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‘राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में केवल अरबपतियों को न्योता’: जिस छत्तीसगढ़ में राहुल गाँधी ने फैलाया झूठ वहीं की कूड़ा बीनने वाली बुजुर्ग को भूले

राहुल गाँधी अक्सर भ्रामक बातें फैलाने के लिए जाने जाते हैं। अब उन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भ्रम फैलाया है। छत्तीसगढ़ के कोरबा में ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान राहुल गाँधी ने झूठ फैलाया। इस दौरान उन्होंने लोगों से कहा, “आप मुझे बताओ, राम मंदिर का उद्घाटन हुआ, देखा आपने। उसमें आपने एक भी गरीब आदमी को देखा? एक देखा आपने? उसमें मुझे अमिताभ बच्चन दिखा, ऐश्वर्या राय दिखीं, अम्बानी-अडानी था, सारे के सारे बिजनेस वाले दिखे।”

राहुल गाँधी ने आगे कहा कि उन्हें एक भी गरीब वहाँ नहीं दिखा, एक भी किसान-मजदूर-बेरोजगार नहीं दिखा। राहुल गाँधी ने कहा कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में एक भी छोटा दुकानदार या चाय वाला उन्हें नहीं दिखा, सारे के सारे अरबपति दिखे। उन्होंने ये तक दावा किया कि अम्बानी-अडानी और उनके बीवी-बच्चों ने वहाँ भाषण दिया। बकौल राहुल गाँधी, गरीबों के लिए इस देश में कुछ नहीं बचा है। आइए, राहुल गाँधी के इस झूठ का पर्दाफाश करते हैं।

असल में राहुल गाँधी ऐसा इसीलिए बोल रहे थे, क्योंकि उन्हें छत्तीसगढ़ की ही बिदुला देवी के बारे में नहीं पता। वही छत्तीसगढ़, जहाँ आजकल राहुल गाँधी की यात्रा पहुँची हुई है। बिदुला देवी छत्तीसगढ़ के गारियाबंद की रहने वाली हैं। उनका पूरा जीवन संघर्षों और गरीबी में बीता। आज भी वो कूड़ा-कचरा बीन कर ही अपना जीवन-यापन करती हैं। भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति, आस्था और समर्पण को देखते हुए उन्हें अयोध्या के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में आने का न्योता मिला था।

उनका नाम तब भी सामने आया था, जब 2021 में राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा जमा किया जा रहा था। जब बिदुला देवी को पता चला कि VHP कार्यकर्ता राम मंदिर के लिए चंदा जमा कर रहे हैं, तब उन्होंने अपने उस दिन की 40 रुपए की कमाई में से 20 रुपए दान कर दिए थे। गारियाबंद के विहिप के जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह राजपूत ने इसे एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण रकम करार दिया था। उन्होंने ये बात संगठन के अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी बताई।

VHP के राज्य प्रमुख चंद्रशेखर वर्मा ने बिदुला देवी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का न्योता दिया था। हालाँकि, अस्वस्थता के कारण वो इस कार्यक्रम में नहीं पहुँच पाई थीं। लेकिन, बिदुला देवी का कहना है कि वो रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या ज़रूर जाएँगी। राम मंदिर के लिए कारसेवा के दौरान बलिदान देने वाले सभी अधिकतर परिवार के ही लोग थे, उनके परिजनों को भी न्योता मिला। बड़ी संख्या में साधु-संतों ने भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, इनमें से अधिकतर सामान्य ही थे, VIP नहीं।

देश भर में 47 जगहों पर रोजगार मेला, PM मोदी ने 1 लाख को दिए नौकरी के लेटर: ;कर्मयोगी भवन’ की रखी आधारशिला, कहा- भर्ती प्रक्रिया अब पूरी तरह पारदर्शी

सोमवार (12 फरवरी 2024) को देश भर में 47 जगहों पर रोजगार मेला का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए 1 लाख से अधिक युवाओं को नियुक्ति-पत्र दिए। उन्होंने दिल्ली में ‘कर्मयोगी भवन’ के प्रथम चरण की आधारिशला भी रखी। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने भर्ती की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है। भर्ती प्रक्रिया को निश्चित अवधि में पूरा करने पर सरकार का जोर है। इससे हर युवा को अपनी योग्यता साबित करने का समान अवसर मिल रहा है।

पिछली सरकार के मुकाबले डेढ़ गुणा अधिक सरकारी नौकरी देने की बात कहते हुए पीएम मोदी ने कहा, “युवाओं को भारत सरकार में नौकरी देने का अभियान लगातार तेज गति से चल रहा है। पहले की सरकारों में नौकरी के लिए विज्ञापन जारी होने से लेकर नियुक्ति पत्र देने तक बहुत लंबा समय लगता था। इस देरी का फायदा उठाकर उस दौरान रिश्वत का खेल भी जमकर होता था। हमने भारत सरकार में भर्ती की प्रक्रिया को अब पूरी तरह पारदर्शी बना दिया है। इतना ही नहीं सरकार का बहुत जोर है कि भर्ती प्रक्रिया एक तय समय के भीतर पूरी कर ली जाए।”

प्रधानमंत्री ने जिन युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए हैं उनकी बहाली, राजस्व, गृह, उच्च शिक्षा, परमाणु ऊर्जा, रक्षा, वित्तीय सेवा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, जनजातीय मामले, रेलवे जैसे विभिन्न मंत्रालयों में होगी। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने हर युवा को अपनी योग्यता साबित करने का समान अवसर मुहैया कराया है। आज हर युवा के मन विश्वास है कि वह कड़ी मेहनत और अपनी प्रतिभा की दम पर अपनी जगह बना सकता है। उन्होंने कहा, “2014 के बाद से ही बीजेपी सरकार का प्रयास रहा है कि युवाओं को भारत सरकार से जोड़कर उन्हें राष्ट्र निर्माण की यात्रा में शामिल करें।”

उल्लेखनीय है कि जिस ‘कर्मयोगी भवन’ की पीएम मोदी ने आधारशिला रखी है, उसका मकसद ‘मिशन कर्मयोगी’ के विभिन्न हिस्सों के बीच सहयोग और तालमेल को बढ़ावा देना है। इस मिशन के जरिए नवनियुक्त कर्मियों को आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर एक ऑनलाइन मॉड्यूल ‘कर्मयोगी प्रारंभ’ के जरिए खुद को प्रशिक्षित किया जा रहा है। आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर 800 से अधिक ई लर्निंग पाठ्यक्रम मुहैया कराए गए हैं।

