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जाकिर नाइक का फैन है मुन्नन खाँ का बेटा मोहम्मद कासिम, खौफ बाप जैसा ही: CAA विरोधी हिंसा में था शामिल, SDM की किडनैपिंग में हो चुकी है उम्रकैद; गैंगस्टर ऐक्ट में कई केस

अयोध्या के नवनिर्मित राममंदिर में 22 जनवरी 2024 को भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा हो गई। भगवान राम की जन्मभूमि को लेकर हिंदुओं द्वारा किए गए संघर्षों के कई अनजान पहलुओं से लोगों को ऑपइंडिया लगातार परिचित करवाता आ रहा है। इस क्रम में कारसेवकों के नरसंहार में तत्कालीन सांसद मुन्नन खाँ के नाम से जाना जाने वाला फसीउर रहमान की संदिग्ध भूमिका सामने आई।

इस मामले की तह में जाने पर हमें मुन्नन खाँ के काले कारनामों की जानकारी मिली, जिनमें हत्या की नियत से SDM का अपहरण और दंगों में हिन्दुओं पर अत्याचार शामिल है। मुन्नन खाँ के गृह जनमद गोंडा में हमारी पड़ताल के दौरान पता चला कि कासिम खाँ अपने अब्बू मुन्नन खाँ की आपराधिक विरासत को आगे बढ़ा रहा है। गोंडा पुलिस की लिस्ट में कासिम खाँ का नाम एक गैंगस्टर के तौर पर दर्ज है।

अब्बू के साथ ही शुरू किया था अपराध

मोहम्मद कासिम ने अपने अब्बू मुन्नन खाँ के साथ ही अपराध की दुनिया में कदम रखा था। उस पर पहला केस आज से 35 साल पहले 1989 में दर्ज हुआ था। यह आपराधिक मुकदमा बलरामपुर जिले के थाना कोतवाली रेहरा बाजार में दर्ज हुआ था। अपराध संख्या 82/89 के तहत दर्ज हुई इस FIR में कासिम पर IPC की धारा 147, 149, 332, 307, 353, 368 और 506 के तहत कार्रवाई हुई थी।

इसी साल मोहम्मद कासिम खाँ ने अपना दूसरा अपराध बलरामपुर जिले के ही उतरौला कोतवाली क्षेत्र में किया था। तब उस पर FIR संख्या 225/89 में IPC की धारा 147, 149, 332, 307, 364, 504 और 506 के अलावा 7 सी एल एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी।

SDM अपहरण और पिटाई मामले में हुई थी उम्रकैद

मुन्नन खाँ के बेटे कासिम ने 18 नवंबर 1989 में बलरामपुर जिले के उतरौला SDM के अपहरण में अपने अब्बा की मदद की थी। तब मुन्नन खाँ गोंडा जिले के कटरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक था। लगभग 25 लोगों को लेकर मुन्नन और उसका बेटा कासिम SDM ऑफिस पहुँचा। यहाँ उसने उपजिलाधिकारी आरपी सिंह की बेरहमी से पिटाई की थी। फिर उन्हें अपनी जीप में लादकर साथ ले जाने लगा।

पुलिस ने घेराबंदी की तो मुन्नन खाँ और उसके साथी रेहरा थाने के पास मिल गए। SDM को अपने साथ ले जाने के लिए कासिम खाँ ने अपने अब्बू और गुर्गों के साथ मिलकर पुलिस से भी हाथापाई की। आखिरकार SDM को बचा लिया गया। इस मामले पुलिस ने एक और FIR दर्ज कराई, जिसमें मुन्नन खाँ और उसके बेटे कासिम आरोपित बनाए गए। पुलिस से मारपीट का यह केस आज भी अदालत में है।

वहीं, SDM के अपहरण का मामला जिला अदालत में लगभग 26 वर्ष चला। इस बीच मुन्नन खाँ की मौत भी हो गई थी। आखिरकार बलरामपुर की जिला अदालत फैसला सुना दिया। सत्र न्यायाधीश उमेश चंद्र शर्मा ने अगस्त 2016 में फैसला सुना दिया। फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश शर्मा ने मुन्नन खाँ के बेटे कासिम सहित मोहम्मद बशीर, यार मोहम्मद और बशीर अहमद को उम्रकैद सजा सुनाई।

इसके साथ ही कोर्ट ने इन आरोपितों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। इस केस में एक और आरोपित था, जिसका नाम वलीउर्रहमान है। उसे कोर्ट ने 10 साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माने का दंड दिया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान वलीउर्रहमान खुद को बीमार बताता और बैसाखी लेकर कोर्ट आता था। SDM अपहरण मामले में वह हाई कोर्ट से जमानत पर बाहर है।

सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़ा, रोकने पर गुंडागर्दी

कासिम खाँ सिर्फ मारपीट ही नहीं, बल्कि सरकारी जमीनों पर कब्जे आदि का काम भी करता था। कासिम खाँ ने गोंडा जिले में मौजूद नजूल भूमि (जिस भूमि पर किसी का मालिकाना हक ना हो) पर भी अवैध कब्ज़ा कर लिया था। इसको लेकर कासिम के खिलाफ जनवरी 2017 में FIR दर्ज हुई थी। यह FIR उससे संबंधित सरकारी विभाग के अधिकारी रघुनाथ तिवारी ने दर्ज करवाई थी।

इस सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करके कासिम खाँ एक कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण करवा रहा था। संबंधित विभाग के अधिकारियों ने कासिम को ऐसा करने से मना किया, लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद नजूल अधिकारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके आधार पर पुलिस ने कासिम को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में उस पर अलग से गैंगस्टर एक्ट भी लगा दिया गया था।

2017 में लगा था गैंगस्टर एक्ट

भले ही मुन्नन खाँ की मौत साल 2009 में हो गई थी, लेकिन उसकी दहशत को बनाए रखने की कोशिश उसके बेटे कासिम खाँ ने पूरी शिद्दत से की। कासिम के खिलाफ 1 फरवरी 2017 को गोंडा पुलिस ने FIR दर्ज की थी। यह FIR गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज हुई थी। इस FIR में मोहम्मद कासिम खाँ और उसके साथी मोहम्मद राशिद को नामजद किया गया है।

