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सलमान, अल्ताफ, रकीब और इरफान ने वनवासी ड्राइवर के गले में पहनाई जूते-चप्पल की माला, वीडियो बनाकर किया वायरल: ‘दलित टाइम्स’ ने नाम छिपाया

मध्य प्रदेश के सिवनी में सलमान, अल्ताफ, रकीब और इरफान ने जनजाति समाज के एक ड्राइवर के साथ बर्बरता की है। उन्होंने ट्रकों की हड़ताल के समय एक जनजाति समाज के ड्राइवर को रोक लिया। उसे चप्पल-जूतों की माला पहनाई, वीडियो बनाया और फिर उस वीडियो को वायरल भी कर दिया। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपितों को पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।

इस वीडियो में आरोपित हँसते-खिलखिलाते और जनजाति समाज के व्यक्ति का मजाक उड़ाते दिख रहे हैं। इस दौरान उसके साथ जातिसूचक गाली-गलौच भी करने की बात आ रही है। बाद में वहाँ से निकलकर ड्राइवर सीधे थाने पहुँचा और FIR दर्ज कराई। मामला सिवनी जिले के बम्होड़ी थाना क्षेत्र के अरी बस स्टैंड का है।

इस शर्मनाक हरकत को अंजाम वाले लोग बेशर्मों की तरह वीडियो में हँसते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने जिन अपराधियों को गिरफ्तार किया है उनमें सलमान की उम्र 24 साल, अल्ताफ की उम्र 40 साल, रकीब की उम्र 55 साल और इरफान की उम्र 28 साल है। ये सभी अरी गाँव के निवासी हैं। इनमें से कुछ के ऊपर पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं।

सिवनी पुलिस के संज्ञान में यह मामला आते ही अरी पुलिस और थाना प्रभारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन आरोपियों को धर दबोचा और एसडीएम के सामने पेश कर उन्हें जेल भेज दिया। इस मामले में पुलिस ने अप. क्र. 09/2024, धारा 341, 294, 323, 355, 506, और एससी, एसटी एक्ट जैसी सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज किया है।

इसका वीडियो दलित टाइम्स ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर साझा किया है। हालाँकि, इस एकपक्षीय मीडिया साइट ने आरोपितों का नाम छिपाने की खूब कोशिश की। वीडियो शेयर करते हुए दलित टाइम्स ने लिखा, “मध्यप्रदेश: शिवनी में जातिवादियों ने दलित ट्रक ड्राइवर को पहनाई जूतों की माला, जातिसूचक गालियाँ भी दीं..।”

मालदीव की राजधानी में मोहम्मद मुइज्जू की पार्टी की बड़ी हार, भारत समर्थक MDP की जीत: मंत्रियों ने PM मोदी पर की थी आपत्तिजनक टिप्पणी

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को बड़ा झटका लगा है। उनकी पार्टी मालदीव में जमीन खो रही है। मुइज्जू की पार्टी पीपुल्स नेशनल कॉन्ग्रेस मालदीव की राजधानी माले के मेयर का चुनाव हार गई है। वहीं, भारत समर्थक पार्टी ने इस चुनाव को जीत लिया है। यह नतीजा मालदीव में उठी भारत विरोधी भावनाओं के बाद आया है।

मुइज्जू की पार्टी के उम्मीदवार ऐशथ अजीमा शकूर बुरी तरह से हारी हैं। इन चुनावों में भारत समर्थक मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार आदम अजीम को भारी जीत मिली है। जिस पार्टी को जीत मिली है, उसके मुखिया इब्राहिम मोहम्मद सोलिह हैं। वह साल 2023 तक मालदीव के राष्ट्रपति थे। उन्होंने मालदीव को चीन के चंगुल से निकाल कर भारत से दोस्ती बढ़ाई थी।

आदम अजीम ने मुइज्जू की उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराया है। यह चुनाव माले के मेयर की सीट खाली होने के बाद करवाए गए थे। यह सीट मोहम्मद मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने से खाली हुई थी। वह नवम्बर 2023 में मालदीव के राष्ट्रपति बने थे। इससे पहले वह माले के मेयर ही थे। वह 2021 में माले के मेयर बने थे। मालदीव में माले शहर का मेयर काफी प्रभावशाली व्यक्ति होता है।

यह चुनाव नतीजे ऐसे समय में आए हैं, जब मुइज्जू की पार्टी के समर्थक और उनकी सरकार में मंत्रियों ने भारत विरोधी भावनाओं को भड़काया है। उनके मंत्रियों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया था। ऐसे में ऐसी पार्टी का जीतना जो भारत का समर्थन करती है, साथ ही मालदीव के मूड को भी बताता है।

दूसरी ओर, मालदीव ने सैनिकों की उपस्थिति को लेकर भारत से बातचीत भी शुरू की है। मुइज्जू ने भारत विरोधी भावनाओं को भड़काकर और भारतीय सैनिकों को बाहर करने के वादे पर सत्ता में आए हैं। मालदीव में लगभग 75 भारतीय सैनिक हैं, जो भारत द्वारा मालदीव को दिए गए दो हेलिकॉप्टर और एक डोर्निएर विमान की देखरेख करते हैं। मालदीव के राष्ट्रपति इन्हें देश से निकालना चाहते हैं।

क्या क्या हुआ मालदीव भारत विवाद में?

हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत सत्ताधारी पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। मुइज्जू की सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल की कठपुतली कहा था। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।

भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।

इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।

प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और हस्तियों ने मालदीव के रवैये की निंंदा की थी। साथ ही लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे। इन ट्विट्स में उन्होंने कहा था कि वह लोग भी लक्षद्वीप जाएँगे। वहीं ,ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने भी कहा था कि वह मालदीव की फ्लाइट टिकट बुक करना बंद कर देंगे।

भारत द्वारा मामले को राजनयिक स्तर पर उठाने के बाद मालदीव के हाई कमिश्नर इब्राहीम शहीब को विदेश मंत्रालय ने तलब किया था। मालदीव के हाई कमिश्नर 8 जनवरी 2024 को सुबह नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्रालय पहुँचे। मालदीव एसोसिएशन ऑफ़ टूरिज्म इंडस्ट्री (MATI) ने मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ दिए गए बयानों की आलोचना की थी।

इस संस्था ने एक बयान इस सम्बन्ध में जारी किया था। संस्था ने कहा था, “MATI मालदीव के कुछ उपमंत्रियों द्वारा सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत के लोगों के खिलाफ की गई अपमानजनक बातों की आलोचना करती है। भारत मुश्किलों में सबसे पहले हमारी सहायता करने वाला देश रहा है और हम भारत के लोगों और साथ ही इसके सरकार के प्रति आभार जताते हैं।”

350 कारें, भगवा झंडे, रामधुन… प्राण प्रतिष्ठा से पहले अमेरिका के न्यू जर्सी में निकली विशाल कार रैली, अयोध्या वाले होर्डिंग्स से पटा USA

अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को होने जा रहे राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का उत्साह केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया में सिर चढ़ कर बोल रहा है। अमेरिका के न्यू जर्सी में राम मंदिर उद्घाटन से पहले भारतीयों ने वहाँ कार रैली का आयोजन किया।

रैली में भारतीय 350 से अधिक कारों सहित भारतीय ‘राम सिया राम जय राम’ गाते हुए सड़कों पर निकले। सनातन परंपरा के उत्साह को दिखाती इस रैली के विदेशी भी कायल हो गए। इस रैली का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खासा शेयर किया जा रहा है।

न्यू जर्सी के एडिसन में की इस कार रैली में अच्छी खासी संख्या में भारतीय शामिल हुए। भगवान राम की फोटो वाले भगवा झंडे और सड़कों पर कतार में खड़ी कारों में राम धुन गाते-गुनगुनाते लोग वहाँ राम की महिमा से ओतप्रोत नजर आए।

सड़कों पर लोग ‘राम सिया राम जय-जय राम सिया राम’ गाते नजर आ रहे थे। रामायण की चौपाइयों से सड़के गुँजायमान हो रही थी। राम की भक्ति में झूम लोग गा रहे थे, “मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी, होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥”

हिंदू परिषद अमेरिका के महासचिव अमिताभ वीडब्ल्यू मित्तल के मुताबिक, अमेरिकी हिंदू राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में हिस्सा लेने के लिए उत्साहित हैं। वो अपनी भावनाओं को जताने के लिए अमेरिका में हो रहे आयोजनों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। उन्हें प्राण प्रतिष्ठा समारोह के शुभ दिन का इंतजार है।

उनका कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के उपलक्ष्य में पूरे अमेरिका में हिंदू अमेरिकी समुदाय ने कई कार रैलियाँ आयोजित की हैं और ‘प्राण प्रतिष्ठा’ के लिए कई और कार्यक्रमों की योजना बनाई है। इसके साथ ही जगह-जगह पर राम मंदिर के होर्डिंग्स भी लगाए गए थे। बताते चलें कि विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) यूएस चैप्टर ने अमेरिका 10 राज्यों में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के होर्डिंग्स तो 40 से अधिक बिलबोर्ड भी लगाए गए हैं। ये होर्डिंग्स टेक्सास, इलिनोइस, न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी और जॉर्जिया सहित अन्य राज्यों में लगे हैं।

इसके साथ ही वीएचपी ने अमेरिका में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर एक म्यूजिकल लाइट शो का भी किया है। वहीं वीएचपी की अमेरिका ब्रांच ने एरिजोना और मिसौरी में सोमवार 15 जनवरी, 2024 से उत्सव में शामिल होने के लिए तैयार है।