कब-कब लगे रोजगार मेले

रोजगार मेले का सिलसिला 22 अक्‍टूबर 2022 से शुरू हुआ था। इस पहले रोजगार मेला में 75 हजार से अधिक नियुक्ति पत्र बाँटे गए थे। इसके बाद 22 नवंबर 2022 को आयोजित दूसरे मेले में 71 हजार से ज्‍यादा युवाओं को जॉइनिंग लेटर मिले थे।

तीसरा मेला 20 जनवरी 2023 और चौथा 13 अप्रैल 2023 को लगा था। इन दोनों में 71-71 हजार से ज्‍यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। पांचवाँ रोजगार मेला 16 मई, छठा 13 जून और सातवाँ 22 जुलाई 2023 को लगा था। इसमें 70-70 हजार से ज्‍यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए।

वहीं आठवाँ रोजगार मेला 28 अगस्त 2023 को लगा था। इसमें भी 51,000 से ज्‍यादा देश के युवाओं को सरकारी नौकरी के अपॉइंटमेंट लेटर दिए गए। इसके बाद 9वाँ रोजगार मेला 26 सितंबर को हुआ, जिसमें 51 हजार से ज्यादा लोगों को मिला अपॉइंटमेंट लेटर मिले थे। इसी तरह 30 नवंबर 2023 को देश के 37 जगहों पर लगे रोजगार मेले के दौरान 51 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे।

कुँवारी या शादीशुदा… कम उम्र वाली सुंदरी को चुनते हैं, मर्दों को मौत से बचाने के लिए जाना पड़ता है: 12 वीडियो से जानिए क्या झेल रहीं बंगाल में संदेशखाली की महिलाएँ

उत्तर 24 परगना के संदेशखाली से टीएमसी गुंडों के भयावह कारनामे सामने आ रहे हैं। यहाँ टीएमसी के गुंडों के लिए रेप और गैंगरेप आम बात है। वो टीएमसी की महिला कार्यकर्ताओं को भी नहीं छोड़ते। मीटिंग में सिर्फ महिलाओं को बुलाते हैं। पति को मरने से बचाना है तो पार्टी के दफ्तर में आना पड़ेगा, वहाँ टीएमसी के गुंडे यौन शोषण करते हैं, लेकिन महिलाओं को चुप रहना पड़ता है। टीएमसी के गुंडे जमीनों पर कब्जा करते हैं, विरोध करने वालों को गैंगरेप की धमकी देते हैं। यही नहीं, उन्हें जो भी महिला पसंद आ गई, उसे वो रात भर उठाकर ‘भोगते’ हैं और मन भर जाने पर सुबह घर भेज देते हैं। पश्चिम बंगाल की पुलिस टीएमसी के गुंडों के लिए सहायक का काम करती है। वो पीड़ितों को ही दबाती है।

ये सब उसी संदेशखाली की पीड़ित महिलाएँ कह रही हैं, जिन्होंने अब इन अत्याचारों के खिलाफ उठ खड़े होने के ऐलान कर दिया है और पूरे संदेश खाली में टीएमसी के फरार नेता और ममता बनर्जी के खास शेख शाहजहाँ और उनके गुर्गों शिबू हाजरा और उत्तम सरदार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 8 फरवरी 2024 से संदेशखाली की महिलाएँ अब टीएमसी के गुंडों का सामना लाठी-डंडों के साथ कर रही हैं। इन्हें कंट्रोल करने के लिए 10 फरवरी 2024 को प्रशासन ने धारा-144 तो लगाई, लेकिन टीएमसी गुंडों को अत्याचार करने की पूरी छूट दी। हम मीडिया संस्थानों से उन्हीं पीड़ित महिलाओं की बातचीत सामने रख रहे हैं, जिसमें वो टीएमसी के गुंडों की करतूतों को सामने रख रही हैं।

इसी कड़ी में टीवी9 बांग्ला से बातचीत में संदेशखाली की महिलाओं ने बताया है कि कैसे शिबू हाजरा और उत्तर सरदार की अगुवाई टीएमसी के गुंडों ने लोगों की जमीनों पर कब्जा किए। एक महिला ने बताया कि बीडीओ और स्थानीय पुलिस के जवान टीएमसी के पार्टी काडर की तरह काम करते हैं। यही नहीं, स्थानीय लोगों ने बताया कि टीएमसी के गुंडों को ‘कट मनी’ का भुगतान करना पड़ता है और अगर किसी वजह से ‘कट मनी’ नहीं दे सके, तो फिर टीएमसी के गुंडे उनकी पिटाई करते हैं। बीजेपी सांसद दिलीप घोष ने ये वीडियो एक्स पर शेयर किया है।

एक महिला ने टीवी9 बांग्ला को बताया कि कैसे टीएमसी के गुंडे युवा लड़कों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं और उन्हें आपराधिक गतिविधियों में शामिल कर रहे हैं। उसने बताया कि टीएमसी के गुंडे नए और पढ़ाई लिखाई वाले बच्चों को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल करते हैं। महिला ने बताया, “बच्चों से कहा जाता है कि ‘दीदी’ उनका पेट भरती हैं। वो राजनीतिक काम नहीं करेंगे तो खाने के लिए मर जाएँगे। टीएमसी के गुंडे उन बच्चों से विपक्षी कार्यकर्ताओं के घरों पर हमला करवाते हैं, लोगों को परेशान कराते हैं और लूट जैसी वारदात कराते हैं। वो बच्चों को शराब और हथियार देकर बर्बाद कर रहे हैं। वो शाहजहाँ की पसंद की औरतों को उठाने के लिए दबाव डालते हैं।”

रिपब्लिक बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी कार्यकर्ता और उनके गुंडों ने शेख शाहजहाँ, उत्तर सरदार और शिबू हाजरा के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर हमला किया और उनका उत्पीड़न किया, तो पुलिस ने उनका हाथ दिया। एक महिला ने पूरी बात बताते हुए कहा, “हम रात में नींद की एक झपकी तक नहीं ले सके। भारी संख्या में पुलिस वाले बाइकों और कारों पर सवार होकर पहुँचे। वो रात में जोर-जोर से हम सबको धमका रहे थे। हमारे परिवार के मर्द भाग गए थे, क्योंकि उन्हें पुलिस उठा लेती।”

