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अयोध्या मुक्त हुआ, अब मथुरा-काशी के मंदिर प्रेम से मिल जाएँ… अन्य मस्जिदों पर हिंदू छोड़ देंगे दावाः राम मंदिर के कोषाध्यक्ष का मुस्लिमों को ‘ऑफर’

काशी और मथुरा की मुक्ति पर स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने बड़ा प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा है कि अयोध्या की मुक्ति के बाद अब यदि हिंदुओं को ये दो मंदिर प्रेम से मिल जाएँ तो वे उन सैकड़ों मस्जिदों पर दावा छोड़ देंगे जो मंदिरों को ध्वस्त कर खड़ी की गईं हैं। स्वामी देव गिरी श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं।

22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा बाद आयोजित समारोह के दौरान उनका दिया संबोधन काफी वायरल हुआ था। अब मथुरा और काशी के मंदिरों की मुक्ति को लेकर उन्होंने यह प्रस्ताव पुणे में दिया है। यहाँ उनके जन्मदिन पर 4 से 11 फरवरी के बीच कई कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है।

स्वामी गोविंद देव गिरी ने पुणे में कहा, “तीन मंदिर (अयोध्या, मथुरा, काशी) मुक्त होने पर हम अन्य मंदिरों पर ध्यान देने की इच्छा भी नहीं करते हैं। हम लोगों को भविष्य काल में जीना है ना कि भूत काल में। देश का विकास होना चाहिए। यदि यह तीन मंदिर हमें शांति से मिल जाते हैं तो हम प्रेमपूर्वक सारी बातें भूल जाएँगे।”

इन तीन मंदिरों के अलावा अन्य धार्मिक स्थलों के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “उन लोगों को हम समझाएँगे, सारे स्थानों के लिए एक जैसी बात नहीं की जा सकती। कहीं-कहीं समझदार लोग होते हैं, कहीं नहीं होते। जहाँ जैसे व्यक्ति हैं, उस प्रकार से समझाने का प्रयास करेंगे, हम अशांति नहीं फैलने देंगे।”

उन्होंने मीडिया से ज्ञानवापी के मुद्दे पर बात करते हुए कहा, “हमारी हाथ जोड़ कर प्रार्थना है कि इन तीन मंदिरों को सौंप दिया जाना चाहिए, क्योंकि आक्रान्ताओं के हमारे पर किए गए आक्रमण के घाव हैं। इसके कारण लोगों के अन्तः करण में वेदना है। राष्ट्रीय समाज में एक वेदना है। अगर इसको यह लोग (मुस्लिम) दूर कर देते हैं, तो भाईचारा बढ़ने में सहयोग मिलेगा।”

स्वामी गोविन्द देव गिरी ने यह बयान अपने जन्मदिन पर पुणे में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया। इस दौरान काफी बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर संघचालक मोहन भागवत और आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर जैसी कई बड़ी हस्तियाँ भी मौजूद थीं।

गौरतलब है कि हाल ही में रामजन्मभूमि पर चली लम्बी लड़ाई के बाद अयोध्या के राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा हुई है। अब वाराणसी में ज्ञानवापी ढाँचे के नीचे हिंदू मंदिर होने की बात ASI के सर्वे से सामने आई है। मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को लेकर भी मामला कोर्ट में है।

स्वामी गोविंद देव गिरी का बयान इसी सम्बन्ध में आया है। स्वामी देव गिरी एक मराठी परिवार से आते हैं। संन्यास से पहले उनका नाम आचार्य किशोरजी मदनगोपाल व्यास था। उनका जन्म 1949 में महाराष्ट्र के बेलापुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह वेद, उपनिषद का ज्ञाता हैं और उन्हें दर्शनाचार्य की उपाधि मिली है। वे रामायण, महाभारत और शिव पुराण जैसे ग्रंथों के भी ज्ञाता हैं।

उन्होंने साल 2006 में कांची कामकोटि पीठ के स्वामी जयेंद्र सरस्वती से दीक्षा लेकर संन्यास लिया था। वर्तमान में वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के कोषाध्यक्ष हैं। राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के बाद उन्होंने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्रत खुलवाया था।

हिंदुओं को ‘कुत्ता और काफिर’ कहने वाला मौलाना सलमान अजहरी गिरफ्तार, बचाव में मुस्लिम भीड़ ने थाने के बाहर काटा बवाल

गुजरात के जूनागढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ भाषण देने वाले मौलाना सलमान अजहरी को गुजरात ATS ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उसे पहले मुंबई के घाटकोपर थाने में रखा गया था, जहाँ उसके समर्थकों ने भीड़ लगा कर बवाल काटा।

जानकारी के मुताबिक, जूनागढ़ में विवादित बयान देने वाले मौलाना के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद गुजरात ATS की एक टीम रविवार (4 फरवरी, 2024) की सुबह ही मुंबई पहुँच गई थी। इसके बाद में मौलाना अजहरी को गिरफ्तार किया गया और ट्रांजिट रिमांड मिलते ही उसे पुलिस जूनागढ़ ले कर चली गई।

