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₹116 करोड़ का खरीदा घर: जानिए कौन हैं व्रतिका गुप्ता, जिनकी मुंबई वाली प्रॉपर्टी डील बटोर रही चर्चा

फैशन डिजाइनर व्रतिका गुप्ता ने मुंबई में 116 करोड़ रुपए का घर खरीदा है, जिसके बाद वो चर्चा में आ गई हैं। असल में वो ‘Masion Sia’ नामक कंपनी की संस्थापक एवं CEO हैं, जो घरों को सजाने का काम करती है। अब उन्होंने मुंबई के पॉश इलाके वर्ली स्थित ‘ओबरॉय थ्री सिक्सटी’ सोसाइटी में ये आलीशान घर खरीदा है। यहाँ पिछले साल D’Mart के संस्थापक राधाकिशन दमानी ने 1238 करोड़ रुपए की डील की थी, जिसके बाद ये जगह चर्चा में आया था।

व्रतिका गुप्ता की कंपनी ‘Masion Sia’ लक्जरी होम डेकोरेशन की दुनिया में एक बड़ा नाम है। उन्होंने जो घर खरीदा है, वो सी व्यू वाला है। अर्थात, वहाँ से समुद्र दिखता है। 39 वर्षीय व्रतिका गुप्ता का ये नया घर 12,138 स्क्वायर फ़ीट में फैला हुआ है। बताया जा रहा है कि इसकी कीमत लगभग 1 लाख रुपए प्रति स्क्वायर फ़ीट आँकी गई है। उन्होंने इसके लिए 5.82 करोड़ रुपए तो सिर्फ स्टाम्प ड्यूटी चुकाई है। रविवार (7 जनवरी, 2024) को इस प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रेशन हुई है।

इस घर के साथ व्रतिका गुप्ता को 8 पार्किंग स्लॉट भी मिले हैं। इससे पहले ये भी सामने आया था कि 12.25 करोड़ रुपए की कार रॉल्स रॉयस (कलिनन ब्लैक बैज) खरीदने वाली वो देश की पहली महिला हैं। इंटीरियर डेकोरेशन के काफी महँगे उत्पाद बेचने वाली कंपनी की मालिक व्रतिका गुप्ता ने पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन और NIFT से पढ़ाई की है। उन्होंने 2022 में इस कंपनी की स्थापना की थी। मुंबई में अकेले साल 2022 में 1,12,668 संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन हुए हैं

उन्होंने जो अपार्टमेंट खरीदा है, वो 49वीं मंजिल पर स्थित है। बता दें कि ‘थ्री सिक्सटी वेस्ट’ के 2 टॉवर हैं, जिनमें से एक में रिट्ज-कार्लटन होटल चलता है और दूसरे टॉवर में इसी होटल प्रबंधन द्वारा रेजिडेंशियल बिल्डिंग का मैनेजमेंट किया जाता है। व्रतिका गुप्ता इंटीरियर एवं फैशन डिजाइनर हैं। उन्होंने ‘अंजुमन फैशन लिमिटेड’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। 2009-11 के बीच वो अंजू मोदी के ब्रांड की डिजाइनर थी। फिर वो ‘Two White Birds’ में डिजाइन डायरेक्टर बनीं

2017 में उन्होंने ‘व्रतिका एन्ड नकुल’ की स्थापना की। नकुल अग्रवाल उनके पति हैं। मुंबई और हैदराबाद में भी व्रतिका गुप्ता के स्टोर हैं। उनकी कंपनी परंपरागत और ऐतिहासिक डिजाइनों को आधुनिक साँचे में ढाल कर पेश करती है। फाइन मेटल, क्रिस्टल, पत्थर और कांच का इस्तेमाल कर के ये उत्पाद बनाए जाते हैं। ‘Masion Sia’ भारतीय इतिहास और पश्चिमी आधुनिकता के मिश्रण पर ध्यान देती है। व्रतिका गुप्ता की कुल संपत्ति की सटीक जानकारी फ़िलहाल नहीं है।

‘सनातन धर्म खतरे में, हमारा खाकर हमारे ही धर्म के खिलाफ काम कर रहे हैं मिशनरी’: नक्सलियों के गढ़ में जनजातीय समाज की हुंकार – इन्हें यहाँ नहीं रहने देंगे

छत्तीसगढ़ भाजपा के नेता और पूर्व विधायक भोजराज नाग ने कहा कि वे धर्मांतरण कराने वाले मिशनरियों को नहीं रहने देंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति को खत्म करने का एक बहुत बड़ा षडयंत्र चल रहा है। नाग ने कहा कि सनातन धर्म खतरे में है। शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर जमकर धर्मांतरण हो रहा है। उन्होंने अपना धर्म बदलने वाले आदिवासियों को आरक्षण का लाभ नहीं देने की भी वकालत की।

भोजराज नाग आदिवासी संस्कृति और परंपरा की रक्षा के लिए जनजाति सुरक्षा मंच (JSM) यात्रा का नेतृत्व रहे हैं। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर से निकली ये यात्रा दंतेवाड़ा पहुँची। इस दौरान पूर्व MLA ने धर्मांतरण करवाने वालों और ईसाई मिशनरियों पर जमकर हमला किया और सनातन को खतरे में बताया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, भोजराज नाग ने कहा कि सनातन के खिलाफ बड़े पैमाने पर साजिश हो रही है। अब सनातन विरोधियों को मुँहतोड़ जवाब देने की बारी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से प्रभु श्रीराम ने वानर सेना को साथ लेकर लंका पर चढ़ाई की थी और असुर राज को खत्म किया था, ठीक इसी तरह से वे हर जिले के सर्वसमाज के पास जा रहे हैं।

पूर्व विधायक ने आगे बताया कि वे सनातन के खिलाफ चल रहे षड्यंत्र का पर्दाफाश करेंगे। उन्होंने कहा बस्तर पाँचवीं अनुसूची वाला क्षेत्र है, लेकिन यहाँ शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर जमकर धर्मांतरण हो रहा है। बाहर से आए हुए लोगों यहाँ के लोगों को आपस में लड़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ के ग्रामीण अपनी संस्कृति-परंपरा और धर्म को बचाने के लिए कटिबद्ध है।