बजरंग दल के कार्यकर्ता की पत्नी ने बताया, “पुलिस हमारे घर में रात 3 बजे घुसी। पुलिस वालों ने मेरे पति को गालियाँ दी और मेरा उत्पीड़न करने की कोशिश की। उन्होंने मेरा पोला (शादीशुदा बंगाली महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला कड़ा) तोड़ दिया। पुलिस ने मेरी बेटी को दूर फेक दिया। वो पुलिस वाले इतने नशे में थे कि वो सही से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे।”

संदेशखाली की एक अन्य महिला ने स्थानीय पुलिसकर्मियों की बदतमीजियों के बारे में बताया। एक महिला ने कहा, “पुलिस वाले ने मुझसे पूछा कि मैं दूसरे मर्दों के सोती हूँ? वो कैसे ये सवाल पूछ सकते हैं। मुझे जवाब चाहिए। मैंने क्या गलत किया है कि मुझे ‘मादर**’ जैसी गालियाँ दी गई?” महिला ने आगे बताया, “पुलिस वालों ने मेरे पति को ‘सुवर का बच्चा’ कहा। वो मेरे पति को घसीटकर घर से बाहर ले गए। उन्होंने क्या गलत किया था? हमें न्याय चाहिए। क्या पुलिस वाले किसी को भी इस तरह गालियाँ दे सकते हैं?”

संदेशखाली में एक महिला ने कहा, “टीएमसी के गुंडे हमारे पतियों को जबरदस्ती पकड़ कर अपने साथ ले जाते हैं। वो उनसे काम कराते हैं और पैसे भी नहीं देते। अगर कोई पैसों की माँग करता है, तो उसे बेहरमी के साथ पीटा जाता है।”

एक महिला ने एबीपी आनंदा से बातचीत में कहा, “हम कानून को अपने हाथों में नहीं लेना चाहते। उत्तम सरदार ने हमें डंडे उठाने पर मजबूर कर दिया। वो पिछले 4 साल से हमारा उत्पीड़न कर रहा है। अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। इसी वज से हम यहाँ प्रदर्शन कर रहे है। हम अगर टीएमसी की बैठकों में जाते हैं, तो हमारे पतियों को उठा लिया जाता है। संदेशखाली कभी शांत माहौल वाली जगह हुआ करती थी, लेकिन उसे नष्ट कर दिया गया। हम फिर से संदेशखाली में शांति चाहते हैं।”

संदेशखाली की एक महिला ने ममता बनर्जी को निशाने पर लिया और कहा कि सरकार ने लोखिर भंडार योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी को 500 रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 1000 रुपए प्रति माह कर दिया है। क्या सरकार पार्टी की कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न के बदले ‘आर्थिक सहायता’ के तौर पर ऐसा कर रही है?

रिपब्लिक बाँग्ला से बात करते हुए पीड़ित महिला ने कहा, “क्या हम अपने सम्मान के बदले पैसे पा रहे हैं? क्या हमें इस लिए पैसे दिए जा रहे हैं कि टीएमसी कार्यकर्ताओं को रात में ‘कंपनी’ दें? क्या मुख्यमंत्री हमें अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए पैसे दे रही हैं?”

संदेशखाली में प्रदर्सन के दौरान एक महिला ने बताया, “तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता बाइक पर 20-30 के ग्रुप में आते हैं और वे इलाके की हर महिला की जाँच करते हैं। वे सबसे कम उम्र की और सबसे अच्छी दिखने वाली महिला को चुनते हैं और उसे अपने साथ ले जाते हैं। वह कहती हैं, वे रात-रात भर उसके साथ संबंध बनाते हैं, और उसे तभी छोड़ते हैं जब वे “संतुष्ट” हो जाते हैं।”

महिला शेख शाहजहाँ और उसके आदमियों की ओर से फैलाए गए आतंक और डर को बयान करती है। महिला ने कहा कि “जिस भी महिला पर इन गुंडों की नजर पड़ गई, भले ही वो कुँवारी हो या शादीशुदा, वो उसे उठा ले जाते हैं। यही नहीं, शादीशुदा महिलाओं के पति को भी उसपर कोई हक नहीं होता। बस उन्हें महिला पसंद आनी चाहिए, इसके बाद सबकुछ उनकी मर्जी।” इस बात को वहाँ मौजूद एक महिला ने भी दोहराया।

एबीवी आनंदा से बात करते हुए एक पीड़ित ने बताया, “हम सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। टीएमसी के गुंडों ने हमें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है। यहाँ तक कि उन्होंने ग्रामीणों द्वारा बनवाई गई कंक्रीट की सड़क को भी नष्ट कर दिया।” एक महिला ने बताया है कि उन्हें पीने का साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है।

एक महिला ने रिपब्लिक बाँग्ला के साथ अपनी आपबीती साझा की। महिला ने कहा, “टीएमसी के गुंडों ने मेरी खिड़की तोड़ दी। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ खींचा और बाहर को कहा। उन्होंने कहा कि वो उसका (महिला का) गैंगरेप करेंगे। ये सब पुलिस की मौजूदगी में हो रहा था। वहाँ एक और महिला को बाल पकड़ कर खींचा गया और उसकी साड़ी खींचकर अलग कर दी गई। संदेशखाली में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं। वो मेरे पति के सामने ही मुझसे बदतमीजी करते रहे। हम शांति चाहते हैं। मुझे लगता है कि ऐसी जिल्लत भरी जिंदगी जीने से बेहतर है मर जाना।”

एक महिला ने रोते हुए बताया, “टीएमसी के कार्यकर्ता सिर्फ महिलाओं को ही पार्टी में बुलाते हैं और उनका शोषण करते हैं। हमें अपने पतियों की जान बचाने के लिए उनकी बात माननी (यौन उत्पीड़न के लिए हाँ) पड़ती है।” महिला ये बात कहती हुई रो पड़ती है और कहती है कि टीएमसी के गुंडे ये भी नहीं सोचते कि वो पार्टी सपोर्टर है।

संदेशखाली में आखिर चल क्या रहा है?

