Home Blog Page 1196

केरल में बिल्ली का कच्चा मांस खाते युवक को देख सहमे लोग, कई सालों से था लापता: असम निवासी युवक को मानसिक अस्पताल में कराया गया भर्ती

केरल के मलप्पुरम से चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के कुट्टीपुरम बस स्टैंड पर एक युवक बिल्ली का कच्चा मांस खाते हुए मिला। असम के धुबरी जिले के रहने वाले इस व्यक्ति को तालुक अस्पताल में शुरुआती जाँच के बाद कोझिकोड के सरकारी मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहाँ उसके मानसिक समस्याओं का संकेत मिला है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कुट्टीपुरम बस स्टैंड पर खड़े लोगों ने जब युवक को बिल्ली का कच्चा मांस खाते हुए देखा तो वे डर गए। इसके बाद लोगों ने इसकी सूचना तुरंत मलप्पुरम पुलिस को दी। मौके पर पहुँचकर पुलिस ने युवक को ऐसा करने से रोका तो उसने बताया कि वो पिछले 4-5 दिनों से भूखा है। उसने कुछ खाया नहीं है।

इसके बाद पुलिस वालों ने युवक को खाना खिलाया। युवक की पहचान देबोजीत रॉय के रूप में हुई है। कुट्टीपुरम के पुलिस निरीक्षक पीके पद्मराजन ने बताया कि युवक शनिवार (03 फरवरी 2024) की शाम को घटनास्थल से लापता हो गया था, लेकिन रविवार (04 फरवरी 2024) की सुबह वो कुट्टीपुरम रेलवे स्टेशन के पास पाया गया।

पूछताछ के दौरान पता चला कि देबोजीत रॉय तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से केरल के कोझिकोड आया था। चेन्नई में उसका भाई रहता है। उसके भाई ने पुलिस को बताया कि देबोजीत रॉय चेन्नई से लापता हो गया था। एक वरिष्ठ पुलिसकर्मी ने कहा कि वह व्यक्ति कुछ साल पहले अपना गृह राज्य छोड़कर केरल पहुँच गया था।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि युवक काफी समय से लापता था। उसके भाई ने बताया कि देबोजीत रॉय उसका ही भाई है, जो कुछ साल से लापता था। उसके भाई ने उसे मानसिक रूप से बीमार भी बताया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद उसके भाई को पुलिस ने मलप्पुरम बुलाया है और युवक को आगे की जाँच के लिए कोझिकोड मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया है।

370 खत्म हुआ, भगवान राम घर लौटे… PM मोदी ने संसद में गिनाई 10 साल की उपलब्धियाँ: 2024 का नतीजा (BJP 370+, NDA 400+) भी बताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (5 फरवरी, 2024) को संसद के बजट सेशन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कइयों ने चुनाव लड़ने का हौसला भी छोड़ दिया है और कई लोकसभा की जगह राज्यसभा में जाना चाहता हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने 4 मजबूत स्तंभों की तरफ हमारा ध्यान आकृष्ट किया है जो जितने ज़्यादा मजबूत, संरक्षित और समृद्ध होंगे – हमारा देश भी उतनी ही तेज़ी से आगे बढ़ेगा।

देश की नारी शक्ति, युवा शक्ति, गरीब भाई-बहनों और किसानों/मछुआरों/पशुपालकों को उन्होंने ये 4 स्तंभ करार दिया। उन्होंने विपक्ष से कहा कि कब तक टुकड़ों में बाँटते रहोगे, देश को बहुत तोड़ा गया। पीएम मोदी ने कहा कि सकारात्मक सुझावों की जगह इस बार संसद में विपक्षी दलों ने से देश को निराश किया, नेता तो बदल गए हैं लेकिन टेप रिकॉर्डर वही बज रही है। उन्होंने कहा कि आज विपक्ष की जो हालत है, इसकी सबसे बड़ी दोषी कॉन्ग्रेस पार्टी है।

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को एक अच्छा विपक्ष बनने का अवसर 10 वर्षों तक मिला, लेकिन वो विफल रहे। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर विपक्ष के जो होनहार लोग हैं उन्हें भी न उभरने देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि युवा सांसदों को मौका नहीं दिया जाता है, ताकि किसी की छवि बिगड़ न जाए। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने खुद के अलावा विपक्ष, संसद और देश का नुकसान किया है। उन्होंने कहा कि स्थिति ये है कि मल्लिकार्जुन खड़गे इस सदन से उस सदन शिफ्ट हो गए और गुलाम नबी आज़ाद पार्टी से ही शिफ्ट हो गए – ये सब परिवारवाद की भेंट चढ़ गए।

उन्होंने कहा कि एक ही प्रोडक्ट बार-बार लॉन्च करने के चक्कर में कॉन्ग्रेस की दुकान पर ताला लग गया। उन्होंने कहा कि अगर किसी पार्टी को परिवार ही चलाता है तो वो परिवारवाद है, किसी परिवार के 10 लोग अपने बूते राजनीति में सफल हों तो कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस में एक ‘कैंसल कल्चर’ विकसित हो गया है, इसमें वो फँस गई है। उन्होंने कहा कि हम ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’, वन्दे भारत’ और ‘संसद की नई इमारत’, कॉन्ग्रेस सब पर कहती है – ‘कैंसल’।

उन्होंने पूछा कि इतनी नफरत कब तक पाले रखोगे? उन्होंने कॉन्ग्रेस पर देश की सफलताओं को भी कैंसल करने का आरोप मढ़ा। उन्होंने कहा कि उनके तीसरे कार्यकाल में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनेगा। उन्होंने कहा कि ये मोदी की गारंटी है। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ कुतर्क दिया जाता है कि इसमें क्या है, ये तो अपने-आप हो जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि 10 साल पहले 2014 के फरवरी में आए अंतरिम बजट को पेश करते समय उस समय के वित्त मंत्री ने कहा था – “GDP के मामले में भारत दुनिया में 11वें नंबर पर है।”