वीएचपी के अमेरिकी चैप्टर के ज्वॉइंट सेक्रेटरी तेजा ए शाह का कहना है कि उत्साह साफ दिख रहा है और न्यू जर्सी के मंदिरों के सदस्य इस ऐतिहासिक होने जा रहे उत्सव का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं।

अमेरिका ही नहीं बल्कि मॉरीशस में अयोध्या के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर खासा उत्साह है। मॉरीशस सनातन धर्म मंदिर महासंघ के अध्यक्ष भोजराज घूरबिन के मुताबिक, मॉरीशस के सभी मंदिरों में 22 जनवरी,2024 को भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा पर रामायण मंत्रोच्चार किया जाएगा।

यहीं नहीं मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ (Pravind Jugnauth) के नेतृत्व में मॉरीशस की कैबिनेट ने वहाँ हिंदू कर्मचारियों को 22 जनवरी, 2024 को 2 घंटे की खास छुट्टी दी है।

इस दौरान वे रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर होने वाले स्थानीय कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे और लाइव टेलिकास्ट देख सकेंगे। इसके लिए मॉरीशस के हिंदू सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने माँग की थी।

15 साल की नाबालिग लड़की का गला रेत कर पेड़ पर टाँग दी लाश, मोहम्मद तैय्यब और नाजिर खान गिरफ्तार: बिहार में 17 दिन बाद सुलझी हत्या की गुत्थी

बिहार के पूर्णिया में पुलिस ने 15 साल की एक किशोरी की हत्या की ऐसी गुत्थी सुलझाई है, जिसे आत्महत्या का रंग देने की कोशिश की गई थी। इस मामले में आरोपित मोहम्मद तैय्यब अपने दोस्त को लेकर दिल्ली से पूर्णिया गया और वहाँ नाबालिग को बुलाकर उसका गला रेत दिया और शव को पेड़ पर टाँग दिया। नाबालिग के साथ उसका प्रेम प्रसंग था। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।

दरअसल, पूर्णिया में एक किशोरी का शव पेड़ से लटका मिला था। घर वालों ने हत्या की आशंका जताते हुए तहरीर दी थी। जाँच में पता चला कि किशोरी का तैय्यब नाम के युवक से संबंध था और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से तैय्यब की लोकेशन पूर्णिया में ही मिली थी, जबकि वो दिल्ली में बताया जा रहा था। ऐसे में 17 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने मामले का खुलासा किया तो सब दंग रह गए।

ये वारदात पूर्णिया के अमौर थाना इलाके की है। यहाँ के हरिपुर वार्ड नंबर 5 में 28 दिसंबर की सुबह 15 साल की किशोरी का शव पेड़ से लटका मिला था। ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर के मुताबिक, परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी। अब पूरे मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने मोहम्मद तैय्यब और नाजिर खान को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तैय्यब अपने दोस्त के साथ 27 दिसंबर को दिल्ली से पूर्णिया आया था। उसने रात में किशोरी को मिलने के लिए खेतों में बुलाया। वहीं, उसने किशोरी की हत्या कर दी और शव को पेड़ पर लटका दिया। इसके अगले दिन वो वापस दिल्ली चला आया। लोगों को उसकी मौजूदगी की भनक तक नहीं लगी थी।

हालाँकि, परिजनों ने लड़की की आत्महत्या के आरोप को नकार दिया और पुलिस को दी गई शिकायत में उसने गाँव के ही मोहम्मद तैय्यब के खिलाफ आरोप लगाया। शिकायत के आधार पर जब तैय्यब के मोबाइल लोकेशन की जाँच की गई, तब उसका लोकेशन पूर्णिया में ही पाया गया। पुलिस ने तैय्यब और नाजिर को गिरफ्तार कर पूछताछ की, तब जाकर हत्या के मामले का खुलासा हो पाया।

निकाह के लिए दबाव डाल रही थी, इसलिए हत्या कर दी

पुलिस से पूछताछ में तैय्यब ने बताया कि नाबालिग लड़की उस पर निकाह करने का दबाव डाला रही थी। ऐसे में उसने रास्ते से हटाने के लिए पूरी योजना बनाई और उसकी हत्या कर दी। उसने लड़की का गला रेता था। इसकी वजह से आत्महत्या की थ्यौरी किसी के गले नहीं उतरी थी। पुलिस का कहना है कि लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ है या नहीं, इसकी जाँच की जा रही है।

हमारा धर्म सनातन है… ‘695’ में राम मंदिर के संघर्ष की गाथा, प्राण प्रतिष्ठा से पहले रिलीज होगी अरुण गोविल और मनोज जोशी की फिल्म

22 जनवरी, 2024 को निर्माणाधीन राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का समारोह होना है। उससे पहले देशवासी इस मंदिर के संघर्ष की गाथा को 19 जनवरी, 2024 को रिलीज हो रही फिल्म ‘695’ में देख पाएँगे। इस फिल्म में टीवी के पर्दे पर राम के चरित्र को जीवंत कर देने वाले अरुण गोविल सहित सिने जगत के कई अन्य नामी कलाकार भी है।

