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गुजरात में मकरसंक्रांति पर पटाखे क्यों? विवादित बाबरी ढाँचे और वाजपेयी-आडवाणी के कनेक्शन से कैसे हुई इसकी शुरुआत?

गुजरात में मकरसंक्रांति को दो और नामों से भी जाना और बुलाया जाता है – उत्तरायण या उतराण। गुजरात में इस त्यौहार की महत्ता यदि दीवाली के समकक्ष नहीं है तो उससे कम भी नहीं है। कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के दौरान बाण शैया पर सोए हुए भीष्म पितामह ने इसी दिन अपना देहत्याग किया था और मोक्ष को प्राप्त किया था। समग्र गुजरात में मकरसंक्रांति के दिन और उसके बाद वाले दिन यानी की दो दिन पतंग उड़ाने की परंपरा तो सालों से है पर प्रथम दिन के संध्याकाल के समय पटाखे फोड़ने की परंपरा न ही आधुनिक है परन्तु यह सिर्फ तीन दशकों से ही विद्यमान है।

हर साल समग्र गुजरात में उत्तरायण की संध्या को पटाखे फोड़े जाते हैं। आकाश में रॉकेट छोड़े जाते हैं और आतिशबाजी भी की जाती है। दो पल तो ऐसा लगता है कि दो या तीन महीने बाद समग्र गुजरात में दीवाली वापस आ गई है। मेरे हम-उम्र या मुझसे बड़े कई बार ऐसा बोलते हुए सुने जा सकते हैं कि “हमारे समय में ऐसा नहीं था”।

और उनकी यह बात सच भी है। पर किसी ने यह जानने की कभी कोशिश नहीं की – अगर आज से कुछ साल पहले यदि ये नहीं था तो यह परंपरा शुरू कैसे हुई, उसके पीछे कारण क्या-क्या है? मुझे बिलकुल और साफ-साफ याद है और मैंने इसको गुजरात के विश्व हिन्दू परिषद के सीनियर अधिकारी के साथ चर्चा करके कन्फर्म भी किया है कि मकरसंक्रांति की संध्या को पटाखे फोड़ने की शुरुआत आज से बिल्कुल 31 साल पहले यानी 1993 की 14 जनवरी को हुई थी।

अगर उस दिन की बात करें तो लगभग एक महीना और आठ दिन पहले अयोध्या में बाबरी ढाँचा गिराया गया था। कारसेवकों को कथित रूप से उकसाने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती वगैरह को उस समय की कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा तुरंत हिरासत में ले लिया गया था।

1993 के जनवरी माह में, यानी मकरसंक्रांति के कुछ दिन पहले ही इन सभी को जेल से जब रिहा किया गया तब गुजरात विश्व हिन्दू परिषद ने राज्य के सभी हिन्दुओं से यह अपील की थी कि मकरसंक्रांति के संध्या समय हर छत पर आप मशाल जलाइए और थाली बजाइए और इस अवसर को दिवाली के रूप में मनाइए।

हम गुजराती तो वैसे भी काफी उत्साह में रहते हैं, इसलिए हमने विहिप की अपील को तो स्वीकारा ही पर मशाल जलाने व थाली बजाने के साथ-साथ हमने सम्पूर्ण दिवाली मनाते हुए पटाखे भी फोड़े और खूब फोड़े। फिर अगले साल यानी 1994 की संक्रांति को मशाल तो नहीं जली पर गुजरातियों का उत्साह बरकरार रहा और पटाखे बराबर फूटे। बस वो दिन है और आज का दिन है, मकरसंक्रांति की संध्या को पटाखे फोड़ना गुजरात में एक परंपरा सी बन गई है और आतिशबाजी से पूरा आकाश जगमगा जाता है।

आज भी मकरसंक्रांति है और जब संध्या का समय होगा तब आप भी गुजरात के साथ पटाखे फोड़ेंगे न?

आप सभी को मकरसंक्रांति की ढेरों शुभकामनाएँ!