उन्होंने कहा कि तब गौरव-गान हुआ था, अब भारत नंबर-5 पर पहुँच गया है तो कुतर्क दिए जाते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि तत्कालीन वित्त मंत्री ने ये भी कहा था कि अगले 3 दशकों में भारत की GDP अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर पहुँच जाएगी। पीएम मोदी ने कहा कि ‘ब्रह्माण्ड के सबसे बड़े अर्थशास्त्री’ उस समय ऐसा कह रहे थे। उन्होंने कहा कि 2044 तक जो लक्ष्य रखा गया था, वो अगले 5 साल के भीतर होगा। उन्होंने कहा कि संकल्प तो दूर की बात थी, ये लोग सपना तक देखने का सामर्थ्य खो चुके थे।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान ‘9 दिन चले, ढाई कोस’ कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि ये कॉन्ग्रेस की सुस्त रफ़्तार को परिभाषित करती है जिसका कोई मुकाबला नहीं है। पीएम मोदी ने जिक्र किया कि कैसे उनकी सरकार ने गरीबों के लिए 4 करोड़ घर बनाए, शहरी गरीबों के लिए 80 लाख पक्के मकान बने। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की रफ्तार से ये घर बने होते तो इतना काम करने में 100 साल लगते, 5 पीढ़ियाँ गुजर जातीं। उन्होंने बताया कि 10 वर्ष में 40,000 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का इलेक्ट्रिफिकेशन हुआ, कॉन्ग्रेस की रफ़्तार से इसमें 80 साल लग जाते।

उन्होंने बताया कि 10 वर्षों में 17 करोड़ गैस कनेक्शन दिए, कॉन्ग्रेस की रफ़्तार से जिसमें 60 साल और लग जाते। उन्होंने आँकड़े गिनाए कि सैनिटेशन कवरेज उनकी सरकार में 40 से 100 प्रतिशत तक पहुँची, अगर कॉन्ग्रेस की रफ़्तार होती तो इसमें 60-70 साल और लगते लेकिन गारंटी नहीं होता। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने देश के सामर्थ्य पर कभी विश्वास नहीं किया, जनता को हमेशा कमतर आँका। उन्होंने इस दौरान जवाहरलाल नेहरू के एक भाषण का भी जिक्र किया, जब उन्होंने लाल किले से कहा था कि भारतवासी जापान-यूरोप-अमेरिका वालों की तरह काम नहीं करते।

पीएम मोदी ने कहा कि नेहरू ने भारत के लोगों को नीचा दिखाते हुए कहा कि विदेशी लोग अक्ल और मेहनत से सफल हुए हैं, यानी वो भारतीयों को आलसी और कम अक्ल के समझते हैं। उन्होंने इंदिरा गाँधी की सोच का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी लाल किले से 15 अगस्त को कहा था कि दुर्भाग्यवश हमारी आदत ये है कि जब कोई शुभ कार्य पूरा होने को होता है तो हम आत्मतुष्टि की भावना से ग्रसित हो जाते हैं और असफलता से नाउम्मीद हो जाते हैं, लगता है पूरे राष्ट्र ने ही पराजय भावना को अपना लिया है।

उन्होंने कहा कि इंदिरा गाँधी भले देश के लोगों का सही आकलन न कर पाई, कॉन्ग्रेस का उन्होंने सटीक आकलन किया था। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के शाही परिवार के लोगों की देशवासियों को लेकर वही सोच है। पीएम मोदी ने इस दौरान I.N.D.I. गठबंधन को ‘भानुमति का कुनबा’ बताते हुए कहा कि जब इन्हें एक-दूसरे पर ही विश्वास नहीं है तो ये देश पर विश्वास कैसे करेंगे? उन्होंने कहा कि हमें देश के लोगों की शक्ति पर भरोसा है।

स्वच्छ भारत, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुगम्य भारत और डिजिटल इंडिया जैसे जनहित के कामों का जिक्र किया, जिन्हें उनके पहले कार्यकाल में शुरू कर के अभियान का रूप दिया गया। उन्होंने GST का भी जिक्र किया, जिससे टैक्स व्यवस्था आसान बनी। उन्होंने बताया कि इसी कारण जन-आशीर्वाद से दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ, जो संकल्पों की पूर्ति का कार्यकाल बना। लंबे समय से जिन चीजों का देश को इंतज़ार था, वो पूरे हुए।

पीएम मोदी ने कहा कि हम सबने अनुच्छेद-370 को खत्म होते हुए देखा। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र किया, जिससे संसद में महिलाओं को आरक्षण मिला। उन्होंने कहा कि दशकों से अटकी-भटकी-लटकी परियोजनाएँ समयबद्ध तरीके से पूरी हुई। अंग्रेजी शासन के पुराने दंड-प्रधान कानूनों की जगह सरकार न्याय संहिता लेकर आई। पीएम मोदी ने कहा कि भगवान राम न सिर्फ अपने घर लौटे, बल्कि एक ऐसे मंदिर का निर्माण हुआ जो भारत की महान सांस्कृतिक परंपरा को नई ऊर्जा देता रहेगा।

पीएम मोदी ने कहा कि अब हमारी सरकार का तीसरा कार्यकाल भी बहुत दूर नहीं है, ज्यादा से ज्यादा सौ-सवा सौ दिन बाकी हैं। उन्होंने कहा कि पूरा देश कह रहा है ‘अबकी बार, 400 पार, खड़गे भी कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि NDA 400 पार जाएगी, लेकिन भाजपा 370 से अधिक सीटें जीतेगी। उन्होंने कहा कि हमारा तीसरा कार्यकाल बहुत बड़े फैसलों का होगा। उन्होंने कहा कि देश को अगले 1000 वर्षों में समृद्धि और सिद्धि के शिखर पर रहेगा, जिसकी नींव रखी जाएगी।