भोजराज नाग ने कहा कि उनके देवी-देवताओं को संरक्षित करने के लिए कानून में कोई व्यवस्था नहीं है। इसके लिए उन्होंने कानून में संशोधन की माँग की और कहा कि इस बात को लेकर सैकड़ों लोग आराध्य देवी माता दंतेश्वरी के मंदिर आए हैं। इस दौरान स्थानीय विधायक और विश्व हिंदू परिषद समेत कई हिंदू संगठनों के नेता मौजूद थे।

भाजपा नेता भोजराज नाग ने कहा, “हमारे देवी-देवताओं के खिलाफ जो षड्यंत्र हो रहा है, उसे हम किसी भी हाल में पनपने नहीं देंगे।” उन्होंने आगे कहा, “धर्मांतरण करवाने वाले मिशनरी बाहर से आते हैं, हमारा खाते हैं और हमारे ही धर्म के खिलाफ काम करते हैं। अब ऐसे मिशनरियों को हम बस्तर में नहीं रहने देंगे।”

बताते चलें कि 2 जनवरी 2024 को नाग ने कहा था, “किसी आदिवासी को धर्म परिवर्तन क्यों करना चाहिए? इसे हतोत्साहित किया जाना चाहिए। धर्म बदलने वालों को आधिकारिक तौर पर कानून के मुताबिक इसका ऐलान करने दें। वे आदिवासियों का फायदा नहीं ले सकते और परंपरा का पालन करने से इनकार नहीं कर सकते।”

बीते साल से ही डी लिस्टिंग यानी धर्मांतरण कर ईसाई या मुस्लिम बनने वाले जनजातीय समाज के लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) के दायरे से बाहर करने की माँग हो रही है। इसको लेकर देशव्यापी आंदोलन जारी है। अनुसूचित जनजाति के लोगों का यह आंदोलन JSM के बैनर तले चल रहा है।

जनजाति सुरक्षा मंच ने बस्तर में नारायणपुर और कोंडागाँव, दोनों जगहों पर साल भर में कई रैलियाँ कीं। पिछले साल क्रिसमस से ठीक एक दिन पहले 24 दिसंबर 2023 को झारखंड की राजधानी राँची में इकट्ठा होकर अपना इरादा बता चुका है। इसके तहत जनजातीय समाज के लोग अपनी माँगों के समर्थन में फरवरी 2024 में दिल्ली में जुट सकते हैं।

‘अकेले में चाइल्ड पॉर्न देखना पॉक्सो-आईटी एक्ट के तहत अपराध नहीं’: मद्रास हाईकोर्ट ने कहा – स्मोकिंग-ड्रिंकिंग की तरह अश्लील वीडियो देखना भी ‘Gen Z’ की आदत

मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार (11 जनवरी, 2024) को कहा कि चाइल्ड पॉर्न डाउनलोड करना और इसे प्राइवेट में देखना पॉक्सो एक्ट (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) और IT (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम) के तहत अपराध नहीं है। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि पॉर्नोग्राफी के लिए अगर किसी बच्चे का इस्तेमाल किया गया है, तभी पॉक्सो के तहत मामला चलाया जाना चाहिए। ऐसे ही, IT एक्ट के तहत मामला तभी चलेगा जब आरोपित ने कंटेंट बनाया हो, प्रकाशित किया हो और दूसरों को भेजा हो।

न्यायाधीश N आनंद वेंकटेश ने ये फैसला सुनाया। इस दौरान उन्होंने केरल हाईकोर्ट के एक जजमेंट का जिक्र किया, जहाँ इसी तरह का फैसला सुनाया गया है। मामला 28 साल के व्यक्ति से जुड़ा है, जिसके ऊपर चाइल्ड पॉर्न डाउनलोड करने और इसे देखने पर पॉक्सो और आईटी एक्ट पुलिस ने लगाया था। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपित ने प्राइवेट में ये सब किया, बिना किसी पर कोई प्रभाव डाले हुए। जज ने कहा कि जिस क्षण वो कंटेंट को बाँटने या सार्वजनिक रूप से दिखाने लगता, तब इन एक्ट्स के तहत धाराएँ लगाई जा सकती हैं।

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि धूम्रपान और शराब पीने की तरह मौजूदा पीढ़ी के लिए पॉर्न देखना भी एक आदत बन गई है। जज ने कहा कि इसके लिए सज़ा सुनना समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ‘Gen Z’ इस गंभीर समस्या से जूझ रही है और इसके लिए उन्हें सज़ा देने की बजाए समाज को उन्हें सही सलाह देनी चाहिए, उन्हें शिक्षित करना चाहिए, उनकी काउंसिलिंग करनी चाहिए ताकि वो इस आदत से छुटकारा पाएँ। उन्होंने कहा कि आजकल के किशोर गैजेट्स का इस्तेमाल करते हैं, जहाँ एक बटन टच करने पर चीजें बिना किसी सेंसर के पहुँच रही हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों की मानसिक अवस्था उस समय विकास की अवस्था में होती है, ऐसे में जो अदालत कंटेंट होते हैं उनके प्रति भी वो आकर्षित होते हैं। इसके साथ ही याचिकाकर्ता आरोपित को मद्रास हाईकोर्ट ने काउंसिलिंग अटेंड करने की भी सलाह दी। जज ने कहा कि स्वस्थ और सुखी जीवन के लिए आरोपित को इस आदत से छुटकारा पाना चाहिए। जज ने कहा कि आपराधिक मामला खत्म कर देने कोई मदद नहीं मिलेगी, और याचिकाकर्ता को इस आदत से छुटकारा पाकर खुद की मदद करनी चाहिए।

