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‘औरंगजेब ने कैसे मारा होगा कि इन्हें (हिंदुओं को) आज भी दर्द हो रहा’: गजवा-ए-हिंद का ख्वाब देखता मौलाना अजहरी का कई जहरीला Video वायरल

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के रहने वाले मौलाना सलमान अजहरी के जहरीले बोल वाले वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वो अपने जहरीले भाषणों की वजह से खूब चर्चा में रहता है। इस बार उसने हिंदुओं की तुलना कुत्ते से की है। इसके बाद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। गुजरात पुलिस उसे गिरफ्तार करके अपने साथ ले गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुजरात के जूनागढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ भाषण देने वाले मौलाना सलमान अजहरी को गुजरात ATS ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उसे पहले मुंबई के घाटकोपर थाने में रखा गया। उसके बाद उसकी ट्रांजिट रिमांड लेकर गुजरात ले जाया गया। इस बीच, घाटकोपर थाने में उसके समर्थकों ने जमकर बवाल भी काटा था।

ये पहली बार नहीं है कि मौलाना सलमान अजहरी ने कोई भड़काऊ ने भाषण दिया हो। वह सीरियल ऑफेंडर (लगातार कानून तोड़ने वाला) है। उसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें वो जिहाद की धमकी दे रहा है। वह लोगों को हिंदुओं और देश के खिलाफ लोगों को भड़काते हुए नजर आता है।

एक वीडियो में अजहरी कहता है, “अल्लाह का बड़ा शुक्र है, हम गोबरखोर तो नहीं हैं। अल्लाह का बड़ा शुक्र है, हम गोबर को कोहिनूर कहने वाले तो नहीं है। अल्लाह ने दूध पीने वाली कौम में पैदा किया है। अल्लाह करीम का शुक्र है, हमने दुनिया में देखा है कि गोश्त खाने वाला शेर होता है और गोबर खाने वाला सुअर तो नहीं हैं।” इस दौरान म्यूजिक चलता है।

एक वीडियों में वो मुस्लिमों से इंतजार करने के लिए बोल रहा है और कह रहा है कि समय आने पर मस्जिदों को तोड़कर बनाए गए मंदिरों को मुस्लिम तोड़ेंगे और फिर से वहाँ नमाज पढ़ेंगे। वीडियो में वह बोलता है, “आज की जिम्मेदारी इतनी है, हालात देखकर बच्चों को ये न कहना कि बेटा अब जैसे हालात चल रहे वैसे ही चलते रहो।”

उसने आगे कहा, “नहीं। अपने बेटों को ये सिखाना, आज हम इम्तिहान की घड़ी में हैं, कल अगर अल्लाह ने हालात अच्छे कर दिए तो याद रखना, जिस जगह बुतकदे बने हैं हमारी मस्जिदों को तोड़कर, इंशाल्लाह वहाँ से अजान की आवाज फिर से गूँजेगी। अजान की आवाज आए, ये बच्चों को नसीहत होनी चाहिए।”

एक वीडियो में सलमान अजहरी बोलता है, “पता नहीं औरंगजेब का नाम लेते ही तो लोगों को तकलीफ होने लगती है आजकल। होती है न? मुझे समझ नहीं आता, औरंगजेब कैसे मारा था कि इत्ते साल तक दर्द कर रहा है। क्या किया था तुमने, अभी तक दर्द जा ही नहीं रहा है।”

एक वीडियो में मौलाना अजहरी गजवा-ए-हिंद के बारे में बता रहा है। वो बोलता है, “ये कयामत के करीब होने वाला है, कयामत के करीब होने वाला है। और उसको कहा क्या जा रहा है? गजवा-ए-हिंद। और गजवे की डेफिनेशन मैंने क्या बताया?” उसने आगे बताया कि इसे जंग-ए-हिंद की जगह गजवा-ए-हिंद क्यों कहा जाता है।

मौलाना सहमान अजहरी के भड़काऊँ भाषणों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। उसने जिस नए कार्यक्रम में भड़काऊँ भाषण दिया, उस कार्यक्रम के आयोजकों, मुहम्मद यूसुफ मालेक और अजीम हबीब ओडेदरा के साथ ही मुफ्ती सलमान अजहरी को एफआईआर में आरोपित बनाया गया है। तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153(सी), 505(2), 188 और 114 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

₹2500 करोड़ महाकुंभ के लिए, गौशाला के लिए ₹400 करोड़… योगी सरकार ने रामलला को समर्पित किया ₹7.36 लाख करोड़ का बजट, जानें क्या है खास

उत्तर प्रदेश के विकास के लिए योगी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने आज (5 फरवरी 2024) विधानसभा में प्रदेश का 7.36 लाख करोड़ रुपए से अधिक का सबसे बड़ा बजट पेश किया। इस बजट में इन्फ्रा से लेकर पर्यटन सुधारने पर फोकस किया गया। साथ ही 24 हजार करोड़ रुपए की नई योजनाएँ भी जोड़ी गई हैं। साथ ही युवाओं के भविष्य सुधारने और धार्मिक क्षेत्रों का विकास करने पर भी ध्यान दिया गया है।

बजट में:

  • 2057 करोड़ रुपए गंगा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट के लिए दिए गए हैं।
    2500 करोड़ रुपए 2025 के महाकुंभ मेला के लिए प्रस्तावित किए गए हैं।
    100 करोड़ रुपए अयोध्या के विकास के लिए दिए गए हैं।
  • इसी करह सीएम नगरीय मलिन बस्ती के लिए 675 करोड़ रुपए।
  • त्वरित आर्थिक विकास के लिए 2400 करोड़ रुपए।
  • ग्रामीण सेतुओं के निर्माण के लिए 1500 करोड़ रुपए।
  • 150 करोड़ रुपए महर्षि वाल्मिकी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए।
  • गौतमबुद्ध नगर के जेवर में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण कार्य के लिए 1150 करोड़ रुपए।
    वाराणसी में निफ्ट की स्थापना के लिए 150 करोड़ रुपए।
    लखनऊ-हरदोई में पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल एंड अपैरल पार्क के लिए 200 करोड़ रुपए।
  • कान्हा गौशाला और बेसहारा पशु योजना के लिए 400 करोड़ रुपए।
  • प्रदेश में धर्मार्थ मार्गों के विकास के लिए 1750 करोड़ रुपए।
  • कानपुर मेट्रो के लिए 395 करोड़ रुपए।
  • आगरा मेट्रो के लिए 346 करोड़ रुपए।
  • लखनऊ में दिल्ली की तर्ज पर एयरोसिटी विकसित करने के लिए 1500 करोड़ रुपए।
  • रियायती दर पर बिजली आपूर्ति के लिए 4 हजार करोड़।
  • सड़क निर्माण के लिए 2500 करोड़ रुपए।
  • बजट में कृषि संबंधि तीन नई योजना चलाने के लिए 460 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है।

इसके अलावा और भी कई घोषणाएँ इस बजट के दौरान की गईं। भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि उनके प्रदेश का शासन कहीं न कहीं रामराज्य से प्रेरित है। यूपी सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक एवं आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर है। उन्होंने यह भी बताया कि फ्यूचर एनर्जी सेक्टर में भी प्रदेश आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने हीरो फ्यूचर एनर्जीज के साथ 4 हजार करोड़ रुपए के निवेश का MOU हस्ताक्षरित किया गया है। इसके अन्तर्गत संस्था की ओर से प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा एवं क्लीन टेक्नोलॉजी परियोजना में निवेश किया

बता दें कि इस बजट को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीरामलला को अर्पित किया। उन्होंने कहा कि इस बजट की शुरुआत में, मध्य में और अंत में, सबमें प्रभु श्रीराम हैं। इसके विचार में, संकल्प में, एक- एक शब्द में श्रीराम हैं। रामराज की अवधारणा के तहत बजट में हर वर्ग के विकास पर जोर दिया गया है।

‘ये राम और कृष्ण में भेद करता है, विदेशी आक्रांताओं के जबरन कब्जे को ठहराता है जायज’: संसद में उठी ‘Places Of Worship Act’ को खत्म करने की माँग

भाजपा सांसद हरनाथ यादव ने राज्यसभा में ‘Places Of worship Act’ को खत्म करने की माँग की है। ये कानून 1991 में बनाया गया था। अयोध्या में राम जन्मभूमि मामले को इससे अलग रखा गया था, देश के बाकी सभी धार्मिक स्थलों के स्वरूप में भारत की स्वतंत्रता वाले दिन की यथास्थिति बनाए रखने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि ये कानून भगवान राम और कृष्ण के बीच भेद पैदा करता है, जबकि दोनों ही विष्णु के ही अवतार हैं। उन्होंने कहा कि ये कानून न सिर्फ हिन्दू, बल्कि सिख, जैन और बौद्धों के धार्मिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है।

हरनाथ सिंह यादव ने कहा कि ये कानून संविधान का उल्लंघन करता है। उन्होंने याद दिलाया कि इसके उल्लंघन में 1 से 3 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि ये कानून न्यायिक समीक्षा पर रोक लगाता है, जो नागरिकों के अधिकारों को कम करता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक जो लोग सरकार में रहे वो हमारी धार्मिक स्थलों की मान्यताओं को नहीं समझ सके, राजनीतिक फायदे के लिए अपनी ही संस्कृति पर शर्मिंदगी की प्रवृत्ति स्थापित कर दी।

उन्होंने कहा, “इस कानून का सीधा अर्थ है कि विदेशी आक्रांताओं द्वारा तलवार की नोक पर मथुरा और ज्ञानवापी समेत अन्य मंदिरों पर जो कब्ज़ा किया, उसे सरकारों द्वारा जायज ठहरा दिया गया। समाज के लिए 2 तरह के कानून नहीं हो सकते हैं। ये न सिर्फ असंवैधानिक, बल्कि अतार्किक भी है। मैं प्रार्थना करता हूँ कि देशहित में इस कानून को समाप्त किया जाए।” बता दें कि हिन्दू समाज लंबे समय से इस कानून को खत्म करने की माँग करता रहा है।

बता दें कि ‘Places Of worship Act’ के तहत भारत के हिन्दुओं को अपने मंदिरों की पूर्व की स्थिति बहाल करने के लिए न्यायालय का रुख करने से रोक दिया गया। इसके तहत किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप को परिवर्तित नहीं किया जा सकता। इससे ज्ञानवापी और श्रीकृष्ण जन्मभूमि की लड़ाई को धक्का लगा। माना जाता है कि भारत में 30,000 मंदिरों को इस्लामी आक्रांताओं ने अपने सैकड़ों वर्षों के शासनकाल में ध्वस्त किया और उन पर मस्जिद बना दिए।

ज्ञानवापी के बाकी बचे तहखानों का भी हो ASI सर्वे, हटाया जाए मलबा: हिन्दू पक्ष ने डाली नई याचिका