इस फिल्म का प्रीमियर शो 12 जनवरी, 2024 को दिल्ली में हुआ। राम जन्मभूमि के संघर्षों की तारीखों की वजह से फिल्म का नाम ‘695’ सुर्खियों में है। ये फिल्म दरअसल अयोध्या में राम मंदिर के ऐतिहासिक निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने वाले अटूट संघर्ष और बलिदानों की 500 साल की गाथा है।

राम जन्मभूमि आंदोलन की तीन अहम घटनाओं को जोड़कर फिल्म का नाम रखा गया है। इनमें पहली घटना बाबरी ढाँचा ध्वस्त करने की 6 दिसंबर 1992 की तारीख है तो दूसरी घटना सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्म भूमि को लेकर बड़े फैसले की तारीख 9 नवंबर 2019 की है। तीसरी घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंदिर का शिलान्यास की तारीख 5 अगस्त, 2020 की है। तब फिल्म का टाइटल ‘695’ बना।

फिल्म ऐतिहासिक संघर्ष को पर्दे पर उतारने का निर्देशक रजनीश बेरी और योगेश भारद्वाज बेरी की एक कोशिश है। ‘शादानी फिल्मस’ के बैनर तले बनी ढाई घंटे की ये फिल्म सदियों पुराने सपने को वास्तविकता में साकार होने की कहानी पर्दे पर जीवंत करती है।

इस फिल्म की एक वीडियो क्लिप फिल्म वकील बने मनोज जोशी ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर शेयर की है। इसके साथ उन्होंने लिखा है, “19 जनवरी को आ रही है श्री राम जन्मभूमि के संघर्ष पर आधारित मेरी फ़िल्म ‘695’। यह केवल एक फ़िल्म नही है, बल्कि हमारी आस्था और स्वाभिमान की रक्षा के लिए दिए बलिदान की गाथा है, जिसे चलचित्र में पिरोने का पुनीत प्रयास हुआ है। ज़रूर देखिएगा!”

फिल्म की इस क्लिप में सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट का विजुएल है। इसके बाद वकील के तौर पर मनोज जोशी स्क्रीन पर नजर आते हैं। उसके बाद डॉयलाग्स आता है, “हमने न कभी आक्रमण किया, न किसी की धरती छीनी, न किसी की सभ्यता संहार किया, हमारा धर्म सनातन है”

फिल्म को लेकर रामानंद सागर की टेलीविजन सीरीज रामायण में राम का किरदार निभा चुके अभिनेता अरुण गोविल इस फिल्म में साधु बाबा अभिराम दास के किरदार में नजर आएँगे जो अपना पूरा जीवन राम और राम मंदिर बनने के इंतजार में बिता देते हैं।

अरुण गोविल कहते हैं, “लाखों लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान रखने वाली उस कालजयी कहानी को फिर से देखना सम्मान की बात है। ‘695’ सिर्फ एक फिल्म नहीं है; यह हमारी सांस्कृतिक विरासत और आस्था की जीत का उत्सव है।”

वो आगे कहते हैं कि फिल्म को लेकर वो कहते हैं कि यह एक अच्छी फिल्म है और हमें खुशी है कि यह सही समय पर रिलीज हो रही है। फिल्म अच्छी बनी है और हमें इस फिल्म के शीर्षक और उसके अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। गोविल ने कहा, “500 वर्षों के बाद मुझे लगता है कि राम भगवान हमारे घर आ रहे हैं। मैं 22 तारीख को अयोध्या जा रहा हूँ। मैं बस सरलता से आगे बढ़ता रहूँगा।”

फिल्म को आदेश के अर्जुन, योगेश भारद्वाज और श्याम चावला ने लिखा है। ये अरुण गोविल, मनोज जोशी के अलावा गोविंद नामदेव, मुकेश तिवारी, अशोक समर्थ, केके रैना, शैलेंद्र श्रीवास्तव, दयाशंकर पांडे, विकाश महंते, सुशीलाजीत साहनी और गरिमा अग्रवाल के अभिनय से सजी है।

पूर्वजों के इस संघर्ष और दर्द को समाज के सामने बताने के लिए खूबसूरत गीत आशीष पंडित ने लिखे तो संगीत निर्देशन वेद शर्मा का है। दलेर मेहंदी का गाया ‘एलान कर’ गाना फिल्म का एक अहम हिस्सा है। इसे लेकर मेहंदी ने कहा था, ”जब से यह गाना मेरे पास आया है, तब से मैं इसे लेकर काफी रोमांचित हूं। फिल्म की कहानी ने सचमुच मेरे दिल को छू लिया। समाज को हमारे देश के इतिहास और हमारे द्वारा किए गए संघर्ष पर नजर रखने की जरूरत है। यह ट्रैक इस फिल्म के बिंदुओं को जोड़ता है और मुझे इसका हिस्सा बनकर खुशी हो रही है। मैं यह देखने के लिए इंतजार नहीं कर सकता कि क्या दर्शकों को यह गाना उतना ही पसंद आएगा जितना हमने इसे बनाते समय दिया था।”