पीएम मोदी ने कहा कि गरीब को अगर साधन व संसाधन मिले, तो वो गरीबी को परास्त कर देगा और उनकी सरकार ने वो रास्ता चुना तो गरीबों ने गरीबी को हरा कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि 50 करोड़ गरीबों के पास आज बैंक खाता है, 4 करोड़ गरीबों के पास पक्का घर है जो उसके स्वाभिमान को सामर्थ्य देता है, 11 करोड़ गरीबों को नल से पीने का शुद्ध जल मिलता है, 55 करोड़ गरीबों को आयुष्मान कार्ड मिला है जिससे उसे भरोसा है कि घर में कितनी भी बीमारी आ जाए मोदी बैठा है।

उन्होंने जिक्र किया कि 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त अनाज मिलता है। उन्होंने मिलेटस की खेती करने वाले 3 करोड़ किसानों का जिक्र करते हुए कहा कि इसी कारण वो गर्व से G20 के मेहमानों के सामने मोटे अनाज परोसते हैं। उन्होंने कहा कि खादी को कॉन्ग्रेस ने भुला दिया, लेकिन आज इसे ताकत दी जा रही है क्योंकि बुनकरों की ज़िंदगी इससे जुड़ी है। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर OBC समाज के साथ अन्याय का आरोप लगते हुए कहा कि इनलोगों ने ओबीसी नेताओं का अपमान किया।

उन्होंने बिहार के पूर्व CM कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ दिए जाने का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कर्पूरी ठाकुर जब मुख्यमंत्री बने तो उन्हें पद से हटाने के लिए क्या कुछ नहीं किया गया था, कॉन्ग्रेस को अति-पिछड़ा व्यक्ति बर्दाश्त नहीं हुआ था। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि कॉन्ग्रेस ने कर्पूरी ठाकुर को नेता प्रतिपक्ष तक के रूप में स्वीकार करने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के लोग सरकार में ओबीसी को लेकर सवाल उठाते हैं, फिर खुद के बारे में कहा कि इनलोगों को OBC नज़र नहीं आता है।

उन्होंने पूछा कि UPA के काल में सोनिया गाँधी की अध्यक्षता में बनी ‘राष्ट्रीय सलाहकार समिति’ में कोई ओबीसी था क्या? उन्होंने कहा कि आने वाले उनके कार्यकाल में 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ होंगी जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि आज बेटी पैदा होती है तो पूछा जाता है कि ‘सुकन्या समृद्धि’ अकाउंट खुला या नहीं। पहले गर्भवती होने पर न कर पाने की बात होती थी, अब 36 हफ्ते की पेड लीव और उसके बाद भी छुट्टियाँ मिलती हैं। उन्होंने कहा कि पहले महिलाओं से पूछे जाते थे कि नौकरी क्यों करनी है, पति का वेतन कम पड़ रहा है, अब महिलाओं से पूछते हैं – आपका स्टार्टअप अच्छा चल रहा है, नौकरी मिलेगी?

उन्होंने कहा कि पहले कहा जाता था कि घर के मुखिया को बुलाइए, लेकिन आज घर से लेकर बिजली का बिल और पानी-गैस सब महिलाओं के नाम पर आता है, परिवार की मुखिया महिलाएँ हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर किसानों से विश्वासघात का आरोप लगाया और कहा कि कॉन्ग्रेस के समय कृषि के लिए 25,000 करोड़ रुपए का बजट होता था, हमारी सरकार ने सवा लाख करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया। उन्होंने बताया कि हमने 18 लाख करोड़ रुपए का धान-गेहूँ किसानों से खरीदा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने सवा लाख करोड़ रुपए से भी अधिक रकम का दलहन-तिलहन की खरीद की है। उन्होंने बताया कि पहली बार मछुआरों को ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ मिला। पीएम मोदी ने बताया कि पशुओं को रोगों से बचाने के लिए 50 करोड़ टीके लगाए गए। प्रधानमंत्री ने बताया कि डिजिटल सेक्टर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बना रहा है। उन्होंने सस्ता मोबाइल फोन और सस्ता डेटा की बात करते हुए कहा कि ये दुनिया में सबसे कम कीमत है जिससे रिकॉर्ड मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट देश देख रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि देश में 1000 नए एयरक्राफ्ट्स ऑर्डर किए गए हैं, जिससे पायलट्स, क्रू मेंबर्स और इंजीनियर्स की ज़रूरत होगी, यानि एविएशन सेक्टर भारत के लिए एक बहुत बड़ा नया अवसर बन कर आया है। बीते 10 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के अंदर बजट 44 लाख करोड़ रुपए हो गया।

अमेरिका से टूरिस्ट बनकर आए, असम में धर्मांतरण से जुड़े कार्यक्रम में कर रहे थे शिरकत: गिरफ्तार, जुर्माना लगाकर वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू

असम पुलिस ने वीजा नियमों का उल्लंघन करने के मामले में दो अमेरिकी नागरिकों को सोनितपुर से गिरफ्तार किया है। ये टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन असम में एक ईसाई धर्मांतरण सभा में शामिल हो रहे थे। इनकी पहचान 64 साल के जॉन मैथ्यू बून और 77 साल के माइकल जेम्स फ्लंचम के रूप में हुई है।

सोनितपुर की ASP मधुरिमा दास ने बताया है कि इसके बारे में फॉरेनर रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) कोलकाता को सूचित कर दिया गया है। माना जा रहा है कि अमेरिकी नागरिकों को भारत छोड़ने का नोटिस दिया जाएगा। इन दोनों नागरिकों पर गिरफ्तारी के बाद 500 डॉलर (लगभग ₹41.5 हजार) का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

इन दोनों अमेरिका नागरिकों ने 31 जनवरी 2024 को असम में एक बाप्टिस्ट चर्च के उद्घाटन के मौके पर इसमें हिस्सा लिया था। असम ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, ये दोनों अमेरिकी नागरिक- जॉन मैथ्यू और माइकल जेम्स असम में कुछ दिन पहले ही घुसे थे। इससे पहले ये दोनों भारत के अन्य हिस्सों में घूम रहे थे।