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के मामले में स्थानीय कोर्ट के सामने हिन्दू पक्ष ने एक और याचिका लगाई है। इस याचिका में हिन्दू पक्ष ने माँग की है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को ज्ञानवापी ढाँचे के बाकी बचे हुए हिस्से के सर्वे का आदेश दिया जाए। इनमें वो तहखाने भी शामिल हैं, जिनका अभी तक सर्वे नहीं किया गया है।

जानकारी के अनुसार, हिन्दू पक्ष की तरफ से राखी सिंह नाम की याचिकाकर्ता ने वाराणसी के जिला न्यायालय के सामने यह याचिका लगाई है। उन्होंने यह याचिका अपने वकील सौरभ तिवारी के माध्यम से यह दायर की है। उन्होंने माँग की है कि ज्ञानवापी परिसर के भीतर स्थित बाकी बचे तहखानों का भी ASI द्वारा सर्वे करवाया जाए। ढाँचे के नीचे कुल 8 तहखाने हैं।

याचिका में राखी सिंह ने कहा है कि इनका सर्वे ASI पिछली बार नहीं की थी, क्योंकि इनके प्रवेश बंद किए हुए थे। इन तहखानों से मलबा हटाकर और इनकी रुकावटों को किनारे करके इनका सर्वे कराया जाए। बता दें कि पिछली बार सिर्फ दो ही तहखानों का ही सर्वे हुआ था, जिनमें कई हिंदू शिलालेख एवं मूर्तियाँ बरामद की गई थीं।

वाराणसी न्यायालय में लंबित शृंगार गौरी पूजन वाद 2022 में वादी नंबर 1 राखी सिंह ने कहा है कि यह सर्वे यह पता करने के लिए जरूरी है कि इस परिसर की धार्मिक स्थिति क्या है। याचिका में बताया गया है कि ज्ञानवापी में तहखाना संख्या N1 से लेकर N5 (उत्तरी तहखाने) और S1 से लेकर S3 (दक्षिणी तहखाने) का प्रवेश बिलकुल ही बंद है। इनके अंदर जाना संभव नहीं हो सका है।

राखी सिंह ने अपनी याचिका में आगे कहा है कि N2 तहखाने की पश्चिमी दीवाल से N1 को चार रास्ते हैं, लेकिन सभी बंद हैं। ऐसे में N1 की कोई जानकारी सामने नहीं आ सकी है। ऐसे में ASI को न्यायालय यह निर्देश दे कि वह बंद तहखानों का भी सर्वे करे। राखी सिंह उन पाँच महिलाओं में मुख्य याचिकाकर्ता हैं, जिन्होंने ज्ञानवापी में पूजा अर्चना और यहाँ सर्वे की माँग की थी।

दरअसल, न्यायालय में चली प्रक्रिया के बाद ASI ने ज्ञानवापी परिसर का सर्वे किया था। इसकी रिपोर्ट हाल ही में ASI ने सार्वजनिक की है। इसमें स्पष्ट रूप से बताया गया था कि जहाँ आज मस्जिद है वहाँ कभी एक विशाल हिन्दू मंदिर हुआ करता था।

गौरतलब है कि हाल ही में वाराणसी के जिला न्यायालय ने हिन्दू श्रद्धालुओं को ज्ञानवापी के भीतर व्यास जी के तहखाने में पूजा अर्चना की अनुमति दी थी। यहाँ पूजा अर्चना चालू भी करवा दी गई थी और साथ हिन्दू श्रद्धालुओं के लिए झरोखा दर्शन भी चालू कर दिया गया था।

ED की कस्टडी से विधानसभा आए हेमंत सोरेन, झारखंड में चंपई सरकार ने हासिल किया विश्वास मत: पक्ष में पड़े 47 वोट

झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव रखा है, इस पर बहस हुई। झारखंड विधानसभा में चंपई सोरेन की सरकार फ्लोर टेस्ट जीतने में कामयाब हो गई है। चंपई सरकार के समर्थन में 47 वोट मिले हैं, जबकि विपक्ष को कुल 29 वोट मिले हैं। चंपई सोरेन ने विपक्ष पर सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

इस दौरान उन्होंने कहा, “हेमंत सोरेन हैं तो हिम्मत है। हेमंत सोरेन ने राज्य का कुशल नेतृत्व किया।” बता दें कि चंपई सोरेन की सरकार ने आसानी से बहुमत हासिल कर लिया है। उसके पक्ष में 47 विधायक हैं। वहीं, विपक्ष में 29 वोट मिले हैं। बहुमत साबित करने के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए।

विधानसभा में मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि कोरोना के समय हेमंत सोरेन जैसे मुख्यमंत्री के रहते किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। लुंगी चप्पल पहनकर बाहर कमाने जाने वाले लोगों को उस समय झारखंड से बाहर से वापस लाया गया। लोगों को हवाई जहाज से भी वापस लाया गया। चंपई सोरेन ने कहा, “हमने यह देखा है कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बड़ा काम किया गया।”

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, “झारखंड में मूलनिवासियों को कुछ नहीं मिला। इसका फायदा मुंबई और गुजरात के लोगों को मिला। खनन हमारी जमीनों पर हुआ। मूलनिवासी को सिर्फ विस्थापन मिला। यहाँ के लोगों का सामाजिक-आर्थिक शोषण होता रहा। मैं आँसू नहीं बहाऊँगा। मैं आँसू वक्त के लिए रखूँगा, क्योंकि आपके लिए दलित आदिवासियों के आँसू का कोई मोल नहीं है।”