रिमांड मिलने से पहले गुजरात पुलिस मौलाना अजहरी को मुंबई के घाटकोपर थाने लेकर गई थी, जहाँ उसके समर्थक बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए थे। सामने आई वीडियो में देख सकते हैं कि मौलाना के समर्थक वहाँ काफी देर बवाल मचाए, उसके बाद पुलिस ने मौलाना से बयान दिलवाकर भीड़ को शांत रहने की अपील की। लेकिन, भीड़ को थाने के बाहर लब्बैक-लब्बैक के नारे लगाते सुना जा सकता है।।

बता दें कि सलमान अजहरी की गिरफ्तारी के बाद मुस्लिम भीड़ उसे पुलिस कार्रवाई से बचाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। इसी क्रम में सोशल मीडिया में अभियान चला कर ज्यादा से ज्यादा लोगों को घाटकोपर थाने के बाहर इकट्ठा होने को कहा गया था और अपील की गई थी कि मौलाना को गुजरात नहीं जाने देना है।

मुंबई में भी मामला दर्ज

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मौलाना के खिलाफ मुंबई में भी मामला दर्ज कर लिया गया है। मुंबई में उसके साथ ही दो और लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। मुंबई में मौलाना के खिलाफ धारा 153(C), 505(2), 188 और 114 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले उसके खिलाफ जूनागढ़ में पहले ही मामला दर्ज हुआ था और साथ ही जिस कार्यक्रम में उसने यह भड़काऊ भाषण दिया था उसके आयोजकों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। अब उसे भी पुलिस गुजरात लेकर पहुँच रही है।

यह पूरा मामला 31 जनवरी, 2024 को जूनागढ़ में एक इस्लामिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए भड़काऊ भाषण से जुड़ा है। इस भाषण का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद मौलाना अजहरी की गिरफ्तारी की माँग हुई थी।

मुफ्ती सलमान अज़हरी के वीडियो में क्या-क्या

ऑपइंडिया ने सबसे पहले इस मामले की रिपोर्ट की थी। 20-22 सेकंड के वायरल वीडियो को सर्च करने पर हमें मुफ्ती सलमान अज़हरी का वो भाषण मिला था, जो 53 मिनट का था। वायरल वीडियो इसी भाषण का एक छोटा सा हिस्सा थी। इस भाषण में मुफ्ती ने कई जगह भड़काऊ बातें कही थीं।

वीडियो को इस्लामिक चैनल ने पोस्ट किया था। इसमें वक्ता के तौर पर मुफ्ती सलमान अजहरी मंच पर दिख रहा था। यह कार्यक्रम गुजरात के जूनागढ़ में 31 जनवरी को हुआ था जबकि वीडियो 1 फरवरी 2024 को अपलोड किया गया था।

मुफ्ती सलमान अज़हरी ने अपने भाषण में कहा था – “मस्जिद में बुत रखने से मस्जिद बुतखाना नहीं बन जाती। तुमने एक रखा है, काबा में 360 रखे थे, फिर भी काबा तो काबा ही रहा, न तवाफ रुका, न हज रुका।”

अपने भाषण में मुफ्ती ने कहा, “इंकलाब आपके घर से होगा। उनमें मस्जिदों को बुतखाना बनाने की हिम्मत नहीं है। आपने मस्जिदों को वीरान छोड़ दिया है और हमारे यहाँ मुहावरा है कि जब मैदान खुला होता है तो कुत्तों का राज होता है। यदि तुम मैदान में घूमते रहोगे तो कोई कुत्ते नहीं होंगे।”

भाषण के अंत में उसने कहा था, ”मुसलमानों घबराओ मत, अभी खुदा की शान बाकी है। अभी इस्लाम जिंदा है, अभी कुरान बाकी है, ऐ जालिम काफिर क्या समझता है जो रोज हमसे उलझता है, अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है। कुछ देर की खामोशी है, किनारा आएगा… आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

बोर्ड पर लिखा था ज्ञानवापी ‘मस्जिद’, रोशन पाण्डेय ने चिपका दिया ‘मंदिर’ का स्टीकर: FIR के बाद बोले कोर्ट के आदेश के बाद यह मंदिर

वाराणसी कोर्ट के आदेश के बाद ज्ञानवापी के व्यास जी तहखाने में पूजा प्रारंभ होने के दौरान एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें एक व्यक्ति को उस बोर्ड पर ‘मंदिर’ का स्टीकर चिपकाते देखा गया था, जिस पर ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ लिखा हुआ था। स्टीकर चिपकाने वाले व्यक्ति राष्ट्रीय हिन्दू दल के अध्यक्ष रोशन पाण्डेय थे। अब उन पर पुलिस ने धार्मिक भावनाएँ भड़काने के मामले में FIR दर्ज की है।