ASP ने इस मामले में कहा, “एक बाप्टिस्ट चर्च असोसिएशन ने तेजपुर में एक चर्च का उद्घाटन समारोह आयोजित किया था। इसमें असम के अलग-अलग हिस्सों से आए हुए लोग भी इकट्ठा हुए थे। यहाँ दोनों अमेरिकी नागरिक भी आए। चर्च की इमारत अभी पूरी बनी नहीं है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि वे यहाँ धर्मांतरण के लिए आए थे। ये लोग टूरिस्ट वीजा पर आए हैं, इसलिए धार्मिक कामों में भाग नहीं ले सकते।”

दरअसल, टूरिस्ट वीजा के नियमों के तहत कोई भी व्यक्ति, जो टूरिस्ट वीजा लेकर भारत में आता है तो वह धर्म के प्रचार प्रसार और धर्मांतरण में भाग नहीं ले सकता है। इससे पहले अक्टूबर 2022 में असम की सरकार ने सभी जिलों के एसपी को निर्देश दिया था, टूरिस्ट वीजा पर आकर धर्मांतरण गतिविधियों में शामिल होने वाले लोगों पर विशेष नजर रखी जाए।

इसके बाद असम पुलिस हरक़त में आई और 27 बांग्लादेशियों और स्वीडिश एवं जर्मन नागरिकों नागरिकों को हिरासत में लिया और फिर उन्हें उनके देश भेज दिया। असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने असम के मूलनिवासियों की संस्कृति को बचाने को लेकर बात की थी। उन्होंने कहा था, “दुर्भाग्यवश, भारत में मूलनिवासी समुदाय अक्सर धर्मांतरण का निशाना बनते हैं। इससे इनकी जनसंख्या में कमी आ सकती है।”

झारखंड में लगेगा बागेश्वर धाम का दरबार, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए दी अनुमति, कहा-कानून व्यवस्था का बहाना नहीं बना सकते

झारखंड में बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से हनुमान कथा का आयोजन किया जाएगा। हालाँकि, प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी है। इसके बाद झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसके बाद हाई कोर्ट ने हनुमान कथा के आयोजन के लिए हरी झंडी दे दी है। यह कार्यक्रम 10 से 15 फरवरी 2024 के बीच पलामू में आयोजित किया जाएगा।

दरअसल, हनुमंत कथा आयोजन समिति ने कार्यक्रम के लिए अनुमति माँगी थी। जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया था।। इसके बाद आयोजन समिति (समिति) ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए कार्यक्रम को रद्द नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि कार्यक्रम आयोजकों को सभी आवश्यक सुरक्षा और कानूनी व्यवस्था का पालन करना होगा। हाई कोर्ट कोर्ट ने कथा आयोजन समिति को अनुमति देते हुए कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रशासन प्रतिबंध लगा सकती है, लेकिन ऐसे प्रतिबंधों का आधार संविधान के अनुच्छेद 19(3) में उल्लेखित आधार के अनुरूप ही होना चाहिए।”

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस आनंद सेन ने कहा, “इस मामले में प्रशासन ने अपने जवाब में बिना किसी डेटा (लोग क्यों जुट रहे हैं और उनकी कितनी संख्या हो सकती है) के सिर्फ कानून और व्यवस्था की समस्या बताते हुए अनुमति नहीं दी। प्रशासन ने इस कथा के आयोजन के दौरान बैठने की व्यवस्था, पार्किंग की जगह की कमी और भीड़ को मैनेज करने के लिए स्वयंसेवकों की कमी के बारे में दलील दी।”

जस्टिस आनंद सेन ने आगे कहा, “अगर कोर्ट इन बातों को मान भी ले तो ये ‘कानून और व्यवस्था की समस्या (Law and Order)’ नहीं है। आपने जिन बातों को गिनवाया, वैसी समस्याएँ सार्वजनिक कार्यक्रमों में आ सकती हैं। इसे कार्यक्रम स्थल पर सुविधाओं की कमीं कह सकते हैं, लेकिन ये कानून व्यवस्था का मामला बिल्कुल भी नहीं है। ऐसे में इस कथा पर रोक लगाने का आधार बिल्कुल गलत है।”

कोर्ट ने जोर दिया कि अनुच्छेद 19(1)(बी) भारत में नागरिकों के बिना हथियारों के शांतिपूर्वक इकट्ठा होने का मौलिक अधिकार देता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वो कार्यक्रम के बारे में पूरी योजना बनाकर कोर्ट में पेश करें। इसमें हर दिन पहुँचने वाले लोगों की संख्या, उनके लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं की जानकारी हो ताकि कथा में शामिल होने वाले लोगों के बैठने, ठहरने, पार्किंग इत्यादि की व्यवस्था की जा सके।

क्या फिर माफी माँगेंगे केजरीवाल… दिल्ली HC ने मानहानि केस में राहत देने से किया मना, कहा- अपमानजनक कंटेंट को रीट्वीट करना भी मानहानि

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक आपराधिक मानहानि केस में राहत नहीं मिली। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दायर केस को खारिज करने से मना कर दिया। केजरीवाल ने यूट्यूबर ध्रुव राठी द्वारा बनाई गई ‘भाजपा आईटी सेल पार्ट 2’ शीर्षक की वीडियो रीट्वीट की थी। इसके बाद उनपर मानहानि का केस दर्ज हुआ। अब उन्हें इस मामले में निचली अदालत को तलब करना ही होगा।

जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने कहा, “अपमानजनक सामग्री को रीट्वीट करना मानहानि के समान ही है।” उन्होंने कहा, “जब राज्य का मुख्यमंत्री, बिना पुष्टि किए किसी बात को रीट्वीट करता है, तो इससे मानहानिकारक सामग्री को बढ़ावा मिलने की संभावना होती है।”