‘मदरसे में पढ़ा हूँ, मुझे पता नहीं ये अपराध है’: 13 साल की बच्ची से बलात्कार कर सजा से बच गया आदिल, दंग करने वाली है वायरल खबर की सच्चाई

सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हो रही है, जिसमें आदिल राशिद नाम के युवक ने 13 साल की एक नाबालिग लड़की से रेप किया। जब पुलिस ने उसे पकड़ा तो उसने कहा कि उसे जानकारी नहीं थी कि रेप करना अपराध है। उसने कहा कि वह मदरसे में पढ़ा है और वहाँ उसे महिलाओं को बेकार और सड़क पर फेंके गए लॉलीपॉप की तरह बताया जाता था।

राशि की दलील को सुनते हुए कोर्ट ने उसकी सजा को खत्म कर दिया और कहा, “आप 18 वर्ष के हैं, लेकिन रिपोर्ट से स्पष्ट है कि जब यौन मामलों की बात आती है तो आप बहुत अनुभवहीन और अपरिपक्व हैं।” जज ने कहा कि चूँकि वह निष्क्रिय था और उसमें मुखरता की कमी थी, इसलिए जेल भेजना नुकसानदायक हो सकता है।

राशिद ने कहा कि लड़की ने उसे ऑनलाइन बहकाया था, इसके बाद उसने नाबालिग से यौन संबंध बनाए थे। यौन संबंध बनाने से पहले दोनों ने लगभग दो महीने तक फेसबुक पर चैटिंग की थी और उसके बाद फोन पर एक दूूसरे से बातें की थीं। इसके बाद वे दोनों एक स्थान पर मिले और होटल का एक कमरा बुक किया।

13 साल की नाबालिग लड़की ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वे दो घंटे तक होटल में रुके। वहाँ राशिद बाथरूम गया और कंडोम पहनकर बाहर आया। इसके बाद दोनों ने सेक्स किया। इस घटना के बाद राशिद सीधा मस्जिद गया और वहाँ नमाज पढ़ी। इसके बाद वह अपने घर लौट आया। उसी सप्ताह पुलिस ने राशिद को गिरफ्तार कर लिया।

इस खबर का स्क्रीनशॉट शेयर कर लोग न्यायिक व्यवस्था पर हमला बोल रहे हैं, जिसमें आदिल राशिद को नाबालिग लड़की से रेप के लिए बेहद कम सजा दी गई। दरअसल, यह मामला ब्रिटेन का है और जनवरी 2013 में सामने आया था। हालाँकि, सोशल मीडिया यूजर्स इस खबर को अब शेयर कर रहे हैं। एश्लिया सिमोन नाम की महिला ने एक्स पर लिखा, “ये ब्रिटेन का हाल है। ये बदमाश फाँसी का हकदार है, लेकिन उसे आजादी दे गई।”

ये मामला ब्रिटेन के नॉटिंघम का है, जहाँ आदिल रशीद नाम के युवक ने 13 साल की बच्ची के साथ यौन संबंध बनाए थे। इस मामले की सुनवाई के दौरान उसने कोर्ट में कहा कि उसे ब्रिटेन के कानून की जानकारी नहीं है, क्योंकि वो मदरसे में पढ़ा है। मदरसे में उसे बताया गया है कि महिलाओं की औकात सड़क पर फेंके गए लॉलीपॉप से ज्यादा की नहीं होती है।

इसके बाद उसके वकील ने उसे ‘सेक्स को लेकर भोला या अनजान’ साबित कर दिया। इस मामले में न्यायाधीश माइकल स्टोक्स ने राशिद को 9 महीने की जेल की सजा और 2 साल की निलंबित सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा था कि कानून लड़कियों की सुरक्षा के लिए है, भले ही इसमें उसमें मर्जी शामिल हो। इससे पहले नॉटिंघम क्राउन कोर्ट ने कहा था कि ऐसे अपराधों के लिए आमतौर पर चार से सात साल की जेल की सजा होती है।

पूछताछ में राशिद ने बताया था कि वो लड़की 13 की है, इस बारे में उसे पता था। वो शुरू में सेक्स संबंध नहीं बनाना चाहता था, लेकिन लड़की को देखकर बहक गया और सेक्स संबंध भी बनाए। पुलिस के अनुसार, इसके बारे में नाबालिग लड़की ने इसके बारे में स्कूल में अपनी सहेली को बताया था। इसके बाद उस लड़की ने शिक्षक को जानकारी दी थी। फिर शिक्षक ने पुलिस को बताया था। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।

प्रशांत वर्मा से प्रशिक्षण लें ‘आदिपुरुष’ वाले: ‘हनुमान’ फिल्म में दिखती है बनाने वालों की श्रद्धा, सैकड़ों करोड़ फूँक कर जो नहीं हो पाया वो कम बजट में कर दिखाया

बॉक्स ऑफिस पर एक नई फिल्म ने दस्तक दी है – ‘हनुमान’। भारत में शायद ही कोई होगा, या विश्व में शायद ही कोई हिन्दू होगा जो इस नाम से परिचित न हो। ‘रामायण’ सीरियल के बाद ये बच्चों के भी पसंदीदा किरदार हैं। ‘हनुमान’ केवल एक नाम मात्र नहीं है, बल्कि ईश्वर भक्ति, निश्छल प्रेम, चातुर्य और युद्धकला-निपुणता के मिश्रण से जो भी शब्द बनते होंगे उनका पर्यायवाची है। अब ‘HanuMan’ फिल्म के माध्यम से एक बार फिर ये प्रयास किया गया है कि लोग इस नाम को जानें, फिल्म ने लोगों को भगवान हनुमान को लेकर अपने मनोभाव को जागृत करने का मौका दिया है।

