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अल जजीरा का पत्रकार निकला हमास का टॉप कमांडर, जंग में भी होता है शामिल: लैपटॉप से खुले राज, इजरायल बोला- पत्रकारिता की आड़ में आतंक

इजरायल और हमास के बीच चल रही जंग के मध्य इजरायल की डिफेंस फोर्स ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया है कि कैसे पत्रकारिता की आड़ में आतंक का खेल चल रहा है। उन्होंने दावा किया रहै कि अल जजीरा का मोहम्मद वाशाह नाम का पत्रकार हमास का सीनियर कमांडर है।

इजरायल डिफेंस फोर्स ने कहा है कि कुछ हफ्ते पहले गाजा में एक ऑपरेशन के दौरान उन्होंने मोहम्मद वाशाह का लैपटॉप बरामद किया था। इस लैपटॉप की तलाशी के दौरान उन्हें कुछ तस्वीरें मिलीं। ये तस्वीरें बताती है कि वो हमास का कमांडर है और उनकी ओर से जंग में कई बार शामिल हो चुका है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आईडीएफ के प्रवक्ता (अरबी भाषा) लेफ्टिनेंट कर्नल अविचाई अद्रे ने बताया कि वाशाह के खिलाफ लारे सबूत उसके लैपटॉप से ही मिले हैं। उसकी पहचान बताते हुए आईडीएफ प्रवक्ता ने कहा कि वो अल जजीरा के ब्रॉडकॉस्ट में भी नजर आ चुका है। वो अल जजीरा का पत्रकार है।

उन्होंने इस पूरे दावे के साथ ये भी बताया कि कैसे उन्होंने वाशाह का लैपटॉप बरामद किया था। उन्होंने बताया कि कुछ हफ्ते पहले उत्तरी गाजा में हमास के एक कैंप में उनकी फोर्स ने ऑपरेशन को अंजाम दिया था। यहीं से उन्हें वाशाह का लैपटॉप मिली। छानबीन हुई तो जानकारी मिली कि हमास की टैंक रोधी मिसाइल यूनिट में वाशाह टॉप कमांडर था।

उन्होंने ये भी बताया कि 2022 के अंत में ही वाशाह ने हमास की एयर यूनिट के लिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट का काम शुरू किया था। पड़ताल में पता चला कि उसके हमास के साथ सीधे लिंक मिले हैं। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि पत्रकारिता की आड़ में और भी आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा हो।

IDF ने इस खुलासे के बाद अल जजीरा के लिए लिखा- “अरे अल जजीरा हमें लगता है कि आपके पत्रकारों को सारे हालातों पर निष्पक्ष रिपोर्टिंग देनी चाहिए, न कि उन्हें हमास की तरह आगे खड़े होकर जंग लड़ना चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि ये पहली बार नहीं है कि इजरायल ने किसी पत्रकार का कनेक्शन हमास या फिलीस्तीन के आतंकी संगठन से जोड़कर बताया हो। इससे पहले भी अल जजीरा के 2 पत्रकार, जो इजरायली एयरस्ट्राइक में मारे गए थे, उन्हें लेकर इजरायल की डिफेंस फोर्स ने दावा किया था कि उनका कनेक्शन हमास और फिलीस्तीन इस्लामिक जिहाद जैसे आतंकी संगठन से था।

हल्द्वानी में जिस जगह पर था मस्जिद-मदरसा, अब वहाँ 24 घंटे रहेगी पुलिस: सीएम धामी ने किया पुलिस थाना बनाने का ऐलान

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐलान किया है कि हल्द्वानी के बनभूलपुर थाना इलाके की जिस अवैध मस्जिद-मदरसे को गिराने के बाद हिंसा फैली थी, वहाँ अब हमेशा के लिए पुलिस की तैनाती रहेगी। मुख्यमंत्री धामी ने ऐलान किया है कि मस्जिद-मदरसे की जो जगह समतल की गई है, उस जगह पर अब पुलिस थाना बनाया जाएगा। ऐसे में उस जगह पर फिर से अवैध कब्जा करने का कोई मौका नहीं मिलेगा।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “बनभूलपुरा, हल्द्वानी में जिस जगह से अवैध अतिक्रमण हटाया गया, वहाँ पर अब पुलिस थाने का निर्माण किया जाएगा। उपद्रवियों और दंगाइयों के लिए हमारी सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि देवभूमि की शांति से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा, ऐसे उपद्रियों के लिए उत्तराखण्ड में कोई स्थान नहीं है।”