कोर्ट ने कहा कि अगर इस तरह किसी अपमानजनक सामग्री को रीट्वीट और रिपोस्ट की आजादी दी गई तो इससे लोगों को ऐसा कंटेंट शेयर करने की हिम्मत मिलेगी। रीट्वीट करते समय भी जिम्मेदारी का ख्याल रहना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल के लाखों फॉलोवर्स हैं और अगर वो इस तरह कोई मानहानि वाली सामग्री शेयर करेंगे तो इससे पब्लिक में गलत असर जाएगा।

बता दें कि केजरीवाल के खिलाफ विकास सांकृत्यन ने केस किया था। वह सोशल मीडिया पेज ‘आई सपोर्ट नरेंद्र मोदी’ के संस्थापक हैं। केजरीवाल ने आपत्तिजनक वीडियो को 7 मई 2018 को शेयर किया था। इसके बाद विकास ने शिकायत देते हुए यही कहा था कि केजरीवाल को करोड़ों लोग फॉलो करते हैं, कम से कम ऐसा कुछ शेयर करने से पहले प्रमाणिकता तो देख लेनी चाहिए। उन्होंने बिन उसे जाँचे वीडियो को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचा दिया। इसके बाद ट्रॉयल कोर्ट ने उन्हें इस मामले में 17 जुलाई 2019 को समन किया था।

आज दिल्ली हाईकोर्ट में सीएम केजरीवाल की माँग खारिज होने के बाद विकास पांडे ने कहा, “हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ दायर मानहानि केस को खारिज कर दिया है। उन्होंने मेरे खिलाफ ध्रुव राठी द्वारा बनाई वीडियो को शेयर किया था।”

अपने ट्वीट में उन्होंने अपने दो वकीलों- राघव अवस्थी और मुकेश शर्मा को धन्यवाद दिया और कहा कि इन दोनों ने देश के सबसे महंगे पत्रकारों से लड़ाई लड़के हराया। मालूम हो कि अरविंद केजरीवाल की ओर से इस केस को वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष वशिष्ठ के साछ करण शर्मा, ऋषभ शर्मा, वेदांत वशिष्ठ, मोहम्मद इरशाद और हर्षिता नाथरानी पेश हुए थे।

केजरीवाल माफी माँगकर छुड़ाते रहे हैं पल्ला

गौरतलब है कि इस मानहानि केस में भी केजरीवाल के पास अंतिम उपाय माफी माँगना दिखाई पड़ रहा है। इससे पहले भी केजरीवाल कई मानहानि के मामलों में माफी माँगकर अपना पल्ला छुड़ा चुके हैं। साल 2018 में उन्होंने, संजय सिंह, राघव चड्ढा और आशुतोष ने संयुक्त रूप से पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से लिखित में माफी माँगी थी।

इसके अलावा उन्होंने नितिन गडकरी से भी माफी माँगी थी और कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल से भी वो माफी माँग चुके हैं। साल 2017 में उन्होंने हरियाणा से बाजपा नेता अवतार सिंह भड़ाना से पटियाला कोर्ट में माफी माँगी थी। केजरीवाल ने उनको सबसे भ्रष्ट नेता कहा था तब भड़ाना ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करके 1 करोड़ क्षतिपूर्ति की माँग भी की थी। इतना ही नहीं उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के बिक्रम मजीठिया पर भी टिप्पणी करके वापस माफी माँगी थी।

भड़काऊ भाषण वाले मौलाना अज़हरी को पुलिस ने किया गिरफ्तार तो बसों पर दनादन चले पत्थर, 4000 की भीड़ ने सड़क पर रोक दी ट्रैफिक

मुंबई पुलिस ने पाँच कट्टरपंथियों को बसों पर पत्थरबाजी करने और सड़क पर अराजकता फैलाने के मामले में गिरफ्तार किया है। यह कट्टरपंथी मुफ़्ती सलमान अज़हरी की गिरफ्तार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। मुफ़्ती सलमान अज़हरी ने गुजरात के जूनागढ़ में भड़काऊ बयान दिया था। मुफ़्ती अजहरी को कल (4 फरवरी, 2024) को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसको गिरफ्तार करके मुंबई के घाटकोपर थाने ले जाया गया था। यहाँ उसके समर्थक बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए थे। यह समर्थक मुफ़्ती को छोड़ने की माँग को लेकर हो-हल्ला कर रहे थे।

मुफ़्ती की गिरफ्तारी के बाद यह समर्थक हिंसक हो गए और थाने के बाहर BEST बसों पर पत्थर बरसा दिए। एक रिपोर्ट में बताया गया कि मुफ़्ती को छुड़वाने के लिए तीन से चार हजार की भीड़ घाटकोपर थाने के बाहर इकट्ठा हुई थी। इस दौरान पुलिस ने मुफ़्ती से भीड़ को शांत करने को भी कहा। मुफ़्ती की अपील पर कुछ भीड़ छँट गई लेकिन बड़ी संख्या में लोग रोड पर गाड़ियों को रोकने लगे।

इसी दौरान पथराव भी हुआ। पुलिस ने इसके बाद स्थिति को नियन्त्रण में लाने के लिए लाठी चार्ज किया और पहचान करके पाँच पत्थरबाजों को गिरफ्तार किया। इनके खिलाफ सरकारी कामकाज में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है। मुफ़्ती को अब गुजरात ATS ने गिरफ्तार किया है। उसे पहले घाटकोपर थाने और फिर सायन अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसकी मेडिकल जाँच करवाई गई। इसके बाद रात में ही गुजरात ATS को कोर्ट से 2 दिन की ट्रांजिट रिमांड मिल गई। गुजरात ATS तुरंत मुफ़्ती सलमान अजहरी को लेकर जूनागढ़ चली गई।

