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प्रशांत वर्मा से प्रशिक्षण लें ‘आदिपुरुष’ वाले: ‘हनुमान’ फिल्म में दिखती है बनाने वालों की श्रद्धा, सैकड़ों करोड़ फूँक कर जो नहीं हो पाया वो कम बजट में कर दिखाया

बॉक्स ऑफिस पर एक नई फिल्म ने दस्तक दी है – ‘हनुमान’। भारत में शायद ही कोई होगा, या विश्व में शायद ही कोई हिन्दू होगा जो इस नाम से परिचित न हो। ‘रामायण’ सीरियल के बाद ये बच्चों के भी पसंदीदा किरदार हैं। ‘हनुमान’ केवल एक नाम मात्र नहीं है, बल्कि ईश्वर भक्ति, निश्छल प्रेम, चातुर्य और युद्धकला-निपुणता के मिश्रण से जो भी शब्द बनते होंगे उनका पर्यायवाची है। अब ‘HanuMan’ फिल्म के माध्यम से एक बार फिर ये प्रयास किया गया है कि लोग इस नाम को जानें, फिल्म ने लोगों को भगवान हनुमान को लेकर अपने मनोभाव को जागृत करने का मौका दिया है।

यहाँ हम फिल्म की तकनीकी या परंपरागत समीक्षा नहीं कर रहे, क्योंकि ये कई समीक्षक कर चुके हैं। संक्षेप में फिल्म के बारे में जानें तो मूल रूप से तेलुगू में बनी इस फिल्म के निर्देशक प्रशांत वर्मा है। बतौर डायरेक्टर ये उनकी चौथी ही फिल्म है। 2018 में ‘Awe’ नामक साइकोलॉजिकल थ्रिलर से फीचर फिल्मों में डेब्यू करने वाले प्रशांत वर्मा ने तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री की पहली जॉम्बी मूवी ‘जॉम्बी रेड्डी’ (2021) भी बनाई है। ‘हनुमान’ को पहली तेलुगू सुपरहीरो फिल्म के रूप में प्रचारित किया गया है।

‘हनुमान’: प्रशांत वर्मा से प्रशिक्षण लें ‘आदिपुरुष’ वाले

वहीं फिल्म में मुख्य किरदार निभाया है तेजा सज्जा ने, जो प्रशांत वर्मा की जॉम्बी वाली फिल्म में भी लीड रोल में थे। बतौर मुख्य अभिनेता ये उनकी पहली ही फिल्म थी। हालाँकि, बचपन में ही अभिनय के क्षेत्र में कदम रख चुके तेजा सज्जा इससे पहले कई फिल्मों में काम कर चुके थे। तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े अभिनेताओं के साथ काम करने का अनुभव उनके पास है। प्रशांत वर्मा द्वारा निर्देशित ही Sci-Fi रोमांटिक फिल्म ‘अद्भुतम्’ (2021) में भी उन्होंने लीड रल निभाया था।

34 वर्षीय निर्देशक और 29 वर्षीय अभिनेता की ये जोड़ी अब ‘HanuMan’ लेकर आई है। चूँकि दोनों साथ में पहले सफल फ़िल्में दे चुके हैं, उनकी ये बॉन्डिंग ‘हनुमान’ में भी दिखती है। शुरू में तेजा सज्जा कद-काठी के हिसाब से सुपरहेरो फिल्म के लायक नहीं लगते, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती जाती है उनका किरदार और विश्वसनीय होता चला जाता है। ‘सुपरहीरो’ वाले अवतार में ढलने के बावजूद वो एक आम आदमी होता है – उसका एक दोस्त, एक बहन, एक प्रेमिका और एक गाँव होता है।

जहाँ तक फिल्म के निर्देशन की बात है, प्रशांत वर्मा का तरीका तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री में मास-मसाला फ़िल्में बनाने वालों और गाँव के सेटअप में क्लासिक फ़िल्में बनाने वालों के मिश्रण जैसा है। वो एक गाँव की खूबसूरती को अच्छे से उकेरते हैं, चीजों को सिंपल रखने का प्रयास करते हैं और गानों का दृश्य के हिसाब से सही इस्तेमाल करते हैं। फिल्म एक दृश्य में ‘कार्तिकेय 2’ के उस दृश्य की याद दिलाती है जिसमें अनुपम खेर एक नेत्रहीन प्रोफेसर के रूप में भगवान श्रीकृष्ण की खूबियों को समझाते हैं।

कहानी की बात करें तो इसे भी पेचीदा नहीं रखा गया है, जो इसे बच्चों के देखने वाली या परिवार संग देखने वाली एक अच्छी फिल्म बनाता है। गाँव में हो रही राजनीति, हीरो और विलेन के साथ एक-एक कॉमेडियन, ताकतवर द्वारा कमजोरों का शोषण, प्रेमिका की रक्षा करता प्रेमी – ये सब साउथ की फिल्मों में हम पहली बार नहीं देख रहे। फिर, इस फिल्म में नया क्या है? तो इसका सीधा सा जवाब है, फिल्म में जो भी नया है वो फिल्म के नाम में ही है – हनुमान।

ऐसा नहीं है कि फिल्म में हनुमान जी का इस्तेमाल सिर्फ दर्शकों की भावनाओं को निचोड़ कर निकालने के लिए किया गया है। ऐसा नहीं है, फिल्म में शुरू से अंत तक ये नाम आपको सुनने को मिलता तो है, लेकिन जब भी ये नाम आता है तब दिखता है कि फिल्म बनाने वालों के मन में हनुमान जी के लिए कितनी श्रद्धा है, कितना सम्मान है। ये वही चीज है, जो ‘आदिपुरुष’ बनाने वालों के भीतर गायब थी। ‘आदिपुरुष’ के निर्माता-निर्देशकों को प्रशांत वर्मा से प्रशिक्षण लेना चाहिए।

हनुमान – सिर्फ एक नाम नहीं, श्रद्धा और सम्मान का विषय है

ये प्रशांत वर्मा की कला ही है कि वो एक बंदर और एक चिड़िया को भी एक किरदार के रूप में इस्तेमाल कर लेते हैं, वो भी पूरी फिल्म में। ये प्रकृति के साथ मानवीय समाज की तारतम्यता को समझाने और इसे प्रदर्शित करने का एक तरीका है, जिसे उन्होंने उपयोग में लाया है। हनुमान जी के मुख से जब ‘राम’ शब्द निकलता है तब आपके भीतर एक अलग ही अनुभूति का संचार होता है। इतनी शक्तिशाली आवाज़, इतनी ओजस्वी ऊर्जा, वो आवाज़ सीधा हृदय के भीतर ऐसे जाती है जैसे कोई सुपरसोनिक साउंड हो और हम उसे सुनने की क्षमता रखते हों।

‘हनुमान’ फिल्म की सिनेमाटोग्राफी और VFX इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो इसमें चार चाँद लगाता है। VFX कहीं भी नकली नहीं लगता। इसका कारण – जितनी ज़रूरत है, उतनी ही चादर रखी गई है। एक कम बजट की फिल्म को सैकड़ों करोड़ रुपए फूँक कर बनाई जाने वाली फिल्मों से बेहतर बना दिया गया है। नदी-झील-पहाड़ के दृश्य हों या फिर पानी के भीतर का दृश्य, गुफा के भीतर का दृश्य हो या फिर जंगल का, फिल्म प्राकृतिक सुंदरता को रहस्यों के महासागर के रूप में दिखाती है।