बता दें कि हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को एक अवैध मस्जिद हटाने की प्रक्रिया के दौरान इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिस पर हमला किया था। पहले इस भीड़ ने पुलिस पर छतों से पत्थर फेंके थे, उसके बाद यह लोग पेट्रोल बम आदि लेकर सड़कों पर उतर आए थे। दंगाई भीड़ के पास असलहे भी थे। इन्होंने पुलिसकर्मियों को मारने और जलाने की कोशिश की थी।

इसके अलावा थाने पर हमला करके उसे भी लूटा था। दंगाई भीड़ पर काबू पाने के बाद पुलिस ने इन पर कार्रवाई शुरू की तो अब तक इस मामले में 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। पूरे प्रकरण में 3 एफआईआर दर्ज हुई हैं। सीसीटीवी आदि के माध्यम से बाकी आरोपितों को पकड़ने का प्रयास भी हो रहा है।

बंगाल के संदेशखली में TMC नेता शाहजहाँ के खौफ से दहशत में महिलाएँ, पतियों की हत्या का डर: मिलने जा रहे थे राज्यपाल तो भीड़ ने रोका

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के शासन वाली पश्चिम बंगाल से एक से बढ़कर एक खौफनाक कहानियाँ सामने आ रही हैं। संदेशखली में महिलाओं को जबरन उठा ले जाने और तब तक बलात्कार करने ‘जब तक की मन भर जाता’ वाली घटना किसी अफगानिस्तान या सीरिया में नहीं, बल्कि इसी बंगाल में हो रही है। इस तरह का आरोप लगाने वाली कई महिलाओं के वीडियो सामने आए हैं।

संदेशखली की महिलाओं ने आरोप है कि टीएमसी का नेता और स्थानीय गुंडा शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गे महिलाओं को जबरन अपने साथ उठा ले जाते हैं। इसके लिए उसके गुर्गे आते हैं रेकी करते हैं। जो महिला या लड़की, भले ही नाबालिग ही क्यों ना हो, उन्हें सुंदर दिखती है, उसे उठा ले जाते हैं। शाहजहाँ एक क्रिमिनल पर जिसकी खोज केंद्रीय एजेंसियों को भी है। इसको लेकर संदेशखली में तनाव है।

तनाव को देखते पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस सोमवार (13 फरवरी 2024) को संदेशखली के लिए निकले, लेकिन टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले को बीच में ही रोक दिया। वहीं, बंगाल पुलिस ने मीडिया कर्मियों को भी संदेशखली जाने से रोक दिया है। संदेशखली की घटना को लेकर भाजपा के नेता भी घटनास्थल पर जाने की तैयारी में है। वहीं, वामपंथी पार्टियों ने बंद का अह्वान किया है।

संदेशखली में महिलाओं को TMC के नेताओं द्वारा उठा कर जाने के संबंध में वायरल वीडियो में महिला कह रही है, “पार्टी (तृणमूल) के लोग आते थे और एक घर का सर्वेक्षण करते थे, जिसमें एक सुंदर पत्नी होती है, जिसकी लड़की जवान होती है। फिर वे महिलाओं को पार्टी कार्यालय में ले जाते हैं… रात-रात भर उन्हें वहीं रखा जाता… जब तक वे नहीं हो जाते।” इसका मुख्य अपराधी स्थानीय जिला परिषद सदस्य शाहजहाँ शेख को बताया है।

दरअसल, संदेशखली पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में स्थित है। यह सुंदरबन क्षेत्र में एक द्वीप है, जो बांग्लादेश सीमा के करीब है। संदेखली में केवल नाव द्वारा ही पहुँचा जा सकता है। वहाँ की महिलाओं का कहना है कि अगर वे शाहजहाँ शेख के गुर्गों द्वारा उठा ले जाने का विरोध करती हैं तो उनके पति या बेटे या अन्य परिजनों को मार दिया जाता है। इसलिए विवश होकर उन्हें जाना पड़ता है।

इसको लेकर स्थानीय महिलाओं ने लाठी और डंडे लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया था। इस तनाव को देखते हुए राज्य सरकार ने वहाँ धारा 144 लागू कर दी है। इस तरह महिलाओं के प्रदर्शन को भी राज्य सरकार द्वारा कुचलने की कोशिश की गई है। चार से अधिक लोगों को एक साथ जमा होने पर रोक लगा दी गई है। मीडिया को भी वहाँ जाने की इजाजत नहीं है।