‘सिर्फ राम मंदिर के खिलाफ प्रलाप कर रही हो, मुस्लिमों पर बोल कर दिखाओ’: हिन्दू शख्स ने SFI की नेता को दी चुनौती तो वामपंथी गुंडों ने किया हमला, पीट-पीट कर निकाला

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में वामपंथी संगठन SFI (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) की ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी दीपसिता धर की रैली में संगठन के गुंडों ने एक हिन्दू शख्स पर हमला कर दिया और उसकी पिटाई की। बता दें कि ये छात्र संगठन CPI(M), यानी ‘कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी)’ से सम्बद्ध है। रामपुरहाट में दीपसिता धर की रैली के दौरान एक हिन्दू शख्स ने राम मंदिर और हिन्दू समाज के खिलाफ उनकी गलतबयानी का विरोध किया।

शनिवार (13 जनवरी, 2024) को आयोजित इस रैली में उक्त हिन्दू शख्स ने निडरता से जवाब देते हुए कहा, “तुम उसी समय से हिन्दुओं के खिलाफ प्रलाप कर रही हो। मैं तुम्हें चुनौती देता हूँ – मुस्लिम समाज के खिलाफ कुछ भी बोल कर दिखाओ। तुमने मुस्लिमों के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा, लेकिन राम मंदिर के निर्माण पर ही अटकी हुई हो।” उक्त व्यक्ति ने सिर्फ सवाल पूछा और किसी प्रकार की शारीरिक चोट पहुँचाने की कोई कोशिश भी नहीं की, फिर भी उसे घेर लिया गया।

दीपसिता धर के समर्थकों ने उसकी पिटाई कर दी। साथ ही उसे धक्के देकर रैली से बाहर निकाल दिया गया। इस दौरान दीपसिता धर ने SFI के गुंडों को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया और बाद में ‘विक्टिम कार्ड’ खेलते हुए कहने लगीं कि उक्त शख्स ने उनके भाषण का सिर्फ एक अंश ही सुना था। कम्युनिस्ट पार्टी की नेता ने बेशर्मी दिखाते हुए उसकी तुलना ‘लघु दृष्टि’ के मरीज से कर दी और कहा कि उन्होंने काफी कुछ कहा, लेकिन उसने सिर्फ राम मंदिर को लेकर बातें सुनी।

याद दिलाते चलें कि दीपसिता धर हावड़ा के बाली से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुकी हैं। 2021 में हुए चुनाव में उन्हें मात्र 22,040 (18%) वोट ही प्राप्त हुए थे। TMC और भाजपा प्रत्याशियों के बाद वो तीसरे नंबर पर आई थीं। बताया जाता है कि उनका मकसद भाजपा की वैशाली डालमिया को किसी तरह हरवाना था। वो मात्र 6237 वोट से ये सीट हारी थीं। साथ ही वो दिल्ली की सीमाओं को घेर कर हुए किसान आंदोलन में भी खासी सक्रिय रही थीं।

सोनू सूद, एल्विश यादव, जैकलीन फर्नांडिस, शहनाज गिल… बागेश्वर धाम वाले बाबा के दरबार में सेलब्स का जमावड़ा, महाराष्ट्र में कथा सुनने आई लाखों की भीड़

अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस, यूट्यूबर एल्विश यादव और अभिनेता सोनू सूद ने मुंबई में बागेश्वर धाम वाले पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से आशीर्वाद लिया। बता दें कि जहाँ जैकलीन फर्नांडिस ‘मर्डर 2’ (2011) और ‘किक’ (2014) जैसी फिल्मों के लिए जानी जाती हैं, वहीं ‘अरुंधति (2009)’ और ‘दबंग’ (2010) जैसी फिल्मों के जरिए नाम कमाने वाले सोनू सूद कोरोना के दौरान लोगों की मदद कर चर्चा में आए थे। एल्विश यादव ने हाल ही में ‘बग बॉस OTT’ का ख़िताब अपने नाम किया है।

सोनू सूद ने पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री को माला पहना कर उनका स्वागत भी किया। साथ ही ‘बिग बॉस 13’ की रनर-अप रहीं शहनाज गिल ने भी बागेश्वर धाम वाले बाबा का आशीर्वाद लिया। कुछ ही दिनों पहले भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह भी बागेश्वर धाम वाले बाबा के चरणों में पहुँची थीं। वहीं महाराष्ट्र में ही भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव ने भी उनके चरणों में हाजिरी लगाई थी। पनवेल में पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का कथावाचन भी हुआ।

महाराष्ट्र के पनवेल में रात के अँधेरे में भी उनका कथावाचन सुनने के लिए लाखों लोगों का जमावड़ा लगा। वहीं इसके बाद वो गोरखपुर के लिए निकल गए, जहाँ उनका कथावाचन अब चल रहा है। पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री अक्सर विरोधियों के निशाने पर रहते हैं, जो उनके ‘दिव्य दरबार’ को लेकर उन पर निशाना साधते रहते हैं। हालाँकि, उन्होंने कई मीडिया चैनलों पर इंटरव्यू देकर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों पर सफाई दी थी और विरोधियों को तगड़ा जवाब दिया था।