ये उन विरले फिल्मों में से एक है जहाँ सब कुछ सटीक बैठता है और पार्श्व संगीत उन सभी सटीक चीजों का भरपूर साथ देता है। हिंदी डबिंग बहुत अच्छी की है। गीत-संगीत साधारण हैं लेकिन फिल्म में कहीं भी ठूँसे हुए से नहीं लगते। पार्ट-2 के लिए अंत में काफी सस्पेंस क्रिएट किया गया है और इसका इशारा भी मिल जाता है कि अगला हिस्सा कहीं अधिक बजट वाला, अधिक भव्य और ज़्यादा एक्शन से भरपूर होने वाला है। आज के ज़माने में असुरों और मानवों का युद्ध – अगर सब कुछ पार्ट-1 जैसा ही अच्छा बन पड़ा तो अगली फिल्म और भी तगड़ी बनेगी।

बॉलीवुड से सवाल पूछने का भी समय

‘हनुमान’ इसीलिए भी देखिए ताकि आप ये सवाल पूछ सकें कि संसाधन और प्रतिभा होने के बावजूद बॉलीवुड में इस तरह की फिल्म क्यों नहीं बनाई गई? क्या बॉलीवुड ने बैटमैन, सुपरमैन और स्पाइडरमैन की आभा में मगन होकर अपने ही एक ऐतिहासिक किरदार को इस लायक नहीं समझा कि उस पर फिल्म बना कर दुनिया भर में अपनी संस्कृति का डंका बजाया जाए, या फिर उसे डर था कि इससे एक वर्ग विशेष के भीतर बॉलीवुड को लेकर नाराज़गी फैल जाएगी?

यहाँ मैं उन फिक्शनल सुपरहीरोज से हनुमान जी की तुलना नहीं कर रहा और ये होनी भी नहीं चाहिए, लेकिन ये सवाल पूछा जाना चाहिए कि भारत में जिन चीजों को ‘Mythology’ कह-कह कर ख़ारिज किया जाता रहा, उन्हीं से प्रेरित होकर विदेश में हजारों करोड़ रुपए कमाने वाली फ़िल्में कैसे बन गईं? क्या ‘हनुमान’ जैसी फिल्म बॉलीवुड में इसीलिए भी नहीं बन सकती क्योंकि इसमें ‘अच्छा मुसलमान’ वाला किरदार घुसाने की कोई गुंजाइश नहीं है?

आजकल रील्स का ज़माना है, जो स्क्रीन पर दिखता है वही चर्चा में होता है। जब बच्चे हनुमान जी से संबंधित कुछ नहीं देखेंगे ही नहीं तो हमारी अगली पीढ़ी पौराणिक इतिहास के एक पूरे के पूरे अध्याय के ज्ञान से वंचित रह जाएगी। जब ऐसी फ़िल्में आएँगी, बच्चे उसे देखेंगे, उसके क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल होंगे, बच्चे उन नामों के बारे में सर्च कर के इंटरनेट पर पढ़ेंगे – तभी तो उन्हें रामायण और इसके किरदारों के बारे में पता चलेगा। ‘कार्तिकेय 2’ और ‘हनुमान’ तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री का इसी दिशा में किया गया एक प्रयास साबित हो सकता है।

असल में भारत में समृद्ध पौराणिक कथाओं के मायने हैं, इनके अर्थ हैं, सामाजिक सन्देश हैं और भविष्य को लेकर इनमें निर्देश हैं। इस समुद्र को जितना मथा जाएगा, उतना ही अमृत निकलेगा। अफ़सोस कि हमारी फिल्म इंडस्ट्री के लोगों ने पहले इसे इस लायक समझा ही नहीं। क्लब्स, पार्टियाँ, बिकनी, आइटम सॉन्ग्स, अश्लील कॉमेडी और परिवार विरोधी भावनाओं से सनी बॉलीवुड फिल्मों ने पाश्चात्य संस्कृति के नक़ल की चक्कर में अपनी शकल तो बिगाड़ी ही, कई पीढ़ियों को भी अपने ही देश, इतिहास और संस्कृति को लेकर हीन भावना से भर दिया।

वो बुलाते तो हैं, हम जाते नहीं… ED संग दिल्ली CM की आँख मिचौली, चौथी बार निदेशालय का अरविंद केजरीवाल को समन

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रवर्तन निदेशालय (ED) के साथ आँख मिचौली खेल रहे हैं। अब ED ने सीएम केजरीवाल को दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति यानी शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शनिवार (13 जनवरी 2024) को चौथा समन जारी किया। इसमें ED ने सीएम केजरीवाल से 18 जनवरी 2024 को पेश होने के लिए कहा है।

इससे पहले ED ने अरविंद केजरीवाल को तीन बार समन जारी कर चुका है। हालाँकि, केजरीवाल एक बार भी ED के समक्ष पेश नहीं हुए। इसके पहले प्रवर्तन निदेशालय ने सीएम केजरीवाल को समन जारी कर 2 नवंबर, फिर 21 दिसंबर और फिर 3 जनवरी को पूछताछ के लिए बुलाया था। हालाँकि, वे एक बार भी ईडी के समक्ष पेश नहीं हुए।

दरअसल, 3 जनवरी 2024 की पूछताछ में सीएम केजरीवाल ने ये कहकर आने से इनकार कर दिया कि जाँच एजेंसी द्वारा उनको जारी किया समन अवैध है। उन्होंने आरोप लगाया था कि ईडी का एकमात्र मकसद उन्हें गिरफ्तार करना था। आम आदमी पार्टी ने पूछा था कि ईडी अरविंद केजरीवाल किस हैसियत से बुला रही है- आरोपित की हैसियत से या गवाह की हैसियत से।

इससे पहले दिल्ली के सीएम ने 2 नवंबर और 21 दिसंबर को भी ED सामने पेश होने से इनकार कर दिया था। पहले समन पर 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों में मशगूल होने की बात कह ईडी के सामने पेश नहीं हुए थे। दूसरे समन पर वो 10 दिवसीय विपश्यना ध्यान शिविर के लिए रवाना हो गए थे। उस दौरान केजरीवाल ने इसे ‘अवैध’ और ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया था।

केजरीवाल ने कहा था, “मैं हर कानूनी समन स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ। हालाँकि, ईडी का यह समन भी पिछले समन की तरह अवैध और राजनीति से प्रेरित है। समन वापस लिया जाए। मैंने अपना जीवन ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ बिताया है। मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।” उन्होंने कहा था कि भाजपा उन्हें लोकसभा चुनाव में प्रचार करने से रोकने के लिए गिरफ्तार करना चाहती है।

ईडी के समन को लेकर आप दावा करती रही है कि पूछताछ के बहाने एजेंसी सीएम केजरीवाल को गिरफ्तार करने की फिराक में है। दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज, आतिशी और पार्टी से राज्यसभा सासंद संदीप पाठक केजरीवाल की गिरफ्तार की आशंका जाहिर कर चुके हैं। AAP नेताओं का कहना है कि लोकसभा चुनाव प्रचार से पहले केजरीवाल को गिरफ्तार करने की साजिश है।