यहाँ हम फिल्म की तकनीकी या परंपरागत समीक्षा नहीं कर रहे, क्योंकि ये कई समीक्षक कर चुके हैं। संक्षेप में फिल्म के बारे में जानें तो मूल रूप से तेलुगू में बनी इस फिल्म के निर्देशक प्रशांत वर्मा है। बतौर डायरेक्टर ये उनकी चौथी ही फिल्म है। 2018 में ‘Awe’ नामक साइकोलॉजिकल थ्रिलर से फीचर फिल्मों में डेब्यू करने वाले प्रशांत वर्मा ने तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री की पहली जॉम्बी मूवी ‘जॉम्बी रेड्डी’ (2021) भी बनाई है। ‘हनुमान’ को पहली तेलुगू सुपरहीरो फिल्म के रूप में प्रचारित किया गया है।

‘हनुमान’: प्रशांत वर्मा से प्रशिक्षण लें ‘आदिपुरुष’ वाले

वहीं फिल्म में मुख्य किरदार निभाया है तेजा सज्जा ने, जो प्रशांत वर्मा की जॉम्बी वाली फिल्म में भी लीड रोल में थे। बतौर मुख्य अभिनेता ये उनकी पहली ही फिल्म थी। हालाँकि, बचपन में ही अभिनय के क्षेत्र में कदम रख चुके तेजा सज्जा इससे पहले कई फिल्मों में काम कर चुके थे। तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े अभिनेताओं के साथ काम करने का अनुभव उनके पास है। प्रशांत वर्मा द्वारा निर्देशित ही Sci-Fi रोमांटिक फिल्म ‘अद्भुतम्’ (2021) में भी उन्होंने लीड रल निभाया था।

34 वर्षीय निर्देशक और 29 वर्षीय अभिनेता की ये जोड़ी अब ‘HanuMan’ लेकर आई है। चूँकि दोनों साथ में पहले सफल फ़िल्में दे चुके हैं, उनकी ये बॉन्डिंग ‘हनुमान’ में भी दिखती है। शुरू में तेजा सज्जा कद-काठी के हिसाब से सुपरहेरो फिल्म के लायक नहीं लगते, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती जाती है उनका किरदार और विश्वसनीय होता चला जाता है। ‘सुपरहीरो’ वाले अवतार में ढलने के बावजूद वो एक आम आदमी होता है – उसका एक दोस्त, एक बहन, एक प्रेमिका और एक गाँव होता है।

जहाँ तक फिल्म के निर्देशन की बात है, प्रशांत वर्मा का तरीका तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री में मास-मसाला फ़िल्में बनाने वालों और गाँव के सेटअप में क्लासिक फ़िल्में बनाने वालों के मिश्रण जैसा है। वो एक गाँव की खूबसूरती को अच्छे से उकेरते हैं, चीजों को सिंपल रखने का प्रयास करते हैं और गानों का दृश्य के हिसाब से सही इस्तेमाल करते हैं। फिल्म एक दृश्य में ‘कार्तिकेय 2’ के उस दृश्य की याद दिलाती है जिसमें अनुपम खेर एक नेत्रहीन प्रोफेसर के रूप में भगवान श्रीकृष्ण की खूबियों को समझाते हैं।

कहानी की बात करें तो इसे भी पेचीदा नहीं रखा गया है, जो इसे बच्चों के देखने वाली या परिवार संग देखने वाली एक अच्छी फिल्म बनाता है। गाँव में हो रही राजनीति, हीरो और विलेन के साथ एक-एक कॉमेडियन, ताकतवर द्वारा कमजोरों का शोषण, प्रेमिका की रक्षा करता प्रेमी – ये सब साउथ की फिल्मों में हम पहली बार नहीं देख रहे। फिर, इस फिल्म में नया क्या है? तो इसका सीधा सा जवाब है, फिल्म में जो भी नया है वो फिल्म के नाम में ही है – हनुमान।

ऐसा नहीं है कि फिल्म में हनुमान जी का इस्तेमाल सिर्फ दर्शकों की भावनाओं को निचोड़ कर निकालने के लिए किया गया है। ऐसा नहीं है, फिल्म में शुरू से अंत तक ये नाम आपको सुनने को मिलता तो है, लेकिन जब भी ये नाम आता है तब दिखता है कि फिल्म बनाने वालों के मन में हनुमान जी के लिए कितनी श्रद्धा है, कितना सम्मान है। ये वही चीज है, जो ‘आदिपुरुष’ बनाने वालों के भीतर गायब थी। ‘आदिपुरुष’ के निर्माता-निर्देशकों को प्रशांत वर्मा से प्रशिक्षण लेना चाहिए।

हनुमान – सिर्फ एक नाम नहीं, श्रद्धा और सम्मान का विषय है

ये प्रशांत वर्मा की कला ही है कि वो एक बंदर और एक चिड़िया को भी एक किरदार के रूप में इस्तेमाल कर लेते हैं, वो भी पूरी फिल्म में। ये प्रकृति के साथ मानवीय समाज की तारतम्यता को समझाने और इसे प्रदर्शित करने का एक तरीका है, जिसे उन्होंने उपयोग में लाया है। हनुमान जी के मुख से जब ‘राम’ शब्द निकलता है तब आपके भीतर एक अलग ही अनुभूति का संचार होता है। इतनी शक्तिशाली आवाज़, इतनी ओजस्वी ऊर्जा, वो आवाज़ सीधा हृदय के भीतर ऐसे जाती है जैसे कोई सुपरसोनिक साउंड हो और हम उसे सुनने की क्षमता रखते हों।

‘हनुमान’ फिल्म की सिनेमाटोग्राफी और VFX इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो इसमें चार चाँद लगाता है। VFX कहीं भी नकली नहीं लगता। इसका कारण – जितनी ज़रूरत है, उतनी ही चादर रखी गई है। एक कम बजट की फिल्म को सैकड़ों करोड़ रुपए फूँक कर बनाई जाने वाली फिल्मों से बेहतर बना दिया गया है। नदी-झील-पहाड़ के दृश्य हों या फिर पानी के भीतर का दृश्य, गुफा के भीतर का दृश्य हो या फिर जंगल का, फिल्म प्राकृतिक सुंदरता को रहस्यों के महासागर के रूप में दिखाती है।