पश्चिम बंगाल में उत्तर 24 परगना जिला है। यहाँ संदेशखाली नाम की जगह है। इस साल की शुरुआत में इसी जगह के टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ पर रेड करने की गई ईडी की टीम पर जानलेवा हमले हुए थे। यहाँ गुरुवार (8 फरवरी 2024) को केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल को फंड न देने को लेकर टीएमसी नेताओं ने संदेशखाली के त्रिमोहानी बाजार में लोगों के साथ मिलकर रैली निकाली थी। इस रैली में शाहजहाँ शेख के नारे लगाने पर बवाल मच गया।

संदेशखाली की महिलाओं और पुरुषों ने लाठी-डंडे लेकर टीएमसी के गुंडों को दौड़ा लिया। इस दौरान दोनों ओर से मारपीट शुरू हो गई। इसके अगले दिन शाहजहाँ शेख के गुंडों ने पलटवार किया, तो ग्रामीणों ने कई जगहों पर उत्पात कर दिया। इस बवाल में कई लोग घायल भी हो गए। इसके बाद ही पुलिस ने इलाके में धारा 144 लागू करने के साथ ही इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थी। हालाँकि ऊपर के वीडियो में पीड़ित महिलाएँ उन्हीं अत्याचारों को बयान कर रही हैं, जो इस दौरान महिलाओं ने झेला।

ये खबर मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है, पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

हल्द्वानी में खुद की ही गोली से मरा फईम कुरैशी, चश्मदीद ने किया खुलासा: हिंदुओं को पीटने वाली भीड़ में शामिल था मृत मुस्लिम युवक का भाई

हल्द्वानी हिंसा की एक्सक्लूसिव वीडियो ऑपइंडिया को मिल गई हैं। इनमें से एक में दिख रहा है कि बनभूलपुरा में हिंसा की शुरुआत से पहले एक जगह मुस्लिम भीड़ एक हिंदू युवक को पकड़कर उसको पीट रही है। इस भीड़ में एक हरी टीशर्ट में युवक भी दिख रहा है। दावा है कि हल्द्वानी हिंसा के समय जो फायरिंग हुई उसमें उसका भाई फईम कुरैशी (26) भी मरा है। कुछ लोग जहाँ इस मौत पर पुलिस को बदनाम कर रहे हैं वहीं चश्मदीदों का कहना कुछ और ही है।

ऑपइंडिया को प्राप्त वीडियो में फईम कुरैशी पुलिस को हाथ दिखाते दिख रहा था। वहीं उसका भाई हिंदू युवक को पीटने वाली भीड़ में शामिल था। हमने जब चश्मदीदों से घटना पर बात की तो गाँधी नगर में एक दलित समुदाय के युवक ने बताया- “जो मरे वो किसी की गोली से नहीं मरे। हुआ क्या कि जब वो गोली चला रहा था तो उसे उसकी ही गोली लग गई।”

नीचे वीडियो में आप चश्मदीद की बात सुन सकते हैं।

चश्मदीद के बयान के अलावा ऑपइंडिया के पास फईम कुरैशी की वीडियो भी मौजूद है जिसका जिक्र चश्मदीद ने किया। वीडियो में देख सकते हैं कि पीली शर्ट में वो लड़का पहले अपनी भीड़ के साथ सड़क के बीच में खड़ा होता है और फिर जाकर किनारे में खड़ा हो जाता है। जब पुलिस उसके सामने से गुजरती है तो वो उन्हें हाथ हिलाकर ललकारने वाले अंदाज में कुछ कहता दिखता है। वहीं बाकी भीड़ पुलिस को देखने लगती है।

बता दें कि हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को एक अवैध मस्जिद हटाने की प्रक्रिया के दौरान इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पुलिस पर हमला किया था। पहले इस भीड़ ने पुलिस पर छतों से पत्थर फेंके थे, उसके बाद यह लोग पेट्रोल बम आदि लेकर सड़कों पर उतर आए थे। दंगाई भीड़ के पास असलहे भी थे। इन्होंने पुलिसकर्मियों को मारने और जलाने की कोशिश की थी। इसके अलावा थाने पर हमला करके उसे भी लूटा था। दंगाई भीड़ पर काबू पाने के बाद पुलिस ने इन पर कार्रवाई शुरू की तो अब तक इस मामले में 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। पूरे प्रकरण में 3 एफआईआर दर्ज हुई हैं। सीसीटीवी आदि के माध्यम से बाकी आरोपितों को पकड़ने का प्रयास भी हो रहा है।

लाहौर में भी मणिशंकर अय्यर ने दिखाई मोदी घृणा, कहा- पाकिस्तानी सबसे बड़ी संपत्ति, भारत में बात करने का साहस नहीं: बेटी ने राम मंदिर के विरोध में किया था अनशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से काॅन्ग्रेस और उसके नेता मणिशंकर अय्यर की घृणा जगजाहिर है। अब अय्यर ने यही घृणा पाकिस्तान की जमीन से भी दिखाई है। पाकिस्तानियों को भारत की सबसे बड़ी संपत्ति बताते हुए कहा है कि मोदी सरकार में मेज पर बैठकर बात करने का साहस नहीं है। उन्होंने बीते 10 साल में पाकिस्तान के साथ बातचीत नहीं होने को सबसे बड़ी गलती भी बताया है।

डाॅन की रिपोर्ट के अनुसार लाहौर के अलहमरा में फैज फेस्टिवल के दौरान एक सत्र को संबोधित करते हुए मणिशंकर अय्यर ने यह बात कही। इस दौरान मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए अय्यर ने कहा, “मैं पाकिस्तान के लोगों से कहना चाहता हूँ कि वे याद रखें कि मोदी को कभी भी एक तिहाई से ज्यादा वोट नहीं मिले हैं। लेकिन हमारी भारत प्रणाली ऐसी है कि एक तिहाई वोट पाकर भी उनके पास दो तिहाई सीटें है। पर दो तिहाई भारतीय आपके पाकिस्तानी साथ आने को तैयार हैं।”

अपने मित्र सतिंदर कुमार लांभा की किताब का हवाला देते हुए अय्यर ने कहा कि काॅन्ग्रेस और बीजेपी सरकारों में इस्लामाबाद में तैनात रहे 5 भारतीय उच्चायुक्तों का मानना था कि जैसे भी मतभेद हों पर पाकिस्तान को भारत से जुड़ना चाहिए। लेकिन 10 वर्षों में हमने बातचीत नहीं कर सबसे बड़ी गलती की। उन्होंने कहा, “हमारे पास आपके खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक का साहस है, लेकिन मेज पर बैठकर बात करने का साहस नहीं है।”