एक महिला ने एक वीडियो में कहा, “यहाँ कोई पति हो सकता है, लेकिन उसका पत्नी पर अधिकार नहीं है। उसे अपनी पत्नी को भेजना ही होगा।” कनिका दास नाम की एक महिला ने कहा, “वे हमारे साथ दुर्व्यवहार करते हैं। यहाँ की महिलाएँ सुरक्षित नहीं रह सकतीं। हम महिलाएँ बाहर जाने से डरती हैं। हम सुरक्षा चाहते हैं।”

आजतक बांग्ला को संदेशखली की स्थानीय महिला कनिका दास ने आगे बताया, “मेरे पति एक बैंक सीएसपी (गाँवों में माइक्रोपेमेंट कियोस्क) चलाते हैं। उन्होंने इशारा किया था कि नेताओं की नजर उकने सारे पैसों पर है। वे मुझसे कहते हैं कि वे लंबे समय तक जीवित नहीं रह पाएँगे।” बता दें कि जब शाहजहाँ शेख के घर पर रेड के लिए 5 जनवरी को ED की टीम पहुँची थी, तब उस पर हमला किया गया था। इसमें चार अधिकारी घायल हो गए थे।

इन सब घटनाओं के सामने आने के बाद राज्य महिला आयोग की प्रमुख लीना गंगोपाध्याय संदेशखली पहुँची हैं, लेकिन मीडिया को वहाँ पहुँचने नहीं दिया जा रहा है। वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि शाहजहाँ द्वारा हिंदू महिलाओं को बंधक बनाकर रेप करने की घटनाएँ परेशान करने वाली हैं। आयोग ने बंगाल के डीजीपी को इसको लेकर एक पत्र लिखा है और विस्तृत जाँच की रिपोर्ट 24 घंटे में माँगा है।

मुस्लिम मुल्क में पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन कर कतर जाएँगे PM मोदी, पूर्व नौसैनिकों की रिहाई के बाद MEA ने दी जानकारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 फरवरी 2024 को कतर जाएँगे। उनकी यात्रा को लेकर यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब कतर ने फाँसी की सजा पाए पूर्व भारतीय नौसैनिकों को रिहा कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार अबू धाबी से पीएम कतर रवाना होंगे। पीएम का संयुक्त अरब अमीरात दौरा 13 फरवरी से शुरू हो रहा है। वे इस इस्लामी मुल्क में पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन करेंगे।

भारत के विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने सोमवार (12 फरवरी 2024) को मीडिया से बात करते हुए कहा कि 14 फरवरी की दोपहर अपनी यूएई यात्रा पूरी कर प्रधानमंत्री कतर के दोहा के लिए रवाना हो जाएँगे। इस दौरान वे कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। क्वात्रा ने बताया कि यह पीएम मोदी की दूसरी कतर यात्रा होगी। इससे पहले वे जून 2016 में कतर की यात्रा पर गए थे। विदेश सचिव ने पीएम मोदी की इस यात्रा के बाद भारत और कतर के बीच विभिन्न स्तरों पर हुई बातचीत, द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती और दोनों देशों के बीच बढ़ते कारोबारी संबंधों का भी जिक्र किया।

कतर के लिए रवाना होने से पहले PM मोदी अबू धाबी में 14 फरवरी को स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन करेंगे। अपने दो दिवसीय दौरे पर वे UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे। बता दें कि पिछले 8 महीने में पीएम मोदी की UAE की यह तीसरी यात्रा है। स्वामीनारायण मंदिर के उद्घाटन के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 फरवरी 2024 को ‘अहलान मोदी’ कार्यक्रम में भारतीय प्रवासियों को भी संबोधित करेंगे।

गौरतलब है कि कतर में 8 भारतीयों को मौत की सजा के मामले में भारत सरकार को बड़ी राजनयिक जीत मिली है। फाँसी की सजा पाने वाले नौसेना के सभी 8 पूर्व अधिकारियों को रिहा कर दिया गया है। इनमें से 7 भारत वापस आ चुके हैं। कुछ समय पहले ही इनकी फाँसी की सजा पर कतर की अदालत ने रोक लगाई थी। अब कतर के अमीर के हस्तक्षेप के बाद सभी 8 लोगों को जेल से आजादी मिल गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कतर के अमीर के इस फैसले पर खुशी जताई है।

अयोध्या जा रही ‘आस्था स्पेशल’ ट्रेन पर पथराव, रामलला के दर्शन करने जा रहे थे श्रद्धालु: ऑपइंडिया से पीड़ित रामभक्तों ने बताई आपबीती