पाण्डेय वाराणसी के सामने घाट इलाके के गंगोत्री विहार में रहते हैं। उन्होंने साइनबोर्ड पर ज्ञानवापी के आगे लिखे ‘मस्जिद’ शब्द के ऊपर मंदिर के स्टीकर अंग्रेजी और हिंदी दोनों में चिपकाए थे। उन्होंने यह काम वाराणसी जिला न्यायालय से हिन्दुओं को ज्ञानवापी ढाँचे के व्यास तहखाने में पूजा करने की अनुमति मिलने के बाद किया था।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार रोशन पाण्डेय हिन्दू समाज पार्टी के भी प्रदेश सचिव हैं। वे मूल रूप से बिहार के गया के रहने वाले हैं। उनके खिलाफ पुलिस ने धारा 153A (दो समूहों के बीच धार्मिक, भाषायी आया नस्लीय आधार पर भावनाएँ भड़काना), 505(2) (किसी धार्मिक, नस्लीय या भाषायी समूह के बारे में उलटी सीधी खबर फैलाना), 295A (जानबूझकर धार्मिक भावनाएँ भड़काना) और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

मामला दर्ज किए जाने से पहले रोशन पाण्डेय ने एक वीडियो जारी किया था। इसमें वह कहते दिखते हैं कि वारणसी कोर्ट ने हिन्दुओं को ज्ञानवापी के तहखाने में पूजा करने की इजाजत दे दी है, इसलिए यह मंदिर है। पाण्डेय ने बताया कि उन्होंने इसी के चलते मस्जिद के साइनबोर्ड को मंदिर से ढक दिया।

उनका कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद उनका ऐसा करना कानूनी तौर पर सही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले भी इस बात पर जोर दिया है कि ज्ञानवापी को मस्जिद कहना सही नहीं है। हालिया ASI की रिपोर्ट भी यही बताती है कि मस्जिद का निर्माण मंदिर को तोड़ कर किया गया था।

पाण्डेय ने कहा कि पुराना साइनबोर्ड श्रद्धालुओं में भ्रम पैदा कर रहा था, इसलिए उन्होंने इसे बदलने का फैसला किया। वे इससे पहले प्रशासन से भी साइन बोर्ड बदलने की अपील कर चुके थे। उन्होंने मुख्यमंत्री और पर्यटन विभाग से भी यह अपील की थी। रोशन पाण्डेय ने दावा किया कि उनके आवेदन स्वीकार नहीं किए गए, इसलिए उन्होंने राष्ट्रीय हिन्दू दल के साथ खुद ही इसे बदलने का निर्णय लिया।

उन्होंने दावा किया कि वारणसी का जिला प्रशासन इस कृत्य के लिए उनके खिलाफ एक्शन की धमकी दे रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले का संज्ञान लेने की अपील की है। सोशल मीडिया पर यह भी दावे हो रहे हैं कि रोशन पाण्डेय पर एससी/एसटी एक्ट लगाया गया है।

इस बीच वाराणसी पुलिस ने पाण्डेय को तलाशने के लिए अभियान चलाया हुआ है। पुलिस का कहना है कि पाण्डेय अभी फरार हैं। लंका थाने के दारोगा शिवाकांत मिश्रा का कहना है कि FIR नगवा पोस्ट के इंचार्ज अजय यादव की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है।

गौरतलब है कि 1 फरवरी 2024 को रोशन पाण्डेय ने वाराणसी में ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ लिखे साइन बोर्ड पर हरे रंग के मंदिर लिखे स्टीकर चिपकाए थे। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। उन्होंने यह कदम वाराणसी जिला न्यायालय के निर्णय के बाद उठाया था, जिसमें हिन्दुओं को ज्ञानवापी के भीतर व्यास तहखाने में पूजा की अनुमति दी गई थी। हाल ही में ज्ञानवापी पर आई ASI सर्वे की रिपोर्ट में बताया गया है कि यहाँ मौजूद वर्तमान मस्जिद से पहले कभी विशाल हिन्दू मंदिर था।

श्रीदेवी की हुई ‘हत्या’… महिला यूट्यूबर ने मौत को सनसनीखेज बनाने के लिए जाली दस्तावेजों का किया इस्तेमाल: CBI ने दायर की चार्जशीट, PM-रक्षा मंत्री के दिखाए थे फर्जी लेटर

बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रीदेवी की मौत को लेकर कॉन्सिपिरेसी थ्योरी परोसने वाली यूट्यूबर के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की है। उसने उनकी मौत को लेकर सनसनीखेज दावे किए थे। सीबीआई ने कहा कि दीप्ति आर पिन्नीति ने श्रीदेवी की मौत पर भारत और यूएई सरकार पर आरोप लगाए थे और ऐसा करने के लिए उसने जिन दस्तावेजों का सहारा लिया था, वो दस्तावेज फर्जी थे।

खुद को इन्वेस्टिगेटर कहने वाली भुवनेश्‍वर की रहने वाली दीप्ति के खिलाफ अब सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया है। दीप्ति ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर भी ऐसे ही सनसनीखेज दावे किए थे। उससे पहले उसने फरवरी 2018 में दुबई में हुई श्रीदेवी की मौत पर वीडियो बनाई थी। दीप्ति ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से इन दोनों मौतों पर टिप्पणी की और सबूत पेश किए थे।

उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पत्र शेयर कर दावे किए थे। इस मामले में मुंबई की वकील चाँदनी शाह की शिकायत के आधार पर सीबीआई ने दीप्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। शाह ने बताया था कि अपने वीडियो और लाइव सत्र में, दीप्ति ने जो यूएई सरकार के रिकॉर्ड पेश किए, वे जाली थे। इस मामले में अब सीबीआई ने भी कहा है कि ये सभी पत्र फर्जी थे।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में सीबीआई ने दीप्ति के घर पर छापा मारा था और उनके फोन और लैपटॉप जब्त कर लिए थे। सीबीआई ने स्पेशल कोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जाँच से पता चला कि यूट्यूब पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से संबंधित उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ ‘जाली’ थे।

सीबीआई का कहना है कि यूट्यूबर दीप्ति ने श्रीदेवी की मौत के मामले की जाँच कर रहे सीबीआई अधिकारियों के फर्जी दस्तावेज बनाए और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए। यूट्यूबर ने दावा किया था कि दस्तावेजों से पता चलता है कि श्रीदेवी की हत्या की गई थी।

हालाँकि सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल करने को लेकर पिन्नीति ने कहा, “यह मानना कठिन है कि सीबीआई ने मेरा बयान दर्ज किए बिना मेरे खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।” दीप्ति ने कहा कि उन्होंने ये दस्तावेज कोर्ट में रखे हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनके पास दुबई से गवाह भी हैं।

जिस मौलाना ने कहा- मुस्लिमों घबराना मत, उसके गिरफ्तार होते ही मुस्लिम पत्रकार करने लगे बाप रे बाप: बताया नया ‘औरंगजेब’, इस्लामी भीड़ पहले से सड़कों पर

हिंदुओं की आस्था पर जहर उगलने वाले और उनकी तुलना कुत्तों से करने वाले मौलाना सलमान अजहरी की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर तथाकथित निष्पक्ष पत्रकार उनके समर्थन में उतर गए हैं। कहा जा रहा है कि ऑनलाइन ट्रोलर्स ने जानबूझकर ऐसी वीडियो काटकर वायरल की जिसकी वजह से सलमान अजहरी को गिरफ्तार किया गया है।

जनता के रिपोर्टर के संस्थापक रिफत जावेद ने लिखा, “मुफ्ती सलमान अजहरी की गिरफ्तारी बहुत ही शर्मनाक बात है। हैरान भी नहीं हूँ कि इसमें गुजरात पुलिस का हाथ है। ये वही पुलिस है जो काजल हिंदुस्तानी जैसे नफरत फैलाने वालों को नहीं पकड़ती। डोंगरी के मुस्लिमों का क्या वो तो बस तीसरे दर्जे के कॉमेडियन और रियलिटी शो विजेता के लिए एकजुट होने में ही अच्छे हैं।”

पत्रकार वाजिद खान ने सलमान अजहरी की फोटो वीडियो डालते हुए अजहरी को छोड़ने की माँग की। वाजिद ने एक ट्वीट में लिखा, “वक्त के फिरओंन, तुम किस किस पे जुल्मों सितम ढाओगे। आज नहीं तो कल ज़रूर हश्र में पछताओगे।” इसके अलावा यह भी बताया कि AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने घाटकोपर में मुफ्ती से मुलाकात की और साथ में लिखा कि भारत का हर मुसलमान सलमान अजहरी के साथ खड़ा है।

खुद को डरे हुआ पत्रकार बताने वाला अली सोहराब ने लिखा, सलमान अजहरी साहब को संवैधानिक पुलिस द्वारा कोर्ट के बाहर घुमाया जा रहा है।

बायो में खुद को खेल पत्रकार लिखने वाले रेहान मलिक ने भी इस मुद्दे को उठाया। रेहान ने लिखा, “मुसलमानों आज आवाज नहीं उठाओगे तो कल दबा दिए जाओगे, फिर रोना मत, मुस्लिमों के लिए एकजुट होने का समय है।”

रेहान ने अपने एक ट्वीट में मुफ्ती सलमान की तुलना औरंगजेब आलम से की और ये भी कहा कि हर मुसलमान को अजहरी का समर्थन करना चाहिए।

बता दें कि केवल इस्लामी पत्रकार ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर #ReleaseMuftiSalmanAzhari #IStandWithSalmanAzhari जैसे हैशटैग चलाए जा रहे हैं। इससे पहले सलमान अजहरी के समर्थक सड़कों पर उतरकर बवाल करने लगे थे। हालाँक पुलिस ने फिर मौलाना से बयान दिलवाया। जिसमें भीड़ से शांत रहने की अपील की गई।

मालूम हो कि सलमान अजहरी की एक 53 मिनट की वीडियो इस माह के शुरुआत में खूब वायरल हुई। इस वीडियो में अजहरी को कहते सुना गया कि बुत रखने से मस्जिद बुतखाना नहीं बनेगा। इसके अलावा वीडियो में हिंदुओं की तुलना कुत्तों से की गई थी और मुसलमानों को भी भड़काने का काम हुआ था। वीडियो में मौलाना ने कहा था,