काॅन्ग्रेस नेता ने कहा कि पाकिस्तान के साथ संबंधों में सद्भावना की आवश्यकता थी। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद से बीते 10 साल में सद्भावना के उलट काम हुए हैं। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तानियों की आवभगत का जिक्र करते हुए उन दिनों को याद किया जब वे कराची में महावाणिज्य दूत थे। अय्यर ने कहा कि पाकिस्तान के अलावा उन्होंने कोई ऐसा देश नहीं देखा, जहाँ इतने खुले दिल से उनका स्वागत किया गया हो। महावाणिज्य दूत रहते हर कोई मेरी और मेरी पत्नी के देखभाल कर रहा था। उन्होंने बताया कि इससे जुड़ी कई घटनाओं का जिक्र उन्होंने अपनी किताब में भी किया है।

अय्यर ने कहा, “मेरे जो अनुभव हैं वे बताते हैं कि पाकिस्तानी दूसरे पक्ष पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देते हैं। अगर हम मित्रतापूर्ण हैं, तो वे ज्यादा मित्रतापूर्ण रहेंगे। अगर हम शत्रुतापूर्ण व्यवहार करते हैं तो वे और भी ज्यादा शत्रुतापूर्ण प्रतिक्रिया देते हैं।” इस दौरान काॅन्ग्रेस नेता ने पाकिस्तान की जमीन पर फल-फूल रहे आतंकवाद का कोई जिक्र नहीं किया।

गौरतलब है कि पिछले महीने जब राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हुआ था, तब मणिशंकर अय्यर की बेटी सुरन्या ने इसके विरोध में 3 दिनों का अनशन किया था। उसने सनातन धर्म के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किए थे। इसके बाद दिल्ली के जंगपुरा स्थित जिस सोसायटी में वे रहती हैं, वहाँ उन्हें विरोध भी झेलना पड़ा था। रेसिडेंट्स वेलफेयर सोसायटी (RWA) ने उनसे पत्र लिख कर कहा था कि या तो वे अपनी हरकत के लिए माफी माँगें या फिर सोसायटी छोड़ कर चली जाएँ।

माँ-बहन की गाली दे रहा था युवक, एल्विश यादव ने बीच रेस्टोरेंट में थप्पड़ मारा: Video वायरल होने पर बोले- मैंने कुछ गलत नहीं किया

सोशल मीडिया स्टार और बिग बॉस ओटीटी सीजन 2 के विनर एल्विश यादव एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उनपर इल्जाम लगा है रेस्टोरेंट में एक व्यक्ति को झापड़ मारने का। वीडियो तेजी से वायरल हो रही है। लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

वायरल वीडियो में देखने को मिल रहा है कि एल्विश यादव एक रेस्टोरेंट में हैं, जहाँ उनके आसपास पुलिस भी है। तभी, वो गुस्से में एक आदमी की सीट पर जाते हैं और फिर उसे थप्पड़ जड़ देते हैं। इसके बाद उन्हें उनके आसपास मौजूद लोग रोकने का प्रयास करते हैं। लेकिन एल्विश शांत नहीं होते। टेबल पर बैठा शख्स दोबारा एल्विश को कुछ कहता है और वह फिर उसे पकड़ने आगे बढ़ते है। इसके बाद उनकी टीम उन्हें समझा बुझाकर वहाँ से ले जाती है।

सोशल मीडिया पर दावा हो रहा है कि रेस्टोरेंट में एल्विश यादव ने जिस व्यक्ति को झापड़ मारा है उसने एल्विश की माँ/परिवार के बारे में अपशब्द कहे थे। एल्विश से यह बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने आपा खोते हुए जाकर उसे थप्पड़ मार दिया। घटना को पास में ही बैठे किसी शख्स ने रिकॉर्ड किया। एल्विश के हेटर्स का जहाँ ये कहना है कि ये काम उन्होंने नशे में किया होगा। वहीं उनके फैंस का कहना है कि अगर कोई आपके परिवार को गाली देता है तो इस तरह की प्रतिक्रिया देनी जरूरी होती है। वरना उसकी हिम्मत और भी बढ़ती है। फैंस के हिसाब से एल्विश ने कुछ गलत नहीं किया है।

वहीं एल्विश ने इस घटना की वीडियो वायरल होने के बाद कहा- “मुझे न लड़ाई करने का शौक है, न हाथ उठाने का शौक है। मैं अपने काम से मतलब रखता हूँ। फोटो खिंचवाने की बात है तो हम सबके साथ फोटो खिंचवाते हैं। लेकिन पीछे से जब कोई कमेंट पास करता है, माँ-बहन की गालियाँ देता है, तो हम उसको नहीं छोड़ते। वीडियो में तुम्हें दिख रहा होगा कि पुलिस भी पीछे चल रही है, तो ऐसा कुछ नहीं है कि मैंने गलत किया। उसने मेरे ऊपर पर्सनल कमेंट किया था तो मैंने पर्सनली जाकर उसे थप्पड़ मार दिया। मुझे इस बात का कोई गम नहीं है। उसने मुझे गाली दी तो मैंने उसे पीट दिया। मैं ऐसा ही हूँ।”

बता दें कि एल्विश यादव हमेशा से उन इन्फ्लुएंसरों में से रहे हैं जिनसे जुड़ी खबरें मीडिया में आती रहती हैं। एक बार एल्विश यादव पर गमला चोरी का इल्जाम लगाकर उन्हें फँसाने का प्रयास हुआ था। इसके बाद वो बिग बॉस विनर बनकर सुर्खियों में आए, फिर उनपर रेव पार्टियों में सांप के जहर का इस्तेमाल करने का आरोप लग गया और अब इस तरह ओपन रेस्टोरेंट में एक शख्स को मारने के कारण वो फिर सुर्खियों में हैं।

दिन में जो MLA खेल रहे थे बैट-बाॅल, उन्हें रात में तेजस्वी यादव के आवास से क्यों ले गई बिहार पुलिस: नीतीश सरकार की ‘ताकत’ का परीक्षण आज