गुजरात के सूरत से अयोध्या जा रही विशेष ‘आस्था एक्सप्रेस’ ट्रेन पर पत्थरबाजी की गई। इस घटना में ट्रेन के कई शीशे टूट गए और यात्रियों में दहशत भर गई। ये वारदात नंदुरबार स्टेशन पर पथराव की घटना हुई। इस घटना से ट्रेन में सवार यात्रियों में दहशत का माहौल पैदा हो गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार (11 फरवरी 2024) की रात करीब 8 बजे विशेष आस्था स्पेशल ट्रेन सूरत से रवाना हुई थी। इस ट्रेन में 1344 यात्री सवार थे। ये ट्रेन नंदुरबार स्टेशन पहुँची ही थी, कि इस पर पत्थर बरसने लगे। इस घटना से यात्रियों में दहशत फैल गई। कई पत्थर ट्रेन के अंदर आकर गिरे। हालाँकि गनीमत ये रही कि कोई यात्री घायल नहीं हुआ। घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुँची जीआरपी और आरपीएफ ने शुरुआती जाँच के बाद ट्रेन को रवाना किया। वहीं इस मामले की जाँच में पुलिस भी जुट गई है।

ऑपइंडिया की गुजराती भाषा सेवा ने घटना की जानकारी लेने के लिए विश्व हिंदू परिषद के सूरत मंडल मंत्री और ट्रेन यात्रा प्रभारी नीलेश अकबरी से बात की। उन्होंने हमें बताया, “ट्रेन सूरत से अयोध्या के लिए रवाना हुई और करीब साढ़े नौ बजे नंदुरबार स्टेशन पहुँची। नंदुरबार से आधा किलोमीटर पहले तीन डिब्बों एस7, एस11 और एस12 पर पथराव किया गया। जिसमें से S7 पर फेंका गया पत्थर कोच में गिरा।”

नीलेश अकबरी ने आगे कहा, ”जैसे ही ट्रेन नंदुरबार पहुँचकर रुकी, हमने आरपीएफ को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और उस जगह की जाँच की, जहाँ पत्थर आया था। ट्रेन को कुछ देर के लिए वहाँ रुकना पड़ा और बाद में रवाना किया गया। इस घटना में कोई भी घायल नहीं हुआ। ऐसा लगता है कि अंधेरे का फायदा उठाकर पत्थरबाजी की गई थी।”

जिस ट्रेन पर पथराव हुआ, उसमें कितने यात्री हैं और कौन-कौन अयोध्या में यात्रा कर रहे हैं, इसके जवाब में अकबरी ने कहा, ‘फिलहाल इस ट्रेन में कुल 1344 राम भक्त यात्रा कर रहे हैं। ये सभी लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल समेत कई हिंदू संगठनों से जुड़े हैं। फिलहाल यात्रा शांतिपूर्वक चल रही है। हम आज (12 फरवरी 2024) को करीब रात 9 बजे अयोध्या पहुँचेंगे।”

बता दें कि सूरत से अयोध्या जा रही विशेष ‘आस्था एक्सप्रेस’ ट्रेन को राम भक्तों के लिए चलाई गई है। ऐसी कई स्पेशल ट्रेनों को देश के अलग-अलग हिस्सों से चलाया जा रहा है, जो अयोध्या जाएगी और लोगों को भगवान राम के दर्शन के बाद वापस भी लाएगी। चूँकि 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अयोध्या जाने वाले लोगों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है, ऐसे में भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधाओं को देखते हुए आस्था स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया है। ये ट्रेन 22 जनवरी से शुरू हुई थी और अगले कुछ महीनों तक चलने वाली है।

गुजरात से 6 फरवरी 2024 को पहली आस्था स्पेशल को हरी झंडी दिखाई गई थी। गुजरात के मेहसाणा में गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री मुकेश पटेल, स्थानीय विधायक और अन्य बीजेपी नेताओं ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी।

129 विधायकों के समर्थन के साथ नीतीश सरकार ने जीता विश्वासमत, विपक्ष का विधानसभा से वॉकआउट: बोले बिहार CM – हम पुरानी जगह वापस आ गए हैं

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विश्वासमत हासिल कर लिया है। उन्होंने राजद का दामन छोड़ कर हाल ही में भाजपा का हाथ थामा था, जिसके बाद उन्हें 9वीं बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेनी पड़ी थी। इसके बाद नई गठबंधन सरकार को विश्वासमत हासिल करना था। राजद के विधायकों चेतन आनंद और नीलम देवी ने जदयू-भाजपा गठबंधन को वोट दिया। सत्ताधारी गठबंधन में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी की HAM भी शामिल है।