आम आदमी पार्टी की नेता जैस्मिन शाह का कहना है कि शराब घोटाले की जाँच बीते दो साल से जारी है, लेकिन अभी तक ईडी ने सबूत के तौर पर कुछ भी बरामद नहीं किया है। उन्होंने शराब घोटाले की जाँच को फर्जी बताया। शाह ने कहा कि इस केस में ईडी ने 500 से अधिक गवाहों से पूछताछ की है और 1,000 से अधिक छापे मारे हैं, लेकिन अब तक एक रुपया भी बरामद नहीं हुआ।

बताते चलें कि बीते साल अक्टूबर 2023 में शराब नीति से जुड़ी कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच के तहत सीएम केजरीवाल को पहला समन जारी किया गया था। दिल्ली सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करने के बाद जुलाई 2023 में इस नीति को वापस ले लिया था। CBI ने अप्रैल 2023 में केजरीवाल से पूछताछ की थी, लेकिन एजेंसी ने उन्हें आरोपित नहीं किया था।

इधर I.N.D.I. गठबंधन के अध्यक्ष बने खड़गे, उधर बिहार सरकार के पोस्टरों से गायब हुए तेजस्वी यादव: विपक्षी बैठक से दूर रहे अखिलेश-ममता

जहाँ एक तरफ मल्लिकार्जुन खड़गे को I.N.D.I. गठबंधन का अध्यक्ष बना दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ बिहार सरकार के पोस्टर से उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ही गायब कर दिए गए हैं। नीतीश कुमार को विपक्षी गठबंधन का संयोजक नहीं बनाया गया। अब मीडिया में खबर तैर रही है कि उन्होंने खुद ही ये पद ठुकरा दिया है। हालाँकि, ये सभी जानते हैं कि इतने दिनों से नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन का संयोजक बनने के लिए लगातार हाथ-पाँव मार रहे थे।

असल में बिहार की राजधानी पटना में शिक्षक नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दूसरे चरण की तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं, जिसे लेकर जगह-जगह बैनर-पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें CM नीतीश कुमार की तस्वीर तो है, लेकिन तेजस्वी यादव को गायब कर दिया गया है। जबकि सोशल मीडिया पर RJD और इसके समर्थक तेजस्वी यादव को ही बिहार में शिक्षकों की नियुक्ति का क्रेडिट देते रहे हैं। पटना में लगाए गए होर्डिंग्स में बिहार में 10 लाख नौकरियों के वादे को पूरा किए जाने का दावा किया जा रहा है।

इन पोस्टरों में ‘रोजगार का मतलब नीतीश कुमार’ लिखा है। वहीं तेजस्वी यादव का नाम ‘विशिष्ट अतिथि’ में डाल दिया गया है। जदयू नेता छोटू सिंह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सब कुछ नीतीश कुमार ही कर रहे हैं तो उनका नाम लिख कर क्या गलत किया गया है। उधर शनिवार (13 जनवरी, 2024) को I.N.D.I. गठबंधन की वर्चुअल बैठक में कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को विपक्षी गठबंधन का अध्यक्ष भी चुन लिया गया है।

हालाँकि, इस बैठक में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और TMC की मुखिया ममता बनर्जी मौजूद नहीं रहीं। उन्हें इस निर्णय के बारे में सूचित कर दिया गया है। जदयू नेता संजय झा का कहना है कि नीतीश कुमार ने संयोजक पद ठुकराते हुए किसी कॉन्ग्रेस नेता को ये पद देने की पेशकश की है। इस बैठक में सीट शेयरिंग के अलावा राहुल गाँधी की आगामी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ पर भी चर्चा हुई। शरद पवार और MK स्टालिन जैसे नेता भी इस बैठक में शामिल हुए।

गैंगस्टर की प्रेमिका, होटल मालिक संग लिव-इन: हत्या के 11 दिन बाद नहर में तैरती मिली मॉडल की लाश, जानिए कौन थी दिव्या पाहुजा

मॉडल दिव्या पाहूजा की हत्या के 11 दिन बाद उनका शव बरामद हो गया है। शव ठिकाने लगाने वाले बलराज गिल की निशानदेही पर उसे टोहना के नहर से बरामद किया गया है। वो बलराज गिल ही था, जिसने बीएमडब्ल्यू कार से दिव्या के शव को ठिकाने लगाया था और फिर विदेश जाने की फिराक में कोलकाता एयरपोर्ट तक पहुँच गया था। वहीं से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और ट्रांजिट रिमांड पर लेकर गुरुग्राम लाई।

11वें दिन मिला शव, पंजाब से बहकर हरियाणा पहुँचा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिव्या पाहूजा का शव बलराज गिल ने 3 जनवरी 2024 को पटियाला के पास भाखड़ा नहर में फेंका था। शव इतने दिनों तक बहता रहा और आखिरकार हरियाणा टोहना नहर तक आ गया था। पुलिस ने शव की तलाश के लिए पंजाब से हरियाणा तक उस रूट पर तफ्तीश की, जिसके बाद ही इस शव को बरामद किया गया है। पुलिस की 6 टीमें दिव्या का शव तलाश रही थीं।

कोलकाता में गिरफ्तार हुआ बलराज गिल

दिव्या पाहूजा की गुरुग्राम के ‘द सिटी पॉइंट होटल’ में 2 जनवरी 2024 की शाम को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसका बॉयफ्रेंड अभिजीत ही उस होटल का मालिक है। अभिजीत ने ही बलराज गिल को बुलाकर दिव्या के शव को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। मोहाली के रहने वाले बलराज ने अपने साथी रवि बंगा के साथ मिलकर शव को बीएमडब्ल्यू कार में डाला और नहर में फेंक दिया।

शव को फेंकने के बाद उन्होंने बीएमडब्ल्यू कार को पाटियाला बस स्टैंड के पास खड़ी कर वहाँ से उदयपुर फरार हो गए। उदयपुर से लौटकर दोनों ट्रेन से चंडीगढ़ से हावड़ा स्टेशन पहुँचे थे। यहाँ से दोनों अलग हो गए। बलराज विदेश भागना चाहता था। हालाँकि, पुलिस ने उसे कलकत्ता एयरपोर्ट से गिरफ्तार हो गया। वहीं, रवि बंगा अभी भी फरार है। इस मामले में अभिजीत और मेघा पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं।

हाल ही में जेल से छूटी थी दिव्या पाहूजा

दिव्या पाहूजा गुरुग्राम में मॉडल थी। वो एक गैंगस्टर संदीप गडोली से संपर्क में आ गई थी। दोनों मुंबई में थे, तभी साल 2016 में संदीप गाडोली का एनकाउंटर हो गया था। गैंगस्टर संदीप दिल्ली एनसीआर में बहुत सारे गैर-कानूनी कामों में जुटा हुआ था। वो अवैध शराब, वसूली और सट्टेबाजी जैसे काम करता था। उस पर पुलिस ने ईनाम भी रखा था। संदीप गडोली तक पुलिस दिव्या पाहूजा के जरिए ही पहुँची थी।

जानकारी के मुताबिक, इस मामले में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एनकाउंटर करने वाले पुलिस वालों के साथ ही दिव्या को भी गिरफ्तार कर लिया था। दिव्या 6 माह पहले 25 जुलाई को ही जेल से छूटी थी। इसके बाद वह जेल में बंद गैंगस्टर बिंदर गुर्जर के संपर्क में आई। बिंदर गुर्जर के कहने पर दिव्या होटल मालिक अभिजीत से मिली और फिर अभिजीत के साथ साथ लिव इन में रहने लगी।