28 जनवरी 2024 को 9वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार की सरकार का बहुमत परीक्षण आज (12 फरवरी 2023) होना है। उससे पहले बिहार विधानसभा के अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। वैसे तो विधानसभा का गणित एनडीए के पक्ष में है, लेकिन जिस तरह चौधरी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से इनकार किया है और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद ने विपक्षी विधायकों की बाड़बंदी की है, उसने बहुमत परीक्षण को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।

बिहार विधानसभा की जो मौजूदा स्थिति है उसमें राजद, काॅन्ग्रेस और वाम दल मिलाकर 114 विधायक होते हैं। बहुमत का आँकड़ा 122 है। वहीं सत्ताधारी बीजेपी, जदयू और जीतनराम मांझी की पार्टी HUM को मिलाकर 127 विधायक हैं। इन्हें निर्दलीय सुमित सिंह का भी समर्थन हासिल है, जो मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। यदि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के इकलौते विधायक का समर्थन भी विपक्ष को मिल जाए तो भी वह सरकार गिराने लायक संख्या नहीं जुटा सकती है।

लेकिन राजनीतिक गलियारों में क्राॅस वोटिंग की आशंका भी जताई जा रही है। सबसे पहले चर्चा काॅन्ग्रेस के कुछ विधायकों के एनडीए के संपर्क में होने से शुरू हुई। इसका बाद काॅन्ग्रेस ने अपने सभी 19 विधायकों को हैदराबाद भेज दिया। वहीं राजद ने अपने विधायकों को बैठक के बहाने पूर्व मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के आवास पर बुलाया और फिर उसके बाद इन विधायकों को अपने घर नहीं जाने दिया गया। दूसरी तरफ एनडीए खेमे की चिंता मंत्री श्रवण कुमार के आवास पर हुई भोज से जदयू के 5 विधायकों और उसके बाद मंत्री विजय चौधरी के आवास पर हुई बैठक से जदयू के 4 विधायकों के नदारद होने के बाद से बढ़ी हुई है। बीच-बीच में विपक्षी खेमे के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के संपर्क में होने की खबरें भी आती रहती हैं। हालांकि मांझी ने बार-बार ‘हम’ के एनडीए के साथ ही रहने की बात कही है।

एक तरफ एनडीए बहुमत हासिल करने को लेकर आश्वस्त है, वहीं राजद दावा कर रही है कि नीतीश सरकार अब बस कुछ घंटों की ही है। पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा है, “नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेगी। हमारी संख्या बढ़ने वाली है। विपक्ष चाहे कुछ भी कर ले, कुछ नहीं होगा। बिहार में जंगल राज वापस नहीं आएगा।”

राजनीतिक गहमागहमी के बीच 11 फरवरी की रात तेजस्वी यादव के घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी दिखे। वे शिवहर से राजद के विधायक चेतन आनंद की तलाश में आए थे। पुलिसकर्मियों को इस दौरान राजद समर्थकों का विरोध भी झेलना पड़ा। लेकिन वे देर रात चेतन आनंद को अपने साथ लेकर चले गए।

चेतन आनंद पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे हैं। उन्हें तेजस्वी यादव का करीबी माना जाता है। तेजस्वी यादव के आवास से राजद विधायकों के जो वीडियो बाहर आए थे, उसमें वे क्रिकेट खेलते भी दिखे थे। लेकिन इस कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब चेतन के गायब होने की शिकायत उनके छोटे भाई ने पाटलिपुत्रा थाने में दी। इसके बाद बिहार पुलिस कार्रवाई करते हुए तेजस्वी यादव के आवास पर पहुँच गई।

इसके बाद राजद ने एक्स/ट्विटर पर एक पोस्ट में कहा था, “नीतीश कुमार ने सरकार जाने के डर से हजारों की संख्या में पुलिस भेज तेजस्वी यादव के आवास को चारों तरफ से घेर लिया है। ये किसी भी तरह से, किसी भी बहाने आवास के अंदर घुस कर विधायकों के साथ अप्रिय घटना करना चाहते हैं। बिहार की जनता नीतीश कुमार और पुलिस के कुकर्म देख रही है। याद रहे हम डरने और झुकने वालों में से नहीं है। ये वैचारिकी का संघर्ष है और हम इसे लड़ेंगे और जीतेंगे, क्योंकि बिहार की न्यायप्रिय जनता इस पुलिसिया दमन का प्रतिकार करेगी।”

‘कतर से भारत आ पाए, तो सिर्फ पीएम मोदी की वजह से’: पूर्व नौसैनिक अधिकारियों ने बताया, मोदी सरकार ने असंभव को संभव कर दिखाया

कतर ने भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों-कर्मचारियों को जेल से रिहा कर दिया है। फाँसी की सजा से बच निकलने वाले इन 8 लोगों में से 7 वापस भारत आ भी गए हैं। दिल्ली के इंटरनेशनल हवाई अड्डे पर पहुँचे इन पूर्व नौसैनिकों ने ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाया। इन पूर्व नौसैनिकों ने भारत पहुँचने के बाद कहा कि वो यहाँ पहुँच पाए हैं और अपनी धरती पर कदम रख पाए हैं, तो वो सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से।

बता दें कि इन सभी को जासूसी के आरोपों में फाँसी की सजा दी गई थी, लेकिन पीएम मोदी ने दुबई दौरे के समय इनकी रिहाई को सुनिश्चित कर दिया था। पीएम मोदी के दौरे से इन लोगों को पहले तो फाँसी की सजा से राहत मिली, और फिर अब डिप्लोमेटिक रास्ते से सभी को रिहा करा लिया गया।

कतर की जेल से राहत भरी मुस्कान और शांत भाव के साथ रिहा हुए एक पूर्व नौसेना अधिकारी ने एएनआई को बताया, “पीएम मोदी के हस्तक्षेप के बिना हमें आजादी नहीं मिलती। अगर उन्होंने हमारे लिए प्रयास नहीं किए होते, तो हम आज आपके सामने खड़े नहीं होते।” उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार ने हमें बचाने के लिए बहुत काम किया। हमें आजादी दिलाने के लिए हाई लेवल से कोशिशें की गई।

