। टीकरी और सिंघु बॉर्डर सहित कई स्थानों पर ड्रोन से निगरानी की जा रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने देश के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर उन्हें किसान संगठनों के दिल्ली कूच के बारे में जानकारी दी है।

‘घर में घुस कर महिलाओं को पीट रही पुलिस’: सोशल मीडिया पर दावे के उलट ग्राउंड की सच्चाई, जहाँ से चले पत्थर उन्हीं इलाके में दूध-दवाई बाँट रहे पुलिस वाले

उत्तराखंड के हल्द्वानी में अवैध कब्ज़ा कर के बनाए गए मदरसे और मस्जिद को हटाने के लिए प्रशासन पहुँचा तो बवाल हो गया। इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने थाना और पेट्रोल पंप फूँक दिया। पुलिस वालों को ज़िंदा जलाने की कोशिश की गई। कई वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए गए। चश्मदीदों का कहना है कि छतों पर पानी की टंकी में पत्थर जमा कर के रखे गए थे। वहीं अब एक गिरोह विशेष द्वारा सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है कि पुलिस ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया है।

नेहा दीक्षित नाम की तथाकथित पत्रकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक नोट जारी कर के दावा किया कि हल्द्वानी में पुलिस हिंसक हो गई है। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड पुलिस लोगों के घरों में घुस कर उन्हें पीट रही है। महिलाओं को निशाना बनाए जाने के आरोप भी लगाए गए। नेहा दीक्षित ने तो यहाँ तक दावा कर दिया कि पुलिस के डर से बनभूलपुरा के मुस्लिमों ने पलायन कर के जंगल में शरण लेना शुरू कर दिया है। दावा किया गया कि कई घरों में बच्चों के पीने के लिए दूध तक नहीं है।

लेकिन, ग्राउंड पर स्थिति इसके एकदम उलट है। वीडियो में देखा जा सकता है कि खुद पुलिस के अधिकारी कर्फ्यू वाले इलाकों में दूध और खाने-पीने की वस्तुएँ वितरित कर रहे हैं। ये वही इलाके जहाँ, इसी पुलिस को निशाना बनाया गया था। छतों से पत्थर चले थे। कर्फ्यू वाले इलाकों में एम्बुलेंस भेजी गई हैं, दवाएँ भेजी गई हैं। इसके अलावा डॉक्टरों को भी तैनात किया गया है। वीडियो में देखा जा सकता है कैसे पुलिस मुस्लिमों को मदद सामग्रियाँ बाँट रही है।

वहीं नैनीताल पुलिस ने भी बयान जारी कर के चेताया है कि अफवाह फैला कर माहौल ख़राब न किया जाए। महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने की खबरों को लेकर नैनीताल पुलिस ने कहा कि ये भ्रामक हैं और इनके माध्यम से अनावश्यक रूप से समाज में संवेदनशीलता पैदा की जा रही है। इस पोस्ट में स्पष्ट किया गया है कि पुलिस ने महिलाओं के साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया है। नियमानुसार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने अनुरोध किया है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरें न पोस्ट करें, न कमेंट करें। बता दें कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक गिरफ्तार कर लिया गया है। क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस व सुरक्षा एजेंसियाँ अब दंगाइयों की धर-पकड़ में लग गई है। बनभूलपुरा में 5 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें एक समाजवादी पार्टी के एक नेता का भाई है, 2 निवर्तमान पार्षद हैं और एक खनन कारोबारी भी शामिल है। इस हिंसा के मुख्य साजिशकर्ताओं में एक अब्दुल मलिक का नाम सामने आया, जिसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है

झूठ बोलकर मुल्ला इमरान और अब्दुल ने दीपिका को भेजा ओमान, बंधक बनाकर करते थे पिटाई: भारत सरकार के प्रयासों से लौटीं वापस

मानव तस्करों को जाल में उलझकर ओमान पहुँची और वहाँ आठ महीने तक बंधक बनाकर रखी गई 29 साल की दीपिका जोगी आखिरकार भारत लौट आई हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें बुजुर्ग महिला का खाना पकाने के काम के लिए भेजा गया था, लेकिन वहाँ उनसे घर का कामकाज कराया जाता था। इसके साथ ही उनसे मारपीट भी की जाती थी।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित भिलाई की रहने वाली दीपिका जोगी ने बताया कि आर्थिक समस्याओं की वजह से उन्हें काम के लिए विदेश जाना पड़ा था। हालाँकि, काम के लिए विदेश जाने की घटना को उन्होंने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल बताया। दीपिका ने कहा हाउस मेड की नौकरी के लिए वह केरल की एक प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए मई 2023 में ओमान पहुँची थी।

खुर्सीपार निवासी मुल्ला मोहम्मद इमरान खान और हैदराबाद निवासी अब्दुल ने दीपिका से खाना बनाने का काम दिलाने की बात कही थी। इसके बाद मानव तस्करों उन्हें दुर्ग से हैदराबाद ले गए। वहाँ से दीपिका को मस्कट भेज दिया गया। मस्कट एयरपोर्ट से दीपिका को हफीजा के घर जैनब नाम की महिला लेकर गई। इसके बाद दीपिका को वहाँ बंधक बना लिया गया।

दीपिका ने बताया कि दलाल अब्दुल ने उन्हें बताया था कि जहाँ उन्हें भेजा जा रहा है कि वहाँ एक बूढ़ी महिला की सेवा करनी और परिवार के लिए खाना बनाना है। परिवार बेहद छोटा है। दीपिका का कहना कि जब वहाँ गईं तो देखा कि उस बुजुर्ग महिला के नौ बेटे थे और सभी बेटे के तीन से चार बच्चे थे। इस तरह उस घर में कुल लगभग 50 लोग थे।