‘यहाँ तभी लौटूँगा जब बनने लगेगा राम मंदिर’: 32 साल पहले अयोध्या पहुँचे नरेंद्र मोदी ने ली थी शपथ, रामलला को एकटक देखते रहे थे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक शपथ को 32 वर्ष पूरे हो गए हैं और अब वह शपथ भी पूरी हो गई है। यह शपथ अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण से जुड़ी हुई है, जो उन्होंने 14 जनवरी 1991 को ली थी। तब संघ के सामान्य कार्यकर्ता रहे नरेन्द्र मोदी ने शपथ ली थी कि वह अयोध्या में जन्मभूमि पर तभी लौटेंगे, जब यहाँ राम मंदिर का निर्माण हो जाएगा।

अब अयोध्या में भगवान राम का मंदिर का निर्माण कार्य जारी है और 22 जनवरी 2024 में इसके गर्भगृह पीएम मोदी की उपस्थिति में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस मंदिर की आधारशिला भी प्रधानमंत्री मोदी ने ही रखी थी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन दशक पुराना शपथ पूरा हो रहा है।

कैसे पहुँचे मोदी अयोध्या, क्या थी शपथ?

1991 का साल अंत पर था और दिसम्बर का महीना आ चुका था। कश्मीर में इस्लामी आतंकवादी तांडव मचा रहे थे। यहाँ से कश्मीरी हिंदुओं को भागना पड़ा था। कश्मीर के अधिकांश हिस्से में आतंकवादी खुलेआम घूमते थे। इसी दौरान भाजपा के बड़े नेता मुरली मनोहर जोशी ने तय किया कि वह कन्याकुमारी से कश्मीर तक एकता यात्रा निकालेंगे और श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराएँगे। इस यात्रा की प्रबन्धन की जिम्मेदारी तब युवा नरेन्द्र मोदी को दी गई।

नरेन्द्र मोदी के प्रबन्धन के अंतर्गत यह यात्रा 11 दिसम्बर 1991 को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से निकली। इसके बाद यह यात्रा दक्षिण के राज्यों से होते हुए 14 जनवरी 1992 को उत्तर प्रदेश में अयोध्या पहुँची। यहाँ यात्रा में शामिल नेताओं ने राम जन्मभूमि पर दर्शन पूजन किए। तब बाबरी ढाँचा नहीं गिरा था। इस यात्रा के एक वर्ष पहले ही यहाँ कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाई गई थीं। इसलिए यहाँ का माहौल भी तनावपूर्ण था।

अयोध्या में मुरली मनोहर जोशी के साथ नरेन्द्र मोदी
अयोध्या में मुरली मनोहर जोशी के साथ नरेन्द्र मोदी

युवा नरेन्द्र मोदी यहाँ जब जन्मभूमि के दर्शन को पहुँचे तो वह ठिठक गए और टेंट में बैठे भगवान रामलला को काफी देर तक एकटक देखते रहे। अयोध्या में फोटो जर्नलिस्ट रहे महेंद्र त्रिपाठी ने एबीपी न्यूज को बताया कि इस दौरान उन्होंने युवा नरेन्द्र मोदी से बातचीत की थी। उनका कहना है कि उस दौरान नरेन्द्र मोदी भावुक हो गए थे।

महेंद्र त्रिपाठी ने जब नरेंद्र मोदी से उस दौरान पूछा कि वह अब राम जन्मभूमि पर कब वापस आएँगे तो नरेन्द्र मोदी का उत्तर था कि वे अब तभी वापस आएँगे, जब यहाँ मंदिर का निर्माण होगा। मुरली मनोहर जोशी के साथ उनकी अयोध्या में राम जन्मभूमि पर दर्शन करने की कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

जब तक राम मंदिर बनने का मौक़ा नहीं आया, मोदी ने रामजन्मभूमि में कदम नहीं रखा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अयोध्या में 1992 में जो प्रण लेकर गए थे, सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर का रास्ता प्रशस्त होने तक निभाते रहे थे। वह 5 अगस्त 2020 को अयोध्या तब लौटे, जब उन्हें उन्होंने राम मंदिर की आधारशिला रखने के लिए बुलाया गया। इस बीच वे अयोध्या तो कई बार आए, लेकिन रामजन्मभूमि नहीं गए। इस प्रकार उन्होंने अपनी शपथ पूरी की।

‘महँगा पड़ेगा राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में जाना’: घर-वापसी कराने वाले महंत को धमकी, कहा – ‘तुम जनजातीय समाज को भड़का रहे हो, अंत निकट है’

मध्य प्रदेश के निमाड़ सरकार महंत जगद्गुरु रामानंदाचार्य राम राजेश्वराचार्य (माउली सरकार) को जान से मारने की धमकी दी गई है। उनको यह धमकी आगामी 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में होने वाली राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में जाने को लेकर मिली है।