FIR में पुलिस ने लिखा था कि ऐसे पेशेवर अपराधी का बेरोकटोक घूमना सुरक्षित समाज के लिए खतरा है। रिपोर्ट में कासिम और उसके साथी राशिद की हरकतें आम आदमी के जीवन को नकारात्मक रूप में प्रभावित करने वाली बताई गईं थीं। कोतवाली नगर पुलिस ने मुन्नन के बेटे कासिम खाँ पर FIR संख्या- 152/2017 के अंतर्गत गैंगस्टर एक्ट की धारा 3(1) के तहत कार्रवाई की थी।

इलाके में खौफ, हत्या के लिए अपहरण

पुलिस ने अपनी FIR में कहा था कि कासिम खाँ अपनी गैंग को लेकर लॉ एन्ड ऑर्डर के लिए खतरा पैदा करता रहता है। कासिम अवैध तौर पर सरकारी जमीनों पर कब्ज़ा और हत्या के लिए अपहरण करने जैसे अपराधों से मिलने वाले पैसों से अपनी गैंग को चलाता है। FIR में पुलिस ने खुद माना था कि कासिम का इतना आतंक है कि लोग उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने से कतराते हैं।

कासिम के खिलाफ दर्ज मुकदमे का हिस्सा

जुलाई 2019 में कासिम को भू-माफिया भी घोषित कर दिया गया था। उसके बाद उसकी बेनामी सम्पत्तियों की जाँच शुरू की गई। हालाँकि, SDM अपहरण मामले में उम्रकैद की सजा होने और गैंगस्टर एक्ट लगने तथा भू-माफिया घोषित होने के बावजूद मुन्नन खाँ के बेटे कासिम खाँ की आपराधिक हरकतें बदस्तूर जारी रहीं और उस पर दर्ज FIR की संख्या बढ़ती रहीं।

CAA विरोधी हिंसा में पुलिस की गाड़ियाँ जलाने का प्रयास

कासिम पर पुलिस ने 20 दिसंबर 2019 में एक FIR करवाई। तब पुलिस ने कहा था कि शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज़ के बाद कासिम और उसके कई साथी गोंडा कोतवाली क्षेत्र के फारुखी मस्जिद के आगे CAA विरोधी प्रदर्शन किए और सरकार विरोधी नारे लगाए। मौके पर तैनात सब-इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबलों ने कासिम को धारा 144 लागू होने की बात बताते हुए उसे घर लौटने की हिदायत दी।

पुलिस की हिदायत का मोहम्मद कासिम और उसके साथियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। वो उत्तेजक नारेबाजी करने लगे। इसी दौरान भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने गालियाँ देते हुए पुलिस पर हमला कर दिया। इसी दौरान हमलावरों ने कहा, “सालों की गाड़ियों में आग लगा दो।” भीड़ को पुलिसकर्मियों की हत्या के लिए उकसाया जाने लगा। आखिरकार पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।

इस कार्रवाई से कानून व्यवस्था बिगड़ने से बची और आखिरकार अंत में सामान्य हो पाई थी। इस मामले में पुलिस ने हाजी शोएबुद्दीन, हाजी महमूद, हमज़ा हुसैन, सिराज अहमद, शाहिद हलवा पराठे वाले, मेराज अहमद, मशकूर अहमद, मुन्नू सुपारी, नबी खान, नदीम, फबी, असद गंजेड़ी के बेटे, कासिम, वजी, फसी आदि पर नामजद मामला दर्ज कराया।

इन लोगों के अलावा, मामले में भूर्रे फल वाले का लड़का, हाजी अंडा वाले का बेटा, मुन्ना, तहसीन, जावेद, महमूद, बाबू, चाँद, अब्दुल्ला,आरिफ, हारून और जाफर आदि को भी नामजद आरोपित किया गया था। अज्ञात में 210 आरोपितों को रखा गया था। इन सभी पर IPC की धारा 143, 188, 353, 117, 504 और 506 के तहत कार्रवाई हुई थी। ऑपइंडिया के पास इस FIR की कॉपी मौजूद है।

ओवैसी की पार्टी के नेता संग काटा था बवाल

CAA विरोध में गोंडा में हुए हिंसक प्रदर्शन में कासिम के सहयोगी के तौर पर हाजी महमूद भी नामजद हुआ था। हाजी महमूद ओवैसी ब्रदर्स की पार्टी (AIMIM) का गोंडा से तत्कालीन नगर अध्यक्ष था। बताया जा रहा है कि इस हिंसक प्रदर्शन के लिए हाजी महमूद और कासिम ने मिलपर पैसे भी जुटाए थे।

AMU का छात्र, ज़ाकिर नाइक और अरविन्द केजरीवाल समर्थक

साल 1989 में SDM के अपहरण में नामजद होने के लगभग 6 साल बाद कासिम खान ने पढ़ाई के नाम पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में दाखिला लिया और यहाँ पोस्ट ग्रेजुएशन किया। कासिम खुद को इंजीनियरिंग डिग्रीधारक बताता है। उसके साथी उसे इंजीनियर कासिम भाई कहते हैं। फ़िलहाल कासिम खाँ ने अपने पैतृक गाँव गोंडा के हलधर मऊ में ‘यूनिटी पब्लिक स्कूल’ खोल रखा है।

कासिम खान का पोस्ट

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कासिम फ़िलहाल कोई राजनैतिक पोस्ट शेयर नहीं कर रहा है। हालाँकि, 10 वर्ष पहले वह AAP और अरविंद केजरीवाल के समर्थन में पोस्ट डालता था। 27 नवंबर 2013 को कासिम ने भगोड़े ज़ाकिर नाइक की पोस्ट भी शेयर की थी और लोगों से शेयर करने की अपील भी की थी। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी अक्सर फोटो आदि शेयर किया था।