”मुसलमानों घबराओ मत, अभी खुदा की शान बाकी है। अभी इस्लाम जिंदा है, अभी कुरान बाकी है, ऐ जालिम काफिर क्या समझता है जो रोज हमसे उलझता है, अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है। कुछ देर की खामोशी है, किनारा आएगा…आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

इस भाषण के वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद ही मौलाना पर एफआईआर हुई और गुजरात एटीएस ने जाकर मौलाना को गिरफ्तार किया।

काले झंडों और जूतों से हुआ सनातन विरोधी स्वामी प्रसाद मौर्या का स्वागत, रोकना पड़ा काफिला: समाजवादी पार्टी ने आक्रोशित लोगों को कहा ‘गुंडा’

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से सटे कौशांबी में सनातन विरोधी समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या को काले झंडे दिखाए गए हैं। कौशांबी में हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने स्वामी प्रसाद के काफिले को काले झंडे दिखाएँ और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन भी किया। वो स्वामी प्रसाद मौर्या के सनातन निरोधी बयानों का विरोध कर रहे थे।

कौशांबी में चल रहे ‘राष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव’ में शामिल होने के लिए स्वामी प्रसाद मौर्या वहाँ पहुँचे थे। इसी दौरान ‘हिंदू जागरण मंच’ के कार्यकर्ताओं ने काले झंडे और जूते दिखाए। इसके बाद पुलिस ने दो कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।

कौशांबी जिले के मंझनपुर के सीओ अभिषेक सिंह ने बताया कि सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या मंझरपुर थाना इलाके में आयोजित ‘राष्ट्रीय बौध महोत्सव’ में हिस्सा लेने के लिए पहुँच रहे थे, तभी ये घटना हुई। यहाँ हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या का विरोध किया और काफिले का घेराव कर काला कपड़ा भी दिखाया।

इस मामले में समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। सपा ने एक्स पर लिखा- “कौशांबी में सपा के वरिष्ठ नेता एवं एमएलसी श्री स्वामी प्रसाद मौर्या जी की गाड़ी पर सत्ता संरक्षित गुंडों द्वारा हमला, अत्यंत निंदनीय. पिछड़ा विरोधी इस भाजपा सरकार में निरंतर पिछड़ों पर हो रहा आघात, शर्मनाक। मामले की जाँच कराए सरकार, आरोपितों के विरुद्ध हो सख्त से सख्त कार्रवाई।”

स्वामी प्रसाद मौर्या की भी इस मामले में प्रतिक्रिया सामने आई है। हर बार की तरह यहाँ भी उन्होंने विक्टिम कार्ड ही खेला। स्वामी प्रसाद मौर्या ने मीडिया से कहा, “दलितों, गरीबों, पिछड़े वर्ग पर सदियों से हमला हो रहा है, लेकिन हमारी संस्कृति हमलावरों को माफ करने की भी है… मुझे उम्मीद है कि वे अराजकता का रास्ता छोड़ेंगे।” उन्होंने कहा, “जिसके दिल में काला है, जिसका दिल काला है, जिसका मन काला है, जिसका विचार काला है, वह काला झंडा लेकर तो आयेगा ही।”

बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्या अक्सर सनातन विरोधी बयान देते रहे हैं। उन्होंने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय भी सनातन विरोधी बयान देते हुए रामचरित मानस को बकवास बताया था। स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा, “देखो-सुनो, पूरी दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहाँ पत्थरों में प्राण प्रतिष्ठा किया जाता है। हमारे समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता हैं भाटी जी, जिन्होंने कहा कि संत जी वो तो अच्छा है, अपने परिवार में मरने वाले लोगों की जनवासे होती हैं। उसमें भी प्राण प्रतिष्ठा कर दो। हमेशा जिंदा रहा करेंगे, फिर मरेंगे ही नहीं अमर हो जाएँगे।”

उन्होंने आगे कहा था, “अगर प्राण प्रतिष्ठा करने से पत्थर सजीव हो जाता है तो प्राण प्रतिष्ठा करने से मुर्दा क्यों नहीं चल सकता है। यहाँ पर पाखंड है, ढोंग है, आडंबर है। और वैसे भी जो खुद भगवान है, जो सबका कल्याण करता है। हम इंसान की क्या हैसियत की हम उसको प्राण प्रतिष्ठा करें।”

उत्तराखंड कैबिनेट ने UCC की रिपोर्ट पर लगाई मुहर, अब विधानसभा में लाकर बनाया जाएगा कानून: CM धामी के आवास पर हुई बैठक में फैसला

उत्तराखंड सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) लाने की तैयारी अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सरकारी आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में यूसीसी कमेटी की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया। इसे 6 फरवरी को विधानसभा के पटल पर रखा जा सकता है।