पुलिस का कहना है कि अजहरी भड़काऊ बयान देता है जो कि युवाओं में काफी पॉपुलर है। उसके ऊपर पहले भी कई बार FIR दर्ज हो चुकी है, इनमें से एक FIR मुंबई में ही दर्ज है। उसका हाल ही में यह वीडियो वायरल हुआ था जिसके बाद उसे गिरफ्तार करने की माँग उठी। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मुफ़्ती के खिलाफ मुंबई में मामला दर्ज कर लिया गया है। मुंबई में उसके साथ ही दो और लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। मुंबई में मुफ़्ती के खिलाफ धारा 153(C), 505(2), 188 और 114 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले उसके खिलाफ जूनागढ़ में पहले ही मामला दर्ज हुआ था और साथ ही जिस कार्यक्रम में उसने यह भड़काऊ भाषण दिया था उसके आयोजकों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। अब उसे भी पुलिस गुजरात लेकर पहुँच रही है। यह पूरा मामला 31 जनवरी, 2024 को जूनागढ़ में एक इस्लामिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए भड़काऊ भाषण से जुड़ा है। इस भाषण का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद मुफ़्ती अजहरी की गिरफ्तारी की माँग हुई थी।

मुफ़्ती सलमान अज़हरी के वीडियो में क्या-क्या

ऑपइंडिया ने सबसे पहले इस मामले की रिपोर्ट की थी। 20-22 सेकंड के वायरल वीडियो को सर्च करने पर हमें मुफ्ती सलमान अज़हरी का वो भाषण मिला था, जो 53 मिनट का था। वायरल वीडियो इसी भाषण का एक छोटा सा हिस्सा थी। इस भाषण में मुफ्ती ने कई जगह भड़काऊ बातें कही थीं।

वीडियो को इस्लामिक चैनल ने पोस्ट किया था। इसमें वक्ता के तौर पर मुफ्ती सलमान अजहरी मंच पर दिख रहा था। यह कार्यक्रम गुजरात के जूनागढ़ में 31 जनवरी को हुआ था जबकि वीडियो 1 फरवरी 2024 को अपलोड किया गया था। मुफ्ती सलमान अज़हरी ने अपने भाषण में कहा था – “मस्जिद में बुत रखने से मस्जिद बुतखाना नहीं बन जाती। तुमने एक रखा है, काबा में 360 रखे थे, फिर भी काबा तो काबा ही रहा, न तवाफ रुका, न हज रुका।”

अपने भाषण में मुफ्ती ने कहा, “इंकलाब आपके घर से होगा। उनमें मस्जिदों को बुतखाना बनाने की हिम्मत नहीं है। आपने मस्जिदों को वीरान छोड़ दिया है और हमारे यहाँ मुहावरा है कि जब मैदान खुला होता है तो कुत्तों का राज होता है। यदि तुम मैदान में घूमते रहोगे तो कोई कुत्ते नहीं होंगे।”

भाषण के अंत में उसने कहा था, ”मुसलमानों घबराओ मत, अभी खुदा की शान बाकी है। अभी इस्लाम जिंदा है, अभी कुरान बाकी है, ऐ जालिम काफिर क्या समझता है जो रोज हमसे उलझता है, अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है। कुछ देर की खामोशी है, किनारा आएगा… आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

‘औरंगजेब ने कैसे मारा होगा कि इन्हें (हिंदुओं को) आज भी दर्द हो रहा’: गजवा-ए-हिंद का ख्वाब देखता मौलाना अजहरी का कई जहरीला Video वायरल

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के रहने वाले मौलाना सलमान अजहरी के जहरीले बोल वाले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वो अपने जहरीले भाषणों की वजह से खूब चर्चा में रहता है। इस बार उसने हिंदुओं की तुलना कुत्ते से की है। इसके बाद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। गुजरात पुलिस उसे गिरफ्तार करके अपने साथ ले गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुजरात के जूनागढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ भाषण देने वाले मौलाना सलमान अजहरी को गुजरात ATS ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उसे पहले मुंबई के घाटकोपर थाने में रखा गया। उसके बाद उसकी ट्रांजिट रिमांड लेकर गुजरात ले जाया गया। इस बीच, घाटकोपर थाने में उसके समर्थकों ने जमकर बवाल भी काटा था।

ये पहली बार नहीं है कि मौलाना सलमान अजहरी ने कोई भड़काऊ ने भाषण दिया हो। वह सीरियल ऑफेंडर (लगातार कानून तोड़ने वाला) है। उसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें वो जिहाद की धमकी दे रहा है। वह लोगों को हिंदुओं और देश के खिलाफ लोगों को भड़काते हुए नजर आता है।

एक वीडियो में अजहरी कहता है, “अल्लाह का बड़ा शुक्र है, हम गोबरखोर तो नहीं हैं। अल्लाह का बड़ा शुक्र है, हम गोबर को कोहिनूर कहने वाले तो नहीं है। अल्लाह ने दूध पीने वाली कौम में पैदा किया है। अल्लाह करीम का शुक्र है, हमने दुनिया में देखा है कि गोश्त खाने वाला शेर होता है और गोबर खाने वाला सुअर तो नहीं हैं।” इस दौरान म्यूजिक चलता है।

एक वीडियों में वो मुस्लिमों से इंतजार करने के लिए बोल रहा है और कह रहा है कि समय आने पर मस्जिदों को तोड़कर बनाए गए मंदिरों को मुस्लिम तोड़ेंगे और फिर से वहाँ नमाज पढ़ेंगे। वीडियो में वह बोलता है, “आज की जिम्मेदारी इतनी है, हालात देखकर बच्चों को ये न कहना कि बेटा अब जैसे हालात चल रहे वैसे ही चलते रहो।”