जैकलीन फर्नांडिस जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर से रिश्तों के कारण भी विवादों में हैं। वो अक्सर जेल के भीतर से ही अभिनेत्री के लिए पत्र जारी करता रहता है। वहीं एल्विश यादव पर मेनका गाँधी के NGO ने साँप के ज़हर से बना ड्रग्स रेव पार्टियों में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। हालाँकि, इस पर अब तक कुछ साबित नहीं हो सका है। इन सेलेब्स के बागेश्वर धाम वाले बाबा से मुलाकात को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

‘चीन से संघर्ष के लिए तैयार हों’: जिसे उपद्रवी बताता है ड्रैगन अब वो बना ताइवान का राष्ट्रपति, लाई चिंग-ते की जीत से शी जिनपिंग को बड़ा झटका

ताइवान में चीन को बड़ा झटका लगा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कट्टर विरोधी लाई चिंग-ते ने राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनावों में जीत हासिल की है। शनिवार (13 जनवरी, 2024) को ताइवान में राष्ट्रपति चुनाव की मतगणना की गई, जिसमें उन्होंने जीत दर्ज की। अभी तक वोटिंग पूरी नहीं हुई है, लेकिन लाई को विजेता घोषित कर दिया गया है। वो मौजूदा समय में ताईवान के उप-राष्ट्रपति हैं और अब 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे।

सत्तारूढ़ ‘डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी’ (DPP) के लाई चिंग-ते, जिन्हें विलियम लाई नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने 41.6% वोटों के साथ जीत हासिल की। उनके प्रतिद्वंद्वी, कुओमिन्तांग (KMT) के होऊ यू-इह ने 33.4% वोट हासिल किए। लाई चिंग-ते एक स्वतंत्रतावादी नेता हैं जिन्हें चीन द्वारा एक ‘उपद्रवी‘ के रूप में देखा जाता है। उनकी जीत से चीन-ताइवान संबंधों में तनाव बढ़ने की संभावना है।

लाई चिंग-ते ने अपने चुनावी अभियान के दौरान एक अधिक स्वतंत्रतावादी रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वह ताइवान की संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और चीन के साथ एकीकरण के किसी भी प्रयास का विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह ताइवान को एक अधिक लोकतांत्रिक और समृद्ध समाज बनाने के लिए काम करेंगे।

लाई चिंग-ते की जीत से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को झटका लगा है। शी जिनपिंग ताइवान को चीन का एक प्रांत मानते हैं और उन्होंने ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के लिए सैन्य कार्रवाई करने की धमकी दी है। लाई चिंग-ते की जीत के बाद, ताइवान में चीन-विरोधी भावना बढ़ने की संभावना है। लाई चिंग-ते ने ताइवान के लोगों से चीन के साथ संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।

अमेरिका से नजदीकी की वजह से खार खाता है जिनपिंग

लाई चिंग-ते की जीत से अमेरिकी खेमे में भी खुशी की लहर है। ताइवान को भले ही अमेरिका आधिकारिक रूप से अलग देश नहीं मानता, लेकिन ताइवान की संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, चीन ताइवान को अपना एक प्रांत मानता है और वह ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के लिए सैन्य कार्रवाई करने की धमकी देता है। लाई चिंग-ते की जीत से चीन की चिंता बढ़ने की संभावना है क्योंकि वह ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के प्रयासों को और अधिक कठिन बना सकती है।

लाई चिंग-ते की जीत से चीन-ताइवान संबंधों में तनाव बढ़ने की संभावना है। लाई चिंग-ते एक स्वतंत्रतावादी नेता हैं जिन्हें चीन द्वारा एक “उपद्रवी” के रूप में देखा जाता है। उनकी जीत से चीन की चिंता बढ़ने की संभावना है क्योंकि वह ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के प्रयासों को और अधिक कठिन बना सकती है।

‘ये भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के विरुद्ध, अस्वीकार्य’: POK पहुँचीं UK की हाई कमिश्नर तो भारत ने लताड़ा, ब्रिटिश उच्चायुक्त के सामने भी जताई आपत्ति

भारत सरकार ने पाकिस्तान में ब्रिटेन की हाई कमिश्नर जेन मैरियट द्वारा POK का दौरा करने पर कड़ी आपत्ति जताई है। भारत सरकार ने दिल्ली में ब्रिटेन के हाई कमिश्नर को तलब कर ये आपत्ति जताई और कहा कि जेन मैरियट का पीओके दौरा भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है। ये पूरी तरह से अस्वीकार्य है। भारत के विदेश सचिव ने इस मामले में कड़ा विरोध भी दर्ज कराया है।