129 विधायकों ने जहाँ नीतीश कुमार के पक्ष में मतदान किया, वहीं विपक्षी दलों ने सदन के वॉकआउट का रास्ता चुना। इस तरह अब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। उससे पहले मुख्यमंत्री ने सदन में संबोधन देते हुए कहा कि को 2015 में ‘7 निश्चय’ लेकर आए थे, जो पूरा का पूरा उनका आईडिया ही था। उन्होंने कहा कि जब वो सत्ता में आए तब उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम का झगड़ा बंद कराया। उन्होंने 2005 से पहले के इतिहास का बात करते हुए कहा कि उस समय के मामलों में भी कार्रवाई उनके सत्ता में आने के बाद ही शुरू हुई।

नीतीश कुमार ने कहा कि हम बिहार के विकास के लिए, लोगों के हित में काम करते रहेंगे। उन्होंने तेजस्वी यादव के आवास में राजद विधायकों को रखे जाने के संबंध में कहा कि पैसा कहाँ से आया, इसकी जाँच करवाई जाएगी। नीतीश कुमार ने कहा कि अब वो अपनी पुरानी जगह वापस आ गए हैं। फ्लोर टेस्ट से पहले स्पीकर अवध बिहारी चौधरी को हटाने के लिए मतदान हुआ। उप-मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने भी जिक्र किया कि कैसे लालू परिवार ने जमीन लेकर नौकरियाँ दी।

नीतीश कुमार ने राजद के एक अन्य विधायक प्रह्लाद यादव को भी तोड़ दिया। वो भी आनंद मोहन के बेटे चेतन और अनंत सिंह की पत्नी नीलम के साथ सत्ताधारी पक्ष वाली बेंच पर बैठे नज़र आए। जहाँ चेतन आनंद राजपूत समाज से आते हैं, अनंत सिंह भूमिहार बिरादरी और प्रह्लाद यादव बिहार के बहुसंख्यक OBC यादव समाज से आते हैं जो राजद समीकरण का वोट बैंक रहा है। चेतन आनंद ने फेसबुक पर लिखा भी, ‘ठाकुर के कुएँ में पानी बहुत है, सबको पिलाना है।” बता दें कि राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने संसद में ‘ठाकुर का कुआँ’ कविता पढ़ कर विवाद पैदा कर दिया था।

माइक से मारा हाथ पर, फोन छीन दूर फेंका: सिंगर आदित्य नारायण ने कॉन्सर्ट में की फैन से बदसलूकी, Video देख लोग कह रहे- घमंडी

बॉलीवुड सिंगर और टीवी होस्ट आदित्य नारायण की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस वीडियो में आदित्य नारायण अपने ही कॉन्सर्ट में एक फैन को माइक से मार रहे हैं और उसका फोन फेंकते दिखाई दे रहे है। आदित्य नारायण का ऐसा बर्ताव देख लोग उनसे नाराज हैं। उन्हें समझाया जा रहा है कि जिन फैन्स की वो इज्जत नहीं कर रहे, आज उन्हीं के वजह से उनको पूछा जाता है।

घटना छत्तीसगढ़ के भिलाई की है। वहाँ कॉलेज इवेंट में आदित्य नारायण का कॉन्सर्ट रखा गया था। आदित्य स्टेज पर ‘डॉन’ फिल्म का गाना ‘आज की रात होना है क्या’ गाना गा रहे थे और उनके फैन्स नीचे खड़े हो उसे एन्जॉय कर रहे थे। साथ ही उनकी वीडियो बना रहे थे। इसी दौरान न जाने आदित्य नारायण को क्या हुआ कि वो स्टेज के किनारे पर आए। एक फैन को माइक से मारा और उसके बाद उसका मोबाइल छीनकर उसे दूर फेंक दिया।

आदित्या का यह रवैया कॉन्सर्ट में शामिल लोगों को बिलकुल समझ नहीं आया। वहीं जब वीडियो सोशल मीडिया पर डाली गई तो अलग अलग रिएक्शन आने लगे। कुछ यूजर्स ने कहा कि आदित्य नारायण के पिता बहुत दयालु हैं, लेकिन इनका व्यवहार बिलकुल अलग है।

एक यूजर ने कहा कि ऐसे मामलों में तो पर्सनल प्रॉपर्टी को क्षति पहुँचाने मामले में एफआईआर हुई है। ऐसे गैर जिम्मेदाराना बर्तावों के लिए कानून है।