मुन्नन खाँ का भतीजा है सपा महासचिव

मुन्नन खाँ भले ही अपनी आपराधिक विरासत अपने बेटे कासिम को दे दिया हो, लेकिन उनकी राजनैतिक विरासत भतीजे महफूज खान ने संभाली है। मुन्नन के भतीजे महफूज खान समाजवादी पार्टी के टिकट पर MLC भी बने। सितंबर 2023 में पूर्व MLC महफूज खान की ताजपोशी समाजवादी पार्टी ने महासचिव के पद पर की है। कहा जाता है कि 1985 में जब मुन्नन पहली बार कटरा विधानसभा से चुनाव लड़े थे तब प्रचार और पोलिंग मैनेजमेंट का पूरा जिम्मा महफूज ने उठाया था।

‘जय श्रीराम’ और ‘वन्दे मातरम्’ की गूँज के बीच उत्तराखंड विधानसभा में आया UCC पर बिल, हलाला-बहुविवाह पर लगेगी रोक

समान नागरिक संहिता (UCC) को उत्तराखंड विधानसभा में पेश कर दिया गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने UCC विधेयक को सदन के पटल पर रखा। अब उत्तराखंड विधानसभा इस पर चर्चा करेगी जिसके बाद इसे यहाँ से पारित किया जाएगा।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी के विधानसभा में UCC पेश करते ही यहाँ मौजूद विधायकों ने वन्दे मातरम और जय श्रीराम के नारे लगाए। इस विधेयक पर चर्चा के लिए दोपहर के भोजन के बाद का समय तय किया गया है। विधानसभा में इस पर अब दोपहर 2 बजे से चर्चा होगी। इसे पहले मुख्यमंत्री अपने घर से भारत के संविधान की एक प्रति लेकर निकले थे।

इस विधेयक को उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया गया है। यह सत्र सोमवार (5 फरवरी, 2024) से चालू हुआ है और इसका अवसान बृहस्पतिवार( 8 फरवरी, 2024) को होगा। इस विधेयक को रविवार (4 फरवरी, 2024) को उत्तराखंड की कैबिनेट ने अपनी मंजूरी प्रदान की थी।

विधेयक का ड्राफ्ट एक पाँच सदस्यीय पैनल ने 2 फरवरी को उत्तराखंड सरकार को सौंपा था। यह पाँच सदस्यीय पैनल इस विधेयक की बारीकियों को समझने और उसे मूर्त रूप देने के लिए बनाया गया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना देसाई कर रहीं थीं।

इस विधेयक को पेश करने के साथ ही उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहाँ विधानसभा में UCC कानून लाया जा रहा है।

जानिए क्या होगा UCC का उत्तराखंड में प्रभाव?

समान नागरिक संहिता लागू होने से बहुविवाह पर रोक लगेगी। महिलाओं को पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलेगा एवं बच्चों को गोद लेने का भी अधिकार मिल सकता है। सभी धर्मों में लड़की की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होगी। वर्तमान में मुस्लिम समाज शरिया पर आधारित पर्सनल लॉ के तहत संचालित होता है। इसमें मुस्लिम पुरुषों को चार विवाह की इजाजत है। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मुस्लिम लड़कियों को भी लड़कों के बराबर अधिकार दिया जाएगा।

यूसीसी लागू होने से मुस्लिम समुदाय में इद्दत और हलाला जैसी प्रथा पर प्रतिबंध लग सकता है। तलाक के मामले में शौहर और बीवी को बराबर अधिकार मिलेगा। समान नागरिक संहिता में सभी धर्म के लोगों को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए पंजीकरण कराना जरूरी किया जाएगा। इसमें महिला और पुरुष की पूरी जानकारी होगी। ऐसे रिश्तों में रहने वाले लोगों को अपने माता-पिता को भी जानकारी देनी होगी।

समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विवाह का पंजीकरण कराना भी अनिवार्य किया जा सकता है। बिना रजिस्ट्रेशन विवाह अमान्य माने जाएँगे। समान नागरिक संहिता में नौकरीपेशा बेटे की मृत्यु की स्थिति में पत्नी को मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही बेटे के बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पत्नी पर होगी। अगर पति की मृत्यु के बाद पत्नी दोबारा शादी करती है तो उसे मिला हुआ मुआवजा माता-पिता को दिया जाएगा। पत्नी की मृत्यु होने की स्थिति में उसके माता-पिता की देखरेख की जिम्मेदारी पति पर होगी।

यूसीसी के तहत अनाथ बच्चों के लिए संरक्षण की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जा रहा है। पति-पत्नी के बीच विवाद की स्थिति में बच्चों की कस्टडी उसके दादा-दादी को दिए जाने का प्रावधान किया जा सकता है।

राहुल गाँधी की क्षमताओं पर उठाए सवाल तो चिदंबरम के बेटे को टिकट का काॅन्ग्रेस में विरोध, प्रणब की बेटी का क्या होगा: बोलीं शर्मिष्ठा- परिवार से बाहर देखें

मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली जिस यूपीए सरकार को सोनिया गाँधी पर्दे के पीछे से हाँकती थीं, उसके दो प्रमुख चेहरे थे। एक, पी चिदंबरम जिन्होंने गृह और वित्त मंत्रालय जैसे महकमे सँभाले। दूसरे, प्रणब मुखर्जी जो बाद में राष्ट्रपति भी बने। अब इन्हीं चिदंबरम के बेटे को लोकसभा चुनाव में टिकट देने का विरोध हो रहा है, क्योंकि उन्होंने राहुल गाँधी के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। ऐसे में सवाल उठता है कि काॅन्ग्रेस में प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा का क्या भविष्य होगा, क्योंकि उन्होंने भी राहुल पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पार्टी को परिवार से बाहर देखने की जरूरत है।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा है कि कॉन्ग्रेस को नेहरू-गाँधी परिवार के बाहर भी नेतृत्व के लिए देखना चाहिए। साथ ही कॉन्ग्रेस की आलोचना करने पर हाशिए पर धकेले जाने को लेकर भी प्रश्न उठाए हैं।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में कहा, “कॉन्ग्रेस के लिए इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि राहुल गाँधी 2014 और 2019 में बुरी तरीके से हारे। वे कॉन्ग्रेस का चेहरा थे। दो लोकसभा चुनाव हो चुके हैं, किसी भी और पार्टी में ऐसा होता क्या? भाजपा में ऐसा होता क्या? किसी नेता के नेतृत्व में पार्टी हार रही है तो पार्टी के लोगों के लिए सोचना जरूरी है कि उनका चेहरा कौन हो।”