यूसीसी मसौदा रिपोर्ट को कैबिनेट की मंजूरी के साथ सरकार 6 फरवरी को उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दौरान यूसीसी विधेयक पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उत्तराखंड विधानसभा का चार दिवसीय विशेष सत्र पहले ही 5-8 फरवरी तक बुलाया जा चुका है। इसके लागू होते ही उत्तराखंड आजादी के बाद यूसीसी अपनाने वाला पहला भारतीय राज्य बन जाएगा। यह पुर्तगाली शासन के दिनों से ही गोवा में चालू है।

इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास पर कैबिनेट की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें उत्तराखंड कैबिनेट ने यूसीसी रिपोर्ट को मंजूरी दे दी।

सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई वाली यूसीसी मसौदा समिति ने शुक्रवार (2 फरवरी 2024) को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को मसौदा सौंपा। धामी ने पहले बताया था कि यूसीसी ड्राफ्ट पर 2,33,000 लोगों ने सुझाव दिए हैं। उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था, “मसौदा रिपोर्ट लगभग 740 पेज लंबी है और 4 खंडों में है…।”

यूसीसी राज्य में जाति और धर्म के बावजूद सभी समुदायों के लिए समान नागरिक कानून का प्रस्ताव करता है। यह सभी नागरिकों के लिए समान विवाह, तलाक, भूमि, संपत्ति और विरासत कानूनों के लिए एक कानूनी ढाँचा प्रदान करेगा। उत्तराखंड में यूसीसी विधेयक का पारित होना 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य के लोगों से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा किए गए एक प्रमुख वादे को पूरा करने का प्रतीक होगा।

यूसीसी के विरोध में तीखी प्रतिक्रिया

बता दें कि देहरादून के शहर काजी ने धमकी देते हुए इस पर आपत्ति जताई थी। देहरादून के शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी ने यूसीसी लागू किए जाने पर नुकसान की चेतावनी हेते हुए कहा है कि सरकार जो चाहे वह फैसला ले सकती है। उनके हाथ में प्रदेश की बागडोर है। लेकिन, इस फैसले को लागू किए जाने के बाद आगे जो भी नुकसान होगा, उसकी भी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

कॉन्ग्रेस ने भी किया विरोध

इस्लामी तुष्टिकरण की अपनी लाइन पर चलते हुए कॉन्ग्रेस भी इस फैसले पर सवाल उठा रही है। राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए पार्टी ने कहा है कि इस तरह की नीति से उत्तराखंड को कोई फायदा नहीं होने वाला। भाजपा सिर्फ लोकसभा चुनाव में फायदा उठाने की कोशिश के लिए ऐसे काम कर रही है।

कॉन्ग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने बीजेपी पर ध्रुवीकरण के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने यूसीसी पर किन लोगों की राय ली है, वो बताए। सिविल लॉ के किन प्रावधानों को बदले जाने की जरूरत महसूस हुई, सरकार वो भी सामने रखे। धस्माना ने कहा कि हमें यूसीसी से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इससे उत्तराखंड में किसी भी तबके को कोई लाभ नहीं होने वाला है।

पोलैंड भागने की तैयारी में था तिहरे हत्याकांड वाला लल्लन खान, योगी सरकार ने बाप-बेटे पर लगा दिया NSA: नेपाल जाने से पहले ही धरा गया ‘गब्बर’

उत्तर प्रदेश के लखनऊ के मलिहाबाद में हुए तिहरे हत्याकांड के मुख्य आरोपित लल्लन खान उर्फ सिराज और उसके बेटे फराज पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया जाएगा। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का मानना है कि यह हत्याकांड सिर्फ आपसी रंजिश का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे पाकिस्तान और नेपाल से तार जुड़े हो सकते हैं। पुलिस दोनों आरोपितों से पूछताछ कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लल्लन खान उर्फ गब्बर खान उर्फ सिराज (उम्र 70) ने अपने बेटे फराज के साथ शुक्रवार (2 फरवरी, 2024) शाम जमीन विवाद में 15 साल के मासूम बच्चे समेत 3 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद से दोनों फरार हो गए थे और मुरादाबाद में जाकर छिप गए थे। अब दोनों को ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लल्लन खान के दो बेटे पोलैंड रहते हैं, वो किसी तरह से नेपाल भाग जाना चाहता था और वहाँ से वो भी अपने तीसरे बेटे के साथ पोलैंड ही भागने की जुगत में था। जब उसके सारे रास्ते बंद हो गए, तब वो अपने वकीलों के माध्यम से कोर्ट में सरेंडर की योजना बनाने लगा, लेकिन वो सरेंडर कर पाता, इससे पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

लल्लन खान का पाकिस्तान से भी कनेक्शन सामने आ रहा है, साथ ही वो जिस नेपाल के रास्ते पोलैंड भागने की फिराक में था, वहाँ से भी उसका और पोलैंड में बैठे बेटों का कनेक्शन है। लल्लन खान को इस वारदात के महज 36 घंटों में ही गिरफ्तार कर लिया गया। दरअसल, उसके पास पासपोर्ट समेत जरूरी चीजें मौजूद थी। उसके पास पैसों की भी कोई कमीं नहीं। ऐसे में पुलिस ने आशंका जताई थी कि वो विदेश भागने का प्रयास कर सकता है।