इस मामले में भारत के विदेश मामलों के मंत्रालय (MEA) ने शनिवार (13 जनवरी, 2023) को बयान भी जारी किया है। भारत सरकार ने कहा, “10 जनवरी, 2024 को ब्रिटिश विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के साथ ब्रिटिश हाई कमिश्नर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यात्रा को भारत ने गंभीरता से लिया है। जेन मैरियट का यह कदम भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ है, जो अस्वीकार्य है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और रहेंगे। विदेश सचिव ने इस पर भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है।”

जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान में ब्रिटेन की उच्चायुक्त जेन मैरियट ने ‘एक्‍स’ पोस्‍ट पर 10 जनवरी को मीरपुर की यात्रा की तस्वीरें साझा की थी और कहा था, “मीरपुर से सलाम, ब्रिटेन और पाकिस्तान के लोगों के बीच संबंधों का दिल! 70 फीसदी ब्रिटिश पाकिस्तानी मूल रूप से मीरपुर से हैं, जिससे हम सभी का साथ मिलकर काम करना प्रवासी हितों के लिए अहम है। अपने आतिथ्य सत्‍कार के ल‍िए आभार!”

क्या है पीओके?

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) ऐतिहासिक रूप से जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन रियासत का हिस्सा था। 1947 में भारत के बँटवारे के तुरंत बाद, महाराजा हरि सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर इसे भारत में मिला दिया था। पीओके के पास करीब 13,296 वर्ग किलोमीटर का इलाका है। इसकी राजधानी मुजफ्फराबाद है और इसमें 10 जिले हैं। भारत पीओके को अपना अभिन्न अंग मानता है। भारत, बिना इजाजत के विदेशी लोगों की इस क्षेत्र में यात्रा का कड़ा विरोध करता है।

बता दें कि पाकिस्तान के कब्जे में पीओके के अतिरिक्त गिलगित-बाल्टिस्तान का भी इलाका है। वो उसे अलग राज्य बताता है। लेकिन ये हिस्सा भारत के लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश का है। पाकिस्तान दिखावे के लिए सिर्फ पीओके के छोटे से हिस्से को आजाद कश्मीर बताता है, जबकि गिलगित वाले इलाके को अलग राज्य बना चुका है।

‘हाजिर क्यों नहीं हो रहे? जाँच में आ रही बाधा’: जमीन घोटाले में CM हेमंत सोरेन को ED का 8वाँ समन, कहा – 16 से 20 जनवरी के बीच पेश होइए

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन केस में बयान दर्ज करवाने के लिए आठवीं बार समन भेजा है। शनिवार (13 जनवरी, 2024) को भेजे गए समन में ईडी ने सीएम सोरेन को जवाब देने के लिए 16 से 20 जनवरी तक का वक्त दिया है।

इसके लिए उन्हें इन पाँच दिनों के बीच ED के राँची के क्षेत्रीय दफ्तर में हाजिर होने को कहा गया है। जाँच एजेंसी ने समन में उनसे पूछा है कि वे बयान दर्ज कराने के लिए हाजिर क्यों नहीं हो रहे हैं? इससे जाँच में बाधा पैदा हो रही है। इस पर राज्य से बीजेपी MP निशिकांत दुबे ने सोरेन के इस्तीफे की माँग की है।

इससे पहले ईडी इस केस में सीएम सोरेन को सात समन भेज चुकी है। हालाँकि हर बार उन्होंने समन को नजरअंदाज कर दिया। जमीन घोटाला केस में ईडी की तरफ से अगस्त 2023 से ही हेमंत सोरेन को समन भेजने की शुरुआत हो चुकी है।

आठवें समन से पहले दिसंबर 2023 के आखिरी हफ्ते में भेजे गए 7वें समन में ईडी ने सोरेन से खुद ही पूछताछ के लिए जगह, वक्त और तारीख बताने को कहा था। इसके लिए जाँच एजेंसी ने उन्हें 7 दिन का वक्त दिया था।

सीएम सोरेन ने 2 जनवरी, 2024 को ईडी को पत्र भेज समन की तार्किकता और वैधता पर प्रश्नचिह्न लगाया था। बताते चलें कि सीएम सोरेन सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ED की जाँच पर रोक लगाने की अपील की थी। हालाँकि दोनों कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दी है।

सीएम सोरेन पर निशाना साधते हुए गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “AAP के पाप के लिए तो 4 था, झारखंड के मुख्यमंत्री के डकैती के लिए 8वाँ समन कोई मायने नहीं रखता। केजरीवाल जी तो हल्ला मचा रहे हैं, हमारा मुख्यमंत्री तो चुपचाप रज़ाई में घुसकर जाड़ा काट रहे हैं। कम से कम शिबू सोरेन जी की इज़्ज़त तो रखिए, इस्तीफ़ा दीजिए व एजेंसियों के प्रश्न का जवाब दीजिए।”