पुलिस से पूछताछ में अभिजीत ने स्वीकार की है कि वह 27 वर्षीय दिव्या के साथ रिलेशनशिप में था। दोनों के बीच संबंध भी बने थे। इस दौरान दिव्या ने अभिजीत के साथ अंतरंग पलों का वीडियो बना लिया था और पैसों के लिए उसे ब्लैकमेल करती थी। इस ब्लैकमेल से तंग आकर अभिजीत ने होटल के कमरे में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी।

‘सुशासन बाबू’ के बिहार में ठंड से बच्चे बेहाल: एक छात्र की मौत, कई छात्र-छात्राएँ और शिक्षिकाएँ बेहोश होकर गिरीं, बेंच जलाकर मिड डे मिल पकाने का वीडियो वायरल

बिहार के सुशासन बाबू यानी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इंडी गठबंधन को जोड़ने में इस कदर मशगूल है कि उन्हें नौनिहालों की फिक्र तक नहीं है। राज्य में बच्चों के पोषण वाला मिड डे मील पकाने के लिए स्कूलों में जलावन तक का इंतजाम नहीं है। वहीं, ठंड के नाकाफी इंतजामों से छात्र और शिक्षक बेहोश हो रहे हैं। ठंड की चपेट में आने से एक दर्जन से अधिक बच्चे बीमार पड़ गए हैं।

ये वाकये बिहार की राजधानी पटना और चंपारण जिले के हैं। बात पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी से शुरू करते हैं। हम सब जानते हैं कि सरकारी स्कूलों में अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर तबके के बच्चे ही जाते हैं। मोतिहारी का चकिया नगर परिषद क्षेत्र के बौधी मंदिर का आर्दश राजकीय मध्य विद्यालय भी इससे अछूता नहीं है।

इस कड़कड़ाती ठंड में शासन-प्रशासन ने वहाँ स्कूल तो खुले रखे, लेकिन इस जानलेवा सर्दी से बच्चों को बचाने के कोई इंतजाम नहीं किए। नतीजा ये हुआ कि एक छात्र की मौत हो गई और कई छात्र बेहोश होकर गिर गए। कक्षा 6 का छात्र मनीष कुमार ठंड के प्रकोप की वजह से प्रार्थना के वक्त थरथरा कर जमीन पर गिर गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।

वहीं, मोतीहारी के ही रामगढ़वा में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चिकनी में ठंड की वजह से एक शिक्षिका स्कूल में बेहोश हो गई। गाँव वालों ने अलाव जलाकर और तेल मालिश करके उसकी जान बचाई। रामगढ़वा के ही एक अन्य स्कूल में एक छात्र ठंड लगने से बेहोश हो गया। राजकीय मध्य माध्यमिक विद्यालय घरियारीचक का 7वीं का 12 वर्षीय छात्र तसीम रजा बेहोश हो गया।

इसी तरह की कई घटनाएँ बिहार के अन्य जिलों से भी आई हैं। सीवान, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, बेगूसराय, वैशाली, बक्सर आदि के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राएँ ठंड के कारण बेहोश होकर गिर रहे हैं। बिहार में ठंड का प्रकोप बढ़ने के बावजूद सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया, जिसका परिणाम बच्चों को भुगतना पड़ा।

हालाँकि, इस तरह की घटनाओं के सामने आने के बाद बिहार सरकार की नींद अब खुली है। सरकार ने निर्देश पर जिला प्रशासन ने 16 जनवरी 2024 तक विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है। जहाँ स्कूलों में ठंड लगने से बच्चे बेहाल हैं, वहीं दूसरी तरफ छात्रों के मिड डे मील पकाने के लिए लकड़ी का इंतजाम भी नहीं है।

सोशल मीडिया पर पटना जिले के बिहटा खंड के कोरहर स्थित अपग्रेडेड मिडिल स्कूल में छात्रों के मिड डे भोजन पकाने के लिए बेंच जलाए जाने का वीडियो वायरल हुआ है। इसके बाद शिक्षा विभाग ने जाँच के आदेश दिए हैं। इस वीडियो में रसोइया छात्रों के लिए खाना पकाने के लिए स्कूल की बेंचों को जलाते नजर आ रहे हैं।

रसोइया ने इसके लिए स्कूल की शिक्षिका सविता कुमारी के सिर दोष मढ़ा है और कहा है कि उसे फँसाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, शिक्षिका ने दावा किया कि स्कूल के प्रिंसिपल के कहने पर बेंचों को जलाने का आदेश दिया गया था। दूसरी तरफ प्रिंसिपल प्रवीण कुमार रंजन ने कहा कि यह एक मानवीय भूल थी। उनके मुताबिक, रसोइये पढ़े-लिखे नहीं थे और बहुत ठंड का दिन होने की वजह से उन्होंने बेंचें जला दी।

उन्होंने आगे कहा, “शिक्षा विभाग के आदेश पर हम मिड डे मील बनाने के लिए रसोई गैस का इस्तेमाल करते हैं। उस दिन बाहर ठंड बहुत होने से रसोइयों ने लकड़ी के लिए बेंच का इस्तेमाल किया।” इस घटना पर ब्लॉक शिक्षा पदाधिकारी निवेश कुमार ने कहा कि वीडियो की जाँच की जा रही है और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

‘ममता बनर्जी, तुमने चंद मुस्लिम वोटों की खातिर…’: VHP की चेतावनी, जिन साधुओं को निर्वस्त्र कर पीटा उन्हें ही बदनाम करने में जुटी TMC

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में मकर संक्रांति स्नान के लिए गंगासागर जा रहे साधुओं को भीड़ ने निर्वस्त्र कर के पीटा। भाजपा ने इस घटना में राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) का हाथ होने की बात कही है। वहीं टीएमसी ने उन साधुओं को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि भाजपा इस पूरी घटना को गलत तरीके से पेश कर रही है, बदनाम कर रही है। TMC नेता शशि पंजा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के ये आरोप मढ़े हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा जिम्मेदारियों से भागती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने 3 साधुओं को इसीलिए पीटा क्योंकि आरोप है कि वो साधु 3 लड़कियों का अपहरण कर रहे थे। शशि पंजा ने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने वहाँ पहुँच कर उन लड़कियों को बचाया। उन्होंने कहा कि इसके बाद पुलिस उन साधुओं को लेकर थाने गई, अभी भी जाँच जारी है। वहीं SP अभिजीत बनर्जी ने कहा कि गौरांगडीह के पास गाड़ी में सवार इन साधुओं ने काली मंदिर पूजा के लिए जा रही महिलाओं से रास्ता पूछा था।

उन्होंने कहा कि भाषा समझ में न आने के कारण कुछ ग़लतफ़हमी हुई और उन महिलाओं को ऐसा लगा कि ये साधु उनका पीछा कर रहे हैं। इसके बाद वहाँ भीड़ पहुँच गई जो उन साधुओं को लेकर दुर्गा मंदिर गई और उनकी गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया। काशीपुर थाने की पुलिस ने बीच-बचाव किया। वहीं विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने भी इस घटना को लेकर आक्रोश जताया है। संगठन के अंतरराष्ट्रीय जॉइंट सेक्रेटरी ने कहा कि TMC के गुंडों द्वारा साधुओं पर किया गया हमला निंदनीय है, अस्वीकार्य है।