इस दौरान हेमंत सोरेन ने कहा, “जनजातीय-दलितों और गरीबों के आँसुओं का कोई मोल नहीं है। मैं वक्त आने पर उनके एक-एक सवालों का जवाब एक-एक षड्यंत्र का जवाब वक्त आने पर बड़े मन को तरीके से दिया जाएगा।” हेमंत सोरेन ने कहा, “साबित करें कि वो जमीन मेरे नाम पर है। अगर मुझ पर घोटाले साबित हुए तो राजनीति छोड़ दूँगा।”

बता दें कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 31 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद चंपई सोरेन को गठबंधन के विधायक दल का नेता चुना गया। चंपई सोरेन ने शुक्रवार (02 फरवरी 2024) को राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 10 दिनों का समय मिला था। इस बीच सत्ताधारी दल के अधिकाँश विधायक हैदराबाद चले गए थे।

‘चक्रवर्ती सम्राट हैं PM नरेंद्र मोदी, उनमें एक राजर्षि के सारे गुण’: संत सम्मेलन में बोले जितेंद्रानंद – वो पिछले 1000 वर्षों में एकमात्र हिन्दू शासक

दण्डी स्वामी जितेंद्रानंद महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘चक्रवर्ती सम्राट’ बताया है। गुजरात के अहमदाबाद में रविवार (4 फरवरी, 2024) को संतों का एक सम्मेलन आयोजित हुआ था, जिसमें जितेंद्रानंद भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले 1000 वर्षों में नरेंद्र मोदी एकमात्र हिन्दू शासक हैं। जितेंद्रानंद ‘अखिल भारतीय संत समिति’ के जनरल सेक्रेटरी भी हैं। उन्होंने कहा कि वो नरेंद्र मोदी और अमित शाह से प्रेम करते हैं, भारतीय जनता पार्टी से नहीं।

इस दौरान जितेंद्रानंद भाजपा पर निशाना साधने से भी पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा कि भाजपा में कई ऐसे नेता हैं जो नास्तिक हैं, उनका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि संत समाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गर्व करता है, वो एक चक्रवर्ती सम्राट हैं जिनमें राजर्षि होने से सारे गुण हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी लगातार भाजपा पर जाँच एजेंसियों के दुरूपयोग का आरोप लगा रही है। इस पर संत ने कहा कि ‘राम जन्मभूमि न्यास’ के खिलाफ आयकर विभाग (IT) की 22 नोटिस और छापेमारी हुई थी।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद चंपत राय ने न तो कभी बदले की भावना वाला आरोप लगाया और न ही इस पर हंगामा मचाया, कॉन्ग्रेस पार्टी अभी जो कर रही है उसके एकदम विपरीत। जितेंद्रानंद ने कहा कि जाँच एजेंसियों ने जो भी दस्तावेज माँगे चंपत राय ने सब कुछ दिया, क्योंकि कुछ गलत हुआ ही नहीं था। उन्होंने अयोध्या, काशी और मथुरा को मुक्त कराने की शपथ भी दोहराई। बता दें कि ज्ञानवापी में सोमनाथ व्यास के तहखाने में कोर्ट के आदेश के बाद फिर से पूजा शुरू हो गई है।

जितेंद्रानंद ने बताया कि सोमनाथ गुजराती संत थे। वहीं उत्तराखंड के जोशीमठ स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के खिलाफ बयान पर जितेंद्रानंद महाराज ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी का एजेंडा चलाने वालों को इस कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य इस कार्यक्रम में अपने सिंहासन के साथ स्थान चाहते थे, जबकि संत समिति की सोच है कि श्रीराम के दरबार में सभी बराबर हैं।

SDM का अपहरण कर भट्ठे में झोंकने की कोशिश, दंगों के दौरान हिंदुओं पर अत्याचार: कारसेवकों का कातिल था मुन्नन खाँ, जिसे TheWire ने बताया मसीहा

अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को भगवान राम का विग्रह उनके भव्य मंदिर में विराजमान हो चुका है। दुनिया भर के हिन्दू इस मौके पर उन तमाम रामभक्तों को याद कर रहे हैं, जिनके द्वारा 500 साल तक किए गए संघर्ष के चलते यह दिन आया है। इस मौके पर मुगलों से लेकर मुलायम सिंह यादव तक के काल तक को याद किया गया, जिनमें रामभक्तों पर नरसंहार सहित घनघोर अत्याचार हुए।

इन अत्याचारों की चर्चा में तत्कालीन सांसद एवं बाहुबली मुन्नन खाँ का नाम सबसे ज्यादा लिया जा रहा है। साल 2009 में मर चुके पूर्व सांसद मुन्नन खाँ पर पुलिस की वर्दी पहनकर अपने गुर्गों सहित सन 1990 में कारसेवकों के कत्लेआम का आरोप है। ऑपइंडिया ने गोंडा जाकर मुन्नन खाँ के आपराधिक कारनामों की जानकारी चश्मदीदों से ली।

रामजन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष का मंदिर भी कब्जाना चाहता था मुन्नन खाँ

22 सितंबर 2022 को ऑपइंडिया ने नेपाल सीमा की ग्राउंड कवरेज के दौरान एक खबर प्रकाशित की थी। इस खबर का शीर्षक ‘रामजन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष का मंदिर लैंड जिहाद का शिकार: बॉर्डर UP-नेपाल का… लेकिन जमीन कब्जा के लिए फिलिस्तीनी मॉडल’ था। तब ऑपइंडिया ने बताया था कि बलरामपुर वीर विनय चौराहे पर मौजूद हनुमान गढ़ी मंदिर श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महंत नृत्यगोपाल दास का है।