बताते चलें कि सीएम हेमंत सोरेन पर अवैध खनन लीज पट्टे और अवैध जमीन घोटाला कुल दो केस चल रहे हैं। जमीन घोटाले में उनके खिलाफ ईडी केस दर्ज कर अरेस्ट वॉरंट जारी कर सकती है। वहीं अवैध खनन घोटाले में भी ED उन पर शिकंजा कस सकती है।

ईडी राँची के जिस जमीन घोटाले में सीएम सोरेन को को पूछताछ के लिए तलब कर रही है। ये जाँच एक सर्कल ऑफिसर की से शुरू हुई थी। इसका दायरा बढ़कर कोलकाता के रजिस्ट्रार ऑफ एश्योरेंस के दफ्तर तक पहुँचा था। वहीं ये खुलासा हुआ कि 36 फर्जी डीड और कागजात के जरिए सैंकड़ों एकड़ जमीन का फर्जी सौदा किया गया है। इस फर्जीवाड़े में छोटे दफ्तर के अधिकारी से लेकर जिले के उपायुक्त और बड़े-बड़े कारोबारियों का नाम आया हैं और इन सबके तार आखिर में सीएम हेमंत सोरेन से जुड़ गए।

वहीं चुनाव आयोग से जुड़े केस में कभी भी उनके खिलाफ राज्य के राज्यपाल पत्र जारी कर सकते हैं। बताते चलें कि चुनाव आयोग ने हेमंत सोरेन को लोक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9-ए के उल्लंघन का दोषी पाया। हेमंत सोरेन पर सीएम और खनन मंत्री रहते हुए कथित तौर पर अपने पद का बेजा इस्तेमाल करने का आरोप भी है। इस सबके बीच बीते साल दिसंबर में हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के राज्य की मुख्यमंत्री बनने की खबरें भी सुर्खियों में रही।

₹116 करोड़ का खरीदा घर: जानिए कौन हैं व्रतिका गुप्ता, जिनकी मुंबई वाली प्रॉपर्टी डील बटोर रही चर्चा

फैशन डिजाइनर व्रतिका गुप्ता ने मुंबई में 116 करोड़ रुपए का घर खरीदा है, जिसके बाद वो चर्चा में आ गई हैं। असल में वो ‘Masion Sia’ नामक कंपनी की संस्थापक एवं CEO हैं, जो घरों को सजाने का काम करती है। अब उन्होंने मुंबई के पॉश इलाके वर्ली स्थित ‘ओबरॉय थ्री सिक्सटी’ सोसाइटी में ये आलीशान घर खरीदा है। यहाँ पिछले साल D’Mart के संस्थापक राधाकिशन दमानी ने 1238 करोड़ रुपए की डील की थी, जिसके बाद ये जगह चर्चा में आया था।

व्रतिका गुप्ता की कंपनी ‘Masion Sia’ लक्जरी होम डेकोरेशन की दुनिया में एक बड़ा नाम है। उन्होंने जो घर खरीदा है, वो सी व्यू वाला है। अर्थात, वहाँ से समुद्र दिखता है। 39 वर्षीय व्रतिका गुप्ता का ये नया घर 12,138 स्क्वायर फ़ीट में फैला हुआ है। बताया जा रहा है कि इसकी कीमत लगभग 1 लाख रुपए प्रति स्क्वायर फ़ीट आँकी गई है। उन्होंने इसके लिए 5.82 करोड़ रुपए तो सिर्फ स्टाम्प ड्यूटी चुकाई है। रविवार (7 जनवरी, 2024) को इस प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रेशन हुई है।

इस घर के साथ व्रतिका गुप्ता को 8 पार्किंग स्लॉट भी मिले हैं। इससे पहले ये भी सामने आया था कि 12.25 करोड़ रुपए की कार रॉल्स रॉयस (कलिनन ब्लैक बैज) खरीदने वाली वो देश की पहली महिला हैं। इंटीरियर डेकोरेशन के काफी महँगे उत्पाद बेचने वाली कंपनी की मालिक व्रतिका गुप्ता ने पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन और NIFT से पढ़ाई की है। उन्होंने 2022 में इस कंपनी की स्थापना की थी। मुंबई में अकेले साल 2022 में 1,12,668 संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन हुए हैं।