उन्होंने कहा, “बंगाल वो धरती है जहाँ कण-कण में माँ काली की पूजा की जाती है, जहाँ चैतन्य महाप्रभु ने जन्म लिया था, जहाँ बंकिम चंद्र चटर्जी, रवीन्द्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद घोष जैसे महान संत हुए है। उसी धरती पर ममता बनर्जी ने चंद मुस्लिम वोटों की खातिर जो हिन्दू विरोधी माहौल बना दिया है वो दुर्भाग्यपूर्ण है। काली पूजा पर हमले होते हैं, मूर्तियों का अपमान किया जाता है, हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया जाता है, ज़िंदा जला दिया जाता है। ममता बनर्जी, तुम्हारे इस अत्याचार को देश की जनता स्वीकार नहीं करेगी। हम इसका विरोध करते हैं।”

सुरेंद्र जैन ने आगे कहा कि ममता बनर्जी को वो चेतावनी देना चाहती हैं कि वो अविलंब अपनी पार्टी के गुंडों द्वारा किए गए इस अपराध के लिए अक्षम्य क्षमा याचना करें, पूरे देश से माफ़ी माँगें वर्ण VHP को उनके खिलाफ पूरे देश में आंदोलन करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “आज पूरे देश की जनता तुम्हें जवाब देगी, लेकिन तुम्हें ये समझ लेना चाहिए कि तुम्हारी इस करतूत को देश स्वीकार नहीं करेगा।” बता दें कि अप्रैल 2020 में महाराष्ट्र के पालघर में भीड़ ने 3 साधुओं और उनके एक ड्राइवर को मार डाला था, पुरुलिया की घटना के बाद जिसकी यादें ताज़ा हो गई हैं।

‘हम नहीं चाहते किसी को सज़ा दिलाना’: बंगाल में जिन साधुओं को निर्वस्त्र कर पीटा उनसे मिले BJP सांसद, राम मंदिर के पुजारी बोले – ममता बनर्जी है ‘मुमताज खान’

अप्रैल 2020 में महाराष्ट्र के पालघर में 2 साधुओं और उनके ड्राइवर की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार की चूलें हिला दी थीं। पुलिस चुपचाप खड़े होकर तमाशा देखती रही और ये घटना हो गई। विषम परिस्थितियों के बावजूद मुस्कुराते हुए साधु की तस्वीर लोगों के जेहन में कैद हो गई। अब पश्चिम बंगाल में एक बार फिर से भीड़ ने कुछ इसी तरह की घटना को अंजाम देने की कोशिश की है। वहाँ साधुओं को नग्न कर के उन्हें मारा-पीटा गया।

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में जिन साधुओं के साथ क्रूरता की गई, उनमें से एक मधुर गोस्वामी ने अपना दर्द बयाँ किया है। उन्होंने बताया कि साधुओं का दल गंगासागर के लिए जा रहा है, रास्ते में पुरुलिया में अचानक गाड़ी को रोका गया। मधुर गोस्वामी ने बताया कि उनलोगों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, गाड़ी को भी तोड़-फोड़ दिया गया। इसके बाद पुलिस-प्रशासन वहाँ पहुँचा। साधु ने बताया कि वहाँ 200-300 के करीब लोग थे, बेहोश हो जाने के कारण उन्हें ठीक से याद नहीं।

बता दें कि भीड़ ने साधुओं पर लड़कियों को लेकर भागने का आरोप लगाया था। इस पर पीड़ित मधुर गोस्वामी ने कहा, “बाद में वो भी बेटियाँ आईं और हमसे माफ़ी माँगने लगीं। हमने कहा कि हमसे ही कोई पाप हुआ जो हमें ये दंड भुगतना पड़ा।” ‘आप क्या चाहते हैं?’ वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि वो कुछ नहीं चाहते हैं, कोई सज़ा नहीं चाहते हैं। उन्होंने बताया कि अब वो गंगासागर भी नहीं जाएँगे क्योंकि उनकी गाड़ी टूट गई है। साथ ही बताया कि अब वो अपने आश्रम को लौट रहे हैं।

वहीं पुरुलिया से लोकसभा सांसद और राज्य में भाजपा के जनरल सेक्रेटरी ज्योतिर्मय सिंह महतो ने इन साधुओं से मुलाकात कर के उन्हें सम्मानित किया और उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने पीड़ित साधुओं से बातचीत कर के जाना कि उनके साथ क्या-क्या हुआ। उन्होंने उनकी सुरक्षित वापसी की भी व्यवस्था कराई। भाजपा के IT सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने कहा कि राज्य की सत्ताधारी TMC का गुंडा अनवर शेख का इस हमले में हाथ है, जो पश्चिम बंगाल पुलिस में ‘सिविक वालंटियर’ भी है।

वहीं अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास ने भी इस घटना को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि वहाँ की CM का नाम ममता बनर्जी नहीं बल्कि ‘मुमताज खान’ है जो भगवा रंग देखते ही भड़क जाती हैं। उन्होंने कहा कि वेस्ट बंगाल में हो रही हिन्दू विरोधी घटनाओं के पीछे वहाँ की मुख्यमंत्री का ही हाथ है। उन्होंने इस दौरान रामनवमी की शोभा यात्रा पर हमला और दुर्गा पूजा के पंडालों पर हमले का मामला भी उठाया।

सत्येंद्र दास ने कहा कि साधुओं के भगवा वस्त्र देख कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को और भी क्रोध आ जाता है, इसीलिए वो उन पर हमले कराती हैं। बता दें कि साधुओं से मारपीट के मामले में अब तक 12 गिरफ्तार किए जा चुके हैं। बता दें कि साधुओं ने रास्ते में लड़कियों से रास्ता पूछा था, जिसके बाद ये घटना हुई। वो मकर संक्रांति स्नान में हिस्सा लेने गंगासागर जा रहे थे। पुलिस ने भी माना है कि साधु रास्ता भटक गए थे और इसीलिए उन्होंने रास्ता पूछा था।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुकांता मजूमदार ने भी कहा कि साधुओं को निर्वस्त्र कर के उन्हें TMC के गुंडों द्वारा पीटा गया, जो पालघर त्रासदी की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के शासन में हिन्दू होना अपराध है, जबकि शाहजहाँ जैसों को सुरक्षा मिलती है। संदेशखाली में तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शाहजहाँ शेख ने अपने गुर्गों के साथ ED अधिकारियों की हत्या का प्रयास किया था। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे ‘पालघर पार्ट 2’ करार दिया है।

‘राम के आगे क्या नौकरी, क्या परिवार’: सरकारी शिक्षक ने कारसेवा में खाई 2 गोली, सब्जी बेचने वाला रज्जाक खान कहता था गद्दार, दिखाता था आँखें

अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों से इस मंदिर में 22 जंववरी 2024 को मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जानी है। इस बीच बलिदानी कारसेवकों को याद करके दुनिया भर के हिन्दू उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। हालाँकि समाजवादी पार्टी के कई नेता सन 1990 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर हुए रामभक्तों के नरसंहार को सही ठहरा रहे हैं। इस मौके पर ऑपइंडिया की टीम अयोध्या में मौजूद है। हमने सन 1990 के एक ऐसे कारसेवक को खोज निकाला, जो 2 गोलियाँ लगने के बाद भी अब तक जीवित हैं। इनका नाम शिव दयाल मिश्रा है। शिवदयाल ने हमें सन 1990 की भयावहता को एक चश्मदीद के तौर पर बताया।

सरकारी टीचर होने के बावजूद उतरे कारसेवा में

सन 1990 नरसंहार के चश्मदीद और भुक्तभोगी कारसेवक शिव दयाल मिश्रा मूल रूप से गोंडा जिले के थानाक्षेत्र वजीरगंज के निवासी हैं। उनके गाँव का नाम पूरे बसंती है। 1990 में शिवदयाल गोंडा के ही एक प्राइमरी स्कूल में सहायक अध्यापक थे। साल 2009 में वो हेड मास्टर बन कर रिटायर हुए। 77 साल के हो चुके शिव दयाल 1990 में लगभग 45 वर्ष के थे। उनके परिवार में एक बेटा है। फ़िलहाल वो गौ सेवा और खेती आदि करके समय व्यतीत कर रहे हैं।

उनके बाएँ पैर के घुटने में आज भी गहरा घाव देखा जा सकता है। इसी जगह पैरामिलिट्री द्वारा चलाई गई गोली उनके टखने को तोड़ कर निकल गई थी। दाएँ पैर के पंजों में भी एक गोली लगी थी, जो रगड़ते हुए निकल गई थी। उस जगह खरोंच के निशान आज भी मौजूद हैं।

शिव दयाल बताते हैं कि दोनों घावों में आज भी कभी-कभार दर्द उठ जाता है। हालाँकि वो इस उठने वाले दर्द में भी राम के नाम पर किए गए त्याग को याद करते हुए संतोष महसूस करते हैं। शिवदयाल का कहना है कि अगर उनके प्राण भी निकल जाते तो कोई गम नहीं होता।

शिवदयाल के बाएँ पैर में आज भी मौजूद है गोली के घाव

जोश था राम के नाम पर प्राण भी देने का

जब हमने शिव दयाल से पूछा कि सरकारी नौकरी में रह कर भी उन्होंने कारसेवा का रास्ता क्यों चुना तो उन्होंने कहा, “राम के आगे क्या नौकरी और क्या परिवार?” शिवदयाल ने हमें आगे बताया कि उनके गाँव से होकर देश के विभिन्न हिस्सों के कारसेवक गुजर रहे थे। ये कारसेवक रामभक्ति के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने को तैयार थे। जब शिवदयाल ने इन कारसेवकों को देखा तो उन्होंने भी अपने गाँव और आसपास के लोगों का जत्था तैयार किया। इसी बीच उन्होंने बाहर से आए रामभक्तों के आराम करने और खाने-पीने का इंतजाम करवाया।

पानी भरे खेतों और काँटों भरे रास्तों से निकले कारसेवक

शिवदयाल ने 30 अक्टूबर 1990 का दिन याद किया। उनके घर से अयोध्या की एरियल दूरी लगभग 25 किलोमीटर है। उन्होंने बताया कि भोर में ही वो अपने जत्थे के साथ अयोध्या की तरफ निकले। मुख्य मार्गों पर तब पेड़ों को काट कर गिरा दिया गया था। छोटे सहायक रास्तों पर पुलिस के वाहन गश्त कर रहे थे, जो अयोध्या जा रहे रामभक्तों को अज्ञात जगहों पर ले जा रही थी। बाहरी रामभक्तों को साथ लेकर शिव दयाल खेतों के रास्ते आगे बढ़े। उन्होंने बताया कि तब कई खेतों में घुटने तक पानी भरा था। कई जगहों पर कारसेवकों के पैरों में काटें चुभे और जोंक तक चिपक गई।

बावजूद इसके रामभक्त छिपते-छिपाते आगे बढ़ते गए। शिवदयाल मिश्रा का कहना है कि उन्हें और उनके साथियों का लक्ष्य अयोध्या ठीक वैसे ही थी, जैसे कभी अर्जुन के लिए चिड़िया की आँख। जब भी पुलिस के सायरन सुनाई देते थे या वाहनों की घरघरहट, तब रामभक्त खुद को पानी और खेतों में छिपा लेते थे। ये तमाम मुसीबतें रामभक्तों के हौसलों को डिगा नहीं पाईं और आखिरकार दोपहर के समय शिवदयाल अपने जत्थे के साथ सरयू नदी के तट पर पहुँच गए। नदी पार करते ही अयोध्या शुरू हो जाती।

सरयू पुल को पार करना मतलब मौत का सफर

शिवदयाल ने बताया कि भले ही वो अपने साथियों के साथ अयोध्या की सीमा पर पहुँच गए थे लेकिन वहाँ से आगे का सफर मौत का रास्ता पार करने जैसा था। अक्टूबर का महीना था और बरसात का सीजन हाल ही में खत्म हुआ था। तब सरयू नदी पूरे उफान पर थी, जिसकी धाराओं को भेद पाना किसी अच्छे तैराक के लिए भी असम्भव जैसा था।

अगर कोई हिम्मत कर भी लेता तो नदी के तट पर खड़ा कोई सशत्र पुलिसकर्मी उसे गोली नहीं मार देगा, इसकी भी कोई गारंटी नहीं थी। बकौल शिवदयाल अयोध्या में घुसने का एकमात्र रास्ता सरयू पुल से हो कर जाता था लेकिन उस रास्ते पर इतनी फ़ोर्स तैनात थी कि शायद मच्छर भी उसे पार न कर पाता। कारसेवकों ने इसी को मुलायम सिंह द्वारा ‘परिंदा भी पर न मार पाने’ वाला चैलेन्ज बताया।

पुल पर रखा पहला कदम और बिछ गईं लाशें

जिस जगह शिवदयाल अपने जत्थे के साथ थे, वहाँ से रामजन्मभूमि लगभग 3 किलोमीटर दूर थी। अयोध्या में इंट्री का एकमात्र रास्ता पुल था, जिस पर भारी फोर्स तैनात थी। पुल पार करने के लिए कारसेवक आगे बढ़े, तभी पहली पंक्ति में खड़े पुलिस के जवानों ने उनको पीछे हटने के लिए कहा।

रामधुन गा रहे रामभक्तों ने पीछे हटने से मना कर दिया और पुल की तरफ बढ़ते रहे। इसी बीच पुलिस के जवानों के पीछे से एक दूसरी टुकड़ी आई। उस टुकड़ी के पास अत्याधुनिक हथियार थे। शिवदयाल को आशंका है कि वो पैरामिलिट्री फ़ोर्स थी।

वो सरयू पुल जहाँ हुआ था रामभक्तों का नरसंहार

शिवदयाल के मुताबिक पीछे से आई टुकड़ी ने बिना किसी चेतावनी के गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं। गोलियाँ कारसेवकों के सिर, पैरों और छातियों में लगी। लगभग 5 मिनट चली अंधाधुंध फायरिंग में कई कारसेवकों की मौत मौके पर ही हो गई।

