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कुर्क होगी अतीक अहमद की कोठी ‘मन्नत’, शाहरुख़ खान का फैन था माफिया: काली कमाई से बवनाया था

उत्तर प्रदेश सरकार ने माफिया सरगना अतीक अहमद की ग्रेटर नोएडा स्थित कोठी ‘मन्नत’ को जल्दी की कुर्क करेगी। पुलिस कमिश्नर कोर्ट ने चार करोड़ रुपए से अधिक की इस कोठी को जब्त करने का आदेश जारी कर दिया है। अब किसी भी समय भी उस पर कार्रवाई हो सकती है। पता चला कि अतीक ने अपनी काली कमाई से मन्नत कोठी को तैयार किया था।

माफिया अतीक अहमद के खिलाफ कैंट थाने में दर्ज गैंगस्टर के मुकदमे के तहत इसकी छानबीन की गई है। पुलिस कमिश्नर की कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। इसके बाद गैंगस्टर एक्ट की धारा 14 (1) के तहत इस संपत्ति को कुर्क करने का आदेश जारी किया गया। यह कोठी ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 36 के A ब्लॉक में स्थित है, जिसका नंबर 107 है।

सीटी डीसीपी दीपक भूकर के अनुसार, प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा की कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत अतीक अहमद की कोठी को जब्त करने का आदेश दिया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अतीक को ग्रेटर नोएडा में साल 1994 में 500 वर्गमीटर के इस भूखंड को आवंटित किया गया था। इसके बाद वह उसने कोठी बनवाई थी।

माफिया अतीक अहमद बॉलीवुड ऐक्टर शाहरुख खान का फैन था। उसने शाहरुख खान की कोठी के नाम पर अपनी कोठी का नाम मन्नत रखा था। अतीक अहमद इस कोठी में आता-जाता भी था। जाँच के दौरान पुलिस को काली कमाई से खरीदी गई इस कोठी को लेकर तमाम अहम दस्तावेज मिले थे। पुलिस ने जाँच के दौरान प्रशासन, विकास प्राधिकरण और बैंक की भी मदद ली थी।

दरअसल, 24 फरवरी 2023 को उमेश पाल और उनके दो सरकारी सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में अतीक अहमद और उसके शूटरों का नाम आया था। जब पुलिस और एसटीएफ उन शूटरों की तलाश करने के दौरान अतीक के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसी दौरान नोएडा स्थित उसकी कोठी के बारे में पता चला था।

अतीक अहमद के बेटे ने वर्ष 2015 में ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-36 में स्थित इसी कोठी में रहकर एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी। इतना ही नहीं, अतीक अहमद की बड़ी-बड़ी बैठक इस मकान में होती थीं। जमीन और रंगदारी से जुड़ी डील यहाँ फाइनल होती थी। इस वजह से यह कोठी अपराधियों का अड्डा भी बन गई थी।

जाँच के दौरान यह भी सामने आया था कि उमेश पाल की हत्या करने के बाद अतीक का बेटा असद और उसका साथी शूटर गुलाम इस मन्नत में पहुँचे थे और कुछ देर रूकने के बाद वहाँ से निकल गए थे। आशंका जताई जा रही है कि कोठी में पहले से ही पैसा छिपा कर रखा गया था और असद व गुलाम पैसों को लेने के लिए ही ग्रेटर नोएडा की इस कोठी में गए थे।

नोएडा पुलिस और एलआइयू ने जब छानबीन शुरू की थी तो पता चला कि एक राजमिस्त्री मन्नत नाम की इस कोठी में पिछले कई सालों से रह रहा था। यह कोठी बीपीएल कार्डधारक राजमिस्त्री हुब लाल के नाम खरीदी गई थी। अब प्रयागराज पुलिस की एक टीम जल्द ही ग्रेटर नोएडा जाकर मन्नत को कुर्क करेगी। कुर्की की कार्रवाई के दौरान डुगडुगी बजाकर पुलिस मुनादी भी कराएगी।

‘हमारी सभ्यता की यात्रा की अमिट निशानियाँ हैं हमारे तीर्थ स्थल’: राम मंदिर के बाद अब असम में ‘माँ कामाख्या दिव्यलोक’, PM मोदी ने किया शिलान्यास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 फरवरी 2024 को असम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने 11,600 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं में तेल और गैस, रेलवे, सड़क और स्वास्थ्य से जुड़ी परियोजनाएँ शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर में दर्शन किए और फिर माँ कामाख्या दिव्यलोक परियोजना का शिलान्यास भी किया। यही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी में रोडशो करने के बाद जनसभा को भी संबोधित किया और असम के विकास के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 फरवरी 2024 को असम के गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि तीर्थ मंदिर हमारी आस्था के स्थान हैं और हमारी सभ्यता की यात्रा की अमिट निशानियाँ हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अयोध्या के बाद माँ कामाख्या के द्वार आना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि माँ कामाख्या असम की आस्था का प्रतीक हैं और पूर्वोत्तर के लोगों के लिए शक्ति का स्रोत हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार तीर्थ स्थलों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तीर्थ यात्रा को आसान बनाने के लिए कई पहल की हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “अयोध्या में भव्य आयोजन के बाद मैं अब यहाँ माँ कामाख्या के द्वार पर आया हूँ। आज मुझे यहाँ माँ कामाख्या दिव्यलोक परियोजना का शिलान्यास करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जब ये बनकर पूरा होगा तो ये देश और दुनिया भर से आने वाले माँ के भक्तों को असीम आनंद से भर देगा।”

जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे तीर्थ, हमारे मंदिर, हमारी आस्था के स्थान, ये सिर्फ दर्शन करने की स्थली ही नहीं हैं। ये हजारों वर्षों की हमारी सभ्यता की यात्रा की अमिट निशानियाँ हैं। भारत ने हर संकट का सामना करते हुए कैसे खुद को अटल रखा, ये उसकी साक्षी है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तीर्थ मंदिर केवल धार्मिक स्थान नहीं हैं, बल्कि वे हमारी सभ्यता और संस्कृति का भी प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थ मंदिर हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और हमें प्रेरणा देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार ने तीर्थ यात्रा को आसान बनाने के लिए कई पहल की हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने तीर्थ स्थलों को बेहतर बुनियादी ढाँचा प्रदान करने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं। असम भारत के पूर्वोत्तर का एक राज्य है। यह राज्य अपनी समृद्ध संस्कृति और विविध धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। कामाख्या मंदिर असम के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा असम के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। यह राज्य के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को मान्यता देता है।

पीएम मोदी ने आगे कहा, “असम में भाजपा की सरकार से पहले केवल 6 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि आज यहाँ 12 मेडिकल कॉलेज हैं। असम आज नॉर्थ ईस्ट में कैंसर के इलाज का बहुत बड़ा केंद्र बन रहा है। पिछले 10 वर्षों में, हमने विश्वविद्यालय और कॉलेज बनाए हैं। पहले बड़े संस्थान बड़े शहरों में ही बनाये जाते थे। हमने देश में आईआईटी, आईआईएम और एम्स का नेटवर्क फैलाया है। पिछले 10 वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुनी हो गई है।”

दरगाह के पास से गुजर रहीं 2 गायों पर डाल दिया तेजाब, एक की हालत गंभीर: गुजरात पुलिस ने 5 मुस्लिम नाबालिगों को पकड़ा, फिर भेजा बाल सुधार गृह

गुजरात के वडोदरा में एक दरगाह के पास कुछ नाबालिग मुस्लिमों ने 2 गायों पर तेज़ाब डालकर उन्हें जला दिया। इस मामले में पाँच मुस्लिम नाबालिगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। कहा जा रहा है कि इन लड़कों ने यहाँ से गुजर रही गायों को पहले तो घेरकर परेशान किया और फिर उन पर तेजाब डाल दिया।

जानकारी के अनुसार, यह घटना वडोदरा के गोरवा इलाके की है। यहाँ गोरवा बापू की दरगाह के पास मुस्लिम समुदाय के 5 नाबालिगों ने दो गाय को घेर लिया और उन पर हमला कर दिया। इसके बाद उन बेजुबान जानवरों पर तेजाब फेंक दिया। इनमें से एक गाय तो तेजाब के हमले से बच गई, लेकिन दूसरी गंभीर रूप से घायल हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि नाबालिग अपने साथ एसिड लेकर आए थे। जब पुलिस ने इनसे पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि यह तेज़ाब उन्होंने एक गाड़ी से निकाला और कुछ तेजाब जमीन में फेंकने के बाद गायों पर डाल दिया। यह घटना शुक्रवार (2 फरवरी 2024) की रात को लगभग 8:30 गोरव दरगाह इलाके में आईटीआई चौराहे के पास हुई।

जब गायों पर तेज़ाब फेंका गया तो वह डर कर इधर-उधर भागने लगीं। लोगों ने इन गायों को भागते हुए देखा तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। गायों पर हमले के बाद सुनील लिंबाचिया नाम के एक व्यक्ति ने पुलिस के पास इस मामले में शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने पुलिस के पास जान से मारने और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज करवाया है।

उन्होंने हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज कराया है। गोरवा पुलिस ने इस सम्बन्ध में जाँच शुरू कर दी है। पुलिस ने जानकारी इकट्ठा करके इन पाँच नाबालिगों को हिरासत में ले लिया और उनसे पूछताछ की। बाद में इन्हें बाल सुधार गृह भेज दिया गया। पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि इन नाबालिगों ने घटना को खुद ही अंजाम दिया या फिर उनके पीछे कोई और भी है।

बिहार में NDA सरकार ने भंग किए महादलित और अति-पिछड़ा समेत 4 आयोग, नए चेहरों के साथ फिर से किया जाएगा गठित

बिहार की एनडीए सरकार ने 4 आयोगों को भंग करने का फैसला लिया है। इनमें महादलित आयोग, अति पिछड़ा आयोग, राज्य अनुसूचित जाति आयोग और राज्य अनुसूचित जनजाति (एसटी) आयोग शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन आयोगों का पुनर्गठन किया जाएगा। नए आयोगों में नए चेहरे होंगे और वे अधिक प्रभावी होंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बारे में बिहार सरकार के समान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना भी जारी कर दी है। 2 फरवरी 2024 को जारी हुई अधिसूचना के मुताबिक, बिहार में अति पिछड़े वर्गों के लिए बने आयोग के अध्यक्ष डॉ नवीन कुमार आर्य के साथ ही इस आयोग के 4 अन्य सदस्य भी हटा दिए गए हैं।

इसी तरह महादलित आयोग के अध्यक्ष संतोष कुमार निराला और उसके चारों सदस्यों को भी पदमुक्त कर दिया गया है। बिहार राज्य के अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष शंभू कुमार सुमन और उसके तीन सदस्यों के साथ ही अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार और आयोग के 4 अन्य सदस्यों की भी छुट्टी कर दी गई है। ये अधिसूचना सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मोहम्मद सोहैल ने जारी की। सरकार ने बताया है कि लोकहित और प्रशासनिक दृष्टिकोण को सुधारने के लिए सभी को पदमुक्त किया जाता है। जल्द ही इस आयोगों का पुनर्गठन किया जाएगा।

अतिपिछड़े वर्ग के लिए बनाए गए राज्य आयोग के लिए नियुक्तियाँ 2022 में की गई थी, तो अन्य तीनों आयोगों में नियुक्तियाँ 25 जुलाई, 2023 को की गई थी। यह फैसला राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के बाद लिया गया है। बीजेपी के एनडीए में शामिल होने के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियाँ बदल गई हैं। सरकार नए सिरे से गठन के बाद इन आयोगों में नए चेहरे लाना चाहती है।

प्रभारी मंत्रियों के साथ ही 20 सूत्री समितियाँ भी भंग

नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार के सभी जिलों में तैनात प्रभारी मंत्रियों को भी हटा दिया था। चूँकि, मंत्री आरजेडी के भी थे। ऐसे में सरकार की व्यवस्था को मजबूत करने के संदर्भ में हटा दिया गया। जो मंत्री काफी समय से एक जिले की कमान सँभाल रहा था, उसे दूसरे जिले की कमान सौंपने की कोशिश की जा रही है। यही नहीं, नीतीश कुमार ने राज्य में 20 सूत्री समितियाँ को भी भंग कर दिया था।

15 साल के नाबालिग को सुधारने के लिए कर्नाटक पुलिस ने जमात के पास भेजा, 3 दिन में भाग गया: चोरी की 10+ घटनाओं में था आरोपित, मंत्री तक को नहीं छोड़ा

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में पुलिस ने एक नाबालिग अपराधी को सुधरने के उद्देश्य से 30 दिनों के लिए जमात में भेजा। वह नाबालिग यहाँ सुधरने के बजाय तीन दिनों में ही जमात के पास से भाग गया। बताया जा रहा है कि यह नाबालिग आदतन अपराधी था और इसके 10 से अधिक मामलों में जुड़े होने की जानकारी है।

डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ दिन पहले बेंगलुरु पुलिस ने इस लड़के को गिरफ्तार किया था। यह नाबालिग लगातार कई अपराध में संलिप्त रहा था। हमेशा नई तकनीक का सहारा लेने वाली बेंगलुरु पुलिस ने इस बार सुधार लाने के लिए इसे जमात के पास भेजा, ताकि वह वहाँ दीन से प्रभावित होकर अपराध छोड़ दे।

नाबालिग ने बीते वर्ष कर्नाटक के एक मंत्री से भी फोन छीन लिया था। मंत्री उस समय बनासवाड़ी पुलिस स्टेशन के तहत सुबह की सैर पर थे और यह दौड़ता हुआ आकर उनसे फ़ोन छीनकर फरार हो गया था। मंत्री द्वारा शिकायत दर्ज करवाने के बाद इसे गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसका इतिहास देखकर पुलिस चौंक गई। वह कई अपराधों में संलिप्त पाया गया।

लड़का पूर्वी बेंगलुरु के बनासवाड़ी उपखंड का निवासी है। कुछ साल पहले उनके पिता के निधन के बाद उनकी मां ही परिवार में कमाने वाली एकमात्र सदस्य हैं। उसका एक छोटा भाई है। पुलिस ने बताया कि यह नाबालिग चोरी और डकैती के तीन-तीन मामलों को मात्र 10 दिनों के भीतर अंजाम दे चुका है।

लगभग 15 साल के इस नाबालिग ने यह सारा कारनामा उसने 2023 के अंत में किया है। पुलिस ने बताया कि नाबालिग ने ताले तोड़कर गाड़ियाँ चुराने में महारत हासिल कर ली है और वह बिना किसी समस्या के गाड़ियों का ताला तोड़कर उन्हें लेकर भाग जाता था। वह 10 गाड़ियाँ चोरी कर चुका था, जो कि उसके पकड़े जाने के बाद बरामद कर ली गई हैं।

इन सबके बाद उसे गिरफ्तार करके बाल सुधार गृह भेजा गया। वहाँ उसमें कोई बदलाव नहीं आया और बाहर आकर फिर से चोरी करने लगा। इसके बाद पुलिस ने उसे फिर से पकड़ा। इस बार पुलिस ने उसे बाल सुधार गृह भेजने के बजाय उसे एक मदरसे में दाखिल करवाने का निर्णय लिया, ताकी उसे दीन की तालीम मिल सके।

हालाँकि, बेंगलुरु पुलिस का यह निर्णय उलटा पड़ा और यह नाबालिग तीन दिनों के भीतर ही जमात की निगरानी में मदरसे से चम्पत हो गया। उधर बेंगलुरु के डिप्टी पुलिस कमिश्नर का कहना है कि नाबालिग पर जमात और मदरसे ने सकारात्मक प्रभाव डाला है, क्योंकि बीते 25 दिनों से उसके किसी चोरी में पकड़े जाने की खबर नहीं आई है।

‘पुलिस नहीं, मुझ पर मुन्नन खाँ के वर्दी वाले गुर्गों ने चलाई थी गोली’: कारसेवक नरसंहार में जीवित बचे महंत ने बताया- मरा समझ सरयू में फेंकने जा रहे थे

अयोध्या में जन्मभूमि पर 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हर्षोउल्लास के साथ संपन्न हो गई। विधि-विधान से हुए इस आयोजन के बाद दुनिया भर के श्रद्धालुओं का रामजन्मभूमि पर दर्शन के लिए तांता लगा हुआ है। श्रद्धालुओं के मन में जहाँ राम मंदिर के लिए 500 वर्षों तक चले संघर्ष में प्राण गँवाने वाले रामभक्तों के लिए श्रद्धा है तो दूसरी तरफ पवित्र धर्मनगरी में नरसंहार करवाने वालों के प्रति आक्रोश भी।

ऑपइंडिया की पड़ताल में साल 1990 में कारसेवकों के हुए नरसंहार में मुन्नन खाँ का भी नाम सामने आया था। बलिदानियों के परिजनों ने नरसंहार में मुन्नन खाँ को आरोपित किया था। इस बीच हमने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में एक जीवित कारसेवक खोज निकाला है, जिनका दावा है कि उन पर लगी गोली पुलिस नहीं, बल्कि मुन्नन खाँ के गुर्गों द्वारा चलाई गई थी। हालाँकि, इस नरसंहार में वे बचने में कामयाब रहे।

रामजन्मभूमि संघर्ष के तमाम पहलुओं की पड़ताल करते हुए हम गोंडा जिले में पहुँचे। गोंडा में हमें लखनऊ रोड पर कमिश्नर आवास के पास दीवानी चौराहे पर बने माँ दुर्गा के मंदिर में गए। यह मंदिर आसपास के श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र है। मंदिर के महंत 68 वर्षीय रामस्वरूप दास हैं, जो कि मूलतः गोंडा जिले के ही निवासी हैं। ऑपइंडिया से बातचीत में रामस्वरूप ने दावा किया कि मुलायम यादव की सरकार के दौरान 1990 की कारसेवा में वे सक्रिय रूप से शामिल थे।

पुलिस में फॉलोवर की नौकरी छोड़कर निकले पड़े थे अयोध्या

सन 1990 में रामस्वरूप दास उत्तर प्रदेश पुलिस की PAC विंग में फॉलोवर की नौकरी करते थे। गोंडा स्थित उनके गाँव से होकर कई राज्यों के कारसेवक निकलते थे। इस दौरान वे ग्रामीणों के साथ मिलकर इन कारसेवकों के लिए खाना-पीना और रहने आदि का इंतजाम करते थे। बचपन से ही रामभक्ति में लीन रहने वाले रामस्वरूप दास ने बताया कि उन्होंने महीनों तक कारसेवकों की सेवा की।

इस बीच उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव द्वारा ‘अयोध्या में परिंदा भी पर न मार पाने’ वाला चैलेन्ज दिया गया। रामस्वरूप ने बताया कि अपने ही धर्मस्थल के लिए सरकार द्वारा दी गई ये चुनौती उन्हें अखर गई। इसके बाद वे कारसेवा के लिए अपने गाँव और आसपास के लोगों का जत्था बनाकर अयोध्या की ओर कूच कर गए।

पुलिस पहरे से बचकर पहुँचे अयोध्या

रामस्वरूप जब अयोध्या की तरफ कूच किए तब उनके साथ राजस्थान से आए रामभक्तों का भी एक जत्था जुड़ गया था। इन सभी को गाँव के अलग-अलग रास्तों से निकाल कर खेतों में रात्रि विश्राम आदि करवाते हुए आखिरकार रामस्वरूप 29 अक्टूबर 1990 में अयोध्या की सीमा पर पहुँच गए। अब अयोध्या में घुसने के लिए नदी पार करनी थी। दूसरी तरफ गुप्तार घाट था, जहाँ उन्हें अपने जत्थे सहित पुलिस से पहरे से बच कर उतरना था।

PAC और मिलिट्री वालों ने दिया खाना और दी सुरक्षित रहने की सलाह

रामस्वरूप का दावा है कि जब उन्होंने अपने साथियों सहित नदी पार की, तब उनको गुप्तार घाट पर यूपी PAC के जवान मिले। उन्होंने कारसेवकों से किसी भी प्रकार की अभद्रता नहीं की, बल्कि वे उनसे सम्मानित ढंग से पेश आए। PAC के जवानों की रामस्वरूप इस बात के लिए भी तारीफ कर रहे थे कि अगर वो बल प्रयोग करते तो इसकी भी आशंका थी कि नाव नदी में ही पलट जाती और सभी कारसेवक डूब जाते।

महंत रामस्वरूप ने आगे बताया कि नदी के पार उतरते ही कारसेवक भारतीय सेना की डोगरा रेजिमेंट सेंटर के रास्ते से निकलने लगे। तब सेना के जवानों ने उन सभी कारसेवकों को अपने हिस्से का खाना खिलाया। रामस्वरूप का दावा है कि इन्हीं सैनिकों ने कारसेवकों को वो जगह भी बताई थी, जहाँ वो रात भर चैन से सो सकते थे।

विवादित ढाँचे तक पहुँचा था रामभक्तों का जत्था

रामस्वरूप ने बताया कि 29 अक्टूबर की रात में नींद लेने के बाद 30 अक्टूबर 1990 की सुबह 4 बचे भोर में ही उनका जत्था वहाँ से महज 5 से 6 किलोमीटर स्थित रामजन्मभूमि की तरफ कूच कर गया। इसी दिन सुबह लगभग 9 बजे तक यह जत्था छिपते-छिपाते विवादित ढाँचे तक पहुँच गया।

रामस्वरूप के मुताबिक, तब तक अयोध्या में इतने रामभक्त जुट चुके थे कि हर तरफ भगवा रंग और जय श्रीराम की ही गूँज ही सुनाई दे रही थी। हर कारसेवक जल्द से जल्द विवादित ढाँचे तक पहुँचना चाहता था। इसी जनसैलाब ने अयोध्या में पुलिस द्वारा लगाई गई पहली बैरिकेड को पार कर लिया।उस समय तक किसी भी रामभक्त को जीने-मरने की चिंता नहीं थी।

ढाँचे पर झंडा लगाने बढ़े तो पीछे से ललकारा गया

रामस्वरूप बताते हैं कि वे उन गिने-चुने लोगों में शामिल थे, जो विवादित ढाँचे तक पहुँच गए थे। यहाँ गुंबद से सटा हुआ एक नीम का पेड़ था, जिसने रामभक्तों के लिए सीढ़ी का काम किया। उसी पर चढ़कर कई लोग गुंबद पर पहुँच गए। ये लोग वहाँ भगवा ध्वज फहराना चाहते थे। तभी पीछे से एक चेतावनी आई, “नीचे उतर जाओ, वरना गोली मार दी जाएगी”। हालाँकि, रामभक्त झंडा लगाना कोई ऐसा अपराध नहीं मान रहे थे, जिसके लिए उन्हें गोली मार दी जाएगी।

गोली लगते ही बेहोश हो गए रामस्वरूप दास

रामस्वरूप दास हमें आगे बताते हैं कि नीम के पेड़ से ढाँचे पर चढ़ने वालों में वो खुद भी शामिल थे। एक आवाज के बाद किसी को उस पर अमल नहीं करने दिया गया और गोलियाँ चलनी शुरू हो गईं। रामस्वरूप के आगे ही उनके कई साथी गोली लगते ही बलिदान हो गए। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इसी बीच एक गोली रामस्वरूप की कमर के निचले हिस्से में लगी। गोली लगते ही रामस्वरूप काफी ऊँचाई पर बने गुंबद से नीचे गिर पड़े और बेहोश हो गए। इसके बाद क्या हुआ उनको पता नहीं चला।

जिन्दा ही थी नदी में फेंकने की तैयारी पर पहचान गए PAC वाले

रामस्वरूप का कहना है कि उनको जिन्दा ही नदी में फेंकने के लिए तत्कालीन प्रशासन तैयारी कर चुका था। बेहोशी की हालत में उनको एक ट्रक में कई बलिदानियों के साथ लाद लिया गया था। इन सभी को सरयू नदी के घाट पर ले जाकर एक-एक करके नदी में फेंका जा रहा था। रामस्वरूप PAC में फॉलोवर थे, जिसकी वजह से उनको कई PAC वाले पहचानते थे।

उनका दावा है कि इसी दौरान उनका नंबर आते ही एक जवान ने उन्हें पहचान लिया। उसे साथी जवानों को बुलाया, तब तक रामस्वरूप की साँसे चल रही थीं। आनन-फानन में रामस्वरूप को अयोध्या के श्रीराम अस्पताल में भर्ती करवाया गया। कई दिनों तक चले इलाज के बाद रामस्वरूप को जीवित बचाया जा सका।

रामस्वरूप को लगी गोली डोगरा मिलिट्री हॉस्पिटल में निकाली गई थी। आज भी रामस्वरूप गोली के कुप्रभाव से उबर नहीं पाए हैं। वो अभी भी दौड़ नहीं पाते हैं। रामस्वरूप का यह भी दावा है कि तब ऐसे कई घायल रामभक्त भी थे, जिनको जिन्दा ही नदी में फेंक दिया गया था। बाद में उनका कुछ भी अता-पता नहीं चल पाया।

पुलिस ने नहीं बल्कि मुन्नन खाँ के गुर्गों ने चलाई थी गोली

रामस्वरूप ने बड़े विश्वास के साथ दावा किया कि उनको गोली मारकर घायल करने और उनके जत्थे वाले साथियों की जान लेने वाली हरकत पुलिस ने नहीं, बल्कि गोंडा के माफिया और तत्कालीन सांसद मुन्नन खाँ के साथियों ने की थी। रामस्वरूप ने बताया कि रामजन्मभूमि परिसर तक मुन्नन खाँ के अपराधी गुर्गे पुलिस की वर्दी पहनकर हथियारों से लैस खड़े थे।

बकौल रामस्वरूप दास, गोंडा में जहाँ का रहने वाला मुन्नन खाँ भी रहने वाला था, उस जगह के रहने वाले कई लोग उनके जत्थे में शामिल थे। जब गोलियाँ चलने लगीं तब गोंडा के कारसेवकों ने पहचान लिया कि पुलिस की वर्दी में गोली चलाने वाला असल में यूपी पुलिस के सिपाही नहीं, बल्कि मुन्नन खाँ के गुर्गे थे।

जब रामस्वरूप दास काफी दिनों बाद ठीक हुए तब भी उनके साथी कारसेवकों ने इस बात पर चर्चा की थी कि मुन्नन खाँ के लोगों ने रामभक्तों की हत्या की है। हालाँकि, मुन्नन खाँ पर कोई कार्रवाई नहीं करवाई जा सकी। रामस्वरूप के मुताबिक, तब मुलायम यादव की सरकार में मुन्नन खाँ का बहुत बड़ा रुतबा हुआ करता था।

अब मुस्लिम भी करेंगे भगवान वेंकटेश्वर की सेवा! हुसैन की अर्जी के बाद रास्ता निकालने में जुटा तिरुपति बोर्ड, कहा – ये ख़ुशी की बात

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने कहा है कि वह मुस्लिम भक्तों के तिरुपति की सेवा करने के रास्ते तलाशेंगे। ऐसा मुस्लिम भक्तों के अनुरोध पर किया जा रहा है। कुछ मुस्लिम भक्तों ने भगवान् वेंकटेश्वरा की सेवा करने की माँग बोर्ड से की है।

कुछ मुस्लिम भक्तों ने माँग की है कि उन्हें श्रीवरी सेवा करने का अवसर दिया जाए। यह एक प्रकार की कारसेवा होती है, इसमें बोर्ड हिन्दू श्रद्धालुओं को मंदिर से जुड़े कामों में लगाता है। हिन्दू भक्त इसे अपनी श्रद्धानुसार कर सकते हैं, इसके लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। इसकी शुरुआत TTD ने वर्ष 2000 में की थी। इस सेवा के तहत मंदिर प्रशासन ऐसे श्रृद्धालुओं को 60 से अधिक क्षेत्रों, जैसे कि- ट्रांसपोर्ट, साफ़ सफाई, अन्नप्रसादम और अन्य कार्यों में लगाता है।

TTD से आंध्र प्रदेश के नायडूपेट्टा के रहने वाले मुस्लिम भक्त हुसैन भासा ने यह अर्जी की है कि उन्हें तिरुपति में सेवा करने का अवसर दिया जाए। उन्होंने TTD से माँग की थी कि उन्हें भी श्रीवरी सेवा में हिस्सा लेना है। इसी को लेकर TTD के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर वी धर्मा रेड्डी ने कहा है कि वह बोर्ड से बात करके इसकी संभावनाएँ तलाशेंगे। रेड्डी का कहना है यह प्रसन्नता की बात है कि अन्य धर्मों के लोग भी भगवान वेंकटेश्वर में श्रद्धा रखते हैं और उनकी उपासना करना चाहते हैं।

वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। यह आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण ईस्वी 300 से चालू हुआ माना जाता है। यहाँ प्रत्येक वर्ष लगभग 3-4 करोड़ श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन करने आते हैं।

TTD 90 वर्षों से भी अधिक से तिरुमला वेंकटेश्वरा मंदिर का प्रबन्धन करता आ रहा है। इसके अंतर्गत अभी 12 मंदिर आते हैं। TTD वर्तमान में देश में सबसे सुप्रबंधित बोर्ड में से एक है और अन्य जगहों पर भीड़ व्यवस्थित करने और धार्मिक संस्थान चलाने को लेकर इसका उदाहरण दिया जाता है।

जो रूस में भारतीय दूतावास की सिक्योरिटी में था तैनात, वो निकला ISI का एजेंट: यूपी ATS ने पाकिस्तान के लिए काम कर रहे जासूस को दबोचा

उत्तर प्रदेश आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने मेरठ से एक ऐसे ISI एजेंट को गिरफ्तार किया है, जो मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास से जुड़ा रह चुका है। आरोपित का नाम सत्येंद्र सिवाल है और वह हापुड़ का रहने वाला है। वह रूस के मॉर्को में भारतीय दूतावास में मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) के पद पर तैनात था। वो महत्वपूर्ण जानकारियाँ अपने आईएसआई हैंडलर को भेज रहा था। इसके लिए वो पैसे देकर जानकारियाँ निकाल रहा था और फिर उसे पाकिस्तान भेज रहा था।

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सत्येंद्र सिवाल को यूपी ATS ने मेरठ से पकड़ा। एटीएस को सूचना मिली थी कि सत्येंद्र सिवाल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी कर रहा है। इसके बाद एटीएस ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। ATS ने जब सत्येंद्र सिवाल को गिरफ्तार किया तो उसके पास से कुछ संदिग्ध दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए। उसके कब्जे से 2 मोबाइल भी बरामद हुए थे।

पूछताछ में सिवाल ने कबूल किया कि वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी कर रहा था। सिवाल ने बताया कि आईएसआई के एजेंटों ने उसे भारतीय दूतावास से संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करने का काम दिया था। वो पैसे देकर आर्मी से जुड़ी जानकारियाँ हासिल कर रहा था और फिर से अपने हैंडलर को भेज रहा था। वो मॉस्को में तैनाती के दौरान ही पाकिस्तान के लिए काम करने लगा था, या बाद में, अभी सुरक्षा एजेंसियाँ इसका पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।

एटीएस अब सत्येंद्र सिवाल से पूछताछ कर रही है। एटीएस को उम्मीद है कि सत्येंद्र सिवाल से पूछताछ में आईएसआई के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। यह गिरफ्तारी भारत के लिए एक बड़ी सफलता है। साथ ही यह घटना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चेतावनी है। एजेंसियों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि आईएसआई जैसे आतंकवादी संगठनों के एजेंटों को भारत में घुसपैठ करने से रोका जा सके।

‘पूनम पांडेय ने अपनी हरकत से कैंसर पीड़ितों का बनाया मजाक’: MLA ने की कार्रवाई की माँग, दोस्त बोली – कुछ हुआ तो अब कुत्ता भी नहीं भौंकेगा

खबरों में बने रहने के लिए कुछ भी करने वाली पूनम पांडेय सर्वाइकल कैंसर से अपनी मौत की अफवाह उड़ाकर बुरी फँसी हैं। हर तरफ उनकी आलोचना हो रही है। महाराष्ट्र के नेता सत्यजीत तांबे ने अफवाह उड़ाने के लिए पूनम पांडेय के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा कि पांडेय ने कैंसर से बचे लोगों के साथ मजाक किया है। वहीं, भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री संभावना सेठ ने पूछा है कि क्या रेप पर भी ऐसे ही अलर्ट करेंगी पूनम पांडेय।

महाराष्ट्र के निर्दलीय विधायक सत्यजीत तांबे ने शनिवार (3 फरवरी 2024) को कहा कि मुंबई पुलिस को पूनम पांडे के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहिए, ताकि उन लोगों के लिए एक उदाहरण स्थापित किया जा सके जो खुद के प्रचार के लिए ऐसी हरकतें करते हैं। बता दें कि बाद में पूनम पांडे ने कहा था कि उनकी मौत का नाटक सर्वाइकल कैंसर जागरूकता अभियान का हिस्सा था।

तांबे ने कहा, “सर्वाइकल कैंसर से एक प्रभावशाली व्यक्ति/मॉडल की मृत्यु की खबर बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने का साधन नहीं हो सकती है। यह पूरा प्रकरण सर्वाइकल कैंसर की गंभीर प्रकृति को दूर कर देता है और ध्यान पूरी तरह से प्रभावित करने वाले की ओर आकर्षित कर देता है। अभिनेता ने जागरूकता बढ़ाने के बजाय कैंसर से बचे लोगों के साथ मजाक किया है।”

उन्होंने पूनम पांडेय की मौत की खबर छापने वाले समाचार संस्थानों पर भी सवाल उठाया। सत्यजीत तांबे ने आगे कहा, “एक और समस्या यह है कि तथ्यों की पुष्टि किए बिना समाचार एजेंसियों द्वारा नाटक की रिपोर्ट कैसे की गई। मीडिया का इस्तेमाल अनुचित तरीकों से अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा था।”

इतना ही नहीं, भोजपुरी फिल्मों की ऐक्ट्रेस संभावना सेठ ने भी पूनम पांडेय की इस हरकत पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, मुझे मालूम हुआ कि जो व्यक्ति कल मर चुका था, वह आज फिर से जिंदा हो गया। ये किस किस्म की पीआर ऐक्टिविटी है?” उन्होंने पूनम पांडेय से सवाल किया, आपके पीआर ने समझाया नहीं कि ये नहीं करना चाहिए। पूरी मीडिया कल डिस्टर्ब थी।”

संभावना सेठ ने आगे कहा, “आप कह रहे हो आपने अवेयरनेस के लिए ये सब किया, लेकिन आप करोड़ों लोगों की मेंटल हेल्थ से खेले हो आप। मैं पूरा दिन यही सोचती रही कि 32 साल की लड़की थी यार, वो चली गई। सुबह से शाम तक ये मेरे साथ होता रहा। मैं सपने देख रही थी। बाद में पता चला कि ये अवेयरनेस प्रोग्राम था। तो आप अवेयरनेस के लिए और क्या-क्या करने वाली हो?”

उन्होंने पूनम पांडेय पर सवाल उठाते हुए कहा, “कल को अगर असल में कुछ हो गया तो एक कुत्ता भी नहीं भौंकने वाला। अगर कल को रेप अवेयरनेस आ गई तब क्या करोगी। शर्म आनी चाहिए। ये बहुत ही शर्मनाक ऐक्टिविटी है।” संभावना सेठ ने कहा कि उनके एक मीडिया फ्रेंड ने कहा था कि अवेयरनेस जैसा कुछ आ रहा है, लेकिन उन्होंने कह दिया था कि कोई मौत से नहीं खेल सकता।

इसके पहले ‘लॉकअप’ शो में कंटेस्टेंट रहीं डिजाइनर सायशा शिंदे भी उन्हें लताड़ चुकी हैं। सायशा शिंदे ने कहा कि मौत न कोई मजाक है और न ही कोई पब्लिसिटी स्टंट है। उन्होंने पूनम पांडेय को लताड़ते हुए कहा था कि वह उन्हें कभी माफ़ नहीं करेंगी।

सायशा शिंदे ने कहा था, “पूनम पांडेय को शर्म आनी चाहिए। तुम दोस्त बनाने लायक नहीं हो। तुम इसे जागरूकता कहती हो? बकवास बंद करो। मेरी माँ की ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी हुई है। किडनी फेल होने से मेरी बहन का निधन हो गया। मानसिक बीमारी से मेरी चाची चल बसीं। तुम्हारी तरह वो सब कभी वापस नहीं आ सकतीं।”

वहीं अभिनेत्री पूजा भट्ट ने भी पूनम पांडेय की मौत पर शोक जताया था। हालाँकि, बाद में ट्वीट को डिलीट करते हुए उन्होंने कहा था कि ये बीमारी से जूझ रहे लोगों का अपमान है। वहीं एक्टर अली गोनी ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताते कहा था कि पूनम पांडेय और उनकी PR टीम का बॉयकॉट होना चाहिए, शर्म आती है।

‘खातूनों को हिजाब में रखो, पब्लिक में मत डालो फोटो’: बुर्के में नहीं दिखी इरफ़ान पठान की बीवी तो कट्टरपंथी पढ़ाने लगे इस्लाम का पाठ

पूर्व भारतीय क्रिकेटर इरफ़ान पठान ने अपनी पत्नी का बिना बुर्का के फोटो डाला तो इस्लामी कट्टरपंथी उन पर भड़क गए। इस्लामी कट्टरपंथियों ने उनको इस्लाम और दीन का पाठ पढ़ाना चालू कर दिया। ऐसा पहली बार हुआ कि इरफ़ान पठान ने अपनी पत्नी का बिना मुँह ढका हुआ फोटो डाला था।

इरफ़ान पठान ने यह फोटो अपनी शादी की 8वीं सालगिरह पर डाली। उन्होंने लिखा, “एक शख्स द्वारा न जाने कितने ही कार्य में खुद को दक्ष कर लिया गया है – मूड अच्छा करने वाली, कॉमेडियन, गड़बड़ करने वाली और एक अच्छी साथी, दोस्त, और मेरे बच्चों की माँ। मैं इस यात्रा में तुम्हें अपनी पत्नी के तौर पर पाकर प्रसन्न हूँ। आठवीं सालगिरह की बधाइयाँ।”

हालाँकि, इरफ़ान पठान का अपनी पत्नी के साथ फोटो डालना इस्लामी कट्टरपंथियों को रास नहीं आया। उनकी पत्नी के साथ डाले गए फोटो पर बड़ी संख्या में कट्टरपंथी उन्हें इस्लाम और दीं की तालीम देने लगे और उनकी पत्नी पर टिप्पणियाँ करने लगे।

एक यूजर ने लिखा, “मुस्लिम खातून को हिजाब में रहना चाहिए।”

एक और ने लिखा, “एक मुस्लिम होने के नाते उनकी फोटो जनता में मत डालो।”

इरफ़ान पठान पर हमला करते कट्टरपंथी

इसके बाद एक यूजर ने उनके भाई युसूफ पठान की फोटो उनकी पत्नी के साथ डाली। इसमें युसूफ पठान की पत्नी ने बुर्का पहन रखा है। इसने लिखा, “इसीलिए तुम्हारा भाई तुमसे अच्छा है।”

इरफ़ान पठान पर हमला करते कट्टरपंथी

एक यूजर ने उनसे पूछा कि इतने दिन से चेहरा छुपा कर रखा था तो अब दिखाने की क्या जरूरत पड़ गई।

इरफ़ान पठान पर हमला करते कट्टरपंथी

इरफ़ान पठान की पत्नी का नाम सबा बेग है। वह पूर्व में एक मॉडल थीं और उनकी परवरिश सऊदी अरब में हुई है। उनकी शादी 4 फरवरी, 2016 को सबा बेग से हुई थी। सबा ने इरफ़ान के साथ शादी के बाद अपना मॉडलिंग करियर छोड़ दिया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी इरफ़ान के साथ मुलाक़ात 2014 में हुई थी। इसके बाद दोनों में नजदीकियाँ बढ़ना चालू हो गईं। 2016 में दोनों ने विवाह कर लिया। जब सबा की शादी इरफ़ान से हुई थी तब वह आत्र 21 साल की थीं। उनकी और इरफ़ान की उम्र में 10 वर्ष का अंतर है। उन दोनों के दिसम्बर 2016 में एक बेटा इमरान खान भी हुआ था।

इरफ़ान पठान अब तक अपनी पत्नी की फोटो नहीं डालते थे जिनमें उनका चेहरा दिखता हो। इससे पहली डाली गई फोटो में उनकी पत्नी का चेहरा बुर्का या फिर हाथों से ढका हुआ होता था। मुस्लिम कट्टरपंथियों के अनुसार, इस्लाम में महिलाओं को सार्वजनिक स्थान पर चेहरा ढकने की हिदायत दी गई है। इससे पहले मोहम्मद शामी की बेटी के सरस्वती पूजा करने और अभिनेत्री सारा अली खान के मंदिर जाने को लेकर भी इस्लामी कट्टरपंथी बवाल मचाते आए हैं।

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