उन्होंने जो अपार्टमेंट खरीदा है, वो 49वीं मंजिल पर स्थित है। बता दें कि ‘थ्री सिक्सटी वेस्ट’ के 2 टॉवर हैं, जिनमें से एक में रिट्ज-कार्लटन होटल चलता है और दूसरे टॉवर में इसी होटल प्रबंधन द्वारा रेजिडेंशियल बिल्डिंग का मैनेजमेंट किया जाता है। व्रतिका गुप्ता इंटीरियर एवं फैशन डिजाइनर हैं। उन्होंने ‘अंजुमन फैशन लिमिटेड’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। 2009-11 के बीच वो अंजू मोदी के ब्रांड की डिजाइनर थी। फिर वो ‘Two White Birds’ में डिजाइन डायरेक्टर बनीं।

2017 में उन्होंने ‘व्रतिका एन्ड नकुल’ की स्थापना की। नकुल अग्रवाल उनके पति हैं। मुंबई और हैदराबाद में भी व्रतिका गुप्ता के स्टोर हैं। उनकी कंपनी परंपरागत और ऐतिहासिक डिजाइनों को आधुनिक साँचे में ढाल कर पेश करती है। फाइन मेटल, क्रिस्टल, पत्थर और कांच का इस्तेमाल कर के ये उत्पाद बनाए जाते हैं। ‘Masion Sia’ भारतीय इतिहास और पश्चिमी आधुनिकता के मिश्रण पर ध्यान देती है। व्रतिका गुप्ता की कुल संपत्ति की सटीक जानकारी फ़िलहाल नहीं है।

‘सनातन धर्म खतरे में, हमारा खाकर हमारे ही धर्म के खिलाफ काम कर रहे हैं मिशनरी’: नक्सलियों के गढ़ में जनजातीय समाज की हुंकार – इन्हें यहाँ नहीं रहने देंगे

छत्तीसगढ़ भाजपा के नेता और पूर्व विधायक भोजराज नाग ने कहा कि वे धर्मांतरण कराने वाले मिशनरियों को नहीं रहने देंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति को खत्म करने का एक बहुत बड़ा षडयंत्र चल रहा है। नाग ने कहा कि सनातन धर्म खतरे में है। शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर जमकर धर्मांतरण हो रहा है। उन्होंने अपना धर्म बदलने वाले आदिवासियों को आरक्षण का लाभ नहीं देने की भी वकालत की।

भोजराज नाग आदिवासी संस्कृति और परंपरा की रक्षा के लिए जनजाति सुरक्षा मंच (JSM) यात्रा का नेतृत्व रहे हैं। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर से निकली ये यात्रा दंतेवाड़ा पहुँची। इस दौरान पूर्व MLA ने धर्मांतरण करवाने वालों और ईसाई मिशनरियों पर जमकर हमला किया और सनातन को खतरे में बताया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, भोजराज नाग ने कहा कि सनातन के खिलाफ बड़े पैमाने पर साजिश हो रही है। अब सनातन विरोधियों को मुँहतोड़ जवाब देने की बारी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से प्रभु श्रीराम ने वानर सेना को साथ लेकर लंका पर चढ़ाई की थी और असुर राज को खत्म किया था, ठीक इसी तरह से वे हर जिले के सर्वसमाज के पास जा रहे हैं।

पूर्व विधायक ने आगे बताया कि वे सनातन के खिलाफ चल रहे षड्यंत्र का पर्दाफाश करेंगे। उन्होंने कहा बस्तर पाँचवीं अनुसूची वाला क्षेत्र है, लेकिन यहाँ शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर जमकर धर्मांतरण हो रहा है। बाहर से आए हुए लोगों यहाँ के लोगों को आपस में लड़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ के ग्रामीण अपनी संस्कृति-परंपरा और धर्म को बचाने के लिए कटिबद्ध है।

भोजराज नाग ने कहा कि उनके देवी-देवताओं को संरक्षित करने के लिए कानून में कोई व्यवस्था नहीं है। इसके लिए उन्होंने कानून में संशोधन की माँग की और कहा कि इस बात को लेकर सैकड़ों लोग आराध्य देवी माता दंतेश्वरी के मंदिर आए हैं। इस दौरान स्थानीय विधायक और विश्व हिंदू परिषद समेत कई हिंदू संगठनों के नेता मौजूद थे।

भाजपा नेता भोजराज नाग ने कहा, “हमारे देवी-देवताओं के खिलाफ जो षड्यंत्र हो रहा है, उसे हम किसी भी हाल में पनपने नहीं देंगे।” उन्होंने आगे कहा, “धर्मांतरण करवाने वाले मिशनरी बाहर से आते हैं, हमारा खाते हैं और हमारे ही धर्म के खिलाफ काम करते हैं। अब ऐसे मिशनरियों को हम बस्तर में नहीं रहने देंगे।”