जानकारी के अनुसार, उन को यह धमकी एक पत्र के माध्यम से दी गई है। पत्र भेजने वाले ने अपनी पहचान नहीं जाहिर की है। यह पत्र उन्हें महाराष्ट्र के अमरावती में स्थित विदर्भ पीठ में स्थित कोडन्यपुर आश्रम में मिला है। कोई यहाँ यह पत्र एक लिफाफे में छोड़ कर गया था। इसके अंदर से धमकी भरा पत्र मिला।

पत्र में कहा गया है कि उन्हें राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में जाना महँगा पड़ेगा। पत्र में कहा गया है कि माउली सरकार जनजातीय समाज के हिन्दुओं को भड़काने का काम कर रहे हैं, इसके लिए उनका अंत निकट है। यह भी कहा गया है कि वह बहुत अयोध्या अयोध्या कर रहे हैं।

हालाँकि, संत माउली सरकार ने इस पत्र पर कहा है कि वह ऐसी धमकियों से नहीं डरते हैं और उनका धर्मकार्य जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “कल मुझे किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा पत्र भेजकर मारने की धमकी दी गई है। ईश्वर के सौंपे काम को मैं पूरी जिम्मेदारी से करता हूँ। ईश्वर ने मुझे धर्मपत काम करने के लिए चुना है, इसमें अनेकों चुनौतियाँ आती हैं। मैं ऐसी चुनौतियों से नहीं डरता हूँ।”

उन्होंने 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या जाने को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा, “500 वर्ष के संघर्ष के फलस्वरूप 22 जनवरी को भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। इसका हिस्सा बनने का मुझे मौका मिला है जिससे मैं काफी खुश हूँ। मैं हिन्दू हूँ इस पर मुझे गर्व है।” उनका कहना है कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में वनवासी समुदाय के घर-वापसी का काम किया है जो ईश्वर का कार्य है और वह इसके लिए किसी से डरने वाले नहीं हैं। उन्हें पुलिस सुरक्षा प्रदान करने की माँग भी उनके अनुयायियों ने उठाई है।

बिहार के महागबंधन में ठीक नहीं है सब कुछ: तेजस्वी के सामने CM नीतीश ने लालू-राबड़ी शासन की गिनवाई खामियाँ, हाशिए पर दिखे DyCM

बिहार में जदयू और राजद के गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसके संकेत लगातार मिल रहे हैं। बिहार के मुखिया नीतीश कुमार राज्य की गठबंधन सरकार में शामिल राजद को सरकार के किसी भी काम का क्रेडिट देने से परहेज कर रहे हैं। बड़े कार्यक्रमों के पोस्टरों से तेजस्वी यादव गायब हैं। उनमें सिर्फ नीतीश कुमार ही दिख रहे हैं। इतना ही नहीं, नीतीश कुमार ने अब लालू-राबड़ी के दौर की सरकार की बखिया उधेड़ी है, वह भी तेजस्वी यादव के सामने।

बिहार की राजधानी पटना के गाँधी मैदान में 13 जनवरी 2024 को शिक्षकों की नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने 1990 से लेकर 2005 तक बिहार की सत्ता पर काबिज रहे लालू यादव और राबड़ी देवी सरकार की कमियाँ गिनवाई। इस कार्यक्रम में बिहार में शिक्षक भर्ती में सफल हुए 96 हजार से अधिक शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिया जाना था।

उन्होंने लालू और राबड़ी के नेतृत्व वाली सरकार की विफलताओं को गिनवाते हुए कहा कि जब वह 2005 में मुख्यमंत्री बने थे तब बिहार में 12.5% बच्चे स्कूल नहीं जाते थे। इसके लिए उन्होंने टोला सेवक और तालीमी मरकज की नियुक्ति की। बिहार सरकार द्वारा नियुक्त ये लोग स्कूल ना जाने वाले बच्चों के अभिभावकों से बात करके उन्हें स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करते थे।

नीतीश कुमार ने इस बयान के जरिए तेजस्वी के सामने ही उनकी पार्टी की सरकार की विफलता गिनाने की कोशिश की। वहीं, इस कार्यक्रम के लिए लगाए पोस्टरों में भी तेजस्वी तेजस्वी यादव की फोटो नदारद रही। यहाँ तक कि राज्य के शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य कर रहे राजद विधायक चन्द्रशेखर यादव का नाम तक नहीं लिखा गया।

पोस्टर के ऊपर स्लोगन में सिर्फ नीतीश कुमार का ही जिक्र किया गया था। स्लोगन में लिखा था, “रोजगार मतलब नीतीश सरकार।” मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जो फोटो इस आयोजन की साझा की थीं, उनमें भी तेजस्वी यादव हाशिए में दिख रहे हैं। इस फोटो में सारा फोकस नीतीश पर ही है।