उन्होंने कहा, “मैं एक जिम्मेदार नागरिक और कॉन्ग्रेस समर्थक होने के नाते पार्टी के लिए चिंतित हूँ। निश्चित रूप से समय आ गया है कि नेतृत्व के लिए नेहरू-गाँधी परिवार से बाहर भी देखा जाए।” इस दौरान शर्मिष्ठा मुखर्जी ने खुद को कॉन्ग्रेस की पक्की समर्थक बताया। उन्होंने कहा कि लोग भले ही विश्वास ना करें, लेकिन वह कॉन्ग्रेस की समर्थक हैं।

उन्होंने कॉन्ग्रेस में विरोध के स्वरों को उठाने पर किनारे किए जाने को लेकर कहा, “बोलने की आजादी का यह मतलब नहीं कि आप सिर्फ अपने नेता की ही बड़ाई करें और जैसे ही आप नेतृत्व की आलोचना करें, पूरा इकोसिस्टम आपको हाशिए पर धकेल दे। क्या यह बोलने की आजादी है?”

उन्होंने अपने पिता प्रणब मुखर्जी के विषय में बात करते हुए कहा, “मेरे पिताजी का कहना था कि लोकतंत्र में अलग अलग विचारधाराएँ होती हैं, आप दूसरे से असहमत हो सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं हो कि उनका अस्तित्व ही गलत है, यह लोकतंत्र के खिलाफ है। इसलिए वार्तालाप होना जरूरी है। इसलिए मेरे पिता को आपसी सहमति तैयार करने वाला व्यक्ति माना जाता था। लोकतंत्र में कहना ही नहीं, बल्कि सुनना भी बहुत जरूरी है। जिस आरएसएस प्रचारक को देश की जनता ने भारी बहुमत के साथ जिताया है आप उसे नजरअंदाज नहीं कर सकते।”

कार्ति चिदंबरम के टिकट का विरोध

पी चिदंबरम के बेटे और लोकसभा सांसद कार्ति चिदंबरम को राहुल गाँधी की क्षमताओं पर प्रश्न उठाने के लिए अब विरोध झेलना पड़ रहा है। उनको आगामी लोकसभा चुनावों में टिकट ना दिए जाने की माँग की जा रही है। उनकी लोकसभा सीट शिवगंगा की कॉन्ग्रेस कमेटी ने एक प्रस्ताव पास करके यह माँग की है।

उन्होंने बीते महीने एक इंटरव्यू में राहुल गाँधी की क्षमताओं पर प्रश्न उठाए थे। अब उनके खिलाफ पूर्व केंद्रीय मंत्री EM सुदर्शन नातिचप्पन और वरिष्ठ नेता केआर रामासामी ने भी यलगार का ऐलान किया है। इससे पहले कार्ति को इस मामले में नोटिस भेजा गया था।

शराब के बाद अब पानी पर घिरी AAP: 10 ठिकानों पर ED की दबिश, CM केजरीवाल के निजी सचिव और सांसद एनडी गुप्ता के आवास पर भी छापेमारी

जल बोर्ड टेंडर केस में आम आदमी पार्टी के सांसद एनडी गुप्ता के घर आज (6 फरवरी 2024) प्रवर्तन निदेशालय छापेमारी कर रही है। ये रेड दिल्ली के 10 ठिकानों पर मारी गई है। इसमें सीएम केजरीवाल के निजी सचिव विभव कुमार और आप से जुड़े अन्य लोगों के ठिकाने भी शामिल है। इन सबके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में छापेमारी हो रही है।

रेड की खबर आने के बाद दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री आतिशी मार्लेना ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, “सुनने में आया है कि मुख्यमंत्री के पीए सहित पार्टी के कई नेताओं के घर पर रेड हो रही है। ये हमें डराने धमकाने की कोशिश है। लेकिन मैं पीएम मोदी से कहना चाहती हूँ कि हम डरने वाले नहीं है।”

आतिशी ने यह भी कहा कि ईडी रेड के बाद दावा किया जाता है कि करोड़ों रुपयों की रिकवरी हो रही है। लेकिन दो साल और कई रेड के बाद भी कोई रुपया नहीं मिला है। दूसरी महत्वपूर्ण चीज है गवाही, लेकिन इन्हें कोई गवाही भी नहीं मिली है।

आप मंत्री ने दावा किया, “आज मैं खुलासा करूँगी कैसे ईडी ने सारी स्टेटमेंट में फर्जीवाड़ा किया है। कई विटनेस सामने आए, जिन्होंने कहा उनसे स्टेटमेंट दबावपूर्वक लिया गया है।”

आतिशी ने आरोप लगाए कि एक विटनेस ने उन्हें बताया है कि उसके कान पर जोर से थप्पड़ मारा गया। वहीं दूसरे विटनेस कहा गया, “तेरी बेटी कॉलेज कैसे जाएगी जबकि तीसरे को कहा गया कि तेरी बीवी को देख लेंगे।”

इंस्टाग्राम से दोस्ती, कैफे के बहाने घर ले जाकर NSUI नेता ने किया रेप: खुद को पूर्व CM भूपेश बघेल का ‘भतीजा’ बताता है निखिल