पति और दो बच्चों को छोड़कर ओमान जाने वाली दीपिका का यह भी कहना है कि वह उस घर में काम करने वाली अकेली महिला थी। उनसे घर की साफ-सफाई कराई से लेकर हर का काम कराया जाता था। जब वह काम करने से मना करती थीं तो उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा जाता था। इसकी शिकायत उन्होंने परिवार के मुखिया और हैदराबाद के दलाल अब्दुल्ला को फोन करके दी।

दीपिका की बात सुनकर अब्दुल्ला उन्हें धमकी देने लगा। बकौल दीपिका, अब्दुल ने कहा कि ‘जो करना है कर लो। अब तो तुम्हें वहीं रहना होगा।’ दीपिका का कहना कि वह भाग्यशाली हैं जो वहाँ से निकल आईं। उन्होंने कहा कि वहाँ कई महिलाएँ हैं जो वर्षों से फँसी हैं। आशंका है कि ये इन सब महिलाओं को भी झूठ बोलकर भेजा गया होगा।

जब ओमान में दीपिका के लिए निकलना मुश्किल हो गया तो किसी तरह से उन्होंने मोबाइल फोन के जरिए वीडियो बनाकर अपने पति को भेजा और मदद की गुहार लगाई। इसके बाद दीपिका के पति ने अपने विधायक रिकेश सेन से मदद मदद माँगी। इसके बाद रिकेश सेन ने केंद्र और राज्य सरकार को इसकी जानकारी दी और गृहमंत्री को भी इसके बारे में बताया। साथ महिला को उन्होंने हिम्मत बढ़ाई।

दीपिका ने कहा, “विधायक जी मुझसे कहा कि तुम वहाँ से किसी तरह भारतीय दूतावास आ जाओ। हम तुम्हें निकाल लेंगे। मैं एंबेसी में एक सप्ताह रही। इसके बाद दूतावास ने ओमान से दिल्ली तक टिकट करवाकर मुझे भेजा। दिल्ली से रायपुर तक विधायक जी ने टिकट करवाया।” दीपिका शुक्रवार (9 फरवरी 2024) को घर पहुँची और वहाँ उनका खूब स्वागत हुआ।

उम्र – 8 साल और 10 साल, अपराध – 5 साल की बच्ची का गैंगरेप: स्कूल में पॉर्न फिल्म देखने के बाद वारदात को दिया अंजाम, पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में सूजन

उत्तर प्रदेश के गोंडा में अश्लील फिल्म देखने के बाद 2 बच्चों ने मिल कर एक बच्ची का सामूहिक बलात्कार किया। वारदात को अंजाम देने वाले बच्चों की उम्र मात्र 8 साल और 10 साल है। घटना एक प्राइवेट स्कूल में हुई, जहाँ ये बच्चे पढ़ाई करते थे। उन दोनों ने पढ़ाई करने की जगह मोबाइल पर अश्लील फिल्म देखनी शुरू कर दी। इसके बाद लंच ब्रेक के दौरान उन्होंने अपने साथ पढ़ने वाली एक बच्ची को ही शिकार बनाया। यूपी पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है।

स्थानीय SP ने जानकारी दी है कि घर पहुँचने के बाद बच्ची ने अपने परिजनों को बताया कि उसके साथ क्या हुआ है। जब परिजन उसे लेकर स्कूल पहुँचे तो स्कूल प्रबंधन ने उनकी एक न सुनी और उन्हें वहाँ से भगा दिया। स्कूल प्रशासन का कहना था कि विद्यालय को बदनाम करने के लिए झूठा आरोप लगाया जा रहा है। इसके बाद परिजन थाने पहुँचे और वहाँ शिकायत दी। इस आधार पर पुलिस ने केस भी दर्ज कर लिया। शनिवार (10 फरवरी, 2024) को लड़की का मेडिकल टेस्ट कराया गया।

पुलिस ने इस घटना में शामिल दोनों आरोपित नाबालिगों को पकड़ लिया है। उन्हें बाल सुधार गृह में भेजा जाएगा। पुलिस का कहना है कि दोनों ने इस अपराध को कबूल भी कर लिया है। नाबालिगों ने बताया है कि पॉर्न फ़िल्में देख कर उन्होंने ऐसा किया। बच्ची को स्कूल के पीछे ले जाकर उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया था। घटना के बाद वो दोनों घर चले गए थे। वहाँ वो डरे-सहमे घर में छिपे हुए थे। पीड़िता ने उन दोनों की पहचान भी कर ली है। बच्ची के प्राइवेट पार्ट में सूजन आ गई थी, कपड़े बदलते वक्त माँ को इसका पता चला

दोनों बच्चों को बाल सुधार गृह में भेजे जाने से पहले जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया। बच्ची की उम्र मात्र 5 साल बताई जा रही है। उत्तर प्रदेश के कासगंज से एक ऐसा ही मामला सामने आया था जहाँ एक नाबालिग लड़के ने अपनी बहन को ही हवस का शिकार बना लिया। फिर उसने वारदात के खुलासे के डर से लड़की को मार भी डाला। आजकल कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं, जहाँ पॉर्न फ़िल्में देख कर बच्चों ने किसी नाबालिग लड़की को हवस का शिकार बनाया।