इस मंदिर के बड़े हिस्से पर कुछ मुस्लिमों ने कब्ज़ा कर रखा है, जिसको वर्तमान महंत महेंद्र दास अथक कोशिश करके थोड़ा-थोड़ा करके वर्षों से छुड़वा रहे हैं। बलरामपुर जिले के सरकारी वकील पवन शुक्ला ने ऑपइंडिया को बताया कि मंदिर पर किए गए अवैध कब्ज़े का सूत्रधार भी मुन्नन खाँ ही था। उसी के आदमियों ने मंदिर से सटाकर 3 दशक पहले अवैध तौर पर अजमेरी होटल खोला था।

तब मंदिर प्रशासन की आपत्ति के बावजूद अजमेरी होटल में मांस-मछली बेचा जाता था। धीरे-धीरे मुन्नन खाँ ने तत्कालीन सपा सरकार में राजनैतिक संरक्षण के जरिए मंदिर की काफी जमीन कब्जा ली। आज भी मंदिर प्रबंधन मुन्नन खाँ के समय में कब्जाई गई जमीनों को पूरी तरह से मुक्त नहीं करवा पाया है। इसके अलावा, बलरामपुर और गोंडा में कई अन्य लोगों की जमीनें हड़पने का आरोप मुन्नन खाँ पर है।

SDM का अपहरण कर के झोंकना चाहता था भट्ठे में

ऑपइंडिया से बात करते हुए सन 1990 में गोली लगने के बावजूद जीवित बच गए कारसेवक महंत रामस्वरूप दास ने मुन्नन खाँ को लेकर कई खुलासे किए। महंत रामस्वरूप दास ने बताया कि सन 1990 के आसपास मुन्नन खाँ बलरामपुर में एक SDM का अपहरण भी कर चुका था। यह अपहरण तब हुआ था, जब वो बलरामपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ रहा था।

अपराध की दुनिया से नजदीकी संबंध रखने वाला मुन्नन खाँ का मूल काम ईंट भट्ठे चलवाना था। उसके गुर्गे जब SDM का अपहरण करके लाए तो उन्हें भट्ठे में झोंकने की कोशिश की थी। हालाँकि, समय पर प्रशासन सक्रिय हो गया और SDM की जान बच पाई थी। महंत का यह भी दावा है कि मुन्नन खाँ की मुलायम सिंह यादव से करीबी के चलते कोई कार्रवाई नहीं हो पाई थी।

दंगों में रोक दी थी हिन्दुओं की रसद

सन 1985 के आसपास मुन्नन खाँ गोंडा के कटरा विधानसभा से विधायक था। गोंडा के विहिप नेता राकेश वर्मा ने ऑपइंडिया को बताया कि तब सन 1988 के आसपास गोंडा के करनैलगंज में हिन्दुओं की शोभायात्रा के दौरान कट्टरपंथी मुस्लिमों ने दंगे शुरू कर दिए थे। तब माँ दुर्गा की प्रतिमाओं पर पत्थरबाजी हुई थी, जिसमें मुन्नन खाँ की भी संलिप्तता बताई जा रही है।

इन दंगों में पुलिस ने हिन्दुओं का ही दमन किया था। तब लम्बे समय तक कर्फ्यू लगा रहा था और करनैलगंज के हिन्दुओं को सब्ज़ी सहित खाने के अन्य सामानों के लाले पड़ गए थे। ऐसे में करनैलगंज के आसपास के कस्बों में रहने वाले हिन्दुओं ने दंगा प्रभावित क्षेत्रों में खाने-पीने का सामान पहुँचाने का प्रयास किया था। राकेश का आरोप है कि मुन्नन खाँ ने प्रशासन पर दबाव डालकर खाने के सामान को रास्ते में ही रुकवा दिया था।

उस दौरान सारी राहत सामग्री तालाबों में फेंकवा दी गई थी। आरोप तो यह भी है कि मुन्नन खाँ ने इन दंगों में हिन्दुओं पर अपने गुर्गों से हमला करवाया था। बकौल राकेश वर्मा, कर्फ्यू के बावजूद मुस्लिमों की दुकानें खुली रहती थीं। वो आराम से सारी रात बाजारों में घूमते रहते थे। राकेश ने इस सभी एकतरफा प्रशासनिक पक्षपात के लिए तत्कालीन सरकार की तुष्टिकरण की नीति को जिम्मेदार बताया।

भाईचारे का रूप दिखाकर पीठ में घोंपा छुरा

गुड्डू नाम से पहचाने जाने वाले विश्व हिंदू परिषद के नेता राकेश वर्मा ने हमें आगे बताया कि मुन्नन खाँ मूल रूप से ईंट भट्ठों का कारोबार करता था। वो पहली बार साल 1985 में गोंडा के कटरा विधानसभा से जनता दल के टिकट पर विधायक बना था। कटरा हिन्दू बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र है। हिन्दुओं के आगे मुन्नन खाँ भाईचारे का मसीहा बनकर आया था।