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन NSUI के प्रदेश सचिव निखिल बघेल पर एक युवती ने दुष्कर्म का आरोप लगाया है। युवती का कहना है कि आरोपित कैफे ले जाने के बहाने उसे अपने घर ले गया और बलात्कार किया। रिपोर्टों के अनुसार आरोपित खुद को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भतीजा बताता है। दोनों की साथ की कई तस्वीरें भी सामने आई है।

जानकारी के अनुसार NSUI के प्रदेश सचिव निखिल बघेल के विरुद्ध रायपुर के डीडीनगर थाने में एक 20 वर्षीय युवती ने मामला दर्ज करवाया है। पीड़िता BBA की पढ़ाई करती है और NEET की तैयारी में जुटी हुई है। उसने बताया है कि आरोपित निखिल बघेल से उसका परिचय एक माह पहले इन्स्टाग्राम के माध्यम से हुआ था।

युवती के अनुसार जान-पहचान होने के बाद निखिल रायपुर की उसी जिम में आने लगा जिसमें युवती भी जाती थी। कथित तौर पर 1 फरवरी 2024 को निखिल बघेल ने उसे व्हाट्सएप पर मैसेज कर जिम के बाहर बुलाया और कैफे ले जाने की जिद करने लगा। रायपुर के सुंदरनगर में आरोपित का खुद का कैफे है।

आरोपों के अनुसार जब युवती कैफे जाने को राजी हो गई तो निखिल ने उसे अपने घर चलने को मनाया। युवती से यह भी कहा कि उसकी माँ भी घर पर ही हैं। लेकिन जब युवती उसके घर पहुँची तो वहाँ कोई नहीं था। इसके बाद आरोपित निखिल बघेल उसको अपने बेडरूम में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। युवती से निखिल बघेल ने बाद में शादी का वादा भी किया। लेकिन, युवती ने 3 फरवरी को उसके खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया।

निखिल बघेल ने आरोपों से इनकार किया है। उसका कहना है कि युवती ब्लैकमेल कर रही है। कथित तौर पर युवती ने उससे शादी करने को कहा और मना करने पर धमकियाँ देने लगी। यह भी कहा जा रहा है कि पिछले साल इसी युवती ने रायपुर के एक डॉक्टर के खिलाफ भी दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि निखिल बघेल खुद को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भतीजा भी बताता है। उसके कैफे का उद्घाटन भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वर्ष 2018 में किया था। उद्धघाटन की तस्वीरों में वह पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ नजर आ रहा है। यह कैफे रायपुर में ‘द बज’ नाम से है।

राम मंदिर के लिए कॉन्ग्रेस- AAP ने PM मोदी को दिया धन्यवाद: गुजरात विधानसभा में आया सराहना प्रस्ताव, सर्वसम्मति से हुआ पारित

गुजरात विधानसभा में सोमवार (5 फरवरी 2023) को बजट सत्र के दौरान अयोध्या में बने नए राम मंदिर के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करने वाला एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। खास बात यह थी कि इस प्रस्ताव को आम आदमी पार्टी के अलावा कॉन्ग्रेस ने भी समर्थन दिया।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस संबंध में कहा, “हम सभी जानते हैं कि एक दूरदर्शी प्रधानमंत्री के कारण, समर्पित हिंदू समुदाय, जिसने 500 से अधिक वर्षों तक इंतजार किया, अयोध्या में एक भव्य मंदिर में राम लला का अभिषेक कर सका।”

उन्होंने रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा को ऐतिहासिक बताया और हिंदुओं की तरफ से पीएम मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, “…22 जनवरी को गुजरात के लोग भावुक हो गए, जब गुजरात के एक बेटे और इस प्रतिष्ठित सदन के पूर्व नेता नरेंद्रभाई मोदी ने राम लला की प्राण प्रतिष्ठा किया।”

अपने भाषा में सीएम पटेल ने पीएम मोदी के साथ इस मंदिर के निर्माण में अपना योगदान देने वाले दिग्गज नेताओं का धन्यवाद किया। उन्होंने बालासाहेब देओरा, विष्णु हरि डालमिया, रज्जू भैया, आचार्य गिरिराज किशोर और अशोक सिंगल जैसे आरएसएस/वीएचपी नेताओं का समर्थन किया।

कॉन्ग्रेस की तरफ से इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए पार्टी के वरिष्ठ विधायक अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि यह तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ही थे, जिन्होंने 1989 में उस स्थान पर शिलान्यास समारोह की इजाजत दी थी, जहाँ आज मंदिर बना है।

उन्होंने कहा कि रामानंद सागर की रामायण भी कॉन्ग्रेस काल में दूरदर्शन पर आई थी जिसके कारण भगवान राम के जीवन को लेकर लोग जान पाए। हम कॉन्ग्रेसी राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के निर्माण का स्वागत करते हैं। मोदी खुशकिस्मत हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने जब अंतिम निर्णय दिया तो वो पीएम थे।”

वहीं आम आदमी पार्टी के उमेश मकवाना ने भी भाजपा का समर्थन किया। हालाँकि इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राम मंदिर परिसर में एक अस्पताल और कॉलेज भी बनाया जाना चाहिए।

हिरोइन के जूता चाटने से व्यथित हुए जावेद अख्तर, गले पड़ी बेटे की ‘मिर्जापुर’ की गालियाँ: ‘एनिमल’ के डायरेक्टर ने आमिर खान की पूर्व बीवी को भी धोया

एनिमल और कबीर सिंह जैसी फिल्मों के निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने गीतकार जावेद अख्तर को लताड़ लगाई है। एनिमल की आलोचना को लेकर उन्होंने कहा है कि जावेद अख्तर अपने बेटे की बनाई फिल्मों को क्यों नहीं देखते हैं। उसमें तो भर-भर कर गालियाँ होती हैं।

संदीप रेड्डी वांगा ने एक इंटरव्यू के दौरान जावेद अख्तर को करारा जवाब दिया है। जावेद अख्तर ने हाल ही में उनकी फिल्मों को लेकर कुछ टिप्पणियाँ की थीं। विशेष तौर पर उस सीन को लेकर जिसमें हिरोइन को हीरो के जूते चाटते दिखाया गया है।