लल्लन खान खुद को गब्बर खान कहलवाना पसंद करता था, उसके ऊपर कभी दो दर्जन मामले दर्ज हुआ करते थे। भले ही आखिरी मुकदला 1999 में दर्ज हुआ हो, लेकिन 70 साल की उम्र में जिस खौफनाक तरीके से उसने ट्रिपल मर्डर को अंजाम दिया, उससे उसकी दबंगई का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे में पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए मजबूत जाल बिछाया। उसकी तस्वीरें एयरपोर्ट से लेकर बड़े बस अड्डों को भी भेजी गई। पुलिस ने एयरपोर्ट के साथ-साथ यूपी के सभी जिलों और एसएसबी को भी अलर्ट पर रखा था। चूँकि मुरादाबाद की तरफ उसका लोकेशन मिल रहा था, ऐसे में पुलिस ने मुरादाबाद की तरफ ध्यान केंद्रित किया।

यूपी तक के मुताबिक, डीसीपी वेस्ट राहुल राज ने बताया कि 36 घंटे के अंदर दोनों मुख्य संदिग्धों को पकड़ लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सिराज के दो बेटे नेपाल कनेक्शन के कारण पोलैंड में हैं, जिससे उनके भागने की चिंता बढ़ गई थी। पुलिस ने हवाई अड्डों और सीमाओं पर अधिकारियों को सतर्क कर दिया और पाँच टीमों के साथ निगरानी शुरू कर दी। हालाँकि, अब वो पकड़ लिया गया है और उससे पूछताछ शुरू कर दी गई है।

लखनऊ पुलिस ने बताया है कि लल्लन खान जैसे आपराधिक रिकॉर्ड वाला व्यक्ति इतने समय तक शांत कैसे बैठा था, ऐसे में उसकी जाँच बेहद जरूरी है। पुलिस ने बताया है कि वो अब लल्लन खान पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करेगी। इसके तहत लल्लन खान की अवैध संपत्तियाँ भी कुर्क की जाएँगी। यही नहीं, इनके नेपाल, पोलैंड और पाकिस्तानी कनेक्शन को देखते हुए एनएसए लगाया जा रहा है और इन कनेक्शन की भी पूरी तरह से जाँच की जाएगी। अब ये अपराधी किसी भी सूरत में बच नहीं पाएंगे।

पूनम पांडेय के सस्ते पब्लिसिटी स्टंट पर होगी कार्रवाई? अगर किसी पुरुष ने ऐसा किया होता तब?

तो जिंदा है पूनम पांडेय? आखिर यह स्टंट क्यों और इस पर कार्रवाई कब? यह कितनी अजीब बात है कि एक दिन पहले जिसने अपने मरने की अफवाह फैलाई, वह अगले दिन जिंदा निकली। और वह भी इस कारण अफवाह फैलाई थी क्योंकि वह कथित रूप से जागरूकता पैदा करना चाहती थी। यह जागरूकता भी अजीब चीज है, जो पैदा करने के लिए इतनी बड़ी सनसनी फैलाई जा सकती है। वैसे पूनम पांडेय सनसनी का ही दूसरा नाम है।

पूनम पांडेय के कार्य पर कोई टिप्पणी न करते हुए उनके सनसनी फैलाने वाले क़दमों पर ही बात की जानी चाहिए। पूनम पांडेय, पहले भी इस प्रकार के कार्य कर चुकी हैं और इसे लेकर किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए थी, मगर इस प्रकार से मौत का मजाक बनाना? लोगों को बेवकूफ समझना? कुछ देर के लिए लोगों को यह खबर सही लगी कि पूनम पांडेय अब इस दुनिया में नहीं रही हैं, मगर उसके बाद लोगों के दिल में संदेह पैदा होने लगा।

क्योंकि, सर्वाइकल कैंसर एकदम से जान नहीं ले सकता है और जो महिला कुछ ही दिन पहले आयोजनों में सम्मिलित हो रही हो, वह एकदम से कैसे मर सकती है? यह एकदम से मरने की बात लोगों को समझ नहीं आई और लोग कहने लगे कि कुछ गलत है। मगर जब पूनम पांडेय ने आकर यह कहा कि वह जीवित हैं तो लोगों का गुस्सा भड़क गया। उन्हें लगा कि कैसे कोई अपनी मौत को लेकर पब्लिसिटी स्टंट कर सकता है? ‘ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने तो पूनम पांडेय पर FIR दर्ज कराने की भी बात की।

उनका कहना था कि क्या यह मजाक है? आप सस्ती लोकप्रियता के लिए इस सीमा तक नीचे गिर सकती हैं? बॉलीवुड में अभी तक किसी ने ऐसी सस्ती हरकत नहीं की है। आपने लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है और उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर कराना इसलिए आवश्यक है जिससे कोई और व्यक्ति कभी भी ऐसी हरकत न करे। अब एक सबसे महत्वपूर्ण बात यहाँ पर उभरकर आती है कि यदि पूनम पांडेय के स्थान पर कोई पुरुष ऐसा कोई चीप पब्लिसिटी स्टंट करता तो क्या होता?