उसके बाद का दृश्य देख कर ऐसा लगा मानो पुलिस के वाहन पहले ही नरसंहार की तैयारी कर के आए थे। फटाफट लाशों को वाहनों में लादा गया। इस दौरान गोलीबारी से डर कर अस्थाई कैम्पों में बिठाए गए डॉक्टर भी भाग खड़े हुए।

दावा किया जा रहा है कि डॉक्टरों की गैर मौजूदगी में कई ऐसे कारसेवकों को भी लाश मान कर वाहनों में भर लिया गया, जो तब जिन्दा थे। शिवदयाल का मानना है कि मारे गए लोगों को बाद में किसी ने नहीं देखा। आशंका है कि उनके शवों को भी नदी आदि में फेंक कर ठिकाने लगा दिया गया।

2 गोलियाँ लगने के बावजूद घिसटते हुए जिन्दा बच गए शिवदयाल

शिवदयाल मिश्रा के मुताबिक अंधाधुंध गोलीबारी के बीच उन्हें अपने दोनों पैरों में तेज दर्द का एहसास हुआ। जब उन्होंने नीचे झाँक कर देखा तो दोनों पैरों से खून निकल रहा था। बाएँ पैर के घुटने और दूसरे के तलवे में गोली लग चुकी थी।

कारसेवक शिवदयाल ने बताया कि अगर वो नीचे गिरे होते तो उनको भी लाशों के बीच जिन्दा ही समेट कर नदी में फेंक दिया गया होता। ऐसे में उन्होंने खुद को हिम्मत दी। उनके साथ जिन्दा बचे साथी कारसेवकों ने भी शिवदयाल को सहारा दिया। आखिरकार फिर उन्हीं काँटों भरी राह और पानी भरे खेतों से होते हुए शिवदयाल वापस लौटे।

जब शिवदयाल को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, तब वहाँ के डॉक्टरों ने इलाज में खुद को अक्षम बताया। आखिरकार फिर जैसे-तैसे आगे चल कर शिवदयाल को बाकी रामभक्तों ने बेहतर अस्पताल में भर्ती करवाया। यहाँ उनके घुटने में घुसी गोली निकाली गई। इस गोली को स्थानीय प्रशासन ने आकर अपने कब्ज़े में ले लिया। दूसरे पैर के घाव को डॉक्टरों ने खतरे से बाहर बताया।

जानकारी मिलते ही कारसेवक शिवदयाल के परिजन अस्पताल पहुँचे। आखिरकार लगभग 6 महीने तक शिवदयाल बिस्तर पर पड़े रहे। इस पूरे इलाज का खर्च आदि खुद शिवदयाल ने अपनी जेब से उठाया। बीच में कई बार ऐसा भी लगा कि कारसेवक का पैर काटना पड़ सकता है। हालाँकि ऐसी नौबत न आना शिवदयाल भगवान राम का आशीर्वाद मानते हैं।

गौ सेवा कर के समय बिताते हैं शिवदयाल मिश्रा

सब्ज़ी बेचने वाला रज़्ज़ाक दिखाता था आँखें

शिवदयाल मिश्रा ने बताया कि लगभग 6 माह तक बिस्तर पर रहने के बाद सबसे पहले उन्होंने अपनी टीचर की नौकरी नियमित रूप से करनी शुरू की। आसपास के इलाकों में उनके कारसेवा में गोली लगने की खबर फ़ैल चुकी थी। जब कभी शिवदयाल पास की वजीरगंज बाजार जाते थे, तब वहाँ सब्जी बेचने वाला रज्जाक खान उनको आँखें दिखाता था।

एक दिन बहस करते हुए रज़्ज़ाक खान ने शिवदयाल को ‘गद्दारी वाला काम’ करने वाला भी कह डाला था। हालाँकि शिवदयाल ने कारसेवा को अपनी रामभक्ति बताया। उन्होंने रज्जाक से कहा कि उन्हें अपने काम पर गर्व है। हालाँकि शिवदयाल का यह भी कहना था कि हिन्दू समाज के साथ तब हिंदूवादी सोच रखने वाले तमाम अधिकारियों ने भी उन्हें कारसेवक होने के नाते काफी सम्मान दिया था।

आज भी शिवदयाल और उनका परिवार भगवान राम की भक्ति में लीन है। शिवदयाल का यह भी कहना है कि भले ही आज उनकी उम्र 77 वर्ष के आसपास है लेकिन अगर अभी भी रामकाज करने का मौका मिला तो वो अपने प्राणों का मोह नहीं करेंगे।

अपने दिवंगत साथियों को याद कर के भावुक हो गए शिवदयाल ने बताया कि आज भी उनके कानों में वो तड़तड़ाती गोलियाँ कभी-कभार गूँज जाती हैं। अपनी आँखों के आगे राम मंदिर बनना शिवदयाल अपने जीवन को धन्य होना और अपनी मेहनत का सार्थक होना मानते हैं। उन्होंने मोदी और योगी की भी खुल कर तारीफ की।

राम मंदिर का न्योता ठुकराने पर 2 धड़ों में बँटी कॉन्ग्रेस तो सफाई देता फिर रहा आलाकमान: अध्यक्ष खड़गे बोले – जो जाना चाहते हैं वो जाएँ

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण ठुकराने पर कॉन्ग्रेस पार्टी हर तरफ से आलोचना झेल रही है। विपक्ष तो विपक्ष, पार्टी के नेता ही वरिष्ठ नेताओं के इस फैसले पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। ऐसे में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसको सफाई दी है। खड़गे ने शुक्रवार (12 जनवरी 2024) को कहा कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह में न जाने का उद्देश्य किसी की भावनाओं या किसी धर्म को ठेस पहुँचाना नहीं है।

उन्होंने कहा, “हम पहले ही कह चुके हैं कि अगर कोई (22 जनवरी को ‘प्राण प्रतिष्ठा’ कार्यक्रम के लिए) अयोध्या जाना चाहता है तो वह जब चाहे, वहाँ जाने के लिए स्वतंत्र है। हालाँकि, कार्यक्रम में शामिल न होने के हमारे फैसले को लेकर बीजेपी लगातार हम पर निशाना साध रही है। यह गलत है। हमारे फैसले का मकसद किसी शख्स या धर्म की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था।”

गाँधी परिवार के नजदीकी मल्लिकार्जुन खड़गे ने आगे कहा, “हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहते हैं कि उन्होंने मुद्रास्फीति और बेरोजगारी को रोकने के लिए क्या कदम उठाए? हम यह भी चाहेंगे कि वह हमारी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताएँ। ये ऐसे मुद्दे, हैं जो सीधे देश और इसके लोगों को प्रभावित करते हैं।”

बताते चलें कि 22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए सोनिया गाँधी, खड़गे और अधीर रंजन चौधरी को निमंत्रण भेजा गया था। हालाँकि, इन लोगों ने इस निमंत्रण को ठुकरा दिया था। उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को ‘बीजेपी-आरएसएस’ का कार्यक्रम कहकर वहाँ जाने से इनकार कर दिया था।

कॉन्ग्रेस के इस स्टैंड पर बीजेपी ने उस पर देश की पहचान और आत्मा को नकारने का आरोप लगाया है। मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, “राम मंदिर हमारा राष्ट्र मंदिर है और प्रभु श्रीराम हमारे अस्तित्व और आस्था के अभिन्न अंग हैं। वह देश की पहचान और आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए, अयोध्या में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ में शामिल होने के निमंत्रण को ठुकराकर उन्होंने हमारी सभ्यता की जड़ों और राष्ट्रीय पहचान को नकार दिया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”