ये उन विरले फिल्मों में से एक है जहाँ सब कुछ सटीक बैठता है और पार्श्व संगीत उन सभी सटीक चीजों का भरपूर साथ देता है। हिंदी डबिंग बहुत अच्छी की है। गीत-संगीत साधारण हैं लेकिन फिल्म में कहीं भी ठूँसे हुए से नहीं लगते। पार्ट-2 के लिए अंत में काफी सस्पेंस क्रिएट किया गया है और इसका इशारा भी मिल जाता है कि अगला हिस्सा कहीं अधिक बजट वाला, अधिक भव्य और ज़्यादा एक्शन से भरपूर होने वाला है। आज के ज़माने में असुरों और मानवों का युद्ध – अगर सब कुछ पार्ट-1 जैसा ही अच्छा बन पड़ा तो अगली फिल्म और भी तगड़ी बनेगी।

बॉलीवुड से सवाल पूछने का भी समय

‘हनुमान’ इसीलिए भी देखिए ताकि आप ये सवाल पूछ सकें कि संसाधन और प्रतिभा होने के बावजूद बॉलीवुड में इस तरह की फिल्म क्यों नहीं बनाई गई? क्या बॉलीवुड ने बैटमैन, सुपरमैन और स्पाइडरमैन की आभा में मगन होकर अपने ही एक ऐतिहासिक किरदार को इस लायक नहीं समझा कि उस पर फिल्म बना कर दुनिया भर में अपनी संस्कृति का डंका बजाया जाए, या फिर उसे डर था कि इससे एक वर्ग विशेष के भीतर बॉलीवुड को लेकर नाराज़गी फैल जाएगी?

यहाँ मैं उन फिक्शनल सुपरहीरोज से हनुमान जी की तुलना नहीं कर रहा और ये होनी भी नहीं चाहिए, लेकिन ये सवाल पूछा जाना चाहिए कि भारत में जिन चीजों को ‘Mythology’ कह-कह कर ख़ारिज किया जाता रहा, उन्हीं से प्रेरित होकर विदेश में हजारों करोड़ रुपए कमाने वाली फ़िल्में कैसे बन गईं? क्या ‘हनुमान’ जैसी फिल्म बॉलीवुड में इसीलिए भी नहीं बन सकती क्योंकि इसमें ‘अच्छा मुसलमान’ वाला किरदार घुसाने की कोई गुंजाइश नहीं है?

आजकल रील्स का ज़माना है, जो स्क्रीन पर दिखता है वही चर्चा में होता है। जब बच्चे हनुमान जी से संबंधित कुछ नहीं देखेंगे ही नहीं तो हमारी अगली पीढ़ी पौराणिक इतिहास के एक पूरे के पूरे अध्याय के ज्ञान से वंचित रह जाएगी। जब ऐसी फ़िल्में आएँगी, बच्चे उसे देखेंगे, उसके क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल होंगे, बच्चे उन नामों के बारे में सर्च कर के इंटरनेट पर पढ़ेंगे – तभी तो उन्हें रामायण और इसके किरदारों के बारे में पता चलेगा। ‘कार्तिकेय 2’ और ‘हनुमान’ तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री का इसी दिशा में किया गया एक प्रयास साबित हो सकता है।

असल में भारत में समृद्ध पौराणिक कथाओं के मायने हैं, इनके अर्थ हैं, सामाजिक सन्देश हैं और भविष्य को लेकर इनमें निर्देश हैं। इस समुद्र को जितना मथा जाएगा, उतना ही अमृत निकलेगा। अफ़सोस कि हमारी फिल्म इंडस्ट्री के लोगों ने पहले इसे इस लायक समझा ही नहीं। क्लब्स, पार्टियाँ, बिकनी, आइटम सॉन्ग्स, अश्लील कॉमेडी और परिवार विरोधी भावनाओं से सनी बॉलीवुड फिल्मों ने पाश्चात्य संस्कृति के नक़ल की चक्कर में अपनी शकल तो बिगाड़ी ही, कई पीढ़ियों को भी अपने ही देश, इतिहास और संस्कृति को लेकर हीन भावना से भर दिया।

वो बुलाते तो हैं, हम जाते नहीं… ED संग दिल्ली CM की आँख मिचौली, चौथी बार निदेशालय का अरविंद केजरीवाल को समन

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रवर्तन निदेशालय (ED) के साथ आँख मिचौली खेल रहे हैं। अब ED ने सीएम केजरीवाल को दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति यानी शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शनिवार (13 जनवरी 2024) को चौथा समन जारी किया। इसमें ED ने सीएम केजरीवाल से 18 जनवरी 2024 को पेश होने के लिए कहा है।

इससे पहले ED ने अरविंद केजरीवाल को तीन बार समन जारी कर चुका है। हालाँकि, केजरीवाल एक बार भी ED के समक्ष पेश नहीं हुए। इसके पहले प्रवर्तन निदेशालय ने सीएम केजरीवाल को समन जारी कर 2 नवंबर, फिर 21 दिसंबर और फिर 3 जनवरी को पूछताछ के लिए बुलाया था। हालाँकि, वे एक बार भी ईडी के समक्ष पेश नहीं हुए।

दरअसल, 3 जनवरी 2024 की पूछताछ में सीएम केजरीवाल ने ये कहकर आने से इनकार कर दिया कि जाँच एजेंसी द्वारा उनको जारी किया समन अवैध है। उन्होंने आरोप लगाया था कि ईडी का एकमात्र मकसद उन्हें गिरफ्तार करना था। आम आदमी पार्टी ने पूछा था कि ईडी अरविंद केजरीवाल किस हैसियत से बुला रही है- आरोपित की हैसियत से या गवाह की हैसियत से।

इससे पहले दिल्ली के सीएम ने 2 नवंबर और 21 दिसंबर को भी ED सामने पेश होने से इनकार कर दिया था। पहले समन पर 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों में मशगूल होने की बात कह ईडी के सामने पेश नहीं हुए थे। दूसरे समन पर वो 10 दिवसीय विपश्यना ध्यान शिविर के लिए रवाना हो गए थे। उस दौरान केजरीवाल ने इसे ‘अवैध’ और ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया था।