इसका जवाब देते हुए संदीप रेड्डी ने कहा, “यह तो साफ़ है कि जावेद अख्तर ने पूरी फिल्म नहीं देखी। अब जो बिना फिल्म देखे हुए बात करता है उसके बारे में क्या बात करना। वो कोई भी बेस्ट क्रिटिक (आलोचक) हो या फिर लेखक, वो मेरी फिल्म के बारे में बात कर रहे हैं ना, इससे आपको खराब लगता है।”

आगे उन्होंने कहा, “ऐसे में जो भी किसी की कलाकारी पर बात कर रहा है, वह पहले अपने आसपास की चीजों को क्योंकि नहीं चेक करते? अगर ये बातें महिला विरोधी चीजों को लेकर हैं, तो मैं नित्या मेनन जैसी अभिनेत्रियों की बात को सुनता भी, लेकिन जावेद जी ने यही बात अपने बेटे फरहान अख्तर को नहीं बताई जब वह मिर्जापुर बना रहे थे। पूरी दुनिया भर में जितनी गालियाँ हैं वो मिर्जापुर में है। वह भी 2 मिनट के सीन में। वे अपने बेटे का काम क्यों नहीं देखते।”

रेड्डी ने कहा कि वे चाहें तो जावेद अख्तर की 100 फिल्मों की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन वे उनके पैदा होने से पहले रिलीज हुईं तो क्या मतलब है। उन्होंने अपनी फिल्मों की आलोचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘कबीर सिंह’ के साथ भी ऐसा ही हुआ था। कबीर सिंह और एनिमल के बीच कई फिल्में आईं। लेकिन उन्हें जिस तरह से निशाना बनाया जा रहा है, क्या यह किसी साजिश का हिस्सा है?

एनिमल के डायरेक्टर ने कहा कि फिल्म देखने के लिए लोगों को सिनेमाघर तक जाना पड़ता है, लेकिन मिर्जापुर जैसी सीरिज तो घर में घुस गई। हिंदी इंडस्ट्री में जितनी गालियाँ हैं, वह मिर्जापुर में डाल दी गई हैं। आप यह बातचीत 10:20 मिनट के बाद सुन सकते हैं।

गौरतलब है कि जावेद अख्तर ने एनिमल के एक सीन को लेकर कहा था, “मुझे लगता है कि यह नए फिल्म निर्माताओं के लिए बड़ा ही कठिन समय है, क्योंकि ना जाने वो कैसे पात्र अपनी फिल्मों में दिखाना चाहते हैं जिनकी समाज प्रशंसा करेगा। उदहारण के लिए, अगर एक ऐसी फिल्म है जिसमें एक पुरुष एक महिला से उसका जूता चाटने को कहता है और एक महिला को थप्पड़ मारना सही है और फिल्म भी सुपरडुपर हिट है तो यह बड़ा खतरनाक है।”

संदीप रेड्डी ने हाल ही में आमिर खान की पूर्व पत्नी किरण राव को भी आइना दिखाया था। किरण राव ने बाहुबली और एनिमल फिल्म को लेकर टिप्पणियाँ की थी और उन्हें स्त्री विरोधी बताया था। इसका जवाब देते हुए वांगा ने राव से पूछा था कि क्या उन्हें आमिर खान की फ़िल्में और गाने नहीं देखे हैं।

उन्होंने आमिर के गाने ‘खम्भे जैसी खड़ी है, लड़की है या फुलझड़ी है’ को लेकर प्रश्न पूछे और कहा कि उनको इसमें स्त्री विरोध क्यों नहीं दिखा। उन्होंने आमिर खान की फिल्म ‘दिल’ के एक सीन को लेकर भी प्रश्न उठाए जिसमें आमिर खान हिरोइन का बलात्कार करने की कोशिश करते हैं और बाद में दोनों के बीच प्रेम हो जाता है।

राहुल गाँधी ने पहले बिस्किट कुत्ते के मुँह में लगाया, फिर काॅन्ग्रेस कार्यकर्ता को खिलाया: असम के CM बोले इसी कारण छोड़ी थी पार्टी

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें वह अपनी रैली के दौरान एक कुत्ते को बिस्किट खिलाते दिख रहे हैं। वहीं, जब कुत्ता वो बिस्किट खाने से मना कर देता है तो वो उसी कुत्ते का मुँह लगा बिस्किट अपने कार्यकर्ता को थमा देते हैं, फिर उससे प्यार से बात करने लगते हैं।

राहुल गाँधी की यह वीडियो कैमरे में कैद होने के बाद अब सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े नेता इस पर अपनी टिप्पणी कर रहे हैं। भाजपा नेता अमित मालवीय ने इस वीडियो को शेयर कर कहा, “अभी कुछ दिन पहले कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी के बूथ एजेंटों की तुलना कुत्तों से की और यहाँ राहुल गाँधी अपनी यात्रा में एक कुत्ते को बिस्किट खिला रहे हैं और जब कुत्ते ने नहीं खाया तो वही बिस्किट उन्होंने अपने कार्यकर्ता को दे दिया।”

भाजपा नेता ने कहा, “जिस पार्टी का अध्यक्ष और युवराज अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कुत्ते की तरह बर्ताव करे तो ऐसी पार्टी का लुप्त हो जाना स्वाभाविक है।”

इसी तरह पल्लवी सीटी ने लिखा, “कितना शर्मनाक है। पहले राहुल गाँधी ने हिमंता बिस्वा सरमा को अपने कुत्ते की प्लेट से बिस्किट खिलाने की कोशिश की। फिर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने पार्टी कार्यकर्ताओं की तुलना कुत्ते से की और अब शहजादे वही बिस्किट पार्टी कार्यकर्ता को दे रहे हैं। ये सम्मान करते हैं ये लोग अपने पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और मतदाताओं का?”