बताते चलें कि 2 जनवरी 2024 को नाग ने कहा था, “किसी आदिवासी को धर्म परिवर्तन क्यों करना चाहिए? इसे हतोत्साहित किया जाना चाहिए। धर्म बदलने वालों को आधिकारिक तौर पर कानून के मुताबिक इसका ऐलान करने दें। वे आदिवासियों का फायदा नहीं ले सकते और परंपरा का पालन करने से इनकार नहीं कर सकते।”

बीते साल से ही डी लिस्टिंग यानी धर्मांतरण कर ईसाई या मुस्लिम बनने वाले जनजातीय समाज के लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) के दायरे से बाहर करने की माँग हो रही है। इसको लेकर देशव्यापी आंदोलन जारी है। अनुसूचित जनजाति के लोगों का यह आंदोलन JSM के बैनर तले चल रहा है।

जनजाति सुरक्षा मंच ने बस्तर में नारायणपुर और कोंडागाँव, दोनों जगहों पर साल भर में कई रैलियाँ कीं। पिछले साल क्रिसमस से ठीक एक दिन पहले 24 दिसंबर 2023 को झारखंड की राजधानी राँची में इकट्ठा होकर अपना इरादा बता चुका है। इसके तहत जनजातीय समाज के लोग अपनी माँगों के समर्थन में फरवरी 2024 में दिल्ली में जुट सकते हैं।

‘अकेले में चाइल्ड पॉर्न देखना पॉक्सो-आईटी एक्ट के तहत अपराध नहीं’: मद्रास हाईकोर्ट ने कहा – स्मोकिंग-ड्रिंकिंग की तरह अश्लील वीडियो देखना भी ‘Gen Z’ की आदत

मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार (11 जनवरी, 2024) को कहा कि चाइल्ड पॉर्न डाउनलोड करना और इसे प्राइवेट में देखना पॉक्सो एक्ट (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) और IT (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम) के तहत अपराध नहीं है। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि पॉर्नोग्राफी के लिए अगर किसी बच्चे का इस्तेमाल किया गया है, तभी पॉक्सो के तहत मामला चलाया जाना चाहिए। ऐसे ही, IT एक्ट के तहत मामला तभी चलेगा जब आरोपित ने कंटेंट बनाया हो, प्रकाशित किया हो और दूसरों को भेजा हो।

न्यायाधीश N आनंद वेंकटेश ने ये फैसला सुनाया। इस दौरान उन्होंने केरल हाईकोर्ट के एक जजमेंट का जिक्र किया, जहाँ इसी तरह का फैसला सुनाया गया है। मामला 28 साल के व्यक्ति से जुड़ा है, जिसके ऊपर चाइल्ड पॉर्न डाउनलोड करने और इसे देखने पर पॉक्सो और आईटी एक्ट पुलिस ने लगाया था। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपित ने प्राइवेट में ये सब किया, बिना किसी पर कोई प्रभाव डाले हुए। जज ने कहा कि जिस क्षण वो कंटेंट को बाँटने या सार्वजनिक रूप से दिखाने लगता, तब इन एक्ट्स के तहत धाराएँ लगाई जा सकती हैं।

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि धूम्रपान और शराब पीने की तरह मौजूदा पीढ़ी के लिए पॉर्न देखना भी एक आदत बन गई है। जज ने कहा कि इसके लिए सज़ा सुनना समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ‘Gen Z’ इस गंभीर समस्या से जूझ रही है और इसके लिए उन्हें सज़ा देने की बजाए समाज को उन्हें सही सलाह देनी चाहिए, उन्हें शिक्षित करना चाहिए, उनकी काउंसिलिंग करनी चाहिए ताकि वो इस आदत से छुटकारा पाएँ। उन्होंने कहा कि आजकल के किशोर गैजेट्स का इस्तेमाल करते हैं, जहाँ एक बटन टच करने पर चीजें बिना किसी सेंसर के पहुँच रही हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों की मानसिक अवस्था उस समय विकास की अवस्था में होती है, ऐसे में जो अदालत कंटेंट होते हैं उनके प्रति भी वो आकर्षित होते हैं। इसके साथ ही याचिकाकर्ता आरोपित को मद्रास हाईकोर्ट ने काउंसिलिंग अटेंड करने की भी सलाह दी। जज ने कहा कि स्वस्थ और सुखी जीवन के लिए आरोपित को इस आदत से छुटकारा पाना चाहिए। जज ने कहा कि आपराधिक मामला खत्म कर देने कोई मदद नहीं मिलेगी, और याचिकाकर्ता को इस आदत से छुटकारा पाकर खुद की मदद करनी चाहिए।