केजरीवाल ने कहा था, “मैं हर कानूनी समन स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ। हालाँकि, ईडी का यह समन भी पिछले समन की तरह अवैध और राजनीति से प्रेरित है। समन वापस लिया जाए। मैंने अपना जीवन ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ बिताया है। मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।” उन्होंने कहा था कि भाजपा उन्हें लोकसभा चुनाव में प्रचार करने से रोकने के लिए गिरफ्तार करना चाहती है।

ईडी के समन को लेकर आप दावा करती रही है कि पूछताछ के बहाने एजेंसी सीएम केजरीवाल को गिरफ्तार करने की फिराक में है। दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज, आतिशी और पार्टी से राज्यसभा सासंद संदीप पाठक केजरीवाल की गिरफ्तार की आशंका जाहिर कर चुके हैं। AAP नेताओं का कहना है कि लोकसभा चुनाव प्रचार से पहले केजरीवाल को गिरफ्तार करने की साजिश है।

आम आदमी पार्टी की नेता जैस्मिन शाह का कहना है कि शराब घोटाले की जाँच बीते दो साल से जारी है, लेकिन अभी तक ईडी ने सबूत के तौर पर कुछ भी बरामद नहीं किया है। उन्होंने शराब घोटाले की जाँच को फर्जी बताया। शाह ने कहा कि इस केस में ईडी ने 500 से अधिक गवाहों से पूछताछ की है और 1,000 से अधिक छापे मारे हैं, लेकिन अब तक एक रुपया भी बरामद नहीं हुआ।

बताते चलें कि बीते साल अक्टूबर 2023 में शराब नीति से जुड़ी कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच के तहत सीएम केजरीवाल को पहला समन जारी किया गया था। दिल्ली सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करने के बाद जुलाई 2023 में इस नीति को वापस ले लिया था। CBI ने अप्रैल 2023 में केजरीवाल से पूछताछ की थी, लेकिन एजेंसी ने उन्हें आरोपित नहीं किया था।

इधर I.N.D.I. गठबंधन के अध्यक्ष बने खड़गे, उधर बिहार सरकार के पोस्टरों से गायब हुए तेजस्वी यादव: विपक्षी बैठक से दूर रहे अखिलेश-ममता

जहाँ एक तरफ मल्लिकार्जुन खड़गे को I.N.D.I. गठबंधन का अध्यक्ष बना दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ बिहार सरकार के पोस्टर से उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ही गायब कर दिए गए हैं। नीतीश कुमार को विपक्षी गठबंधन का संयोजक नहीं बनाया गया। अब मीडिया में खबर तैर रही है कि उन्होंने खुद ही ये पद ठुकरा दिया है। हालाँकि, ये सभी जानते हैं कि इतने दिनों से नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन का संयोजक बनने के लिए लगातार हाथ-पाँव मार रहे थे।

असल में बिहार की राजधानी पटना में शिक्षक नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दूसरे चरण की तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं, जिसे लेकर जगह-जगह बैनर-पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें CM नीतीश कुमार की तस्वीर तो है, लेकिन तेजस्वी यादव को गायब कर दिया गया है। जबकि सोशल मीडिया पर RJD और इसके समर्थक तेजस्वी यादव को ही बिहार में शिक्षकों की नियुक्ति का क्रेडिट देते रहे हैं। पटना में लगाए गए होर्डिंग्स में बिहार में 10 लाख नौकरियों के वादे को पूरा किए जाने का दावा किया जा रहा है।

इन पोस्टरों में ‘रोजगार का मतलब नीतीश कुमार’ लिखा है। वहीं तेजस्वी यादव का नाम ‘विशिष्ट अतिथि’ में डाल दिया गया है। जदयू नेता छोटू सिंह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सब कुछ नीतीश कुमार ही कर रहे हैं तो उनका नाम लिख कर क्या गलत किया गया है। उधर शनिवार (13 जनवरी, 2024) को I.N.D.I. गठबंधन की वर्चुअल बैठक में कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को विपक्षी गठबंधन का अध्यक्ष भी चुन लिया गया है।

हालाँकि, इस बैठक में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और TMC की मुखिया ममता बनर्जी मौजूद नहीं रहीं। उन्हें इस निर्णय के बारे में सूचित कर दिया गया है। जदयू नेता संजय झा का कहना है कि नीतीश कुमार ने संयोजक पद ठुकराते हुए किसी कॉन्ग्रेस नेता को ये पद देने की पेशकश की है। इस बैठक में सीट शेयरिंग के अलावा राहुल गाँधी की आगामी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ पर भी चर्चा हुई। शरद पवार और MK स्टालिन जैसे नेता भी इस बैठक में शामिल हुए।

गैंगस्टर की प्रेमिका, होटल मालिक संग लिव-इन: हत्या के 11 दिन बाद नहर में तैरती मिली मॉडल की लाश, जानिए कौन थी दिव्या पाहुजा

मॉडल दिव्या पाहूजा की हत्या के 11 दिन बाद उनका शव बरामद हो गया है। शव ठिकाने लगाने वाले बलराज गिल की निशानदेही पर उसे टोहना के नहर से बरामद किया गया है। वो बलराज गिल ही था, जिसने बीएमडब्ल्यू कार से दिव्या के शव को ठिकाने लगाया था और फिर विदेश जाने की फिराक में कोलकाता एयरपोर्ट तक पहुँच गया था। वहीं से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और ट्रांजिट रिमांड पर लेकर गुरुग्राम लाई।