उसने आगे कहा, “नहीं। अपने बेटों को ये सिखाना, आज हम इम्तिहान की घड़ी में हैं, कल अगर अल्लाह ने हालात अच्छे कर दिए तो याद रखना, जिस जगह बुतकदे बने हैं हमारी मस्जिदों को तोड़कर, इंशाल्लाह वहाँ से अजान की आवाज फिर से गूँजेगी। अजान की आवाज आए, ये बच्चों को नसीहत होनी चाहिए।”

एक वीडियो में सलमान अजहरी बोलता है, “पता नहीं औरंगजेब का नाम लेते ही तो लोगों को तकलीफ होने लगती है आजकल। होती है न? मुझे समझ नहीं आता, औरंगजेब कैसे मारा था कि इत्ते साल तक दर्द कर रहा है। क्या किया था तुमने, अभी तक दर्द जा ही नहीं रहा है।”

एक वीडियो में मौलाना अजहरी गजवा-ए-हिंद के बारे में बता रहा है। वो बोलता है, “ये कयामत के करीब होने वाला है, कयामत के करीब होने वाला है। और उसको कहा क्या जा रहा है? गजवा-ए-हिंद। और गजवे की डेफिनेशन मैंने क्या बताया?” उसने आगे बताया कि इसे जंग-ए-हिंद की जगह गजवा-ए-हिंद क्यों कहा जाता है।

मौलाना सहमान अजहरी के भड़काऊँ भाषणों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। उसने जिस नए कार्यक्रम में भड़काऊँ भाषण दिया, उस कार्यक्रम के आयोजकों, मुहम्मद यूसुफ मालेक और अजीम हबीब ओडेदरा के साथ ही मुफ्ती सलमान अजहरी को एफआईआर में आरोपित बनाया गया है। तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153(सी), 505(2), 188 और 114 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

₹2500 करोड़ महाकुंभ के लिए, गौशाला के लिए ₹400 करोड़… योगी सरकार ने रामलला को समर्पित किया ₹7.36 लाख करोड़ का बजट, जानें क्या है खास

उत्तर प्रदेश के विकास के लिए योगी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने आज (5 फरवरी 2024) विधानसभा में प्रदेश का 7.36 लाख करोड़ रुपए से अधिक का सबसे बड़ा बजट पेश किया। इस बजट में इन्फ्रा से लेकर पर्यटन सुधारने पर फोकस किया गया। साथ ही 24 हजार करोड़ रुपए की नई योजनाएँ भी जोड़ी गई हैं। साथ ही युवाओं के भविष्य सुधारने और धार्मिक क्षेत्रों का विकास करने पर भी ध्यान दिया गया है।

बजट में:

  • 2057 करोड़ रुपए गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के लिए दिए गए हैं।
    2500 करोड़ रुपए 2025 के महाकुंभ मेला के लिए प्रस्तावित किए गए हैं।
    100 करोड़ रुपए अयोध्या के विकास के लिए दिए गए हैं।
  • इसी करह सीएम नगरीय मलिन बस्ती के लिए 675 करोड़ रुपए।
  • त्वरित आर्थिक विकास के लिए 2400 करोड़ रुपए।
  • ग्रामीण सेतुओं के निर्माण के लिए 1500 करोड़ रुपए।
  • 150 करोड़ रुपए महर्षि वाल्मिकी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए।
  • गौतमबुद्ध नगर के जेवर में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण कार्य के लिए 1150 करोड़ रुपए।
    वाराणसी में निफ्ट की स्थापना के लिए 150 करोड़ रुपए।
    लखनऊ-हरदोई में पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल एंड अपैरल पार्क के लिए 200 करोड़ रुपए।
  • कान्हा गौशाला और बेसहारा पशु योजना के लिए 400 करोड़ रुपए।
  • प्रदेश में धर्मार्थ मार्गों के विकास के लिए 1750 करोड़ रुपए।
  • कानपुर मेट्रो के लिए 395 करोड़ रुपए।
  • आगरा मेट्रो के लिए 346 करोड़ रुपए।
  • लखनऊ में दिल्ली की तर्ज पर एयरोसिटी विकसित करने के लिए 1500 करोड़ रुपए।
  • रियायती दर पर बिजली आपूर्ति के लिए 4 हजार करोड़।
  • सड़क निर्माण के लिए 2500 करोड़ रुपए।
  • बजट में कृषि संबंधि तीन नई योजना चलाने के लिए 460 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है।

इसके अलावा और भी कई घोषणाएँ इस बजट के दौरान की गईं। भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि उनके प्रदेश का शासन कहीं न कहीं रामराज्य से प्रेरित है। यूपी सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक एवं आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर है। उन्होंने यह भी बताया कि फ्यूचर एनर्जी सेक्टर में भी प्रदेश आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने हीरो फ्यूचर एनर्जीज के साथ 4 हजार करोड़ रुपए के निवेश का MOU हस्ताक्षरित किया गया है। इसके अन्तर्गत संस्था की ओर से प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा एवं क्लीन टेक्नोलॉजी परियोजना में निवेश किया

बता दें कि इस बजट को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीरामलला को अर्पित किया। उन्होंने कहा कि इस बजट की शुरुआत में, मध्य में और अंत में, सबमें प्रभु श्रीराम हैं। इसके विचार में, संकल्प में, एक- एक शब्द में श्रीराम हैं। रामराज की अवधारणा के तहत बजट में हर वर्ग के विकास पर जोर दिया गया है।

‘ये राम और कृष्ण में भेद करता है, विदेशी आक्रांताओं के जबरन कब्जे को ठहराता है जायज’: संसद में उठी ‘Places Of Worship Act’ को खत्म करने की माँग

भाजपा सांसद हरनाथ यादव ने राज्यसभा में ‘Places Of worship Act’ को खत्म करने की माँग की है। ये कानून 1991 में बनाया गया था। अयोध्या में राम जन्मभूमि मामले को इससे अलग रखा गया था, देश के बाकी सभी धार्मिक स्थलों के स्वरूप में भारत की स्वतंत्रता वाले दिन की यथास्थिति बनाए रखने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि ये कानून भगवान राम और कृष्ण के बीच भेद पैदा करता है, जबकि दोनों ही विष्णु के ही अवतार हैं। उन्होंने कहा कि ये कानून न सिर्फ हिन्दू, बल्कि सिख, जैन और बौद्धों के धार्मिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है।