पोस्टर में नीतीश ही नितीश, तेजस्वी गायब
पोस्टर में नीतीश ही नीतीश, तेजस्वी गायब

गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों से तेजस्वी यादव बिहार में हुई शिक्षक भर्ती का खूब प्रचार प्रसार कर रहे हैं। राजद समर्थक इसका सारा क्रेडिट तेजस्वी को देने में लगे हैं। तेजस्वी भी शिक्षा और पुलिस विभाग में हुई भर्तियों को गठबंधन सरकार की सफलता के रूप में पेश कर रहे थे। हालाँकि, नीतीश कुमार ने अपने पोस्टर बैनर में मात्र अपना ही नाम छपवाया है।

उधर INDI गठबंधन के तहत सीट बँटवारा भी दोनों पार्टियों के बीच समस्या बन सकता है। बिहार की कुल 42 सीट में से कॉन्ग्रेस 10 सीट चाहती है, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी भी कुछ सीटों पर दावा कर रही है। नीतीश कुमार अपनी 16 सीट को बनाए रखना चाहेंगे। राजद भी इसी संख्या में सीट चाहती है। ऐसे में इन पार्टियों के बीच विवाद की स्थिति जल्दी नहीं सुलझने वाली है।

लोकसभा चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस को एक और बड़ा झटका: मिलिंद देवड़ा ने पार्टी ने नाता तोड़ा, कभी राहुल गाँधी के थे बेहद करीबी

महाराष्ट्र के वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा ने पार्टी छोड़ने का ऐलान आधिकारिक रूप से कर दिया है। इस बात की अटकलें पहले से लगाई जा रही थीं। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर यह जानकारी साझा की है। मिलिंद अब ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद और आरपीएन सिंह वाली कतार में शामिल हो गए हैं।

मिलिंद ने एक्स पर लिखा, “आज मेरी राजनीतिक यात्रा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत हो गया है। मैंने अपने परिवार की पार्टी के साथ 55 वर्ष पुराने रिश्ते को खत्म करते हुए कॉन्ग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। मैं वर्षों से लगातार समर्थन के लिए सभी साथी नेताओं, सहकर्मियों और कार्यकर्ताओं का आभारी हूँ।”

47 वर्षीय देवड़ा UPA-2 सरकार में संचार और IT मामलों के राज्यमंत्री थे। उनके पास जहाजरानी विभाग भी था। वह UPA-2 के सबसे युवा मंत्रियों में से एक थे। साल 2011 में जब उन्हें मंत्री बनाया गया था, तब उनकी आयु मात्र 35 वर्ष थी। वह राहुल गाँधी की टीम के महत्वपूर्ण सदस्य माने जाते थे।

मिलिंद देवड़ा का कॉन्ग्रेस से काफी पुराना रिश्ता रहा है। उनके पिता मुरली देवड़ा भी कॉन्ग्रेस से कई बार सांसद रहे थे। मिलिंद के पिता मुरली देवड़ा UPA-1 और 2 सरकार में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मामलों के कैबिनेट मंत्री थे। मिलिंद के जाने से पार्टी को सबसे बड़ा नुकसान महाराष्ट्र और विशेष कर मुंबई में उठाना पड़ेगा।

मिलिंद और उनके पिता मुंबई दक्षिण सीट से सांसद रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, वह 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भी यही सीट माँग रहे थे। हालाँकि, अभी इस सीट पर शिवसेना (उद्धव) के प्रमोद सावंत सांसद हैं। इसलिए यह सीट, गठबंधन के बँटवारे में शिवसेना को जानी थी।

मिलिंद देवड़ा, मुंबई की कारोबारी बिरादरी में कॉन्ग्रेस के लिए काफी उपयोगी थे। उनका परिवार अम्बानी, महिंद्रा और मुंबई के अन्य बड़े कारोबारी समूहों का नजदीकी रहा है और इसका फायदा पार्टी को भी मिला है। देवड़ा परिवार गाँधी परिवार का भी काफी करीबी रहा है।

मिलिंद 2009 से लेकर 2014 तक चली UPA-2 सरकार में राहुल के करीबी कुछ नेताओं में माने जाते थे। हालाँकि, राहुल और मिलिंद के बीच 2014 के बाद से खटपट की खबरें आनी चालू हो गई थीं। इसके बाद कई मौकों पर देखा गया कि मिलिंद ने कॉन्ग्रेस की पार्टी लाइन छोड़ कर कुछ प्रश्न उठाए।

साल 2014 की हार के बाद मिलिंद ने कहा था कि राहुल गाँधी को सलाह देने वाले ऐसे लोग हैं, जिन्हें चुनाव का कोई अनुभव नहीं है। उनका कहना था कि उनको सलाह देने के साथ सलाह लेने वाले भी जिम्मेदार माने जाने चाहिए। इसके बाद मिलिंद देवड़ा को कॉन्ग्रेस में हाशिए पर धकेल दिया गया था।

अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मिलिंद देवड़ा शिवसेना (शिंदे) में शामिल हो सकते हैं। हालाँकि, उन्होंने 13 जनवरी 2023 को इन खबरों को गलत बताया था। उन्होंने कहा था कि यह सब कुछ अफवाह है। यह बात देखने वाली होगी कि वह कॉन्ग्रेस के अपने पुराने साथियों की तरह कोई कदम उठाते हैं या नहीं।

हमीरपुर में लव जेहाद: शादीशुदा हिंदू महिला को भगा ले गया अनीस खान, धर्म परिवर्तन कराकर किया निकाह, 2 साल के बच्चे के साथ भटक रहा पति

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में लव जेहाद का एक मामला सामने आया है। यहाँ शादीशुदा एक हिंदू महिला को बीएससी का छात्र अनीस खान भगा ले गया। इसके बाद महिला का धर्म परिवर्तन कराकर उसका निकाह करा दिया गया। महिला का लगभग दो साल का एक बेटा भी है, जिसे उसने घर पर ही छोड़ दिया है। महिला का पति इसको लेकर गहरे तनाव में हैं।

बता दें कि यह महिला दूसरी बार घर से भागी है। महिला पहली बार अप्रैल 2023 में भागी थी, तब महिला थाना के दबाव में आरोपितों ने उसे वापस भेज दिया था। हालाँकि, महिला दोबारा भाग गई। अब उस महिला ने धर्मांतरण करके निकाह कर लिया है। इसका वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

मामला बिंवार थाना इलाके का है। आकांक्षा नाम की इस महिला के पति मनीष गुप्ता की शिकायत पर पुलिस ने 6 दिसंबर 2023 को एफआईआर दर्ज की थी। तब से एक माह से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं। इस मामले में पीड़ित द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

अकांक्षा के साथ अनीस खान और धर्म परिवर्तन कराने वाला मौलवी मुश्ताक (बीच में)

ऑपइंडिया से बातचीत में मनीष गुप्ता ने कहा, “मेरी पत्नी अकांक्षा गुप्ता पहली बार अनीस के साथ अप्रैल माह में भागी थी। वो अपने साथ स्त्री धन और 12 हजार रुपए नकद भी लेकर भागी थी। तब उसने बिंवार थाना में संपर्क किया था और शिकायत पत्र दिया था। उस समय महिला पुलिस थाना के हस्तक्षेप के बाद वो वापस आ गई थी। गहने भी बरामद हो गए थे।”

मनीष ने आगे बताया, “घर लौटने के 16-17 दिन बाद अप्रैल महीने में ही वो दूसरी बार फरार हो गई। इस बीच 27 नवंबर को मेरी पत्नी का धर्म परिवर्तन करा दिया गया। उसका धर्म परिवर्तन छानी बुजुर्ग के रहने वाले मुश्ताक नाम के मौलवी ने कराया था। मैंने फिर से पुलिस में शिकायत दी, लेकिन अभी तक मेरी पत्नी को नहीं ढूँढा जा सका है।”

मनीष ने कहा कि अचानक उनकी पत्नी का मुस्लिम रीति-रिवाज से निकाह कराए जाने का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें आरोपित अनीस खान भी दिख रहा है। वीडियो में मौलाना मुश्ताक उनकी पत्नी का धर्म परिवर्तन कराकर अनीस से निकाह कराता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है और ना ही उनकी पत्नी बरामद हुई है।

अपनी पीड़ा बताते हुए मनीष गुप्ता भर्राए गले से कहते हैं, “अगर अकांक्षा को जाना ही था तो तलाक देकर चली जाती। मेरा और मेरे बच्चे के साथ ही मेरे परिवार को बर्बाद कर दिया। वो धर्म परिवर्तन करके निकाह कर चुकी है। वीडियो वायरल हो रहा है। बताइए, मैं कहाँ जाऊँ? किसे मुँह दिखाऊँ?”

मनीष का कहना है कि अनीस खान उनके घर के पास रहता था। उसकी चचेरी बहन और एक भाई भी उसके साथ रहते थे। उन्होंने कहा, “इस प्रकरण में अनीस की बहन की संलिप्तता ज्यादा है। उसी ने मेरी पत्नी का ब्रेनवॉश किया है।”

इस संबंध में बिंवार थाने के एसआई गौरव चौबे से भी ऑपइंडिया ने बात की। एसआई गौरव चौबे ने कहा कि पुलिस को जैसे ही शिकायत मिली, एफआईआर दर्ज कर ली गई और गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने 300 किमी दूर तक छापेमारी की है, लेकिन अभी तक आरोपित गिरफ्त में नहीं सके हैं।

गौरव चौबे ने कहा कि पुलिस जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर लेगी। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बिंवार थाने के प्रभारी राकेश सरोज का बयान भी छापा गया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि ‘महिला अपनी मर्जी से गई थी’। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपित को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सारे फोन बंद हैं।