11वें दिन मिला शव, पंजाब से बहकर हरियाणा पहुँचा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिव्या पाहूजा का शव बलराज गिल ने 3 जनवरी 2024 को पटियाला के पास भाखड़ा नहर में फेंका था। शव इतने दिनों तक बहता रहा और आखिरकार हरियाणा टोहना नहर तक आ गया था। पुलिस ने शव की तलाश के लिए पंजाब से हरियाणा तक उस रूट पर तफ्तीश की, जिसके बाद ही इस शव को बरामद किया गया है। पुलिस की 6 टीमें दिव्या का शव तलाश रही थीं।

कोलकाता में गिरफ्तार हुआ बलराज गिल

दिव्या पाहूजा की गुरुग्राम के ‘द सिटी पॉइंट होटल’ में 2 जनवरी 2024 की शाम को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसका बॉयफ्रेंड अभिजीत ही उस होटल का मालिक है। अभिजीत ने ही बलराज गिल को बुलाकर दिव्या के शव को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। मोहाली के रहने वाले बलराज ने अपने साथी रवि बंगा के साथ मिलकर शव को बीएमडब्ल्यू कार में डाला और नहर में फेंक दिया।

शव को फेंकने के बाद उन्होंने बीएमडब्ल्यू कार को पाटियाला बस स्टैंड के पास खड़ी कर वहाँ से उदयपुर फरार हो गए। उदयपुर से लौटकर दोनों ट्रेन से चंडीगढ़ से हावड़ा स्टेशन पहुँचे थे। यहाँ से दोनों अलग हो गए। बलराज विदेश भागना चाहता था। हालाँकि, पुलिस ने उसे कलकत्ता एयरपोर्ट से गिरफ्तार हो गया। वहीं, रवि बंगा अभी भी फरार है। इस मामले में अभिजीत और मेघा पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं।

हाल ही में जेल से छूटी थी दिव्या पाहूजा

दिव्या पाहूजा गुरुग्राम में मॉडल थी। वो एक गैंगस्टर संदीप गडोली से संपर्क में आ गई थी। दोनों मुंबई में थे, तभी साल 2016 में संदीप गाडोली का एनकाउंटर हो गया था। गैंगस्टर संदीप दिल्ली एनसीआर में बहुत सारे गैर-कानूनी कामों में जुटा हुआ था। वो अवैध शराब, वसूली और सट्टेबाजी जैसे काम करता था। उस पर पुलिस ने ईनाम भी रखा था। संदीप गडोली तक पुलिस दिव्या पाहूजा के जरिए ही पहुँची थी।

जानकारी के मुताबिक, इस मामले में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एनकाउंटर करने वाले पुलिस वालों के साथ ही दिव्या को भी गिरफ्तार कर लिया था। दिव्या 6 माह पहले 25 जुलाई को ही जेल से छूटी थी। इसके बाद वह जेल में बंद गैंगस्टर बिंदर गुर्जर के संपर्क में आई। बिंदर गुर्जर के कहने पर दिव्या होटल मालिक अभिजीत से मिली और फिर अभिजीत के साथ साथ लिव इन में रहने लगी।

पुलिस से पूछताछ में अभिजीत ने स्वीकार की है कि वह 27 वर्षीय दिव्या के साथ रिलेशनशिप में था। दोनों के बीच संबंध भी बने थे। इस दौरान दिव्या ने अभिजीत के साथ अंतरंग पलों का वीडियो बना लिया था और पैसों के लिए उसे ब्लैकमेल करती थी। इस ब्लैकमेल से तंग आकर अभिजीत ने होटल के कमरे में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी थी।

‘सुशासन बाबू’ के बिहार में ठंड से बच्चे बेहाल: एक छात्र की मौत, कई छात्र-छात्राएँ और शिक्षिकाएँ बेहोश होकर गिरीं, बेंच जलाकर मिड डे मिल पकाने का वीडियो वायरल

बिहार के सुशासन बाबू यानी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इंडी गठबंधन को जोड़ने में इस कदर मशगूल है कि उन्हें नौनिहालों की फिक्र तक नहीं है। राज्य में बच्चों के पोषण वाला मिड डे मील पकाने के लिए स्कूलों में जलावन तक का इंतजाम नहीं है। वहीं, ठंड के नाकाफी इंतजामों से छात्र और शिक्षक बेहोश हो रहे हैं। ठंड की चपेट में आने से एक दर्जन से अधिक बच्चे बीमार पड़ गए हैं।

ये वाकये बिहार की राजधानी पटना और चंपारण जिले के हैं। बात पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी से शुरू करते हैं। हम सब जानते हैं कि सरकारी स्कूलों में अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर तबके के बच्चे ही जाते हैं। मोतिहारी का चकिया नगर परिषद क्षेत्र के बौधी मंदिर का आर्दश राजकीय मध्य विद्यालय भी इससे अछूता नहीं है।

इस कड़कड़ाती ठंड में शासन-प्रशासन ने वहाँ स्कूल तो खुले रखे, लेकिन इस जानलेवा सर्दी से बच्चों को बचाने के कोई इंतजाम नहीं किए। नतीजा ये हुआ कि एक छात्र की मौत हो गई और कई छात्र बेहोश होकर गिर गए। कक्षा 6 का छात्र मनीष कुमार ठंड के प्रकोप की वजह से प्रार्थना के वक्त थरथरा कर जमीन पर गिर गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।

वहीं, मोतीहारी के ही रामगढ़वा में राजकीय प्राथमिक विद्यालय चिकनी में ठंड की वजह से एक शिक्षिका स्कूल में बेहोश हो गई। गाँव वालों ने अलाव जलाकर और तेल मालिश करके उसकी जान बचाई। रामगढ़वा के ही एक अन्य स्कूल में एक छात्र ठंड लगने से बेहोश हो गया। राजकीय मध्य माध्यमिक विद्यालय घरियारीचक का 7वीं का 12 वर्षीय छात्र तसीम रजा बेहोश हो गया।

इसी तरह की कई घटनाएँ बिहार के अन्य जिलों से भी आई हैं। सीवान, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, बेगूसराय, वैशाली, बक्सर आदि के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राएँ ठंड के कारण बेहोश होकर गिर रहे हैं। बिहार में ठंड का प्रकोप बढ़ने के बावजूद सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया, जिसका परिणाम बच्चों को भुगतना पड़ा।