मुन्नन खाँ ने हिंदुओं से तमाम टूटे-फूटे मंदिरों के जीर्णोद्धार का वादा किया था। चुनाव से पहले बाकायदा मंदिरों के आगे अपने भट्ठे से मँगवाकर ईंटें गिरवाई थीं। जब मुन्नन खाँ चुनाव जीत गया तब उसने अपना व्यवहार एकदम से बदल लिया और खुलेआम हिन्दू विरोधी हरकतें करने लगा। यहाँ तक कि उसने मंदिरों के आगे से वो सभी ईंटें वापस उठवा ली थीं, जो उसने चुनाव से पहले गिरवाई थीं।

खुद को कहलवाता था शेर-ए-मुन्नन

राकेश वर्मा ने बताया कि साल 1989 में गोंडा की खोरहसा पुलिस चौकी पर एक मुस्लिम व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलवाया गया था। घर लौटने के बाद उस व्यक्ति की किन्हीं कारणों से मौत हो गई थी। तब मुन्नन खाँ मृत मुस्लिम का शव लेकर बलरामपुर चला गया था। वहाँ उसने मृतक की लाश दिखाकर माहौल को साम्प्रदायिक बनाया और एकतरफा मुस्लिमों का वोट हासिल किया था।

विहिप नेता राकेश वर्मा ने हमें आगे बताया कि आखिरकार मुन्नन खाँ की उन चुनावों में जीत हुई। तब मुन्नन खाँ निर्दलीय सांसद चुना गया था। राकेश वर्मा ने बताया कि उन्हें अच्छे से याद है कि विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) की सरकार में मुन्नन खाँ अपनी गाडी पर लालबत्ती लगाकर चलता था। उसके साथ काफिले में चल रहे अन्य वाहन हूटर बजाया करते थे।

राकेश वर्मा का यह भी दावा है कि वीपी सिंह सरकार में मुन्नन खाँ को लोक शिकायत कमेटी का सदस्य बनाया था। मुन्नन खाँ का तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से सीधा संबंध था। इसी के डर से जिले का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मुन्नन के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था।

जंगली जानवर से कहीं अधिक था खतरनाक

राकेश वर्मा सन 1990 के दशक को याद करते हैं। तब मुन्नन खाँ के काफिले में सैकड़ों लोग हुआ करते थे, जो सड़कों पर जुलूस निकाला करते थे। इन जुलूस में ‘शेर ए मुन्नन जिंदाबाद’ के नारे लगा करते थे। मुन्नन के जुलूस को रोकने की हिम्मत कोई नहीं करता था। राकेश वर्मा मुन्नन खाँ को गोंडा का अतीक अहमद मानते हैं। बकौल राकेश, आज भी मुन्नन खाँ के फैन मौजूद हैं। इसी वजह से लोग उसके खिलाफ बोलने से डरते हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर पद पर तैनात और गोंडा जिले के मूल निवासी एक व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर मुन्नन खाँ के कई गुनाह गिनवाए। उन्होंने बताया, “अपने जमाने में मुन्नन खाँ किसी जंगली जानवर से अधिक खतरनाक था।” बलरामपुर जिले के सरकारी वकील पवन शुक्ला के मुताबिक, मुन्नन खाँ की ही सरपरस्ती में रिज़वान जहीर जैसे वर्तमान अपराधी पले-बढ़े थे।

बुढ़ापे में हुआ पागल या पालगपन का नाटक ?

ऑपइंडिया ने गोंडा जिले के स्थानीय निवासियों से मुन्नन खाँ के बारे में और अधिक जानकारी जुटाई। लोगों का कहना है कि जीवन के अंतिम समय में मुन्नन खाँ पागल हो गया था और सकड़ों पर आवारा घूमा करता था। कुछ लोग इसे उसके घोर आपराधिक जीवन के बाद मिला ईश्वरीय दंड बताते हैं। वहीं कुछ अन्य लोगों ने बताया कि मुन्नन खाँ अंतिम सांस तक एक शातिर अपराधी की तरह सोचता था।

पागलपन वाली हरकत भी गोंडा के तमाम लोग मुन्नन पर दर्ज तमाम मुकदमों से बचने का हथकंडा मानते हैं। मुन्नन के डर से आज भी कैमरे पर बोलने से डरते कई लोगों ने बताया कि मुन्नन खाँ जानता था कि उसे कई मुकदमों में कड़ी सजा और यहाँ तक कि फाँसी या उम्रकैद भी मिल सकती है। इसलिए उसने जीवन के अंतिम समय में पागल बनकर कानून को गुमराह करने की साजिश रची।

शूद्रों और महिलाओं को पुजारियों ने नहीं लेने दिया वेद का ज्ञान… छठी की बुक में NCERT का दावा निराधार, गलती मान किताब से हटाया

भारतीय छात्रों के लिए टेक्स्ट किताब बनाने वाले राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने क्लास छठी में ब्राह्मणों/पुजारियों के लिए पढ़ाए जा रहे भ्रामक दावों को अपनी किताबों से हटा दिया है।

एक साल पहले इस मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट विवेक पांडे ने आरटीआई फाइल की थी। उन्होंने लिखित में प्रमाण माँगे थे कि हिंदू पंडितों ने महिला और शूद्रों के साथ भेदभाव किया, इसका सबूत दिया जाए।

NCERT ने इस आरटीआई के जवाब में कहा था कि उनके पास इस दावे के कोई सबूत नहीं हैं कि ब्राह्मणों/पुजारियों ने महिलाओं और शूद्रों को वेद नहीं पढ़े दिया। इसके बाद उन्होंने ये भी सुनिश्चित किया कि वो अपनी किताबों से इस भ्रामक दावे को हटा लेंगे।

अब 2023-24 के संस्करण से ये दावा हटाया जा चुका है। ऑपइंडिया इस बात की पुष्टि करता है।

बता दें कि यह विवादित दावा छठी क्लास की इतिहास की किताब के पाँचवे चैप्टर- ‘राज्य, राजा और प्राचीन गणतंत्र’ (पृष्ठ नंबर-44-45) पर दिखाई देता था। इसमें कहा गया था कि पुजारियों ने वर्णव्यवस्था बनाई और कहा कि ये जन्म से तय होता है।

NCERT किताब में ये भी कहा गया कि महिलाओं को शूद्रों के समूह में रख उन्हें वेद पढ़ने से रोका गया। इतना ही नहीं था ये भी लिखा गया कि पुजारियों ने कुछ लोगों को अछूत घोषित कर दिया था।

पहले की किताब में मौजूद टेक्स्ट

हमारे पास ऐसी कई पुस्तकें हैं जिनकी रचना उत्तर भारत में, विशेषकर गंगा और यमुना द्वारा प्रवाहित क्षेत्रों में की गई थी। इन पुस्तकों को अक्सर उत्तर वैदिक कहा जाता है, क्योंकि इनकी रचना ऋग्वेद के बाद हुई थी जिसके बारे में आपने अध्याय 4 में पढ़ा था। इनमें सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद के साथ-साथ अन्य पुस्तकें भी शामिल हैं। इनकी रचना पुजारियों द्वारा की गई थी, और बताया गया था कि अनुष्ठान कैसे किए जाने चाहिए। उनमें समाज के बारे में नियम भी शामिल थे।

पुजारियों ने लोगों को चार समूहों में विभाजित किया, जिन्हें वर्ण कहा जाता था, उनके अनुसार, प्रत्येक वर्ण के कार्य अलग-अलग थे। प्रथम वर्ण ब्राह्मण का था। ब्राह्मणों से अपेक्षा की जाती थी कि वे वेदों का अध्ययन करें (और पढ़ाएँ), यज्ञ करें और उपहार प्राप्त करें। दूसरे स्थान पर शासक थे, जिन्हें क्षत्रिय भी कहा जाता था। उनसे लड़ाई लड़ने और लोगों की रक्षा करने की अपेक्षा की गई थी।

तीसरे थे वैश या वैश्य। उनसे अपेक्षा की गई थी कि वे किसान, चरवाहे और व्यापारी होंगे, क्षत्रिय और वैश्य दोनों ही बलिदान दे सकते थे। अंतिम शूद्र थे, जिन्हें अन्य तीन समूहों की सेवा करनी पड़ती थी और वे कोई अनुष्ठान नहीं कर सकते थे। अक्सर, महिलाओं को भी शूद्रों के साथ समूहीकृत किया जाता था। महिलाओं और शूद्रों दोनों को वेदों का अध्ययन करने की अनुमति नहीं थी, पुजारियों ने यह भी कहा कि ये समूह जन्म के आधार पर तय किए गए थे।

आरटीआई के बाद अब ये टेक्सट किताबों में से हटा दिया गया है। अब किताब में लिखा गया, “चार सामाजिक श्रेणियाँ थीं, अर्थात् ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। ब्राह्मणों से अपेक्षा की गई कि वे वेद पढ़ें और पढ़ाएँ, यज्ञ करें और दक्षिणा पाएँ। क्षत्रियों से अपेक्षा की जाती थी कि वे युद्ध लड़ें और लोगों की रक्षा करें। वैश्यों से अपेक्षा की जाती थी कि वे किसान, चरवाहे और व्यापारी होंगे। शूद्रों से अन्य तीन समूहों की सेवा करने की अपेक्षा की गई थी।

NCERT ने भ्रामक दावा हटाया

मालूम हो कि NCERT की किताब में किए गए दावों का कोई आधार नहीं था। विवेक पांडे की आरटीआई के जवाब में लिखा गया था, “चूँकि पांडुलिपि का मूल मसौदा विस्तृत संदर्भ प्रदान नहीं करता है, इसलिए दावों के मूल स्रोत को साझा करना मुश्किल होगा।”

इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि अगले सत्र से किताब से भ्रामक दावा हटा लिया जाएगा।

’12th Fail’ के निर्देशक की बीवी को कंगना रनौत ने बताया ‘गैंगबाज’, कहा – जिस पति के पैसे से बिजनेस करती हैं अनुपमा चोपड़ा, उसी से जलती हैं

अभिनेत्री कंगना रनौत ने फिल्म समीक्षक अनुपमा चोपड़ा पर निशाना साधा है। अनुपमा चोपड़ा, फिल्म निर्माता एवं निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा की पत्नी हैं। विधु विनोद चोपड़ा द्वारा निर्देशित फिल्म ’12th Fail’ ने हाल ही में खूब सुर्खियाँ बटोरी। वास्तविक घटनाओं पर आधारित कम बजट में बनी फिल्म ने 52 करोड़ रुपए का नेट कारोबार किया। अब विधु विनोद चोपड़ा ने बताया है कि उनकी पत्नी अनुपमा को भरोसा नहीं था कि ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा करेगी।

अब ये फिल्म IMDb पर सबसे अधिक रेटिंग वाली भारतीय फिल्म बन गई है। अनुपमा चोपड़ा ने अपनी पति को सलाह दी थी कि वो ’12th Fail’ को OTT पर रिलीज करें, थिएटर में रिलीज करने का रिस्क न लें। ये खुलासा खुद विधु विनोद चोपड़ा ने किया है। ‘खामोश’ (1985), ‘परिंदा’ (1989), ‘1942: अ लव स्टोरी’ (1994) और ‘मिशन कश्मीर’ (2000) जैसी फ़िल्में बना चुके विधु विनोद चोपड़ा के सफल फिल्म निर्माता भी हैं।

उन्होंने राजकुमार हिरानी द्वारा निर्देशित फ़िल्में ‘मुन्नाभाई MBBS’ (2003), ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ (2006), ‘3 इडियट्स’ (2009), ‘पीके’ (2014) और ‘संजू’ (2018) का निर्माण किया। विधु विनोद चोपड़ा के ताज़ा बयान पर अभिनेत्री कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अनुपमा चोपड़ा फिल्म पत्रकार के नाम पर कलंक हैं, वो न सिर्फ द्वेषी हैं बल्कि अपने से कम उम्र की युवा एवं प्रतिभावान महिलाओं से जलती भी हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि वो अपने पति से भी जलन रखती हैं।

उन्होंने कहा कि अनुपमा चोपड़ा अपने पति से ईर्ष्या करती हैं, जिनके पैसे से उन्होंने वेबसाइट से लेकर अन्य छोटे-बड़े व्यवसाय स्थापित किए। उन्होंने अनुपमा चोपड़ा पर फ़िल्मी पार्टियों में अपनी ‘बॉलीवुड वाइफ कार्ड’ का दिखावा करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुपमा चोपड़ा ने वास्तविक प्रतिभाओं और अच्छी फिल्मों के खिलाफ गिरोह बना रखा है। कंगना रनौत की इस टिप्पणी को साहसी बता कर लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं।

विधु विनोद चोपड़ा ने बताया था, “मेरी पत्नी अनुपमा ने मुझसे ’12th Fail’ के बारे में कहा था – इसे कोई थिएटर में देखने नहीं जाएगा विनोद। तेरी और विक्रांत की फिल्म! अनुपमा ने मुझसे कहा कि मुझे अब चीजें नहीं पता, मैं फिल्मों से अब उतना अधिक संपर्क में नहीं हूँ। ऊपर से ट्रेड एजेंसियों ने फिल्म के 30 लाख रुपए के लाइफटाइम कलेक्शन की भविष्यवाणी की थी। इन चीजों ने मुझे डरा दिया था।” फिल्म की सक्सेस पार्टी में बोलते हुए इसके बाद अनुपमा ने स्वीकारा कि उन्होंने ऐसा कहा था, साथ ही कहा कि वो गलत थीं और विधु विनोद चोपड़ा सही थे।

देश के बीमारू राज्यों में है केरल: सुप्रीम कोर्ट को केंद्र ने बताया, कहा- विकास कार्यों के लिए नहीं रोजमर्रा के खर्चों के लिए राज्य को चाहिए उधारी

आर्थिक आधार पर देश के सबसे खस्ताहाल राज्यों में केरल शामिल है। खराब आर्थिक प्रबंधन के कारण उसकी हालत बेहद पतली है। विकास कार्यों की जगह वह रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए उधारी चाहता है। केंद्र सरकार ने यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है। अपने उधार लेने की सीमा को लेकर केरल की वामपंथी सरकार ने केंद्र के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर रखी है।

केंद्र सरकार ने देश के सबसे बड़े कोर्ट को बताया है कि उसने केरल को वित्त आयोग द्वारा सुझाई गई धनराशि से अधिक फंड दिया है। केंद्र सरकार ने यह भी बताया है कि राज्य को दी गई आर्थिक मदद बिना किसी बकाए के दी गई है। केंद्र ने कहा है कि केरल के खर्चे बीते कुछ वर्षों में बेतहाशा बढ़े हैं। केंद्र सरकार द्वारा कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, केरल का अपनी राजस्व प्राप्तियों में से खर्चा 2018-19 के दौरान 78% था जो कि 2021-22 में बढ़ कर 82.4% हो गया। यह देश के अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि केरल का राजकोषीय घाटा भी बीते समय में तेजी से बढ़ा है। उसकी कमाई का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में ही जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, केरल अपनी कमाई का लगभग 20% ब्याज चुकाने में दे रहा है। केंद्र सरकार ने कहा है कि केरल कर्ज लेकर अपने रोज के खर्चे चला रहा है। यहाँ तक कि तनख्वाह और पेंशन देने के लिए भी कर्ज का सहारा लिया जा रहा है।

केरल की वामपंथी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के खिलाफ एक याचिका दायर की हुई है। इसमें केरल ने कहा है कि केंद्र सरकार ने उसकी उधार लेने की सीमा घटा दी है, जिससे उसे आर्थिक प्रबन्धन में समस्याएँ झेलनी पड़ रही हैं। वहीं केंद्र सरकार ने कहा है कि ऐसे ही चलता रहा तो केरल जल्द ही कर्ज के जाल में फँस जाएगा।

गौरतलब है कि केरल वर्तमान में गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वामपंथी और कॉन्ग्रेस सरकारों ने राज्य का आर्थिक प्रबन्धन गड़बड़ किया है जिसके कारण राज्य को लगातार उधार के भरोसे रहना पड़ रहा है। राज्य के बजट से भी यही संकेत मिल रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल पर उसकी जीडीपी का लगभग 40% कर्ज है। वित्त प्रबन्धन के लिए बनाए गए नियमों के अनुसार, किसी राज्य पर उसकी अर्थव्यवस्था का 20%-25% से अधिक कर्ज नहीं होना चाहिए।