यूजर्स पूछ रहे हैं कि आदित्य नारायण की उपलब्धियाँ आखिर हैं क्या तो वो इतना घमंड से पब्लिक प्लेस पर बात करते हैं। लोग उन्हें घमंडी, बद्तमीज आदित कह रहे हैं।

आदित्य नारायण के लिए किए जा रहे कमेंट

लोगों का कहना है कि जिस बच्चे का फोन उठाकर फेंका है उसने या उसके माता-पिता ने भी मेहनत से कमाकर वो फोन लिया होगा। लेकिन आदित्य नारायण ने अपने गुरूर में कुछ नहीं सोचा। ऐसे लोग बिलकुल फैन्स को डिजर्व नहीं करते हैं।

इस्लामी देश में 14 फरवरी को हिंदू मंदिर का उद्घाटन करेंगे PM मोदी: प्रधानमंत्री के प्रयास से 1997 का सपना हुआ पूरा, जानिए पीछे की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन करेंगे। इस सिलिसिले में प्रधानमंत्री मोदी 13 और 14 फरवरी 2024 को UAE में रहेंगे। अपने दो दिवसीय दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे।

बता दें कि पिछले 8 महीने में पीएम मोदी की UAE की यह तीसरी यात्रा है। स्वामीनारायण मंदिर के उद्घाटन के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 फरवरी 2024 को ‘अहलान मोदी’ कार्यक्रम में भारतीय प्रवासियों को भी संबोधित करेंगे। UAE मेें भारतीय राजदूत संजय सुधीर के अनुसार, इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 65000 से अधिक लोगों ने अपना पंजीकरण कराया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मंदिर का उद्घाटन 14 फरवरी 2024 को करेंगे। इसके बाद 1 मार्च 2024 से यह मंदिर आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। मंदिर परिसर में एक विजिटर केंद्र, प्रार्थना कक्ष, प्रदर्शनियाँ, लर्निंग सेंटर, बच्चों और युवाओं के लिए खेल क्षेत्र, उद्यान, पानी की सुविधाएँ, फूड कोर्ट, पुस्तक एवं उपहार की दुकानों के साथ अन्य सुविधाएँ भी होंगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे को लेकर भारत में संयुक्त अरब अमीरात के राजदूत अब्दुल नासिर अल शाली ने कहा कि दोनों देश सहिष्णुता और स्वीकार्यता के मूल्यों के चलते अपनी दोस्ती को और मजबूत कर पा रहे हैं। दुबई में आयोजित हो रहे वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट 2024 में प्रधानमंत्री ‘गेस्ट ऑफ़ ऑनर’ के तौर पर शामिल होंगे और समिट को संबोधित करेंगे।

जिस मंदिर का प्रधानमंत्री उद्घाटन होंगे, वह अबू धाबी में पहला हिंदू मंदिर है। यह मंदिर संयुक्त अरब अमीरात के अमीर द्वारा उपहार में दी गई 27 एकड़ भूमि पर बना है। स्वामीनारायण मंदिर के निदेशक प्रणव देसाई ने इस मंदिर के लिए संयुक्त अरब अमीरात और भारतीय नेतृत्व को आभार जताया है।

बता दें स्वामीनारायण संप्रदाय की वेबसाइट के अनुसार, इस संप्रदाय का हिंदू मंदिर UAE के अबू धाबी, दुबई, शारजाह और रुवैस शहर में स्थित हैं। ये मंदिर या तो बन गए हैं या फिर बन रहे हैं। अगर मीडिल स्थित की बात करें तो स्वामीनारायण मंदिर ओमान के मस्कट और सोहर तथा कुवैत एवं बहरीन में भी स्थित है।

दरअसल, स्वामीनारायण संप्रदाय के बोचासनवासी अक्षर पुरूषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के तत्कालीन अध्यक्ष स्वामी महाराज को 5 अप्रैल 1997 को UAE के शारजाह के एक रेगिस्तानी इलाके में गए। वहाँ पर स्वामी जी विश्व शांति और सभी धर्मों में एक-दूसरे के प्रति प्रेम के लिए प्रार्थना की। इसके साथ ही उन्होंने सभी देशों की प्रगति की भी कामना की।

इसके साथ ही उन्होंने अपनी इच्छा से अबू धाबी में एक मंदिर बनाने के लिए भी प्रार्थना भी की। अगले दो दशकों में स्वामीनारायण संप्रदाय के संतों एवं भक्तों ने स्वामी जी की कल्पना के अनुसार मंदिर बनाने के लिए UAE के लोगों एवं वहाँ के नेताओं से मुलाकात की और उनसे इसके लिए इजाजत माँगी। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर बनाने के लिए जमीन की भी माँग की।