पल्लवी के इस ट्वीट पर हिमंत बिस्वा सरमा ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “सिर्फ राहुल गाँधी ही नहीं बल्कि उनका पूरा परिवार मुझे वो बिस्किट नहीं खिला पाया था। मैं एक गौरवान्वित असमिया और भारतीय हूँ। मैंने उसे खाने से मना कर दिया था और कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया था।”

हिमंता बिस्वा सरमा वाला मामला

बता दें कि इंटरव्यू में एक बार हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने साथ हुई घटना बताई थी। उन्होंने कहा था कि वो एक जरूरी बैठक के लिए राहुल गाँधी से मिलने गए थे लेकिन राहुल गाँधी वहाँ सिर्फ अपने कुत्ते पिद्दी के साथ खेलने में व्यस्त थे। वो जैसे ही किसी मुद्दे पर बात कहते तो राहुल जवाब देते- तो क्या हुआ।

हिमंता ने कहा था कि उन्हें ऐसा बर्ताव देख हैरानी भी थी। उसी दौरान चाय बिस्किट आया। तभी, उनका कुत्ता गया और उसी प्लेट से बिस्किट उठाकर खाने लगा। उन्हें लगा कि अब शायद राहुल गाँधी अपने प्लेट बदलेंगे। हालाँकि ऐसा हुआ नहीं। बाकी नेता उसी प्लेट से उठाकर खाने लगे और हिमंता बिस्वा सरमा ने उसी क्षण निर्णय लिया कि वो कॉन्ग्रेस को छोड़ देंगे।

खड़गे ने क्या कहा

इसी तरह मल्लिकार्जुन खड़गे ने हाल में बूथ एजेंटों की तुलना कुत्तों से कर दी थी। उन्होंने कहा था, “हमारे यहाँ एक कहावत है, जब आप बाजार में जाते हो और आपको कुत्ता या कोई जानवर लेना होता है तो आप उसके बारे में पूछताछ करते हो, अगर ईमानदार जानवर को भी लेना हो तो उसका कान पकड़कर ऊपर उठाते हैं, उसे ऊपर उठाने के बाद अगर वो भौंकता है तो ठीक है। अगर थोड़ी सी आवाज करता तो वह ठीक नहीं होता और उसे कोई लेता नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा था, “इसीलिए आप भी सेलेक्शन करते वक्त जो भौंकता है, जो लड़ता है और जो आपके साथ रहता है तो उसे ले लो। उसे ही बूथ लेवल कमेटी का अध्यक्ष बनाओ। बूथ में ऐसे व्यक्ति को बैठाओ जो सुबह 7 बजे जाए तो जब वहाँ पर पेटी बंद होती है, उसी वक्त उसे साइन करके बाहर आना चाहिए। नहीं तो जाना-आना ठीक नहीं है।”

UCC की तैयारी पूरी, अब विधानसभा में पेश होगा बिल: जानें उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता की खास बातें, किन पर नहीं लागू होगा कानून

उत्तराखंड सरकार मंगलवार (6 फरवरी, 2024) को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश करेगी। उत्तराखंड कैबिनेट ने रविवार (4 फरवरी, 2024) को मुख्यमंत्री आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में इस बिल को मंजूरी दी थी। उत्तराखंड विधानसभा का चार दिवसीय विशेष सत्र UCC को पास करने के लिए ही बुलाया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “यूसीसी एक लंबे समय से प्रतीक्षित बिल है। इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है। हम बिल को कल (6 फरवरी 2024) विधानसभा में पेश करेंगे और सभी प्रक्रियाएँ और बहसें होंगी। पूरा देश उत्तराखंड की ओर देख रहा है। मेरा अनुरोध है कि हर किसी को आशावादी रूप से बहस में भाग लेना चाहिए।”

उत्तराखंड विधानसभा का चार दिवसीय विशेष सत्र पहले ही 5-8 फरवरी तक बुलाया जा चुका है। इसके लागू होते ही उत्तराखंड आजादी के बाद यूसीसी अपनाने वाला पहला भारतीय राज्य बन जाएगा। यह पुर्तगाली शासन के दिनों से ही गोवा में चालू है। आइए बताते हैं, उत्तराखंड यूसीसी बिल की खास बातें...

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विभिन्न धर्मों के सिविल कानूनों में एकरूपता आ जाएगी। महिलाओं, खास करके मुस्लिम समाज की महिलाओं को हिंदू महिलाओं की तरह अधिकार मिल जाएँगे।

समान नागरिक संहिता लागू होने से बहुविवाह पर रोक लगेगी। महिलाओं को पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलेगा एवं बच्चों को गोद लेने का भी अधिकार मिल सकता है। सभी धर्मों में लड़की की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होगी।

वर्तमान में मुस्लिम समाज शरिया पर आधारित पर्सनल लॉ के तहत संचालित होता है। इसमें मुस्लिम पुरुषों को चार विवाह की इजाजत है। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद मुस्लिम लड़कियों को भी लड़कों के बराबर अधिकार दिया जाएगा।

यूसीसी लागू होने से मुस्लिम समुदाय में इद्दत और हलाला जैसी प्रथा पर प्रतिबंध लग सकता है। तलाक के मामले में शौहर और बीवी को बराबर अधिकार मिलेगा।

समान नागरिक संहिता में सभी धर्म के लोगों को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए पंजीकरण कराना जरूरी किया जाएगा। इसमें महिला और पुरुष की पूरी जानकारी होगी। ऐसे रिश्तों में रहने वाले लोगों को अपने माता-पिता को भी जानकारी देनी होगी।

समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विवाह का पंजीकरण कराना भी अनिवार्य किया जा सकता है। बिना रजिस्ट्रेशन विवाह अमान्य माने जाएँगे।

समान नागरिक संहिता में नौकरीपेशा बेटे की मृत्यु की स्थिति में पत्नी को मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही बेटे के बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पत्नी पर होगी।

अगर पति की मृत्यु के बाद पत्नी दोबारा शादी करती है तो उसे मिला हुआ मुआवजा माता-पिता को दिया जाएगा। पत्नी की मृत्यु होने की स्थिति में उसके माता-पिता की देखरेख की जिम्मेदारी पति पर होगी।