‘मदरसे में पढ़ा हूँ, मुझे पता नहीं ये अपराध है’: 13 साल की बच्ची से बलात्कार कर सजा से बच गया आदिल, दंग करने वाली है वायरल खबर की सच्चाई

सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हो रही है, जिसमें आदिल राशिद नाम के युवक ने 13 साल की एक नाबालिग लड़की से रेप किया। जब पुलिस ने उसे पकड़ा तो उसने कहा कि उसे जानकारी नहीं थी कि रेप करना अपराध है। उसने कहा कि वह मदरसे में पढ़ा है और वहाँ उसे महिलाओं को बेकार और सड़क पर फेंके गए लॉलीपॉप की तरह बताया जाता था।

राशि की दलील को सुनते हुए कोर्ट ने उसकी सजा को खत्म कर दिया और कहा, “आप 18 वर्ष के हैं, लेकिन रिपोर्ट से स्पष्ट है कि जब यौन मामलों की बात आती है तो आप बहुत अनुभवहीन और अपरिपक्व हैं।” जज ने कहा कि चूँकि वह निष्क्रिय था और उसमें मुखरता की कमी थी, इसलिए जेल भेजना नुकसानदायक हो सकता है।

राशिद ने कहा कि लड़की ने उसे ऑनलाइन बहकाया था, इसके बाद उसने नाबालिग से यौन संबंध बनाए थे। यौन संबंध बनाने से पहले दोनों ने लगभग दो महीने तक फेसबुक पर चैटिंग की थी और उसके बाद फोन पर एक दूूसरे से बातें की थीं। इसके बाद वे दोनों एक स्थान पर मिले और होटल का एक कमरा बुक किया।

13 साल की नाबालिग लड़की ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वे दो घंटे तक होटल में रुके। वहाँ राशिद बाथरूम गया और कंडोम पहनकर बाहर आया। इसके बाद दोनों ने सेक्स किया। इस घटना के बाद राशिद सीधा मस्जिद गया और वहाँ नमाज पढ़ी। इसके बाद वह अपने घर लौट आया। उसी सप्ताह पुलिस ने राशिद को गिरफ्तार कर लिया।

इस खबर का स्क्रीनशॉट शेयर कर लोग न्यायिक व्यवस्था पर हमला बोल रहे हैं, जिसमें आदिल राशिद को नाबालिग लड़की से रेप के लिए बेहद कम सजा दी गई। दरअसल, यह मामला ब्रिटेन का है और जनवरी 2013 में सामने आया था। हालाँकि, सोशल मीडिया यूजर्स इस खबर को अब शेयर कर रहे हैं। एश्लिया सिमोन नाम की महिला ने एक्स पर लिखा, “ये ब्रिटेन का हाल है। ये बदमाश फाँसी का हकदार है, लेकिन उसे आजादी दे गई।”

ये मामला ब्रिटेन के नॉटिंघम का है, जहाँ आदिल रशीद नाम के युवक ने 13 साल की बच्ची के साथ यौन संबंध बनाए थे। इस मामले की सुनवाई के दौरान उसने कोर्ट में कहा कि उसे ब्रिटेन के कानून की जानकारी नहीं है, क्योंकि वो मदरसे में पढ़ा है। मदरसे में उसे बताया गया है कि महिलाओं की औकात सड़क पर फेंके गए लॉलीपॉप से ज्यादा की नहीं होती है।

इसके बाद उसके वकील ने उसे ‘सेक्स को लेकर भोला या अनजान’ साबित कर दिया। इस मामले में न्यायाधीश माइकल स्टोक्स ने राशिद को 9 महीने की जेल की सजा और 2 साल की निलंबित सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा था कि कानून लड़कियों की सुरक्षा के लिए है, भले ही इसमें उसमें मर्जी शामिल हो। इससे पहले नॉटिंघम क्राउन कोर्ट ने कहा था कि ऐसे अपराधों के लिए आमतौर पर चार से सात साल की जेल की सजा होती है।

पूछताछ में राशिद ने बताया था कि वो लड़की 13 की है, इस बारे में उसे पता था। वो शुरू में सेक्स संबंध नहीं बनाना चाहता था, लेकिन लड़की को देखकर बहक गया और सेक्स संबंध भी बनाए। पुलिस के अनुसार, इसके बारे में नाबालिग लड़की ने इसके बारे में स्कूल में अपनी सहेली को बताया था। इसके बाद उस लड़की ने शिक्षक को जानकारी दी थी। फिर शिक्षक ने पुलिस को बताया था। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।