साल 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार आई और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। इसके बाद भारत और UAE के बीच आपसी विश्वास का माहौल बना और दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए। इसके बाद साल 2015 में UAE की सरकार ने हिंदू मंदिर के लिए जमीन आवंटित की थी। इसके बाद पीएम मोदी ने UAE सरकार की दिल खोलकर सराहना की थी।

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था, “मैं अबू धाबी में मंदिर बनाने के लिए भूमि आवंटित करने के फैसले के लिए संयुक्त अरब अमीरात सरकार का बहुत आभारी हूँ। यह एक महान कदम है।” मंदिर परियोजना के निर्माण, विकास और प्रशासन के लिए दोनों सरकारों ने स्वामीनारायण संस्था और मंदिर लिमिटेड को चुना।

इसके बाद अबू धाबी-दुबई राजमार्ग के नजदीक अबू धाबी-स्वीहान-अल ऐन रोड पर अल रहबा क्षेत्र के अबू मुरीखा में इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस मंदिर में सात टावर हैं, जो संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सात अमीरात का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस मंदिर को बनाने की आधिकारिक घोषणा फरवरी 2018 में शाही दरबार में की गई थी और अप्रैल 2019 में शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया था। मई 2023 में 30 से अधिक देशों के राजनयिकों ने निर्माणाधीन मंदिर का दौरा किया था।

मंदिर के प्रवक्ता के अनुसार, प्राचीन प्रथाओं का पालन करते हुए इस मंदिर के निर्माण में लोहे या स्टील का उपयोग नहीं किया गया है। यह विशाल मंदिर पूरी तरह से पत्थर से बनाया गया है। इसे बनाने के लिए 700 से अधिक कंटेनरों में 20,000 टन से अधिक पत्थर और संगमरमर अबू धाबी भेजा गया। नींव को भरने के लिए फ्लाई ऐश का उपयोग किया गया है, जिससे कंक्रीट मिश्रण में 55 प्रतिशत सीमेंट की जगह ली गई है।

इस मंदिर को पर्यावरण के अनुकूल बन गया है। इसके कार्बन फुटप्रिंट में भी कमी आई है। मंदिर की संरचना की निगरानी के लिए, दबाव, तापमान और भूकंपीय घटनाओं का लाइव डेटा हासिल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर 300 से अधिक सेंसर लगाए गए हैं। गुजरात और राजस्थान के कारीगरों को बुलाकर मंदिर के खंभों एवं दीवारों पर मोर, घाथी, घोड़े, ऊँट, चंद्रमा आदि को उकेरा गया है।

भरतपुर के होटल में 350 लोगों को बनाया जा रहा था ईसाई, हिंदू संगठनों का हंगामा: दावा- महिलाओं को दिए 500-500 रुपए, ₹50 हजार देने का लालच

राजस्थान के भरतपुर के एक होटल में सैकड़ों लोगों का धर्मांतरण किए जाने की कोशिश का मामला सामने आया है। हिंदू संगठनों के हंगामे के बाद कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। इन संगठनों का दावा है कि ईसाई मिशनरी से जुड़े लोगों ने महिलाओं को 500-500 रुपए दिए थे। साथ ही ईसाई बनने पर 40-50 हजार रुपए खाते में डालने का प्रलोभन दिया गया था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भरतपुर में हाइवे के पास स्थित एक होटल में रविवार (11 फरवरी 2024) को प्रार्थना सभा के नाम पर सैकड़ों लोग जुटाए गए थे। जब हिंदू संगठनों को इसकी जानकारी मिली तो वे भी मौके पर पहुँच गए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई। मौके पर पहुँचकर पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया और हालात पर काबू पाया। इस संबंध में हिंदुवादी संगठनों की तरफ से स्थानीय अटल बाँध थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है।

राजस्थान पत्रिका ने भरतपुर के सीओ के हवाले से बताया है कि कुछ लोगों से पूछताछ चल रही है। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। राजस्थान तक के अनुसार फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। 20 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने जाँच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा करने की बात कही है।