हरनाथ सिंह यादव ने कहा कि ये कानून संविधान का उल्लंघन करता है। उन्होंने याद दिलाया कि इसके उल्लंघन में 1 से 3 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि ये कानून न्यायिक समीक्षा पर रोक लगाता है, जो नागरिकों के अधिकारों को कम करता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक जो लोग सरकार में रहे वो हमारी धार्मिक स्थलों की मान्यताओं को नहीं समझ सके, राजनीतिक फायदे के लिए अपनी ही संस्कृति पर शर्मिंदगी की प्रवृत्ति स्थापित कर दी।

उन्होंने कहा, “इस कानून का सीधा अर्थ है कि विदेशी आक्रांताओं द्वारा तलवार की नोक पर मथुरा और ज्ञानवापी समेत अन्य मंदिरों पर जो कब्ज़ा किया, उसे सरकारों द्वारा जायज ठहरा दिया गया। समाज के लिए 2 तरह के कानून नहीं हो सकते हैं। ये न सिर्फ असंवैधानिक, बल्कि अतार्किक भी है। मैं प्रार्थना करता हूँ कि देशहित में इस कानून को समाप्त किया जाए।” बता दें कि हिन्दू समाज लंबे समय से इस कानून को खत्म करने की माँग करता रहा है।

बता दें कि ‘Places Of worship Act’ के तहत भारत के हिन्दुओं को अपने मंदिरों की पूर्व की स्थिति बहाल करने के लिए न्यायालय का रुख करने से रोक दिया गया। इसके तहत किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप को परिवर्तित नहीं किया जा सकता। इससे ज्ञानवापी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि की लड़ाई को धक्का लगा। माना जाता है कि भारत में 30,000 मंदिरों को इस्लामी आक्रांताओं ने अपने सैकड़ों वर्षों के शासनकाल में ध्वस्त किया और उन पर मस्जिद बना दिए।

ज्ञानवापी के बाकी बचे तहखानों का भी हो ASI सर्वे, हटाया जाए मलबा: हिन्दू पक्ष ने डाली नई याचिका

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के मामले में स्थानीय कोर्ट के सामने हिन्दू पक्ष ने एक और याचिका लगाई है। इस याचिका में हिन्दू पक्ष ने माँग की है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को ज्ञानवापी ढाँचे के बाकी बचे हुए हिस्से के सर्वे का आदेश दिया जाए। इनमें वो तहखाने भी शामिल हैं, जिनका अभी तक सर्वे नहीं किया गया है।

जानकारी के अनुसार, हिन्दू पक्ष की तरफ से राखी सिंह नाम की याचिकाकर्ता ने वाराणसी के जिला न्यायालय के सामने यह याचिका लगाई है। उन्होंने यह याचिका अपने वकील सौरभ तिवारी के माध्यम से यह दायर की है। उन्होंने माँग की है कि ज्ञानवापी परिसर के भीतर स्थित बाकी बचे तहखानों का भी ASI द्वारा सर्वे करवाया जाए। ढाँचे के नीचे कुल 8 तहखाने हैं।

याचिका में राखी सिंह ने कहा है कि इनका सर्वे ASI पिछली बार नहीं की थी, क्योंकि इनके प्रवेश बंद किए हुए थे। इन तहखानों से मलबा हटाकर और इनकी रुकावटों को किनारे करके इनका सर्वे कराया जाए। बता दें कि पिछली बार सिर्फ दो ही तहखानों का ही सर्वे हुआ था, जिनमें कई हिंदू शिलालेख एवं मूर्तियाँ बरामद की गई थीं।

वाराणसी न्यायालय में लंबित शृंगार गौरी पूजन वाद 2022 में वादी नंबर 1 राखी सिंह ने कहा है कि यह सर्वे यह पता करने के लिए जरूरी है कि इस परिसर की धार्मिक स्थिति क्या है। याचिका में बताया गया है कि ज्ञानवापी में तहखाना संख्या N1 से लेकर N5 (उत्तरी तहखाने) और S1 से लेकर S3 (दक्षिणी तहखाने) का प्रवेश बिलकुल ही बंद है। इनके अंदर जाना संभव नहीं हो सका है।

राखी सिंह ने अपनी याचिका में आगे कहा है कि N2 तहखाने की पश्चिमी दीवाल से N1 को चार रास्ते हैं, लेकिन सभी बंद हैं। ऐसे में N1 की कोई जानकारी सामने नहीं आ सकी है। ऐसे में ASI को न्यायालय यह निर्देश दे कि वह बंद तहखानों का भी सर्वे करे। राखी सिंह उन पाँच महिलाओं में मुख्य याचिकाकर्ता हैं, जिन्होंने ज्ञानवापी में पूजा अर्चना और यहाँ सर्वे की माँग की थी।

दरअसल, न्यायालय में चली प्रक्रिया के बाद ASI ने ज्ञानवापी परिसर का सर्वे किया था। इसकी रिपोर्ट हाल ही में ASI ने सार्वजनिक की है। इसमें स्पष्ट रूप से बताया गया था कि जहाँ आज मस्जिद है वहाँ कभी एक विशाल हिन्दू मंदिर हुआ करता था।

गौरतलब है कि हाल ही में वाराणसी के जिला न्यायालय ने हिन्दू श्रद्धालुओं को ज्ञानवापी के भीतर व्यास जी के तहखाने में पूजा अर्चना की अनुमति दी थी। यहाँ पूजा अर्चना चालू भी करवा दी गई थी और साथ हिन्दू श्रद्धालुओं के लिए झरोखा दर्शन भी चालू कर दिया गया था।