हालाँकि, इस तरह की घटनाओं के सामने आने के बाद बिहार सरकार की नींद अब खुली है। सरकार ने निर्देश पर जिला प्रशासन ने 16 जनवरी 2024 तक विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है। जहाँ स्कूलों में ठंड लगने से बच्चे बेहाल हैं, वहीं दूसरी तरफ छात्रों के मिड डे मील पकाने के लिए लकड़ी का इंतजाम भी नहीं है।

सोशल मीडिया पर पटना जिले के बिहटा खंड के कोरहर स्थित अपग्रेडेड मिडिल स्कूल में छात्रों के मिड डे भोजन पकाने के लिए बेंच जलाए जाने का वीडियो वायरल हुआ है। इसके बाद शिक्षा विभाग ने जाँच के आदेश दिए हैं। इस वीडियो में रसोइया छात्रों के लिए खाना पकाने के लिए स्कूल की बेंचों को जलाते नजर आ रहे हैं।

रसोइया ने इसके लिए स्कूल की शिक्षिका सविता कुमारी के सिर दोष मढ़ा है और कहा है कि उसे फँसाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, शिक्षिका ने दावा किया कि स्कूल के प्रिंसिपल के कहने पर बेंचों को जलाने का आदेश दिया गया था। दूसरी तरफ प्रिंसिपल प्रवीण कुमार रंजन ने कहा कि यह एक मानवीय भूल थी। उनके मुताबिक, रसोइये पढ़े-लिखे नहीं थे और बहुत ठंड का दिन होने की वजह से उन्होंने बेंचें जला दी।

उन्होंने आगे कहा, “शिक्षा विभाग के आदेश पर हम मिड डे मील बनाने के लिए रसोई गैस का इस्तेमाल करते हैं। उस दिन बाहर ठंड बहुत होने से रसोइयों ने लकड़ी के लिए बेंच का इस्तेमाल किया।” इस घटना पर ब्लॉक शिक्षा पदाधिकारी निवेश कुमार ने कहा कि वीडियो की जाँच की जा रही है और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

‘ममता बनर्जी, तुमने चंद मुस्लिम वोटों की खातिर…’: VHP की चेतावनी, जिन साधुओं को निर्वस्त्र कर पीटा उन्हें ही बदनाम करने में जुटी TMC

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में मकर संक्रांति स्नान के लिए गंगासागर जा रहे साधुओं को भीड़ ने निर्वस्त्र कर के पीटा। भाजपा ने इस घटना में राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) का हाथ होने की बात कही है। वहीं टीएमसी ने उन साधुओं को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि भाजपा इस पूरी घटना को गलत तरीके से पेश कर रही है, बदनाम कर रही है। TMC नेता शशि पंजा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के ये आरोप मढ़े हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा जिम्मेदारियों से भागती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने 3 साधुओं को इसीलिए पीटा क्योंकि आरोप है कि वो साधु 3 लड़कियों का अपहरण कर रहे थे। शशि पंजा ने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने वहाँ पहुँच कर उन लड़कियों को बचाया। उन्होंने कहा कि इसके बाद पुलिस उन साधुओं को लेकर थाने गई, अभी भी जाँच जारी है। वहीं SP अभिजीत बनर्जी ने कहा कि गौरांगडीह के पास गाड़ी में सवार इन साधुओं ने काली मंदिर पूजा के लिए जा रही महिलाओं से रास्ता पूछा था।

उन्होंने कहा कि भाषा समझ में न आने के कारण कुछ ग़लतफ़हमी हुई और उन महिलाओं को ऐसा लगा कि ये साधु उनका पीछा कर रहे हैं। इसके बाद वहाँ भीड़ पहुँच गई जो उन साधुओं को लेकर दुर्गा मंदिर गई और उनकी गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया। काशीपुर थाने की पुलिस ने बीच-बचाव किया। वहीं विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने भी इस घटना को लेकर आक्रोश जताया है। संगठन के अंतरराष्ट्रीय जॉइंट सेक्रेटरी ने कहा कि TMC के गुंडों द्वारा साधुओं पर किया गया हमला निंदनीय है, अस्वीकार्य है।

उन्होंने कहा, “बंगाल वो धरती है जहाँ कण-कण में माँ काली की पूजा की जाती है, जहाँ चैतन्य महाप्रभु ने जन्म लिया था, जहाँ बंकिम चंद्र चटर्जी, रवीन्द्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद घोष जैसे महान संत हुए है। उसी धरती पर ममता बनर्जी ने चंद मुस्लिम वोटों की खातिर जो हिन्दू विरोधी माहौल बना दिया है वो दुर्भाग्यपूर्ण है। काली पूजा पर हमले होते हैं, मूर्तियों का अपमान किया जाता है, हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया जाता है, ज़िंदा जला दिया जाता है। ममता बनर्जी, तुम्हारे इस अत्याचार को देश की जनता स्वीकार नहीं करेगी। हम इसका विरोध करते हैं।”

सुरेंद्र जैन ने आगे कहा कि ममता बनर्जी को वो चेतावनी देना चाहती हैं कि वो अविलंब अपनी पार्टी के गुंडों द्वारा किए गए इस अपराध के लिए अक्षम्य क्षमा याचना करें, पूरे देश से माफ़ी माँगें वर्ण VHP को उनके खिलाफ पूरे देश में आंदोलन करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “आज पूरे देश की जनता तुम्हें जवाब देगी, लेकिन तुम्हें ये समझ लेना चाहिए कि तुम्हारी इस करतूत को देश स्वीकार नहीं करेगा।” बता दें कि अप्रैल 2020 में महाराष्ट्र के पालघर में भीड़ ने 3 साधुओं और उनके एक ड्राइवर को मार डाला था, पुरुलिया की घटना के बाद जिसकी यादें ताज़ा हो गई हैं।