क्या पुलिस अभी तक उसके घर पर नहीं पहुँच गई होती? क्या उसे लेकर नकारात्मक बातें नहीं हो रही होतीं? उसे माफी माँगने पर मजबूर नहीं किया जा रहा होता? सब कुछ होता? पूनम पांडेय की इस हरकत पर लोग निंदा तो कर रहे हैं, मगर यह तब तक अधूरा है जब तक इस प्रकार के पब्लिसिटी स्टंट को लेकर कोई कानूनी कदम नहीं उठाया जाता। क्या पूनम पांडेय का यह जागरूकता स्टंट सरकार द्वारा की गई इस घोषणा से बढकर है कि वह सर्वाइकल कैंसर के लिए टीकाकरण अभियान चलाएगी?

क्या कई डॉक्टरों द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों से बढ़ कर यह स्टंट था? यदि नहीं तो क्या पूनम पांडेय को बिना किसी कानूनी कार्यवाही के छोड़ दिया जाना चाहिए? हालाँकि, उन पर कदम तभी उठाया जाना चाहिए था, जब उन्होंने वर्ष 2011 में क्रिकेट विश्व कप के दौरान यह दावा किया था कि विश्व कप जीतने पर वह न्यूड होंगी और इसके बाद भी कई अनाप-शनाप बातों के चलते वह चर्चा में रही थीं। दरअसल, पूनम पांडेय जैसे लोगों को चर्चा ही चाहिए होती है, परन्तु मौत को लेकर इस प्रकार के स्टंट नहीं होने चाहिए और अगर ऐसा कोई करता है, तो इस पर कड़े से कड़ा कदम उठाया जाना चाहिए, इसमें कोई भी रियायत नहीं होनी चाहिए।

हिंदू परिवार ने मुस्लिमों पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप, धर्मांतरण की दी धमकी: दरभंगा पुलिस ने बताया जमीनी विवाद

बिहार के दरभंगा जिले के एक हिंदू परिवार ने इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया जाने का आरोप लगाया है। परिवार ने मारपीट और आपत्तिजनक चीजें फेंकेने का भी आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि मुस्लिम बाहुल्य गाँव में वे इकलौते हिंदू परिवार हैं जिसके कारण उन्हें परेशान किया जा रहा है। हालाँकि प्रशासन ने इसे जमीनी विवाद बताते हुए धार्मिक विवाद या दबंगई के आरोपों को खारिज किया है।

पीड़ित परिवार ने मोहम्मद गुड्डू और मोहम्मद लड्डू समेत उनके पाँच भाइयों पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। ये मामला दरभंगा के भालपट्टी ओपी थाना इलाके के मुरिया गाँव का है। यहाँ राजधन देवी अपने परिवार के साथ रहती हैं। उनके बेटे विक्की अपनी परेशानी लेकर डीएम राजीव रौशन के पास पहुँचे, तब जाकर मामला मीडिया की नजर में आया।

पीड़िता महिला ने अपने बेटे के माध्यम से जिलाधिकारी को दिए गए आवेदन में कहा है कि उसका परिवार जिस गाँव में रहता है, वह पूरा इलाका मुस्लिमों का है और गाँव में उसका अकेला हिन्दू परिवार है। ऐसे में दूसरे समुदाय के लोग लगातार उसे अलग अलग तरह से न सिर्फ प्रताड़ित कर रहे हैं बल्कि उसके घर में भी घुसकर हंगामा करता है। विक्की ने यह भी आरोप लगाया है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा उसके घर के अंदर आपत्तिजनक सामान फेंक दिया जाता है।

विक्की ने दैनिक भास्कर से बातचीत में मोहम्मद गुड्डू और मोहम्मद लड्डू के परिवार पर आरोप लगाए हैं। विक्की ने कहा कि गुड्डू और लड्डू 5 भाई हैं और वो लोग चाहते हैं कि उनका परिवार अपना घर छोड़कर चला जाए। या फिर इस्लाम धर्म कबूल कर लें। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विक्की ने कहा अब मुझे लगता है कि हमारे संविधान में हिन्दू को रहने का अधिकार नहीं है। इसलिए सभी अधिकारी हमें घुमा रहे है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि वह पिछले तीन साल से अधिकारियों के यहाँ चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। जिलाधिकारी राजीव रौशन ने कहा है कि एक लड़का इस संबंध में हमसे मुलाकात करने आया था। आवेदन प्राप्त होने के बाद जाँच के लिए सदर अनुमंडल अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि तुरंत गाँव पहुँच कर पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करे।

नोटः दरभंगा पुलिस ने इस मामले में धार्मिक विवाद से इनकार किया है। यह तथ्य सामने आने के बाद इसे रिपोर्ट में शामिल कर दिया गया है। इस मामले से जुड़ी अपडेटेड खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें