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ED की कस्टडी से विधानसभा आए हेमंत सोरेन, झारखंड में चंपई सरकार ने हासिल किया विश्वास मत: पक्ष में पड़े 47 वोट

झारखंड के मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव रखा है, इस पर बहस हुई। झारखंड विधानसभा में चंपई सोरेन की सरकार फ्लोर टेस्ट जीतने में कामयाब हो गई है। चंपई सरकार के समर्थन में 47 वोट मिले हैं, जबकि विपक्ष को कुल 29 वोट मिले हैं। चंपई सोरेन ने विपक्ष पर सरकार को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

इस दौरान उन्होंने कहा, “हेमंत सोरेन हैं तो हिम्मत है। हेमंत सोरेन ने राज्य का कुशल नेतृत्व किया।” बता दें कि चंपई सोरेन की सरकार ने आसानी से बहुमत हासिल कर लिया है। उसके पक्ष में 47 विधायक हैं। वहीं, विपक्ष में 29 वोट मिले हैं। बहुमत साबित करने के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए।

विधानसभा में मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि कोरोना के समय हेमंत सोरेन जैसे मुख्यमंत्री के रहते किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। लुंगी चप्पल पहनकर बाहर कमाने जाने वाले लोगों को उस समय झारखंड से बाहर से वापस लाया गया। लोगों को हवाई जहाज से भी वापस लाया गया। चंपई सोरेन ने कहा, “हमने यह देखा है कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बड़ा काम किया गया।”

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, “झारखंड में मूलनिवासियों को कुछ नहीं मिला। इसका फायदा मुंबई और गुजरात के लोगों को मिला। खनन हमारी जमीनों पर हुआ। मूलनिवासी को सिर्फ विस्थापन मिला। यहाँ के लोगों का सामाजिक-आर्थिक शोषण होता रहा। मैं आँसू नहीं बहाऊँगा। मैं आँसू वक्त के लिए रखूँगा, क्योंकि आपके लिए दलित आदिवासियों के आँसू का कोई मोल नहीं है।”

इस दौरान हेमंत सोरेन ने कहा, “जनजातीय-दलितों और गरीबों के आँसुओं का कोई मोल नहीं है। मैं वक्त आने पर उनके एक-एक सवालों का जवाब एक-एक षड्यंत्र का जवाब वक्त आने पर बड़े मन को तरीके से दिया जाएगा।” हेमंत सोरेन ने कहा, “साबित करें कि वो जमीन मेरे नाम पर है। अगर मुझ पर घोटाले साबित हुए तो राजनीति छोड़ दूँगा।”

बता दें कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 31 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद चंपई सोरेन को गठबंधन के विधायक दल का नेता चुना गया। चंपई सोरेन ने शुक्रवार (02 फरवरी 2024) को राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 10 दिनों का समय मिला था। इस बीच सत्ताधारी दल के अधिकाँश विधायक हैदराबाद चले गए थे।

‘चक्रवर्ती सम्राट हैं PM नरेंद्र मोदी, उनमें एक राजर्षि के सारे गुण’: संत सम्मेलन में बोले जितेंद्रानंद – वो पिछले 1000 वर्षों में एकमात्र हिन्दू शासक

दण्डी स्वामी जितेंद्रानंद महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘चक्रवर्ती सम्राट’ बताया है। गुजरात के अहमदाबाद में रविवार (4 फरवरी, 2024) को संतों का एक सम्मेलन आयोजित हुआ था, जिसमें जितेंद्रानंद भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले 1000 वर्षों में नरेंद्र मोदी एकमात्र हिन्दू शासक हैं। जितेंद्रानंद ‘अखिल भारतीय संत समिति’ के जनरल सेक्रेटरी भी हैं। उन्होंने कहा कि वो नरेंद्र मोदी और अमित शाह से प्रेम करते हैं, भारतीय जनता पार्टी से नहीं।

इस दौरान जितेंद्रानंद भाजपा पर निशाना साधने से भी पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा कि भाजपा में कई ऐसे नेता हैं जो नास्तिक हैं, उनका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि संत समाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गर्व करता है, वो एक चक्रवर्ती सम्राट हैं जिनमें राजर्षि होने से सारे गुण हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी लगातार भाजपा पर जाँच एजेंसियों के दुरूपयोग का आरोप लगा रही है। इस पर संत ने कहा कि ‘राम जन्मभूमि न्यास’ के खिलाफ आयकर विभाग (IT) की 22 नोटिस और छापेमारी हुई थी।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद चंपत राय ने न तो कभी बदले की भावना वाला आरोप लगाया और न ही इस पर हंगामा मचाया, कॉन्ग्रेस पार्टी अभी जो कर रही है उसके एकदम विपरीत। जितेंद्रानंद ने कहा कि जाँच एजेंसियों ने जो भी दस्तावेज माँगे चंपत राय ने सब कुछ दिया, क्योंकि कुछ गलत हुआ ही नहीं था। उन्होंने अयोध्या, काशी और मथुरा को मुक्त कराने की शपथ भी दोहराई। बता दें कि ज्ञानवापी में सोमनाथ व्यास के तहखाने में कोर्ट के आदेश के बाद फिर से पूजा शुरू हो गई है।

जितेंद्रानंद ने बताया कि सोमनाथ गुजराती संत थे। वहीं उत्तराखंड के जोशीमठ स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के खिलाफ बयान पर जितेंद्रानंद महाराज ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी का एजेंडा चलाने वालों को इस कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य इस कार्यक्रम में अपने सिंहासन के साथ स्थान चाहते थे, जबकि संत समिति की सोच है कि श्रीराम के दरबार में सभी बराबर हैं।

SDM का अपहरण कर भट्ठे में झोंकने की कोशिश, दंगों के दौरान हिंदुओं पर अत्याचार: कारसेवकों का कातिल था मुन्नन खाँ, जिसे TheWire ने बताया मसीहा

अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को भगवान राम का विग्रह उनके भव्य मंदिर में विराजमान हो चुका है। दुनिया भर के हिन्दू इस मौके पर उन तमाम रामभक्तों को याद कर रहे हैं, जिनके द्वारा 500 साल तक किए गए संघर्ष के चलते यह दिन आया है। इस मौके पर मुगलों से लेकर मुलायम सिंह यादव तक के काल तक को याद किया गया, जिनमें रामभक्तों पर नरसंहार सहित घनघोर अत्याचार हुए।

इन अत्याचारों की चर्चा में तत्कालीन सांसद एवं बाहुबली मुन्नन खाँ का नाम सबसे ज्यादा लिया जा रहा है। साल 2009 में मर चुके पूर्व सांसद मुन्नन खाँ पर पुलिस की वर्दी पहनकर अपने गुर्गों सहित सन 1990 में कारसेवकों के कत्लेआम का आरोप है। ऑपइंडिया ने गोंडा जाकर मुन्नन खाँ के आपराधिक कारनामों की जानकारी चश्मदीदों से ली।

रामजन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष का मंदिर भी कब्जाना चाहता था मुन्नन खाँ

22 सितंबर 2022 को ऑपइंडिया ने नेपाल सीमा की ग्राउंड कवरेज के दौरान एक खबर प्रकाशित की थी। इस खबर का शीर्षक ‘रामजन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष का मंदिर लैंड जिहाद का शिकार: बॉर्डर UP-नेपाल का… लेकिन जमीन कब्जा के लिए फिलिस्तीनी मॉडल’ था। तब ऑपइंडिया ने बताया था कि बलरामपुर वीर विनय चौराहे पर मौजूद हनुमान गढ़ी मंदिर श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महंत नृत्यगोपाल दास का है।

इस मंदिर के बड़े हिस्से पर कुछ मुस्लिमों ने कब्ज़ा कर रखा है, जिसको वर्तमान महंत महेंद्र दास अथक कोशिश करके थोड़ा-थोड़ा करके वर्षों से छुड़वा रहे हैं। बलरामपुर जिले के सरकारी वकील पवन शुक्ला ने ऑपइंडिया को बताया कि मंदिर पर किए गए अवैध कब्ज़े का सूत्रधार भी मुन्नन खाँ ही था। उसी के आदमियों ने मंदिर से सटाकर 3 दशक पहले अवैध तौर पर अजमेरी होटल खोला था।

तब मंदिर प्रशासन की आपत्ति के बावजूद अजमेरी होटल में मांस-मछली बेचा जाता था। धीरे-धीरे मुन्नन खाँ ने तत्कालीन सपा सरकार में राजनैतिक संरक्षण के जरिए मंदिर की काफी जमीन कब्जा ली। आज भी मंदिर प्रबंधन मुन्नन खाँ के समय में कब्जाई गई जमीनों को पूरी तरह से मुक्त नहीं करवा पाया है। इसके अलावा, बलरामपुर और गोंडा में कई अन्य लोगों की जमीनें हड़पने का आरोप मुन्नन खाँ पर है।

SDM का अपहरण कर के झोंकना चाहता था भट्ठे में

ऑपइंडिया से बात करते हुए सन 1990 में गोली लगने के बावजूद जीवित बच गए कारसेवक महंत रामस्वरूप दास ने मुन्नन खाँ को लेकर कई खुलासे किए। महंत रामस्वरूप दास ने बताया कि सन 1990 के आसपास मुन्नन खाँ बलरामपुर में एक SDM का अपहरण भी कर चुका था। यह अपहरण तब हुआ था, जब वो बलरामपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ रहा था।

अपराध की दुनिया से नजदीकी संबंध रखने वाला मुन्नन खाँ का मूल काम ईंट भट्ठे चलवाना था। उसके गुर्गे जब SDM का अपहरण करके लाए तो उन्हें भट्ठे में झोंकने की कोशिश की थी। हालाँकि, समय पर प्रशासन सक्रिय हो गया और SDM की जान बच पाई थी। महंत का यह भी दावा है कि मुन्नन खाँ की मुलायम सिंह यादव से करीबी के चलते कोई कार्रवाई नहीं हो पाई थी।

दंगों में रोक दी थी हिन्दुओं की रसद

सन 1985 के आसपास मुन्नन खाँ गोंडा के कटरा विधानसभा से विधायक था। गोंडा के विहिप नेता राकेश वर्मा ने ऑपइंडिया को बताया कि तब सन 1988 के आसपास गोंडा के करनैलगंज में हिन्दुओं की शोभायात्रा के दौरान कट्टरपंथी मुस्लिमों ने दंगे शुरू कर दिए थे। तब माँ दुर्गा की प्रतिमाओं पर पत्थरबाजी हुई थी, जिसमें मुन्नन खाँ की भी संलिप्तता बताई जा रही है।

इन दंगों में पुलिस ने हिन्दुओं का ही दमन किया था। तब लम्बे समय तक कर्फ्यू लगा रहा था और करनैलगंज के हिन्दुओं को सब्ज़ी सहित खाने के अन्य सामानों के लाले पड़ गए थे। ऐसे में करनैलगंज के आसपास के कस्बों में रहने वाले हिन्दुओं ने दंगा प्रभावित क्षेत्रों में खाने-पीने का सामान पहुँचाने का प्रयास किया था। राकेश का आरोप है कि मुन्नन खाँ ने प्रशासन पर दबाव डालकर खाने के सामान को रास्ते में ही रुकवा दिया था।

उस दौरान सारी राहत सामग्री तालाबों में फेंकवा दी गई थी। आरोप तो यह भी है कि मुन्नन खाँ ने इन दंगों में हिन्दुओं पर अपने गुर्गों से हमला करवाया था। बकौल राकेश वर्मा, कर्फ्यू के बावजूद मुस्लिमों की दुकानें खुली रहती थीं। वो आराम से सारी रात बाजारों में घूमते रहते थे। राकेश ने इस सभी एकतरफा प्रशासनिक पक्षपात के लिए तत्कालीन सरकार की तुष्टिकरण की नीति को जिम्मेदार बताया।

भाईचारे का रूप दिखाकर पीठ में घोंपा छुरा

गुड्डू नाम से पहचाने जाने वाले विश्व हिंदू परिषद के नेता राकेश वर्मा ने हमें आगे बताया कि मुन्नन खाँ मूल रूप से ईंट भट्ठों का कारोबार करता था। वो पहली बार साल 1985 में गोंडा के कटरा विधानसभा से जनता दल के टिकट पर विधायक बना था। कटरा हिन्दू बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र है। हिन्दुओं के आगे मुन्नन खाँ भाईचारे का मसीहा बनकर आया था।

मुन्नन खाँ ने हिंदुओं से तमाम टूटे-फूटे मंदिरों के जीर्णोद्धार का वादा किया था। चुनाव से पहले बाकायदा मंदिरों के आगे अपने भट्ठे से मँगवाकर ईंटें गिरवाई थीं। जब मुन्नन खाँ चुनाव जीत गया तब उसने अपना व्यवहार एकदम से बदल लिया और खुलेआम हिन्दू विरोधी हरकतें करने लगा। यहाँ तक कि उसने मंदिरों के आगे से वो सभी ईंटें वापस उठवा ली थीं, जो उसने चुनाव से पहले गिरवाई थीं।

खुद को कहलवाता था शेर-ए-मुन्नन

राकेश वर्मा ने बताया कि साल 1989 में गोंडा की खोरहसा पुलिस चौकी पर एक मुस्लिम व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलवाया गया था। घर लौटने के बाद उस व्यक्ति की किन्हीं कारणों से मौत हो गई थी। तब मुन्नन खाँ मृत मुस्लिम का शव लेकर बलरामपुर चला गया था। वहाँ उसने मृतक की लाश दिखाकर माहौल को साम्प्रदायिक बनाया और एकतरफा मुस्लिमों का वोट हासिल किया था।

विहिप नेता राकेश वर्मा ने हमें आगे बताया कि आखिरकार मुन्नन खाँ की उन चुनावों में जीत हुई। तब मुन्नन खाँ निर्दलीय सांसद चुना गया था। राकेश वर्मा ने बताया कि उन्हें अच्छे से याद है कि विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) की सरकार में मुन्नन खाँ अपनी गाडी पर लालबत्ती लगाकर चलता था। उसके साथ काफिले में चल रहे अन्य वाहन हूटर बजाया करते थे।

राकेश वर्मा का यह भी दावा है कि वीपी सिंह सरकार में मुन्नन खाँ को लोक शिकायत कमेटी का सदस्य बनाया था। मुन्नन खाँ का तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से सीधा संबंध था। इसी के डर से जिले का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी मुन्नन के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था।

जंगली जानवर से कहीं अधिक था खतरनाक

राकेश वर्मा सन 1990 के दशक को याद करते हैं। तब मुन्नन खाँ के काफिले में सैकड़ों लोग हुआ करते थे, जो सड़कों पर जुलूस निकाला करते थे। इन जुलूस में ‘शेर ए मुन्नन जिंदाबाद’ के नारे लगा करते थे। मुन्नन के जुलूस को रोकने की हिम्मत कोई नहीं करता था। राकेश वर्मा मुन्नन खाँ को गोंडा का अतीक अहमद मानते हैं। बकौल राकेश, आज भी मुन्नन खाँ के फैन मौजूद हैं। इसी वजह से लोग उसके खिलाफ बोलने से डरते हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर पद पर तैनात और गोंडा जिले के मूल निवासी एक व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर मुन्नन खाँ के कई गुनाह गिनवाए। उन्होंने बताया, “अपने जमाने में मुन्नन खाँ किसी जंगली जानवर से अधिक खतरनाक था।” बलरामपुर जिले के सरकारी वकील पवन शुक्ला के मुताबिक, मुन्नन खाँ की ही सरपरस्ती में रिज़वान जहीर जैसे वर्तमान अपराधी पले-बढ़े थे।

बुढ़ापे में हुआ पागल या पालगपन का नाटक ?

ऑपइंडिया ने गोंडा जिले के स्थानीय निवासियों से मुन्नन खाँ के बारे में और अधिक जानकारी जुटाई। लोगों का कहना है कि जीवन के अंतिम समय में मुन्नन खाँ पागल हो गया था और सकड़ों पर आवारा घूमा करता था। कुछ लोग इसे उसके घोर आपराधिक जीवन के बाद मिला ईश्वरीय दंड बताते हैं। वहीं कुछ अन्य लोगों ने बताया कि मुन्नन खाँ अंतिम सांस तक एक शातिर अपराधी की तरह सोचता था।

पागलपन वाली हरकत भी गोंडा के तमाम लोग मुन्नन पर दर्ज तमाम मुकदमों से बचने का हथकंडा मानते हैं। मुन्नन के डर से आज भी कैमरे पर बोलने से डरते कई लोगों ने बताया कि मुन्नन खाँ जानता था कि उसे कई मुकदमों में कड़ी सजा और यहाँ तक कि फाँसी या उम्रकैद भी मिल सकती है। इसलिए उसने जीवन के अंतिम समय में पागल बनकर कानून को गुमराह करने की साजिश रची।

शूद्रों और महिलाओं को पुजारियों ने नहीं लेने दिया वेद का ज्ञान… छठी की बुक में NCERT का दावा निराधार, गलती मान किताब से हटाया

भारतीय छात्रों के लिए टेक्स्ट किताब बनाने वाले राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने क्लास छठी में ब्राह्मणों/पुजारियों के लिए पढ़ाए जा रहे भ्रामक दावों को अपनी किताबों से हटा दिया है।

एक साल पहले इस मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट विवेक पांडे ने आरटीआई फाइल की थी। उन्होंने लिखित में प्रमाण माँगे थे कि हिंदू पंडितों ने महिला और शूद्रों के साथ भेदभाव किया, इसका सबूत दिया जाए।

NCERT ने इस आरटीआई के जवाब में कहा था कि उनके पास इस दावे के कोई सबूत नहीं हैं कि ब्राह्मणों/पुजारियों ने महिलाओं और शूद्रों को वेद नहीं पढ़े दिया। इसके बाद उन्होंने ये भी सुनिश्चित किया कि वो अपनी किताबों से इस भ्रामक दावे को हटा लेंगे।

अब 2023-24 के संस्करण से ये दावा हटाया जा चुका है। ऑपइंडिया इस बात की पुष्टि करता है।

बता दें कि यह विवादित दावा छठी क्लास की इतिहास की किताब के पाँचवे चैप्टर- ‘राज्य, राजा और प्राचीन गणतंत्र’ (पृष्ठ नंबर-44-45) पर दिखाई देता था। इसमें कहा गया था कि पुजारियों ने वर्णव्यवस्था बनाई और कहा कि ये जन्म से तय होता है।

NCERT किताब में ये भी कहा गया कि महिलाओं को शूद्रों के समूह में रख उन्हें वेद पढ़ने से रोका गया। इतना ही नहीं था ये भी लिखा गया कि पुजारियों ने कुछ लोगों को अछूत घोषित कर दिया था।

पहले की किताब में मौजूद टेक्स्ट

हमारे पास ऐसी कई पुस्तकें हैं जिनकी रचना उत्तर भारत में, विशेषकर गंगा और यमुना द्वारा प्रवाहित क्षेत्रों में की गई थी। इन पुस्तकों को अक्सर उत्तर वैदिक कहा जाता है, क्योंकि इनकी रचना ऋग्वेद के बाद हुई थी जिसके बारे में आपने अध्याय 4 में पढ़ा था। इनमें सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद के साथ-साथ अन्य पुस्तकें भी शामिल हैं। इनकी रचना पुजारियों द्वारा की गई थी, और बताया गया था कि अनुष्ठान कैसे किए जाने चाहिए। उनमें समाज के बारे में नियम भी शामिल थे।

पुजारियों ने लोगों को चार समूहों में विभाजित किया, जिन्हें वर्ण कहा जाता था, उनके अनुसार, प्रत्येक वर्ण के कार्य अलग-अलग थे। प्रथम वर्ण ब्राह्मण का था। ब्राह्मणों से अपेक्षा की जाती थी कि वे वेदों का अध्ययन करें (और पढ़ाएँ), यज्ञ करें और उपहार प्राप्त करें। दूसरे स्थान पर शासक थे, जिन्हें क्षत्रिय भी कहा जाता था। उनसे लड़ाई लड़ने और लोगों की रक्षा करने की अपेक्षा की गई थी।

तीसरे थे वैश या वैश्य। उनसे अपेक्षा की गई थी कि वे किसान, चरवाहे और व्यापारी होंगे, क्षत्रिय और वैश्य दोनों ही बलिदान दे सकते थे। अंतिम शूद्र थे, जिन्हें अन्य तीन समूहों की सेवा करनी पड़ती थी और वे कोई अनुष्ठान नहीं कर सकते थे। अक्सर, महिलाओं को भी शूद्रों के साथ समूहीकृत किया जाता था। महिलाओं और शूद्रों दोनों को वेदों का अध्ययन करने की अनुमति नहीं थी, पुजारियों ने यह भी कहा कि ये समूह जन्म के आधार पर तय किए गए थे।

आरटीआई के बाद अब ये टेक्सट किताबों में से हटा दिया गया है। अब किताब में लिखा गया, “चार सामाजिक श्रेणियाँ थीं, अर्थात् ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। ब्राह्मणों से अपेक्षा की गई कि वे वेद पढ़ें और पढ़ाएँ, यज्ञ करें और दक्षिणा पाएँ। क्षत्रियों से अपेक्षा की जाती थी कि वे युद्ध लड़ें और लोगों की रक्षा करें। वैश्यों से अपेक्षा की जाती थी कि वे किसान, चरवाहे और व्यापारी होंगे। शूद्रों से अन्य तीन समूहों की सेवा करने की अपेक्षा की गई थी।

NCERT ने भ्रामक दावा हटाया

मालूम हो कि NCERT की किताब में किए गए दावों का कोई आधार नहीं था। विवेक पांडे की आरटीआई के जवाब में लिखा गया था, “चूँकि पांडुलिपि का मूल मसौदा विस्तृत संदर्भ प्रदान नहीं करता है, इसलिए दावों के मूल स्रोत को साझा करना मुश्किल होगा।”

इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि अगले सत्र से किताब से भ्रामक दावा हटा लिया जाएगा।

’12th Fail’ के निर्देशक की बीवी को कंगना रनौत ने बताया ‘गैंगबाज’, कहा – जिस पति के पैसे से बिजनेस करती हैं अनुपमा चोपड़ा, उसी से जलती हैं

अभिनेत्री कंगना रनौत ने फिल्म समीक्षक अनुपमा चोपड़ा पर निशाना साधा है। अनुपमा चोपड़ा, फिल्म निर्माता एवं निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा की पत्नी हैं। विधु विनोद चोपड़ा द्वारा निर्देशित फिल्म ’12th Fail’ ने हाल ही में खूब सुर्खियाँ बटोरी। वास्तविक घटनाओं पर आधारित कम बजट में बनी फिल्म ने 52 करोड़ रुपए का नेट कारोबार किया। अब विधु विनोद चोपड़ा ने बताया है कि उनकी पत्नी अनुपमा को भरोसा नहीं था कि ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा करेगी।

अब ये फिल्म IMDb पर सबसे अधिक रेटिंग वाली भारतीय फिल्म बन गई है। अनुपमा चोपड़ा ने अपनी पति को सलाह दी थी कि वो ’12th Fail’ को OTT पर रिलीज करें, थिएटर में रिलीज करने का रिस्क न लें। ये खुलासा खुद विधु विनोद चोपड़ा ने किया है। ‘खामोश’ (1985), ‘परिंदा’ (1989), ‘1942: अ लव स्टोरी’ (1994) और ‘मिशन कश्मीर’ (2000) जैसी फ़िल्में बना चुके विधु विनोद चोपड़ा के सफल फिल्म निर्माता भी हैं।

उन्होंने राजकुमार हिरानी द्वारा निर्देशित फ़िल्में ‘मुन्नाभाई MBBS’ (2003), ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ (2006), ‘3 इडियट्स’ (2009), ‘पीके’ (2014) और ‘संजू’ (2018) का निर्माण किया। विधु विनोद चोपड़ा के ताज़ा बयान पर अभिनेत्री कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अनुपमा चोपड़ा फिल्म पत्रकार के नाम पर कलंक हैं, वो न सिर्फ द्वेषी हैं बल्कि अपने से कम उम्र की युवा एवं प्रतिभावान महिलाओं से जलती भी हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि वो अपने पति से भी जलन रखती हैं।

उन्होंने कहा कि अनुपमा चोपड़ा अपने पति से ईर्ष्या करती हैं, जिनके पैसे से उन्होंने वेबसाइट से लेकर अन्य छोटे-बड़े व्यवसाय स्थापित किए। उन्होंने अनुपमा चोपड़ा पर फ़िल्मी पार्टियों में अपनी ‘बॉलीवुड वाइफ कार्ड’ का दिखावा करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुपमा चोपड़ा ने वास्तविक प्रतिभाओं और अच्छी फिल्मों के खिलाफ गिरोह बना रखा है। कंगना रनौत की इस टिप्पणी को साहसी बता कर लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं।

विधु विनोद चोपड़ा ने बताया था, “मेरी पत्नी अनुपमा ने मुझसे ’12th Fail’ के बारे में कहा था – इसे कोई थिएटर में देखने नहीं जाएगा विनोद। तेरी और विक्रांत की फिल्म! अनुपमा ने मुझसे कहा कि मुझे अब चीजें नहीं पता, मैं फिल्मों से अब उतना अधिक संपर्क में नहीं हूँ। ऊपर से ट्रेड एजेंसियों ने फिल्म के 30 लाख रुपए के लाइफटाइम कलेक्शन की भविष्यवाणी की थी। इन चीजों ने मुझे डरा दिया था।” फिल्म की सक्सेस पार्टी में बोलते हुए इसके बाद अनुपमा ने स्वीकारा कि उन्होंने ऐसा कहा था, साथ ही कहा कि वो गलत थीं और विधु विनोद चोपड़ा सही थे।

देश के बीमारू राज्यों में है केरल: सुप्रीम कोर्ट को केंद्र ने बताया, कहा- विकास कार्यों के लिए नहीं रोजमर्रा के खर्चों के लिए राज्य को चाहिए उधारी

आर्थिक आधार पर देश के सबसे खस्ताहाल राज्यों में केरल शामिल है। खराब आर्थिक प्रबंधन के कारण उसकी हालत बेहद पतली है। विकास कार्यों की जगह वह रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए उधारी चाहता है। केंद्र सरकार ने यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है। अपने उधार लेने की सीमा को लेकर केरल की वामपंथी सरकार ने केंद्र के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर रखी है।

केंद्र सरकार ने देश के सबसे बड़े कोर्ट को बताया है कि उसने केरल को वित्त आयोग द्वारा सुझाई गई धनराशि से अधिक फंड दिया है। केंद्र सरकार ने यह भी बताया है कि राज्य को दी गई आर्थिक मदद बिना किसी बकाए के दी गई है। केंद्र ने कहा है कि केरल के खर्चे बीते कुछ वर्षों में बेतहाशा बढ़े हैं। केंद्र सरकार द्वारा कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, केरल का अपनी राजस्व प्राप्तियों में से खर्चा 2018-19 के दौरान 78% था जो कि 2021-22 में बढ़ कर 82.4% हो गया। यह देश के अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि केरल का राजकोषीय घाटा भी बीते समय में तेजी से बढ़ा है। उसकी कमाई का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में ही जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, केरल अपनी कमाई का लगभग 20% ब्याज चुकाने में दे रहा है। केंद्र सरकार ने कहा है कि केरल कर्ज लेकर अपने रोज के खर्चे चला रहा है। यहाँ तक कि तनख्वाह और पेंशन देने के लिए भी कर्ज का सहारा लिया जा रहा है।

केरल की वामपंथी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के खिलाफ एक याचिका दायर की हुई है। इसमें केरल ने कहा है कि केंद्र सरकार ने उसकी उधार लेने की सीमा घटा दी है, जिससे उसे आर्थिक प्रबन्धन में समस्याएँ झेलनी पड़ रही हैं। वहीं केंद्र सरकार ने कहा है कि ऐसे ही चलता रहा तो केरल जल्द ही कर्ज के जाल में फँस जाएगा।

गौरतलब है कि केरल वर्तमान में गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है। वामपंथी और कॉन्ग्रेस सरकारों ने राज्य का आर्थिक प्रबन्धन गड़बड़ किया है जिसके कारण राज्य को लगातार उधार के भरोसे रहना पड़ रहा है। राज्य के बजट से भी यही संकेत मिल रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, केरल पर उसकी जीडीपी का लगभग 40% कर्ज है। वित्त प्रबन्धन के लिए बनाए गए नियमों के अनुसार, किसी राज्य पर उसकी अर्थव्यवस्था का 20%-25% से अधिक कर्ज नहीं होना चाहिए।

अयोध्या मुक्त हुआ, अब मथुरा-काशी के मंदिर प्रेम से मिल जाएँ… अन्य मस्जिदों पर हिंदू छोड़ देंगे दावाः राम मंदिर के कोषाध्यक्ष का मुस्लिमों को ‘ऑफर’

काशी और मथुरा की मुक्ति पर स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने बड़ा प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा है कि अयोध्या की मुक्ति के बाद अब यदि हिंदुओं को ये दो मंदिर प्रेम से मिल जाएँ तो वे उन सैकड़ों मस्जिदों पर दावा छोड़ देंगे जो मंदिरों को ध्वस्त कर खड़ी की गईं हैं। स्वामी देव गिरी श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं।

22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा बाद आयोजित समारोह के दौरान उनका दिया संबोधन काफी वायरल हुआ था। अब मथुरा और काशी के मंदिरों की मुक्ति को लेकर उन्होंने यह प्रस्ताव पुणे में दिया है। यहाँ उनके जन्मदिन पर 4 से 11 फरवरी के बीच कई कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है।

स्वामी गोविंद देव गिरी ने पुणे में कहा, “तीन मंदिर (अयोध्या, मथुरा, काशी) मुक्त होने पर हम अन्य मंदिरों पर ध्यान देने की इच्छा भी नहीं करते हैं। हम लोगों को भविष्य काल में जीना है ना कि भूत काल में। देश का विकास होना चाहिए। यदि यह तीन मंदिर हमें शांति से मिल जाते हैं तो हम प्रेमपूर्वक सारी बातें भूल जाएँगे।”

इन तीन मंदिरों के अलावा अन्य धार्मिक स्थलों के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “उन लोगों को हम समझाएँगे, सारे स्थानों के लिए एक जैसी बात नहीं की जा सकती। कहीं-कहीं समझदार लोग होते हैं, कहीं नहीं होते। जहाँ जैसे व्यक्ति हैं, उस प्रकार से समझाने का प्रयास करेंगे, हम अशांति नहीं फैलने देंगे।”

उन्होंने मीडिया से ज्ञानवापी के मुद्दे पर बात करते हुए कहा, “हमारी हाथ जोड़ कर प्रार्थना है कि इन तीन मंदिरों को सौंप दिया जाना चाहिए, क्योंकि आक्रान्ताओं के हमारे पर किए गए आक्रमण के घाव हैं। इसके कारण लोगों के अन्तः करण में वेदना है। राष्ट्रीय समाज में एक वेदना है। अगर इसको यह लोग (मुस्लिम) दूर कर देते हैं, तो भाईचारा बढ़ने में सहयोग मिलेगा।”

स्वामी गोविन्द देव गिरी ने यह बयान अपने जन्मदिन पर पुणे में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया। इस दौरान काफी बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर संघचालक मोहन भागवत और आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर जैसी कई बड़ी हस्तियाँ भी मौजूद थीं।

गौरतलब है कि हाल ही में रामजन्मभूमि पर चली लम्बी लड़ाई के बाद अयोध्या के राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा हुई है। अब वाराणसी में ज्ञानवापी ढाँचे के नीचे हिंदू मंदिर होने की बात ASI के सर्वे से सामने आई है। मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को लेकर भी मामला कोर्ट में है।

स्वामी गोविंद देव गिरी का बयान इसी सम्बन्ध में आया है। स्वामी देव गिरी एक मराठी परिवार से आते हैं। संन्यास से पहले उनका नाम आचार्य किशोरजी मदनगोपाल व्यास था। उनका जन्म 1949 में महाराष्ट्र के बेलापुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह वेद, उपनिषद का ज्ञाता हैं और उन्हें दर्शनाचार्य की उपाधि मिली है। वे रामायण, महाभारत और शिव पुराण जैसे ग्रंथों के भी ज्ञाता हैं।

उन्होंने साल 2006 में कांची कामकोटि पीठ के स्वामी जयेंद्र सरस्वती से दीक्षा लेकर संन्यास लिया था। वर्तमान में वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के कोषाध्यक्ष हैं। राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के बाद उन्होंने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्रत खुलवाया था।

हिंदुओं को ‘कुत्ता और काफिर’ कहने वाला मौलाना सलमान अजहरी गिरफ्तार, बचाव में मुस्लिम भीड़ ने थाने के बाहर काटा बवाल

गुजरात के जूनागढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान भड़काऊ भाषण देने वाले मौलाना सलमान अजहरी को गुजरात ATS ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उसे पहले मुंबई के घाटकोपर थाने में रखा गया था, जहाँ उसके समर्थकों ने भीड़ लगा कर बवाल काटा।

जानकारी के मुताबिक, जूनागढ़ में विवादित बयान देने वाले मौलाना के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद गुजरात ATS की एक टीम रविवार (4 फरवरी, 2024) की सुबह ही मुंबई पहुँच गई थी। इसके बाद में मौलाना अजहरी को गिरफ्तार किया गया और ट्रांजिट रिमांड मिलते ही उसे पुलिस जूनागढ़ ले कर चली गई।

रिमांड मिलने से पहले गुजरात पुलिस मौलाना अजहरी को मुंबई के घाटकोपर थाने लेकर गई थी, जहाँ उसके समर्थक बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए थे। सामने आई वीडियो में देख सकते हैं कि मौलाना के समर्थक वहाँ काफी देर बवाल मचाए, उसके बाद पुलिस ने मौलाना से बयान दिलवाकर भीड़ को शांत रहने की अपील की। लेकिन, भीड़ को थाने के बाहर लब्बैक-लब्बैक के नारे लगाते सुना जा सकता है।।

बता दें कि सलमान अजहरी की गिरफ्तारी के बाद मुस्लिम भीड़ उसे पुलिस कार्रवाई से बचाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। इसी क्रम में सोशल मीडिया में अभियान चला कर ज्यादा से ज्यादा लोगों को घाटकोपर थाने के बाहर इकट्ठा होने को कहा गया था और अपील की गई थी कि मौलाना को गुजरात नहीं जाने देना है।

मुंबई में भी मामला दर्ज

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मौलाना के खिलाफ मुंबई में भी मामला दर्ज कर लिया गया है। मुंबई में उसके साथ ही दो और लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। मुंबई में मौलाना के खिलाफ धारा 153(C), 505(2), 188 और 114 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।

इससे पहले उसके खिलाफ जूनागढ़ में पहले ही मामला दर्ज हुआ था और साथ ही जिस कार्यक्रम में उसने यह भड़काऊ भाषण दिया था उसके आयोजकों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। अब उसे भी पुलिस गुजरात लेकर पहुँच रही है।

यह पूरा मामला 31 जनवरी, 2024 को जूनागढ़ में एक इस्लामिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए भड़काऊ भाषण से जुड़ा है। इस भाषण का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद मौलाना अजहरी की गिरफ्तारी की माँग हुई थी।

मुफ्ती सलमान अज़हरी के वीडियो में क्या-क्या

ऑपइंडिया ने सबसे पहले इस मामले की रिपोर्ट की थी। 20-22 सेकंड के वायरल वीडियो को सर्च करने पर हमें मुफ्ती सलमान अज़हरी का वो भाषण मिला था, जो 53 मिनट का था। वायरल वीडियो इसी भाषण का एक छोटा सा हिस्सा थी। इस भाषण में मुफ्ती ने कई जगह भड़काऊ बातें कही थीं।

वीडियो को इस्लामिक चैनल ने पोस्ट किया था। इसमें वक्ता के तौर पर मुफ्ती सलमान अजहरी मंच पर दिख रहा था। यह कार्यक्रम गुजरात के जूनागढ़ में 31 जनवरी को हुआ था जबकि वीडियो 1 फरवरी 2024 को अपलोड किया गया था।

मुफ्ती सलमान अज़हरी ने अपने भाषण में कहा था – “मस्जिद में बुत रखने से मस्जिद बुतखाना नहीं बन जाती। तुमने एक रखा है, काबा में 360 रखे थे, फिर भी काबा तो काबा ही रहा, न तवाफ रुका, न हज रुका।”

अपने भाषण में मुफ्ती ने कहा, “इंकलाब आपके घर से होगा। उनमें मस्जिदों को बुतखाना बनाने की हिम्मत नहीं है। आपने मस्जिदों को वीरान छोड़ दिया है और हमारे यहाँ मुहावरा है कि जब मैदान खुला होता है तो कुत्तों का राज होता है। यदि तुम मैदान में घूमते रहोगे तो कोई कुत्ते नहीं होंगे।”

भाषण के अंत में उसने कहा था, ”मुसलमानों घबराओ मत, अभी खुदा की शान बाकी है। अभी इस्लाम जिंदा है, अभी कुरान बाकी है, ऐ जालिम काफिर क्या समझता है जो रोज हमसे उलझता है, अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है। कुछ देर की खामोशी है, किनारा आएगा… आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

बोर्ड पर लिखा था ज्ञानवापी ‘मस्जिद’, रोशन पाण्डेय ने चिपका दिया ‘मंदिर’ का स्टीकर: FIR के बाद बोले कोर्ट के आदेश के बाद यह मंदिर

वाराणसी कोर्ट के आदेश के बाद ज्ञानवापी के व्यास जी तहखाने में पूजा प्रारंभ होने के दौरान एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें एक व्यक्ति को उस बोर्ड पर ‘मंदिर’ का स्टीकर चिपकाते देखा गया था, जिस पर ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ लिखा हुआ था। स्टीकर चिपकाने वाले व्यक्ति राष्ट्रीय हिन्दू दल के अध्यक्ष रोशन पाण्डेय थे। अब उन पर पुलिस ने धार्मिक भावनाएँ भड़काने के मामले में FIR दर्ज की है।

पाण्डेय वाराणसी के सामने घाट इलाके के गंगोत्री विहार में रहते हैं। उन्होंने साइनबोर्ड पर ज्ञानवापी के आगे लिखे ‘मस्जिद’ शब्द के ऊपर मंदिर के स्टीकर अंग्रेजी और हिंदी दोनों में चिपकाए थे। उन्होंने यह काम वाराणसी जिला न्यायालय से हिन्दुओं को ज्ञानवापी ढाँचे के व्यास तहखाने में पूजा करने की अनुमति मिलने के बाद किया था।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार रोशन पाण्डेय हिन्दू समाज पार्टी के भी प्रदेश सचिव हैं। वे मूल रूप से बिहार के गया के रहने वाले हैं। उनके खिलाफ पुलिस ने धारा 153A (दो समूहों के बीच धार्मिक, भाषायी आया नस्लीय आधार पर भावनाएँ भड़काना), 505(2) (किसी धार्मिक, नस्लीय या भाषायी समूह के बारे में उलटी सीधी खबर फैलाना), 295A (जानबूझकर धार्मिक भावनाएँ भड़काना) और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

मामला दर्ज किए जाने से पहले रोशन पाण्डेय ने एक वीडियो जारी किया था। इसमें वह कहते दिखते हैं कि वारणसी कोर्ट ने हिन्दुओं को ज्ञानवापी के तहखाने में पूजा करने की इजाजत दे दी है, इसलिए यह मंदिर है। पाण्डेय ने बताया कि उन्होंने इसी के चलते मस्जिद के साइनबोर्ड को मंदिर से ढक दिया।

उनका कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद उनका ऐसा करना कानूनी तौर पर सही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले भी इस बात पर जोर दिया है कि ज्ञानवापी को मस्जिद कहना सही नहीं है। हालिया ASI की रिपोर्ट भी यही बताती है कि मस्जिद का निर्माण मंदिर को तोड़ कर किया गया था।

पाण्डेय ने कहा कि पुराना साइनबोर्ड श्रद्धालुओं में भ्रम पैदा कर रहा था, इसलिए उन्होंने इसे बदलने का फैसला किया। वे इससे पहले प्रशासन से भी साइन बोर्ड बदलने की अपील कर चुके थे। उन्होंने मुख्यमंत्री और पर्यटन विभाग से भी यह अपील की थी। रोशन पाण्डेय ने दावा किया कि उनके आवेदन स्वीकार नहीं किए गए, इसलिए उन्होंने राष्ट्रीय हिन्दू दल के साथ खुद ही इसे बदलने का निर्णय लिया।

उन्होंने दावा किया कि वारणसी का जिला प्रशासन इस कृत्य के लिए उनके खिलाफ एक्शन की धमकी दे रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले का संज्ञान लेने की अपील की है। सोशल मीडिया पर यह भी दावे हो रहे हैं कि रोशन पाण्डेय पर एससी/एसटी एक्ट लगाया गया है।

इस बीच वाराणसी पुलिस ने पाण्डेय को तलाशने के लिए अभियान चलाया हुआ है। पुलिस का कहना है कि पाण्डेय अभी फरार हैं। लंका थाने के दारोगा शिवाकांत मिश्रा का कहना है कि FIR नगवा पोस्ट के इंचार्ज अजय यादव की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है।

गौरतलब है कि 1 फरवरी 2024 को रोशन पाण्डेय ने वाराणसी में ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ लिखे साइन बोर्ड पर हरे रंग के मंदिर लिखे स्टीकर चिपकाए थे। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। उन्होंने यह कदम वाराणसी जिला न्यायालय के निर्णय के बाद उठाया था, जिसमें हिन्दुओं को ज्ञानवापी के भीतर व्यास तहखाने में पूजा की अनुमति दी गई थी। हाल ही में ज्ञानवापी पर आई ASI सर्वे की रिपोर्ट में बताया गया है कि यहाँ मौजूद वर्तमान मस्जिद से पहले कभी विशाल हिन्दू मंदिर था।

श्रीदेवी की हुई ‘हत्या’… महिला यूट्यूबर ने मौत को सनसनीखेज बनाने के लिए जाली दस्तावेजों का किया इस्तेमाल: CBI ने दायर की चार्जशीट, PM-रक्षा मंत्री के दिखाए थे फर्जी लेटर

बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रीदेवी की मौत को लेकर कॉन्सिपिरेसी थ्योरी परोसने वाली यूट्यूबर के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की है। उसने उनकी मौत को लेकर सनसनीखेज दावे किए थे। सीबीआई ने कहा कि दीप्ति आर पिन्नीति ने श्रीदेवी की मौत पर भारत और यूएई सरकार पर आरोप लगाए थे और ऐसा करने के लिए उसने जिन दस्तावेजों का सहारा लिया था, वो दस्तावेज फर्जी थे।

खुद को इन्वेस्टिगेटर कहने वाली भुवनेश्‍वर की रहने वाली दीप्ति के खिलाफ अब सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया है। दीप्ति ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर भी ऐसे ही सनसनीखेज दावे किए थे। उससे पहले उसने फरवरी 2018 में दुबई में हुई श्रीदेवी की मौत पर वीडियो बनाई थी। दीप्ति ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से इन दोनों मौतों पर टिप्पणी की और सबूत पेश किए थे।

उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पत्र शेयर कर दावे किए थे। इस मामले में मुंबई की वकील चाँदनी शाह की शिकायत के आधार पर सीबीआई ने दीप्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। शाह ने बताया था कि अपने वीडियो और लाइव सत्र में, दीप्ति ने जो यूएई सरकार के रिकॉर्ड पेश किए, वे जाली थे। इस मामले में अब सीबीआई ने भी कहा है कि ये सभी पत्र फर्जी थे।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में सीबीआई ने दीप्ति के घर पर छापा मारा था और उनके फोन और लैपटॉप जब्त कर लिए थे। सीबीआई ने स्पेशल कोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जाँच से पता चला कि यूट्यूब पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से संबंधित उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ ‘जाली’ थे।

सीबीआई का कहना है कि यूट्यूबर दीप्ति ने श्रीदेवी की मौत के मामले की जाँच कर रहे सीबीआई अधिकारियों के फर्जी दस्तावेज बनाए और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए। यूट्यूबर ने दावा किया था कि दस्तावेजों से पता चलता है कि श्रीदेवी की हत्या की गई थी।

हालाँकि सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल करने को लेकर पिन्नीति ने कहा, “यह मानना कठिन है कि सीबीआई ने मेरा बयान दर्ज किए बिना मेरे खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।” दीप्ति ने कहा कि उन्होंने ये दस्तावेज कोर्ट में रखे हैं। उन्होंने दावा किया है कि उनके पास दुबई से गवाह भी हैं।