दैनिक भास्कर ने विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष लाखन सिंह के हवाले से बताया है कि वे लोग जब मौके पर पहुँचे तो ईसाई धर्म की चंगेजी सभा चल रही थी। ईसाई मिशनरी से जुड़े लोग हिंदू देवी-देवताओं के बारे में आपत्तिजनक बातें कर रहे थे और लोगों से कह रहे थे कि ईसामसीह के पास सभी समस्याओं का हल है। ईसाई धर्म अपनाने पर उनकी सभी समस्याओं का हल हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि हिंदुवादी कार्यकर्ताओं ने जब इसका विरोध किया तो सभा में मौजूद लोगों ने मारपीट की कोशिश की। लाखन सिंह का यह भी दावा है कि सभा में आने के लिए महिलाओं को 500 रुपए दिए गए थे। बच्चों की शादी सहित कई अन्य कार्यों में उनकी मदद का वादा किया गया था। सभा में मौजूद लोगों की संख्या के बारे में अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग दावे किए गए हैं। 350 से लेकर करीब 500 लोगों के जुटान की बातें इन रिपोर्टों में कही गई है।

‘नाम पूछ-पूछ कर मार रहे थे हल्द्वानी के दंगाई, मुस्लिमों को छोड़ दिया’: जिस पत्रकार के हाथ और पाँव में आया फ्रैक्चर, उसका खुलासा – जान से मारना चाहते थे

उत्तराखंड के हल्द्वानी में स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने जो किया उसका दंश कई महीनों तक लोगों को झेलना पड़ेगा। नैनीताल के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में अवैध कब्जे को हटाने के लिए प्रशासन क्या पहुँचा, भीड़ ने थाना और पेट्रोल पंप ही फूँक डाला। पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश की गई। लोगों को मारा-पीटा गया। पत्थरबाजी और गोलीबारी हुई। महिला पुलिसकर्मियों तक को नहीं छोड़ा गया, आरोप है कि उनके कपड़े तक फाड़े गए।

अब एक स्थानीय पत्रकार ने बताया है कि कैसे मुस्लिम नाम वालों को छोड़ दिया गया और उनसे मारपीट नहीं की गई। अस्पताल में इलाज कराने आए ‘HNN न्यूज़’ के घायल पत्रकार पंकज सक्सेना से ऑपइंडिया ने बातचीत की, जिन्होंने बताया कि भीड़ नाम पूछ-पूछ कर मार रही थी, मुस्लिम होने पर छोड़ दिया जा रहा था। उनके हाथ और पाँव में फ्रैक्चर हुआ है। उनके पाँव में जहाँ प्लास्टर लगा है, वहीं हाथ में भी उन्होंने बैंडेज पहन रखा गया। पंकज सक्सेना गुरुवार (8 फरवरी, 2024) वाली घटना में ही घायल हुए।

उन्होंने बताया कि बतौर पत्रकार वो मीडिया के अन्य साथियों के साथ अवैध मदरसा-मस्जिद को तोड़ने के लिए आई प्रशासन की टीम को कवर करने पहुँचे थे। उन्होंने बताया कि वहाँ पहले से साजिश रच कर 8-10 हजार लोग खड़े थे, जिन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी और पेट्रोल बम फेंकने लगे। उन्होंने बताया कि फिर शाम को बिजली काट कर पत्थरबाजी शुरू की गई। पेट्रोल बम के जरिए जान से मारने का षड्यंत्र था। उन्होंने कहा कि जब गलियों से भाग रहे थे तब घायल हुए।

उन्होंने बताया कि दोनों तरफ से आगजनी कर के पीड़ितों को घेर लिया गया था। बकौल पंकज सक्सेना, घेरने के बाद भीड़ ने ऊपर से पत्थरबाजी शुरू की। उन्होंने इसकी पुष्टि की कि महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी बदसलूकी की गई। पंकज सक्सेना इस दौरान बेहोश हो गए थे। उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए गाँधीनगर वालों को धन्यवाद दिया। उनलोगों ने ही बचा कर उन्हें अस्पताल में पहुँचाया। गाँधीनगर वालों ने कई पुलिस वालों और मीडिया वालों को बचाया, महिला पुलिसकर्मियों को कपड़े दिए।

घायल पत्रकार पंकज सेना ने बताया कि सरकार खर्च से उनका इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि दंगाई कह रहे थे कि अपना नाम बताइए, कई पत्रकारों को छोड़ दिया गया क्योंकि वो उनकी बिरादरी से थे। पत्रकार ने बताया कि उनका एक 8 साल का बेटा भी है, अगर उन्हें बचा कर नहीं लाया जाता तो उनकी लाश ही आती। पंकज सक्सेना को चलने में भी तकलीफ है। उन्हें किसी का सहारा लेकर चलना पड़ रहा है। वो इस हमले में बुरी तरह जख्मी हुए हैं।