वहीं, कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता पवन खेड़ा ने शुक्रवार को कहा, “प्राण प्रतिष्ठा’ के आसपास अनुष्ठानों की एक प्रणाली और रिवाज है। यदि यह आयोजन धार्मिक है तो यह आयोजन चारों पीठों के शंकराचार्यों के मार्गदर्शन में क्यों नहीं हो रहा? चारों शंकराचार्यों ने साफ कहा है कि अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा नहीं की जा सकती।”

खेड़ा ने आगे कहा, “अगर ये आयोजन धार्मिक नहीं है तो इसका राजनीतिक होना तय है। मैं किसी पार्टी के कुछ नेताओं को मेरे और मेरे आराध्य देवता के बीच बिचौलियों के रूप में काम करते हुए स्वीकार नहीं कर सकता। हमारे कुछ राजनेता ठेकेदारों की तरह काम कर रहे हैं। तारीख तय करने से पहले बीजेपी ने किस ‘पंचांग’ का हवाला दिया? तारीख (लोकसभा) चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनी गई है।”

कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने आरोप लगाया कि यह प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन ‘विशुद्ध रूप से धार्मिक’ नहीं है। इसमें विशिष्ट ‘राजनीतिक निहितार्थ’ हैं। उन्होंने दावा किया कि आगामी आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए मंदिर का उद्घाटन उसके निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही किया जा रहा है।

वहीं, कॉन्ग्रेस का एक धड़ा ऐसा भी है, जो राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर सकारात्मक रूख अपनाए हुए हैं। उनमें से एक हैं हिमाचल प्रदेश के कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री विक्रमादित्य सिंह। विक्रमादित्य सिंह प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर अयोध्या में उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा है कि एक हिंदू होने के नाते वहाँ होना उनकी जिम्मेदारी बनती है।

वहीं विक्रमादित्य सिंह की माँ और हिमाचल कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने शुक्रवार (12 जनवरी 2024) को राम मंदिर निर्माण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सामने आए एक वीडियो में प्रतिभा सिंह कह रही हैं, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राम मंदिर निर्माण की पहल वास्तव में सराहनीय है।”

हिमाचल प्रदेश के मंडी से कॉन्ग्रेस सांसद प्रतिभा सिंह ने कहा कि उन्हें और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह को एक संयुक्त निमंत्रण मिला है। वहीं संभल के कल्किधाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भी कॉग्रेस के राममंदिर न्योता ठुकराने के फैसले का विरोध करते हुए कहा था कि श्रीराम मंदिर के निमंत्रण को ठुकराना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आत्मघाती फ़ैसला है।

वहीं गुजरात की पोरबंदर सीट से कॉन्ग्रेस विधायक अर्जुन मोढवाडिया ने भी इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा था, “भगवान श्रीराम आराध्य देव हैं। यह देशवासियों की आस्था और विश्वास का विषय है। कॉन्ग्रेस को ऐसे (प्राण प्रतिष्ठा में नहीं जाने के) राजनीतिक निर्णय लेने से दूर रहना चाहिए था।”

‘मार खाना ही भाग्य में’: बंगाल में नंगा कर पीटे गए साधुओं ने कहा, भीड़ ने जटाएँ पकड़ घसीटा, रौंदा गेरुआ वस्त्र, BJP बोली- वहाँ हिंदू होना गुनाह

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) शासित पश्चिम बंगाल में साधुओं के साथ पालघर लिचिंग जैसा वाकया सामने आया है। साधुओं के साथ ना सिर्फ अभद्रता की गई, बल्कि उन्हें नंगा किया गया, उनकी जटाएँ खींची गईं, उनके गेरुआ वस्त्र को रौंदा गया और डंडों से उनकी पिटाई की गई। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बीजेपी के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने 30 सेकेंड के इस वीडियो को अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया है। इसके साथ ही उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठाए हैं। बंगाल बचाने का आह्वान करते हुए मालवीय ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदू होना अपराध हो गया है।

उन्होंने लिखा, “पश्चिम बंगाल के पुरुलिया से बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पालघर की तरह की एक लिंचिंग में मकर संक्रांति के लिए गंगासागर जा रहे साधुओं को सत्तारूढ़ टीएमसी से जुड़े अपराधियों ने निर्वस्त्र कर पीटा। ममता बनर्जी के शासन में शाहजहाँ शेख जैसे आतंकवादी को सरकारी संरक्षण मिलता है और साधुओं की हत्या की जा रही है।”

वीडियो में साफ दिख रहा है कि भीड़ पुरुलिया की सड़कों पर कुछ लोग सरेआम साधुओं की बेरहमी से पिटाई कर रही है। उनकी जटाओं को पकड़कर घुमा रही है। इस दौरान साधु बचने की कोशिश करते हैं और रहम की गुजारिश करते हैं, लेकिन हमलावर मानने को तैयार नहीं है। वहाँ चारों तरफ लोगों खड़े होकर तमाशा देख रहे हैं। वहीं, एक आदमी उन साधुओं को बचाने की कोशिश करता दिख रहा है।

इस वीडियो को शेयर करते हुए भाजपा के प्रवक्ता शहजाद जयहिंद ने X पर लिखा है, पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में पालघर पार्ट 2 का नजारा देखने को मिला। जिस प्रकार से साधु-संतों को पीटा गया, टीएमसी के गुंडों के द्वारा। जिस प्रकार उद्धव ठाकरे जी के राज में पालघर पार्ट 1 हुआ था, उस प्रकार ममता दीदी के राज में पालघर पार्ट 2 इसलिए हो रहा है कि वहाँ राजनीतिक हिंसा चरम पर पहुँच चुकी है?”

जयहिंद ने आगे कहा, “वहाँ कोई भी सुरक्षित नहीं है। चाहे वो ED के ऑफिसर हों, सेंट्रल एजेंसी के लोग हों, राष्ट्रवादी लोग हों या साधु-संत हों। क्या इतनी नफरत हो चुकी है जय श्रीराम कहने से? क्या इतनी नफरत हो चुकी है नफरत हो चुकी है हिंदू होने से? वहाँ शाहजहाँ जैसे गुंडे को तो पूरा संरक्षण मिल रहा है। यही हकीकत है आज के पश्चिम बंगाल की।”

रिपोर्ट के मुताबिक, पुरुलिया में साधुओं के साथ हुई पिटाई का पुलिस ने स्वत: संज्ञान लिया है। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। हालाँकि, साधु पक्ष की ओर से कोई एफआईआर नहीं दर्ज कराई गई है। TV9 की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित साधुओं का कहना है कि उन्हें लगता है कि मार खाना उनके भाग्य में ही लिखा है।

बताते चलें कि 16 अप्रैल 2020 को महाराष्ट्र के पालघर में 72 साल के कल्पवृक्ष गिरि और 35 साल के सुशील गिरि नाम के दो साधुओं की लिचिंग कर दी गई थी। वे दोनों अपने गुरु के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मुंबई से सूरत जा रहे थे। इस दौरान पालघर में 200 लोगों की भीड़ ने उन्हें बच्चा चोरी करने का आरोप लगा रोका और दोनों साधुओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।