कतर से लौटे एक पूर्व नौसैनिक ने कहा, “हमने भारत वापस आने के लिए लगभग 18 महीने तक इंतजार किया। हम पीएम के बेहद आभारी हैं। यह उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप और कतर के साथ उनके समीकरण के बिना संभव नहीं होता। हम भारत सरकार द्वारा किए गए हर प्रयास के लिए तहे दिल से आभारी हैं और उन प्रयासों के बिना यह दिन संभव नहीं होता।” पीएम मोदी और कतर के अमीर के बीच जो अंडरस्टैंडिंग बनी, उसके बिना ये संभव नहीं था। दोनों नेताओं के मजबूत रिश्तों की वजह से भी हमें मदद मिली।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार की राजनयिक कोशिशों के चलते कतर ने ये फैसला लिया है। कतर का ये फैसला भारत-कतर के बीच ऐतिहासिक गैस समझौते के कुछ ही दिन बाद आया है। बता दें कि इन सभी लोगों को कथित तौर पर जासूसी के आरोपों में फाँसी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन अदालत से लेकर राजनयिक स्तर पर भारत सरकार ने इनकी रिहाई के लिए जोरदार पैरवी की और अब जाकर इन सभी पूर्व नौसैनिकों को रिहा कर दिया गया है।

जानें- कैसे पीएम मोदी की एक मुलाकात ने दिलाई कूटनीतिक सफलता

भारत पर इन पूर्व अधिकारियों को बचाने का दबाव था। ऐसे में भारत सरकार कानूनी तौर पर इसे चुनौती दे रही थी। इसके साथ ही भारत डिप्लोमैटिक चैनल से भी बातचीत कर रहा था। नवंबर में जब इन लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी, तब तक इस बात की कोई जानकारी नहीं मिल पाई थी कि इन 8 लोगों के साथ क्या कुछ हो रहा है। फाँसी की सजा के बाद मामला दुनिया की नजर में आया।

भारत सरकार ने इन बंधकों के लिए कतर से कान्सुलर एक्सेस की माँग की। जिनेवा कन्वेंशन के मुताबिक, ऐसे मामलों में कांसुलर एक्सेस (राजनयिक पहुँच) देना उस देश के लिए जरूरी हो जाता है, जहाँ दूसरे देश के नागरिक गिरफ्तार किए जाते हैं। भारत ने नवंबर माह में कांसुलर एक्सेस हासिल कर लिया और केस के बारे में पूरी जानकारी हासिल की। राजनयिक चैनल से भारत सरकार सक्रिय थी ही, कानूनी पहलुओं पर भी विचार हो रहा था। भारत सरकार के सहयोग से इन पूर्व अधिकारियों ने कतर के उच्च न्यायालय में अपील दायर की। अपील स्वीकार होने के बाद सरकार कानूनी प्रक्रिया में लग गई। इधर, भारत कतर पर राजनयिक दबाव भी बढ़ाता जा रहा था।

इस बीच, दिसंबर माह के शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दुबई में कतर के अमीर से मुलाकात हुई। पीएम मोदी COPE28 की बैठक में भाग लेने दुबई गए थे। इस मुलाकात के चार सप्ताह के भीतर ही फाँसी की सजा पलट दी गई थी। जब इस केस में सुनवाई हो रही थी, तब कोर्ट में भारत के राजदूत भी मौजूद थे। उनकी मौजूदगी ये बताती है कि मोदी सरकार इस मामले को लेकर कितनी गंभीर थी।

इन पूर्व नौसैनिकों को मिली जेल से रिहाई

कतर की जेल से रिहा हुए पूर्व नौसैनिकों को गिरफ्तार किया गया था, उनके नाम हैं- कमांडर पूर्णेन्द्रु तिवारी, कमांडर नवतेज सिंह गिल, कमांडर वीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ और कैप्टन गोपाकुमार। ये सभी जेल में बंद होने से पहले दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी एंड कंसल्टेंसी में काम कर रहे थे। कथित तौर पर इनपर जासूसी के आरोप लगाए गए थे और फाँसी की सजा सुना दी गई थी। लेकिन दिसंबर 2023 की शुरुआत में भारत सरकार ने राजनयिक कोशिशों के चलते कांसुलर एक्सेस हासिल कर लिया था, इसके बाद उनकी फाँसी की सजा पर रोक लगवाई थी।

कतर के फैसले का स्वागत

भारत के विदेश मंत्रालय ने कतर के इस फैसले का स्वागत किया है। विदेश मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है, “भारत सरकार कतर में हिरासत में लिए गए दहरा ग्लोबल कंपनी के लिए काम करने वाले आठ भारतीय नागरिकों की रिहाई का स्वागत करती है। उनमें से आठ में से सात भारत लौट आए हैं। हम इन नागरिकों की रिहाई और घर वापसी को सक्षम करने के लिए कतर के अमीर के फैसले की सराहना करते हैं।”

बता दें कि कतर की एक अदालत ने 26 अक्टूूबर, 2023 को भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई थी। साल 2022 में कतर की एक कंपनी में काम करने वाले इन अधिकारियों पर जासूसी का आरोप लगाकर वहाँ की इस्लामी सरकार ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया था। ये सभी पूर्व अधिकारी वहाँ की ‘अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज’ (ADGTCS) नाम की कंपनी के लिए काम कर रहे थे।

हल्द्वानी हिंसा के 30 दंगाई गिरफ्तार: 24 घंटे में पुलिस ने 25 को पकड़ा, थाने से लूटे गए 99 कारतूस भी बरामद

उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हुई हिंसा के बाद पुलिस लगातार उपद्रवियों को पकड़ने में लगी है। अभी तक नैनीताल पुलिस की कार्रवाई में 30 लोग गिरफ्तार हुए हैं। इनमें से 5 को पहले अरेस्ट किया गया था और 25 की गिरफ्तारी हाल में हुई। पुलिस को जाँच में इनके पास से 7 तमंचे और 54 कारतूस बरामद हुए हैं। इसके अलावा थाने से लूटे गए 99 कारतूस भी पुलिस को इन अभियुक्तों के पास से मिले हैं।

एसएसपी नैनीताल प्रहलाद नारायण मीणा ने इस सबंध में जानकारी दी कि इस हिंसा मामले में 3 एफआईआर (मुकदमा संख्या 21/24, 22/24, 23/24) दर्ज हुई है। सबमें अलग-अलग जाँच अधिकारी हैं। 24 घंटे में 25 आरोपित गिरफ्तार हुए हैं उससे पहले 5 लोग गिरफ्तार हुए थे।