यूसीसी के तहत अनाथ बच्चों के लिए संरक्षण की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जा रहा है। पति-पत्नी के बीच विवाद की स्थिति में बच्चों की कस्टडी उसके दादा-दादी को दिए जाने का प्रावधान किया जा सकता है।

बच्चों की संख्या निर्धारित करने जैसी व्यवस्था भी UCC में की जा सकती है। समान नागरिक संहिता में इन प्रावधानों से जनजातीय समुदाय के लोगों को छूट मिल सकती है।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव 2022 में जीत मिलने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। इसका ड्राफ्ट बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने समिति का कार्यकाल तीन बार बढ़ाया था। इस दौरान समिति ने समान नागरिक संहिता पर लोगों से ऑनलाइन और ऑफलाइन सुझाव भी माँगे थे। इसके अलावा, कमिटी ने उपसमिति बनाकर हर समाज के विशिष्ट लोगों, समाजसेवियों, धार्मिक नेताओं और जागरूक नागरिकों के साथ चर्चा की और सुझाव लिए। कमिटी ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का भी दौरान किया था। यूसीसी पर कमिटी को ढाई लाख से अधिक सुझाव मिले थे। इसके बाद समिति ने केंद्रीय विधि आयोग के साथ भी समान नागरिक संहिता को लेकर चर्चा की थी

कोर्ट ने महाभारत कालीन लाक्षागृह हिंदुओं को सौंपा, कहा- ये मजार और कब्रिस्तान नहीं: 100 बीघा जमीन पर मुस्लिम कर रहे थे दावा, बता रहे थे बदरुद्दीन की दरगाह

महाभारत में जिस लाक्षागृह की चर्चा है, वो लाक्षागृह वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बागपत में स्थित है। ये वही लाक्षागृह है, जिसे दुर्योधन ने पाण्डवों को मारने के लिए एक साजिश के तहत बनवाया था। अब मुस्लिम पक्ष साल 1970 से ये दावा कर रहा है कि जिस टीले पर लाक्षागृह का होना बताया जाता है, वहाँ बदरुद्दीन की मजार है। कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर पूरी जमीन और मजार हिंदुओं को सौंप दी।

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि बदरुद्दीन के कथित मजार के आसपास मुस्लिमों का कब्रिस्तान भी है। उनका दावा है कि ये जमीन मुस्लिम वक्फ बोर्ड की है। ये मामला पिछले 53 साल तक कोर्ट में चला। अब इस मामले में फैसला आ गया है। कोर्ट ने माना कि यह लाक्षागृह ही है, मजार नहीं। कोर्ट ने 100 बीघे की पूरी जमीन और मजार को हिंदुओं को सौंपने का आदेश दिया है।

हिंदू पक्ष के वकील रणवीर सिंह ने बताया कि मुस्लिम पक्ष 100 बीघा भूमि को कब्रिस्तान और मजार बताकर उस पर कब्जा करना चाह रहा था। उसको लेकर उन्होंने कोर्ट के समाने सारे सबूत पेश किए थे। उन्होंने कोर्ट बताया था कि लाक्षागृह का इतिहास महाभारत कालीन है। इस टीले पर संस्कृत विद्यालय और महाभारत कालीन सुराग भी मौजूद हैं।

यह मामला बागपत के एडीजे की कोर्ट में चल रहा था। बागपत के बरनावा में लाक्षागृह टीले की पहचान हुई है। साल 1953 में खुदाई के दौरान यहाँ पर लगभग 4500 साल पुराने पुरातात्विक महत्व के सामान भी मिले थे। अब इस जगह की पहचान दुर्योधन द्वारा बनाए गए लाक्षागृह से होती है। यह जगह अब भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण (ASI) के कब्जे में है।

हालाँकि, साल 1970 में उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड ने इस जगह पर अपना दावा ठोक दिया। वक्फ बोर्ड की तरफ से मुकीम खान ने लाक्षागृह टीले को बदरुद्दीन शाह की मजार और आसपास कब्रिस्तान बताया और इस पर मालिकाना हक जताते हुए एक मुकदमा दायर कर दिया। इस मामले में मुकीम खान ने ब्रह्मचारी कृष्णदत्त को प्रतिवादी बनाया था।

मुकीम खान ने कहा था कि ये जमीन वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में है, जिसमें शेख बदरुद्दीन की मजार और एक बड़ा कब्रिस्तान मौजूद है। वहीं, प्रतिवादी पक्ष की तरफ से यह कहा जा रहा था कि ये पांडवों का लाक्षागृह है। यहाँ महाभारत कालीन सुरंग है, पौराणिक दीवारे हैं और प्राचीन टीला मौजूद है। पुरातत्व विभाग यहाँ से महत्वपूर्ण पुरावशेष भी प्राप्त कर चुका है।

अब इस मामले में कोर्ट का फैसला आ गया है, लेकिन कोर्ट का फैसला देखने के लिए अब इस दुनिया में ना ही मुकीम खान हैं और न ही ब्रह्मचारी कृष्णदत्त। यह मुकदमा 53 साल से चलता रहा। साल 1970 में यह मुकदमा तत्कालीन मेरठ (बागपत तब जिला नहीं था, बागपत को 1997 में जिला बनाया गया) जिला एवं सत्र न्यायालय में सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम के यहाँ चल रही थी।

बताया जाता है कि यह टीला वही लाक्षागृह है, जहाँ पांडवों को जलाने का प्रयास किया गया था। कौरवों ने पांडवों को मरवाने के लिए यह लाक्षागृह बनवाया था और इसमें आग लगवा दी थी, लेकिन पांडव एक सुरंग से बाहर आ गए थे। ये सुरंग बरनावा में आज भी मौजूद है। यहाँ ASI दिल्ली द्वारा सन 2018 में ट्रेंच लगाकर टीले का उत्खनन किया जा चुका है, जिसमें राजपूत काल की पॉटरी और साक्ष्य भी मिले हैं।