कुल 30 गिरफ्तारी इस मामले में हो गई है। इनके पास से वो जिंदा कारतूस भी मिले हैं जो इन्होंने थाने में हमला करते समय लूटे थे। बाकी गायब कारतूसों को बरामद करने की कोशिश हो रही है। मुख्य आरोपित को पकड़ने का भी प्रयास चल रहा है जैसा ही वो पक़ड़ में आएगा इसकी जानकारी दी जाएगी।

संबंधित मामले में उत्तराखंड पुलिस द्वारा किया गया ट्वीट

गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम जुनैद, निजाम, महबूब, शहजाद, अब्दुल माजिद, शाजिद, नईम, शहनवाज, शकीर अहमद, इशरार, शानू, रईस, गुलजार अहमद, रईस, मोहम्मद फरीद, जावेद पुत्र अब्दुल हमीद, मोहम्मद साद, मोहम्मद तस्लीम, अहमद हसन, शाहरूख, अरजना, रिहान, जिशान, माजिद हैं।

गिरफ्तार अभियुक्तों के नामों की लिस्ट (तस्वीर साभार: uttarakhand police)

एसएसपी मीणा ने यह भी जानकारी दी कि अब हल्द्वानी में धीरे-धीरे सब सामान्य हो रहा है। हालातों पर नियंत्रण पा लिया गया है। यातायात सामान्य ढंग से चल रहे हैं। एग्जाम कराए गए हैं जिसमें अटेंडेंस काफी सही रही। उन्होंने ये भी बताया कि बनभूलपुरा में पुलिस ने दूध और बाकी जरूरतों के सामानों को पहुँचाने का काम किया है। आगे कुछ दिनों में बाकी क्षेत्रों में लगे कर्फ्यू को भी हटा दिया जाएगा।

बता दें कि 8 फरवरी 2024 को अवैध मदरसे और मस्जिद के विध्वंस को लेकर एक इस्लामी भीड़ ने उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हिंसा फैलाई थी। अवैध संरचना के बारे में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रह्लाद मीणा ने कहा कि मदरसा-मस्जिद का निर्माण अतिक्रमण की गई सरकारी भूमि पर अवैध रूप से किया गया था। इन्हें गिराने की कार्रवाई अदालत के आदेश के तहत की गई थी।

भारत की बड़ी राजनयिक जीत: कतर में फाँसी की सजा पाए सभी 8 पूर्व नौसैनिक रिहा, स्वदेश पहुँचे 7 लोग, विदेश मंत्रालय ने कही ये बात

कतर में 8 भारतीयों को मौत की सजा के मामले में भारत सरकार को बड़ी राजनयिक जीत मिली है। अब फाँसी की सजा पाने वाले नौसेना के सभी 8 पूर्व अधिकारियों को रिहा कर दिया गया है। उनमें से 7 लोग भारत वापस आ चुके हैं। कुछ समय पहले ही इनकी फाँसी की सजा पर कतर की अदालत ने रोक लगा दी थी। कतर के अमीर के हस्तक्षेप के बाद सभी 8 लोगों को जेल से आजादी मिल गई है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने कतर के अमीर के इस फैसले पर खुशी जताई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार की राजनयिक कोशिशों के चलते कतर ने ये फैसला लिया है। कतर का ये फैसला भारत-कतर के बीच ऐतिहासिक गैस समझौते के कुछ ही दिन बाद आया है। बता दें कि इन सभी लोगों को कथित तौर पर जासूसी के आरोपों में फाँसी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन अदालत से लेकर राजनयिक स्तर पर भारत सरकार ने इनकी रिहाई के लिए जोरदार पैरवी की और अब जाकर इन सभी पूर्व नौसैनिकों को रिहा कर दिया गया है। रिहा कर दिए गए 8 में से 7 पूर्व अधिकारी भारत वापस आ भी चुके हैं। इसके लिए विशेष तैयारी की गई थी।

कतर की जेल से रिहा होने वाले पूर्व नौसैनिक पहुँचे भारत, ये हैं नाम

कतर में जिन पूर्व नौसैनिकों को गिरफ्तार किया गया था, उनके नाम हैं- कमांडर पूर्णेन्द्रु तिवारी, कमांडर नवतेज सिंह गिल, कमांडर वीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ और कैप्टन गोपाकुमार। ये सभी गिरफ्तार होने से पहले दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी एंड कंसल्टेंसी में काम कर रहे थे। कथित तौर पर इन पर जासूसी के आरोप लगाए गए थे और फाँसी की सजा सुना दी गई थी। लेकिन दिसंबर 2023 की शुरुआत में भारत सरकार ने राजनयिक कोशिशों के चलते कांसुलर एक्सेस हासिल कर लिया था, इसके बाद उनकी फाँसी की सजा पर रोक लगवाई थी।

पीएम मोदी की मुलाकात ने बदला कतर का फैसला

बता दें कि पीएम मोदी ने दिसंबर 2023 की शुरुआत में दुबई में कतर के अमीर से मुलाकात की थी। तब पीएम मोदी COPE28 की बैठक में भाग लेने दुबई गए थे। इस मुलाकात के चार सप्ताह के भीतर ही फाँसी की सजा पलट दी गई थी। जब इस केस में सुनवाई हो रही थी, तब कोर्ट में भारत के राजदूत भी मौजूद थे। उनकी मौजूदी ये बताती है कि मोदी सरकार इस मामले को लेकर कितनी गंभीर थी।

कतर के फैसले का स्वागत

भारत के विदेश मंत्रालय ने कतर के इस फैसले का स्वागत किया है। विदेश मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है, “भारत सरकार कतर में हिरासत में लिए गए दहरा ग्लोबल कंपनी के लिए काम करने वाले आठ भारतीय नागरिकों की रिहाई का स्वागत करती है। उनमें से आठ में से सात भारत लौट आए हैं। हम इन नागरिकों की रिहाई और घर वापसी को सक्षम करने के लिए कतर के अमीर के फैसले की सराहना करते हैं।”

बता दें कि कतर की एक अदालत ने 26 अक्टूूबर, 2023 को भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई थी। साल 2022 में कतर की एक कंपनी में काम करने वाले इन अधिकारियों पर जासूसी का आरोप लगाकर वहाँ की इस्लामी सरकार ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया था। ये सभी पूर्व अधिकारी वहाँ की ‘अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज’ (ADGTCS) नाम की कंपनी के लिए काम कर रहे थे।